-बंदियों का आरोप-जेल के अंदर 20 रुपए में बिक रही एक चम्मच सब्जी
-कच्ची रोटी, पानी जैसी दाल, निरीक्षण के दिन ही चुस्त व्यवस्था।
गोण्डा । मण्डल कारागार गोण्डा की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। जेल से रिहा होकर बाहर आए कुछ बंदियों ने नाम न छापने की शर्त पर कारागार के अंदर भारी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। बंदियों का कहना है कि जेल प्रशासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार उन्हें भोजन नहीं दिया जा रहा है।
बंदियों ने बताया कि भोजन में कटहल की रसेदार सब्जी दी जा रही है, जो खाने में मीठी लगती है और बड़े-बड़े साग के साथ 1-2 पीस आलू ही होते हैं,दाल पानी नुमा रहती है। रोटी भी आधी कच्ची और आधी पकी हुई दी जाती है। नाश्ते में पहले चना-गुड़ मिलता था, लेकिन अब पानी जैसी पतली दलिया और पानी जैसी चाय दी जा रही है, जिसे ज्यादातर बंदी पीते तक नहीं हैं।
जेल के अंदर बिक रही सब्जी
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जेल के अंदर ही सब्जी की बिक्री हो रही है। बंदियों के अनुसार जेल में बड़े भगोने में सब्जी लाकर 15 से 20 रुपये में एक चम्मच सब्जी बेची जाती है। जिसके पास पैसे होते हैं वह खरीदकर खाता है, बाकी कैदी भूखे रहकर जेल प्रशासन को कोसते हैं। बंदियों का यह भी आरोप है कि जब जिला प्रशासन के अधिकारी निरीक्षण पर आते हैं तो उस दिन व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रहती है और जब वह बंदियों से पूंछते है तो डर के कारण कोई भी बंदी सच नही नही बताता, बाहर निकले बंदियों का कहना है कि यदि अधिकारियों द्वारा वाकई में व्यवस्था देखना होता तो वह बंदियों से पूंछने के बजाय सीसीटीवी फुटेज की जांच करके सच उजागर करने में सक्षम हैं।
पारदर्शिता की मांग
बंदियों ने मांग की है कि यदि जेल में मीनू के अनुसार भोजन दिया जाता है तो जेल प्रशासन को सोशल मीडिया पर एक ग्रुप बनाकर उसमें जिलाधिकारी, जिला जज व पुलिस अधीक्षक को जोड़ना चाहिए। साथ ही प्रति बैरक में भोजन वितरण की फोटो रोजाना अपलोड की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। बंदियों के इन आरोपों से जेल प्रशासन के साथ-साथ समय-समय पर निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। वहीं जेलर आफताब अंसारी का कहना है कि हमारे जेल में मीनू के हिसाब से भोजन बन रहा है हम और अधीक्षक चेक करते हैं, बाहर निकले हुए बंदियों का आरोप गलत व निराधार है।







