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महिला स्वास्थ्य, वुमन हेल्थ टिप्स

 
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महिलाओं और पुरुषों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं एक-दूसरे से अलग होती हैं। ऐसे में दोनों को होने वाली बीमारियां और उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव भी अलग होते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दोनों की स्वास्थ्य समस्याएं विपरीत क्यों हैं? दुनिया में सभी बमारियों का प्रभाव पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग तरीके से दिखता है।

मासिक धर्म, गर्भावस्था, प्रसव और रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का हिस्सा हैं, जो उन्हें पुरुषों से अलग बनाती हैं, ऐसे में उनकी बीमारियां और शरीर पर पड़ने वाला इसका प्रभाव भी अलग होता है। कई ऐसी बमारियां भी हैं जो सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करती हैं। 

दुनिया के अधिकांश हिस्सों और संस्कृतियों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की सामाजिक स्थिति थोड़ी हल्की है। यही वजह है कि महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, उनके उपचार और देखभाल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। समय बढ़ता गया, लेकिन महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हो सका। इसकी वजह से वह भेदभाव का शिकार होती रहीं। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और दुनिया के सभी देश लैंगिक असमानता को दूर करने के साथ महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने के उपाय कर रही हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत क्यों? - 
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक दुनिया की कुल आबादी का 49.6 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। साल 2011 में हेल्थ केयर वीमेन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि दुनिया के श्रम विभाग में महिलाओं की दो-तिहाई हिस्सेदारी है, लेकिन इसके विपरीत उनकी आमदनी कुल आय की केवल 10 फीसद ही है। इस डेटा में घरेलू कामकाज में लगी महिलाओं को शामिल नहीं किया गया है।

दुनिया की आबादी का इतना बड़ा हिस्सा होने और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद महिलाओं को उस प्रकार से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाईं, जिनकी वे ​वास्तविक हकदार थीं। महिला और पुरुष व्यवहारिक और शारीरिक दृष्टि से अलग हैं। इसका अर्थ है कि महिलाओं की आवश्यकताओं को कई सामाजिक पहलुओं पर वन साइज फिट ऑल के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जाना चाहिए, क्योंकि उनका अच्छा स्वास्थ्य (या इसकी कमी) मनुष्यों की अगली पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर तब जब पुरुषों से इतर महिलाओं को विशष रूप से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

विशेष रूप से महिलाओं को प्रभावित करने वाली बीमारियां - 
पुरुषों की तुलना में महिलाओं का स्वास्थ्य और उनकी आवश्यकताएं अलग होती हैं। मासिक धर्म, गर्भावस्था, प्रसव और रजोनिवृत्ति जैसे जैविक चरणों का अनुभव कर वह कई प्रकार की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करती हैं। नीचे दी गई वह समस्याएं हैं, जिनका सामना अकेले महिलाओं को करना पड़ता है।
  • स्त्रीरोग संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे अनियमित पीरियड्स, बैक्टीरियल वजिनोसिस,  पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, एडिनोमायोसिस, यूटेराइन फाइब्रॉयड और वुल्वोडनिया जैसे विकार।
  • गर्भावस्था से संबंधित समस्याएं जैसे प्रसव के बाद की देखभाल, गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म, सिजेरियन सेक्शन, जन्म दोष, स्तनपान संबंधी समस्या और प्रसव के बाद अवसाद की अवस्था।
  • ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर।
  • टर्नर सिंड्रोम और रेट्स सिंड्रोम जैसे विकार।
  • हिंसा जैसे महिला जननांग विकृति और शिशु हत्या।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को विशेष प्रभावित करने वाली बीमारियां - 
ऐसी कई बीमारियां हैं जो पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकती हैं, लेकिन इसका महिला पर होने वाला असर अलग तरीके का होता है। इन मामलों में दोनों के लक्षण में समानता हो सकती है, लेकिन उसके उपचार और बीमारी से उबरने के लिए देखभाल व आवश्यक ​परिस्थितियां अलग होती हैं। निम्नलिखित बीमारियां महिलाओं को अलग रूप से प्रभावित करती हैं।
  • शराब की आदत का प्रभाव पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर अधिक पड़ता है। शराब की लत के चलते उनमें स्तन कैंसर, दिल संबंधी रोग और भ्रूण के अल्कोहल सिंड्रोम (जहां माँ के शराब पीने की आदतें शिशुओं के मस्तिष्क को क्षति पहुंचा सकती है) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • हृदय रोग पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करते हैं, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने से मौत की आशंका अधिक रहती है।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अवसाद और चिंता होने की समस्या अधिक होती है, प्रसव के बाद अवसाद का डर महिलाओं में अधिक रहता है।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गठिया की समस्या होने का खतरा अधिक रहता है।
  • यौन संचारित रोग (एसटीडी) पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करते हैं, लेकिन उपचार में देरी से महिलाओं में बांझपन हो सकता है। महिलाओं में इसके लक्षण कई बार बहुत स्पष्ट नजर नहीं आते हैं, जिनके चलते उनका उपचार नहीं हो पाता है।
  • अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (एपीए) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं में तनाव बढ़ रहा है और जिससे उनमें बांझपन होने का खतरा अधिक रहता है।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाएं स्ट्रोक का शिकार ज्यादा होती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जहां स्ट्रोक का प्रमुख कारण परिवारिक इतिहास, हाई ब्लडप्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल होता है, वहीं गंर्भनिरोधक दवाओं, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और गर्भावस्था के चलते महिलाओं में यह खतरा बढ़ जाता है।
  • पेशाब के तरीके के चलते पुरुषों की तुलना में महिलाओं को मूत्रमार्ग संक्रमण (यूटीआई) होने का खतरा अधिक रहता है।
महिला स्वास्थ्य के चुनौतीपूर्ण कारक - 
भले ही दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की हो,  फिर भी भारत सहित कई देशों में उनके स्वास्थ्य के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निम्न कारक इस स्थिति को उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार हैं।

सामाजिक-सांस्कृतिक कारण
विश्व के अधिकांश हिस्सों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को वह सामाजिक अधिकार नहीं मिल सके, जो मिलने चाहिए थे। इस लैंगिक असमानता ने महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक, सामाजिक स्वतंत्रता और स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर बनाया है। दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं को अकेले यात्रा करने, स्वास्थ्य के लिए भी दूसरों पर आश्रित रहने, यहां तक कि परिवार नियोजन के मामले में भी अपने पक्ष को रखने का अधिकार नहीं है। समाज में लड़के को प्राथमिकता देने के चलते न केवल कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या बढ़ी है, साथ ही स्वच्छता, पोषण के मामले में महिलाएं आजीवन उपेक्षा का शिकार भी रही हैं।

आर्थिक कारक
यूनाइटेड नेशनंस वूमेन और विश्व बैंक द्वारा 2013 में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में गरीबी से जूझ रहे 767 मिलियन (76.7 करोड़) लोगों में एक बड़ा हिस्सा महिलाओं और बच्चों का है। गरीबी का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, 2011 में हेल्थ केयर वुमेन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, काम के घंटों में दुनिया में दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाली महिलाएं आर्थिक रूप से कुल आय का सिर्फ 10 फीसदी ही कमाती हैं।

वैज्ञानिक और चिकित्सा अनुसंधान
2003 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार चिकित्सा, उपचार और स्वास्थ्य संबंधी तकनीकों के आधुनिकीकरण के निर्धारण के लिए किए गए सर्वे में महिलाओं को कम आंका जाता है। ऐसे में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जरूरी अवयव कहीं न कहीं रह जाते हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे -
महिलाओं में आमतौर पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डब्ल्यूएचओ जैसी शीर्ष संस्थाओं ने इनपर विशेष ध्यान देने की अपील की है। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े निम्नलिखित 10 मुद्दों पर भारत सहित दुनियाभर के देशों को ध्यान देने की आवश्यकता है।

1. कैंसर
महिलाओं में दो प्रकार के कैंसर (स्तन और सर्वाइकल) होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। प्रति वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हर साल लगभग 5 लाख महिलाएं इन दोनों प्रकार के कैंसर के चलते मौत का शिकार हो जाती हैं। अगर इन कैंसर के लक्षण समय रहते पता चल जाएं तो उनके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होती है।

  •     स्तन और सर्वाइकल के कैंसर के बारे में जागरुकता
  •     कैंसर की स्क्रीनिंग और इलाज के विशेष रोकथाम और सस्ते इलाज
  •     ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के टीकाकरण की आसानी से उपलब्धता
  •     स्तन कैंसर में मास्टेक्टॉमी (स्तनों को काटकर अलग करना) से जुड़े मिथों को दूर करना
2. प्रजनन से संबंधित जानकारियां
प्रजनन और उससे जुड़े कई पहलुओं पर कई अध्ययन किए जा चुके हैं। प्रजनन प्रणाली एक जटिल प्रक्रिया है। वैसे तो यूटीआई और बैक्टीरियल संक्रमण महिला की गर्भधारण शक्ति को प्रभावित नहीं करते हैं। हालांकि, भविष्य में इसके कई दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े तथ्यों को जानने और समझने के लिए निम्न विषयों पर ध्यान देना आवश्यक है।
  •     प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में फैली अफवाहों को दूर करना
  •     प्रजनन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में लोगों को जागरुक करना
  •     गर्भनिरोधकों के प्रयोग के बारे में जागरुकता और लोगों तक इसकी उपलब्धता को आसान बनाना।
  •     बच्चों को यौन शिक्षा और इससे जुड़ी जानकारियां देना।
3. संबंधी स्वास्थ्य जानकारियां
प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल से ही शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ साथ विश्वस्तर पर मातृ मृत्यु की संख्या को कम किया जा सकता है। इस संबंध में डॉक्टरों के साथ-साथ दोस्तों और परिवार के देखभाल की एक बड़ी भूमिका रहती है। मातृ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए।
  •     प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद की देखभाल के बारे में उचित जानकारी
  •     गर्भावस्था से पहले और उसके दौरान स्क्रीनिंग, परीक्षण और टीकाकरण के सस्ते इंतजाम
  •     पोषण, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल पर विशेष जोर
  •     गर्भपात की स्थिति में मां का विशेष शारीरिक ध्यान और ख्याल रखना
  •     लड़कियों के जन्म से जुड़े मिथों और पुरानी सोच को दूर करना

4. एचआईवी / एड्स
जागरुकता के अभाव में इस बीमारी ने दुनियाभर में तेजी से अपने पांव फैलाए हैं। ह्यूमन इम्यूनोडिफ़िशिएंसी वायरस (एचआईवी) के पहले मामले के सामने आने के तीन दशक बाद भी अब तक इसके खतरे को कम नहीं किया जा सका है। युवा महिलाओं में इस संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। यौन शिक्षा, कंडोम की लोगों तक पहुंच न होना, साथ ही सुरक्षित सेक्स के बारे में जानकारियों के अभाव के चलते इस संक्रमण का फैलाव तेजी से हुआ। लोगों को जागरुक कर इस संक्रमण को रोकने के व्यापक प्रयास किए जाने की आवश्यक है।

