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शिशु का आकार,फलों और सब्जियों से तुलना सप्ताह दर सप्ताह

 
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गर्भधारण से लेकर बच्चे के पैदा होने तक शिशु आपके अंदर बहुत तेज़ी से विकसित होता है। शुरुआत में शिशु की गर्भकालीन आयु अल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा कुछ चिन्हों को निर्धारित करके की जाती है, जैसे शिशु की थैली और सिर से पाँव तक की लंबाई । ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भ में पल रहा हर शिशु एक निश्चित गति से गर्भावस्था की एक निश्चित अवधि तक ही बढ़ता है। इस लेख में कुछ ऐसे फल और सब्ज़ियों का उल्लेख किया गया है, जो आपको इस बात का अंदाज़ा देते हैं कि गर्भ में पल रहा शिशु हर हफ्ते कितना बड़ा हो रहा है।

गर्भ में पल रहा शिशु कितना बड़ा है?
गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के माप का अध्ययन रोमांचक है। गर्भाधान के समय, आपका शिशु शायद ही प्रत्यक्ष हो। गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के आकार को हर स्तर पर यह निर्धारित करने के लिए एक चिन्ह के रूप में उपयोग किया जाता है कि क्या गर्भावस्था सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है और गर्भ में पल रहे शिशु की वृद्धि ठीक से हो रही है। जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपका बच्चा मुश्किल से एक बीज के आकार का होता है। इस आकार से, आपके बच्चे के जन्म के समय तक उसका वज़न 3.5 किलो तक हो जाता है।

शिशु का आकार : 1 से 3 सप्ताह
इस दौरान, एक माँ के गर्भ में डिंब निषेचित होता है और यह निषेचन स्‍वयं को गर्भाशय से जोड़ लेता है। इस बीच गर्भ में शिशु का निर्माण होने लगता है और इसकी शुरुआत दो कोशिकाओं से होती है ।

शिशु का आकार : 4 सप्ताह
चिकित्सीय दृष्टि से शिशु को ब्लास्टोसिस्ट (बीजगुहा) कहा जाता है। अगर आपको गर्भ में पल रहे बच्चे को देखने का मौका मिलता है तो आप देखेंगी कि यह लिपटी हुई कोशिकाओं की एक गेंद के आकार में दिखाई देता है और यह गेंद रुपी कोशिकाएं, एक पोस्‍त दाना के बराबर होती है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न मुश्किल से एक ग्राम से कम होता है।

शिशु की लंबाई:
इस दौरान शिशु बहुत छोटा होता है और अल्ट्रासाउंड स्कैन में एक थैली के रूप में देखा जा सकता है, इसकी लंबाई लगभग 3 मि.मी. से कम होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी :
इस स्थिति में आपके गर्भवती होने का पहला संकेत, जैसे रक्तस्राव और हल्की ऐंठन की शुरूआत होने लगती है। हालांकि, अधिकतर महिलाएं इन लक्षणों को खारिज कर देती हैं क्योंकि यह मासिक धर्म चक्र के साथ सरलता से भ्रमित हो सकता है।

शिशु का आकार : 5 सप्ताह
शिशु मोटे तौर पर सेब के एक बीज के बराबर होता है। इस चरण के दौरान, उसके यकृत और गुर्दे जैसे अंग बनने लगते हैं।

शिशु का वज़न:
इस दौरान शिशु का वज़न बहुत कम, लगभग एक ग्राम से भी कम है।

शिशु की लंबाई:
5वें बच्चे की लंबाई लगभग 0.13 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस दौरान आपको गर्भवस्था के लक्षण अधिक स्पष्ट अनुभव होने लगेंगे, जैसे मॉर्निंग सिकनेस या मतली, बार-बार पेशाब आना और इत्यादि।

शिशु का आकार : 6 सप्ताह
6वें हफ्ते में गर्भ में पल रहे शिशु के आकार की तुलना मीठे मटर से की जा सकती है। इस चरण के दौरान, आँख, नाक, जीभ और ध्‍वनि नालियों का निर्माण होने लगता है।

शिशु का वज़न:
इस स्थिति में शिशु किसी भी नापने योग्‍य वज़न के लिए बहुत छोटा है।

शिशु की लंबाई:
इस दौरान शिशु की लंबाई सिर्फ 0.25 इंच ही होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपका बेबी बंप अभी तक दिखाई नहीं देता है लेकिन आप गर्भावस्था से संबंधित मामलों जैसे कि मूड में बदलाव, स्‍तनों में ऐंठन और दर्द का अनुभव कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 7 सप्ताहर
इस स्तर पर आकार एक जामुन के समान होता है और मस्तिष्क अपने पूर्ण आकार के लगभग एक तिहाई तक विकसित हो जाता है।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न अभी भी बहुत कम होता है।

