गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।
Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts
Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts

सेना को मिली बड़ी उपलब्धि, सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का किया सफल परीक्षण

misail-ka-kiya-saphal


सेना के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है. भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने मंगलवार को सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है.

ये परीक्षण सेना की अंडमान-निकोबार कमान की ओर से किया गया अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से किया गया. ये मिसाइल सुपरसोनिक तकनीक की अपडेटेड मिसाइल है. एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने ब्रह्मोस मिसाइल के सफल परीक्षण पर बधाई दी है.

अंडमान निकोबार कमांड ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को अंडमान निकोबार द्वीप समूह से भारतीय सेना की पश्चिमी कमान द्वारा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया. इस महीने की शुरुआत में, भारत ने 29 नवंबर और 1 दिसंबर के लिए मिसाइल परीक्षण का संकेत देते हुए एयरमेन को नोटिस (NOTAM) जारी किया था. परीक्षण के लिए अधिसूचित नो-फ्लाई ज़ोन से पता चलता है कि आज परीक्षण की गई मिसाइल का वेरिएंट 450 किमी या उससे अधिक की दूरी पर लक्ष्य को मार सकता है.

भारत ने इस साल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के कई परीक्षण किए हैं. फरवरी में, भारत ने वहां एक भूमि आधारित लॉन्चर से ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण किया. मार्च में द्वीपों से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के विस्तारित रेंज वर्जन का परीक्षण किया गया था. अप्रैल में, A&N कमांड ने ब्रह्मोस के एंटी-शिप वर्जन का परीक्षण किया.

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत
बता दें, ब्रह्मोस भारत और रूस की ओर से विकसित दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइल है. जमीन, समुद्र, पानी के नीचे और वायु प्लेटफार्मों से लॉन्ट एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्षमता वाले यूनिवर्सल ब्राह्मोस वेपन सिस्टम को खास तरह से डिजाइन किया गया है. जमीन से लॉन्च से शुरू हुए सफर के बाद ब्राह्मोस को जमीन-से-जमीन, जमीन से समुद्र, समुद्र से जमीन, समुद्र से समुद्र, उप-जमीन, हवा से समुद्र और हवा से जमीन तक लॉन्च करने का टेस्ट किया गया है.


[ Read More ]»

पीएम मोदी ने की 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता, रूस ने उठाया अफगानिस्तान का मुद्दा

 -sammelan
ब्रिक्स देशों के 13वें शिखर सम्मेलन का गुरुवार को आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। कोरोना महामारी की वजह से सभी देशों ने इसे वर्चुअल माध्यम से करवाने पर सहमति जताई थी। पीएम मोदी के मुताबिक ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत को सभी सदस्यों से पूरा सहयोग मिला है। जिस वजह से वे सभी राष्ट्राध्यक्षों को धन्यवाद देना चाहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि ब्रिक्स 15 वर्षों में और अधिक अच्छे रिजल्ट प्राप्त करे। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जिस विषय को चुना है, वो इस प्राथमिकता को दर्शाता है। इस वर्ष कोविड की स्थिति के बावजूद, 150 से अधिक BRICS बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें से 20 से अधिक मंत्री स्तर के थे। हमने ब्रिक्स एजेंडा का विस्तार करने की कोशिश की। ब्रिक्स ने इस साल कई उपलब्धियां हासिल की।

पीएम ने आगे कहा कि हाल ही में पहले ब्रिक्स डिजिटल हेल्थ सम्मेलन का आयोजन हुआ। तकनीक की मदद से स्वास्थ्य तक पहुंच बढ़ाने के लिए ये एक नया कदम है। नवंबर में हमारे जल संसाधन मंत्री ब्रिक्स फॉर्मेट में पहली बार मिलेंगे।

अफगानिस्तान का मुद्दा उठा

वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बैठक के दौरान अफगानिस्तान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों की वापसी ने एक नया संकट पैदा कर दिया है, और ये अभी भी स्पष्ट नहीं है कि यह वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा को कैसे प्रभावित करेगा। यह अच्छे कारण के लिए है कि हमारे देशों ने इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया है।

[ Read More ]»

लव जिहाद से आतंकवाद में धकेली जा रहीं दूसरे धर्म की लड़कियां, खत्म करना चाहते हैं गैर मुस्लिम: बिशप

se-aatankavaad


केरल में एक कैथोलिक बिशप ने गुरुवार को कहा कि राज्य में ईसाई लड़कियां बड़ी संख्या में 'लव जिहाद और नार्कोटिक जिहाद के जाल में फंस रही हैं और जहां हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वहां चरमपंथी अन्य धर्मों की युवतियों को बर्बाद करने के लिए ये हथकंडे अपना रहे हैं। बिशप ने कहा कि जिहादी प्यार और दूसरे तरीकों से दूसरे धर्म की महिलाओं का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों या आर्थिक लाभ के लिए करते हैं। उनका लक्ष्य अपने धर्म को बढ़ाना और गैर-मुस्लिमों को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि चरमपंथियों के लिए यह युद्ध की रणनीति है।

सायरो मालाबार चर्च से जुड़े पाला बिशप मार जोसेफ कल्लारनगट्ट ने आरोप लगाया कि 'लव जिहाद के तहत गैर मुस्लिम लड़कियों, विशेष रूप से ईसाई समुदाय की लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसा कर उनका धर्मांतरण किया जा रहा है और शोषण किया जा रहा है। उनका आतंकवाद जैसी विध्वंसक गतिविधियों में उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। वह कोट्टायम जिले में कुरूविलंगड में एक चर्च समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। 

बिशप ने दुनिया भर में और केरल में सांप्रदायिकता फैलाने, धार्मिक असौहार्द्र और असहिष्णुता बढ़ाने की कोशिश करने वाले जिहादियों की मौजूदगी के खिलाफ आगाह करते हुए कहा कि वे अन्य धर्मों को तहस-नहस करने के लिए अलग-अलग तरकीब अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ''इस तरह की दो चीजें लव जिहाद और नार्कोटिक (मादक पदार्थ) जिहाद हैं। चूंकि जिहादी जानते हैं कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हथियारों के जरिए अन्य धर्मों के लोगों को बबार्द करना आसान नहीं है, इसलिए वे अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस तरह के अन्य हथकंडे अपना रहे हैं।''

उन्होंने पूर्व पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के हालिया बयानों को जिक्र करते हुए कहा कि केरल आंतकवादियों का एक भर्ती केंद्र बन गया है और इस राज्य में चरमपंथी समूहों का एक भूमिगत प्रकोष्ठ मौजूद है। बिशप ने दावा किया कि राज्य की ईसाई और हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण किया गया और उन्हें हाल ही में अफगानिस्तान में आतंकवादी शिविरों में भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस विषय की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि राज्य में 'लव जिहाद और नार्कोटिक जिहाद' नहीं है वे सच्चाई से आंखें मूंद रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो राजनेता, सामाजिक-सांस्कृतिक नेता व पत्रकार, इस से इनकार कर रहे हैं, ऐसा करने में उनके निहित स्वार्थ हो सकते हैं। 



