गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।
Showing posts with label स्पेशल-न्यूज़. Show all posts
Showing posts with label स्पेशल-न्यूज़. Show all posts

मदरसों के बाद अब वक्फ संपत्तियों का होगा सर्वे, योगी सरकार

 

sampattiyon-ka-hoga

वक्फ संपत्तियों को सुव्यवस्थित ढंग से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए सात अप्रैल 1989 को शासनादेश भी जारी किया गया था। 1989 के शासनादेश के तहत पाया गया कि...

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने मदरसों के बाद अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का भी सर्वे करवाने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के वर्ष 1989 के शासनादेश को निरस्त करते हुए एक महीने के भीतर सर्वे पूरा करवाने और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने को कहा है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सर्वे का उद्देश्य वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे और बिक्री को रोकना है। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों की जाँच होगी। वहीं, 75 जिलों में जितनी भी जमीनें हैं, उन्हें वक्फ के नाम से अभिलेखों में दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।


उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिले के सभी कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा है, “वक्फ अधिनियम 1995 और उत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ अधिनियम 1960 में वक्फ की संपत्ति को पंजीकरण कराने के प्रावधान के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई है। वक्फ संपत्तियों को सुव्यवस्थित ढंग से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए सात अप्रैल 1989 को शासनादेश भी जारी किया गया था। 1989 के शासनादेश के तहत पाया गया कि वक्फ की संपत्तियाँ अधिकतर बंजर, उसर और भाटी में दर्ज हैं। लेकिन, वह वक्फ की हैं। इसलिए इन भूमि को सही तरह से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने और उनका सीमांकन कराने की जरूरत है।”

बता दें कि वर्ष 1989 के बाद से राजस्व अभिलेखों में दर्ज वक्फ संपत्तियों को नियमानुसार दुरुस्त करने को कहा गया है। देश भर में वक्फ बोर्ड के पास भारतीय सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा भूमि है। वक्फ बोर्ड को देश का तीसरा सबसे बड़ा भूमि मालिक बताया जा रहा है। वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियाँ हैं, जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि में फैली हुई हैं।


[ Read More ]»

हिंदुओं की संपत्ति छीनने का औजार बना वक्फ एक्ट 1995? इस राज्य में 6 गांवों की जमीन पर वक्फ बोर्ड ने किया कब्जा

jameen-par-vakph-bord-ne-kiya-kabja

इस्लाम (Islam) को आए 1400 साल ही हुए हैं. लेकिन, वक्फ बोर्ड (Waqf Board) 1500 साल पुराने मंदिर की जमीन पर भी दावा ठोक सकता है. तमिलनाडु (Tamil Nadu) के एक हिंदू बाहुल्य गांव तिरुचेंथुरई को वक्फ एक्ट (Waqf Act) के तहत अपनी मिल्कियत घोषित कर दिया है. जिसमें उस गांव में बना 1500 साल पुराना मंदिर भी आता है.

Tamil Nadu Waqf Board: अगर आप अपनी कोई जमीन या मकान बेचने के लिए रजिस्ट्रॉर दफ्तर जाएं और वहां पता चले कि आपकी जमीन तो आपकी है ही नहीं. उस जमीन पर तो किसी और का कब्जा हो चुका है तो हमारा दावा है कि आपके पैरों तले की जमीन खिसक जाएगी.  

यही हुआ है तमिलनाडु में त्रिची जिले के तिरुचेंथुरई गांव के रहने वाले राजगोपाल नाम के व्यक्ति के साथ. जो अपनी एक एकड़ जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रॉर दफ्तर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के के बारे में वो सोच रहे हैं वो उनकी नहीं रही, वक्फ की हो चुकी है और अब उसका मालिक तमिलनाडु वक्फ बोर्ड है. बात बढ़ी तो रजिस्ट्रॉर दफ्तर से पता चला कि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड (Tamil Nadu Waqf Board) ने राजगोपाल की जमीन समेत पूरे गांव की जमीन पर अपना दावा किया हुआ है. जिसमें उस गांव में बना करीब 1500 साल पुराना मंदिर भी आता है.

वक्फ बोर्ड ने कर लिया हिंदू गांव की जमीन पर कब्जा

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है, ऐसा तो हो ही नहीं सकता? जब हमने ये खबर सुनी तो हमें भी यकीन नहीं आया. लेकिन फिर हमने इस दावे की सच्चाई जानने के लिए त्रिची के तिरुचेंथुरई गांव जाने का फैसला किया. फिर जो सच्चाई सामने आई, वो तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की अवैध कब्जा नीति का जीता-जागता सबूत है. 

65 वसंत देख चुके राजगोपाल को जब त्रिची के लैंड रजिस्ट्रॉर ने अपनी जमीन बेचने के लिए चेन्नई जाकर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड (Tamil Nadu Waqf Board) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लाने के लिए कहा तो उन्हें अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ. जब राजगोपाल के हाथ में नोटिस आया तो उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया.

असल में राजगोपाल अपनी बेटी की शादी के लिए जमीन बेचना चाहते हैं. लेकिन शादी रुक गई है क्योंकि वह इसका खर्च उठाने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं आत्महत्या करना चाहता था. मैं अस्वस्थ हूं. 

राजगोपाल की जमीन ही नहीं तिरुचेंथुरई गांव के सारे खेत-खलिहान गांव की जमीनें-मकान. सब पर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने कब्जा कर लिया है. गांव के लोग ठगा महसूस कर रहे हैं. पुरखों की जमीन को अपना समझते आए थे वो पता चला कि उनकी नहीं है. 

1500 साल पुराने मंदिर को भी बताया अपना

इस गांव में 95 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है. वर्ष 1985 में 22 मुस्लिम परिवार जरूर यहां आकर बसे हैं. लेकिन पूरा गांव हिंदू बाहुल्य है. करीब पंद्रह हजार की आबादी वाले इस गांव के आसपास करीब 369 एकड़ की संपत्ति है. गांव में एक प्राचीन मंदिर भी है. जो 1500 साल पुराना बताया जाता है. यानी इस्लाम धर्म से भी पहले का.

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड (Tamil Nadu Waqf Board) की इस कारस्तानी पर सवाल उठाने के बजाय रजिस्ट्रॉर कार्यालय गांव वालों को ही नोटिस दे रहा है और घोषणा कर रहा है कि गांव की सारी संपत्ति तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के अधीन है. वक्फ बोर्ड की अनुमति के बगैर कोई संपत्ति ना खरीदी जा सकती है और ना बेची.

सवाल ये है कि एक हिंदू बाहुल्य गांव को वक्फ बोर्ड अपनी प्रापर्टी कैसे घोषित कर सकता है. आखिर कौन से कानून में वक्फ बोर्ड को इस मनमानी की इजाजत मिली है. जो वक्फ बोर्ड को इतनी असीमित ताकतें देता है. अब पूरा तिरुचेंथुरई गांव ये सोच-सोचकर परेशान है कि वक्फ के कब्जे से अपनी जमीनों और संपत्तियों को कैसे छुड़ाएं. 

