गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।
Showing posts with label खाद्य-पदार्थ. Show all posts
Showing posts with label खाद्य-पदार्थ. Show all posts

दालों को जब कुकर में बनाया जाता है तो क्या गलती की जाती है जिससे घर के बच्चों तक का यूरिक एसिड बढ़ जाता है ?

 
tak-ka-yoorik-esid-badh -jaata-hai

परिवार में बार बार सब का यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आ रहा था। जब नूट्रिशनिस्ट से बात की ताकि पता चल सके भोजन में किस किस्म के बदलाव किए जाएं, तब उसने दाल बनाने के सही तरीके के बारे में बताया। दाल कभी भी यूरिक एसिड नहीं बढ़ाती अगर सही तरीके से बनाई जाए। अगर दाल के गुणों का सही फायदा उठाना है तो एक छोटी सी चीज का ध्यान रखना चाहिए।

दाल को कम से कम एक घंटा जरूर भिगोना चाहिए। इससे दाल का स्वाद अधिक बढ़ कर आता है और पकाने का समय भी कम हो जाता है।
tak-ka-yoorik-esid-badh -jaata-hai-01


दाल, पानी, हल्दी और नमक को कुकर में डाल कर सीधे बंद कर नहीं पकाना चाहिए। यही वह गलती है जो यूरिक एसिड को बढ़ाती है।

पहले दाल, पानी, हल्दी, लहसुन, अदरक और नमक को कुकर में डाल कर बिना ढककन के उबाल आने देना चाहिए। जब दाल में उबाल आता है तो साथ में झाग भी आती है। उस झाग को किसी बड़े चम्मच की मदद से निकाल देना चाहिए और फिर कुकर को बंद कर दाल पकानी चाहिए। यही झाग ही यूरिक एसिड को बढ़ाती है।

पहले समय में जब कूकर नहीं थे और दाल को चूल्हे पर सगली (गोल आकार का बर्तन ) में बनाया जाता था तब झाग निकाल दी जाती थी और हो सकता है अब भी कुछ घरों में इस बात का ध्यान रखा जाता हो।
ka-yoorik-esid-badh -jaata-hai-02


दाल के छोंक में हींग और करी पत्ता का इस्तेमाल करना चाहिए। करी पत्ते का नियमित सेवन यूरिक एसिड को न केवल कम करता है बल्कि यूरिक एसिड को होने भी नहीं देता है।

आप कमेंट बॉक्स में लिख कर जरूर बताएं कि आप के यहाँ इस झाग को निकाला जाता है या नहीं।


[ Read More ]»

साइट्रिक एसिड उपयोग, फायदे और नुकसान

 
saitrik-esid

साइट्रिक एसिड, सिट्रिक एसिड या टाटरी- इसका नाम तो आपने जरूर सुना होगा। खाने-पीने की चीजों में खट्टापन लाने के लिए एडिटिव्स के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन खट्टे फलों में विशेष रूप से नींबू और चकोतरा जैसे फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड एक कमजोर एसिड है जिससे इन फलों को इनका खट्टा स्वाद मिलता है। अगर आपने कभी नींबू को चखा हो तो इसका मतलब है कि आपको साइट्रिक एसिड का स्वाद पता है। 

खट्टे फलों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले साइट्रिक एसिड को आर्टिफिशियल तरीके से मैन्यूफैक्चर भी किया जाता है और खाने-पीने की चीजों में खासकर प्रोसेस्ड फूड में इसका इस्तेमाल होता है। इसके अलावा क्लीनिंग एजेंट के तौर पर, दवाइयों में और पोषक तत्वों वाले सप्लिमेंट्स के तौर पर भी साइट्रिक इस्तेमाल किया जाता है। साइट्रिक एसिड युक्त दवाइयां किडनी में स्टोन जैसी सेहत की समस्याएं को दूर करने में मदद करती हैं। निम्नलिखित खट्टे फलों में प्राकृतिक रूप से उच्च मात्रा में साइट्रिक एसिड पाया जाता है:
  •     नींबू
  •     चकोतरा (लाइम)
  •     संतरा
  •     मौसंबी
  •     बेरीज
खट्टे फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड आर्टिफिशयल या मैन्यूफैक्चर्ड साइट्रिक एसिड से अलग होता है। मैन्यूफैक्चर होने वाले साइट्रिक एसिड को टाटरी या नींबू का फूल भी कहा जाता है जो सफेद रंग का और बेहद दरदरा (चीनी से भी बारीक) कण वाला होता है। खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को खट्टा स्वाद देने के लिए इसे पानी में मिलाकर डाला जाता है। 

आप सोच रहे होंगे कि आखिर नैचरल और मैन्यूफैक्चर्ड साइट्रिक एसिड में अंतर क्या है और इसका इस्तेमाल करना आपकी सेहत के लिए अच्छा है या बुरा। तो इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि साइट्रिक एसिड क्या है, इसका उपयोग कहां और कैसे होता है और यह सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह।

साइट्रिक एसिड को साल 1784 में पहली बार स्वीडन के एक शोधकर्ता ने नींबू के रस से प्राप्त किया था। 1900 के दशक की शुरुआत तक इस गंधहीन और रंगहीन यौगिक साइट्रिक एसिड का उत्पादन नींबू के रस से होता था लेकिन उसके बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि यह काले रंग के मोल्ड (फफूंद), एस्परगिलस निइगर, से भी बनाया जा सकता है, जो चीनी का सेवन करने पर साइट्रिक एसिड बनाता है। 

इसके एसिडिक और खट्टे-स्वाद वाली प्रकृति के कारण, साइट्रिक एसिड मुख्य रूप से फ्लेवरिंग (स्वाद बढ़ाने वाले) और प्रिजर्विंग (लंबे समय तक संरक्षित रखने वाले) एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है- खासकर सॉफ्ट ड्रिंक और कैंडीज में। यह दवाओं को संरक्षित करने या मजबूत बनाने में भी इस्तेमाल होता है और वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ कीटाणुनाशक के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

साइट्रिक एसिड का उपयोग -
खाने-पीने की चीजों में, दवाइयों में, व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों में और सफाई से जुड़े उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला साइट्रिक एसिड कृत्रिम या मैन्यूफैक्चर्ड होता है। खाद्य और पेय पदार्थ इंडस्ट्री कृत्रिम साइट्रिक एसिड के अनुमानित 70% का उपयोग करती है, दवा और पूरक आहार 20% का उपयोग करते हैं और बाकी बचे 10% कृत्रिम साइट्रिक एसिड का इस्तेमाल सफाई और कीटाणुनाशक एजेंटों में किया जाता है। इस प्रकार के साइट्रिक एसिड का उपयोग निम्नलिखित चीजों में होता है:

साइट्रिक एसिड का उपयोग खाद्य पदार्थों में - 

साइट्रिक एसिड को अक्सर पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स में मिलाया जाता है क्योंकि यह डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करता है। 

अगर सेब को काटते ही उसका रंग भूरा होने लगे तो ऐसे होने से रोकने में भी साइट्रिक एसिड आपकी मदद कर सकता है यानी आप कटे हुए फलों का रंग खराब होने से रोकने में भी साइट्रिक एसिड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

साइट्रिक एसिड खाद्य पदार्थों को गाढ़ा करने या उन्हें थोड़ा खट्टा स्वाद देने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि आप साइट्रिक एसिड को कुछ आइसक्रीम, जूस, शरबत या सोडे में भी एक सामग्री के तौर पर देख सकते हैं। 

साइट्रिक एसिड का उपयोग दवाइयों में -

स्किन पर लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ क्रीम्स में भी साइट्रिक एसिड होता है जो त्वचा के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है। अन्य साइट्रिक एसिड युक्त दवाइयां जिन्हें आप ओरली मुंह से लेते हैं, वे दवाइयां आपके यूरिन में एसिड की मात्रा को कम करने में मदद करती हैं। यह किडनी में स्टोने की समस्या को होने से रोकने में मदद कर सकता है। शरीर में मेटाबॉलिक एसिडोसिस (शरीर के अंदर एसिड का जमा होना) की समस्या को दूर करने के लिए भी साइट्रिक एसिड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

साइट्रिक एसिड का उपयोग सप्लिमेंट के तौर पर - 

मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल सप्लिमेंट में भी साइट्रिक एसिड हो सकता है- साइट्रेट के रूप में- क्योंकि यह अवशोषण को बढ़ाने में मदद करता है और किडनी स्टोन को भी होने से रोकता है।

साइट्रिक एसिड का उपयोग सफाई उत्पादों में - 
चूंकि साइट्रिक एसिड खारे पानी के दाग को साफ कर सकता है इसलिए आप अक्सर इसे बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट में सामग्री के तौर पर जरूर देखेंगे। अन्य घरेलू सफाई उत्पादों में भी साइट्रिक एसिड अहम घटक के रूप में शामिल होता है क्योंकि यह दाग धब्बे और दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा चूंकि साइट्रिक एसिड कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस को भी मार सकता है, इसलिए आप इसे कीटाणुओं वाले स्प्रे में पाएंगे, ऐसे उत्पादों में भी पाएंगे जो फंगस आदि को मारता है और कई बार हैंड सैनिटाइज़र में भी।

साइट्रिक एसिड के फायदे - 
1. किडनी स्टोन से बचाता है साइट्रिक एसिड
साइट्रिक एसिड- पोटैशियम साइट्रेट के रूप में- किडनी में नई पथरी के गठन को रोकता है और अगर पहले से ही पथरी बनी हुई हो तो उसे तोड़ने में मदद करता है। साइट्रिक एसिड आपके यूरिन को पथरी के गठन के लिए कम अनुकूल बना देता है जिससे किडनी में स्टोन नहीं बन पाता। किडनी में पथरी का इलाज अक्सर साइट्रिक एसिड के साथ पोटैशियम साइट्रेट के रूप में किया जाता है। हालांकि, वैसे खाद्य पदार्थ जिनमें प्राकृतिक रूप में साइट्रिक एसिड उच्च मात्रा में पाया जाता हो उनका सेवन करना- जैसे खट्टे फल- पथरी की रोकथाम के लिए फायदेमंद हो सकता है।

2. पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण
साइट्रिक एसिड खनिजों की जैवउपलब्धता को बढ़ाता है, जिससे आपका शरीर उन्हें बेहतर तरीके से अवशोषित कर सकता है। उदाहरण के लिए, कैल्शियम साइट्रेट को अवशोषण के लिए पेट में एसिड की आवश्यकता नहीं होती। कैल्शियम कार्बोनेट की तुलना में कैल्शियम साइट्रेट के कम साइड इफेक्ट्स भी होते हैं जैसे- पेट में गैस, पेट फूलना और कब्ज आदि। इसी तरह, साइट्रेट रूप में मैग्नीशियम पूरी तरह से अवशोषित होता है और मैग्नीशियम ऑक्साइड और मैग्नीशियम सल्फेट की तुलना में अधिक जैव उपलब्ध भी है। साइट्रिक एसिड जिंक सप्लिमेंट के अवशोषण को भी बढ़ाता है।

3. स्किन के लिए फायदेमंद है साइट्रिक एसिड
हमारी स्किन के ऊपरी लेयर में मौजूद मृत कोशिकाएं (डेड स्किन सेल्स) को एक्सफोलिएट करके हटाने और रोमछिद्रों को साफ करने में मदद करता है साइट्रिक एसिड। इसके अलावा यह स्किन टोन यानी त्वचा के रंग को एक समान बनाने, त्वचा को नरम और चिकना बनाने में भी मदद करने का काम करता है। साइट्रिक एसिड सभी उम्र और स्किन टाइप के लिए उचित माना जाता है।

साइट्रिक एसिड के नुकसान - 
साइट्रिक एसिड भोजन और त्वचा उत्पादों में "आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है" फिर भी, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे पूरी तरह से सुरक्षित मानने से पहले अधिक शोध की आवश्यकता है क्योंकि अगर अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो साइट्रिक एसिड के कारण निम्नलिखित नुकसान भी हो सकते हैं:
  • त्वचा में जलन - साइट्रिक एसिड जब लंबे समय तक आपकी त्वचा को छूता है, तो यह त्वचा में चुभन, सूजन या पित्ती का कारण बन सकता है। 
  • आंखों में दर्द और जलन - अगर साइट्रिक एसिड आंखों में चला जाए तो आंखों में जलन होने लगती है। यदि ऐसा हो तो आंखों को पानी से कुछ मिनट के लिए अच्छी तरह से धोएं। यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो जितनी जल्दी हो सके उन्हें उतार दें।
  • दांतों की समस्या - पेय पदार्थ और कैंडीज में मौजूद साइट्रिक एसिड दांतों के इनैमल यानी बाहरी परत को खराब कर सकता है जिस कारण आपके दांत अधिक संवेदनशील बन जाते हैं, उनमें पीलापन आ जाता है और कैविटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। 
  • पेट खराब - अगर आप साइट्रिक एसिड युक्त किसी दवा का सेवन करते हैं तो आपको जी मिचलाना या उल्टी आना जैसे दुष्प्रभाव का भी सामना करना पड़ सकता है।


[ Read More ]»