5. यौन संचारित रोग
एचआईवी / एड्स और एचपीवी के अलावा, महिलाओं में गोनोरिया, क्लैमाइडिया और सिफलिस जैसे यौन संचारित रोगों के होने का खतरा होता है। चूंकि, पुरुषों की तरह महिलाओं में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए इसका आसानी से उपचार नहीं हो पाता है। इन संक्रमणों से न केवल महिलाओं को स्वास्थ्य समस्याओं से दो चार होना पड़ता है, साथ ही उनके प्रसव और शिशु स्वास्थ्य में भी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। महिलाओं में एसटीआई से बचने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए।
  •     यौन शिक्षा को जानकारी।
  •     कंडोम, गर्भनिरोधक के उपयोग से यौन संचारित रोगों को रोक जा सकता है।
  •     कंडोम, गर्भ निरोधकों की आसानी से उपलब्धता को सुनिश्चित करना।
6. महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को रोकना
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 50 वर्ष से कम आयु वाली हर तीन में से एक महिला को परिचित या किसी अजनबी से यौन हिंसा का शिकार होना पड़ता है। हिंसा चाहे शारीरिक हो या यौन प्रकृति की, इसका महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसे दूर करने के लिए निम्न विषयों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
  • बच्चों का यौन शिक्षा दें। पुरुषों और महिलाओं दोनों को यौन हिंसा को रोकने के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।
  • प्रशासन और चिकित्सकों को महिलाओं के साथ होने वाले हिंसा के बारे में संवेदनशील बनाना।
7. मानसिक स्वास्थ्य
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक अवसाद, चिंता और कई तरह की मनोदैहिक शिकायतें महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं। इसका कई बार मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर देखने को मिलता है, जो जीवन को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
  • मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों के बारे में बातचीत कर उसके निदान और उपचार के बारे में चिंतन करें।
  • इस तरह की समस्याओं से प्रभावित महिलाओं को सामाजिक स्तर पर सहायता प्रदान करें, जिससे वह जल्द से जल्द इससे बाहर आ सकें।
8. गैर-संचारी रोग
महिलाओं में गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि तेजी से फैल रही बीमारियां हैं। इनकी रोकथाम के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
  • इन बीमारियों के बारे में लोगों के बीच जागरुकता फैलाना। इससे लड़ने के लिए उचित उपचारों के बारे में जानकारी देना।
  • लड़कियों और महिलाओं को उचित पोषण, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य के द्वारा जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों और दवाओं की लोगों तक आसान पहुंच को सुनिश्चित करना।
9. कम उम्र में महिलाओं को होने वाली समस्याएं
आज कल कम उम्र से ही लड़कियों को जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। भविष्य में यह बड़ी बीमारी का रूप भी ले सकती हैं। उचित पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के अभाव में उन्हें कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे एसटीआई, यूटीआई, एचआईवी और कई तरह की प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य चुनौतियां उनके सामने खड़ी हो सकती हैं।
  •  बालिकाओं को उनके स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करें।
  •  माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह लड़कियों को स्वास्थ्य और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएं।
  •  स्वास्थ्य सुविधाओं की आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना।
10. उम्र के साथ महिलाओं को होने वाली समस्याएं
विकासशील समाज में उम्र बढ़ने के साथ महिलाएं काम के लिए घर से बाहर जाना बंद कर देती हैं। जिससे उनके लिए पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और इससे जुड़ी सेवाओं का लाभ लेना मुश्किल हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं में पुरानी गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और गुर्दे की बीमारी होनी आम समस्या है। स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए।

  • कम उम्र में ही लड़कियों को भविष्य की संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जागरुक करें। ताकि वह पर्याप्त सुरक्षा और रोकथाम के इंतजाम कर सकें।
  • सस्ती और आसानी से सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • बुढ़ापे के दौरान महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए उनके खानपान और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर माहौल दें।

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पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम) के घरेलू उपाय

 
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पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पीसीओएस, इंडोक्राइन यानी हार्मोन से जुड़ी बीमारी है जिसमें महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन जैसे- टेस्टोस्टोरोन का उत्पादन प्रभावित होता है। वैसे तो पीसीओएस होने का सटीक कारण क्या है यह अब तक पता नहीं चल पाया है लेकिन वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि एक दूसरे हार्मोन- इंसुलिन (इंसुलिन की उच्च मात्रा या इंसुलिन प्रतिरोध)- का इससे कुछ संबंध हो सकता है।

वैसे तो इस बीमारी के नाम में 'सिस्ट' ये शब्द आता है लेकिन पीसीओएस से पीड़ित सभी महिलाओं की ओवरी में सिस्ट हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसे साधारण शब्दों में इस तरह से समझ सकते हैं कि, पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जिसमें ओवरीज यानी अंडाशय बहुत सारे कूप (फॉलिकल्स) का उत्पादन करता है जो कभी भी अंडे बनने के लिए मैच्योर नहीं हो पाते हैं। इस वजह से इस बीमारी से पीड़ित कुछ महिलाएं कभी भी ऑव्यूलेट नहीं कर पातीं और इस स्थिति को ऐनोवुलेशन या डिंबक्षरण कहा जाता है। तो वहीं कुछ महिलाओं में अत्यधिक फॉलिकल्स की मौजूदगी की वजह से ओवरीज का आकार बड़ा हो जाता है। 

पीसीओएस का घरेलू उपाय है दालचीनी - 
पीसीओएस वाली महिलाओं में आमतौर पर इंसुलिन प्रतिरोध और डाइस्लिपिडेमिया की समस्या होती है और दालचीनी इन दोनों समस्याओं को ठीक करने में मदद करती है। पीसीओएस से पीड़ित 66 महिलाओं में किए गए अध्ययन से पता चला कि जिस समूह ने 12 सप्ताह के लिए प्रतिदिन 1.5 ग्राम दालचीनी पाउडर का 10 मिलीग्राम मेडरॉक्सी प्रोजेस्टेरॉन एसिटेट के साथ रोजाना सेवन किया उनमें फास्टिंग इंसुलिन और इंसुलिन प्रतिरोध में कमी देखी गई उस ग्रुप की तुलना में जिन्होंने प्लेसबो का सेवन किया था।

एक और छोटी स्टडी जिसमें 15 महिलाएं शामिल थीं उसमें पाया गया कि 8 हफ्तों तक लगातार दालचीनी का सेवन करने से इंसुलिन प्रतिरोध कम हो गया। साथ ही दालचीनी का पाउडर मोटापे को भी कम करने में मदद करता है।

कैसे यूज करें दालचीनी
1 चम्मच दालचीनी पाउडर को 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर रोजाना कुछ महीनों तक पिएं। इसके अलावा आप अपनी डेली डाइट जैसे- अनाज, दलिया, पनीर, मूंगफली, मक्खन, सैंडविच आदि में भी दालचीनी पाउडर छिड़कर उसका सेवन कर सकती हैं। ग्रीन टी में भी दालचीनी को डालकर उसे पीना फायदेमंद होता है क्योंकि ग्रीन टी वजन घटाने में और हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखने में मदद करती है जिससे पीसीओएस के लक्षण कम हो सकते हैं।

पीसीओएस का देसी नुस्खा है अलसी के बीज - 
पीसीओएस से पीड़ित 31 साल की एक महिला की केस स्टडी सामने आयी जिसके मुताबिक अलसी के बीज ने महज 4 महीने के अंदर महिला के बीएमआई में सुधार करने के साथ ही इंसुलिन और टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को भी कम करने में मदद की। यह महिला रोजाना 30 ग्राम अलसी के बीज को सप्लिमेंट के तौर पर ले रही थी। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो अलसी में लिग्नैन होता है जो हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। लिग्नैन प्लांट पॉलीफेनॉल्स होते हैं और रिसर्च की मानें तो ये हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाकर कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करते हैं।

अलसी को सुपरफूड भी कहा जाता है क्योंकि इसमें फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक मात्रा में होता है जिससे एंड्रोजेन के स्तर को कम करने और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को मैनेज करने में मदद मिलती है।

अलसी को कैसे करें यूज
आप चाहें तो 2 चम्मच अलसी के बीज को पानी से धोकर सीधे खा सकती हैं, लेकिन ऐसा करना मुश्किल हो सकता है इसलिए आप चाहें तो अलसी के बीज को अपनी स्मूदी में, दलिया में या किसी और चीज में भी मिलाकर खा सकती हैं।

पीसीओएस का घरेलू उपाय है पहाड़ी पुदीने की चाय - 
स्पियरमिंट यानी पहाड़ी पुदीने की चाय पीने से लूटेनाइजिंग हार्मोन को बढ़ावा मिलता है और फॉलिकल को उत्तेजित करने वाले हार्मोन में कमी आती है और ये दोनों ही चीजें मासिक धर्म की उचित प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी हैं। साथ ही यह चाय एंड्रोजेन और हिर्सुटिज्म (अत्यधित अनचाहे बालों की समस्या) को भी कम करने में मदद करती है।

हाल ही में, जानवरों पर हुए एक छोटे अध्ययन में, पीसीओएस को एस्ट्रैडियोल इंजेक्शन के जरिए चूहों में प्रेरित किया गया था। इसके बाद, चूहों को चार समूहों में विभाजित किया गया। चूहों के जिस समूह का इलाज पहाड़ी पुदीना और अलसी के अर्क के साथ किया गया था, उनमें शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन में वृद्धि हुई और टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट आयी। इस अध्ययन को मार्च 2020 में जर्नल ऑफ ओवेरियन रिसर्च में प्रकाशित किया गया था। 

पहाड़ी पुदीने का इस्तेमाल कैसे करें
पहाड़ी पुदीने की 2-3 पत्तियों को 1 कप गर्म पानी में 2-4 मिनट के लिए भिगोकर रखें। जितनी ज्यादा देर तक पत्तियां पानी में रहेंगी उनका उतना ही ज्यादा फ्लेवर आपको मिल पाएगा। आप चाहें तो इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए चुटकी भर चीनी भी डाल सकती हैं। लेकिन ज्यादा चीनी न डालें क्योंकि इस चाय को रोजाना 1 महीने तक पीना है। 

पीसीओएस से छुटकारा पाने का तरीका है सेब का सिरका - 
सेब का सिरका भी पीसीओएस (PCOS) से निपटने के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह रक्त शर्करा को नियंत्रित और आपके शरीर को बहुत अधिक इंसुलिन के उत्पादन से दूर रखने में मदद करता है। कम इंसुलिन का मतलब है कम टेस्टोस्टेरॉन। इसके अलावा, यह आपका वजन कम करने और आपके समग्र स्वास्थ्य का सुधार करने में मदद करेगा।

सेब के सिरके का कैसे करें इस्तेमाल
एक गिलास पानी में सेब के सिरके के दो चम्मच मिक्स करें। रोजाना सुबह खाली पेट इसे पिएं। कई हफ्तों तक रोजाना ऐसा करना जारी रखें या जब तक आपको कोई सुधार ना दिखना शुरू हो जाए। अगर आपको इसका स्वाद पसंद नही है तो आप इसमे संतरे या किसी अन्य फल के रस के साथ मिक्स करके भी पी सकती हैं।

पीसीओएस को दूर करता है मेथी -
मेथीदाना शरीर में ग्लूकोज चयापचय को बढ़ावा देती है और इंसुलिन को बढ़ने से रोकती है। इसके अलावा यह आपके हार्मोन संतुलन, कम कोलेस्ट्रॉल, वजन घटाने में सहायता और स्वस्थ दिल के कामकाज को बढ़ावा देने में भी मदद करती है।