शिशु की लंबाई:
इस स्तर पर गर्भ में पल रहे शिशु की लंबाई 13 से 18 मि.मी. के बीच हो जाती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
कुछ माताएं भाग्यशाली हो सकती हैं जिन्‍हें किसी भी लक्षणों का अनुभव नहीं होता है लेकिन ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं को मतली, भोजन की इच्छा और मुँहासे जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है।

शिशु का आकार : 8 सप्ताह
जब आप 8वें सप्ताह तक पहुँचती हैं, आपका बच्चा लंबाई में आधा इंच और गुर्दे के आकार का हो जाता है। इस स्थिति में शिशु की “पूंछ गायब होने लगती है” और उसकी उंगलियों की प्रकृति जालीदार होती है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्‍था में शिशु का वज़न लगभग 1.1 ग्राम (0.04 आउन्स ) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में शिशु की लंबाई लगभग आधा इंच हो जाती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
संभावित माताओं में आमतौर पर इस चरण के दौरान प्रारंभिक गर्भावस्था के लक्षण शुरू हो जाते हैं। हॉर्मोन का असन्तुलन, आपको किसी भी महक के प्रति अतिसंवेदनशील बनाता है और साथ ही आपको असामान्‍य सपने आ सकते हैं। इसके अलावा अन्य समस्याएं जो हो सकती हैं, जैसे मतली, सिर में हल्‍कापन, दर्द और पेट फूलना ।

शिशु का आकार : 9 सप्ताह
आपका बच्चा एक अंगूर के आकार का होगा। बालों के रोम के साथ उसके दूध के दाँत इस समय बनेंगे।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न 1.9 ग्राम (0.07 आउन्स) का हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
इस समय भ्रूण आमतौर पर 0.9 इंच लंबा होता है।

आप कैसा महसूस करेंगी :
सामान्य गर्भावस्था के लक्षण जैसे सिर दर्द और मॉर्निंग सिकनेस या मतली का अनुभव होता है।

शिशु का आकार : 10 सप्ताह
इस स्तर पर आपका शिशु अब एक नन्हे कीनू के आकार का हो जाता है। उसका हृदय पूरी तरह से कार्य करने लगता है और उसकी भुजाएं व पैर विकसित होने लगते हैं।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न लगभग 3.9 ग्राम (0.14 आउन्स) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में शिशु की लंबाई 1.25 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी :
नियमित लक्षणों के अलावा, आपको पेट में दर्द का भी अनुभव हो सकता है क्योंकि आपका गर्भाशय भ्रूण को अपने अंदर समायोजित करने के लिए बढ़ता है।

शिशु का आकार : 11 सप्ताह
गर्भ में पल रहा शिशु अब एक अंजीर जितना बड़ा होता है और उसकी धमनियाँ व नसें विकसित होने लगती हैं ।

शिशु का वज़न:
इस दौरान शिशुका वज़न 7 ग्राम (0.25 आऊंस) होता है।

शिशु की लंबाई:
1.61 इंच हो जाती है और आपका शिशु तेज़ी से लंबा होता है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
नियमित लक्षणों के साथ, आपको गैस संबंधी समस्या भी हो सकती है इसलिए आपको बीन्स और तले हुए भोजन से बचना चाहिए और फाइबर युक्त पौष्टिक आहार का सेवन करना अनिवार्य है।

शिशु का आकार : 12 सप्ताह
आपका शिशु नींबू के आकार का हो जाता है और उसके कोमल शरीर में धीरे-धीरे हड्डियों का विकास होने लगता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में आपके शिशु का वज़न 14 ग्राम (0.49 आउन्स) हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में आपका शिशु 2.13 इंच लंबा हो जाता है।

आप कैसा महसूस करेंगी :
आपको खुद में बढ़ी हुई ऊर्जा महसूस हो सकती है और मॉर्निंग सिकनेस कम हो जाती है। हालांकि , रक्तचाप में बदलाव के कारण आपको सिरदर्द होने की संभावना हो सकती है।