[ Read More ]»

स्कूटी पर जा रहे दंपति और बच्चे को हाथियों ने दौड़ाकर कुचला, तबाही मचा रहा है 25 गजों का झुंड

 
ka-jhund

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जंगली हाथियों के हमले में पति, पत्नी और उनके चार साल के बेटे की मौत हो गई। सरगुजा जिले के वन विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत मोहनपुर गांव के करीब बुधवार को जंगली हाथियों के हमले में गौतम दास (30), पत्नी रीना दास (28) और उनके चार वर्षीय पुत्र युवराज की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि लखनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुन्नी गांव निवासी गौतम दास अपने परिवार के साथ स्कूटी से उदयपुर गांव गया था। वापसी के दौरान जब परिवार मोहनपुर गांव के करीब पहुंचा तब उनका सामना जंगली हाथियों के एक दल से हो गया। 

हाथियों को देखकर दास परिवार भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन हाथियों ने उन्हें दौड़ा लिया और पूरे परिवार को कुचल दिया। अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग के दल को रवाना किया गया तथा शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मृतकों के परिजन को आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सात ​हाथियों का दल विचरण कर रहा है। घटनास्थल के करीब मौजूद ग्रामीणों को वहां से हटने के लिए कहा गया है। 

25 हाथियों का दल घूम रहा, फसलों और घरों को पहुंचाया नुकसान

कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत गांवों में हाथियों द्वारा फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत पसान और केंदई वन परिक्षेत्र में करीब 25 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। हाथियों ने क्षेत्र के गांवों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाया है।


[ Read More ]»

असम में दर्दनाक हादसा, ब्रह्मपुत्र नदी में 100 यात्रियों से भरी दो नावों की जोरदार टक्कर; दर्जनों लापता, 40 को बचाया गया

bachaaya-gaya


असम के जोरहट जिले में ब्रह्मपुत्र नदी में बुधवार की शाम को भीषण नाव दुर्घटना हो गई है। इस बोट में लगभग 100 यात्री सवार थे। सौ से अधिक लोगों से भरी दो नावों के बीच भीषण टक्कर हुई है। दर्जनों लोगों के लापता होने की खबर है। नदी में डूबे लोगों की तलाश की जा रही है। डर है कि इसमें से कईयों की मौत हो सकती है। वहीं, जोरहाट के एडिशनल डीसी दामोदर बर्मन ने कहा है कि नाव में लगभग 50 लोग सवार थे, जिनमें से 40 लोगों को बचा लिया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्‍वा सरमा ने नाव हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने माजुली और जोरहाट जिला प्रशासन को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद से बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल सर्च-ऑपरेशन जारी है। उन्‍होंने अपने मंत्री बिमल बोरा को शीघ्र माजुली जाकर स्थिति का जायजा लेने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया, "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फोन पर जोरहाट के नीमतीघाट में नाव दुर्घटना के बारे में पूछा है और अब तक बचाए गए लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी ली है।"
[ Read More ]»

जम्मू कश्मीर पुलिस ने चार पत्रकारों के आवास पर मारा छापा, ये है कारण

 
maara-chhaapa

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर पुलिस ने बुधवार को श्रीनगर में चार पत्रकारों के आवास पर छापा मारा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक साप्ताहिक पत्रिका के प्रधान संपादक, तुर्की मीडिया आउटलेट के लिए काम करने वाले एक रिपोर्टर, एक फ्रीलांस रिपोर्टर और कई अन्य स्थानीय प्रकाशनों से जुड़े एक रिपोर्टर के आवास पर छापा मारा गया। पुलिस ने इस छापों पर चुप्पी साध रखी है। लेकिन ऐसा मानना है कि यह छापेमारी उस ब्लॉग पोस्ट के मामले में की गई जांच का हिस्सा है जिसमें लोगों को देश के खिलाफ भड़काया गया था और कश्मीर में राष्ट्रवादियों की छवि खराब करने का आह्वान किया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
[ Read More ]»

बड़ा खुलासा! परमबीर सिंह ने रिपोर्ट में छेड़छाड़ करने के लिए रिश्वत दी, आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद का नाम डलवाया

 
naam-dalavaaya

प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोट से भरी कार मामले (Antilia Bomb Scare Case) में और उस कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या (Mansukh Hiren Murder Case) के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चार्ज शीट दायर कर दी है. इस चार्ज शीट में मुंबई पुलिस के साथ काम कर चुके ईशान सिन्हा नाम के एक साइबर एक्सपर्ट का परमबीर सिंह पर दिया गया सनसनीखेज बयान दर्ज है. इसमें यह दावा किया गया है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह (Parambir Singh) ने जांच की रिपोर्ट में छेड़छाड़ करवाने की कोशिश की थी. इसके लिए उन्होंने 5 लाख रुपए की रिश्वत भी दी थी. जबकि वह पैसे लेना नहीं चाह रहे थे. परमबीर सिंह ने जांच रिपोर्ट में आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद का नाम और उससे जुड़ा पोस्टर शामिल करने को कहा था. ईशान सिन्हा नाम के इस साइबर एक्सपर्ट ने 25 फरवरी के दिन एंटीलिया विस्फोटक मामले की जांच की थी और उससे संबंधित अपनी रिपोर्ट मुंबई पुलिस को सौंप दी थी.

अंबानी के एंटीलिया आवास के बाहर 24-25 फरवरी की रात एक विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियों कार बरामद हुई थी. उस कार में जिलेटिन की छड़ों के अलावा एक धमकी भरा पत्र भी मिला था. इस घटना की जिम्मेदारी जैश-उल-हिंद नाम के आतंकी संगठन ने एक टेलीग्राम चैनल से स्वीकार की थी. मार्च 2021 में इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई.

परमबीर सिंह ने रिपोर्ट में इस तरह ऐड करवाया जैश उल हिंद का नाम
एनआईए की चार्जशीट में दर्ज बयान में साइबर एक्सपर्ट ने बताया है कि क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की ट्रेनिंग से जुड़े कार्यक्रम के सिलसिले में 9 मार्च को उनकी मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से मुलाकात हुई. साइबर एक्सपर्ट ने परमबीर सिंह को बताया कि उन्होंने इसी साल जनवरी में इजराइल दूतावास के बाहर हुए विस्फोट के मामले में दिल्ली पुलिस को जांच में मदद की थी. उस हमले की जिम्मेदारी जैश उल हिंद ने तिहाड़ जेल में पाए गए एक फोन नंबर पर टेलीग्राम मैसेज के माध्यम से ली थी. परमबीर सिंह ने एंटीलिया विस्फोटक मामले में भी ऐसी ही एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा. यानी परमबीर सिंह एक फर्जी रिपोर्ट बनवा कर यह साबित करना चाह रहे थे कि मुकेश अंबानी को धमकी भरा पत्र दिल्ली के तिहाड़ जेल से आया है और यह पत्र आतंकी संगठन जैश उल हिंद की ओर से भेजा गया है.

