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पेट कम करने के लिए 13 योगासन

 
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क्या आपकी भी तोंद निकल आई है? क्या पेट के बल झुकने में तकलीफ होती है? क्या चलते हुए या सीढ़ियां चढ़ते हुए आपकी भी सांस फूल जाती है? अगर ऐसा है, तो आप अधिक वजन या फिर कहें मोटापे की गिरफ्त में आ चुके हैं। कई वैज्ञानिक शोधों में इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि मोटापे से ग्रस्त शख्स को डायबिटीज, ह्रदय रोग, स्ट्रोक, आर्थराइटिस, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। घबराइए नहीं, हमारा मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि सचेत करना है।  इस लेख में हम आपकी इसी समस्या का हल लेकर आए हैं। यहां हम पेट कम करने के लिए योगासन  के बारे में बात करेंगे, जिनके नियमित अभ्यास से न सिर्फ मोटापे को कम किया जा सकता है, बल्कि अन्य बीमारियों से भी छुटकारा मिल सकता है ।

पेट कम करने के लिए योगासन – 
जैसे हर योग को करने की एक विधि होती है, उसी प्रकार सभी योगासन को एक क्रम में करना जरूरी होता है। योग की शुरुआत खड़े होकर किए जाने वाले आसनों से की जाती है। इसके बाद बैठकर और फिर लेटकर योगासन किए जाते हैं। हम भी उसी क्रम में आपको योगासन बता रहे हैं और आप इसी क्रम में इन्हें करेंगे, तो अधिक लाभ होगा। पेट कम करने के लिए योगासन  इस प्रकार हैं :

1. ताड़ासन
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योगाभ्यास शुरू करने से पहले ताड़ासन करना जरूरी होता है। पेट कम करने के लिए योगासन की शुरुआत भी इसी से की जाती है। इसे करने से पूरे शरीर में खिंचाव महसूस होता है और ऊर्जा आती है। रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले सीधा खड़े हो जाएं और अपनी टांगों, कमर व गर्दन को सीधा रखें।
  • अब हाथों की उंगुलियों को आपस में फंसाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और गहरी सांस भरते हुए पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें। हथेलियां आसमां की दिशा में होनी चाहिएं।
  • साथ ही एड़ियों को भी ऊपर उठा लें। पूरे शरीर का संतुलन पंजों पर आ जाना चाहिए।
  • इस दौरान पंजों से लेकर ऊपर हाथों तक खिंचाव महसूस करें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे पहली वाली स्थिति में आ जाएं।
  • इस तरह के कम से कम दो-तीन चक्र एक बार में किए जा सकते हैं।
विविधता : ताड़ासन के साथ आप तिर्यक ताड़ासन भी कर सकते हैं। इसमें पंजों के बल खड़ा नहीं हुआ जाता और हाथों को ऊपर करके कमर के हिस्से से सांस लेते हुए पहले दाएं और फिर बाएं झुका जाता है।

लाभ :
  • इस योगासन को करने से पूरे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है।
  • शरीर सुडौल होता है और प्राकृति आकार में आने लगता है।
  • छह से 20 वर्ष तक के लोगों को यह आसान जरूर करना चाहिए। इससे कद बढ़ने में मदद मिल सकती है।
  • यह योगासन पीठ दर्द के लिए बेहत उत्तम है। साथ ही मांसपेशियों, घुटनों व पैरों में होने वाले दर्द से भी आराम मिलता है।
  • ताड़ासन के नियमित अभ्यास से एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है।
सावधानियां :
  • जिनका रक्तचाप कम हो, उन्हें यह योगासन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को इसे करने से परहेज करना चाहिए।
  • अगर आपके घुटनों में तेज दर्द हो रहा है, तो आप यह आसन न करें।
  • जो पहली बार यह योगासन कर रहे हैं, वो पंजों के बल इसे करने से बचें। साथ ही जिन्हें ह्रदय संबंधी कोई समस्या है या फिर पैरों की नसों में सूजन और चक्कर आते हैं, वो भी इसे न करें।
2. त्रिकोणासन
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इस आसन को करते समय शरीर त्रिकोण जैसी मुद्रा में आ जाता है, इसलिए इसी त्रिकोणासन कहते हैं। त्रिकोण का अर्थ होता है तीन कोण वाला और आसन का अर्थ मुद्रा से होता है।