पत्तागोभी खाना हो सकता है खतरनाक, जानें इसके नुकसान और बचाव

khaana-ho-sakata


मानव शरीर में पत्तागोभी के माध्यम से टेपवर्म (फीताकृमि) के पहुंचने के मामले सामने आते ही रहते हैं। ये आंतों में विकसित होने के बाद रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच जाते हैं। कई बार मस्तिष्क में भी आ जाते हैं। ऐसे में इन्हें नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। इसके बारे में जानकारी दे रही हैं स्वाति गौड़

कई लोग चीज मंगाते समय खाने में पत्ता गोभी को हटा देने को कहते हैं। खासतौर से बर्गर, चाऊमीन, मोमोज, स्प्रिंग रोल्स आदि लेते समय कुछ लोग ऐसा ही करते हैं। शायद आप ऐसे लोगों को भी जानते होंगे, जो पत्ता गोभी का नाम सुनते ही डर सा जाते हैं। और पत्ता गोभी के नाम से ही तौबा करने लगते हैं।

आखिर क्यों डरते हैं पत्ता गोभी से-

पत्ता गोभी को लेकर ऐसे तमाम लोगों के डर की वजह वह कृमि यानी कीड़ा है, जो पत्ता गोभी के सेवन से आपके शरीर में पहुंचता है और फिर दिमाग में प्रवेश कर जाता है। दिमाग में पहुंचने पर यह सूक्ष्म कृमि आपके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। इस कीड़े को टेपवर्म यानी फीताकृमि कहते हैं।

धीरे-धीरे बढ़ता है खतरा-

भारत में टेपवर्म को लेकर खतरे की घंटी करीब 20-25 साल पहले बजनी शुरू हुई, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में कुछ मरीज सिर में तेज दर्द की शिकायत के साथ हॉस्पिटल पहुंचे। ऐसे कई मामलों में मरीज को मिर्गी की तरह दौरे भी पड़ रहे थे। इनमें से बहुतेरे रोगी बच नहीं पाए, क्योंकि रोगियों के दिमाग में ये काफी संख्या में पहुंच चुके थे। कुछेक रोगियों, जिनकी जान बच गयी, ने बाद में पत्ता गोभी खाना बिल्कुल ही बंद कर दिया था। जिन लोगों को ऐसे मामलों का पता चला, उन्होंने भी पत्ता गोभी से दूरी बनाने में ही भलाई समझी। रेस्तरां और स्ट्रीट फूड की दुकानों में बर्गर और चाऊमीन जैसी प्रचलित खाने-पीने की चीजों से लोग मुंह मोड़ने लगे। ऐसे में कुछ दुकानदारों ने पत्ता गोभी के बजाय लेट्यूस लीव्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया, जो देखने में पत्ता गोभी जैसी होती है, लेकिन उसमें टेपवर्म का खतरा नहीं होता। टेपवर्म के डर से पत्ता गोभी जैसी पोषक सब्जी से दूरी बनाना लोगों की मजबूरी हो गई और लोगों में धारणा बन गई कि इसे खाना हानिकारक हो सकता है। एशियाई देशों की तुलना में यूरोपीय देशों में इसका खतरा काफी कम देखा 

जाता है। टेपवर्म के संक्रमण के मामले पूरी दुनिया में पाए जाते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों के रखरखाव आदि के तरीकों में अंतर के कारण भारत में इसके संक्रमण के मामले कुछ ज्यादा पाए जाते हैं।

शरीर में कैसे पहुंचता है  -

हमारे घरों में पत्ता गोभी कभी सब्जी के रूप में, तो कभी कच्चे सलाद के रूप में बहुत खाई जाती है। पत्ता गोभी के जरिये टेपवर्म हमारे शरीर में दो तरह से पहुंचता है। बेहद सूक्ष्म होने की वजह से यह हमें दिखाई नहीं देता और बेहद अच्छी तरह से धोने पर भी यह कई बार पत्ता गोभी पर चिपका रह जाता है। ऐसी स्थिति में जब हम कच्ची पत्ता गोभी का सेवन करते हैं तो हमारे शरीर में इसके पहुंचने की आशंका सबसे अधिक रहती है। जब भोजन अधपका रह जाता है तो भी यह हमारे शरीर में पहुंच जाता है। इसीलिए अब भारी संख्या में लोग पत्ता गोभी से परहेज करने लगे हैं। इसे लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम भी देखे जाते हैं। 

क्या है यह कीड़ा-
यह कीड़ा आमतौर पर जानवरों के मल में पाया जाता है, जो कई अलग-अलग कारणों से पानी के साथ जमीन में पहुंच जाता है। बारिश के पानी या गंदे पानी के रूप में इसके जमीन में पहुंचने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। यही वजह है कि कच्ची सब्जियों के माध्यम से हमारे शरीर में इस कीड़े के पहुंचने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। इसके अलावा संक्रमित मिट्टी के माध्यम से और ऐसा दूषित पानी, जिसमें टेपवर्म के अंडे हों, से भी इसके संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

दिमाग पर होता है हमला-
एक बार हमारे पेट में पहुंचने के बाद टेपवर्म का सबसे पहला हमला हमारी आंतों पर होता है। इसके बाद यह रक्त प्रवाह के जरिये हमारी नसों के माध्यम से हमारे दिमाग तक पहुंच जाता है। हालांकि टेपवर्म से हमारी आंतों को होने वाला संक्रमण (केवल एक या दो टेपवर्म का संक्रमण) आमतौर पर घातक नहीं होता, जबकि हमारे दिमाग पर इसके हमले के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके लार्वा से होने वाला संक्रमण एक गंभीर समस्या बन जाती है।

दरअसल, टेपवर्म से होने वाले संक्रमण को टैनिएसिस कहा जाता है। टेपवर्म की तीन मुख्य प्रजातियां टीनिया सेगीनाटा, टीनिया सोलिअम और टीनिया एशियाटिका होती हैं। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह कीड़ा अंडे देना शुरू कर देता है। इसके कुछ अंडे हमारे शरीर में भी फैल जाते हैं, जिससे शरीर में अंदरूनी अंगों में घाव बनने 
लगते हैं।  

कैसे फैल सकता है संक्रमण -
निजी साफ-सफाई का ध्यान न रखने वाले लोग वैसे भी किसी न किसी प्रकार के संक्रमण से ग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में जरा सा भी दूषित पदार्थ आपके शरीर को संक्रमित कर सकता है। किसी पालतू पशु के टेपवर्म के संपर्क में आने से भी संक्रमण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खासतौर से ऐसी जगहों पर, जहां पशुओं और मानव के मल का उचित ढंग से निपटारा न किया जाता हो, खतरा अधिक होता है। कच्चा या अधपका मांस खाने से इसके संक्रमण की आशंका सबसे अधिक मानी जाती है, क्योंकि मीट को ठीक से न पकाए जाने पर उसमें उपस्थित लार्वा या अंडे जीवित रह जाते हैं।





[ Read More ]»

भुजिया या उसना चावल के फायदे और नुकसान

 
chaaval-ke-phaayade

आपने भुजिया चावल के बारे में सुना होगा। जिसे धान (छिलके सहित चावल) को भिगोने उसे दोबारा फिर आंशिक रूप से उबालने के बाद, उसे सुखाकर जो चावल निकाला जाता है, उसे भुजिया या उसना  चावल  कहते है।
इसके बाद उस को सुखा कर उस की कुटाई के जाती है।  इस प्रक्रिया की वजह से भूसी की परत चावल पर चिपक जाती है. धान के छिलके में एवं भूसी में उपस्थित विटामिन बी चावल के कण में अवशोषित कर लिया जाता है। चावल के कण में उपस्थित स्टार्च(कार्बोहायड्रेट) आंशिक रूप से पक भी जाता है जिसके कारण चावल के कण थोडे पारदर्शी हो जाते हैं।  उसन देने के बाद कुटाई करने से चावल के कण टूटते भी नहीं हैं।  ब्राउन राइस की तरह इसमें भी रेशे की मात्र अधिक होती है, पकने के बाद दाने आपस में चिपकते नहीं हैं और खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। उसन देने की वजह से इस चावल की खुशबू बदल जाती है और यदि शुरू से इस को खाने की आदत न हो तो बहुत से लोगों को यह पसंद नहीं आता।  यह प्रक्रिया पूरे भारत में सदियों से अपनाई जाती रही है और आज भी अपनाई जाती है। अधिकांश भुजिया चावल का उपयोग पूर्वी भारत में अधिक किया जाता है। 

भुजिया चावल का उपयोग  -

  • भुजिया चावल का उपयोग पकाकर खाने में किया जाता  है। पकने के बाद दाने आपस में चिपकते नहीं हैं और खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। उसन देने की वजह से इस चावल की खुशबू बदल जाती है और यदि शुरू से इस को खाने की आदत न हो तो बहुत से लोगों को यह पसंद नहीं आता। भुजिया चावल मधुमेह रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं,क्योकि इससे शुगर नहीं बढ़ता है। 
  • भुजिया चावल का उपयोग तरह- पकवान जैसे इसे भुनने के बाद हलुवा का उपयोग जो बहुत ही टेस्टी।   भुजिया चावल का उपयोग खिचड़ी बनाकर खाने में।  भुजिया चावल उपयोग दक्षिण भारतीय इडली एवं डोसा बनाने के भी उपयोग में करते। है 
  • छिलका सहित चावल को आग पर हल्का उबालने के बाद इसे कूटकर चुरा बनाया जाता है। जिसका उपयोग खाने  में किया जाता है। चुरा का उपयोग पोहा बनाने में भी किया जाता है जो बहुत ही  है। 
  • आग पर कड़ाही रख कर उसमे बालू डालकर गरम करने के बाद उसमे भुजिया चावल डालकर इसे भुनने कर  इससे लइया तैयार किया जाता है जिसे लोगबहुत पसंद के साथ खाते है। 

भुजिया चावल चुनने का सुझाव -

  • भुजिया चावल पहले से पैक या थोक में भी मिलाते हैं।
  • पहले से पैक किये हुए चावल खरीदने से पहले, समापन के दिनांक की जांच ज़रुर करें, क्योंकि चावल के प्राकृतिक तेल की वजह से वह लंबे समय तक रखने से के कार्य में उपयोग होता है। से खराब हो सकते हैं।
  • थोक में किसी भी अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय, इस बता का ध्यान रखें कि जिस बर्तन में चावल रखें हो, वह साफ और ढ़का हुआ हो और दुकान की बिकरी भी ज़्यादा हो जिससे ताज़े चावल मिलने की संभावना हो।
  • चाहे थोक में खरीदें या पैकेट में, इस बात का ध्यान रखें कि चावल नमी और कंकड़ से मुक्त हो।

भुजिया या उसना चावल के फायदे और नुकसान -

  • भुजिया चावल सफेद चावल से बेहतर होता है, क्योंकी इसे बनाने की प्रक्रीया से स्टार्च को पहले से ही स्थिर किया जाता है।
  • मात्रा अनुसार उसनाने से (उदाहरण के तौर पर 1 कप), में कैलरी की मात्रा कम होती है, क्योंकि उसना चावल हल्का फूला हुआ होता है और अपने आकार के अनुसार इसका वजन कम होता है।
  • बच्चों में दस्त टीक करने के लिए, यह चावल बेहतरीन होता है।
  • इसमें रेशांक की मात्रा कम होने के कारण यह पचाने में आसान होता है।
  • भुजिया चावल मधुमेह  लिए वरदान से काम नहीं यह खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। 
संग्रह करने के तरीके-
  • क्योंकि चावल में अभी भी वसा की मात्रा होती है, इसके खराब होने की ज़्यादा आशंका होती है। इस लिए, कोशिश के केवल महीने भर के लिए या ज़रुरत अनुसार उसना चावल खरीदें और उनके ताज़ा होने तक प्रयोग कर लें। लेकिन फिर भी यह इतनी जल्दी भी खराब नहीं होता है। 



[ Read More ]»

मुनक्का खाने के फायदे और नुकसान

Image SEO Friendly


अंगूर को जब विशेष रूप से सुखाया जाता है तब उसे मुनक्का कहते हैं। अंगूर के सभी गुण मुनक्का में होते हैं। मुनक्का दो प्रकार का होता है- लाल मुनक्का और काला मुनक्का। मुनक्का खाने से खून बढ़ता है और वायु दोष भी दूर होता है। इसको खाने से रक्त की वृद्धि होती है और वायु, पित्त, कफ दोष दूर होते हैं। चलिए आज हम मुनक्का के बारे में और जानते हैं। ये सूखे मेवे शरीर की ऊर्जा को बढ़ाते हैं। इनमे कैलोरी की मात्रा अधिक होती है इसलिए आमतौर पर पर्वत निवासी और पर्यटक के लिए मुनक्का खाना फायदेमंद रहता है।

मुनक्का खाने का सही समय और तरीका -

मुनक्के को रातभर पानी में भिगो के रखें और सुबह खली पेट इसका सेवन करें। मुनक्के को पानी में भिगोकर खाना स्वास्थ के लिए लाभदायक माना जाता है। ऐसा करने से आपका पेट साफ़ रहेगा और आपको दस्त जैसी समस्या नहीं होगी। मुनक्के को दूध में भिगोकर भी आप इसका सेवन कर सकते हैं।