साइबर एक्सपर्ट ने कहा है कि, ‘परमबीर सिंह ने मुझसे पूछा कि मैं लिखित रूप में ऐसी रिपोर्ट दे सकता हूं क्या? मैंने कहा कि, यह काम गोपनीय है और दिल्ली पुलिस के विशेष कक्ष से किया गया है. इसलिए ऐसी कोई भी रिपोर्ट देना ठीक नहीं है. परमबीर सिंह ने कहा कि बेहद अहम वजह से वे यह रिपोर्ट उनसे मांग रहे हैं. मैं उन्हें ऐसा रिपोर्ट बना कर दूं. परमबीर सिंह उस वक्त एनआईए के आईजी से इस पूरे मामले में बात करने वाले थे.’

एक्सपर्ट ने खुलकर लिया परमबीर का नाम, फिर भी उन पर क्यों नहीं लगा इल्ज़ाम?
यहां साइबर एक्सपर्ट एनआईए की चार्ज शीट मेंं दर्ज अपने बयान में खुल कर परमबीर सिंह का नाम ले रहे हैं. फिर भी हैरत की बात है कि एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वाजे (Sachin Waze) को तो मुख्य आरोपी बनाया गया है, लेकिन परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ आरोप नहीं लगाए गए हैं. साइबर एक्सपर्ट ने अपने बयान में कहा है कि, ‘ परमबीर सिंह के आग्रह करने पर मैंने उनके ऑफिस में बैठकर अपने लैपटॉप पर एक पैराग्राफ की रिपोर्ट तैयार की और उसे सिंह को दिखाया. रिपोर्ट पढ़ने के बाद परमबीर सिंह सर ने मुझे उस रिपोर्ट में टेलीग्राम चैनल में दिखाए जाने वाले उस पोस्टर को ऐड करने के लिए कहा जिसमें जैश उल हिंद द्वारा एंटीलिया विस्फोटक मामले की जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कहनी थी. मैंने उनकी बात मानते हुए जैश उल हिंद के पोस्टर को अपनी रिपोर्ट में ऐड किया. इसके बाद मैंने वह रिपोर्ट मुंबई पुलिस कमिश्नर के अधिकृत ई मेल आईडी पर भेज दी.’ परमबीर सिंह ने साइबर एक्सपर्ट को बताया था कि वे यह रिपोर्ट एनआईए के आईजी को देने वाले हैं.

यानी यह बात साफ है कि अंबानी के घर के पास विस्फोटक रखने के मामले में परमबीर सिंह ने जबर्दस्ती बिना वजह आतंकी संगठन का नाम डाला और सारी जिम्मेदारी जैश उल हिंद नाम के आतंकी संगठन पर मढ़ते हुए केस को उलझाने की कोशिश की. यानी वे असली आरोपी को बचाना चाह रहे थे. आखिर क्यों? यह बड़ा सवाल है.

[ Read More ]»

प्राथमिकी रद्द कराने के लिए सीधे शीर्ष अदालत आने की पत्रकारों के लिए अलग व्यवस्था नहीं की जा सकती': न्यायालय

 
ja-sakatee

नयी दिल्ली,आठ सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह नहीं चाहता कि प्रेस की स्वतंत्रता कुचली जाए लेकिन पत्रकारों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को रद्द कराने के लिए सीधे उसके पास चले जाने के लिए वह उनके लिए एक अलग व्यवस्था नहीं बना सकता।

उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल समाचार पोर्टल 'द वायर' का प्रकाशन करने वाले 'फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म' और उसके तीन पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज प्राथमिकियों को रद्द कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं से प्राथमिकियां रद्द कराने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पास जाने के लिए कहा और उन्हें गिरफ्तारी से दो माह का संरक्षण दिया।

पीठ ने कहा,'' आप उच्च न्यायालय जाइए और प्राथमिकियां रद्द करने का अनुरोध कीजिए। हम आपको अंतरिम राहत देंगे।''

पीठ ने कहा,'' हम पत्रकारों के लिए एक अलग व्यवस्था नहीं बना सकते, जिससे वे अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को रद्द कराने के लिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे हमारे पास आ सकें।''

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को समझती है और 'प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलना नहीं चाहती है।'

यह याचिका 'फाउंडेशन फॉर इडिपेंडेंट जर्नलिस्ट' और तीन पत्रकारों- सिराज अली, मुकुल सिंह चौहान और इस्मत आरा की ओर से दायर की गई थी। इसमें रामपुर, गाजियाबाद और बाराबंकी में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों और उन पर हो सकने वाली कार्रवाइयों को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

अधिवक्ता शदान फरासत के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि ये प्राथमिकियां पूरी तरह से विभिन्न सार्वजनिक प्रासंगिकता की घटनाओं की पत्रकारीय रिपोर्टिंग के कारण दर्ज की गई हैं।

इसमें कहा गया कि रामपुर में प्राथमिकी इस साल जनवरी में दर्ज की गई थी जबकि दो अन्य प्राथमिकियां जून में दर्ज की गईं।

याचिका में कहा गया, "प्रकाशित मामले का कोई भी हिस्सा दूर-दूर तक अपराध नहीं है, हालांकि यह सरकार या कुछ लोगों के लिए अप्रिय हो सकता है।' याचिका के अनुसार पोर्टल और उसके पत्रकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।

याचिका में कहा गया है कि बाराबंकी में दर्ज प्राथमिकी जिला प्रशासन के आदेश पर पुलिस द्वारा मई 2021 में क्षेत्र में एक मस्जिद गिराए जाने पर एक समाचार के संबंध में दर्ज की गई है।

याचिका में उत्तर प्रदेश पुलिस को इन प्राथमिकियों को रद्द करने के अलावा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई से रोकने के आदेश देने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिका में शीर्ष अदालत से भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए दिशानिर्देश देने का भी आग्रह किया गया है, जिनमें धारा 153-ए (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान) शामिल हैं।

इसमें कहा गया कि मीडिया की खबरों को लेकर 'फैसला सुनाने का काम' पुलिस का नहीं है।

[ Read More ]»

रूस के NSA से मिले अजीत डोभाल, अफगानिस्तान, आतंकवाद और आतंकी संगठनों को लेकर बातचीत जारी

 
baatacheet -aaree

अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद भारत और रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है. बुधवार सुबह भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (NSA Ajit Doval) ने रूस के राष्ट्रीय सलाहकार निकोले पेत्रुशेव (Russian NSA Nikolay Petrushev) से दिल्ली में मुलाकात की. इसके बाद भारत और रूस के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक शुरू हुई. भारतीय और रूसी एनएसए के बीच ये बातचीत दोनों देशों के बीच राजनीतिक सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि की इच्छा, महत्व और क्षमता को दर्शाता है.