मेथीदाना को कैसे करें यूज
6-8 घंटे के लिए पानी में मेथी के बीज के तीन चम्मच भिगोएं। आप खाली पेट हर सुबह शहद के साथ भीगे हुए मेथी के बीज की एक चम्मच लें। इसके अलावा एक चम्मच दोपहर के भोजन से 10 मिनट पहले और एक चम्मच रात के खाने से पहले लें। दैनिक रूप से कुछ हफ्तों के लिए इस उपचार को जारी रखें या जब तक आपको सुधार ना दिखना शुरू हो जाए। आप मेथी के बीज और पत्तियों को अपने नियमित आहार में भी शामिल कर सकती हैं। 

पीसीओएस का घरेलू उपाय है कैमोमाइल चाय - 
कैमोमाइल की चाय सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं होती बल्कि कई फायदों वाली भी होती है। रात के खाने के बाद अगर एक कप कैमोमाइल की चाय पी ली जाए तो शरीर रिलैक्स हो जाता है और अच्छी नींद आती है। इसके अलावा मासिक धर्म के दौरान इस चाय का एक कप दर्द और मेन्स्ट्रुअल क्रैम्प्स को कम करने में मदद करता है। इस चाय में ब्लड शुगर को कम करने और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी होती है जिस वजह से यह पीसीओएस वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है। चूहों में की गई एक स्टडी में पाया गया कि जिन चूहों को  कैमोमाइल का अर्क दिया गया उनमें फॉलिक्यूलर सिस्ट में कमी देखने को मिली। 

इसके अलावा 80 महिलाओं को एक ट्रायल में शामिल किया गया जिसमें से 40 महिलाओं को 3 महीने तक रोजाना 370 मिलिग्राम कैमोमाइल टैबलेट दी गई जबकी 40 महिलाओं को एक प्लेसबो। इससे पता चला कि कैमोमाइल टैबलेट खाने वाली महिलाओं के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का लेवल कम हो गया।

कैमोमाइल को कैसे यूज करें
1 चम्मच कैमोमाइल की चाय या कैमोमाइल चाय के 1 टीबैग को 1 कप गर्म पानी में डालें और कप को ढक्कन से अच्छी तरह से ढंक लें। करीब 4-5 मिनट तक चाय को पानी में ही भीगने दें और फिर इसे पी लें।

पीसीओएस कम करने का तरीका है मछली का तेल - 
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली का तेल एण्ड्रोजन को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में मदद करता है। क्लीनिकल न्यूट्रीशन के अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड एण्ड्रोजन के स्तर का संतुलन बना कर पीसीओएस के लक्षणों में सुधार करता है। साथ ही, अपने आहार में मछली या मछली के तेल की खुराक लेना सूजन को कम करने, शरीर में वसा को कम करने और पुराने रोगों के खिलाफ लड़ाई में मदद करता है। मछली के तेल की खुराक के लिए कोई मानक दैनिक खुराक नहीं है। आप एक से तीन कैप्सूल दिन में दो या तीन बार ले सकती हैं या अपने चिकित्सक के द्वारा दिए गये सुझाव के अनुसार लें।  

पीसीओएस का घरेलू उपाय है मुलेठी - 
मुलेठी में ग्लिसाइरिजिक एसिड होता है जो खून में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को कम करने में मदद करता है लेकिन सिर्फ तभी जब आप लगातार 2 महीने या इससे ज्यादा समय तक रोजाना 3.5 ग्राम मुलेठी का सेवन करें। साल 2012 में इंटरनैशनल जर्नल ऑफ फार्मासूटिकल एंड फाइटोफार्माकोलॉजिकल रिसर्च में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के लेखकों की मानें तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुलेठी 17-हाइड्रॉक्सिस्टेरॉयड डिहाइड्रोजीनेज और 17-20 लाइएज (एंटी-एंड्रोजेन इफेक्ट) को रोकने में मदद करती है जिसका पीसीओएस से लिंक माना गया है। इसके अलावा मुलेठी, 11 बीटा-हाइड्रॉक्सिस्टेरॉयड डिहाइड्रोजीनेज 2 नाम के इंजाइम को भी रोकती है जिसकी वजह से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल और एंड्रोजेन का लेवल शरीर में कम हो जाता है। 

फ्रंटियर्स इन इंडोक्रिनोलॉजी नाम के जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में कहा गया है कि मुलेठी में एंटी-एंड्रोजेन, एस्ट्रोजेन जैसी एक्टिविटी होती है जो पीसीओएस को मैनेज करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा मुलेठी लिवर को डीटॉक्स यानी साफ करने में भी मदद करती है और लिवर विषाक्त पदार्थों और अत्यधित हार्मोन्स को बाहर निकालकर हार्मोनल संतुलन में मदद करता है। 

मुलेठी को कैसे करें यूज
इसके लिए 1 चम्मच मुलेठी की जड़ या मुलेठी पाउडर को 1 कप गर्म पानी में अच्छी तरह से मिक्स करें और रोजाना दिन में एक बार पिएं। लंबे समय तक इस नुस्खे का फायदा आपको मिलता रहे इसके लिए 2 महीने या इससे ज्यादा समय तक इस प्रक्रिया को रोजाना दोहराएं।

(नोट : मुलेठी की जड़ हाई बीपी या दिल, किडनी या लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होती है।)

पीसीओएस को ठीक करने का उपाय है तुलसी - 
तुलसी की पत्तियां अपने एंटी-एंड्रोजेनिक गुणों के कारण पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। यह इंसुलिन के स्तर के संतुलन और वजन घटाने में मदद करती है। तुलसी एक उत्कृष्ट तनाव रिलीवर है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन को कम करने वाले गुण भी लाभकारी होते हैं। 

तुलसी को कैसे करें यूज
दैनिक रूप से सुबह के समय खाली पेट 8 से 12 पवित्र तुलसी की पत्तियां खाएं। एक अन्य विकल्प के लिए दिन में कई बार आप तुलसी की चाय पी सकती हैं। कुछ महीनों के लिए इस उपाय का पालन करें। 

पीसीओएस को दूर करने के लिए अन्य औषधीय पौधे 
आयुर्वेद से लेकर सिद्ध और नैचरोपैथी तक, भारतीय पारंपरिक दवा सिस्टम में ऐसे कई पौधों की प्रजातियां हैं जो पीसीओएस में हार्मोन्स को संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं। इनमें से कुछ पौधे ये हैं:
  • शतावरी में फाइटोएस्ट्रोजन होता है जो शरीर में महिला सेक्स हार्मोन के संतुलन को बेहतर बनाता है। यह पौधा खून में हाइपरइन्सुलिनेमिया या खून में अतिरिक्त इंसुलिन की समस्या में सुधार करने के लिए भी जाना जाता है। चूंकि इंसुलिन प्रतिरोध पीसीओएस से जुड़ा है, इसलिए अतिरिक्त इंसुलिन से लड़ने का शतावरी का यह गुण भी आपकी मदद कर सकता है।
  • गुडुची या गिलोय रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है- जो बदले में वजन को नियंत्रित करने और पीसीओएस में डायबिटीज की समस्या को होने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेटी प्रॉपर्टीज भी पायी जाती है।
  • सौंफ, रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम करने के लिए जाना जाता है। साथ ही सौंफ को, फाइटोएस्ट्रोजन का स्रोत भी कहा जाता है।

आखिर में ये बातें याद रखें - 
पीसीओएस होने पर व्यायाम और आहार ये दोनों ही चीजें समान रूप से महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए आप चाहें तो पीसीओएस की समस्या दूर करने के लिए योग कर सकती हैं या फिर सप्ताह में 4-5 बार दिन में 30 मिनट के लिए कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज कर सकती हैं। स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए वेट ट्रेनिंग भी एक शानदार तरीका है। एक्सरसाइज का सही लाभ मिल सके इसके लिए किसी प्रशिक्षित फिटनेस एक्सपर्ट से बात करें।

आपको अपने डॉक्टर से उन दवाओं के बारे में भी बात करनी चाहिए जिन्हें लेना आपके लिए जरूरी है क्योंकि ये घरेलू उपाय या जड़ी बूटियां, दवाइयों का विकल्प नहीं हो सकते। इसकी बजाय, इन नुस्खों और हर्बल तरीकों को एक जटिल बीमारी को मैनेज करने के लिए अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए जो प्रजनन क्षमता, मेटाबॉलिज्म और सेहत के कई दूसरे पहलुओं को प्रभावित करता है।



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मासिक धर्म (पीरियड्स) में दर्द के लक्षण, कारण, उपाय, इलाज

 
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माहवारी के दौरान होने वाले दर्द को डिस्मेनोरिया भी कहा जाता है। माहवारी की उम्र में लगभग हर महिला को एक बार तो इस पीड़ा से गुज़रना ही पड़ता है। माहवारी के दौरान किसी महिला को बहुत ज्‍यादा दर्द महसूस होता है तो किसी को कम। कुछ महिलाओं को मासिक धर्म आने पर पेट में बहुत ज्‍यादा दर्द महसूस होता है और इस वजह से उनके लिए ये दिन काफी मुश्किल हो जाते हैं।

मासिक धर्म के दौरान निचले पेल्विक हिस्‍से में दर्द महसूस होता है। ये दर्द जांघों, पैरों, पीठ और कभी-कभी सीने में भी हो सकता है। अधिकतर पहली बार माहवारी होने पर लड़कियों को सबसे ज्‍यादा दर्द होता है।

हालांकि, महिलाओं को माहवारी के दौरान कितना दर्द होता है ये उनकी शारीरिक, मानसिक और स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति पर निर्भर करता है। इस समस्‍या का इलाज घर पर ही किया जा सकता है लेकिन अगर आपको माहवारी आने पर बहुत ज्‍यादा दर्द हो रहा है तो आपको बिना कोई देरी किए तुरंत स्‍त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए। मासिक धर्म में दर्द का कारण कोई बीमारी या विकार हो सकता है। 

मासिक धर्म के दर्द के प्रकार - 
मासिक धर्म में होने वाला दर्द दो प्रकार का होता है -  

प्राथमिक डिसमेनोरिया (Primary Dysmenorrhea) -
यह पेट के निचले हिस्से में होने वाला दर्द है जो मासिक धर्म के पहले या उस समय होता है। इसका किसी भी प्रकार की शारीरिक बीमारी से कोई सम्बन्ध नहीं है। सामान्यतः यह दर्द आपको पहली बार मासिक धर्म शुरु होने के छह महीने या साल भर के अंदर शुरु हो जाता है। इस प्रकार का दर्द मासिक धर्म की शुरुआत में होता है और दो से तीन दिनों में बंद हो जाता है। इस दौरान पेट के निचले हिस्से में और कभी कभी जांघों या पीठ में भी दर्द का अनुभव होता है। 
 
सेकेंडरी डिसमेनोरिया (Secondary Dysmenorrhea) -
इस प्रकार के मासिक धर्म के दर्द आपके स्वास्थय को प्रभावित करते हैं जैसे : गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine fibroid), पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic inflammatory disease) या एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis) आदि। एंडोमेट्रिओसिस के कारण होने वाले दर्द आपको मासिक चक्र के बीच में महसूस होते हैं और पीरियड्स होने के एक हफ्ते पहले यह दर्द बढ़ जाता है। कभी-कभी इसकी वजह से कब्ज की शिकायत भी होती है।

माहवारी में दर्द के लक्षण - 
मासिक धर्म में पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के अलावा और भी अन्य लक्षण हैं जो इस समय अनुभव होते हैं जैसे -