कैसे करें :
  • आप दोनों पैरों के बीच करीब दो फुट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को शरीर के साथ सीधे सटाकर रखें।
  • अब अपनी बांहों को शरीर से दूर कंधे तक फैलाएं और सांस लेते हुए दाएं हाथ को ऊपर ले जाते हुए कान से सटा लें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं ओर झुकें। इस दौरान दायां हाथ कान से सटा रहना चाहिए और घुटनों को न मोड़ें।
  • अब दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने का प्रयास करें। साथ ही बाएं हाथ से बाएं टखने को छूने का प्रयास करें।
  • करीब 10-30 सेकंड इसी मुद्रा में रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
  • फिर सांस लेते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  • इसी तरह से दाईं ओर भी करें।
  • आप इस तरह के तीन से चार चक्र कर सकते हैं।
लाभ :
  • कमर व पेट की चर्बी कम करने के योगासन के रूप में यह सबसे उत्तम है।
  • ताड़ासन की तरह इसे भी करने से पूरे शरीर में खिंचाव महसूस होता है।
  • जहां एक तरफ इसे करने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, वहीं फेफड़े भी स्वस्थ होते हैं और बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।
  • इसे करने से कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।
  • साथ ही यह कब्ज व एसिडिटी जैसी समस्याओं के लिए बेहतरीन आसन है।
  • यह योग शरीर की मांसपेशियों को लचीला बनाता है और तनाव को भी कम कर सकता है।
सावधानियां :
  • रक्तचाप अधिक या कम होने पर इस योगासन को न करें।
  • जिन्हें कमर में तेज दर्द है या फिर स्लिप डिस्क की समस्या है, वो भी इसे न करें।
  • सिर चकराने या फिर गर्दन और पीठ में दर्द होने पर भी इससे दूरी बनाएं।
  • अगर आपको अधिक एसिडिटी है, तो इसे न करें।
  • साथ ही जिन्हें साइटिका व स्लिप डिस्की की समस्या है, वो इसे न करें।
3. पार्श्वकोणासन
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पार्श्व का मलतब बगल होता है। यह योग करते समय शरीर पार्श्व की मुद्रा बनाता है, इसलिए यह पार्श्वकोणासन कहलाता है। इसे नियमित रूप से करने से कई शारीरिक समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं और फिर दोनों पैरों के बीच करीब तीन से चार फुट की दूरी बना लें।
  • इसके बाद दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण में धुमाएं।
  • फिर गहरी सांस भरते हुए बाहों को शरीर से दूर फैलाकर कंधे की सीध में ले आएं।
  • अब सांस छोड़ते हुए दाएं घुटने को 90 डिग्री के कोण तक मोड़ते हुए दाईं और झुकेंगे।
  • अब दाएं हाथ को दाएं पैर के पीछे जमीन पर रखने का प्रयास करें। अगर हाथ को जमीन पर रखने में परेशानी हो, तो जमीन को उंगलियों से छूने का प्रयास करें।
  • वहीं, बाएं हाथ को 60 डिग्री में लाते हुए कान के पास लाने का प्रयास करें और बाएं हाथ की उंगुलियों को देखने का प्रयास करें। इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहे।
  • यथासंभव इसी स्थिति में रहे और फिर सांस लेते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इसके बाद बाईं तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं।
लाभ :
  • इस आसन की मदद से शरीर के वजन को आसानी से कम किया जा सकता है।
  • पेट की चर्बी कम करने के योगासन में यह सबसे बेहतर है।
  • यह योगासन कमर व जांघों की चर्बी कम करने में मदद करता है।
  • पार्श्वकोणासन पाचन तंत्र को बेहतर कर कब्ज व एसिडिटी से भी राहत दिलाता है।
  • इससे टखने व घुटने मजबूत होते हैं।
सावधानियां :
  • अगर आपके घुटनों व कमर में तेज दर्द है, तो इसे न करें।
  • साइटिका से ग्रस्त मरीज किसी प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसे करें।
4. पादहस्तासन
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यह दो शब्दों के योग पद यानी पैर और हस्त यानी हाथों के योग से बना है। यह योग करते समय हाथों को जमीन पर पैरों के साथ सटा कर रखा जाता है, जिस कारण इसे पादहस्तासन कहा जाता है।
कैसे करें :
  • योग मैट पर पैरों को आपस में जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को भी सीधा रखें।
  • अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और दोनों हथेलियों को पैरों के पास जमीन के साथ सटाने की कोशिश करें।
  • साथ ही अपने माथे को घुटनों के साथ लगाने का प्रयास करें।
  • इस अवस्था में सांस को रोककर रखें। ध्यान रहे कि कमर से नीचे का हिस्सा मुड़ना नहीं चाहिए।
  • कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहें और फिर सांस लेते हुए ऊपर उठें और हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे झुकने का प्रयास करें।
  • इसके बाद फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। करीब तीन से चार बार ऐसा करें।
लाभ :
  • यह आसन करते हुए पेट व उसके आसपास दबाव पड़ता है, जिससे वहां जमा चर्बी कम होने लगती है।
  • पीठ, कूल्हों और जांघों में खिंचाव महसूस होता है, जिस कारण वह मजबूत होते हैं।
  • सिरदर्द व अनिद्रा जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और मानसिक तनाव भी कुछ हद तक कम होता है।
  • पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है, जिस कारण गैस, एसिडिटी व कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
  • पेट कम करने के योगासन के रूप में इसे जरूर करें।
सावधानियां :
  • अगर आपकी पीठ में दर्द है या चोट लगी है, तो इस आसन को न करें।
  • यह करते समय अगर पीठ में दर्द होने लगे, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
  • जिन्हें ह्रदय संबंधी कोई समस्या, हर्निया व पेट में सूजन है वो इसे न करें।
  • गर्भावस्था में भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
5. सूर्य नमस्कार
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शरीर को चुस्त व तंदरुस्त रखने के लिए इससे बेहतर और कोई योग नहीं हो सकता। यह ऐसा योगासन है, जिसे करते समय शरीर के सभी अंग एक साथ काम करते हैं। पेट कम करने के योगासन के क्रम में यह बेजोड़ है।