मुनक्के की तासीर - 

मुनक्के की तासीर गरम होती है। इसलिए इसका सेवन सर्दियों के मौसम में करने की सलाह दी जाती है। मुनक्के का सेवन आप गर्मियों में भी कर सकते हैं पर नियंत्रित मात्रा में ही इसका सेवन करें। इसका अधिक उपयोग करने से आपको दस्त, बुखार आदि जैसी समस्या हो सकती है।

मुनक्का खाने के फायदे -

मुनक्का के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। एक चौथाई कप किशमिश या 60-70 किशमिश में फाइबर और पोटेशियम की काफी मात्रा होती है। किशमिश में कोई वसा नहीं होता है। मुनक्का कई आवश्यक विटामिन और खनिजों से भरी हुई होती है जो शरीर के स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होते हैं। मुनक्का खाना इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती है और इसमें सोडियम भी कम होता है। आइए जानें मुनक्का के इन लाभों के बारे में और भी बहुत कुछ।

मुनक्का के फायदे दांतो के लिए -
मुनक्के का सेवन करने से आपके दांतों की समस्या भी कम हो सकती है। मुनक्के का एक और बड़ा लाभ यह है कि इसमें एक फाइटोकेमिकल होता है जिसे ओलेनोलिक एसिड (oleanolic acid) कहा जाता है यह सभी प्रकार की दंत समस्याओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। यदि आप दाँतों की किसी भी समस्या से परेशान है तो मुनक्का खाने से ये समस्याएं ठीक हो सकती है। मुनक्का मुँह में बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है।

मुनक्का का फायदा नींद न आने के लिए - 
मुनक्के का सेवन करने से इंसोम्निया (नींद न आना) जैसी समस्या भी ठीक हो सकती है। यदि आपको नींद नहीं आती है तो आप मुनक्के का सेवन करें।

मुनक्का के फायदे हृदय के लिए - 
मुनक्का के सेवन से हार्ट की समस्या से भी निजात मिलता है। इस का नियमित सेवन हार्ट अटैक की समस्या को दूर रखने में मदद करता है। अमेरिकी कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ( American College of Cardiology) को पेश किए गए एक 2012 के अध्ययन के मुताबिक, मुनक्का उच्च रक्तचाप को कम करने में मददकरता हैं। मुनक्के में पोटैशियम की अधिक मात्रा होती है, जो उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करती है और प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले एंटीऑक्सीडेंट को बढ़ाती है। एक गिलास दूध में 8 से 10 मुनक्का उबाल लें। अब इसमें एक चम्मच घी डालकर सुबह शाम पियें। इससे ह्रदय रोगों से आराम मिलता है। 1 मुनक्के में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भुनी हुई हींग डालकर सुबह पानी के साथ लें। यह दिल में खिंचाव, बोझ, अधिक धड़कन में लाभदायक है।

मुनक्का खाने के फायदे कब्ज में - 
मुनक्का पेट में जाने के बाद पानी को सोख लेता है जिस वजह से यह फूल जाता है और कब्ज में राहत देता है। इसके सेवन से पाचन तंत्र में सुधार होता है। मुनाका फाइबर के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट्स और कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है जो स्वाभाविक रूप से कब्ज को नियंत्रित करने में मदद करता है। मुनाका (विशेष रूप से काला मुनक्का) का नियमित सेवन करने से आपको कब्ज़ में राहत मिल सकती है। इसमें मौजूद फाइबर जठरांत्र (gastrointestinal) मार्ग से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। 10 मुनक्का को सुबह दूध में अच्छे से उबालकर दूध को पी लें। इस का एक हफ्ते तक सेवन करें, आप को कब्ज़ की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

मुनक्का के बेनिफिट्स वजन बढ़ाने में - 
हर मेवे की तरह मुनक्का भी वजन बढ़ाने में मदद करता है क्योंकि इसमे फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोस (fructose aur glucose) पाया जाता है जो हमें एनर्जी प्रदान करता है।

मुनक्का का सेवन करे एनीमिया मे - 
मुनक्का में भारी मात्रा मे आयरन पाया जाता है जो एनीमिया से लड़ने की शक्ति रखता है। मुनक्का खून को बनाने के लिए विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की ज़रूरत को पूरा करता है। इसके अलावा मुनक्का में भरपूर मात्रा में कॉपर पाया जाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। सोते समय लगभग 10 से 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। मुनक्का खाने से खून भी साफ होता है और नाक से खून बहना भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए। 

बुखार में मुनक्का खाने के लाभ - 
मुनक्का में मौजूद फिनोलिक पायथोन्यूट्रिएंट (phinolic pythonutrient), जर्मीशिडल और एंटीऑक्सीडेंट (germicidal aur antioxidant) तत्वों की वजह से जाने जाते हैं। यह जीवाणु संक्रमण और वायरल से लड़कर बुखार को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं। रात को 10 मुनक्का और अंजीर को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह एक गिलास दूध में इसे उबाल लें। एक हफ्ते तक इस का सेवन करें। बुखार में फायदा मिलेगा। मुनक्के को अदरक के साथ पीसकर 1 घंटे के लिए पानी में भिगो के रख दें, उसके बाद इस मिश्रण को उबालें और इसका सेवन करें। 

मुनक्का खाने से लाभ यौन दुर्बलता में - 
यौन दुर्बलता की समस्या होने पर रोजाना मुनक्का खाएं क्योंकि यह कामेच्छा (sex power) को बढ़ाता है। मुनक्का में मौजूद एमिनो एसिड यौन दुर्बलता को दूर करता है। इस लिए तो शादी शुदा लोगों को पहली रात दूध का गिलास दिया जाता है जिसमें मुनक्का और केसर मिला होता है। रोजाना 10 मुनक्का को दूध में उबाल कर सेवन करें, इससे आपकी यौन दुर्बलता दूर हो जाएगी।

हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए मुनक्का खायें - 
कैल्शियम का भरपूर स्रोत होने के कारण मुनक्का हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। इसमें बोरान (boran) नामक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कैल्शियम सोखने और हड्डियों तक कैल्शियम को पहुँचाने में मदद करता है। मुनक्का महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) की समस्या को रोकने में विशेष रूप से सहायक होता है। यह हड्डियों और जोड़ों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। मुनक्के में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है, जो हड्डियों को मजबूत करने में और उनके विकास में मदद करता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना कम हो जाती है। इसलिए आप रोज मुनक्का का उचित मात्रा में सेवन करें।

मुनक्का के फायदे आँखों के लिए - 
मुनक्का में विटामिन ए, बीटा कैरोटीन होता है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक होता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो आँखों को फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। मुनक्का को खाने से आँखों की कमज़ोरी, मांसपेशियों की क्षति, मोतियाबिंद आदि नहीं होते हैं। 10 मुनक्का को रात में पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर अच्छे से चबा कर खाएं, इस से आप की आँखों की रौशनी तेज़ होने लगेगी।

मुनक्का के लाभ त्वचा पर - 

मुनक्का पौष्टिक होता है। यह कम वसा और उच्च ऊर्जा प्रदान करता है। मुनक्का त्वचा को स्वस्थ और सुंदर रखने में मदद करता है। मुनक्का त्वचा की कोशिकाओं की रक्षा करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाते हैं। काला मुनक्का शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और त्वचा को साफ और चमकदार बनाये रखता है। मुनक्का में विटामिन ए और ई की मात्रा होती है जो त्वचा की बाहरी परत में नई कोशिकाओं के विकास में मदद करती हैं।

मुनक्का में रेस्वेराट्रोल (resveratrol) पाया जाता है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। यह रक्त से जहरीले और काले रंग की कोशिकाओं को हटा कर रक्त को शुद्ध करता है और त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है। इसलिए आप रोज़ 5 से 10 मुनक्का खाएं।

मुनक्का के उपयोग बालों के लिए - 
मुनक्का में भारी मात्रा मे आयरन पाया जाता है जो बालों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। आयरन की कमी के कारण बाल बेजान और झड़ने शुरू हो जाते हैं। मुनक्का में विटामिन सी बड़ी मात्रा में होता है जो बालों में प्राकृतिक रंग बनाए रखने में मदद करता है। मुनक्के का नियमित रूप से सेवन करना बालों को चमकदार और मोटा बनाने में मदद करता है क्योंकि इसमें विटामिन सी मौजूद होता है जो कोशिका की क्षति को रोकता है। इसकी वजह से स्केलप पर जलन और डैंड्रफ नहीं होते हैं।


मुनक्का के नुकसान - 

मुनक्का के नुकसान इस प्रकार हैं - जिस तरह मुनक्का का सेवन हमारे लिए फायदेमंद होता है, उसी तरह इस का अधिक सेवन कर नुकसानदायक हो सकता है। मुनक्का के अधिक सेवन से शरीर में कैलोरी की मात्रा अधिक हो जाती है और आप का वजन ज्यादा बढ़ सकता है जो आपके लिए अनेकों समस्याओं का कारण बन सकता है। मुनक्का में उच्च मात्रा में ट्राइग्लिसराइड्स होता है। मुनक्का के अधिक सेवन से मधुमेह, हृदय रोग, और फैटी लीवर की समस्याएँ हो सकती हैं। मुनक्के का अधिक सेवन करने से आपको उलटी, दस्त और बुखार जैसी समस्या भी हो सकती है।


[ Read More ]»

चीड़ के तेल के फायदे और नुकसान

 
Image SEO Friendly

चीड़ के पेड़ का नाम तो सभी ने सुना होगा, जिसे अंग्रेजी में पाइन ट्री के नाम से जाना जाता है। इसके बावजूद शायद ही किसी को मालूम हो कि चीड़ का तेल कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने में भी मदद कर सकता है। अब चीड़ के तेल का उपयोग किन-किन समस्याओं में लाभकारी हो सकता है,  इस लेख में हम इसी बात को समझाने जा रहे हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या का इलाज डॉक्टरी सलाह पर ही निर्भर करता है। चीड़ के तेल के फायदे की मदद से केवल लेख में शामिल समस्याओं में कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।

चीड़ के तेल के फायदे – 
यहां हम चीड़ के तेल के फायदे बताने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

1. सूजन को कम करे
चीड़ का तेल शरीर की सूजन की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है। इस बात को चीड़ के पेड़ से संबंधित चूहों पर आधारित एनसीबीआई  के एक शोध में माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि चीड़ के अर्क में मौजूद फ्लेवेनोइड में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है । इस आधार पर यह माना जा सकता है कि सूजन को कम करने में चीड़ का तेल सहायक साबित हो सकता है। सूजन के लिए इसके तेल से मालिश की जा सकती है।

2. सामान्य सर्दी में सहायक
सामान्य सर्दी-जुकाम की समस्या से राहत पाने के लिए भी चीड़ के तेल का उपयोग किया जा सकता है। यह बात ब्लैक पाइन (चीड़ का एक प्रकार) से संबंधित एक शोध से स्पष्ट होती है। शोध में माना गया है कि चीड़ से तैयार टार को छाती और पीठ पर लगाने से सामान्य सर्दी से राहत पाने में मदद मिल सकती है । वहीं, एक अन्य शोध में इस बात का स्पष्ट जिक्र मिलता है कि चीड़ के टार से भी पाइन ऑयल बनाया जाता है। इस आधार पर कहना गलत नहीं होगा कि चीड़ के तेल का उपयोग कर सामान्य सर्दी को दूर करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस विषय पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

3. भूख को बढ़ाए
भूख बढ़ाने के मामले में चीड़ का तेल उपयोगी है या नहीं, इस बारे में कोई भी स्पष्ट प्रमाण मौजूद नहीं हैं। हां, कोरियन पाइन के बीज के अर्क से तैयार तेल भूख को कम करने में जरूर सहायक साबित हो सकता है। इस बात की पुष्टि कोरियन पाइन नट ऑयल से संबंधित एक शोध से होती है । इस आधार पर चीड़ के पेड़ से निकला हुआ तेल बढ़ते वजन को कम करने के उपाय में एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है।


4. स्किन इन्फेक्शन से दिलाए राहत
त्वचा इन्फेक्शन से बचाव के लिए भी चीड़ के पेड़ से निकला हुआ तेल फायदेमंद हो सकता है। चीड़ से संबंधित एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि चीड़ के अर्क में एंटीबैक्टीरियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) और एंटीफंगल (फंगस को नष्ट करने वाला) गुण पाया जाता है। शोध में आगे इस बात का भी जिक्र मिलता है कि चीड़ का अर्क मुंहासे, एक्जिमा (खुजली और सूजन से जुड़ा त्वचा विकार) और सोराइसिस (सूखे और खुजली युक्त चकत्तों का होना) में राहत दिला सकता है ।

5. आर्थराइटिस में पहुंचाए आराम
लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि चीड़ के तेल में एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन कम करने वाला) गुण पाया जाता है। वहीं, आर्थराइटिस की समस्या में होने वाली जोड़ों की सूजन से राहत पाने के लिए एंटीइन्फ्लामेट्री दवाइयों का उपयोग लाभकारी माना जाता है। ऐसे में चीड़ के तेल में मौजूद सूजन कम करने वाला यह प्रभाव काफी हद तक सहायक साबित हो सकता है ।