ये सिर्फ एक गांव का मामला नहीं है, जिस पर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने अपना मालिकाना हक घोषित कर दिया है. बल्कि अकेले त्रिची जिले में कम से कम 6 ऐसे गांव हैं, जिन्हें वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित किया हुआ है.
तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं को भेजा नोटिस

इसका सबूत है तमिलनाडु वक्फ बोर्ड (Tamil Nadu Waqf Board) का वो दस्तावेज है जिसमें त्रिची जिले में वक्फ बोर्ड की सारी संपत्तियों की डिटेल्स हैं. जिसका ब्यौरा त्रिची के रजिस्ट्रार दफ्तर को भेजा गया था. इस दस्तावेज पर 18 अगस्त 2022 की तारीख पड़ी है. ये बीस पन्नों का दस्तावेज है. जिसमें बोल्ड अक्षरों में लिखा है कि वक्फ की संपत्ति को बेचना, अदला-बदली करना, किराये पर देना या ट्रांसफर करना वक्फ एक्ट 1995 के तहत गैरकानूनी है. इस दस्तावेज में त्रिची में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का ब्यौरा दिया गया है.

लेकिन त्रिची के एक हिंदू बाहुल्य गांव पर वक्फ बोर्ड ने अपना मालिकाना हक जताकर कई सवाल पैदा कर दिए हैं. जिन्हें समझने के लिए आपको पहले ये समझना होगा कि आखिर वक्फ होता क्या है और वक्फ बोर्ड कैसे काम करता है. 

वक्फ, अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है - वो संपत्ति, जो अल्लाह के नाम पर दान दी गई हो. वक्फ, पैसे या संपत्ति का हो सकता है, जिसका इस्तेमाल गरीबों की भलाई के लिए हो सके. इसके अलावा अगर किसी संपत्ति को लंबे समय तक इस्लाम धर्म के काम में इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो उसे भी वक्फ माना जा सकता है. अगर कोई एक बार किसी संपत्ति को वक्फ कर देता है तो उसे फिर वापस नहीं लिया जा सकता.

क्या होती हैं वक्फ संपत्ति

वक्फ में मिली संपत्तियों और पैसों के मैनेजमेंट के लिए वक्फ बोर्ड होते हैं. जिन्हें आप धरती पर अल्लाह के खजांची यानी अकाउंटेंट भी कह सकते हैं. दरअसल जब कोई मुस्लिम अपनी संपत्ति दान कर देता है तो उसकी देखरेख का जिम्मा वक्फ बोर्ड के पास ही होता है. वक्फ बोर्ड के पास दान दी गई किसी भी संपत्ति पर कब्जा रखने या उसे किसी और को देने का अधिकार होता है. 

भारत में वक्फ संस्थाओं का वजूद 800 साल से है. जिसकी शुरुआत मुस्लिम बादशाहों द्वारा दान की गई जमीनों की देखभाल करने से हुई. इस समय भारत में एक केंद्रीय वक्फ बोर्ड और 32 राज्य वक्फ बोर्ड हैं. जिन्हें रेगुलेट करने के लिए वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 है. अब इसी कानून के आईने में तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की कारस्तानी का DNA टेस्ट करते हैं.

पॉइंट नंबर वन 

वक्फ एक्ट (Waqf Act 1995) के नियमों के मुताबिक, वक्फ बोर्ड सिर्फ उस संपत्ति पर दावा कर सकता है जो इस्लाम धर्म को मानने वाले किसी शख्स ने धार्मिक काम के लिए दान में दी हो. तो फिर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने पूरे गांव को अपनी संपत्ति कैसे घोषित कर दिया?

पॉइंट नंबर टू 
वक्फ कानून के मुताबिक वक्फ बोर्ड के पास गैर मुस्लिमों की संपत्ति पर दावा करने का अधिकार नहीं है. तो फिर एक हिंदू बाहुल्य गांव पर वक्फ बोर्ड ने दावा कैसे कर दिया?

पॉइंट नंबर थ्री 
वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 में कहीं नहीं लिखा कि वक्फ बोर्ड, किसी निजी प्रॉपर्टी पर अपना दावा ठोक सकता है. तो फिर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने राजगोपाल नाम के हिंदू शख्स की जमीन पर दावा कैसे ठोक दिया?

चौथा और सबसे बड़ा पॉइंट 
वक्फ एक्ट 1995 (Waqf Act 1995) के ही सेक्शन 3 में वक्फ की परिभाषा है जिसके मुताबिक कोई भी ऐसी चल या अचल संपत्ति, जो मुस्लिम लॉ द्वारा मान्यता प्राप्त किसी धार्मिक या चैरिटेबल काम के लिए पूरी तरह से दान में दी गई हो, वो वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी होगी. सवाल ये है कि त्रिची के जिस गांव को तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति बताया है, उसे किसने दान में दिया ?

इन सवालों के जवाब तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को देने हैं लेकिन वो सवाल पूछे जाने पर सीधा जवाब देने के बजाय बातों को गोल-गोल घुमा रहा है और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर ज्यादा चिंतित नजर आ रहा है.

वक्फ बोर्ड को दे दिए गए असीमित अधिकार
आसान भाषा में कहें तो वक्फ बोर्ड के पास असीमित अधिकार हैं कि वो मुस्लिम चैरिटी के नाम पर संपत्तियों पर हक जता सके. लेकिन उसे ये हक कैसे मिला, इसे समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा.

दरअसल बंटवारे के बाद पाकिस्तान से जो हिंदू भागकर हिंदुस्तान आए, पाकिस्तान में उनकी संपत्तियों पर मुसलमानों और पाकिस्तान सरकार ने कब्जा कर लिया . लेकिन भारत से पाकिस्तान जा चुके मुसलमानो की जमीन को भारत सरकार ने वक्फ बोर्ड को दे दिया. जिसके बाद वर्ष 1954 में वक्फ बोर्ड एक्ट बना. लेकिन वर्ष 1995 में वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव कर वक्फ बोर्ड्स को जमीनों के अधिग्रहण के असीमित अधिकार दे दिए गए. जिसके बाद वक्फ बोर्ड की संपत्ति में दिन दोगुनी, रात चौगुनी रफ्तार से इजाफा होने लगा.

देश में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा संपत्तियां
वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त वक्फ बोर्ड्स के पास कुल 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं जो आठ लाख एकड से ज्यादा जमीन पर फैली हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड्स के पास है. सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन पर संपत्तियां हैं. जबकि देश में रेलवे की चल-अचल संपत्तियां करीब 12 लाख एकड़ में फैली हैं.