कैसे करें :
  • प्रणाम आसन : योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को छाती के पास नमस्कार की मुद्रा में रखें।
  • हस्तउत्तानासन : अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाकर कान के पास सटाएं और पीछे झुकने का प्रयास करें।
  • पादहस्तासन : इसके बाद सांस छोड़ते हुए पेट के बल झुकें और हथेलियों को जमीन पर सटाने की कोशिश करें। साथ ही घुटनों को बिना मोड़े माथे को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • अश्व संचालनासन : फिर सांस लेते हुए दाएं पैर पर बैठ जाएं और बाएं पैर को पीछे ले जाएं। इस मुद्रा में बायां घुटना जमीन पर लगाएं।
  • पर्वतासन : अब सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और शरीर को बीच से उठाएं। इस मुद्रा में अपनी एड़ियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें और बाजुओं को सीधा रखें।
  • अष्टांगासन : इसके बाद सांस लेते हुए जमीन पर लेट जाएं। इस अवस्था में सिर्फ ठुड्डी, छाती और घुटने ही जमीन से स्पर्श करेंगे। पेट और कूल्हों को उठाकर रखें।
  • भुजंगासन : अब बिना सांस लिए या छोड़े ही कमर से ऊपर के हिस्से को नाभी तक उठाएं। इस दौरान हथेलियां जमीन से सटी रहेंगी।
  • पर्वतासन : इसके बाद सांस छोड़ते हुए फिर से शरीर को बीच से उठाएंगे और एड़ियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करेंगे। साथ ही बाजुओं को सीधा रखेंगे।
  • अश्व संचालनासन : फिर सांस लेते हुए बाएं पैर को आगे लाकर उसके बल बैठ जाएं और दाएं पैर को सीधा रखें। दाएं घुटने को जमीन से सटाएं।
  • पादहस्तासन : अब सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी आगे ले आएं और हथेलियों को जमीन से व माथे को घुटनों से सटाकर रखें।
  • हस्तउत्तानासन : फिर सांस लेते हुए हाथों व शरीर को ऊपर उठाएं और पीछे झुकने का प्रयास करें।
  • प्रणाम आसन : अंत में सीधे होते हुए नमस्कार की मुद्रा में आ जाएं।
इस प्रकार सूर्य नमस्कार का एक चक्र पूरा हो जाएगा। आप इस तरह के एक बार में 20-25 चक्र कर सकते हैं।

