गोण्डा। जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र में मारपीट के एक मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ितों का आरोप है कि थाने में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि एक पुलिसकर्मी ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें ही फटकार दिया। आखिरकार पीड़ितों को न्याय के लिए डीआईजी कार्यालय की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
देवरदा ईसरी पुरवा निवासी पीड़ित पिंटू के अनुसार, 2 जुलाई की रात करीब 10 बजे वह अपने चाचा अर्जुन के साथ शादी का सामान खरीदकर लौट रहे थे। रास्ते में चारपहिया वाहन के पास खड़े कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद दोनों के साथ मारपीट की गई तथा उनकी मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन भी क्षतिग्रस्त कर दिए गए।
पीड़ित का कहना है कि घटना की सूचना तत्काल डायल-112 पर दी गई। पुलिस ने उन्हें अगले दिन थाने बुलाया, लेकिन घंटों बैठाए रखने के बावजूद न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। घटना के तीसरे दिन पीड़ितों ने डीआईजी अशोक कुमार शुक्ला से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद तरबगंज पुलिस ने देवरदा गांव के चिल्दहा निवासी राहुल पांडेय, अमित, ललित तिवारी और रमापति के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ तथा एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करता है कि जब थाने में फरियाद अनसुनी रह जाए और पीड़ितों को कार्रवाई के लिए सीधे वरिष्ठ अधिकारियों की चौखट पर जाना पड़े, तो स्थानीय पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।