वर्ष 2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां चार लाख एकड़ जमीन पर फैली थी. जो अब बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं. जबकि देश में जमीन उतनी ही है जितनी पहले थी. फिर भी वक्फ बोर्ड की जमीन कैसे बढ़ रही है? आरोप लगते हैं कि वक्फ बोर्ड, देश में जहां भी कब्रिस्तान की चारदीवारी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी वक्फ अपनी संपत्ति मान लेता है. इसी तरह अवैध मजारों और मस्जिदों को धीरे-धीरे वक्फ बोर्ड, अपनी संपत्ति घोषित कर देता है. आसान भाषा में इसे लोग अतिक्रमण कहते हैं और वक्फ बोर्ड को इस अतिक्रमण का अधिकार 1995 का वक्फ बोर्ड कानून देता है.

किसी की भी संपत्ति छीन सकते हैं वक्फ बोर्ड
वक्फ एक्ट (Waqf Act 1995) का सेक्शन 3 बताता है कि अगर वक्फ सोचता है कि जमीन किसी मुस्लिम से संबंधित है, तो वह वक्फ की संपत्ति है. यहां ध्यान दीजियेगा कि वक्फ का सिर्फ सोचना ही काफी है, उसे इसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है. अगर वक्फ ने ये मान लिया कि आपकी संपत्ति, आपकी नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड की है तो फिर आप अदालत भी नहीं जा सकते. आप वक्फ की ट्रिब्यूनल कोर्ट में जा सकते हैं.

वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि अगर वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल को आप संतुष्ट नहीं कर पाते कि ये आपकी ही जमीन है तो आपको जमीन खाली करने का आदेश दे दिया जाएगा. ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम होगा. कोई सिविल कोर्ट, वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट के फैसले को बदल नहीं सकती है.

वक्फ एक्ट का सेक्शन 40 कहता है कि जब वक्फ बोर्ड किसी शख्स की जमीन पर दावा करता है तो जमीन पर दावा सिद्ध करने की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड की नहीं होती है बल्कि जमीन के असली मालिक को अपनी जमीन पर मालिकाना हक साबित करना होता है.

यानी अगर वक्फ बोर्ड किसी जमीन पर दावा कर दे तो समझो वो जमीन उसकी हो गई. तमिलनाडु में भी यही हुआ है. दिल्ली हाई कोर्ट में इसी साल अप्रैल में एक याचिका दायर की गई है जिसमें वक्फ एक्ट के प्रावधानों को चुनौती दी गई है.

वर्ष 1995 में बनाया गया था यह कानून
एक सेकुलर देश में एक धार्मिक एक्ट (Waqf Act 1995) लागू है. ये अपने आप में हैरानी की बात है क्यों हिंदुओं, ईसाईयों और सिखों के लिए ऐसा कोई एक्ट नहीं है? केवल मुस्लिमों को लिए ही क्यों है? विडंबना देखिये कि वर्ष 1991 में Places of Worship Act बना जो कहता है कि देश की स्वतंत्रता के समय जो धार्मिक स्थल जिस स्वरूप में था, उसे वैसे ही बरकरार रखा जाएगा. वहीं 1995 में वक्फ एक्ट लागू होता है जो देशभर में वक्फ बोर्ड को ये अधिकार देता है कि वो किसी भी संपत्ति पर अपना हक जता सकता है और इसके खिलाफ पीड़ित पक्ष देश की किसी अदालत में गुहार तक नहीं लगा सकता.

किसी भी मुस्लिम देश में नहीं है ऐसा विधान
ये सुनने में ही अजीब लगता है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में ऐसा एक्ट है. जबकि किसी मुस्लिम देश में ऐसा कोई एक्ट नहीं है. तुर्की, लीबिया, इजिप्ट, सुडान, लेबनान, सीरिया, जोर्डन और इराक जैसे मुस्लिम देशों में ना तो कोई वक्फ बोर्ड है और ना ही कोई वक्फ कानून. हमारा मानना है कि भारत में भी वक्फ एक्ट की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. सरकार को वक्फ एक्ट को रद्द कर देना चाहिए और सभी धर्मों के लिए एक जैसा एक्ट बनाया जाना चाहिए.

[ Read More ]»

उत्तर प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों पर एक से अधिक लगे लाउडस्पीकर हटेंगे

laudaspeekar-hatenge

गोण्डा। मस्जिदों व मंदिरों पर लगे एक से अधिक लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे। शासन के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ने चारो सर्किल के सीओ समेत जिले के 17 थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में मस्जिदों व मंदिरों को स्थलीय निरीक्षण कर एक से अधिक व अवैध तरीके से लगाए गए लाउडस्पीकर को हटवाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद थानावार मस्जिदों व मंदिरों की सूची तैयार की जा रही है। थानास्तर पर मस्जिदों व मंदिरों के संचालकों को चार दिनों के अंदर लाउडस्पीकर हटाने की नोटिस भेेजी गई है। ऐसा न करने पर चार दिनों बाद थानों की पुलिस लाउडस्पीकर हटवाएगी। मस्जिदों व मंदिरों के संचालकों को 75 डेसिबल से तेज आवाज में लाउडस्पीकर नहीं बजाने को कहा है।

शासन के आदेश पर मंदिरों और मस्जिदों से अवैध लाउडस्पीकर हटाए जाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस विभाग ने 670 मजिस्दों व करीब 800 मंदिरों में लगे एक से अधिक व अवैध लाउडस्पीकर को जल्द से जल्द हाटने की कवायद शुरू कर दी है। मस्जिदों व मंदिरों पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज से लोगों की परेशानी को देखते हुए शासन के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक ने जनपद के 17 थानाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं। थानाध्यक्षों को बीट दरोगा व बीट सिपाही समेत स्वयं मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करके मस्जिदों व मंदिरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए है।

थानावार पुलिसकर्मी अपने-अपने क्षेत्र में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर की संख्या व अनुमति के बारे में पता लगाकर सूची तैयार कर रहे हैं। इसके लिए थानाध्यक्ष स्तर से मस्जिदों व मंदिरों के संचालकों को नोटिस दी जाएगी। एक से अधिक लाउडस्पीकर न लगाने, अगर लगा है तो उसे तत्काल हटा लेने के साथ बिना अनुमति के लाउडस्पीकर न लगाने को कहा जाएगा। संचालकों को 75 डेसिबल तक ही लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति होगी। जिससे किसी भी व्यक्ति को परेशानी न हो। इसके लिए 17 थानों के थानाध्यक्ष सूची तैयार करने में जुटें हैं। इसके लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इस बीच अगर संचालक लाउडस्पीकर नहीं हटाते हैं तो उसे थानों की पुलिस मौके पर पहुंचकर हटवाएगी।