लाभ :
  • सूर्य नमस्कार करने से मोटापा कम होता है और जिन्हें मोटापा नहीं है, उनका वजन संतुलित रहता है।
  • यह पाचन तंत्र को ठीक करने का सबसे बेहतरीन योगासन है।
  • इसे करने से शारीरिक व मानसिक तनाव कम हो जाता है।
  • यह योगासन पूरे शरीर को सक्रिय कर देता है।
  • अगर आपके पास समय की कमी है, तो इस अकेले योगासन को करने से एक बार में ही सभी अंगों की कसरत हो जाती है।
  • शरीर में अगर कहीं भी दर्द हो रहा है, तो वह सूर्य नमस्कार करने से दूर हो जाता है।
सावधानियां :
  • अगर आपको स्लिप डिस्की है या फिर घुटनों में किसी प्रकार का दर्द या परेशानी है, तो इस योगासन को न करें।
  • इसे करते समय अपनी सांसों पर पूरा ध्यान दें। अगर आप गलत तरीके से सांस लेंगे, तो फायदा होने की जगह नुकसान हो सकता है।
  • महिलाएं मासिक धर्म के समय और गर्भावस्था के दौरान इसे न करें।
  • बच्चे और उच्च रक्तचाप व ह्रदय रोग से पीड़ित मरीज विशेषज्ञों की देखरेख में ही करें।
6. अर्धचक्रासन
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पेट कम करने के योगासन की श्रेणी में यह भी खड़े होकर किया जाने वाला योग है। संस्कृत में अर्ध का मतलब होता है आधा और चक्र का मतलब पहिये से होता है। यह आसन करते हुए शरीर की मुद्रा आधे पहिये जैसी नजर आती है, इसलिए यह अर्धचक्रासन कहलाता है।

कैसे करें :
  • पैरों को आपस में सटाकर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को भी सीधा रखें।
  • अब कोहिनयों को मोड़ते हुए हथेलियों को कमर के निचले हिस्से पर रख दें।
  • फिर सांस लेते हुए जितना हो सके पीछे की तरफ झुकने का प्रयास करें।
  • जब तक हो सके इसी अवस्था में रहें और सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन को एक समय में करीब तीन से चार बार किया जा सकता है।
लाभ :
  • पेट की चर्बी कम करने के योगासन के रूप में इसे जरूर करें। इसे करने से पेट के आसपास जमा चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे वजन होता है।
  • जिन लोगों को डायबिटीज है, वो भी यह आसन कर सकते हैं। इससे शरीर में इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है।
  • यह आसन गर्दन के दर्द को दूर करता है और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव लाकर उन्हें लचीला बनाता है।
  • अगर आप कमर के दर्द से परेशान हैं और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना चाहते हैं, तो इस आसन को जरूर करें।
  • जो लोग अत्यधिक समय तक बैठकर काम करते हैं, उन्हें यह आसन करना चाहिए, ताकि कमर दर्द से आराम मिले।
सावधानियां :
  • इस आसन में पीछे झुकते समय सिर और गर्दन को झटका न दें।
  • जिन्हे स्लिप डिस्क या फिर साइटिका की समस्या है, वो किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही इसे करें।
  • यह योगासन करने के बाद आगे झुकने वाली मुद्रा न ही करें, तो बेहतर होगा।
7. चक्की चलनासन
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जिस तरह पुराने समय में चक्की को हाथों की मदद से चलाया जाता था, यह आसन भी उसी तरह किया जाता है। इसे करना मुश्किल नहीं है और कोई भी कर सकता है।