मासिक धर्म में दर्द के कारण - 
महिलाओं के शरीर में बनने वाला प्रोस्टाग्लैंडीन रसायन मासिक धर्म में होने वाली समस्याओं का कारण है। जो ऊतक (tissue) गर्भाशय का अंदरूनी अस्तर बनाता है वही इन रसायनों को भी बनाता है। प्रोस्टाग्लैंडीन गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन को बढ़ाता है। जिन महिलाओं में अधिक मात्रा में प्रोस्टाग्लैंडीन पाया जाता है उनमें संकुचन अधिक होने के कारण मासिक धर्म में दर्द भी अधिक होता है। पीरियड्स में होने वाली उल्टी, दस्त और सिरदर्द के लिए भी प्रोस्टाग्लैंडीन ही जिम्मेदार है। मासिक धर्म में होने वाली अन्य समस्याएं प्रजनन तंत्र पर भी निर्भर करती हैं जैसे :
  • एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis) - गर्भाशय के बाहर गर्भाशय ऊतक उपस्थित होना।
  • फाइब्राइड्स और एडिनोमायोसिस (Fibroids and Adenomyosis) - गर्भाशय में ऐसे कारकों का उत्पन्न होना जो कैंसरजनक नहीं हैं।
  • प्रजनन अंगों में संक्रमण।
  • असामान्य गर्भावस्था - इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी है जिसमें गर्भाशय की जगह बच्चा फैलोपियन ट्यूब में आ जाता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था में पेट में दर्द और पुत्र प्राप्ति के उपाय से जुड़े मिथक)
  • आईयूडी (Intra-uterine device) - यह गर्भनिरोधक उपकरण होते हैं।
  • संकुचित गर्भाशय ग्रीवा (Narrow Cervix)
मासिक धर्म के दर्द का घरेलू उपचार - 
अगर प्रज्वलनरोधी (Anti-inflammatory) दवाएं नहीं ले सकती हैं या नहीं लेना चाहती हैं तो इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलु उपचार इस प्रकार हैं :
  • पैल्विक क्षेत्र में हीटिंग पैड को गर्म करके उपयोग करें। (और पढ़ें - सिकाई करने का तरीका)
  • पीठ और पेट के निचले हिस्से की मसाज करें।
  • नित्य और खासकर मासिक धर्म के समय व्यायाम करें।
  • कम वसा युक्त शाकाहारी भोजन करें।
  • प्रतिदिन थाइमिन (विटामिन बी1) और कैल्शियम सप्लीमेंट लें। अपने डॉक्टर से सलाह करें कि आपके लिए इन सप्लीमेंट की सही मात्रा क्या है। 
माहवारी के दर्द में सर्जरी - 
पहले के समय में महिलाएं मासिक धर्म में होने वाले दर्द या ऐंठन से निजात पाने के लिए डाइलेशन और क्यूरेटेज (D & C) का ऑपरेशन करवाती थीं जिसमें गर्भाशय का अंदरूनी अस्तर हटा दिया जाता था। यह प्रक्रिया कैंसर के निदान (diagnosis) और कैंसर की पूर्व स्थिति जांचने के लिए भी अपनायी जाती थी। कुछ महिलाएं मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी करवा के गर्भाशय निकलवा देती हैं

इस सर्जरी को हिस्‍टेरेक्‍टॉमी (Hysterectomy) कहा जाता है। अगर किसी महिला को बहुत अधिक मात्रा में या अत्यधिक दर्द के साथ मासिक धर्म होते हैं तो डॉक्टर उसे एन्डोमीट्रीयम नष्ट (Endometrial Ablation) करवाने की सलाह देते हैं। इसमें विभिन्न उपकरणों द्वारा गर्भाशय का अंदरूनी अस्तर नष्ट कर दिया जाता है।

मासिक धर्म में दर्द का उपचार - 
मासिक धर्म के दर्द से छुटकारा पाने के कई संभव उपचार हैं जो इस प्रकार हैं : डॉक्टर, मासिक धर्म में दर्द के इलाज के लिए पर्याप्त आराम और नींद के साथ साथ नियमित व्यायाम (विशेष रूप से सैर करने) की सलाह भी देते हैं। कई महिलाओं के अनुसार इस दौरान पेट के निचले हिस्से की मालिश, योग और सम्भोग करने से इस दर्द में काफी हद तक आराम मिलता है साथ ही गर्म पैड के उपयोग से भी इस दर्द में आराम पहुँचता है। 

कुछ दवाओं का उपयोग भी पीरियड्स में होने वाले दर्द और ऐंठन से पूरी तरह से निजात दिलाता है जिनमें एस्पिरिन प्रमुख है।

हालांकि एस्पिरिन प्रोस्टाग्लैंडीन के उत्पादन को कम करने में असरदार नहीं है। यह केवल दर्द को पहले से कम करने का काम करती है। डॉक्टर की सलाह लेकर आप अन्य दवाओं का उपयोग भी कर सकती हैं। मासिक धर्म के उपचार के लिए नॉन स्टेरॉइडल प्रज्वलनरोधी दवाएं (NSAIDs) भी ली जाती हैं ये दवाएं प्रोस्टाग्लैंडीन के प्रभाव को कम करती हैं। आइबूप्रोफेन (Ibuprofen) इनमें प्रमुख है। सेकेंडरी डिसमेनोरिया का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है और डॉक्टर ही आपको इसके उपचार के बारे में बता सकते हैं कि किस स्थिति में कौन सा उपचार करना बेहतर होगा। मासिक धर्म में अधिक समस्या या दर्द होने पर उसे नज़रअंदाज़ न करें डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें क्योंकि यह सेकेंडरी डिसमेनोरिया भी हो सकता है।

जानिए डॉ प्रकाश से पीरियड्स में दर्द क्यों होता है और इसके इलाज के बारे में -
डॉ गीता प्रकाश दिल्ली के मैक्स मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में सीनियर परिवारिक चिकित्सक हैं। इन्होंने मशहूर मेडिकल कॉलेज AFMC से MBBS किया है और 35 वर्ष से मेडिसिन प्रैक्टिस कर रहीं हैं। यह वीडियो 3 वीडियोस की श्रंखला का तीसरा वीडियो है। पहले इन्होंने हमें मासिक धर्म या माहवारी (पीरियड्स) के बारे में सामान्य जानकारी दी थी (नीचे दिया गया भाग 1 देखें)। फिर उन्होंने हमें अनियमित मासिक धर्म के कारण और उपचार के बारे में बताया था (नीचे दिया गया भाग 2 देखें)।

डॉ गीता प्रकाश आज हमें बता रहीं हैं पीरियड्स में दर्द क्यों होता है और इसका इलाज क्या है। पीरियड्स में दर्द के बारे में कुछ आसान सी बातें हैं जो सब को मालूम होनी चाहिए।
  • दर्द एक व्यक्तिपरक बात है। जो किसी के लिए कम दर्द है, वो किसी के लिए ज़्यादा दर्द हो सकता है क्योंकि हम सबकी सहनशीलता एक दूसरे से भिन्न है।
  • दर्द होने में कोशिश करें कि आप अपनी दिनचर्या ना रोकें।
  • मासिक धर्म में दर्द सबको होता है, यह आम बात है। तो दर्द से कोई घबराने की बात नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप को कोई बीमारी है। (अपनी मेडिकल स्तिथि के बारे में अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह करें।)
पीरियड्स में दर्द के कुछ आम कारण हैं -
  • अगर आपका मासिक धर्म "Anovulatory" हो, यानी की उसमें अंडे ना बने, तो आम तौर से दर्द नहीं होता। अगर दर्द हो रहा है तो इसका मतलब है की आपके अंडाशय में अंडे बन कर निकल रहे हैं।
  • आमतौर से प्रेग्नेन्सी के बाद मासिक धर्म में दर्द कम होता है।
  • अगर आपका ख़ान-पान ठीक ना हो तो दर्द ज़्यादा होता है।
  • अगर आप नियमित रूप से व्यायाम नहीं करती हैं तो दर्द ज़्यादा होता है।
पीरियड्स में दर्द के इलाज के लिए आप यह ज़रूर ट्राइ करें -
  • अपने आहार को अधिक पौष्टिक बनायें, ख़ास तौर से इनकी मात्रा बढ़ायें
  • खाने में आइरन की मात्रा बढ़ाएं; ऐसा करने के लिए पालक या केले खा सकते हैं।
  • खाने में फॉलिक आसिड की मात्रा बढ़ाएं; ऐसा करने के लिए किसी भी प्रकार की दाल, हरी सब्ज़ी, ड्राइ फ्रूट्स या संतरे खा सकते हैं।
  • खाने में नमक की मात्रा कम करने से मासिक धर्म में दर्द कम हो सकता है।
  • हल्का व्यायाम ज़रूर करें, जैसे की पैदल चलना। ऐसा निरंतर करते रहें।
  • गरम पानी की बोतल या किसी भी और माध्यम से सिकाई करें। गरम पानी से नहाने से भी आराम मिल सकता है।

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महिला स्वास्थ्य के लिए अत्यंत ज़रूरी है ये 10 विटामिन

 
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आज की महिलाएं स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हैं और स्वस्थ आहार खाना पसंद करती हैं। एक स्वस्थ आहार में विटामिन्स का सही संयोजन होता है। इष्टतम स्वास्थ्य और विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए हर उम्र और वजन की महिलाओं को विभिन्न प्रकार के विटामिन्स का उपभोग करने की आवश्यकता है।

विटामिन्स कार्बनिक यौगिक (organic compounds) हैं जो शरीर के विभिन्न हिस्सों को ठीक से कार्य करने में मदद करते हैं। प्रत्येक विटामिन एक विशिष्ट कार्य करता है। आवश्यक विटामिन की कमी कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। यही कारण है कि खाने वाले खाद्य पदार्थों से इन विटामिन्स को प्राप्त करना आवश्यक है।

विटामिन ए के फायदे बढ़ाएँ महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली - 
विटामिन ए में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। सभी उम्र की महिलाओं को हड्डियों, दांत, कोमल ऊतक (Soft Tissue), त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membranes) को मजबूत बनाने में विटामिन ए महत्वपूर्ण होता है। विटामिन ए पुरानी बीमारी के खतरे को कम करता है, दृष्टि में सुधार, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।

विटामिन ए में समृद्ध खाद्य पदार्थों में शामिल हैं गाजर, कद्दू, खुबानी, टमाटर, तरबूज, अमरूद, ब्रोकोली, काली, पपीता, आड़ू, लाल मिर्च, पालक, अंडे, दूध आदि।

विटामिन बी 2 के लाभ महिलाओं में दूर करें तनाव और थकान - 
विटामिन बी2 को राइबोफ्लेविन के रूप में भी जाना जाता है। विटामिन बी2 अच्छे स्वास्थ्य, सामान्य वृद्धि और चयापचय के लिए आवश्यक है। यह झुनझुनाहट, अकड़न, चिंता, तनाव और थकान को कम करता है और ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता है।

विटामिन बी2 की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली, चयापचय और तंत्रिका कार्यों को प्रभावित कर सकती है। जिसके कारण पीली आंखेँ और जीभ, गले में खराश, मुँह के छाले, होठों का फटना, सूखे बाल, झुर्रियों और खुजली वाली त्वचा जैसी कई समस्याए उत्पन्न हो सकती है। 

विटामिन बी2 में समृद्ध पदार्थों में से कुछ है मांस, पनीर, दूध, दही, पत्तेदार सब्जियां, खमीर, अंडे, साबुत अनाज, सोयाबीन, बादाम, नट और मशरूम आदि।