पुलिस के पास नहीं है मंदिरों का आंकड़ा फिलहाल जिले की पुलिस के पास मस्जिदों को तो आंकड़ा है। उनकी संख्या के साथ ही नाम समेत पूरा ब्यौरा पुलिस की फाइल में है। मगर मंदिरों का कोई आंकड़ा पुलिस के पास नहीं है। अब शासन का आदेश आने के बाद मंदिरों की भी सूची तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि मंदिरों में लाउडस्पीकर न होने की वजह से उसकी सूची बनाने की जरूरत नहीं पड़ी। लिहाजा पुलिस ने मंदिरो की सूची नहीं बनाई थी। मगर शासन के आदेश के बाद मंदिरों की भी सूची तैयार की जा रही है।

शासन के आदेश पर मस्जिदों व मंदिरों पर लगे एक से अधिक लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश थानाध्यक्षों को दिए गए हैं। बिना अनुमति के भी लगाए गए लाउडस्पीकर भी हटाए जाएंगे। मस्जिदों व मंदिरों के संचालकों को 75 डेसिबल तक ही लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति होगी। जिससे लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े। थानावार मस्जिदों व मंदिरों की सूची तैयार की जा रही है। लाउडस्पीकर हटाने के लिए चार दिन का समय दिया गया है। 30 अप्रैल तक संचालकों ने नहीं हटाया तो थानों की पुलिस हटवाएगी। 


[ Read More ]»

महोबा-पादरी गिरफ्तार, पैसों का लालच देकर धर्मांतरण कराने का आरोप

 
karaane-ka-aarop

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक पादरी पर पिछले आठ सालों से गरीबों को रुपयों का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा है. पुलिस ने आरोपी पादरी आशीष जॉन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है. हिंदूवादी संगठनों की शिकायत के बाद पुलिस ने पादरी के खिलाफ यह कार्रवाई की है. पादरी आशीष जॉन महोबा जिले में पनवाड़ी थाना क्षेत्र के सिमरिया गांव में किराए का मकान लेकर रहता था. आरोप है कि वह पिछले आठ सालों से गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम कर रहा था.

इस मामले में पुलिस ने बताया, ''आशीष जॉन नाम का यह पादरी यूपी के बलिया जिले का रहने वाला है जो महोबा के पनवाड़ी थाने के सिमरिया गांव में रह कर गरीब ग्रामीणों को रुपयों का लालच दे कर उनका धर्म परिवर्तन कराने के काम में लगा हुआ था. यह पादरी केरल की ईसाई मिशनरियों से जुड़ा हुआ है और पैसों का लालच देकर हिंदुओं से ईसाई बनाने का काम बेखौफ कर रहा था. यह सिमरिया गांव के 3 किसानों को रुपये देकर हिन्दू से ईसाई बना चुका है.''

बजरंग दल के विभाग संयोजक सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि केरल से जुड़ा हुआ पादरी आशीष जॉन हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करा रहा है तो उन्होंने इसकी जानकारी इकट्ठा करने के बाद पुलिस में शिकायत की. इसके बाद पनवाड़ी थाने की पुलिस ने आशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

महोबा की एसपी सुधा सिंह ने बताया कि यह बहुत गंभीर मामला है. इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है और जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उस पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी. मामले के सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है.

दावा किया गया है कि गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आशीष जान ने खुद कुबूल किया कि वह ईसाई मिशनरी का प्रचारक है और उसके पास से ईसाई धर्म का काफी साहित्य और किताबें भी बरामद हुई हैं.



[ Read More ]»

लव जिहाद से आतंकवाद में धकेली जा रहीं दूसरे धर्म की लड़कियां, खत्म करना चाहते हैं गैर मुस्लिम: बिशप

se-aatankavaad


केरल में एक कैथोलिक बिशप ने गुरुवार को कहा कि राज्य में ईसाई लड़कियां बड़ी संख्या में 'लव जिहाद और नार्कोटिक जिहाद के जाल में फंस रही हैं और जहां हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वहां चरमपंथी अन्य धर्मों की युवतियों को बर्बाद करने के लिए ये हथकंडे अपना रहे हैं। बिशप ने कहा कि जिहादी प्यार और दूसरे तरीकों से दूसरे धर्म की महिलाओं का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों या आर्थिक लाभ के लिए करते हैं। उनका लक्ष्य अपने धर्म को बढ़ाना और गैर-मुस्लिमों को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि चरमपंथियों के लिए यह युद्ध की रणनीति है।

सायरो मालाबार चर्च से जुड़े पाला बिशप मार जोसेफ कल्लारनगट्ट ने आरोप लगाया कि 'लव जिहाद के तहत गैर मुस्लिम लड़कियों, विशेष रूप से ईसाई समुदाय की लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसा कर उनका धर्मांतरण किया जा रहा है और शोषण किया जा रहा है। उनका आतंकवाद जैसी विध्वंसक गतिविधियों में उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। वह कोट्टायम जिले में कुरूविलंगड में एक चर्च समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। 

बिशप ने दुनिया भर में और केरल में सांप्रदायिकता फैलाने, धार्मिक असौहार्द्र और असहिष्णुता बढ़ाने की कोशिश करने वाले जिहादियों की मौजूदगी के खिलाफ आगाह करते हुए कहा कि वे अन्य धर्मों को तहस-नहस करने के लिए अलग-अलग तरकीब अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ''इस तरह की दो चीजें लव जिहाद और नार्कोटिक (मादक पदार्थ) जिहाद हैं। चूंकि जिहादी जानते हैं कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हथियारों के जरिए अन्य धर्मों के लोगों को बबार्द करना आसान नहीं है, इसलिए वे अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस तरह के अन्य हथकंडे अपना रहे हैं।''

उन्होंने पूर्व पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के हालिया बयानों को जिक्र करते हुए कहा कि केरल आंतकवादियों का एक भर्ती केंद्र बन गया है और इस राज्य में चरमपंथी समूहों का एक भूमिगत प्रकोष्ठ मौजूद है। बिशप ने दावा किया कि राज्य की ईसाई और हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण किया गया और उन्हें हाल ही में अफगानिस्तान में आतंकवादी शिविरों में भेजा गया। उन्होंने कहा कि इस विषय की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि राज्य में 'लव जिहाद और नार्कोटिक जिहाद' नहीं है वे सच्चाई से आंखें मूंद रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो राजनेता, सामाजिक-सांस्कृतिक नेता व पत्रकार, इस से इनकार कर रहे हैं, ऐसा करने में उनके निहित स्वार्थ हो सकते हैं। 



[ Read More ]»

संविधान के खिलाफ है विधानसभा में नमाज कक्ष, जानें क्‍या है इस मसले परकानून विशेषज्ञों की राय

 
visheshagyon-kee-raay

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा परिसर में नमाज अदा करने के लिए अलग कमरा आवंटित किए जाने पर घमासान मचा है। नमाज कक्ष आवंटित करने पर विपक्ष में बैठी भाजपा भी अब विधानसभा परिसर में मंदिर के लिए जगह देने की मांग कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि संसद या विधानसभा परिसर में किसी धार्मिक गतिविधि को इजाजत देना क्या संविधान सम्मत है। विशेषज्ञों की मानें तो विधानसभा में धार्मिक गतिविधि या धार्मिक निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। जानें इस मसले पर क्‍या है कानून विशेषज्ञों की राय...