शिशु का आकार : 13 सप्ताह
इस समय तक आपका शिशु सिर से पैर तक मटर की फली के आकार का हो जाता है। आप स्कैन में उसके हाथ, पैर और सिर को स्पष्ट रूप से देख सकती हैं। आप यह भी देख सकती हैं कि इस अवस्था में शिशु लगातार घूम रहा है और बहुत सक्रिय है।

शिशु का वज़न:
आपके बच्चे का वज़न अब 23 ग्राम (0.81 आउन्स) का हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
2.91 इंच लंबाई में, आपका शिशु अल्ट्रासाउंड स्कैन में बहुत अच्छी तरह दिखाई देगा।

आप कैसा महसूस करेंगी :
यह आपकी गर्भावस्था की अवधि का सबसे अच्छा चरण है क्योंकि इस दौरान मतली होना कम हो जाता है, आपकी कामलिप्सा में वृद्धि के साथ-साथ आपकी ऊर्जा का स्तर भी बढ़ जाता है।

शिशु का आकार : 14 सप्ताह
14वें सप्ताह में आपका शिशु एक नींबू के आकार का हो जाता है और अपने चेहरे की मांसपेशियों का व्यायाम करने की प्रक्रिया में है जिससे उसके भाव निरंतर बदलते रहते हैं।

शिशु का वजन:
इस अवस्था में आपका शिशु 42 ग्राम (डेढ़ आउन्स) से ज़्यादा वज़न का हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
आपके शिशु की लंबाई 3.9 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस अवस्था में आपके बाल आश्चर्यजनक रूप से रेशमी घने हो जाते हैं और साथ ही आपको सुस्ती भी महसूस नहीं होती है।

शिशु का आकार : 15 सप्ताह
गर्भ में पल रहे शिशु की तुलना अब एक सेब या छोटे नाशपाती के आकार से की जा सकती है। आपके शिशु की सुनने की क्षमता विकसित होती है और अब वह शायद दिल की धड़कन भी महसूस कर सकता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न 68 ग्राम (2.4 आउन्स) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस चरण में आपके शिशु की लंबाई 4 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
यदि आप दूसरी बार माँ बन रहीं हैं, तो आप इस समय अपने बच्चे का स्थान बदलना या हिलना महसूस कर सकती हैं। नई माओं को इसे पहचानने में या बच्चे की चाल महसूस करने में अधिक समय लग सकता है।

शिशु का आकार : 16 सप्ताह
शिशु अब एक एवोकैडो के आकार का हो जाता है और उसमें एक कार्यात्मक परिसंचरण प्रणाली पूर्णत: विकसित हो जाती है।

शिशु का वज़न:
इस दौरान आपके शिशु का वज़न 100 ग्राम (3.53 आउन्स) तक बढ़ जाता है और उसका वज़न अत्यधिक तेज़ी से बढ़ता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में आपका शिशु 4.5 इंच से अधिक लंबा होता है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आप इस सप्ताह कई प्रकार के लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं। एक तरफ, आप पीठ दर्द और कब्ज़ का अनुभव कर सकती हैं और दूसरी तरफ आपकी त्वचा चमकदार और उज्ज्वल होती है।

शिशु का आकार : 17 सप्ताह
आपका शिशु अब नाशपाती के आकार का हो गया है और इस अवस्था तक उसके अपने फिंगरप्रिंट विकसित हो चुके हैं।

शिशु का वज़न:
इस दौरान शिशु का वज़न 140 ग्राम (4.94 आउन्स) होता है और वह धीरे-धीरे आपके गर्भाशय क्षेत्र में फैलता है।

शिशु की लंबाई:
इस स्तर पर शिशु की लंबाई लगभग 5.12 इंच तक होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
जैसे-जैसे बच्चा तेज़ गति से बढ़ता है, आपको अजीब सपने आना, वज़न बढ़ना और शरीर में अधिक तरल पदार्थ की मौजूदगी का अनुभव हो सकता है।

शिशु का आकार : 18 सप्ताह
इस हफ्ते आपके शिशु का आकार शकरकंद के बराबर होता है और उसका का लिंग भी स्पष्ट हो जाता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न 190 ग्राम (6.70 आउन्स) हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
आपके शिशु की लंबाई लगभग 5.5 इंच से अधिक हो जाती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
यदि आप पहली बार माँ बन रहीं हैं तो आप महसूस करेंगी कि शिशु गर्भाशय में घूम रहा है।