6. जलने के कारण हुए जख्म में फायदेमंद
जलने के कारण हुए जख्म के दर्द से राहत पाने के लिए और उसे ठीक करने के लिए भी चीड़ के तेल का उपयोग किया जा सकता है। चूहों पर आधारित चीड़ के तेल से संबंधित एनसीबीआई के एक शोध में इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया है कि चीड़ के तेल में मौजूद एंटीइन्फ्लामेट्री गुण जलने के कारण होने वाली सूजन से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि चीड़ का तेल सेकंड डिग्री बर्न को ठीक करने में सहायक साबित हो सकता है ।

7. मुंहासों को करे दूर
लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि त्वचा से संबंधित कई विकारों को दूर करने में चीड़ का तेल मददगार हो सकता है। इन विकारों में मुंहासों की समस्या भी शामिल है । वहीं, पाइन कोंस (चीड़ का फल) से संबंधित एक अन्य शोध में सीधे तौर पर बताया गया है कि चीड़ के अर्क में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक हो सकता है । इस आधार पर मुंहासों से राहत पाने के उपाय के तौर पर चीड़ के तेल को उपयुक्त माना जा सकता है।

चीड़ के तेल के पौष्टिक तत्व –
चीड़ के तेल में मौजूद रसायनों को ही इसके पोषक तत्वों के रूप में देखा जाता है। यहां हम अलेप्पो पाइन (चीड़ का एक प्रकार) के तेल में मौजूद रसायनों की जानकारी देने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं  :
  • टेट्राडेकोनोइक एसिड
  • पामिटिक एसिड
  • हेक्साडेकोनोइक एसिड
  • मार्गैरिक एसिड
  • हेप्टाडेकोनोइक एसिड
  • स्टेरिक एसिड
  • इलैडिक एसिड
  • वैक्सेनिक एसिड
  • ओलिक एसिड
  • लिनोलेइक एसिड
  • रुमेनिक एसिड
  • इकोसेनोइक एसिड
  • इकोसैमोनोइक एसिड
  • इकोसैडियोनोइक एसिड
  • आर्चीडोनिक एसिड
  • बेहेनिक एसिड
  • एरूसिस एसिड
  • मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA)
  • पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA)
  • आयोडीन
चीड़ के तेल का उपयोग – 
चीड़ के तेल का उपयोग करने के आसान तरीके कुछ इस प्रकार हैं :
  • सूजन संबंधी समस्या से राहत पाने के लिए चीड़ के तेल को प्रभावित हिस्से पर लगाने की सलाह दी जाती है।
  • सर्दी से राहत पाने के लिए इसे सीने और पीठ पर लगाया जाता है।
  • त्वचा से संबंधित इन्फेक्शन और आर्थराइटिस में भी इसे लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • जले के घाव से राहत पाने के लिए भी इसे घाव पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

चीड़ के तेल के नुकसान – 
चीड़ के तेल में टरपीन नाम का एक विषैला पदार्थ भी मौजूद होता है, जिसके कारण कई तरह से चीड़ के तेल के नुकसान देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि चीड़ के तेल का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। चीड़ के तेल में मौजूद इस विषैले पदार्थ के निम्न दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं :
  • निगलने में तकलीफ
  • गले में जलन
  • आंखों में जलन
  • सांस लेने में तकलीफ
  • पेट में दर्द
  • डायरिया
  • जी मिचलाना
  • उल्टी आना
  • असामान्य हृदय गति
  • कोमा
  • भ्रम की स्थिति
  • अवसाद
  • सिर चकराना
  • सिरदर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • घबराहट
  • दिमाग काम न करना
  • बेहोशी आना
चीड़ का तेल क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है, यह तो आप अच्छे से समझ गए होंगे। वहीं, चीड़ के तेल का उपयोग किन समस्याओं में लाभकारी है, इस बात को लेकर भी अब किसी बात का संशय नहीं रहा होगा। तो फिर अधिक क्या सोचना, लेख में शामिल किसी समस्या से अगर कोई नजदीकी या परिवार का सदस्य परेशान है, तो आप उसे चीड़ के तेल का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं। बशर्ते, चीड़ का तेल उपयोग करने के तरीके और चीड़ के तेल के नुकसान से जुड़ी लेख में दी जानकारी को जरूर ध्यान में रखें, ताकि चीड़ के तेल के सेवन के नुकसान को खुद से दूर रखा जा सके। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :
क्या पाइन ऑयल बैक्टीरिया को मार सकता है?
हां, पाइन ऑयल में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। इस कारण यह माना जा सकता है कि पाइन ऑयल बैक्टीरिया को मार सकता है ।

क्या पाइन एक डिसइन्फेक्टेंट है?
हां, पाइन एक डिसइन्फेक्टेंट है ।

क्या पाइन ऑयल और तारपीन एक हैं?
पाइन ऑयल और तारपीन एक नहीं है। पान ऑयल चीड़ के पेड़ से तैयार शुद्ध पदार्थ है, जबकि तारपीन को पेट्रोलियम पदार्थो को मिलाकर तैयार किया जाता है। तारपीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पेंट को पतला करने के लिए किया जाता है।

क्या पाइन ऑयल को निगलना सुरक्षित है?
नहीं, पाइन ऑयल में टरपीन नाम का एक विषैला पदार्थ पाया जाता है , इसलिए इसका सेवन सुरक्षित नहीं कहा जा सकता ।

क्या पाइन ऑयल बालों के लिए अच्छा है?
पाइन ऑयल को एलोपेसिया (बाल झड़ने की समस्या) में लाभकारी माना जाता है । इसलिए, इसे बालों के लिए अच्छा कहा जा सकता है।

[ Read More ]»

आंवला चूर्ण के फायदे, उपयोग और नुकसान

 
Image SEO Friendly


घर की रसोई में आंवले का एक विशेष स्थान होता है। इससे बने अचार और मुरब्बे को लोग बड़े चाव से खाते हैं। इसके कई औषधीय गुण भी हैं, खासकर आंवले से बनाया जाने वाला आंवला पाउडर का इस्तेमाल शरीर की कई परेशानियों से निजात पाने के लिए किया जाता है। आंवला पाउडर के फायदे न सिर्फ आपकी सेहत, बल्कि बालों और त्वचा के लिए भी उपयोगी माने जाते हैं। इस लेख में हम बात करेंगे आंवला चूर्ण के फायदे, उपयोग और इससे होने वाले नुकसान के बारे में।
 
आंवला चूर्ण के फायदे – 
आंवले के साथ-साथ आंवला पाउडर भी शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। यहां हम बता रहे हैं कि शरीर के  लिए आवंला चूर्ण किस प्रकार फायदेमंद है।

1. वजन कम करने के लिए
आंवले के अंदर एथेनॉलिक नाम का यौगिक पाया जाता है। इस यौगिक में एंटीहाइपरलिपिडेमिक (फैट को कम करने वाला) और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसके इन्हीं गुणों के कारण आंवले के सेवन से बढ़ता हुए वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही आंवला अतिरिक्त फैट को बर्न करने का काम भी कर सकता है । इसके अलावा, आंवला चयापचय को बढ़ावा देने का काम भी करता है, जिससे वजन को नियंत्रित रखा जा सकता है ।

2. पाचन के लिए फायदेमंद 
आंवला एक आदर्श फल है, जो कई सारे फायदों को अपने आप में समेटे हुए है। यह पाचन के लिए प्रभावकारी माना जाता है। दरअसल, इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है । फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी पेट संबंधी परेशानियों को ठीक करने का काम करता है ।

3. लीवर को स्वस्थ रखे 
दर्द निवारक दवाएं, एंटीबायोटिक और शराब का सेवन लिवर में टॉक्सिक पदार्थों का निर्माण करते हैं। नियमित आंवला का सेवन इन विषाक्त पदार्थों को शरीर से छुटकारा दिलाकर लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है ।

4. मधुमेह को करे नियंत्रित
आंवले में एंटी-हाइपोग्लाइसेमिक और लिपिड को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। आंवला में पाए जाने वाले ये गुण मधुमेह को नियंत्रित करने में मददगार हो सकते हैं। रोजाना आंवला पाउडर का सेवन रक्त में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को कम करने में कारगर हो सकता है। इससे न सिर्फ मधुमेह को रोका जा सकता है, बल्कि इसके सेवन से मधुमेह को नियंत्रित भी किया जा सकता है ।

5. कैंसर की रोकथाम के लिए
आंवला में रेडियोमॉडुलेटरी, केमोमोडायलेटरी , केमप्रोवेन्टिव इफेक्ट  एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। आंवला में पाए जाने वाले ये गुण कैंसर का उपचार और रोकथाम करने में मददगार हो सकते हैं ।

6. स्वस्थ हृदय के लिए आंवला चूर्ण के फायदे
शोध के अनुसार, आंवला हृदय को स्वस्थ रखने का काम कर सकता है। इसके अलावा, इसका उपयोग हाइपोलिपिडेमिक एजेंट के रूप में किया जाता है, जो रक्तचाप को रोकने के साथ ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज (धमनी रोग) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है ।

7. मजबूत हड्डियों के लिए
आंवला कैल्शियम का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है । कैल्शियम हड्डियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। कैल्शियम की कमी आपकी हड्डियों को कमजोर कर सकती है, जिससे हड्डियाें के टूटने का डर रहता है। कैल्शियम हड्डियाें को मजबूत करने के साथ ही हड्डियों के विकास का काम करता है ।

8. रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए 
रोज एक आंवले का सेवन आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर हो सकता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट के साथ इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जिस कारण आंवला रोग प्रतिरक्षा को बूस्ट करने का काम करता है ।

9. आंखों के लिए आंवला चूर्ण के फायदे 
आंवले में पाया जाने वाला विटामिन-सी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही आंवले में मौजूद आयरन और कई सारे खनिज आंखों की कई समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसका उपयोग मोतियाबिंद के उपचार में भी किया जा सकता है ।

10. त्वचा के लिए आंवला पाउडर
आंवला में सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-एजिंग गुण होते हैं, जो त्वचा को बूढ़ा होने से रोकने में मदद करता है। इसका उपयोग मुंहासे और अन्य त्वचा समस्याओं के उपचार में भी किया जा सकता है ।

11. बालों के लिए 
आंवले में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो बालों को पोषण देने कि लिए फायदेमंद हो सकते हैं। आंवले का उपयोग बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने के लिए, उन्हें मजबूत और रूसी से मुक्त बनाने के लिए किया जा सकता है। यह बालों के स्वास्थ्य और बेहतर विकास के अच्छा फल माना जा सकता है । वहीं, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण यह प्रदूषण के प्रभावों का मुकाबला करने में मदद कर सकता है।

आंवला चूर्ण के फायदों के बाद जानते हैं इसके पोषक तत्वों के बारे में।

आंवला पाउडर के पौष्टिक तत्व – 
आंवला चूर्ण का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें काफी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। आइए आंवला के चूर्ण में पाये जाने वाले पोषक तत्वों के बारे में जानते हैं । 
पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
मॉइस्चर81.2%
कैलोरी60 ग्राम
फाइबर3.4 ग्राम
प्रोटीन0.4 ग्राम
फैट0.5 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट14 ग्राम
विटामिन बी128 माइक्रोग्राम
विटामिन बी3 0.4 ग्राम
विटामिन सी720 मिलीग्राम
कैल्शियम15 मिलीग्राम
आयरन1 मिलीग्राम
फास्फोरस21 मिलीग्राम
पोषक तत्वों को जानने के बाद आगे हम जानेंगे कि आंवला चूर्ण का उपयोग कब, कैसे और कितनी मात्रा में करना चाहिए।

आंवला चूर्ण का उपयोग – 
कब करें आंवला चूर्ण का उपयोग : 
आंवला पाउडर का उपयोग आप कभी भी कर सकते हैं।

कितनी मात्रा में आंवला पाउडर का उपयोग करना चाहिए : 
किसी भी नकारात्मक परिणामों से बचने के लिए इसका उपयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए। साथ ही अगर आप दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, तो आंवला चूर्ण का उपयोग डॉक्टर की सलाह पर ही करें ।

आंवला चूर्ण के फायदे हैं, तो इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जानते हैं इसके नुकसान के बारे में।

आंवला पाउडर के नुकसान – 
  • कहते हैं किसी भी चीज का ज्यादा उपयोग उसे नुकसानदायक बना सकता है। ठीक वैसे ही आंवला पाउडर के ज्यादा उपयोग से इसके नुकसान हो सकते हैं। ये नुकसान कौन-कौन से हैं, आइए जानते हैं।
  • आंवला पाउडर का इस्तेमाल रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कम करने के लिए किया जाता है। इसलिए, हाइपोग्लाइसीमिया के मरीजों को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • आंवले का सेवन तेजी से वजन कम कर सकता है। जिनका वजन पहले से ही कम है, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर इसका सेवन करना चाहिए ।
  • गर्भावस्था के दौरान इसका अधिक सेवन कब्ज, दस्त, अपच और निर्जलीकरण का कारण बन सकता है ।
इस आर्टिकल से यह तो साफ हो गया है कि आंवला चूर्ण के फायदे एक नहीं, बल्कि अनेक हैं। इसका प्रयोग स्वास्थ्य को ठीक रखने के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी किया जा सकता है। साथ ही ध्यान रहे कि इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करें, वरना अधिक सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में संतुलित मात्रा में इसका उपयोग कर इसके अच्छे गुणों का आनंद लें। इसके अलावा, लेख को दूसरों के साथ शेयर करके इसमें बताए गए आंवला चूर्ण के फायदे और घरेलू नुस्खों की जानकारी सभी के साथ साझा करें।