दोनों देशों के बीच होने वाली इस बातचीत को इसलिए भी सबसे अहम माना जा रहा है क्योंकि इस पूरी बातचीत के केंद्र में अफगानिस्तान में हुई उठा-पटक में पाकिस्तान की भूमिका, तालिबानी सरकार, आतंकी संगठन की गतिविधियां और आतंकवाद जैसे मुद्दे रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के एनएसए आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सहित तमाम आतंकवादी समूहों की गतिविधियों, ड्रग्स कारोबार और इनसे उत्पन्न होने वाले वर्तमान और भविष्य के खतरों से निपटने के लिए भारत-रूस सहयोग के विवरण पर बात होगी. इस दौरान अफगानिस्तान को मदद करने के लिए उपायों की भी समीक्षा की जाएगी. साथ ही वे अफगानिस्तान में राजनीतिक, सुरक्षा और मानवीय स्थिति की समीक्षा करेंगे.

अजीत डोवाल के निमंत्रण पर आए भारत

रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव जनरल निकोलाई पात्रुशेव दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार 7 सितंबर को भारत पहुंचे. विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव जनरल निकोलाई पात्रुशेव भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के निमंत्रण पर भारत पहुंचे हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की ये बातचीत 24 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद हो रही है. अपनी यात्रा के दौरान जनरल पात्रुशेव की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की भी संभावना है.

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने चर्चा के दौरान यह विचार व्यक्त किया था कि दोनों सामरिक सहयोगियों के लिये साथ मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है और अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अफगानिस्तान के मुद्दे पर सम्पर्क में रहने का निर्देश दिया था.


[ Read More ]»

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, NDA कोर्स में महिलाओं को शामिल होने की मिलेगी अनुमति

 
milegee-anumati


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कहा कि महिलाओं को नेशनल डिफेंस एकेडमी के कोर्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी और यह एक ऐतिहासिक फैसला है. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट एलिजिबल महिलाओं को एनडीए में प्रवेश के लिए 5 सितंबर को होने वाली परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी. साथ ही कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को इस आदेश के तहत एक उपयुक्त अधिसूचना जारी करने और इसका उचित प्रचार करने का भी निर्देश दिया था.
[ Read More ]»

महिलाओं के खिलाफ अपराध की शिकायतें 46 फीसदी बढ़ी, सबसे ज्यादा मामले यूपी से: महिला आयोग

-aayog


 इस साल देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। जनवरी 2021 से अगस्त तक यानी साल के शुरुआत के आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की शिकायतें पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 46 प्रतिशत ज्यादा आई हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश के हालात सबसे खराब हैं, यहीं से सबसे ज्यादा कंपलेन हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से बताया गया है कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध की जो कुल शिकायतें हैं, उनमें से आधी से भी ज्यादा अकेले उत्तर प्रदेश से हैं। महिला आयोग ने खुद को मिलने वाली शिकायतों के आधार पर ये जानकारी दी है।

महिला आयोग की ओर से बताया गया है कि जनवरी 2021 से अगस्त तक महिलाओं के खिलाफ अपराध की 19,953 शिकायतें मिलीं, जबकि पिछले साल इसकी अवधि में उसे 13,618 शिकायतें मिली थीं। ये बीते साल के मुकाबले 46 फीसदी ज्यादा है। जुलाई के महीने में आयोग को 3,248 शिकायतें मिलीं, जो छह साल में एक महीने में मिली सबसे ज्यादा शिकायतें हैं। जून, 2015 के बाद किसी एक महीने में आईं ये सर्वाधिक शिकायतें थीं।

आयोग का कहना है कि उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 10,084 शिकायतें आईं। इसके बाद दिल्ली से 2,147, हरियाणा से 995 और महाराष्ट्र से 974 शिकायतें मिलीं। इन आठ महीनों में जो शिकायतें आईं उनमें 7,036 शिकायतें गरिमामयी जीवन जीने के अधिकार के प्रावधान के तहत दर्ज की गईं, जबकि 4,289 शिकायतें घरेलू हिंसा और 2,923 शिकायतें विवाह के बाद महिलाओं के उत्पीड़न या दहेज संबंधी उत्पीड़न की थीं। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने महिलाओं के खिलाफ अपराध की ज्यादा शिकायतें मिलने को लेकर कहा है कि शिकायतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि आयोग नियमित रूप से जागरुकता अभियान चला रहा है और महिलाएं ज्यादा जागरुक हो गई हैं। ऐसे में अब वो आयोग तक अपनी शिकायत भेज रही हैं।


[ Read More ]»

पोर्न फिल्म केस-एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ की अग्रिम जमानत की अर्जी बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई खारिज

 
huee-khaarij


पोर्न फिल्में बनाने से जुड़े केस में एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ की अग्रिम जमानत याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। गहना वशिष्ठ पर महिलाओं को पोर्न फिल्मों में एक्टिंग के लिए धमकी देने और पैसों के नाम पर उन्हें बहकाने का आरोप है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जज जस्टिस एसके शिंदे की बेंच ने उन्हें बेल दिए जाने से इनकार कर दिया। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए बीते महीने गहना वशिष्ठ ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी। गहना के खिलाफ महिलाओं की निजता के हनन के लिए सेक्शन 354-C के तहत केस दर्ज किया गया है।

इसके अलावा उनके खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री बेचने के आरोप में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा  292 और 293 के तहत भी केस फाइल किया गया है। आईटी एक्ट के सेक्शन 66E, 67, 67A के तहत भी गहना वशिष्ठ को आरोपी बनाया गया है। मुंबई पुलिस ने पोर्न फिल्म बनाने का रैकेट चलाने के मामले में पिछले दिनों अलग-अलग लोगों पर तीन केस दर्ज किए थे। इनमें से एक आरोपी मशहूर एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा भी हैं। कारोबारी राज कुंद्रा को पुलिस ने 19 जुलाई को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। 

ऐसी ही एक एफआईआर में गहना वशिष्ठ के खिलाफ छोटे एक्टिंग सीन के लिए काम दिलाने के बहाने पोर्न फिल्मों में काम कराने का आरोप है। इन फिल्मों को हॉटशॉट्स नाम के मोबाइल ऐप पर भी अपलोड करके बेचे जाने का आरोप है। आरोप है कि इस मोबाइल ऐप का मालिकाना हक राज कुंद्रा के पास ही था। पुलिस ने गहना वशिष्ठ के खिलाफ सेक्शन 370 के तहत भी केस दर्ज करने के लिए निचली अदालत में अर्जी दी है। गहना की अर्जी पर बहस के दौरान उनके वकील अभिषेक येंडे ने कहा कि पुलिस उनसे पहले ही सबूत हासिल कर चुकी है। ऐसे में उन्हें गिरफ्तार किया जाना जरूरी नहीं है।


[ Read More ]»

कश्मीरी पंडितों को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लांच किया पोर्टल

 
ne-laanch

श्रीनगर: करीब चार दशक से अपने ही देश में विस्थापितों का जीवन जी रहे कश्मीरी पंडितों के लिए उम्मीद की किरण नजर आयी है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म होने के दो साल बाद अब उनकी जमीन और अन्य प्रॉपर्टी के विवादों के निबटारे और जमीन पर कब्जा दिलाने की पहल की गयी है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को इसके लिए एक पोर्टल (http://jkmigrantrelief.nic.in) लांच किया.