यह संविधान के खिलाफ

विशेषज्ञों का कहना है कि संसद और विधानसभा संविधान के तहत राज्य की परिभाषा में आते हैं। संविधान के मुताबिक, राज्य पंथनिरपेक्ष है। ऐसे में विधानसभा परिसर में नमाज कक्ष संविधान के खिलाफ है। झारखंड विधानसभा स्पीकर की ओर से जारी दो सितंबर, 2021 के आदेश के मुताबिक, नए विधानसभा भवन में कमरा नंबर 348 को नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष के रूप में आवंटित किया गया है।

लोकसभा के पूर्व सेक्रेट्री जनरल की राय

विधानसभा पब्लिक बिल्डिंग है जो विधानसभा अध्यक्ष के तहत आती है। वहां कोई भी काम विधानसभा अध्यक्ष के आदेश से ही होता है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष आवंटित करने को लोकसभा के पूर्व सेक्रेट्री जनरल पीडीटी आचारी असंवैधानिक मानते हैं।

विधानसभा एक सेक्युलर बाडी

पीडीटी आचारी कहते हैं कि उन्होंने ऐसा पहले कभी देखा, सुना नहीं। विधानसभा एक सेक्युलर बाडी (पंथनिरपेक्ष संस्था) है। उसका धर्म से कोई लेनादेना नहीं है। उसमें धार्मिक गतिविधि की बाडी नहीं होनी चाहिए। भारत पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है। राष्ट्र का कोई धर्म नहीं होता। पाकिस्तान इस्लामिक स्टेट है। वहां ऐसा हो सकता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो सकता। यहां किसी धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती।

यह असंवैधानिक
राज्यसभा के पूर्व सेक्रेट्री जनरल योगेन्द्र नारायण भी कहते हैं कि यह असंवैधानिक है। विधानसभा पंथनिरपेक्ष है और वह पब्लिक बिल्डिंग है। पब्लिक बिल्डिंग के अंदर कोई रिलीजियस स्ट्रक्चर की इजाजत नहीं है।

नमाज कक्ष आवंटित करना अनुचित
संविधान विशेषज्ञ और लंबे समय तक लोकसभा में सेक्रेट्री जनरल रहे सुभाष कश्यप का भी मानना है कि झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए नमाज कक्ष आवंटित करना अनुचित और औचित्य के विरुद्ध है। यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्हें पूर्व की ऐसी कोई घटना याद नहीं है। हालांकि वह मानते हैं कि ऐसा करना स्पीकर और सदन के क्षेत्राधिकार में आता है, लेकिन साथ ही कहते हैं कि सदन स्पीकर से ऊपर होता है और सदन चाहे तो स्पीकर का आदेश खारिज कर सकता है।

अदालतों को सुनवाई का अधिकार
स्पीकर के क्षेत्राधिकार पर वरिष्ठ वकील और पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी कहते हैं कि स्पीकर भी संविधान के हिसाब से ही काम करेगा। वह मनमानी नहीं कर सकता। वह संविधान से बंधा होता है और संविधान के दायरे में रह कर ही काम करेगा। नमाज कक्ष आवंटित करने पर रोहतगी का कहना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने से दूसरे वर्ग भी इसी तरह की मांग रखेंगे। इस मामले में दखल देने के कोर्ट के क्षेत्राधिकार पर वह कहते हैं कि वैसे तो इस तरह के मामले कोर्ट-कचहरी में नही जाने चाहिए, लेकिन अगर मामला कोर्ट में जाता है तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को उस पर सुनवाई करने का अधिकार है।


[ Read More ]»

पत्नी ने लगाया धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने और गोमांस खिलाने का आरोप, पति समेत 3 गिरफ्तार

 
3-giraphtaar

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक महिला ने ससुराल वालों पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने पति समेत 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है तथा मामले में 2 लोग फरार हैं। दुर्ग जिले के पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि भिलाई शहर के छावनी थाना क्षेत्र निवासी 21 वर्षीय युवती ने पति मोहम्मद अकबर 25), ससुर मरगुब, देवर मकबूल तथा सास और देवरानी पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने और दहेज की मांग करने का आरोप लगाया है। युवती ने पति अकबर पर अप्राकृतिक कृत्य करने का भी आरोप लगाया है।

'पिछले साल अचानक गायब हो गए थे हिंदू युवती और अकबर'

रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवती की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, ससुर और देवर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि छावनी थाना क्षेत्र निवासी हिंदू युवती और मोहम्मद अकबर एक दिसंबर वर्ष 2020 को अचानक बगैर किसी सूचना के अपने घर से लापता हो गए थे। युवती के लापता होने के बाद उसके परिजनों ने छावनी थाना में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि घटना के 3 माह बाद फरवरी 2021 में युवती और अकबर भिलाई लौट गए। उन्होंने छावनी थाने में बताया कि दोनों ने शादी कर ली है।

अकबर पर अप्राकृतिक कृत्य करने और गोमांस खिलाने का आरोप

अकबर ने बताया कि दोनों दिसंबर 2020 में दिल्ली होते हुए कोलकाता अपनी बहन के घर पहुंचे थे और वहां मुस्लिम रीति रिवाज से दोनों ने शादी कर ली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पति-पत्नी ने शादी का दस्तावेज प्रस्तुत किया। थाने में दोनों के बयान के बाद युवती अपने पति अकबर के साथ जेपी नगर स्थित अपने ससुराल चली गई। उन्होंने बताया कि मंगलवार को युवती एक बार फिर छावनी थाने पहुंची और अपने पति अकबर पर कलकत्ता में जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने तथा गोमांस खिलाने और अप्राकृतिक कृत्य करने का आरोप लगाया।

'युवती ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना का भी आरोप लगाया'

युवती ने साथ ही ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना का भी आरोप लगाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवती की शिकायत पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने युवती के पति अकबर, ससुर मरगुज और देवर मकबूल को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि फरार सास और देवरानी की तलाश की जा रही है।


[ Read More ]»