विटामिन बी 6 बचाएँ महिलाओं को एनीमिया से - 
विटामिन बी6 को पिरइडॉक्सिन के रूप में भी जाना जाता है जो एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए एक आवश्यक विटामिन है। यह विशेष रूप से हार्मोन और मस्तिष्क के रसायनों के उत्पादन में मदद करता है, जिससे बदले में अवसाद, हृदय रोग और स्मृति हानि (Memory loss) को कम करने में मदद करता है।

यह आपके रक्त शर्करा के स्तर को विनियमित करने में भी मदद कर सकता है। मॉर्निंग सिकनेस से छुटकारा पाने के लिए गर्भवती महिलाओं को विटामिन बी 6 से युक्त भोजन खा सकती हैं। शरीर में विटामिन बी6 की कमी से एनीमिया हो सकता है। 

विटामिन बी 6 में समृद्ध खाद्य पदार्थों में शामिल हैं अनाज, ऐवोकैडो, केले, मांस, सेम, मछली, दलिया, नट, बीज और सूखे फल आदि। 

विटामिन बी7 है कोशिकाओं के विकास में सहायक - 
विटामिन बी7 को बायोटिन के रूप में जाना जाता है। विटामिन बी7 फैटी एसिड की कोशिकाओं के विकास और संश्लेषण के लिए आवश्यक है। यह विटामिन पसीने की ग्रंथियों, बाल और त्वचा को स्वस्थ रखता है। वास्तव में, यह बालों के विकास को बढ़ावा देता है और भंगुर नाखूनों के इलाज में मदद करता है। इसके अलावा, विटामिन बी7 हड्डियों के विकास और अस्थि मज्जा (बोने मॅरो) के लिए आवश्यक है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है ।

यद्यपि विटामिन बी-7 की कमी बहुत दुर्लभ होती है, लेकिन यह अगर हो तो यह बालों का टूटना, चकत्ते, असामान्य हृदय कामकाज, सुस्ती, एनीमिया और हल्के अवसाद का कारण बन सकती है।

विटामिन बी 7 प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा भोजन विकल्पों में से कुछ हैं मछली, मीठे आलू, बादाम, गाजर, केला, गन्ने का पौधा, पीले फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, भूरे चावल, मिर्च, अंडा योर, सोयाबीन, दलिया, दूध, पनीर, दही और नट्स आदि।

विटामिन बी 9 है ज़रूरी गर्भवती महिलाओं के लिए - 
विटामिन बी9 को फोलिक एसिड के रूप में भी जाना जाता है जो हर महिला के लिए आवश्यक होता है क्योंकि यह हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, अल्जाइमर, अवसाद , कैंसर और स्मृति हानि को रोकने में मदद करता है। यह मस्तिष्क स्वास्थ्य और सेलुलर कार्यों को बढ़ाता है और गर्भावस्था के दौरान प्रजनन और भ्रूण के विकास में सुधार करता है।

गर्भवती महिलाओं में विटामिन बी9 की कमी बच्चे में न्यूरल ट्यूब नामक रोग पैदा कर सकती है जैसे स्पाइना बिफिडा।

विटामिन बी9 से समृद्ध खाद्य पदार्थों में हरी पत्तेदार सब्जियां, संतरे का रस, शतावरी, खरबूजा, स्ट्रॉबेरी, अनाज, फलियां, सेम, पोषण खमीर और अंडे शामिल हैं। 

विटामिन बी 12 खाद्य पदार्थ दूर करे अवसाद - 
विटामिन बी12 एक ओर अन्य आवश्यक विटामिन है जो हर महिला को खाना चाहिए। यह चयापचय, सामान्य कोशिका विभाजन और प्रोटीन संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह विटामिन हृदय रोग, याददाश्त और एनीमिया को रोकने में मदद करता है।

यह भी अवसाद का इलाज और स्वस्थ तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क कामकाज को बनाए रखने में मदद करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। विटामिन बी 12 की कमी, चिड़चिड़ापन, अवसाद और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। यह जीभ और मुंह की सूजन भी पैदा कर सकती है।

विटामिन बी12 के लिए कुछ सर्वोत्तम खाद्य स्रोत हैं पनीर, अंडे, मछली, मांस, दूध, दही और अनाज आदि।

विटामिन सी के लाभ महिलाओं के लिए - 
विटामिन सी एक प्रतिरक्षा बूस्टर के रूप में जाना जाता है और विटामिन सी के महिलाओं के लिए कई स्वास्थ्य लाभ होता हैं। यह ऊतको के विकास को बढ़ावा देता है, कुछ प्रकार के कैंसर, हृदय रोग और ऊतक क्षति को कम करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सबसे अच्छे विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ हैं ब्रोकली, अंगूर, कीवी, नारंगी, मिर्च, आलू, स्ट्रॉबेरी, स्प्राउट्स और टमाटर आदि।

विटामिन डी फूड्स रखे हड्डियों को मजबूत - 
विटामिन डी एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ावा देता है और हड्डियों को मजबूत रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन डी कई काठिन्य(multiple sclerosis), संधिशोथ (Rheumatoid arthritis) और विभिन्न प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करता है।

यह मासिक धर्म सिंड्रोम के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। यह आपकी दृष्टि की रक्षा करने में भी मदद करता है। इस विटामिन की कमी आपकी हड्डियों को कमजोर कर देती है जो ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकती हैं।

दिन में 15 मिनट के लिए ली गई सूर्य की रोशनी आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी दे सकती है। इसके अलावा, आप वसायुक्त मछली, दूध और अंडे जैसे विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ खा सकते हैं।

विटामिन ई के फायदे करें उम्र को धीमा - 
विटामिन ई में एंटी एजिंग गुण होते हैं जो कोशिका क्षति से लड़ते है और उम्र बढ़ने के परिवर्तन को धीमा करती है। यह विटामिन हृदय रोग, मोतियाबिंद, याददाश्त और कैंसर के कुछ प्रकार को भी रोकने में मदद करता है।

इसके अलावा, विटामिन ई त्वचा और बालों के लिए आवश्यक होता है। यह अक्सर बाल और त्वचा की देखभाल के उत्पादों में मिलाया जाता है। विटामिन ई में समृद्ध खाद्य पदार्थ हैं गेहूं के बीज, बादाम, पालक, मार्जरीन, मकई का तेल, मूंगफली का मक्खन, कुसुम तेल और सूरजमुखी के बीज आदि। 

विटामिन के रिच फूड्स महिलाओं के लिए - 
विटामिन के मजबूत हड्डियों को बढ़ावा देने, सामान्य रक्त के थक्के को बनाए रखने और विभिन्न हृदय रोगों के खतरे को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विशेष विटामिन प्रतिरक्षा कामकाज और ऊर्जा के लिए आवश्यक है।

विटामिन के सर्वश्रेष्ठ भोजन स्रोतों में से कुछ हैं साबुत अनाज से बने खाद्य उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोयाबीन तेल और मछली का तेल आदि।

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महिलाएं होती हैं इन दस परेशानियों का शिकार, हमारे पास है उनके लिए कुछ ज़रूरी सुझाव

 
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एक महिला होने के नाते काम, घर, बच्चे, परिवार के बारे में चिंता करना और उसके बाद भी स्टनिंग दिखना थोड़ा सा कठिन काम हो सकता है, लेकिन जब छोटा सा ब्यूटी इश्यू आपकी सुंदरता को बिगाड़ देता है तब काफी परेशानी होती है। तो आइए आज हम आपको बताएँगे छोटी छोटी कुछ सौंदर्य समस्याओं और उनसे छुटकारा पाने के तरीक़ो के बारे में:

झुर्रियाँ (Wrinkles)
जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है आपकी त्वचा अपनी प्राकृतिक दृढ़ता और लोच को खो देती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और आपको इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। त्वचा की उम्र बढ़ने का कारण होता है शरीर में कोलेजन की कम मात्रा का पैदा होना जिससे आपके चेहरे और शरीर पर फाइन लाइन (Fine Lines) दिखाई देने लगती है।

टिप्स: चेहरे पर फाइन लाइन कम करने के लिए कई सर्जिकल और गैर-सर्जिकल पद्धतियां हैं। आप एक गैर-सर्जिकल विकल्प के रूप में एक एंटी-रिंकल क्रीम का उपयोग कर सकते हैं, जबकि सर्जिकल विकल्पों में बोटोक्स या इंजेक्शन शामिल हैं।

नाखूनों का पीलापन (Nails Yellowness)
कई महिलाएं नोटिस करती हैं कि उनके नाखून समय के साथ पीले हो जाते हैं या सूखे और टूटने लगते हैं। उदाहरण के लिए, आपके नाखून आपके स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ संकेत दे सकते हैं, उदाहरण के लिए, पीले या रंग बदले हुए नाखून गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत होते हैं।

टिप्स: यदि आप अपने नाखूनों के रंग या बनावट में बदलाव नोटिस करते हैं, तो अपने चिकित्सक से पूछें कि इसका क्या मतलब हो सकता है। कम से कम नेल पॉलिश का उपयोग करने की कोशिश करें और अगर आपको अपने नाखूनों को पेंट करना पड़े, तो सुनिश्चित करें कि आप किसी एक प्रतिष्ठित ब्रांड का उपयोग कर रहे हैं।

त्वचा का साँवलापन (Dark Skin Colour)
भारत में यह देखने के लिए आम है कि महिलाओं को उनकी त्वचा के रंग के बारे में चिंता होती है। हमें मिल रही सबसे सामान्य क्वेरी यह है कि महिलाएं अपनी त्वचा के रंग को हल्का बना चाहती है। यह समझना जरूरी है कि ज्यादातर मामलों में त्वचा का रंग आनुवंशिक होता है और इसे बदला नहीं जा सकता है। अपनी त्वचा के रंग पर गर्व करें और सर्वोत्तम उत्पादों का उपयोग करें ताकि आपकी त्वचा स्वास्थ्य के साथ चमकती रहें।

टिप्स: टैन्ड त्वचा से छुटकारा पाने के लिए मुलतानी मिट्टी और ठंडे पानी का उपयोग करके एक पैक बनाए। यह पैक आपकी त्वचा को फिर से जीवंत करने और टैन से छुटकारा पाने में मदद करेगा

डार्क सर्कल्स (Dark Circles)
बहुत भद्दा हो सकता है और आप लगातार थके हुए दिखते हैं। डार्क सर्कल वास्तव में सिर्फ रक्त वाहिकाएं है जो आसानी से आँखों के आसपास त्वचा के माध्यम से देखा जाती है। हालांकि सभी लोगों की आंखों के आसपास त्वचा की एक पतली परत होती है, कुछ के लिए यह नींद, तनाव, एलर्जी की कमी जैसी परिस्थितियों के कारण और अधिक पतली हो जाती है। यदि आपकी आँखों के नीचे डार्क सर्कल्स है तो आपको पता होना चाहिए कि सभी दाग़ स्थायी नहीं होते हैं।

टिप्स: ताजे खीरे के रस में कॉटन पैड को डुबोएँ और अपनी आंखों के आस-पास लगाएँ। 10-15 मिनट के बाद अपना चेहरा धो लें।