कैसे करें :
  • सबसे पहले तो योग मैट पर बैठ जाएं और पैरों को आगे की तरफ फैलाएं और सीधा रखें।
  • अब दोनों बाजाओं को कंधे की सीधाई में आगे की तरफ फैलाएं और दोनों हाथों की उंगलियों को एक-दूसरे में फंसाकर मुट्ठी बना लें।
  • फिर लंबी गहरी सांस भरते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे लेकर आएं और दाएं से बाएं की ओर घूमते हुए हाथों को सीधा रखते हुए एक गोला बनाएं।
  • हाथों के साथ-साथ कमर से ऊपर का शरीर भी दाएं-बाएं और आगे-पीछे होता रहेगा।
  • पहले यह प्रक्रिया पांच-दस बार क्लॉक वाइज और फिर पांच-दस बार एंटी क्लॉक वाइज करें।
  • कोशिश करें कि इस दौरान पैरों को स्थिर रखें और कमर से निचले हिस्से में खिंचाव महसूस करें।
लाभ :
  • इस आसन को करने से कमर, पेट और कूल्हों पर जमा अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है।
  • यह योगासन कूल्हों को लचीला और पेट की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है।
  • इसके नियमित अभ्यास से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली कठिनाओं व दर्द से राहत मिलती है।
  • महिलाओं के गर्भाशय की मांसपेशियां ठीक तरह से काम कर पाती हैं।
सावधानियां :
  • गर्भावस्था के दौरान इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • जिन्हें कम रक्तचाप की समस्या या फिर स्लिप डिस्क है, वो भी इसे न करें।
  • सिर में दर्द या फिर माइग्रेन होने पर इससे परहेज करें।
  • अगर आपका हर्निया का ऑपरेशन हुआ है, तो यह आसन न करें।
8. कपालभाति
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मनुष्य को होने वाली हर बीमारी की जड़ पेट में होती है। अगर पेट ठीक तो सब ठीक और पेट खराब, तो सेहत का गड़बड़ होना तय है। इस लिहाज से कपालभाति को मानव जाति के लिए संजीवनी माना गया है। इसे करने से पेट चमत्कारी तरीके से ठीक होता है। पेट के लिए योग  में इसे जरूर करें।

कैसे करें :
  • सबसे पहले तो सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।
  • अब आपको नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़नी हैं। सांस छोड़ते समय पेट आपका अंदर जाना चाहिए।
  • ध्यान रहे कि आपको सिर्फ सांस छोड़नी है न कि लेनी है। इस दौरान मुंह को बंद रखें। सांस लेने की प्रक्रिया खुद-ब-खुद होती है।
  • जब तक संभव हो इसे करते रहें।
  • इस तरह करीब पांच से दस राउंड कर सकते हैं।
लाभ :
  • इससे पेट की चर्बी कम होती है और वजन संतुलित होता है।
  • पाचन तंत्र सही होता है, जिस कारण पेट की समस्याएं दूर होने लगती हैं।
  • गैस, एसिडिटी व कब्ज आदि से राहत मिलती है।
  • चेहरे पर निखार आता है और बढ़ती उम्र का असर कम होता है।
सावधानियां :
  • जिन्हें उच्च रक्तचाप या फिर ह्रदय रोग हो, उन्हें कपालभाति नहीं करना चाहिए।
  • मिर्गी, हर्निया व सांस के मरीजों को भी इसे नहीं करना चाहिए।
9. उत्तानपादासन
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उत्तान का अर्थ होता है ऊपर उठा हुआ और पाद का अर्थ पैरों से होता है। इस आसन में पैरों को थोड़ा-सा ऊपर उठाया जाता है, इसलिए यह उत्तानपादासन कहलाता है। यह लेटकर किया जाने वाला महत्वपूर्ण आसन है।

कैसे करें :
योग मैट पर कमर के बल सीधा लेट जाएं और हाथों को शरीर से सटा कर रखें।
  • हथेलियों की दिशा जमीन की ओर होनी चाहिए।
  • अब लंबी गहरी सांस भरते हुए पैरों को करीब 30 डिग्री के कोण तक ऊपर उठाएंगे।
  • ध्यान रहे कि सिर को नहीं हिलाना है।
  • पैरों को इतना ही उठाना है कि वो हमें नजर न आएं।
  • करीब 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे ले आएं और विश्राम करें।
  • इस आसन को करीब तीन से चार बार करें।
लाभ :
  • यह आसन मोटापे को कम करने का बेहतरीन तरीका है।
  • इससे नाभि अपनी जगह पर रहती है और पाचन तंत्र अच्छी तरह से काम करता है।
  • इस योगासन को करते समय पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे वह मजबूत होती है।
  • इसकी मदद से जिम जाए बिना पेट के एब्स बनाए जा सकते हैं।
  • जिन्हें गैस, एसिडिटी, कब्ज व अपच आदि की शिकायत रहती है, उन्हें यह योगासन जरूर करना चाहिए।
  • इससे कमर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
सावधानियां :
  • गर्भावस्था के दौरान इसे नहीं करना चाहिए।
  • जिनके पेट का ऑपरेशन हुआ है, वो भी इससे परहेज करें।
10. पवनमुक्तासन
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लेटकर किए जाने वाले योग में अगला क्रम पवनमुक्तासन का है। इसे करते समय पेट पर बल पड़ता है। पवन का अर्थ वायु और मुक्त का अर्थ निकलने से है। इसे करने से पेट में इकट्ठा हो चुकी हवा बाहर निकलती है।