गूगल ने बीते महीने भारत में 95,680 सामग्रियों को हटाया

 
hataaya

तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल ने मंगलवार को जारी अपनी मासिक पारदर्शिता रिपोर्ट में कहा कि उसे जुलाई में उपयोगकर्ताओं से 36,934 शिकायतें मिलीं और इन शिकायतों के आधार पर 95,680 सामग्रियों (कॉन्टेंट) को हटा दिया गया। गूगल ने उपयोगकर्ताओं की शिकायत के अलावा स्वचालित पहचान के आधार पर जुलाई में 5,76,892 सामग्रियों को हटाया। अमेरिकी कंपनी ने ये जानकारी भारत के आईटी नियमों के अनुपालन के तहत दी, जो 26 मई को लागू हुए थे। प्रौद्योगिकी कंपनी ने कहा कि उसे जुलाई में भारत में स्थित व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं से 36,934 शिकायतें मिलीं, और इन शिकायतों के आधार पर सामग्रियों को हटाने की कार्रवाई की संख्या 95,680 थी, जो अब तक सबसे अधिक है। गूगल को इससे पहले जून में 36,265 शिकायतें मिली थीं और इनके आधार पर 83,613 सामग्रियों को हटाया गया। अप्रैल में 59,350 सामग्रियों और मई में 71,132 सामग्रियों को हटाया गया था। कंपनी ने कहा कि इनमें से कुछ शिकायतें बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित थीं, जबकि दूसरी शिकायतों में मानहानि जैसे आधार पर सामग्रियों को हटाने के लिए कहा गया था। गूगल ने कहा, ''जब हमें अपने प्लेटफॉर्म पर सामग्री के बारे में शिकायतें मिलती हैं, तो हम उनका सावधानीपूर्वक आकलन करते हैं।'' इस दौरान कॉपीराइट (94,862), ट्रेडमार्क (807), अदालती आदेश (4) सहित अन्य कानूनी श्रेणियों के तहत सामग्रियों को हटाया गया।



[ Read More ]»

आखिर क्यों सामान की कीमत 1 रूपये कम क्यों रखी जाती है

saamaan-kee

कई बार आपने इस बात पर ध्यान दिया होगा कि जब हम किसी मॉल या रिटेल स्टोर से कोई वस्तु या सामान खरीदते है तो उनके प्राइज टैग कुछ इस तरह से होते है जैसे 99 रूपये, 199 रूपये या 999 रूपये तो आखिर ऐसा क्यों किया जाता है दुकानदार आखिर सामान की कीमत को 1 रूपये कम करके क्यों बेचते हैं जबकि इन सबको फिक्स प्राइज भी तो कर सकते हैं जैसे 100 रूपये, 200 रूपये इससे 1 रूपये बापस करने का कोई झंझट भी नहीं रहता.

आपको बता दे कि 1 रूपये कम सेट करने से सेलर को दो बड़े फायदे रहते हैं पहला ये कि किसी सामान की प्राइज 1 रूपये कम करने ग्राहक पर मनोविज्ञानिक असर पड़ता है और ग्राहक उस सामान को खरीदने के लिए आकर्षित होता है जैसे मान लीजिये किसी मॉल में शर्ट का प्राइज टैग 1299 रूपये है अगर आप यहां ध्यान दे तो हम किसी नंबर को लेफ्ट से राईट की तरफ रीड करते हैं ताकि उस नंबर की रेंज पता चल सके.

कुछ लोग यहां शर्ट की कीमत को 1300 रूपये समझकर खरीदेंगे तो कुछ लोग इसे 1200 रूपये की कीमत समझकर खरीदना चाहेंगे और सेलर या दुकानदार को ऐसे ही लोगो का इन्तजार रहता है. यहां पर पहला कारण यह निकलता है कि यह ग्राहक को मनोविज्ञानिक तरीके से आकर्षित करने के लिए ऐसा किया जाता है.

दूसरे कारण की बात करे तो 1 रूपये कम प्राइज सेट करने से सेलर का ही फायदा होता है क्योंकि जब हम किसी 1 रूपये कम वाली यानी 999 का कोई सामान खरीदते है तो ज्यादातर केस में हम 1 रूपये बापस ही नहीं लेते हैं हम यह सोचकर छोड़ देते हैं कि इतने रूपये का सामान ले लिया है अब 1 रूपये बापस लेकर उसका क्या कर लेंगे वहीं कुछ सेलर 1 रूपये के नाम पर पुअर क्वालिटी की चोकलेट पकड़ा देते हैं. जिसे हम कभी कभी लेते भी नहीं हैं.

आपको बता दे कि हमारे 1 रूपये न लेने से ब्लैक मनी भी बढ़ती है उदाहरण के तौर पर जैसे किसी कंपनी के इंडिया में 200 रिटेल आउटलेट हैं और हर आउटलेट पर दिन में 100 ग्राहक अपना 1 रूपये बापस नहीं लेते है तो इस तरह एक साल में उस कंपनी को 73 लाख रूपये की ब्लैक मनी जमा हो जाती है इन रुपयों का किसी भी बुक या अकाउंट में रिकॉर्ड नहीं होता है.

इस तरह कि प्राइज टैगिंग ऑनलाइन शोपिंग साईट में भी होती है हालाकि यहां पर पहला कारण ही काम करता है क्योंकि ऑनलाइन शोपिंग साईट में भी किसी सामान की 1 रूपये कीमत कम होने से ग्राहक आकर्षित होते हैं लेकिन यहां पर दूसरा कारण काम नहीं करता है क्योंकि ऑनलाइन शोपिंग साईट में पूरा पेमेंट होता है यहां पर किसी भी तरह से 1 रूपये नहीं छोड़ते हैं.

तो अब आप जान गए होंगे कि किसी सामान की कीमत 1 रूपये कम या जैसे 99 रूपये, 199 रूपये या 999 रूपये क्यों रखी जाती है और आपको पता चल गया होगा कि 1 रूपये कम होने से ग्राहक का कोई फायदा नहीं होता है वहीं सेलर या दुकानदार को इससे दो बड़े फायदे होते हैं.

[ Read More ]»

समान नागरिक संहिता और भारत में इसकी जरूरत

 
uniform-civil-code

दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की जरूरत बताते हुए कहा कि इसे लाने का यही सही समय है। दरअसल, मीणा जनजाति से जुड़े इस मामले में पति हिन्दू मैरिज एक्ट के हिसाब से तलाक चाहता था, जबकि पत्नी का कहना था कि वह मीणा जनजाति होने के कारण उस पर हिन्दू मैरिज एक्ट लागू नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इन मुश्किलों से बचाने की जरूरत है। अनुच्छेद 44 (Article 44) में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो बात कही गई है, उसे वास्तविकता में बदलना होगा।

क्या है समान नागरिक संहिता : 

समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून। चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एक निष्पक्ष कानून है, जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है।

संविधान के आर्टिकल 36 से 51 के माध्यम से राज्य को कई मुद्दों पर सुझाव दिए गए हैं। इनमें से आर्टिकल 44 राज्य को सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का निर्देश देता है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से हर धर्म के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। वर्तमान में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के अधीन करते हैं। मुस्लिमों के लिए अलग पर्सनल लॉ है, जबकि हिन्दू लॉ के तहत हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं।