इस पोर्टल पर कश्मीरी पंडित अपनी संपत्ति की जबरन बिक्री, जबरन कब्जा या अन्य समस्याओं के बारे में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे. अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद केंद्रशासित प्रदेश बन चुके जम्मू-कश्मीर की सरकार ने कहा है कि जो शिकायतें मिलेंगी, पब्लिक सर्विसेज गारंटी एक्ट, 2011 के तहत एक समयसीमा के भीतर राजस्व पदाधिकारी उनका निराकरण करेंगे.

सरकार ने कहा है कि जिला मजिस्ट्रेट 15 दिन के अंदर सर्वे या फील्ड वेरिफिकेशन के बाद प्रॉपर्टी के रजिस्टर को अपडेट करेंगे और डिवीजनल कमिश्नर को इससे संबंधित रिपोर्ट सौंपेंगे. ज्ञात हो कि वर्ष 1997 में जम्मू एवं कश्मीर की सरकार 'जे एंड के माइग्रेंट इम्मूवेबल प्रॉपर्टी (प्रिजर्वेशन, प्रोटेक्शन एंड रेस्ट्रेंट ऑन डिस्ट्रेस सेल) एक्ट, 1997' लायी थी, ताकि आतंकवाद की वजह से कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए मजबूर किये गये लोगों की प्रॉपर्टी को सुरक्षा प्रदान किया जा सके.

सरकार ने कहा है कि पोर्टल पर सभी संबंधित पक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. सभी की शिकायतों पर समान रूप से सुनवाई की जायेगी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 44,167 परिवार आधिकारिक रूप से विस्थापित कश्मीरी परिवार हैं. इनके अलावा वे लोग भी इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जो विस्थापित कश्मीरी के रूप में पंजीकृत नहीं हैं.

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यदि कानून का उल्लंघन होता है, तो जिला मजिस्ट्रेट इसका संज्ञान लेंगे. जिलाधिकारियों को ही जमीन पर दखल दिलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है. कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर ने सरकार के इस फैसले की प्रशंसा की है. ये लोग लंबे अरसे से इस बात की मांग कर रहे हैं कि आतंकवाद की आड़ में कश्मीरी पंडितों से जबरन खरीदी गयी जमीनों की बिक्री को अवैध करार दिया जाये. पनुन कश्मीर के सदस्यों का मानना है कि औने-पौने दाम पर जमीन बेचने के लिए कश्मीरी पंडितों को मजबूर किया गया. यह अपने आप में नरसंहार से कम नहीं है और तब की सरकार इसे रोकने में नाकाम रही.

80 के दशक में शुरू हुआ कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार
धरती के स्वर्ग कश्मीर में रहने वाले कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार का सिलसिला 80 के दशक में शुरू हुआ. वर्ष 1986 में गुलाम मोहम्मद शाह ने अपने बहनोई फारूक अब्दुल्ला से सत्ता छीन ली और खुद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बन बैठे. इसके बाद जम्मू के न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया में एक पुराने मंदिर को गिराकर भव्य शाही मस्जिद बनवाने का एलान कर दिया गया. विरोध लाजिमी था. जवाब में कट्टरपंथियों ने नारा दिया- इस्लाम खतरे में है.

इसके साथ ही कश्मीरी पंडितों पर हमले शुरू हो गये. दक्षिण कश्मीर और सोपोर में सबसे ज्यादा हमले हुए. प्रॉपर्टी लूटने का सिलसिला शुरू हो गया. हत्या और बलात्कार की घटनाएं भी आम हो गयीं. दुनिया ने कश्मीरी पंडितों पर हिंसा की इंतहां 19 जनवरी 1990 को देखी, जब उनके घर पर फरमान चिपका दिया गया कि कश्मीर छोड़ दो वरना मारे जाओगे. इसी तारीख को सबसे ज्यादा लोगों को कश्मीर छोड़कर भागना पड़ा. करीब 4 लाख लोग विस्थापित हुए. सरकारी आंकड़ों को देखें, तो 60 हजार परिवारों को जान बचाने के लिए कश्मीर छोड़ना पड़ा था.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कश्मीरी पंडितों के दिल में करीब 40 साल पुरानी दहशत और उन पर हुए अत्याचार पर गुस्सा आज चरम पर है. तब चौराहों और मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर कहा गया था कि कश्मीरी पंडित यहां से चले जायें, नहीं तो बुरा होगा. इसके बाद लोग लगातार हत्या और बलात्कार का दौर शुरू हो गया. कट्टरपंथी कह रहे थे कि पंडितों, यहां से भाग जाओ, पर अपनी औरतों को यहीं छोड़ जाओ. बिट्टा कराटे नामक आतंकवादी ने अकेले 20 लोगों की हत्या कर दी थी.

कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश
कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश भी 80 के दशक में शुरू हुई. जुलाई 1988 में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट बना. कश्मीरियत सिर्फ मुसलमानों की रह गयी. पंडितों की कश्मीरियत को भुला दिया गया. 14 सितंबर 1989 को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता पंडित टीका लाल टपलू को कई लोगों के सामने मार दिया गया. हत्यारे पकड़ में नहीं आये. कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से खदेड़ने के लिए की गयी यह पहली हत्या थी.

हमारे साथ मिल जाओ, मरो या भाग जाओ
जुलाई से नवंबर 1989 के बीच 70 अपराधियों को जेल से रिहा कर दिया गया था. इन्हें क्यों रिहा किया गया, इसका जवाब नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार के मुखिया फारूक अब्दुल्ला ने आज तक नहीं दिया. उस दौरान कश्मीर में नारे लगाये जाते थे- हम क्या चाहते हैं... आजादी. आजादी का मतलब क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह. अगर कश्मीर में रहना है, तो अल्लाहु अकबर कहना होगा. ऐ जालिमों, ऐ काफिरों, कश्मीर हमारा है. यहां क्या चलेगा? निजाम-ए-मुस्तफा रालिव, गालिव या चालिव. (हमारे साथ मिल जाओ, मरो या भाग जाओ).