[ Read More ]»

मूंगफली के उपयोग, फायदे और नुकसान

Image SEO Friendly

यह कहना गलत नहीं होगा कि मूंगफली के फायदे बादाम से किसी भी तरह से कम नहीं हैं। यह न सिर्फ ठंड के मौसम में दोस्तों के बीच हंसी-ठिठोली और टाइम पास का बढ़िया जरिया है, बल्कि यह पौष्टिक तत्वों का खजाना भी है।  इस लेख में हम मूंगफली खाने के फायदे बता रहे हैं। हालांकि, इनमें से कुछ फायदे ऐसे हैं, जो शायद कई लोगों को पता होंगे, लेकिन इसमें कुछ फायदे ऐसे हैं, जिन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे। फायदों के साथ-साथ मूंगफली खाने के नुकसान के बारे में भी जानने का प्रयास करेंगे। मूंगफली खाने का तरीका भी इस लेख में शामिल है। पाठकगण ये भी ध्यान रखें कि मूंगफली का सेवन किसी बीमारी का इलाज नहीं है, यह सिर्फ स्वास्थ्य समस्या से बचाव कर सकती है। गंभीर बीमारियों में हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

मूंगफली क्या है – 
मूंगफली के फायदे जानने से पहले बता दें मूंगफली क्या है? मूंगफली को फलियों की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन इसमें सूखे मेवों के भी गुण मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसे नट्स की श्रेणी में भी शामिल किया जा सकता है। वहीं, इसमें तेल की उच्च मात्रा पाई जाती है, इसलिए इसे तिलहन फसल में भी शामिल किया जाता है। ये प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। नट्स और तेल में इस्तेमाल होने के अलावा, मूंगफली का उपयोग मक्खन, स्नैक उत्पाद और डेसर्ट बनाने में भी किया जाता है। मूंगफली को कई नामों से जाना जाता है, जैसे हिंदी में मूंगफली, तेलगु में ‘पलेलु’ (Pallelu), तमिल में ‘कदलाई’ (Kadalai), मलयालम में ‘निलक्कड़ला’ (Nilakkadala), गुजराती में ‘सिंगदाना’ (Singdana) और मराठी में ‘शेंगदाना’ (Shengdaane) कहा जाता है। इसके अलावा, मूंगफली को जमीन से प्राप्त किया जाता है, जिस कारण इसे ग्राउंडनट भी कहा जाता है। मूंगफली भारत में पूरे वर्ष, हर जगह मिलती है और इसके उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है। जानकारी के लिए बता दें की मूंगफली का उत्पादन चीन में सबसे ज्यादा किया जाता है ।

मूंगफली सेहत के लिए क्यों अच्छी है?
मूंगफली में कई स्वास्थ्यकारी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है। साथ ही इसमें हेल्दी फैट (मोनोसैचुरेटेड फैट) पाए जाते हैं। इसमें रेस्वेट्राल और फाइटोस्ट्राल जैसे न्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं। वहीं, मूंगफली का उपयोग, हृदय रोग, डायबिटिज, अल्जाइमर और कैंसर से बचाव में मदद कर सकता है। वैज्ञानिक शोध कहते हैं कि मूंगफली और इससे बने उत्पाद कुपोषण से पार पाने में सहायक हो सकते हैं। इसलिए, मूंगफली को सेहत और स्वास्थ्य का पॉवर पैक कहा जा सकता है ।

मूंगफली के फायदे – 
मूंगफली के गुण से अगर आप अभी तक अनजान थे, तो हम बताने जा रहे हैं कि मूंगफली के गुण कैसे स्वास्थ्यकारी हो सकते हैं। कच्ची मूंगफली खाने के फायदे से लेकर मूंगफली कैसे खाये, ये सभी जानकारी यहां आपको मिल जाएगी। साथ ही आप जान सकेंगे कि मूंगफली में क्या पाया जाता है, जो गुणकारी है।

1. डायबिटीज के लिए मूंगफली के फायदे
मधुमेह में मूंगफली खाकर स्थिति में सुधार लाया जा सकता है, इसलिए जिन्हें डायबिटीज है या जो लोग इससे बचना चाहते हैं, वो अपनी डाइट में मूंगफली को शामिल कर सकते हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने मूंगफली को डायबिटीज सुपर-फूड का दर्जा दिया है, क्योंकि इसमें  मैग्नीशियम, फाइबर और हार्ट हेल्दी ऑयल्स मौजूद होते हैं। ये ब्लड ग्लूकोज को अधिक प्रभावित नहीं करते हैं । वहीं, अगर मधुमेह में मूंगफली खाना नहीं चाहते, तो बाजार में मिलने वाले पीनट बटर का सेवन कर सकते हैं। पीनट बटर के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है । इसलिए, बेहिचक शुगर में मूंगफली खा सकते हैं।

2. अल्जाइमर और दिमाग के लिए मूंगफली के फायदे
अल्जाइमर रोग दिमाग से संबंधित एक विकार है। इस बीमारी में व्यक्ति की याददाश्त प्रभावित हो जाती है । इस बीमारी से बचाव में मूंगफली के फायदे देखे गए हैं। दरअसल, मूंगफली में नियासिन की उच्च मात्रा होती है और यह विटामिन-ई का एक अच्छा स्रोत है। रिसर्च में इन दोनों तत्वों को अल्जाइमर रोग और उम्र के साथ दिमागी शक्ति में आने वाली गिरावट से बचाव में कारगर पाया गया है। इतना ही नहीं, मूंगफली में मौजूद रेसवेराट्रॉल, अल्जाइमर रोग और अन्य नर्वे सिस्टम डिसआर्डर के लिए लाभदायक हो सकता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता हैं कि सींगदाना खाने के फायदे दिमाग और उससे जुड़ी समस्याओं से राहत दिला सकते हैं ।

3. कैंसर से बचाव के लिए मूंगफली खाने के फायदे
मूंगफली में पाए जाने वाले अनसैचुरेटड फैट्स, कुछ विटामिन, खनिज और बायोएक्टिव तत्व कैंसर विरोधी प्रभाव दिखा सकते हैं। विशेष रूप से, मूंगफली में मौजूद फाइटोस्टेरॉल कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है। साइंटिफिक रिसर्च ये कहती हैं कि मूंगफली के माध्यम से फाइटोस्टेरॉल का सेवन, प्रोस्टेट ट्यूमर के मामलों में 40 प्रतिशत और शरीर के अन्य भागों में फैलने वाले कैंसर की घटनाओं में लगभग 50 प्रतिशत कमी ला सकता है।

फाइटोस्टेरॉल की तरह, रेस्वेराट्रोल भी कैंसर से बचाव में सहायक हो सकता है, क्योंकि यह बढ़ते कैंसर के लिए रक्त की आपूर्ति रोक सकता है। मूंगफली में मौजूद ये दोनों तत्व कैंसर कोशिका को पनपने से रोक सकते हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि मूंगफली और इससे बने उत्पाद,फेफड़े, पेट, ओवेरी, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर से बचाव में सहायक हो सकते हैं।

इस आधार पर कहा जा सकता है कि मूंगफली के फायदे कैंसर से बचाव में सहायक हो सकते हैं। वहीं, यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि मूंगफली को कैंसर का इलाज नहीं माना जा सकता है, क्योंकि यह एक गंभीर बीमारी है। इसके इलाज के लिए डॉक्टरी उपचार करवाना जरूरी है। भुनी हुई मूंगफली खाने के फायदे कैंसर के जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकते हैं, पर यह कैंसर का इलाज नहीं है।

4. ऊर्जा बढ़ाने के लिए मूंगफली के फायदे
मूंगफली को ऊर्जा का पॉवर पैक कह सकते हैं क्योंकि इसकी थोड़ी मात्रा से ही पर्याप्त उर्जा हासिल को जा सकती है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत हेल्दी फैट होता है, जो किसी भी पारंपरिक खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक कैलोरी दे सकता है । गर्मियों में मूंगफली खाने के फायदे, ऊर्जा दे सकते हैं, क्योंकि गर्मियों में ऊर्जा की अधिक खपत होती है।

एक अन्य रिसर्च के अनुसार, नट्स प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं और क्योंकि मूंगफली भी उनमें से एक है, इसलिए यह भी काफी प्रोटीन युक्त होती है और इससे शरीर को अच्छी एनर्जी मिल सकती है। मूंगफली को स्नैक्स के तौर पर फ्राई करके खाएं, इसकी चटनी बनाकर खाएं या फिर ब्रेड पर पीनट बटर लगाकर खाएं, मूंगफली के फायदे कई तरह से लिए जा सकते हैं ।

5. हृदय रोग के लिए मूंगफली के फायदे
मूंगफली में मौजूद हेल्दी फैट्स, हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, कई वैज्ञानिक अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि संतुलित मात्रा में मूंगफली का सेवन फाइटोस्टेरॉल की अच्छी पूर्ति कर सकता है जिससे हृदय रोगों में कमी आ सकती है। हृदय रोगियों के लिए मूंगफली को इसीलिए लाभकारी कहा जाता है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम पैदा कर सकता है। मूंगफली में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड, प्लांट प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फाइबर आर्जिनिन और कई बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं और हृदय को स्वस्थ रख सकते हैं ।  साथ ही मूंगफली में रेस्वेराट्रोल (Resveratrol) नामक एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, जो कार्डियोवैस्कुलर रोगों के खतरे को कम कर सकता है । इस आधार पर कहा जा सकता हैं कि मूंगफली के फायदे दिल की सुरक्षा कर सकते हैं।

6. तंत्रिका विकार से बचाव में मूंगफली के लाभ
मूंगफली खाने के फायदे तंत्रिका विकार से बचा सकते हैं। मूंगफली में रेस्वेराट्रोल और नियासिन की उचित मात्रा इसे नर्व हेल्थ यानी तंत्रिका तंत्र स्वास्थ्य के लिए उत्तम खाद्य पदार्थ बनाती है ।  चूहों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात पता चली है कि रेस्वेराट्रोल में न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव पाया जाता है यानी यह तंत्रिका तंत्र को सुचारू रखने में सहायक हो सकता है ।  वहीं, नियासिन यानी विटामिन-बी 3 का होना मूंगफली को और फायदेमंद बना सकता है क्योंकि न्यूरोनल (तंत्रिका संबंधी) स्वास्थ्य बढ़ाने में विटामिन बी-3 लाभ दे सकता है। इसलिए, कहा जा सकता हैं कि विटामिन की कमी से होने वाले तंत्रिका तंत्र विकार और मनोरोगों से सुरक्षा देने में मूंगफली कारगर हो सकती है ।

7. डिप्रेशन से बचाव में मूंगफली के फायदे
मूंगफली का सेवन डिप्रेशन की स्थिति में कुछ हद तक सुधार कर सकता है। पाठक यह बात अच्छी तरह जान चुके हैं कि मूंगफली में रेस्वेराट्रोल होता है। रिसर्च कहती है कि यह शक्तिशाली तत्व, एंटीडिप्रेसेंट (अवसाद कम करने वाला) दवा की तरह काम कर सकता है। रेस्वेराट्रोल का सेवन किया जाए, तो यह मस्तिष्क के हिस्सों (Brain regions) और तंत्रिका मार्गों (Neural pathways) पर असर डाल सकता है।   इसलिए, यह रेस्वेराट्रोल नामक पॉलीफेनोल, अवसाद के कई मामलों में फायदेमंद हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि यह रिसर्च चूहों पर की गयी है, इंसानों पर इसका प्रभाव जानने के लिए और शोध किए जाने की जरूरत है ।

8. हड्डियों/गठिया के लिए मूंगफली के फायदे
विज्ञान, हड्डियों और उनसे जुड़ी मांसपेशियों को सेहतमंद रखने में मैगनिशियम की बड़ी भूमिका बताता है। रिसर्च कहती हैं कि मैग्नीशियम, मस्कुलोस्केलेटल हेल्थ (Musculoskeletal health) यानी हड्डियों और मसल्स को स्वस्थ बनाए रखने में कारगर हो सकता है । मूंगफली में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है इसलिए मूंगफली का सेवन हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा माना जा सकता है । एक चौथाई कप भुनी मूंगफली में  63 मिलीग्राम मैग्नीशियम पाया जाता है, जो कि दैनिक जरूरत का 15 प्रतिशत है । इसके अलावा, मूंगफली के नुकसान या किसी जोखिम का डर हो तो गठिया के रोगियों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