रंजकता (Pigmentation)
पिगमेंटेशन एक ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर सूर्य की वजह से स्किन सेन्सिटिविटी, उम्र बढ़ने और कुछ मामलों में एलर्जी की प्रतिक्रिया या हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। असमान रंजकता (pigmentation) चेहरे या शरीर के कुछ भागों में अधिक मेलेनिन के उत्पादन के कारण होती है।

टिप्स: धूप में बाहर जाने से 15 मिनट पहले एक अच्छी सनस्क्रीन का उपयोग करें।

पैरों की टैनिंग (Feet Tanning)
पैर हमारे शरीर के सबसे उपेक्षित भागों में से एक हैं, लेकिन सबसे अधिक काम भी पाँव ही करते हैं। लेकिन टैनिंग और दरारें उनकी सुंदरता को कम कर सकती है। यह एक गलत धारणा है कि आप सिर्फ़ पेडीक्योर से ही सुंदर और चमकदार पाँव प्राप्त कर सकते हैं।

टिप्स: यदि आपके पास नियमित पेडीक्योर करवाने के लिए समय नहीं है, तो आप इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अपने पैरो को झांवे (pumice stone) से रगड़कर चमका सकती है। आप अपने पैरों को कोमल और मुलायम रखने के लिए अच्छी क्रीम का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

अनचाहे बाल (Unwanted Facial Hair)
अनचाहे बाल एक आम समस्या है जिससे ज्यादातर महिलाएं पीड़ित है। यह बहुत परेशान और शर्मनाक हो सकती हैं। चेहरे के अनचाहे बाल असंतुलित हार्मोन की वजह से हो सकते हैं।

टिप्स: शरीर के बालों से छुटकारा पाने के लिए यहा कई तरीके हैं, लेकिन कोई भी तरीका अपनाने के बाद एक अच्छे मॉइस्चराइज़र उपयोग करना सुनिश्चित करें।

पिंपल्स (Acne)
पिंपल्स सभी महिलाओं को डराते हैं वास्तव में पिंपल्स संक्रमित हो जाने वाले छिद्रों में छिपे होते हैं। यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो आपको पिंपल्स होने का ख़तरा अधिक है। क्योंकि तेल गंदगी को आकर्षित करता है जिससे रोम छिद्र संक्रमित हो जाते हैं। पिंपल्स आमतौर पर काफी दर्दनाक होते हैं और ये चेहरे, गर्दन और पीठ पर देखे जा सकते हैं।

टिप्स: यदि आपकी त्वचा पिंपल्स से पीड़ित है, तो आपको अच्छी सफाई, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग बनाए रखनी चाहिए। अपना चेहरा नियमित रूप से धोएँ और अपनी त्वचा के प्रकार के हिसाब से सही उत्पाद चुनें।

रूसी (Dandruff)
यह एक बहुत ही शर्मनाक और असुविधाजनक समस्या है, रूसी आपके सिर पर फ्लैक स्किन के कारण होती है। अगर इसका इलाज ना किया जाए तो यह बालों के झड़ने, मुँहासे और स्कॅल्प संक्रमण जैसी समस्याओं को आगे बढ़ा सकता है।

टिप्स: अपने बालों के प्रकार के लिए सही उत्पाद चुनें। अपने सिर को अच्छी तरह धोएं, स्वस्थ खाना खाएं, आपके डंड्रफ़ को नियंत्रण में रखने के लिए औषधीय शैंपू का उपयोग करें।

बालों का झड़ना (Hair fall)
बालों के झड़ने एक आम समस्या है जो ज्यादातर महिलाएं फेस करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि आप एक दिन में 100 से अधिक टूट जाते हैं तो आपको अपने बालों की चिंता होनी चाहिए। हार्मोनल परिवर्तन, पोषण की कमी या आनुवंशिकी के कारण यह हालत ओर भी बदतर हो सकती है।

टिप्स: अपने बालों को नियमित रूप से और अच्छी तरह से धोएं। आपका आहार स्वस्थ बालों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आपके बाल सूखे और क्षतिग्रस्त हैं तो अपने बालों के लिए एक बार पौष्टिक उपचार प्राप्त करें। 

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पीरियड्स के समय भी कर सकते हैं आप ये पाँच एक्सरसाइज

 
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मासिक धर्म के दौरान दर्द होना सच में पीड़ादायक होता है। इस दौरान थकावट, ऐंठन और दर्द की वजह से आपका मन किसी भी काम को करने में नहीं लगता है। आपको सोचकर हैरानी होगी कि 'क्या मासिक धर्म के दौरान व्यायाम करना ठीक है?' जवाब है - हाँ। पीरियड्स के समय कुछ लोग नियमित व्यायाम करना छोड़ देते हैं, क्योंकि बहुत से लोगों को ऐसा लगता हैं कि मासिक धर्म के दौरान एक्सरसाइज ना करके आराम करना चाहिए। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।

व्यायाम मासिक धर्म के समय ऐंठन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। लेकिन मासिक धर्म के दौरान आपको हल्के व्यायाम ही करने चाहिए। पीरियड्स के समय भारी व्यायाम सिर्फ आपकी थकावट को ही बढ़ाएँगे। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही एक्सरसाइज के बारे में -

मासिक धर्म के समय वॉक करने से मसल्स होती है मजबूत - 
मासिक धर्म के दौरान वॉकिंग सबसे अच्छा और आसान व्यायाम है। वॉकिंग तनाव को कम, निचले हिस्से को स्ट्रेच और सूजन को दूर करती है। यह भी एक ऐसी गतिविधि है जो शरीर पर अधिक जोर नहीं पड़ने देती है। कम से कम 30 मिनट के लिए वॉक करें। इससे आपके पैरो की गति आपकी पैल्विक मांसपेशियों को ढीला कर देगी जिससे दर्द दूर हो जाएगा।

नोट: लेकिन कुछ महिलाओं के लिए, वॉकिंग से ब्लीडिंग हो सकती है।

माहवारी में दर्द के लिए करें लेग लिफ्ट्स व्यायाम - 
पीरियडस के दौरान व्यायाम करने का मतलब यह नहीं है कि आप व्यायाम करने के लिए घर से बाहर जाएँ। इस समय आप घर पर रह कर भी लेग लिफ्ट्स जैसे व्यायाम कर सकती है। लेग लिफ्ट्स आपके पेट, पीठ और पैल्विक मांसपेशियों को ढीला कर देगी।

लेग लिफ्ट्स शुरू करने के लिए एक चटाई पर लेट जाएँ। अपनी लेग्स को सीधा करें। धीरे धीरे अपने दाहिने पैर को ऊपर उठाएं ताकि आपके बट से फर्श के साथ 90 डिग्री का कोण बन जाएँ। कुछ देर ऐसे ही रहें, फिर अपनी लेग्स को नीचे ले आए। बाएं पैर के साथ भी इसी तरह करें और 5 से 10 बार दोहराएं। 

साइड लंज एक्सरसाइज है मासिक धर्म में ऐंठन का उपाय -
सामान्य लंज के बजाए साइड लंज वर्जन अधिक अच्छा है। यह घुटनों पर करना आसान होता है जिससे मासिक धर्म के दौरान कम दर्द महसूस होता है। इस अभ्यास से कूल्हे, बट और जांघों में ऐंठन को लाभ मिलता है।

अपने दोनो पैरों को खोल लें। अपने दाहिने पैर के साथ किनारे पर जाएं और नीचे की तरफ झुकाव लें और अपने बाएं पैर को सीधे रखें।
अपने आप को वापस ऊपर की ओर पुश करें ताकि आप खड़े हों जाएँ। इसी तरह बाएं पैर के साथ 5 से 10 बार दोहराएं। 

पीरियड्स में दर्द का इलाज है अधोमुख श्वान आसन - 
अगर आपके निचले हिस्से में बहुत अधिक दर्द हो रहा है तो इसके लिए प्लांक या अधोमुख श्वान आसन करें। यह तनाव कम करने के साथ साथ आपकी आपकी पीठ को भी मजबूत करेगा। मासिक धर्म के समय इससे आपके कूल्हे, बट और पेट की ऐंठन से भी लाभ मिलेगा

  • प्लांक करने के लिए, अपने हाथों और पैरों के बल आ जाएँ। अपने हाथो को जमीन पर सपाट रखें। टेबल मुद्रा में आ जाएं। इस अवस्था में घुटने हिप्स की चौड़ाई में होने चाहिए।
  • पैर की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ें।
  • सांस छोड़ते हुए हिप्स को ऊपर ले जाएं और पैरों को सीधा करें। ऐड़ियों को पीछे की ओर ले जाएं और जमीन से टिकाने की कोशिश करें।
  • सिर को ज़मीन की दिशा में आरामदायक स्थिति में रखें और इस अवस्था में रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की कोशिश करें। इस मुद्रा में 10 से 15 सेकंड तक ऐसे ही रहें।
मासिक धर्म के दर्द में बालासन योग है लाभदायक - 
चाइल्ड पोज़ या बालासन स्वास्थ्यप्रद और शांत आसान है। यह पीठ की लंबाई को भी बढ़ाता है, जिससे तनाव और खिंचाव से राहत मिलती है। यह मुद्रा हिप को खोलती है और पाचन में सुधार करती है, जिससे यह मासिक धर्म के दर्द के लिए एक बहुत ही अच्छा व्यायाम है।

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मासिक धर्म यानी पीरियड्स इन स्वास्थ्य समस्याओं का करते हैं संकेत

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आपके पीरियड्स हर महीने आते हैं और जाते हैं, लेकिन पीरियड्स के बारे में बात करना सबसे प्रतिबंध विषयों में से एक माना जाता है। खैर, अब इसके बारे में खुले तौर पर बात करने का वक्त है।

अक्सर, महिलाओं को लगता है कि उनके पीरियड्स केवल ये संकेत देते हैं कि वे गर्भवती हैं या नहीं। ऐंठन, सूजन, भारी प्रवाह (heavy flow) और पीठ दर्द को अक्सर पीरियड्स के एक भाग के रूप में माना जाता है जो कि बस सहन किया जाना चाहिए। लेकिन पीरियड्स आपके स्वास्थ्य के बारे में इससे कहीं अधिक जानकारी प्रकट कर सकते हैं। 

नियमितता (regularity) से लेकर प्रवाह (flow) तक पीरियड्स पर ध्यान देने से प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकता है। यहां कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बताई गई हैं जिन्हें आपके पीरियड्स के द्वारा इंडिकेट किया जा सकता है -

फाइब्रॉएड भी है अत्यधिक रक्तस्राव का कारण - 
फाइब्रॉयड (fibroid) एक मांसपेशी की परत होती है जो हार्मोनल की सक्रियता की वजह गर्भाशय की दीवारों पर जमने लगती हैं, जो कि आपके मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकती है और जिसके कारण अत्यधिक या लंबे समय तक ब्लीडिंग हो सकती है। जिसकी वजह से यह बाद में यह टयूमर बन जाता है और इलाज ना होने पर यह कैंसर का कारण बनता है।

2012 में बीएमसी महिला स्वास्थ्य में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने आठ देशों में 21,499 महिलाओं का सर्वेक्षण किया। निष्कर्षों में, गर्भाशय फाइब्रॉएड के निदान के साथ महिलाओं ने 

अन्य महिलाओं (जिन्हें फाइब्रॉएड की समस्या नहीं थी) की तुलना में भारी रक्तस्राव (59.8% बनाम 37.4%), लंबे समय तक रक्तस्राव (37.3% बनाम 15.6%) और रक्तस्राव अवधि (33.3% बनाम 13.5%) की सूचना दी।