[ Read More ]»

करनाल में फिर होगा संग्राम? हजारों किसानों ने किया सचिवालय की तरफ कूच

 
kee-taraph-kooch

हरियाणा के करनाल जिले में एक बार फिर से अशांति फैलने की आशंका बढ़ गई है। मंगलवार को हजारों किसानों ने प्रशासन की हिदायत के बाद भी जिला मुख्यालय की ओर कूच कर दिया है। इससे पहले किसान संगठनों के नेताओं ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की थी, लेकिन वह बेनतीजा रही। इसके बाद किसानों ने मुख्यालय का घेराव करने का फैसला करते हुए कूच कर दिया है। किसान संगठनों ने मांग की थी कि 28 अगस्त को जिले में हुए प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा ऐक्शन होना चाहिए वरना वे करनाल में स्थित मिनी सचिवालय का घेराव करेंगे।

अधिकारियों के साथ किसानों की लंबी बैठक चली, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। इसके बाद किसानों ने मिनी सचिवालय का रुख कर दिया है। वहीं प्रदेश सरकार के आदेश पर प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों की तैनाती की है। बड़ी संख्या में किसान मंगलवार को सुबह ही ट्रैक्टरों, मोटरसाइकिलों और कारों में सवार होकर अनाज मंडी पहुंचे थे। इसके बाद 11 किसान नेताओं के डेलिगेशन को अधिकारियों ने बातचीत के लिए बुलाया था। सीनियर किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्रहन नने बताया कि प्रशासन के साथ हमारी बातचीत फेल रही है क्योंकि वे हमारी मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

5 किलोमीटर दूर है सचिवालय, कई जगह पुलिस की बैरिकेडिंग

बैठक फेल होने के बाद किसान नेताओं ने अपने समर्थकों से कहा कि वे एकत्रित होकर मिनी सचिवालय की ओर शांतिपूर्ण मार्च करें। अनाज मंडी से सचिवालय की दूरी 5 किलोमीटर की है। इसके साथ ही नेताओं ने किसानों से अपील की है कि वे पुलिस के जवानों से न भिड़ें और जहां भी रोका जाए, वहां विरोध प्रदर्शन करें। हजारों की संख्या में किसान अपने संगठनों के झंडे लिए हुए सचिवालय की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग कर रखी है। आशंका है कि पुलिस के रोकने पर हिंसा की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी के चलते प्रशासन ने 40 कंपनियों को सुरक्षा में तैनात कर रखा है ताकि स्थिति को कंट्रोल किया जा सके।

टिकैत बोले- हमने की थी सिर फोड़ने को कहने वाले IAS के निलंबन की मांग

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने प्रशासन से उस आईएएस अधिकारी को निलंबित करने की मांग की थी, जिसने कथित तौर पर आंदोलनकारियों के सिर फोड़ने का आदेश पुलिस को दिया था। मुजफ्फरनगर में महापंचायत के बाद यह दूसरा बड़ा आयोजन है, जिसमें राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल और जोगिंदर सिंह उग्रहन जैसे सीनियर किसान नेता पहुंचे हैं। बता दें कि तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बीते करीब 10 महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं।


[ Read More ]»

भूस्खलन के कारण भारत के शेष हिस्सों से कटा सिक्किम, सफाई का काम जारी

 
kaam-jaaree

भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग 10 अवरुद्ध हो गया और सिक्किम शेष भारत से कट गया। अधिकारियों ने सोमवार सुबह यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के जवान पश्चिम बंगाल के कालिमपोंग में 29 माइल इलाके में राजमार्ग को साफ कर रहे हैं जहां भूस्खलन हुआ। 

अधिकारियों ने कहा कि रात को हुए भूस्खलन के कारण जमा हुए मलबे से मार्ग अवरुद्ध हो गया और एक तरफ का यातायात बहाल करने के लिए रास्ते को साफ करने में थोड़ा समय लगेग। उन्होंने कहा कि इस समय एक संकरे वैकल्पिक रास्ते से वाहनों को निकाला जा रहा है।


[ Read More ]»

नीट परीक्षा स्थगित करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कही यह बात

 
yah-baat

मेडिकल प्रवेश परीक्षा 2021 को स्थगित करने की मांग को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश (स्नातक कोर्सों ) के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 12 सितंबर 2021 को होगी। सीबीएसई बोर्ड की कम्पार्टमेंट/प्राइवेट/पत्राचार परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों के एक समूह की ओर से नीट परीक्षा को स्थगित करने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थियों को कहा कि वे इस संबंध में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से ऑप्ट आउट विकल्प देने के संबंध में गुजारिश कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को निर्देश दिए कि वह छात्रों की चिंता का उचित समाधान करे।

न्यायाधीश एएम खानविल्कर, हृषिकेश रॉय और सीटी रवि कुमार की पीठ ने कहा कि नीट स्थगित करने के किसी भी फैसल से 16 लाख छात्र प्रभावित होंगे जिन्होंने इस परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके अलावा परीक्षा स्थगित करने से दूसरी परीक्षाओं के साथ टकराव भी हो सकता है।

अदालत ने कहा कि सीबीएसई की परीक्षाओं में भाग लेने वाले अभ्यर्थी को किसी ऐसे विकल्प का चयन करने की जरूरत है जिससे कि वे परीक्षा में भाग ले सकें। छात्रों ने दावा किया कि सीबीएसई का फिजिक्स पेपर ओडिशा जेईई के साथ 9 सितंबर को है, वहीं नीट 12 सितंबर को। छात्रों ने कहा कि इससे पहले एनटीए ने ऐसी स्थिति में जेईई सत्र 4 की परीक्षा को भी स्थगित कर दिया था। ऐसे में नीट के बारे में भी एनटीए को ऐसे निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

अदालत ने कहा कि इस परीक्षा के लिए करीब 16 छात्रों ने दिन-रात तैयारी की है ऐसे में परीक्षा में जरा भी बदलाव करने से उन छात्रों के सामने परेशानी पैदा करने वाला है। 


[ Read More ]»

भारत की इस रणनीति के आगे खत्म हो जाएगा अलगाववादियों का नामोनिशान

ka-naamonishaan


कश्मीर में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ शाह फंटूश जेल में है। गिलानी का दाहिना हाथ रहा उसका सबसे करीबी चेला मसर्रत आलम जेल में है। तीसरा करीबी अशरफ सेहराई जेल में बीमार होने के बाद दम तोड़ गया है। मीरवाइज में अब कोई दमखम नहीं बचा। जेकेएलएफ आतंकी यासीन मलिक की मुश्किलें बढ़ने लगीं हैं। हुर्रियत की बागडोर संभालने वाले इन पांच बड़े नामों में कुछ जेल में हैं, कुछ की मौत हो गयी और बचे हुए कुछ अलगाववादी नेता कमजोर हो गए। सबसे बड़ा सवाल यही है कश्मीर में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद अब अलगाववादियों का सबसे बड़ा नेता कौन होगा।

वहीं कश्मीर में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद पाकिस्तान ने अपना नया पासा फेंका है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान कश्मीर में गिलानी के बाद पीओके से अपने प्यादों के सहारे कश्मीर की हुर्रियत को चलाने की योजना बना रहा है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यह सबसे मुफीद वक्त है जब घाटी में अमन चैन कायम रखने के लिए सुलझे नेताओं को आगे लाया जा सकता है और कट्टरपंथी अलगाववादियों को पूरी तरीके से किनारे लगाया जा सकता है।