9. कोलेस्ट्राल कम करने में मूंगफली के फायदे
लो फैट डाइट की तुलना में मूंगफली और इसके उत्पाद (मक्खन और तेल) दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। शोध के अनुसार, इसमें उच्च मोनोअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जो कुल बॉडी कोलेस्ट्रॉल को 11 प्रतिशत और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को 14 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि मूंगफली अच्छे कोलेस्ट्राल (HDL) को बनाए रखने का काम कर सकती है।  मूंगफली के ये गुण कोलेस्ट्राल का संतुलन बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं । इसलिए, कोलेस्ट्राल कम करने में मूंगफली खाने के फायदे लिए जा सकते हैं और ये भूल जाएं कि मूंगफली में कितना फैट होता है क्योंकि यह स्वस्थ फैट है।

10. फर्टिलिटी बढ़ाने में सहायक है मूंगफली
मूंगफली खाने के फायदे में फर्टिलिटी का बढ़ना भी शामिल है, क्योंकि इसमें अर्जिनाइन पाया जाता है, जो पुरुष प्रजनन शक्ति में इजाफा कर सकता है । इसके अलावा, जिंक की कमी शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित करती है। मूंगफली जिंक का एक अच्छा स्रोत है, जो शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद कर सकता है । मूंगफली महिलाओं की प्रजनन क्षमता को किस प्रकार प्रभावित करती है, इस पर अभी वैज्ञानिक शोध किया जा रहा है।

11. गाल स्टोन होने पर मूंगफली के लाभ
पित्त की थैली में पथरी (गाल स्टोन) की शिकायत आजकल आम नजर आने लगी है। ऐसे में मूंगफली समेत अन्य नट्स लाभकारी हो सकते हैं।  मूंगफली में कई स्वास्थ्यकारी तत्व होते हैं, जो पित्त की थैली में पथरी के जोखिम को कम कर सकते हैं। मूंगफली का सेवन करने से पथरी का जोखिम कम हो सकता है, जिससे पित्त की थैली के सर्जरी के मामलों में भी कमी आ सकती है ।  हालांकि, पित्त की थैली में पथरी से बचाव में सींगदाना खाने के फायदे कैसे काम करते हैं, इस पर अभी अधिक शोध की जरूरत है।

12. वजन बढ़ने का जोखिम कम कर सकती है मूंगफली
शेंगदाणा खाने के फायदे में वजन कम होना भी शामिल है। जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि मूंगफली एक प्रकार है नट है जिसमें हेल्दी फैट्स (मोनोअनसैचुरेटेड फैट) पाए जाते हैं, इसलिए ये वजन बढ़ने का अधिक जोखिम पैदा नहीं करते हैं ।  स्कूली बच्चों पर की गयी एक रिसर्च इस बात की पुष्टि करती है कि दो साल तक मूंगफली का सेवन करने के बाद बच्चों के वजन में कमी पाई गयी। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि मूंगफली खाने के फायदे ये भी हैं कि यह इससे वजन बढ़ने का जोखिम न के बराबर हो सकता है।

13. एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त है मूंगफली
मूंगफली में फ्री रेडिकल्स के खिलाफ लड़ने के लिए फ्री रेडिकल स्क्वैजिंग एक्टिविटी पाई जाती है।  इसमें बहुत से एंटीऑक्सीडेंट्स हैं, जो न सिर्फ रोगों से निजात दिला सकते हैं बल्कि उम्र बढ़ाने में भी मददगार हो सकते हैं। मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट खनिज (सेलेनियम, मैंगनीज, कॉपर) और फ्लेवोनोइड्स पाए जाते हैं। साथ ही इसमें विटामिन ई, क्लोरोजेनिक एसिड, कैफिक एसिड, कौमारिक एसिड और फेरुलिक एसिड होते हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स गतिविधि दिखा सकते हैं ।

14. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में मूंगफली के फायदे
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल विकार है, जो अंडाशय के बाहरी किनारों पर छोटी छोटी सिस्ट बना देता है, जिससे अंडाशय का आकार बढ़ जाता है। यह महिला प्रजनन तंत्र को प्रभावित करने के साथ और भी कई समस्या पैदा कर सकता है जैसे मोटापा, मुहांसे और अनचाहे बालों का उगना । खान-पान में सुधार लाकर और व्यायाम करके पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से निपटा जा सकता है। शोध ये कहते हैं कि पीसीओडी डाईट में भीगी हुई मूंगफली का सेवन किया जा सकता हैं । इसके अलावा मूंगफली में पाया जाने वाला रेस्वराट्राल भी ओवेरियन सिस्ट की स्थिति में सुधार ला सकता है।

15. विटामिन और मिनरल्स से भरपूर है मूंगफली
फल, सब्जियों व नट्स को विटामिन का अच्छा स्रोत माना गया है। हालांकि, कई बार अखरोट, बादाम व पिस्ता जैसे महंगे ड्राई फ्रूट्स खाना जेब पर काफी भारी पड़ जाता है। इस स्थिति में जरूरी विटामिन सस्ती मूंगफली से मिल सकते हैं। जी हां, मूंगफली गुणों का खजाना है और विटामिन से भरपूर है। मूंगफली में कौन सा विटामिन होता है, अगर ये नहीं जानते, तो बता दें कि मूंगफली में बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन जैसे नियासिन (niacin), राइबोफ्लेविन (riboflavin), थियामिन (thiamin), पैंटोथेनिक एसिड (pantothenic acid) आदि होते हैं। साथ ही इसमें मूंगफली में पोटेशियम, मैंगनीज, कॉपर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, सेलेनियम और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स भी होते हैं । इसलिए, मूंगफली को पौष्टिक आहार कहा जा सकता है और मूंगफली दाना के फायदे, शरीर को अंदर से मजबूत बनाकर स्वस्थ रख सकते हैं।

16. स्वस्थ्य त्वचा के लिए मूंगफली खाने के फायदे
मूंगफली दाना के फायदे त्वचा को सुरक्षा और पोषण दोनों दे सकते हैं। दरअसल, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने पर त्वचा का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे कई तरह की त्वचा समस्या उत्पन्न हो सकती हैं । ऐसे में मूंगफली का सेवन कुछ हद तक त्वचा को सुरक्षा प्रदान कर सकता है। मूंगफली में अर्जिनाइन (Arginine) नामक एमिनो एसिड पाया जाता है, जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि शरीर में अमोनिया और अन्य विषाक्त पदार्थों के प्रभावों को बेअसर करके, अर्जिनाइन लिवर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकता है ।

इसके अलावा, मूंगफली के तेल का भी उपयोग किया जा सकता है। मूंगफली के तेल में फ्लुसीनोलोन (Fluocinolone) मौजूद होता है। फ्लुसीनोलोन एक प्रकार का टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉइड है, जो त्वचा की सूजन को कम करने और खुजली से राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए, मूंगफली के तेल का इस्तेमाल स्कैल्प सोरायसिस और एटोपिक डरमिटाइटिस (atopic dermatitis) जैसी त्वचा समस्याओं से उबरने में मदद कर सकता है । मूंगफली के नुकसान से बचने के लिए इसका तेल त्वचा पर लगाने से पहले थोड़ी सी जगह पर लगाकर, इसका पैच टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए।

17. बालों के लिए मूंगफली के फायदे
मूंगफली में कई स्वास्थ्यकारी अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जिनमें से एक है लाइसिन। शोध के अनुसार,  लाइसिन मुख्य रूप से बालों की जड़ के अंदरूनी हिस्से में मौजूद होता है, जो बालों के आकार और घनापन देने के लिए जिम्मेदार होता है। भोजन में लाइसिन की अपर्याप्त आपूर्ति से बाल कमजोर और पतले हो सकते हैं। यह अमीनो एसिड जिंक और आयरन के अवशोषण को भी बढ़ा सकता है। लाइसिन की पूर्ति करने में मूंगफली का सेवन मदद कर सकता है, क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो बालों को जरूरी पोषण पहुंचा सकते हैं  । इसलिए, कहा जा सकता है कि भुनी मूंगफली खाने के फायदे बालों को चमकदार और स्वस्थ बना सकते हैं।

मूंगफली का उपयोग कैसे करे – 
मूंगफली का उपयोग करने के कई तरीके हैं जिनमें से आप अपने पसंदीदा तरीका चुनकर मूंगफली को डायट में शामिल कर सकते हैं।  इसे विभिन्न तरीकों जैसे – मक्खन, तेल, आटा और फ्लेक के रूप में उपयोग किया जाता है।  चलिए कुछ तरीकों पर नजर डालते हैं।

उबाल कर खाएं मूंगफली
कच्चा मूंगफली खाने के नुकसान को ध्यान में रखते हुए, मूंगफली को उबालकर खाया जा सकता हैं। उबली हुई मूंगफली बहुत ही स्वादिष्ट होती है और सेहतमंद भी होती है। इससे जुड़े शोध के अनुसार, उबालने से मूंगफली  की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ जाती है। वहींं, एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मददगार हो सकता है । इसलिए, सेहत के लिए मूंगफली को उबालकर भी खाया जा सकता है। नीचे हम मूंगफली उबालने की विधि आपको बता रहे हैं।

मूंगफली कैसे उबालें?

  • सबसे पहले मूंगफली को अच्छे से धो लें और फिर एक घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें।
  • अब 200 एमएल पानी में एक चम्मच नमक मिला दें।
  • फिर इसमें मुट्ठीभर मूंगफली डालकर उबाल लें।
मूंगफली का आटा
कई लोग मूंगफली के आटे का भी सेवन करते हैं। मूंगफली का आटा बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली मूंगफली का चयन किया जाता है, जिससे मूंगफली खाने के नुकसान से बचा जा सकता है। फिर इन्हें भून कर आटा बनाया जाता है। इस आटे का उपयोग मिठाई बनाने या फिर बेकरी में किया जाता है। पीनट खाने के फायदे लेने के लिए इसके कई स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

पीनट बटर के रूप में मूंगफली का सेवन
मूंगफली के फायदे और नुकसान को ध्यान में रखते हुए कई लोग पीनट बटर यानी मूंगफली का मक्खन खाना भी पसंद करते हैं। पीनट खाने के फायदे लेने हैं, तो इसका बटर आसानी से बाजार में व सुपरमार्केट में मिल जाता है, लेकिन इसे घर में भी बनाया जा सकता है। बाजार की तुलना में घर में बना पीनट बटर न सिर्फ सेहतमंद होगा, बल्कि सस्ता भी होगा। नीचे हम इसकी आसान विधि बता रहे हैं –

सामग्री :

  • दो से तीन कप मूंगफली
  • आधा या एक चम्मच चीनी (आवश्यकतानुसार)
  • एक चम्मच शहद (वैकल्पिक)
  • एक चौथाई चम्मच या चुटकी-भर नमक
  • दो से तीन बड़े चम्मच मूंगफली का तेल या अन्य वेजिटेबल ऑयल

बनाने की विधि :

  • पहले कड़ाही या पैन में कच्ची मूंगफली को बिना तेल-घी के भून लें।
  • जब यह सुनहरी हो जाए, तो गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें।
  • ठंडा होने के बाद इसके छिलके निकाल लें।
  • फिर इसे मिक्सी में पीस लें। उसके बाद अन्य सामग्रियां जैसे – मूंगफली का तेल, चीनी, नमक व शहद मिलाकर एक बार और पीस लें।
  • पीसते वक्त बीच-बीच में मिक्सी खोलकर पेस्ट को चलाते रहें ताकि यह अच्छे से पेस्ट बन जाएं।
  • ध्यान रहे कि सामग्रियों को मिलाकर एक बार चख लें और सामग्रियां अपने स्वाद अनुसार ही मिलाएं।
  • अब पीनट बटर तैयार है। इसे किसी साफ-सुथरी शीशे के बोतल या अन्य किसी जार में रख सकते हैं। फिर जब मन करे, तब इसे रोटी या ब्रेड के साथ खाएं।

भुनी हुई मूंगफली
भुनी हुई मूंगफली लोकप्रिय भारतीय स्नैक है और इसे तैयार करना भी आसान है। मूंगफली को बिना तेल-घी के कड़ाही या फ्राई पैन में भून सकते हैं। इसके अलावा, तेल-घी के साथ भी इसे भून सकते हैं और भूनते वक्त स्वादानुसार नमक भी मिला सकते हैं। भूनने के बाद खाते वक्त भी नमक मिलाया जा सकता है। भुनी हुई मूंगफली को स्नैक्स के तौर पर, मिक्सचर के साथ, खीरे-प्याज के साथ या अन्य कई तरीकों से सेवन कर सकते हैं।`इस दौरान मूंगफली खाने के फायदे और नुकसान को जरूर याद रखें और संतुलित मात्रा में खाएं।`

मूंगफली का सेवन कब करें?
मूंगफली खाने का सही समय क्या है या मूंगफली का सेवन कब करें, इसको लेकर कोई वैज्ञानिक अध्ययन मौजूद नहीं है। पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति इसे कभी भी खा सकते हैं। भोजन के बीच में हेल्दी स्नैक्स के रूप में भुनी मूंगफली खाने के फायदे लिए जा सकते हैं।

मूंगफली का सेवन कितनी मात्रा में करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक मुट्ठी मूंगफली का सेवन प्रतिदिन किया जा सकता है । मूंगफली के फायदे और नुकसान को ध्यान रखते हुए इनका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए।