कैसे करें :
  • आप योग मैट पर कमर के बल सीधे लेट जाएं। हाथ शरीर के साथ सटे होने चाहिए।
  • पहले लंबी गहरी सांस लेते हुए दाएं पैर को मोड़ें और दोनों हाथों से घुटने को पकड़ते हुए उसे छाती से लगाने का प्रयास करें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए सिर को उठाएं और नाक को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और फिर सांस छोड़ते हुए पैर व सिर को जमीन पर ले आएं।
  • इसी तरह बाएं पैर से भी करें और फिर दोनों पैरों से एक साथ करें।
  • इस तरह के कम से कम पांच से दस चक्र कर सकते हैं।
लाभ :
  • यह आसन पेट की चर्बी को कम करके उसे समतल बनाता है।
  • इसे करने से पेट में इकट्ठा हो चुकी गैस बाहर निकल जाती है और एसिडिटी व कब्ज से भी राहत मिलती है।
  • यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। साथ ही फेफड़े भी अच्छी तरह काम करने लगते हैं।
सावधानियां :
  • अगर आपको कमर, घुटनों या गर्दन में दर्द है, तो इसे न करें।
  • वैसे तो वज्रासन को छोड़कर अन्य कोई आसन भोजन के बाद नहीं करना चाहिए, लेकिन खासकर इसे तो बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
11. धनुरासन
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जहां अन्य आसन कमर के बल लेटकर किए जाते हैं, वहीं यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है। इसके करते समय शरीर का आकार धनुष जैसा हो जाता है, जिस कारण इसे धनुरासन कहते हैं।

कैसे करें :
  • योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं और सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ने का प्रयास करें।
  • अब सांस लेते हुए सिर, छाती और जांघों को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • आप सुविधानुसार शरीर को जितना ऊपर उठा सकते हैं उठाएं।
  • अंतिम अवस्था में पहुंचकर शरीर का पूरा भार पेट के निचले हिस्से पर डालने का प्रयास करें।
  • इसके बाद दोनों पैरों के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करें।
  • कुछ देर इसी मुद्रा में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अंत में लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौट आएं।
  • एक बार में इस तरह के चार-पांच चक्र किए जा सकते हैं।
लाभ :
  • अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो इस योगासन को भी जरूर आजमाएं।
  • डायबिटीज के मरीजों को भी यह योगासन जरूर करना चाहिए। यह योगासन शरीर में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करता है।
  • अस्थमा और कमर दर्द से पीड़ित शख्स भी यह योगासन कर सकता है। उसे कुछ समय में ही सकारात्मक असर नजर आने लगता है।
  • जिन्हें बार-बार नाभि गिरने या फिर कब्ज की शिकायत रहती है, वो भी इसे कर सकते हैं।
  • थायराइड के मरीज भी यह योगासन कर सकते हैं।
सावधानियां :
  • जिन्हें तेज कमर दर्द है, उन्हें धनुरासन से परहेज करना चाहिए।
  • अगर आपको हर्निया की परेशानी है या फिर पेट में अल्सर है, तो आप यह आसन न करें।
  • साइटिका या फिर पथरी की शिकायत होने पर भी इसे न करें।
12. हलासन
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अगर इस योगासन को ठीक तरह से किया जाए, तो वजन को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस योगासन में शरीर की मुद्रा हल के समान हो जाती है, इसलिए यह हलासन कहलाता है। इसे करना थोड़ा कठिन है, इसलिए जो यह न कर पाए उसे अर्धहलासन करना चाहिए।