महिला स्वास्थ्य के इंटरनेशनल जर्नल में 2014 में प्रकाशित एक और अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि फाइब्रॉएड से पीड़ित महिलाओं में भारी और लंबे समय तक रक्तस्राव सबसे ज्यादा दर्ज लक्षण है।

यदि अचानक से आप सामान्य से अधिक पीरियड्स आ रहे हैं, तो उसके पीछे का कारण जानने के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

मासिक धर्म अनियमित होने का कारण है पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम -
यद्यपि आप अनियमित पीरियड्स के लिए खुश हो सकते हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से आपके शरीर के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।

मोटापा, अत्यधिक चेहरे और शरीर पर बाल, बालों के झड़ने और मुँहासे जैसे अन्य लक्षणों के साथ अनियमित मासिक धर्म एक मजबूत संकेत है कि आप पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित हो सकते हैं। पीसीओएस में, शरीर में अतिरिक्त टेस्टोस्टेरोन की गतिविधि के कारण ओवरी में अल्सर हो जाता है। ये अल्सर पूरे मासिक धर्म प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिसके कारण पीरियड्स छूटने लगते हैं।

मानव प्रजनन 2014 में प्रकाशित एक अध्ययन यह पुष्टि करता है कि टीनेज वर्षों के दौरान अनियमित मासिक धर्म भविष्य में पीसीओएस और बांझपन के साथ सकारात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

चाहे आपके पीरियड्स पहली बार चुके है या यह यह एक आम प्रवृत्ति बन गई है, इसे गंभीरता से लें और अपने डॉक्टर से परामर्श करें। 

तनाव है पीरियड्स में ब्लड कम आने का कारण - 
उन महिलाओं में हल्का रक्त प्रवाह आम है जो रजोनिवृत्ति में प्रवेश कर रही है या जो हार्मोनल बर्थ कंट्रोल विधियों का उपयोग करती है। हालांकि, यदि आपको पिछले मासिक धर्म की तुलना में अचानक हल्के प्रवाह का सामना करना पड़ता है, तो यह अत्यधिक तनाव या शरीर में हार्मोनल परिवर्तन के कारण हो सकता है।

आपके पीरियड्स हल्के हो सकते हैं यदि आपको बहुत कम या दो दिन से कम समय तक ब्लीडिंग होती है। आपकी ब्लीडिंग को बहुत हल्का माना जाता है जैसे कि स्पॉटिंग, यदि आप एक या अधिक रेग्युलर-फ्लो पीरियड्स को मिस करते हैं।

एक बार जब आपका तनाव का स्तर नियंत्रण में हो जाता है तो आपके पीरियड्स वापस सामान्य आ जाने चाहिए। अगर आपको तनाव महसूस हो रहा है, तो पीरियड्स के अधिकतर दिनों में व्यायाम करने की कोशिश करें, मेडिटेशन का अभ्यास करें और अपने तनाव के स्तर को कम करने के लिए टॉक थेरेपी की तलाश करें।

मधुमेह है अनियमित मासिक चक्र की वजह -
असामान्य रूप से लंबे, बेहद अनियमित मासिक धर्म को इंसुलिन प्रतिरोध और टाइप 2 मधुमेह के जोखिम से जोड़ा जा सकता है।

वास्तव में, अधिक वजन वाली महिलाओं के अनियमित माहवारी चक्र को शायद टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित माना जाता है। इंसुलिन प्रतिरोध भी अंडाशय को प्रभावित करता है, जो बदले में मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करता है।

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल 2001 में प्रकाशित एक अध्ययन ने 100,000 से अधिक महिलाएं को फॉलो किया गया जिन्होंने 18 से 22 वर्ष की उम्र के मासिक धर्म चक्र को सामान्य बताया था। 10-वर्षीय के अध्ययन की अवधि पूरी होने के बाद, यह पाया गया कि सामान्य चक्र वाले महिलाओं की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने की संभावना लंबे या अत्यधिक अनियमित माहवारी चक्र (40 दिन या उससे अधिक) वाली महिलाओं की संख्या दोगुनी थी।

सामान्य चक्र वाले लोगों की तुलना में बहुत कम चक्र (21 दिन या उससे कम) वाली महिलाओं को मधुमेह होने की 1.5 गुना अधिक संभावना है।

मासिक धर्म में ऐंठन का कारण है एंडोमेट्रियोसिस - 
माहवारी के दौरान असहनीय और बेहद दर्दनाक ऐंठन से पता चलता है कि आप एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित हैं।

एंडोमेट्रियोसिस तब होता है जब एंडोमेट्रियल ऊतक (जो गर्भाशय के अंदर की रेखाएं) गर्भाशय के बाहर बढ़ता है। ऊतक तब पैल्विक क्षेत्र और निचले पेट में 'फंस' जाता है, जिससे सूजन हो जाती है और अत्यधिक दर्द होता है।

पीरियड्स के दौरान, एंडोमेट्रियम प्रोस्टाग्लैंडीन पैदा करता है, प्रोस्टाग्लैंडीन एक हार्मोन है जो सूजन और दर्द को उत्पन्न करता है। योनागो एक्टा मेडिका में प्रकाशित एक 2013 के अध्ययन में, जापानी शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर एंडोमेट्रियोसिस में प्रोस्टाग्लैंडीन की एक उच्च और असामान्य मात्रा पैदा करता है।

इस तरह की दर्द सामान्य अवधि के दर्द से अलग होती है और आम तौर पर याद दर्द पीरियड्स से पहले और भी खराब हो जाता है। पेट में दर्द अक्सर पीठ या पैल्विक दर्द के साथ होता है। 

सर्वाइकल कैंसर है अनियमित वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण - 
अनियमित वेजाइनल ब्लीडिंग गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का सबसे आम लक्षण है, जो अमेरिकी महिलाओं के लिए कैंसर की मौतों का प्रमुख कारण था। हालांकि, इसे रोकने और इलाज करने के लिए अब सबसे आसान महिला कैंसर माना जाता है।

अनियमित वेजाइनल ब्लीडिंग मासिक धर्म या सेक्स के बाद हो सकती है। कभी-कभी, यह ब्लड-स्ट्रीक्ड वेजाइनल डिसचार्ज के रूप में दिखाया जाता है, जिसे स्पॉटिंग (हल्के हल्के दाग - spotting bleeding) के रूप में बताया गया है।

संभोग के शुरू होने के बाद सभी उम्र की महिलाएं सर्वाइकल कैंसर को विकसित करने का जोखिम रखती हैं और वेजाइनल ब्लीडिंग पोस्टमेनियोपौसम महिलाओं में भी हो सकती है।

अपने चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें यदि आप मासिक धर्म चक्र या यौन संभोग के बीच रक्तस्राव अनुभव करते हैं। 

अचानक मासिक धर्म के रुकने की वजह है निम्न बॉडी मास इंडेक्स - 
जब आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 18 या 19 से नीचे आता है, तो आपको बहुत कम बॉडी फैट के कारण पीरियड्स मिस होने का सामना करना पड़ सकता है।

एस्ट्रोजेन बनाने के लिए शारीरिक वसा महत्वपूर्ण है, जो आपके मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है। कम बॉडी फैट शरीर को एक आपातकालीन मोड में डालता है, जहां इसका मुख्य लक्ष्य केवल सबसे महत्वपूर्ण और जीवन-निरंतर कार्य करने पर होता है।

नियमित पीरियड्स के लिए और गर्भ धारण करने में सक्षम होने के लिए, आपका बीएमआई कम से कम 22 होना चाहिए।

यदि आपके पीरियड्स अनियमित आ रहे हैं, तो अपने बीएमआई की जांच करें। नियमित और स्वस्थ मासिक धर्म चक्रों को बढ़ावा देने के लिए अपनी बीएमआई को सामान्य सीमा में रखने का लक्ष्य बनाएँ।

थायरॉयड हो सकता है मासिक धर्म में अचानक बदलाव - 
चूंकि आपका मासिक धर्म हार्मोन से संचालित होता है और हार्मोन उत्पादन और विनियमिट करने में आपका थायरॉयड बड़ी भूमिका निभाता है इसलिए पहली बार मासिक धर्म का समय से पहले या बहुत बाद में शुरू होना थाइरोइड की समस्या का संकेत हो सकता है।

साथ ही मासिक धर्म में अचानक बदलाव जैसे कि हल्का या भारी प्रवाह थायरॉयड की समस्या का संकेत हो सकता है।

भारी, अधिक बार, लंबे और अधिक दर्दनाक पीरियड्स को अक्सर हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) से जोड़ा जाता है, जबकि कम, लाइटर या अनुपस्थित पीरियड्स हाइपरथायराइडिज्म (hyperthyroidism) से जुड़ी हुई है।

यदि आप अपनी अवधि में थोड़ा बदलाव देख रहे हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करने और अपने थायरॉयड के स्तर की जाँच करने की आवश्यकता है। 


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गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग, फायदे और नुकसान

 
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एक आपातकालीन गर्भनिरोधक (मॉर्निंग आफ्टर पिल) असुरक्षित यौन संबंध के ठीक बाद अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए महिलाओं द्वारा ली जाने वाली एक दवा है। कुछ लोकप्रिय आपातकालीन गर्भ निरोधकों में आई पिल और अनवांटेड-72 हैं। शब्द "आपातकाल" नोट करना महत्वपूर्ण है। यदि आप यौन सक्रिय हैं या होने की योजना बना रहे हैं, तो केवल आपातकालीन गर्भनिरोधक का ही उपयोग गर्भावस्था से बचने के लिए किया जाना चाहिए।

आपातकालीन गर्भनिरोधक असुरक्षित संभोग के बाद महिलाओं को गर्भावस्था को रोकने का एक आखिरी मौका देता है, ख़ास तौर से तब जब आप किसी भी अन्य गर्भनिरोधक विधि के उपयोग के बिना संभोग करते हैं या आपका कंडोम टूट या निकल जाता है या आपने अपनी नियमित गर्भनिरोधक गोलियों (Regular birth control pills) को कम से कम 2 या 3 बार मिस कर दिया हो या आपको सेक्स करने के लिए मजबूर किया गया हो।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग और फायदे - 
एक आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली में प्रोजेस्टिन लेवोनोरगेस्ट्रेल (Levonorgestrel) शामिल होता है, जो सिंथेटिक हार्मोन हैं। ये या तो ओवरी से अण्डे के बाहर आने को रोकने या उसमें देरी करने या फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया (महिला के अंडाशय से अंडे का पुरुषों के शुक्राणुओं से निषेचन) को रोकने या गर्भाशय की संरचना को बदलकर निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखे जाने से रोकने के द्वारा कार्य करते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यह गोली असुरक्षित यौन संबंध के 72 घंटों के अंदर ली जानी चाहिए।

ये गोलियां आम तौर पर पानी के साथ मौखिक रूप से ली जाती हैं और अक्सर उल्टी से बचने के लिए इन्हें भोजन के बाद लिया जाता है। अगर इस गोली को लेने के 2-3 घंटों के भीतर उल्टी होती है, तो एक और गोली लेने की सलाह दी जाती है।

यह गोली गर्भपात का कारण नहीं है, इसलिए गर्भवती होने के बाद इसे लेने से गर्भावस्था पर कोई असर नहीं होता है।