मूंगफली का चयन – 
अच्छी मूंगफली चुनने के लिए नीचे हम कुछ जरूरी टिप्स बता रहे हैं :

  • मूंगफली पूरे साल सुपरमार्केट और किराने की दुकानों में उपलब्ध होती हैं। यह अलग-अलग रूप में जैसे – छिलके वाली, कच्ची, भुनी हुई या फिर नमक वाली होती हैं।
  • छिलके वाली बिना पकी हुई (unshelled) मूंगफली हर मायने में प्रोसेस्ड मूंगफली से ज्यादा बेहतर है। प्रोसेस्ड नट के छिलके को निकालने के लिए कई तरह की रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
  • अगर आप बाजार से पीनट बटर खरीद रहे हैं, तो ध्यान रहे कि आप उसकी एक्सपायरी डेट देखकर ही खरीदें।
  • कच्ची मूंगफली खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि मूंगफली की फली क्रीम रंग की हो।
  • मूंगफली खरीदते वक्त ध्यान रहे कि उसमें नमी या पैकेट के अंदर किसी भी प्रकार के कीड़े-मकोड़े न हो।
  • छिलके वाली मूंगफली खरीदते वक्त ध्यान रखें कि वो सूखी न हो। इससे पता चलता है कि मूंगफली कितनी पुरानी है। ध्यान रहे मूंगफली का छिलका नाजुक हो ताकि वो आसानी से निकल जाए या उसे आसानी से छिला जा सके।
  • मूंगफली खरीदते और उपयोग करते वक्त उसे सूंघ लें। अगर उसमें से बदबू आए, तो इसका मतलब यह है मूंगफली खराब हो चुकी है।

मूंगफली को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने का तरीका –
अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि इसे कैसे स्टोर किया जाए कि यह लंबे वक्त तक ठीक रहे। इसके लिए आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है, हम आपको मूंगफली को लंबे वक्त तक सुरक्षित रखने का तरीका बता रहे हैं।

  • आप मूंगफली के दानों को एयर टाइट जार में कुछ वक्त तक स्टोर करके रख सकते हैं।
  • साबुत मूंगफली (Unshelled) को अगर ठंडी जगह पर रखा जाए, तो यह कई महीनों तक ठीक रह सकती है।
  • ध्यान रहे कि मूंगफली में कीड़े भी लग सकते हैं, इसलिए अगर मूंगफली को फ्रिज में रखना है, तो उसे जीप लॉक बैग में डालकर रखें।
  • घर में बने पीनट बटर को एयर टाइट डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रखें। कोशिश करें कि इतना ही पीनट बटर बनाएं, जो एक-दो दिन में खत्म हो जाए।
  • छिलके वाली या साबुत मूंगफली (Unshelled) को कई महीनों तक ठंडी और अंधेरी जगह में रखा जा सकता है, जबकि मूंगफली के दानों (shelled) को सालों तक एयरटाइट कंटेनर में रखा जा सकता है।
  • मूंगफली में तेल की मात्रा अधिक होती है, इसलिए कमरे के तापमान में लंबे समय तक रखने पर यह जल्दी खराब हो सकती है। मूंगफली को कमरे के तापमान में स्टोर कर सकते हैं, लेकिन इसकी ताजगी बनाए रखने और इसकी शेल्फ लाइफ को लंबा करने के लिए इन्हें रेफ्रिजरेटर में स्टोर किया जा सकता है। मूंगफली में पानी की मात्रा कम होती है, जिस कारण यह जमेगी नहीं।
  • ध्यान रहे कि मूंगफली को स्टोर करने से पहले उसे काटे नहीं।
  • मूंगफली को शीशे के या प्लास्टिक कंटेनर और जिप लॉक बैग में स्टोर कर सकते हैं।
  • मूंगफली किसी भी गंध को आसानी से अवशोषित कर लेती है, इसलिए उसे अन्य तीव्र गंध वाले या बदबूदार भोजन से दूर रखें।

मूंगफली के नुकसान –
किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा सेवन हानिकारक हो सकता है। इसी प्रकार अधिक मूंगफली खाने पर मूंगफली के नुकसान नजर आ सकते हैं, इसलिए ज्यादा मूंगफली खाने के नुकसान के बारे में जरूर जानें ।

  • मूंगफली से एलर्जी की समस्या हो सकती है। पहले कभी मूंगफली से एलर्जी हुई है, तो इसे खाने से बचें। चाहें, तो पहले मूंगफली के एक या दो दाने खाकर देख लें कि यह आपको सूट कर रही है या नहीं। कुछ लोगों को मूंगफली खाने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बिना देर करते हुए डॉक्टर से संपर्क करें।
  • अगर त्वचा संवेदनशील है, तो त्वचा में खुजली व रैशेज की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, त्वचा या गले में सूजन की समस्या भी एलर्जी के ही लक्षण हैं।
  • जरूरत से ज्यादा मूंगफली खाने से गैस, सीने में जलन यानी एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
  • इसके सेवन से अस्थमा या दमा का अटैक हो सकता है। इसलिए, जिन्हें अस्थमा की समस्या है, वो डॉक्टरी सलाह पर इसका सेवन करें।
  • मूंगफली की तासीर गर्म होती है, इसलिए ध्यान रहे कि ठंड के मौसम में इसका सेवन करें। अगर गर्मी में इसे खा रहे हैं, तो ज्यादा मात्रा में इसका सेवन न करें। गर्मी में इसका ज्यादा सेवन से पेट खराब कर सकता है।

अगर मूंगफली का सही तरीके से सेवन किया जाए, तो मूंगफली खाने के फायदे अनेक हैं। अब जब आपको मूंगफली के फायदे पता चल चुके हैं, तो आप इसे अपनी डाइट में शामिल करना न भूलें। अगर बात करें मूंगफली के नुकसान की, तो सीमित मात्रा में उपयोग करने से नुकसान से बचा जा सकता है। याद रखें कि सावधानी में ही सुरक्षा है। आप मूंगफली को संतुलित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल कर इसके गुणों को अपने शरीर में अवशोषित कर खुद को सेहतमंद रखें और इस जानकारी को दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कच्ची मूंगफली खाना सुरक्षित है?
हाँ, कच्ची मूंगफली का सेवन किया जा सकता है, लेकिन कच्ची मूंगफली हमेशा अच्छे ब्रांड की और साफ़-सुथरी चुनें। कच्ची मूंगफली खाने के फायदे शरीर को सही पोषण दे सकते हैं।

क्या खाली पेट मूंगफली खा सकते हैं?
नहीं, खाली पेट मूंगफली नहीं खानी चाहिए, यह पेट खराब कर सकती है।  हां, चाहें, तो इसे भिगोकर खा सकते हैं, भिगोने से इसका पाचन आसान हो जाता है। खाली पेट मूंगफली खाने के फायदे लेने हैं, तो इन्हें भिगोकर खाएं।

भीगी मूंगफली खाने के क्या लाभ हैं?
भीगी मूंगफली का सेवन करने से बॉडी बिल्डिंग में मदद मिल सकती है क्योंकि इसमें कैलोरी और पोषण प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।  शोध ये कहते हैं कि भीगी हुई और अंकुरित मूंगफली में फ्लेवोनोइड और एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ जाती है, इसलिए इन्हें मानव उपयोग के लिए उत्तम माना जा सकता है ।

मूंगफली के छिलके के क्या लाभ हैं?
मूंगफली के छिलके के फायदे सीधे नहीं लिए जा सकते हैं, ये खाने में अच्छे नहीं लगते हैं,  इसलिए इनका उपयोग पॉलीफेनोलिक यौगिकों को निकालने और पशुओं के भोजन के लिए किया जा सकता है। कच्ची मूंगफली के फायदे लेने के बाद इसके छिलके गाय भैंस को दिए जा सकते हैं।

मूंगफली के दाने खाने के क्या लाभ हैं?
मूंगफली के दाने शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और कई स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं।  मूंगफली के दाने के लाभ के बारे में ऊपर लेख में विस्तार से बताया गया है। मूंगफली के गुण, मूंगफली दाना में ही अधिक होते हैं।

मूंगफली कब तक चल सकती है?
मूंगफलियां 1 से 2 महीने तक चल सकती हैं, इन्हें फ्रिज में रखकर, इनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सकती है। मूंगफली को फ्रिज में रखने से पहले इन्हें एक एयर टाइट डिब्बे में रखें।

क्या मूंगफली कीटोजेनिक है?
नहीं, मूंगफली, फलियों (legume) का ही एक प्रकार है और फलियां कीटोजेनिक डाइट में नहीं आती हैं।

मूंगफली की तासीर कैसी होती है?
मूंगफली की तासीर गर्म होती है।

[ Read More ]»

करौंदा (क्रैनबेरी) के उपयोग,फायदे और नुकसान

Image SEO Friendly

करौंदे या क्रैनबेरी फल का नाम सुनते ही दिमाग में एक छोटे और गहरे लाल रंग के फल की तस्वीर उभर कर आती है। यह खाने में थोड़ा मीठा होता है और इसका उपयोग जूस के साथ-साथ जैम, चटनी जैसे खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है। करौंदा स्वाद में स्वादिष्ट होता है। साथ ही इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। करौंदे का उपयोग कई बीमारियों से बचाव में किया जा सकता है। वहीं, इस बात का भी ध्यान रखें कि यह किसी भी शारीरिक समस्या का इलाज नहीं है। करौंदा के औषधीय गुण केवल समस्या से बचाव व उनके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। 

करौंदा क्या है?
जो लोग करौंदा के बारे में नहीं जानते हैं, उनके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि करौंदा क्या है? यह गोल और छोटे आकार का एक फल है, जिसका रंग गहरा लाल होता है। यह सदाबहार झाड़ियों में उगता है। इसका वैज्ञानिक नाम वैक्सीनियम मैक्रोकारपन  है। वैसे ताे यह उत्तर अमेरिका में प्रमुख रूप से उगाया जाता था, लेकिन इसकी कई प्रजाति पूरे विश्व में उगाई जाती हैं। करौंदा के औषधीय गुण के कारण इसे खाने के साथ ही कई रोगों के प्रभाव को कम करने और अच्छी सेहत के लिए उपयोग किया जा सकता है। सेहत के लिए करौंदा के फायदे के लिए हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं।

करौंदा के औषधीय गुण
क्रैनबेरी फल में कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इस विषय पर अमेरिका की एक रिसर्च संस्था ने शोध कार्य किया है, जिसे एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। शोध से पता चला है कि क्रैनबेरी फल यानी करौंदे को अगर सुपरपावर वाला खाद्य पदार्थ कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। इसमें फ्लेवोनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटीम्यूटेजन (जीन की संरचना में होने वाले परिवर्तन को रोकने वाला गुण) और एंटीकार्सिनोजेन मौजूद होते हैं, जो इसे एक खास फल बनाने का काम करते हैं। इसके अलावा, इसमें न्यूरोप्रोटेक्टिव और एंटी-वायरल जैसे प्रभाव भी पाए जाते हैं। नीचे इन गुणों को विस्तारपूर्वक बताया गया है।

करौंदा सेहत के लिए क्यों अच्छा होता है?
एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार करौंदे में कई प्रकार के गुण मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। शोध में पता चला है कि करौंदा का उपयोग कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, रक्तचाप में, एंडोथेलियल फंक्शन (रक्त के थक्के, इम्यून सिस्टम और प्लेटलेट को नियंत्रित करना) जैसे उपचारों के लिया किया जा सकता है। इसके अलावा, यह ग्लूकोरेग्यूलेशन (प्लाज्मा ग्लूकोज के स्तर को कम करने), सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव की रोकथाम के लिए भी मददगार हो सकता है । एक अन्य शोध में पाया गया कि करौंदा का उपयोग कई प्रकार के बैक्टीरियल रोगों, कैंसर की समस्या और हृदय रोगों के रोकथाम के लिए भी किया जा सकता है । इससे यह कहा जा सकता है कि सेहत के लिए करौंदा फायदेमंद हो सकता है, जिनके बारे में हम आगे विस्तार से बता रहे हैं।

करौंदे (क्रैनबेरी) के फायदे – 
करौंदे में पाए जाने वाले पोषक तत्व और गुण इसे सेहत के लिए फायदेमंद बनाते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं स्वास्थ्य के लिए करौंदा किस प्रकार फायदेमंद हो सकता है।

1. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लिए करौंदे के फायदे
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी मूत्र पथ का संक्रमण, जो बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। इस समस्या को दूर करने के लिए करौंदे का उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार क्रैनबेरी फल यानी करौंदा के जूस में प्रोएन्थ्रोसिनेनिडिन-ए  कंपाउंड पाया जाता है। यह कंपाउंड मूत्र पथ का संक्रमण बनने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीहेडिशन (बैक्टेरिया को रोकने वाला) प्रभाव को बड़ा सकता है। शोध में दी गई जानकारी के जरिए हम यह मान सकते हैं कि यूटीआई और इसके कारण होने वाले कैथेटर से जुड़े यूटीआई और पोस्ट्राडियोथेरेपी प्रोस्टेट कैंसर से बचाव करने में क्रैनबेरी फायदेमंद हाे सकती है ।