कैसे करें :
  • इसे करने के लिए कमर के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के साथ सटाकर रखें।
  • अब धीरे-धीरे अपने पैरों को ऊपर उठाएं और 90 डिग्री के कोण तक ले आएं।
  • अब सांस छोड़ते हुए पैरों के साथ-साथ पीठ को भी उठाएं और पैरों को पीछे ले जाते हुए अंगुठे को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • यह मुद्रा खेत में जोते जाने वाले हल के समान होती है।
  • जब तक संभव हो इसी मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं और विश्राम करें।
  • ऐसा आप तीन-चार बार कर सकते हैं।
लाभ :
  • मोटापे से छुटकारा पाने के लिए यह बेहतरीन योगासन है।
  • इसके अलावा, यह योगासन चेहरे पर निखार लेकर आता है और जिन्हें बाल झड़ने की समस्या है, उन्हें इससे राहत मिलती है।
  • कब्ज और बवासीर जैसी बीमारियों में भी यह आसन किया जा सकता है।
  • जिन्हें थायराइड व मधुमेह की समस्या है, वो भी इसे कर सकते हैं।
सावधानियां :
  • जिन्हें सर्वाइकल या फिर रीढ़ की हड्डी में कोई परेशानी है, वो इसे न करें।
  • उच्च रक्तचाप और चक्कर आने पर हलासन न करें।
  • गर्भावस्था में इस योग को करने से बचें।
  • ह्रदय रोग से पीड़ित मरीज भी इससे परहेज करें।
13. शवासन
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इसे सभी योगों के अंत में किया जाता है, ताकि शरीर शांत और स्थिर हो जाए। इसे करते समय शरीर शव के समान हो जाता है। यह भले ही देखने में आसान नजर आए, लेकिन करना उतना ही मुश्किल है।

कैसे करें :
  • सभी योगासन करने के बाद योग मैट पर कमर के बल लेट जाएं और आंखें बंद कर लें।
  • दोनों पैरों के बीच एक या दो फुट की दूरी रखें और हाथों को शरीर से थोड़ा दूर फैलाकर रखें।
  • हथेलियां ऊपर की दिशा में होनी चाहिएं।
  • अब धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें और पूरा ध्यान सांसों की गतिविधियों पर रखें।
  • फिर अपना ध्यान एक-एक करके पैरों से लेकर सिर तक के सभी अंगों पर ले जाएं और महसूस करें कि आप हर तरह के तनाव से मुक्त हो रहे हैं। शरीर के प्रत्येक अंग को आराम मिल रहा है।
कुछ देर इसी अवस्था में रहें और जब लगे कि शरीर तनाव मुक्त हो गया है और मन शांत है, तो बाएं ओर करवट लेकर हाथों का सहारा लेते हुए बैठ जाएं और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलें।

लाभ :
  • शवासन भी एक तरह का मेडिटेशन है। इसे करते हुए आपका मन एकाग्रचित्त हो जाता है।
  • तनाव को दूर करने में मदद मिलती है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है।
  • योग करने से शरीर में आई थकावट और मांसपेशियों में महसूस हो रहे खिंचाव को सामान्य करने में मदद मिलती है।
  • जो अत्यधिक चिंता करते हैं या बेचैनी महसूस करते हैं, उन्हें शवासन जरूर करना चाहिए।
सावधानियां :
वैसे शवासन कोई भी कर सकता है और इसे करने से किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए इसे किसी प्रशिक्षक की देखरेख में किया जाना चाहिए।

नोट : यहां बताए गए सभी योगासनों को किसी प्रशिक्षित योग ट्रेनर की देखरेख में ही करें।

चाहे आप शारीरिक रूप से अस्वस्थ हों या मानसिक रूप से, योग हर समस्या का इलाज है। किसी ने सही कहा है कि योग सभी से होगा और हर रोग का इलाज योग से ही होगा। साथ ही यह भी ध्यान में रखें कि योग भी तभी असर करता है, जब आप पूरे विश्वास के साथ उसे करते हैं। इसलिए, किसी अच्छे प्रशिक्षक की देखरेख में नियमित रूप से योग करें। खुद भी स्वस्थ रहें और अन्य को भी योग करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही नीचे दिए कमेंट बॉक्स में हमें यह जरूर बताएं कि योग से किस प्रकार आपके जीवन में परिवर्तन आया।


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