शिशु का आकार : 19 सप्ताह
आपका शिशु लगभग एक आम जितना बड़ा होता है और उसके संवेदी अंगों का विकास तीव्र गति से जारी रहता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में आपके शिशु का वज़न लगभग 238 ग्राम (8.4 आउन्स) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में शिशु की लंबाई 6 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस चरण में स्नायु दर्द सामान्य होता है। जैसे-जैसे आपका गर्भाशय बढ़ता है और आपके शरीर पर दबाव होता है, उस समय पर आपको चक्कर आ सकता है और सिर में हल्कापन महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं को इस अवस्था में पैरों में ऐंठन और कूल्हे में दर्द भी होता है।

शिशु का आकार : 20 सप्ताह
20वें सप्ताह में शिशु लगभग केले जितना बड़ा हो जाता है। दूसरी बार माँ बनने जा रही माओं को आमतौर पर इस स्तर में शिशु की सक्रियता भी महसूस हो सकती है क्योंकि बच्चा हर दिन अधिक सक्रिय होने लगता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में आपके शिशु का वज़न 283 ग्राम (10 आउन्स) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस समय शिशु की लंबाई 10.5 इंच से अधिक होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस चरण में सूजन और सांस की तकलीफ़ आम होती है। आप कई बार ऊर्जा में अत्यधिक कमी का भी अनुभव कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 21 सप्ताह
आपका शिशु एक बड़ी गाजर के आकार का होता है। इस दौरान शिशु का वृद्धि दर प्लेसेंटा को गति देना शुरू कर देता है।

शिशु का वज़न:
आपके शिशु का वज़न लगभग 340 ग्राम (12 आउन्स) होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई 10.58 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस अवस्था में आपका बेबी बंप नज़र आने लगेगा, आपके पैरों मे ऐंठन अधिक गंभीर हो सकती है। आप योनि स्राव का भी अनुभव कर सकती हैं जो कि एक सामान्य बात है।

शिशु का आकार : 22 सप्ताह
एक बार जब आप इस स्तर पर पहुँच जाती हैं, तब शिशुओं के बढ़ने की गति अलग-अलग हो सकती है । आपका शिशु जब इस अवस्था में पहुँचता है, तो,डॉक्टर शिशु की वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मौलिक लंबाई मापते हैं। 22वें सप्ताह में आपका शिशु स्क्वैश के आकार का होता है।

शिशु का वज़न:
425 ग्राम (15 आउन्स) से अधिक, शिशु अब लगभग आधा किलोग्राम का हो जाता है।

शिशु की लंबाई:
आपके शिशु की लंबाई लगभग 11 इंच की होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपकी त्वचा पर खुजली के निशान दिखाई दे सकते हैं और इस अवस्था में अंसतोष एक आम बात है। आपका शरीर ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन का अनुभव के कारण आसन्न प्रसव (जो कि पूर्व-प्रसव गर्भाशय संकुचन का एक प्रकार है) के लिए भी तैयार हो सकता है।

शिशु का आकार : 23 सप्ताह
23वें हफ्ते में आपका शिशु एक मौसमी के जितना बड़ा होता है और इसके अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण शुरू हो जाता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में आपके शिशु का वज़न 498 ग्राम (1.1 पाउन्ड) का होता है।

शिशु की लंबाई:
गर्भ में पल रहा शिशु की लंबाई लगभग 11.4 इंच होती है ।

आप कैसा महसूस करेंगी:
गर्भावस्था के इस चरण में गर्भवती महिलाओं द्वारा अनुभव किए जाने वाला पीठ का दर्द, मसूड़ों और टखनों में सूजन सभी आम समस्याएं हैं।

शिशु का आकार : 24 सप्ताह
24वें सप्ताह में शिशु का आकार मक्के की बाली जितना होता है।उसके फेफड़े भी इस वक्त तक पर्याप्त विकसित हो जाते हैं, जिसके कारण समय से पहले प्रसव से बचा जा सकता है।

शिशु का वज़न:
आपका शिशु लगभग 589 ग्राम (1.3 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
गर्भ में पल रहा शिशु अब एक फुट जितना लंबा होता है और अब वह उससे अत्यधिक बड़ा हो गया है जब उसका पहली बार विकास हुआ था।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस अवस्था में लिनिया नाइग्रा या पेट के केंद्र से निकलती हुई रेखा गहरी हो जाएगी और स्पष्ट दिखाई देगी। आप अपने पेट के निचले भाग में स्ट्रेच मार्क्स भी देख सकती हैं क्योंकि आपका शिशु आपके गर्भाशय को बाहर की ओर धकेलता है और आपकी त्वचा इसे समायोजित करने के लिए फैलती है।