क्या है हिन्दू पर्सनल लॉ : 

भारत में हिन्दुओं के लिए हिन्दू कोड बिल लाया गया। देश में इसके विरोध के बाद इस बिल को चार हिस्सों में बांट दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे हिन्दू मैरिज एक्ट, हिन्दू सक्सेशन एक्ट, हिन्दू एडॉप्शन एंड मैंटेनेंस एक्ट और हिन्दू माइनोरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट में बांट दिया था।

इन कानूनों के जरिए महिलाओं को सीधे तौर पर सशक्त बनाया। इनके तहत महिलाओं को पैतृक और पति की संपत्ति में अधिकार मिलता है। इसके अलावा अलग-अलग जातियों के लोगों को एक-दूसरे से शादी करने का अधिकार है, लेकिन कोई व्यक्ति एक शादी के रहते दूसरी शादी नहीं कर सकता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ : 

देश के मुस्लिमों के लिए मुस्लिम पसर्नल लॉ है। पहले लॉ के अंतर्गत शादीशुदा मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महज तीन बार तलाक कहकर तलाक दे सकता था। इसके दुरुपयोग के चलते सरकार ने इसके खिलाफ कानून बनाकर जुलाई 2019 में इसे खत्म कर दिया है। तीन तलाक बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसे महिला-पुरुष समानता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया था।

शाहबानो केस से उठा मामला : 
1985 में शाहबानो केस के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड का मामला सुर्खियों में आया था। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के बाद शाहबानो के पूर्व पति को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि पर्सनल लॉ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संसद में बिल पास कराया था।

क्यों है कानून की आवश्यकता : 
इस कानून के समर्थकों का मानना है कि अलग-अलग धर्मों के अलग कानून से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है। समान नागरिक संहिता लागू होने से इस परेशानी से निजात मिलेगी और अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के फैसले जल्द होंगे। शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे में सबके लिए एक जैसा कानून होगा फिर चाहे वो किसी भी धर्म का क्यों न हो। वर्तमान में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ यानी निजी कानूनों के तहत करते हैं। देश में हर भारतीय पर एक समान कानून लागू होने से देश की राजनीति पर भी असर पड़ेगा और राजनीतिक दल वोट बैंक वाली राजनीति नहीं कर सकेंगे और वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होगा।

महिलाओं की स्थिति में होगा सुधार: 
समान नागरिक संहिता लागू होने से भारत की महिलाओं की स्थिति में भी सुधार आएगा। कुछ धर्मों के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार सीमित हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं का अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में भी एक समान नियम लागू होंगे।

भाजपा नेता और सामान नागरिक संहिता की पैरवी कर रहे अश्विनी उपाध्याय ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इसे लागू करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि 23 नवंबर 1948 को विस्तृत चर्चा के बाद संविधान में अनुच्छेद 44 जोड़ा गया और सरकार को निर्देश दिया गया था कि सभी भारतीयों के एक समान नागरिक संहिता लागू करें।

संविधान निर्माताओं की मंशा थी कि अलग-अलग धर्म के लिए अलग-अलग कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए धर्म जाति भाषा क्षेत्र और लिंग निरपेक्ष एक ‘भारतीय नागरिक संहिता’ लागू होना चाहिए। अपने मांग के पक्ष में तर्क देते हुए उपाध्याय ने लिखा- अंग्रेजों द्वारा 1860 में बनाई गई भारतीय दंड संहिता, 1961 में बनाया गया पुलिस एक्ट, 1872 में बनाया गया एविडेंस एक्ट और 1908 में बनाया गया सिविल प्रोसीजर कोड सहित सैकड़ों अंग्रेजी कानून सभी भारतीय नागरिकों पर समान रूप से लागू हैं तो भारतीय दंड संहिता को भी लागू होना चाहिए।

विरोध क्यों : 
भारत में जब भी समान नागरिक संहिता की बात उठती है तो उसका इस आधार पर विरोध किया जाता है इसके आधार पर वर्ग विशेष को निशाना बनाने की कोशिश है।

इन देशों में लागू है यूनिफॉर्म सिविल कोड : 
अमेरिका, आयरलैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान, ‍इजिप्ट आदि देशों में समान नागरिक कानून लागू हैं।


[ Read More ]»

तुलसी जन्म भूमि राजापुर सूकरखेत गोंडा में सरयू जयंती संपन्न

 
saryu-Jayanti

गोण्डा। तुलसी जन्मभूमि मंदिर पर अर्चन वंदन के उपरांत सरयू तट तुलसी घाट पर अनेक स्थानों से पधारे श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सरयू महारानी की आरती सनातन धर्म परिषद एवं श्री तुलसी जन्म भूमि न्यास के पीठाधीश्वर भगवदाचार्य द्वारा आयोजित की गई। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपर्युक्त जानकारी सनातन धर्म परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आचार्य आर एल पाण्डेय ने दी।



[ Read More ]»

गोण्डा-गिलोय को राष्ट्रीय औषधि घोषित किए जाने पर आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने जताई खुशी

 
giloy-declared-national-drug

गोण्डा। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ अशोक कुमार ने कहा कोरोना काल में करोड़ों लोगों को इम्यूनिटी देकर महामारी से लडने की ताकत देने वाली गिलोय अब राष्ट्रीय औषधि घोषित किया गया है। आयुर्वेद में गिलोय को गुडुची व अमृता भी कहा गया है। डॉ कुमार कहते हैं कि यह हर्ष का विषय है कि गिलोय को राष्ट्रीय औषधि घोषित किया गया है। इसके लिए भारत सरकार व आयुष मंत्रालय बधाई के पात्र हैं। केंद्र सरकार ने गिलोय को गुणों से भरपूर माना है। गिलोय अनेक अलग-अलग बीमारियों में लाभदायक है। सभी राज्यों में इसका प्रचार प्रसार करने की केंद्र ने रणनीति तैयार की है। इसके गुणों को लेकर विभिन्न राज्यों में 30 से अधिक शोध करने की तैयारी की है।

गिलोय के नियमित प्रयोग से बढ़ेगी इम्यूनिटी-योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी

-योगाचार्य ने डाला गिलोय के विभिन्न गुणों पर प्रकाश गिलोय से होने वाले विभिन्न लाभ भी बताए
कोरोना -19 के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है। शरीर की इम्यूनिटी  बढ़ाना।  इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताए गिलोय से होने वाले चमत्कारिक लाभ गिनाएं हैं। गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा  हैइसलिए इसे संस्कृत में ’अमृता’ नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओ और दानवों के बीच समुद्र समंथन के दौरान जब अमृत निकला औ अमृत की बूंदें  छलकीं, वहां- गिलोय की उत्पत्ति हुई। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने कहा गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।
                