रक्षा मामलों के जानकार और कश्मीर में लंबे समय तक खुफिया एजेंसी को सेवाएं देने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में इस वक्त अलगाववादी आंदोलन अब तक के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। वह कहते हैं कि हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद पाकिस्तान के इशारे पर अलगाववाद के माध्यम से घाटी में आतंकवाद को बढ़ाने वाला कोई भी बड़ा नेता नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसे में पाकिस्तान अपनी नई चाल के मुताबिक अपना कोई भी 'प्यादा' कश्मीर में इस आंदोलन को बढ़ाने के लिए सेट करना चाह रहा है। चूंकि कश्मीर में कोई भी बड़ा अलगाववादी नेता इस जिम्मेदारी को संभालने लायक नहीं बचा है, इसलिए पीओके में हुर्रियत की जिम्मेदारी संभालने वाले अब्दुल्ला गिलानी पर पाकिस्तान दांव लगाने की तैयारी कर रहा है। अब्दुल्ला गिलानी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी का भाई है।

कश्मीर मामलों पर नजर रखने वाले प्रोफेसर एसएन मलिक बताते हैं कि सैयद अली शाह गिलानी ही कश्मीर में पाकिस्तान के इशारे पर आतंकवाद को बढ़ावा देते थे। उनकी मौत के बाद कश्मीर में पाकिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाला कोई भी आदमी नहीं बचा। गिलानी की मौत के बाद कुछ नाम सामने जरूर आए जो घाटी में हुर्रियत की गद्दी पर बैठ सके। लेकिन उन नामों में कुछ इतने कमजोर हो गए हैं जो अब आंदोलन को हवा नहीं दे सकते। जबकि कुछ नाम ऐसे थे जो या तो जेल में है या उनकी मौत हो गई। सबसे पहला नाम की गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश का आया लेकिन वह जेल में है।

कभी गिलानी का दाहिना हाथ रहा और सबसे भरोसेमंद आतंकी मसर्रत आलम का भी नाम गिलानी के उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आया, लेकिन उसके भी जेल में बंद होने से हुर्रियत की गद्दी संभालने वाला दूसरा नाम भी खत्म हो गया। बीते कुछ सालों से घाटी में यही चर्चा थी कि गिलानी के बाद उनका उत्तराधिकारी अशरफ सहराई होगा। लेकिन इसी साल मई में अशरफ सहराई की जेल में बीमार होने के बाद मौत हो गई। इसलिए गिलानी की गद्दी संभालने वाला कोई भी सबसे बड़ा दावेदार नहीं बचा। कश्मीर के मामलों के जानकार विशेषज्ञ बताते हैं कि हुर्रियत नेता गिलानी के उत्तराधिकारी के तौर पर फिलहाल अब कोई भी बड़ा नाम घाटी में नहीं है।

नहीं बचा मीरवाइज में दमखम कश्मीर मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में अलगाववादी आंदोलन एक तरह से वेंटिलेटर पर ही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर और यासीन मलिक जरूर इस आंदोलन को हवा दे सकते हैं, लेकिन मीरवाइज में अब वह दमखम नहीं बचा। केंद्रीय जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया बीते कुछ समय से चल रही केंद्र सरकार की कई एजेंसियों की जांच में मीरवाइज पूरी तरीके से टूट चुका है। यही वजह है कि वह गिलानी के बाद अलगाववाद के आंदोलन को घाटी में जिंदा नहीं रख सकता है। दूसरा नाम घाटी में अलगाववाद के आंदोलन को आगे बढ़ाने वाला यासीन मलिक है।

कश्मीर मामले के विशेषज्ञों का कहना है कि यासीन मलिक भी अब किसी भी तरीके के बड़े आंदोलन को हवा नहीं दे सकता। हालांकि घाटी में कम हो रहे अलगाववाद के आंदोलन को ध्यान में रखते हुए मीरवाइज और यासीन मलिक के साथ मिलकर सैयद अली शाह गिलानी ने 2016 में 'जॉइंट रजिस्टेंस लीडरशिप' (जेआरएल) नाम से एक संगठन की शुरुआत की थी। ताकि अलगाववाद का आंदोलन जिंदा रहे। इस संगठन का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन घाटी में बुरहान वानी की मौत के बाद एक बार पनपा, लेकिन सैन्य बलों ने उस आंदोलन को पूरी तरीके से कुचल कर रख दिया। सूत्र बताते हैं कि इस आंदोलन के कुचलने के बाद ही पूरी तरीके से जेआरएल की कार्यप्रणाली खुले तौर पर सामने नहीं आ पाई।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर के डाउनटाउन इलाके में अभी भी कट्टरपंथियों का एक बड़ा संगठन आंदोलित तो जरूर है लेकिन वह पूर्ण रुप से जमीन पर नहीं उतर पा रहा है। दरअसल इन कट्टरपंथियों में आईएसआई से लेकर पीओके में मौजूद आतंकवादी संगठनों के कई कमांडर और उनमें भरोसा करने वाले नौजवान और युवा भी हैं। लेकिन भारतीय सैन्य शक्ति और खुफिया एजेंसियों समेत केंद्रीय सुरक्षाबलों और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता से यह कट्टरपंथी घाटी में अपना सिर नहीं उठा पा रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर सुलग जरूर रहे हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रविवार को जिस तरीके से अलगाववादी नेता यासीन मलिक के पुराने मामलों में सीबीआई ने गवाहों के क्रॉस एग्जामिन करने की शुरुआत की है, वह अलगाववादी नेताओं के लिए या कश्मीर में आंदोलन के माध्यम से युवाओं को भड़काने वाले नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है। जेकेएलएफ के आतंकवादी यासीन मलिक के इंडियन एयरफोर्स के चार जवानों की गोली मारकर हत्या करने और रुबिका सईद के अपहरण के मामले में गवाहों का क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है यासीन मलिक के ऊपर जल्द शिकंजा कसना शुरू होगा।



[ Read More ]»

केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का ट्रिब्यूनल परअल्टीमेटम, कहा- आप ले रहे हैं हमारे धैर्य की परीक्षा

kee-pareeksha


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में ट्रिब्यूनल में बड़ी संख्या में रिक्तियों को लेकर सरकार को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि हमें लगता है कि सरकार को इस अदालत के लिए कोई सम्मान नहीं है और चेतावनी दी कि आप (सरकार) हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर नियुक्तियां करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में आगे की सुनवाई 13 सितंबर को होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "हम परेशान हैं, लेकिन हम सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते हैं, जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया, "सरकार भी टकराव नहीं चाहती है।''

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (जो कल कानून मंत्री किरेन रिजिजू के साथ एक कार्यक्रम में थे, जब उन्होंने सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को तुरंत मंजूरी देने की बात कही) ने पूछा, "लेकिन ट्रिब्यूनल के रिक्त पदों को क्यों नहीं भरा जा रहा है? एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) और एनसीएलएटी (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) जैसे महत्वपूर्ण ट्रिब्यूनल में रिक्तियां हैं। वे अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। सशस्त्र बलों और उपभोक्ता ट्रिब्यूनल में भी रिक्तियां मामलों के समाधान में देरी का कारण बन रही हैं।"