शिशु का आकार : 25 सप्ताह
इस स्तर पर शिशु एक बलूत स्क्वैश के बराबर होता है और वह लात मारकर अप्रिय ध्वनियों का जवाब देने के लिए अत्यधिक सक्रिय है।

शिशु का वज़न:
आपके शिशु का वज़न लगभग 680 ग्राम (डेढ पाउंड) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में आपके शिशु की लंबाई में 13.6 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपको सोने में परेशानी और बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो सकती है।

शिशु का आकार : 26 सप्ताह
इस सप्ताह आपका शिशु आकार में गोभी के सिर जैसा दिखता है और इसमें रीढ़ की हड्डी विकसित हो चुकी है।

शिशु का वज़न:
771 ग्राम (1.7 पाउंड) होता है, शिशु इस समय तक तब की तुलना में अधिक भारी हो जाता है, , जब उसे पहली बार स्कैन पर देखा गया था।

शिशु की लंबाई:
शिशु लंबाई में 14 इंच से अधिक होता है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपका रक्तचाप बढ़ सकता है और आपको इसे लगातार मापते रहने की आवश्यकता है। आपको पहले की तुलना में चीजों को याद रखने में कठिनाई हो सकती है। आपका पेट बहुत बड़ा होता है, इस समय आपको आरामदायक फिटिंग व गर्भावस्था के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों का प्रयोग करना चाहिए।

शिशु का आकार : 27 सप्ताह
आपका शिशु फूलगोभी जितना बड़ा हो जाता है, इस स्तर पर उसके कान विकसित हो गए हैं और वह आपकी आवाज़ को पहचान सकता है।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न 861 ग्राम (1.9 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई 14.4 इंच से थोड़ी ज़्यादा होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
दूसरी तिमाही में असुविधाएं लगातार रहती हैं लेकिन जैसे-जैसे आप तीसरी तिमाही की ओर बढ़ती हैं, आप अपने बढे हुए पेट के साथ-साथ, भ्रूण की तीव्र हलचलों को भी महसूस कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 28 सप्ताह
शिशु अब तक एक बड़े बैंगन के आकार का हो जाता है और आप अक्सर उसकी हिचकी सुन सकती हैं, यह एक सामान्य बात है।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न लगभग 997 ग्राम (2.2 पाउण्ड) का होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई लगभग 15 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
शिशु की वृद्धि के साथ-साथ आपका पेट भी बढ़ेगा जिस कारण आपको अनेकों कठिनाइयाँ हो सकती हैं। आपके गर्भाशय का बढ़ता आकार इसे खाली करने के लिए लगातार आपके मूत्राशय पर दबाव डालेगा। आपके बच्चे की हलचल अधिक तेज़ होगी और संभवत: यह रात में यह बनी रहेगी।

शिशु का आकार : 29 सप्ताह
आपका शिशु एक अमरीकी बटरनट स्क्वैश जितना बड़ा हो जाता है और इसका एक बड़ा हिस्सा मस्तिष्क का निर्माण करता है जो तीव्र गति से विकसित होता है।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में आपका बच्चा आसानी से 1.1 किलोग्राम (2.5 पाउण्ड) तक होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई 15.2 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपको इस अवस्था में कब्ज़, बवासीर और त्वचा पर खुजली का अनुभव हो सकता है, रात में अच्छी नींद आना मुश्किल हो सकता है और अपने बढ़ते पेट के साथ पीठ पर तनाव से बचने के लिए करवट लेकर सोने की सलाह दी जाती है।

शिशु का आकार : 30 सप्ताह
इस अवस्था में आपका शिशु एक बड़ी गोभी जितना बड़ा होता है और आकार के मामले में शिशु की वृद्धि कम होने की संभावना होती है।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न 1.3 किलोग्राम (2.91 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में शिशु की लंबाई 15.7 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
शिशु का आकार आपके पंजर तक पहुँच गया है और गर्भावस्था के इस चरण में आपको सांस लेने में तकलीफ और थकावट महसूस कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 31 सप्ताह
शिशु की तुलना एक बड़े नारियल से की जा सकती है और उसमें स्वाद लेने की क्षमता हो जाती है जो ऐमिनियॉटिक तरल पदार्थ का स्वाद लेने के लिए पर्याप्त रूप से विकसित होती है।