योगाचार्य ने कहा अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाता है। 
             
गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है, यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है।  जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।
               
यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडियों से बचा रहता है।
          
योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने कहा प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है। गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं। मौसम के परिवर्तन पर  अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए।
          
गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचता है। गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करे

गिलोय जूस 
गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं।

काढ़ा 
चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर बनाकर ले 

  • गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।
  • बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।
  • अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती है। योगाचार्य श्री द्विवेदी ने कहा कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय का प्रयोग न करें। 


[ Read More ]»

योग मात्र व्यायाम नहीं जीवन शैली है-काली प्रसाद

 
yoga-is-not-just-exercise

गोण्डा। स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मालवीय नगर के सरस्वती सभागार में विद्या भारती विद्यालय के कार्यकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगाभ्यास किया। उपस्थित जनों को योगाचार्य माधवाधर दुबे एवं शशि दुबे ने योगाभ्यास कराया। कार्यक्रम का उद्घाटन  माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर संकुल प्रमुख प्रधानाचार्य काली प्रसाद मिश्र एवं वरिष्ठ आचार्य प्रेमचंद्र मिश्र ने किया। इस अवसर पर उपस्थित जनों का मार्गदर्शन करते हुए प्रधानाचार्य काली प्रसाद मिश्र ने कहा कि योग से शारीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है, योग मात्र व्यायाम नहीं एक जीवन शैली है। योगाभ्यास के  दौरान विभिन्न आसन, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार के विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास आचार्यो द्वारा किया गया।कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सभी आचार्य ,कर्मचारी उपस्थित रहे।      

[ Read More ]»

युवक पर वास्तव में हुआ जानलेवा हमला या कोई साजिश

 
yuvak-par-vastav-mein-hua-janaleva-hamala-ya-koe-sajish

( रिपोर्ट-पवन कुमार द्विवेदी )                                        
इटियाथोक-गोण्डा। खबर है इटियाथोक थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरसहा की जिसमें कई तरह की खबरें जन चर्चा का विषय बनी हुई है घायल युवक के परिजनों का कहना है बिना कारण युवक को चाकू मारा गया है चाकू मारने वाले युवक नशा  किए हुए थे जबकि वह जिन पर आरोप लगा रहे है उनके परिजनों का कहना है कि यह एक साजिश है वही जन चर्चा है इस मामले में करीब 8 लड़के थे तो घायल युवक व उसके परिजन केवल 2 लोगों का ही नाम क्यों ले रहे हैं और उन्होंने बयान दिया है कि जिन का नाम ले रहे हैं उनसे उनका कोई विवाद नहीं है जबकि रास्ते को लेकर लगातार विवाद चल रहा है जिसमें कई बार सुलहनामा भी हो चुका है सुलहनामा होने के बाद भी रास्ते का विवाद अब तक सुलझा नहीं है वही यह घटना का तार कहीं ना कहीं रास्ते के विवाद को लेकर जुड़ रह है वही जन चर्चा यह भी है कि हाल ही में हुए ग्राम पंचायत के चुनाव में एक पक्ष ने नवनिर्वाचित प्रधान की तरफ से और वही दूसरा पक्ष पूर्व प्रधान के पक्ष में थे इस घटना का तार उससे भी जुड़ा हो सकता है ऐसी जन चर्चा क्षेत्र में व्याप्त है और सबसे बड़ी बात यह है घटना के समय दोनों पक्षों के परिजन उपस्थित नहीं थे वहां पर करीब 8 लड़के उपस्थित थे जिनमें से घायल युवक व उसके परिजन केवल विपक्षी गणो के 2 लड़कों पर आरोप लगा रहे हैं बाकी 6 लड़कों का नाम नहीं ले रहे हैं इससे भी कहीं ना कहीं मामला साजिश को बयां कर रहा है वही इटियाथोक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पड़ताल में जुटी है सच्चाई क्या है यह तो जांच पड़ताल के बाद ही पता चलेगा लेकिन मामला जो दिख रहा है वास्तव में इतना सीधा नहीं है इसमें कहीं न कहीं साजिश की बू आ रही है।



[ Read More ]»

गोण्डा- अज्ञात वाहन की टक्कर से साइकिल सवार वृद्ध गंभीर रूप से घायल

Image SEO Friendly


कर्नलगंज-गोण्डा।  अज्ञात वाहन की टक्कर से साइकिल सवार वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्राथमिक उपचार के बाद उसे गोंडा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रविवार को सुबह भंभुआ पुलिस चौकी  क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम मसौलिया के पास गोण्डा लखनऊ मार्ग पर अज्ञात वाहन ने साइकिल सवार एक वृद्ध व्यक्ति को ठोकर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र करनैलगंज लाया गया जहां उसकी हालत गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिलाअस्पताल रेफर कर दिया गया। बताया जाता है कि ग्राम दूदा के लाला पुरवा निवासी रामदीन 65 पुत्र द्वारिका दवा लेने करनैलगंज बाजार जा रहा था। मसौलिया मोड़ के पास तेज रफ्तार वाहन ने उसे टक्कर मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

[ Read More ]»

बुलंदशहर में 2 साधुओं की हत्याले मामले में CM योगी ने DM-SP से कहा- हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करो


बुलंदशहर: महाराष्ट्र के पालघर के बाद अब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में दो साधुओं की ह्त्या से हड़कंप मच गया है। इस घटना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लिया है और उन्होंने हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले के DM,SSP व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुँचकर घटना के सम्बन्ध में विस्तृत आख्या देने व दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने निर्देश दिया हैं।

मुख्यमंत्री श्री जी ने ग्राम पगौना, जनपद बुलंदशहर में हुई हत्या की घटना का संज्ञान लेते हुए DM,SSP व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुँचकर घटना के सम्बन्ध में विस्तृत आख्या देने व दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने निर्देश दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार बुलंदशहर के अनूपशहर कोतवाली के गांव पगोना में स्थित शिव मंदिर पर पिछले करीब 10 वर्षों से साधु जगनदास (55 वर्ष) और सेवादास (35 वर्ष) रहते थे। दोनों साधु मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना में लीन रहते थे। कल देर रात मंदिर परिसर में ही दोनों साधुओं की धारदार हथियारों से प्रहार कर हत्या कर दी गई।

आज सुबह जब ग्रामीण मंदिर में पहुंचे तो उन्हें साधुओं के खून से लथपथ शव पड़े मिले। इसे देखकर कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर के सामने मौजूद हैं। साधुओं की हत्या बहुत ही बेरहमी से की गई है। पुलिस मामले की जांच करने में जुट गई है। जांच के बाद ही हत्या का कारण पता चलेगा। आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पालघर में भी हाल में दो साधुओ और उनके ड्राइवर की बेरहमी से हत्या की गई थी।
[ Read More ]»
”go"