2. स्वस्थ हृदय के लिए करौंदे का उपयोग
हृदय रोगों का होना आज एक आम समस्या बन गई है और करौंदा के औषधीय गुण इस समस्या को दूर करने में मददगार हो सकते हैं। अमेरिका की शोध संस्था द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया कि करौंदा में पाए जाने वाले पॉलीफेनोल्स, एलडीएल(खराब कोलेस्ट्रॉल) और रक्तचाप को कम करके हृदय रोग (सीवीडी) के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकते हैं। इसके अलावा, इसमें एंटीथ्रॉम्बोटिक (ब्लड क्लोटिंग को रोकने वाला) और एंटीफ्लेममेट्री(सूजन को किम करने वाला) गुण होते हैं, तो कि हृदय से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद हो सकते हैं। एंटीथ्रॉम्बोटिक रक्त के थक्कों के गठन को कम करता है और एंटीइन्फ्लेमेटरी  गुण सूजन की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं । हालांकि, यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसके उपचार में करौंंदा मददगार हो सकता है, लेकिन करौंदे के सेवन के साथ-साथ डॉक्टरी परामर्श भी जरूरी है। 

3. कैंसर की रोकथाम के लिए करौंदे के फायदे
कैंसर एक बहुत गंभीर बीमारी है और इसका रोकथाम समय से पहले ही कर लेना चाहिए। करौंदा कैंसर की इस समस्या से कुछ हद तक बचाव करने में फायदेमंद हो सकता है। शोध में पाया गया कि करौंदे के अर्क में कीमोप्रोटेक्टिव और एंटीकैंसर गुण हाेते हैं। करौंदे के अर्क में पाए जाने वाले ये गुण स्तन, कोलन, प्रोस्टेट और लंग्स के ट्यूमर को बढ़ने और उसके विस्तार को रोकने में कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं । वहीं, पाठक इस बात का ध्यान रखें कि कैंसर के लिए जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से ट्रीटमेंट कराना चाहिए, सिर्फ करौंदा इस समस्या को ठीक नहीं कर सकता है।  

4. मौखिक स्वास्थ्य के लिए करौंदे का उपयोग
सेहत के साथ ही करौंदा मुंह के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। एक शोध में पाया गया कि क्रैनबेरी फल के अर्क में कुछ ऐसे गुण होते हैं, जो कुछ हद तक पॉरफाइरोमोनस जिंजिवलिस और फुसोबैक्टीरियम न्यूक्लिएटम नामक ओरल बैक्टीरिया के गठन को रोकने में मदद कर सकते हैं। यह दोनों बैक्टेरिया दांतों की कैविटी का कारण बन सकते हैं, जिन्हें करौंदे के अर्क का उपयोग कर दूर किया जा सकता है। इसके अलावा, शोध में यह भी पाया गया कि क्रैनबेरी अर्क में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो मौखिक संक्रमण के उपचार में फायदेमंद हो सकते हैं । वहीं, ओरल हेल्थ से जुड़े एक शोध में पाया गया कि क्रैनबेरी फल दांतों और मसूढ़ों की सूजन को कम कर सकता है और दांतों पर बैक्टीरिया जमने से बचाव कर सकता है । हालांकि, इस विषय में अभी और शोध की आवश्यकता है।

5. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए करौंदे के फायदे
कोलेस्ट्रॉल की परेशानी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इस समस्या को कम करने में क्रेनबेरी पाउडर लाभदायक हो सकता है। जानवरों पर किए गए शोध में पाया गया कि क्रैनबेरी पाउडर द्वारा किए गए उपचार से एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि हुई। शोध के अनुसार, क्रैनबेरी में पॉलीफेनोलिक और फ्लेवोनोइड पाए जाते हैं। ये दोनों ही अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। फिलहाल, यह शोध जानवरों पर किया गया है, इसलिए कोलेस्ट्रॉल से ग्रस्त मरीज को डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए। मनुष्यों में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में क्रेनबेरी कैसे प्रभावी हो सकती है, इस पर अभी शोध किया जाना बाकी है। । इसके अलावा, एक अन्य शोध में भी इस बात की पुष्टी की गई है कि क्रैनबेरी की खुराक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और कुल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में कारगर हो सकती है ।

6. किडनी को स्वस्थ रखे
क्रोनिक किडनी रोग के रोगियों में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, और आंत की समस्या जैसी कई जटिलताएं होती हैं, जो बहुत गंभीर रूप ले सकतीं हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए करौंदे का इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्राजील की शोध संस्था द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि करौंदे से यूटीआई काे कम किया जा सकता है जो किडनी के संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके अलावा, इसमें पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण क्रोनिक किडनी रोग की जटिलटाएं जैसे कि सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के प्रभाव को कम कर सकते हैं । इसके अलावा, एक अन्य शोध में पाया गया कि करौंदे में एंटीलिथोजेनिक गुण पाए जाते हैं। यह गुण कैल्शियम ऑक्सालेट यानी किडनी स्टोन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है ।

7. प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण कई प्रकार की बीमारियों और कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है। करौंदे के औषधीय गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मददगार हो सकता है। इस विषय पर अमेरिका के डेविड गेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन में शोध किया गया है। इस शोध के अनुसार क्रैनबेरी में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। ये गुण संक्रमण को रोकने की क्षमता के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में फायदेमंद हो सकते हैं ।

8. मधुमेह की रोकथाम के लिए करौंदे का उपयोग
मधुमेह की समस्या को क्रैनबेरी के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इस विषय पर ब्राजील की संस्था, डिपार्टमेंट ऑफ न्यूट्रीशन एंड हैल्थ द्वारा 12 हफ्तों तक शोध किया गया जिसे एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। शोध में पाया गया कि करौंदे के रस में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो रक्त में मौजूद ग्लोकोज के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

9. प्रेगनेंसी में संक्रमण से बचाए
कई शोधों के अनुसार, यूरिन में रहने वाला एसिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियूरिया गर्भावस्था में यूटीआई का कारण बन सकता है। शोध में पाया गया कि गर्भावस्था में क्रैनबैरी जूस का सेवन यूटीआई और एसिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियूरिया से होने वाले संक्रमण से सुरक्षा दिलाने में मददगार हो सकता है। हालांकि इस विषय पर और शोध की आवश्यकता है कि क्रैनबेरी के कौन से घटक इस समस्या में फायदेमंद हो सकते हैं । गर्भावस्था में संक्रमण होने पर इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना बेहतर होगा।

10. प्रोस्टेट डिसऑर्डर में फायदेमंद
प्रोस्टेट डिसऑर्डर वृद्ध पुरुषों में पाया जाने वाला एक सामान्य रोग है, जो प्रोस्टेट ग्रंथी के बढ़ने के कारण होता है। यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसमें प्रोस्टेट कैंसर और बार-बार पेशाब आना जैसी समस्याएं शामिल हैं । क्रैनबेरी का इस्तेमाल करने पर इस समस्या को कम किया जा सकता है। 42 लोगों को 6 महीने तक क्रैनबेरी का पाउडर दिया गया। शोध में पाया गया कि क्रैनबेरी के पाउडर में पाए जाने वाले गुण इस समस्या को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं 

11. त्वचा के लिए फायदेमंद
अच्छी सेहत के साथ ही करौंदे का उपयोग अच्छी त्वचा के लिए भी किया जा सकता है। अमेरिका की शोध संस्था डिपार्टमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस के शोध में पाया गया कि करौंदे में एंटी-एजिंग गुण होते हैं तो बढ़ती उम्र के कारण होने वाले प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं । इसके अलावा, एक और अन्य शोध में पाया गया कि करौंदे में बैक्टीरियोस्टेटिक (बैक्टीरिया के प्रभाव से बचाने वाला) गुण होते हैं, जो एरिथेमा (त्वचा पर होने वाले लाल दाने) रोगियों में त्वचा की स्थिति को सुधार करने में फायदेमंद हो सकता है ।

ताजा करौंदे (क्रैनबेरी) बनाम सूखे करौंदे (क्रैनबेरी)
ताजे क्रैनबेरी सेहत के लिए फायदेमंद बायोएक्टिव कंपाउण्ड, जैसे कि प्रोएंथोसाइनिडिन, साइनाइडिन और पेओनिडिन एंथोसायनिन, से भरपूर होते हैं। साथ ही यह यूटीआई और हृदय रोगों की रोकथाम में सहायता भी प्रदान कर सकते हैं। इसमें पानी की अच्छी मात्रा पाई जाती है, लेकिन यह कम मीठे होते हैं। वहीं, इसके विपरीत सूखे करौंदे में पानी की मात्रा नहीं पाई जाती है और यह ताजे करौदों की अपेक्षा ज्यादा मीठे होते हैं। इसके अलावा, दोनों के पोषक तत्व और गुणों में भी काफी अंतर देखने को मिलता है । हालांकि, ताजे और सूखे करौंदे में तुलनात्मक रूप ये कोई शोध देखने में नहीं मिलता है, लेकिन फिर भी दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

करौंदा का उपयोग – 
यह तो स्पष्ट हो गया है कि करौंदे के फायदे कई हैं। ऐसे में करौंदे का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है, जैसे :
  • करौंदे की चटनी बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं।
  • वहीं, कुछ लोग करौंदे की जैम बनाकर भी इसका सेवन करते हैं।
  • करौंदे का जूस बनाकर पिया जा सकता है।
  • चाहें तो करौंदे का अचार डालकर भी इसे भोजन के साथ खा सकते हैं।
  • अब जानते हैं कि क्रैनबेरी के जूस को घर पर कैसे बनाया जा सकता है।

करौंदे का जूस बनाने का तरीका
घर में करौंदे के जूस को बनाने के लिए आप नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं।

सामग्री:
  • 2 कप क्रैनबेरी ताजा या जमे हुए।
  • 2 कप पानी।
  • डेढ़ चम्मच संतरे का रस (वैकल्पिक)।
  • कुछ बूंद कच्चा शहद या अन्य पसंदीदा स्वीटनर, स्वाद के लिए (वैकल्पिक)।

विधि:
  • सबसे पहले एक ब्लेंडर में पानी और क्रैनबेरी डाल कर अच्छे से ब्लेंड कर लें।
  • इसके बाद एक छन्नी से इस रस को छान लें और रस को एक कांच के बर्तन में निकाल लें।
  • अब इसमें नींबू या संतरे का रस और शहद मिलाएं।
  • इस मिश्रण को एक ब्लेंडर में डालकर फिर से ब्लेंड कर लें।
  • इसके बाद इसे एक बार फिर से छान लें और रस को फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें।
  • करौंदे का स्वादिष्ट और पौष्टिक रस पीने के लिए तैयार है।

करौंदा को लम्बे समय तक सुरक्षित कैसे रक्खे?
करौंदे को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे अच्छी तरह से धोकर फ्रीजर में एयर टाइट बैग में रख दें। जमने के बाद इसे एक फ्रीजर बैग में डालकर फ्रीज में रख दें। इससे करौंदे का उपयोग 15 से 20 दिनों तक आसानी से किया जा सकता है।

करौंदा के नुकसान – 
ऐसा नहीं है कि करौदे के केवल फायदे ही देखने में मिलते हो, कुछ मामलों में इसके नुकसान भी देखने में आते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं करौंदा के नुकसान के बारे में ।
  • करौंदा का सेवन अधिक मात्रा में करने पर यह ऑक्सालेट स्टोन की समस्या पैदा कर सकता है। यह पथरी के जैसे ही होता है।
  • अधिक मात्रा में लगातार सेवन करने पर यह रक्त में मौजूद ग्लुकोज के स्तर को भी बढ़ा सकता है।
  • इसके सेवन से मतली, सिरदर्द और एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है।
  • इसके अलावा इसके ज्यादा सेवन से आंतों और पाचन संबंधी समस्या भी हो सकती है।
  • स्किन रिएक्शन जैसी समस्या देखने को मिल सकती हैं।

अच्छी सेहत और कई प्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिए करौंदे का उपयोग किया जा सकता है। आर्टिकल के माध्यम से आपने जाना कि करौंदा में कितने प्रकार के गुण होते हैं, जो कई समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद हो सकते हैं। अगर करौंदे का सेवन सीमित मात्रा में और सही जानकारी के साथ किया जाए, तो स्वास्थ्य के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

अकसर पूछे जाने वाले सवाल
क्या होगा यदि क्रैनबेरी के जूस को अधिक मात्रा में सेवन किया जाए?

क्रैनबेरी के जूस को अधिक मात्रा में पीने पर ऑक्सालेट स्टोन की समस्या पैदा हो सकती है ।

क्या कच्चे करौंदा का सेवन किया जा सकता है?
हां, कच्चे करौंदा का सेवन अचार और सब्जी के रूप में किया जा सकता है।

क्या करौंदा के बीज खाए जा सकते हैं?
बिना जानकारी के करौंदा के बीज को नहीं खाना चाहिए।

क्या सूखे करोदें सेहत के लिए लाभदायक होते हैं?
हां, ताजा करौंदे के जैसे ही अगर सूखे करौंदे का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए, तो सूखे करौंदे भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं ।

[ Read More ]»
”go"