अदालत की नाराजगी सॉलिसिटर जनरल से यह कहते हुए जुड़ी थी कि वित्त मंत्रालय ने कहा था कि नियुक्तियों पर फैसला दो महीने में लिया जाएगा।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने कहा, "लेकिन दो साल से रिक्तियां लंबित हैं। आपने अभी तक नियुक्तियां क्यों नहीं कीं? आप नियुक्तियां नहीं करके न्यायाधिकरणों को कमजोर कर रहे हैं।"

अदालत ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट पर नाराजगी व्यक्त की और एक "पैटर्न" का उल्लेख किया। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "हम एक अधिनियम को खत्म करते हैं और एक नया आता है, यह एक पैटर्न बन गया है। हम नए कानूनों को विश्वास नहीं दे सकते हैं, जब पहले के निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि आप (सॉलिसिटर जनरल) सरकार को एक के बाद एक कानून बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं, शायद नौकरशाह ऐसा करते हैं। लेकिन हम बहुत परेशान हैं।"

मुख्य न्यायाधीश ने मेहता को तीन विकल्प दिए।

"एक - ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट पर रोक और नियुक्तियों के साथ आगे बढ़ना। दूसरा - हम ट्रिब्यूनल बंद करते हैं। तीसरा - हम ट्रिब्यूनल पदों के लिए खुद नियुक्तियां करते हैं।"

मुख्य न्यायाधीश रमना ने चेतावनी दी, "अन्य विकल्प यह है कि हम आपके (सरकार) के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करें।"

राज्यसभा सांसद जयराम रमेश की याचिका पर आज का नोटिस तीन सदस्यीय पीठ - मुख्य न्यायाधीश रमना, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति राव द्वारा जारी किया गया था।

कांग्रेस नेता ने कहा था कि ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 के प्रावधान (जो एक अध्यादेश को पुनर्जीवित करते हैं, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था) को असंवैधानिक घोषित किया जाए।

उन्होंने कहा कि अधिनियम (जो नौ प्रमुख न्यायाधिकरणों को समाप्त करता है) न्यायाधिकरण के सदस्यों की नियुक्तियों, सेवा शर्तों और वेतन पर सरकार की शक्ति देकर न्यायिक स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है।


[ Read More ]»

सशस्त्र बलों को वीरता पदक प्रदान करने वाले तंत्र को 'मनमाना' घोषित करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

mein-yaachika


दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके अनुरोध किया गया है कि सशस्त्र बल कर्मियों को वीरता पदक देने की मौजूदा व्यवस्था को कथित अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के कारण मनमाना और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ घोषित किया जाए।

याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। इसमें आरोप लगाया गया है कि ऐसे उदाहरण हैं, जहां उच्च मान्यता के योग्य वीरता के कृत्यों को व्यवस्था द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया है।

इसमें कहा गया है कि किसी निर्णय की समीक्षा किए जाने के लिए एक तंत्र नहीं होने के कारण सशस्त्र बलों के योग्य कर्मियों के साथ अन्याय के गंभीर मामले सामने आए हैं। याचिका एक रिटायर्ड रक्षा कर्मी द्वारा दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि वीरता पुरस्कार आमतौर पर शांति या युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों के कर्मियों द्वारा किए गए वीरता के विशिष्ट कार्यों के लिए दिए जाते हैं।

इसमें कहा गया है कि इन सभी वीरता पदकों को भारत के राष्ट्रपति के कार्यालय द्वारा समय-समय पर जारी विभिन्न अधिसूचनाओं के माध्यम से विनियमित किया जाता है जिसमें इसके रूप, चयन मानदंड और पुरस्कार विजेताओं को दिए जाने वाले लाभ तय होते हैं।

इसमें अनुरोध किया गया है कि कामकाज में अस्पष्टता के आधार पर मौजूदा व्यवस्था को मनमाना और असंवैधानिक घोषित किया जाए। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान तंत्र जो सशस्त्र बलों के कर्मियों द्वारा वीरता पदक के पुरस्कार के लिए व्यक्तिगत रूप से बहादुरी के प्रत्येक कार्य पर विचार करता है, उसका कामकाज अपरिभाषित और अपारदर्शी है।

याचिका में कहा गया है कि गलत निर्णय की समीक्षा के लिए कोई तंत्र नहीं होने से सशस्त्र बलों के योग्य कर्मियों के साथ अन्याय के गंभीर मामले सामने आए हैं। 


[ Read More ]»

पिता के खिलाफ FIR दर्ज होने पर सीएम भूपेश बघेल बोले- 'कानून से ऊपर कोई नहीं

koee-nahin


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल के खिलाफ कथित ब्राह्मणों के बहिष्कार को लेकर कई गई टिप्पणी पर राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। नंद कुमार बघेल पर यह कार्रवाई सर्व ब्राह्मण समाज की शिकायत की शिकायत के बाद की गई, पुलिस ने धारा 153-ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (1) (बी) (तनाव बढ़ाने का इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है। पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, भले ही वह व्यक्ति मेरे पिता ही हों।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भूपेश बघेल के 86 वर्षीय पिता नंद कुमार बघेल ने ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी करते हुए उनके बहिष्कार की बात कही थी, जिसे लेकर अब सर्व समाज उनसे नाराज हो गया है। नंद कुमार बघेल कहा था, 'मैं भारत के सभी ग्रमीणों से उनुरोध करता हूं कि वह ब्राह्मणों को अपने गांव में प्रवेश ना करने दें। मैं दूसरे समुदायों से भी बात करूंगा ताकि उनका (ब्राह्मणों) का बहिष्कार किया जा सके। उन्हें वोल्गा नदी के तट पर वापस भेजने की जरूरत है।' नंद कुमार बघेल की इस टिप्पणी के खिलाफ ब्राह्मण समाज ने डीडी नगर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शनिवार देर रात सीएम भूपेश बघेल के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

पिता पर कानूनी कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार सबके लिए खड़ी है और कानून से ऊपर कोई नहीं है भले ही वह व्यक्ति उनके 86 वर्षीय पिता हों। सीएम भूपेश बघेल ने कहा, 'छत्तीसगढ़ सरकार हर धर्म, संप्रदाय, समुदाय और उनकी भावनाओं का सम्मान करती है। मेरे पिता नंद कुमार बघेल द्वारा एक विशेष समुदाय के खिलाफ टिप्पणी की गई है। सांप्रदायिक शांति भंग की गई, उनके बयान से मैं भी दुखी हूं। सीएम के रूप में विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने की मेरी जिम्मेदारी है। अगर उन्होंने (पिता) एक समुदाय के खिलाफ टिप्पणी की, तो मुझे खेद है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।'


[ Read More ]»
”go"