ये गोलियां स्तनपान कराने वाली माताओं द्वारा भी ली जा सकती हैं। ये गोलियां स्तन के दूध की गुणवत्ता या मात्रा को प्रभावित नहीं करती हैं और इनका शिशु के विकास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के जोखिम और नुकसान -
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली परंपरागत गर्भनिरोधक गोलियों का एक विकल्प नहीं है। इसका कारण यह है कि आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली में सिंथेटिक हार्मोन की बहुत अधिक मात्रा होती है, जो कई तरह की जटिलताओं का कारण बन सकता है यदि इनका उपयोग लगातार किया जाता रहे। इसके विपरीत, नियमित गर्भनिरोधक गोलियां में हार्मोन की खुराक कम होती है जो गर्भाधान को रोकने और ओव्यूलेशन चक्र को बदलने में मदद करती हैं।

स्त्रीरोग विशेषज्ञ के मुताबिक, जब गर्भनिरोधक की बात आती है तो आपको इस गोली का सेवन तभी करना चाहिए जब आपके पास कोई और रास्ता नहीं है क्योंकि इन गोलियों का नियमित सेवन हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है। ये 25-45 आयु वर्ग की महिलाओं के द्वारा लेना सबसे उपयुक्त हैं। यह टीनेजर्स के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि यह प्रजनन प्रणाली के विकास को बाधित कर सकती हैं। युवा लड़कियों, जिनके हार्मोन का स्तर अभी तक स्थिर नहीं हुआ है, उनको पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज, एंडोमेट्रियोसिस जैसी कंडीशन्स और एक्टोपिक प्रेगनेंसी के विकास का अधिक जोखिम रहता है। ये गोलियां हार्मोनल असंतुलन, अनियमित माहवारी के कारण बांझपन (इनफर्टिलिटी), असंतुलित वजन, कामेच्छा में कमी, त्वचा की एलर्जी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती हैं।

गोली लेने के बाद, एक व्यक्ति को कुछ आम साइड इफेक्ट का अनुभव हो सकता है जैसे मतली, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मासिक चक्र में परिवर्तन और चक्कर आना। यह लक्षण आम तौर पर उपचार के कुछ दिनों से अधिक समय तक नहीं रहते हैं और ये आमतौर पर 24 घंटों के भीतर हल हो जाते हैं।

ये गोलियां यौन संचारित रोग (Sexually transmitted disease) जैसे एचआईवी/एड्स, गोनोरिया, हरपीज़ इत्यादि से एक महिला की सुरक्षा नहीं करती हैं।

अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से अधिक है, तो यह गोलियां कम प्रभावी हैं। यदि आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से अधिक है, तो यह बिल्कुल भी काम नहीं करेगी।

आपातकालीन गर्भ निरोधकों में लेवोनोरगेस्ट्रेल होता है जिससे किसी महिला को एलर्जी हो सकती है इसलिए डॉक्टर से सलाह के बिना यह गोली नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा, यदि कोई किसी बीमारी से पीड़ित है और इसके लिए कुछ दवा ले रहा है, तो इस गोली को लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बाद डॉक्टर को कब दिखाएँ -
यदि आप मॉर्निंग आफ्टर पिल लेते हैं, तो यह आपके लिए महत्वपूर्ण है कि आप गाइनकॉलजस्ट से नियमित जांच कराएँ ताकि आप आगे की जटिलताओं की संभावना को समाप्त कर सकें, खासकर अगर आप हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, ट्यूबल गर्भावस्था से पीड़ित हैं या अगर आपको इसे खाने के बाद ये लक्षण महसूस होने लगें - पेट दर्द, चक्कर आना, सिरदर्द, स्तनों में दर्द, पैरों और हाथों में अत्यधिक दर्द आदि। यह भी ध्यान रखें कि इससे आपके पीरियड्स या तो बहुत जल्दी या देर से शुरू हो सकते हैं, हालांकि अधिकांश महिलाओं को नियमित तिथि के 7 दिनों के भीतर पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। पर अगर आपको 21 दिनों के भीतर मासिक धर्म नहीं होते हैं या आपको लगता है कि आप गर्भवती हो सकती हैं तो प्रेगनेंसी टेस्ट करवाएँ।

अंत में, गोली केवल तभी प्रभावी होती है अगर असुरक्षित यौन संबंध के बाद ली जाए। यदि आप गोली लेने के बाद यौन संबंध बनाते हैं तो यह काम नहीं करेगी। इसके लिए आपको गर्भनिरोधक गोलियां लेने की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा, आई पिल जैसी आपातकालीन गर्भनिरोधक दवा को आप डॉक्टर के पर्चे की आवश्यकता के बिना एक स्थानीय केमिस्ट की दुकान से खरीद सकते हैं। इसलिए इन्हें केवल आपातकाल स्थितियों के मामले में उपयोग करना सुनिश्चित करें, न कि नियमित गर्भनिरोधक के रूप में!

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क्या रात को सोते समय ब्रा पहननी चाहिए या नहीं

 
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सोते वक्त ब्रा पहनें या नहीं पहनें, यह संशय महिलाओं में बना ही रहता है। कुछ लोगों के अनुसार जब आप रात में सोते हैं तो आपके लिए ब्रा पहनना अच्छा नहीं होता है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। क्या आप भी उन कई महिलाओं में से एक हैं जिनको इसके बारे में डाउट है? तो आइए जानते हैं कि रात को सोते समय ब्रा पहननी चाहिए या नहीं।

क्या रात को ब्रा पहनकर सोना है स्तन कैंसर का कारण - 
स्तन कैंसर से संयुक्त राज्य अमेरिका में अभी भी एक वर्ष में 40,000 से अधिक की मौत होती है। इसलिए कुछ लोगों को लगता है कि इसका एक कारण ब्रा पहनना है। क्या ब्रा को बिस्तर पर पहन कर लेटना या सोना स्तन कैंसर का कारण हो सकता है? तो आइये जानते हैं इस तर्क के पीछे क्या लॉजिक है?

कई लोगों का दावा है कि ब्रा में सोने से आपकी लसीका तंत्र (lymphatic system) रुक सकता है, क्योंकि ब्रा अंडरआर्म लिम्फ नोड को जकड़ देती है जिससे उस जगह से कैसिनोजेनिक टॉक्सीन नहीं निकालता है। यह सब 90 के दशक के मध्य में शुरू हुआ था जब एक पुस्तक "ड्रिडेड टू किल: द लिंक बेस्टिन ब्रेस्ट कैंसर एंड ब्रा" पति-पत्नी की जोड़ी द्वारा प्रकाशित की गई थी। उस जोड़ी ने सुझाव दिया था कि ब्रा पहनना स्तन कैंसर का कारण हो सकता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी (एसीएस) ने हालांकि किसी भी ऐसे दावों को स्वीकार नहीं किया। एसीएस बताता है कि पुस्तक में शोध को उचित वैज्ञानिक पद्धति या नियंत्रण से नहीं लिया गया था।

इसके लिए सोसायटी ने एक अलग अध्ययन शुरू करके इसकी जांच के लिए कहा है कि ब्रा लसीका नोड्स के ड्रेनेज में बाधा डालती हैं और इससे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है या नहीं। अध्ययन ने उन मरीजों को देखा जिन्होने लसीका नोड्स को शल्यचिकित्सा के द्वारा हटावा लिया था, जिससे काफी ड्रेनेज हो सकती है। अध्ययन के अनुसार इस समूह में स्तन कैंसर की कोई बढ़ती हुई घटना नहीं थी।

शरीर के किसी भी हिस्‍से में सिस्‍ट या ल्‍यूम्‍पस का बनना स्‍वाभाविक है और यह ज़रूरी नहीं की कैंसर हो। फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने स्तन कैंसर के साथ 1000 महिलाओं और बिना कैंसर के 500 महिलाओं पर एक अध्ययन किया, यह देखने के लिए कि क्या ब्रेस्ट कैंसर या ब्रा कोई कनेक्शन तो नहीं था। उनके शोध से पता चला है कि स्तन कैंसर के विकास से जुड़ा नहीं है, बेशक आप दिन में, दिन और रात ब्रा पहनते हैं लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं।

क्या ब्रा को पहनकर सोने से संकुचित होता है रक्त परिसंचरण? -
रात में ब्रा पहनने के खिलाफ एक और तर्क यह है कि यह छाती को जकड़ती है और इस क्षेत्र में रक्त के उचित परिसंचरण को सीमित करती है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, परिसंचरण की समस्या - वास्तव में तब होती है जब रात को ब्रा खुद ही ढीली या बहुत तंग होती है। यह ब्रा पहन कर सोना गलत नहीं है लेकिन एक गलत ब्रा पहनने से बचें!

क्यों है ब्रा के साथ सोना है अच्छा? - 
आपके डर के विपरीत, एक ब्रा भी आपके लिए निम्नलिखित परिस्थितियों में अच्छी हो सकती है।

ब्रा पहनना करता है ब्रेस्ट पेन को कम - 
यदि आपको स्तन दर्द है, तो शोधकर्ताओं का कहना है कि आप सही ब्रा का उपयोग करके वास्तव में दर्द को कम कर सकते हैं - जब आप सोते हैं तब भी। उदाहरण के लिए, सोते समय अगर आप चक्रीय मास्‍टालजिया (Mastalgia - स्तन-पीड़ा) का अनुभव करती हैं (आपके मासिक धर्म चक्र के कारण हो सकता है यह दर्द हार्मोनल परिवर्तन से जुड़ा हुआ है) तो एक नरम सपोर्ट ब्रा पहनने से इसमें मदद मिलेगी। जिनको स्तन पर कुछ स्थानों या स्तन क्षेत्र में दर्द होता है उनके लिए सप्ताह के 7 दिनों में, दिन और रात के दौरान एक सपोर्ट ब्रा पहनना लाभकारी होगा।

ब्रा प्रदान करती है पोस्ट ऑपरेटिव सहायता - 
बायोप्सी सहित किसी भी प्रकार की स्तन शल्य चिकित्सा के तहत आने वाली महिलाओं को एक ब्रा पहनने की सलाह दी जाती है। उनके लिए एक स्पोर्ट्स ब्रा आदर्श है जो कि सामने से खोली जा सकें। इस तरह, आप अपने बाहों को ऊपर उठाने से बच सकते हैं जो दर्दनाक हो सकता है। यहां तक कि अगर आप उन महिलाओं में से एक है जो सामान्यत: ब्रा को बिस्तर पर नहीं पहनती है, तो स्पोर्ट्स ब्रा का उपयोग करके आप सोने में मदद पाएँगी।

क्या रात में ब्रा पहननी चाहिए या नहीं? -
ब्रा खरीदना आपकी पर्सनल च्‍वाइस है लेकिन इसे अपने स्‍वास्‍थ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए खरीदें। रात को सोते समय से लेकर किसी भी खास मौके पर शिकायतों या बेचैनी से बचने के लिए आप सही ब्रा का चयन करें। इसलिए एक तंग अंडरवायर्ड ब्रा नींद के लिए एक स्मार्ट पसंद नहीं है। दूसरी तरफ, एक नरम सपोर्ट ब्रा बिना अंडरवायर या अतिरिक्त समर्थन के लिए एक स्पोर्ट्स ब्रा आपके लिए एक अच्छी पसंद हो सकती है। यदि आप जागने के बाद अपने ब्रा से त्वचा पर लाल रेखाएं देखते हैं तो आपको सही आकार के लिए एक नई ब्रा की ज़रूरत है। एक अच्छी ब्रा आपको सहायता करेगी, दर्द या जलन नहीं।

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