शिशु का वज़न:
इस समय शिशु का वज़न 1.4 किलोग्राम (3 पाउण्ड) से अधिक होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई लगभग 16.2 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
गर्भावस्था की इस अवस्था में पीठ दर्द, सीने में जलन, आपके हाथ पैर में सूजन और हल्का संकुचन सामान्य लक्षण हैं।

शिशु का आकार : 32 सप्ताह
गर्भ में पल रहा शिशु अब तक एक चीन की गोभी के बराबर का हो जाता है और उसके हाथ और पैर की उंगलियाँ और नाखून विकसित हो चुके हैं।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न 1.7 किलोग्राम (3.8पाउण्ड) का होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई 16.7 इंच से अधिक होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
इस दौरान योनि स्राव, निप्पल में कालापन और स्तनों से दूध निकलने की संभावना होती है।

शिशु का आकार : 33 सप्ताह
इस अवधी में शिशु एक अनानास के आकार का होता है और उसमें प्रतिरक्षा तंत्र भी विकसित होने लगता है।

शिशु का वज़न:
इस स्तर पर शिशु का वज़न लगभग 1.9 किलोग्राम (4.2 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
बच्चा अब 17.2 इंच लंबा होता है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
कमज़ोरी के कारण आपके सिर में दर्द हो सकता है, इस अवधि में अधिक, टहलें, ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं और साथ ही सववधान रहें ।

शिशु का आकार : 34 सप्ताह
शिशु इस दौरान एक खरबूज के आकार का होता है और उसमें संभवतः वसा की एक परत भी विकसित हो जाती है ताकि उसके शरीर से उर्जा का उत्सर्जन न हो पाए ।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न 2.1 किलोग्राम (4.7 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई 17.7इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आप कुछ हफ्तों पहले की तुलना में अब अपने पेट को नीचे की तरफ महसूस कर सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि शिशु अन्तत: प्रसव के लिए श्रोणि में उतरता है।

शिशु का आकार : 35 सप्ताह
35वें सप्ताह मीठे तरबूज जितना बड़ा हो जाता है और इस समय आप अपने पेट में पहले से बहुत ज़्यादा हलचल का अनुभव कर सकती हैं।

शिशु का वजन:
बच्चे का वज़न 2.4 किलोग्राम (5.3 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई लगभग 18इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपको लगातार बाथरूम जाने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चा अब तक श्रोणी क्षेत्र में जा चुका होता है और जिससे मूत्राशय पर दबाव पड़ता है।

शिशु का आकार : 36 सप्ताह
शिशु एक कैनरी तरबूज़ जितना बड़ा होता है और संभावना है कि बच्चे का सिर श्रोणि की तरफ स्थानांतरित हो गया है।

शिशु का वजन:
इस अवस्था में वज़न बढ़ने की गति कम हो जाती है और शिशु का वज़न 2.6 किलोग्राम (5.78 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस स्तर पर आपके शिशु की लंबाई 18.6 इंच होती।

आप कैसा महसूस करेंगी:
शिशु आपके श्रोणि परत पर दबाव डालता है। फेफड़ों को फैलने के लिए अधिक स्थान मिलने के कारण दूआपकी सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है।

शिशु का आकार : 37 सप्ताह
शिशु अब स्विस चार्ड जितना लंबा होता है और इस दौरान फेफड़े और मस्तिष्क भी परिपक्व हो जाते हैं।

शिशु का वज़न:
इस अवस्था में शिशु का वज़न औसतन 2.8 किलोग्राम (6.3 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
शिशु की लंबाई लगभग 19 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
37वें हफ्ते के दौरान, आप ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन का अनुभव करेंगी जो प्रसव के दर्द के रूप में भ्रमित कर सकता है। आप डिस्चार्ज और यहाँ तक कि योनि से अधिक रक्तस्राव का अनुभव भी कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 38 सप्ताह
38 वें सप्ताह में आपका शिशु रज्जब की डाली के आकार का होता है।

शिशु का वज़न:
शिशु का वज़न लगभग 3 किलोग्राम (6.8 पाउण्ड) हो सकता है।

शिशु की लंबाई:
इस चरण में बच्चे की लंबाई लगभग 19.5 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपका संकुचन और ज़्यादा हो सकता है, यह सुनिश्चित करने के लिए ध्यान दें कि आप ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन के साथ प्रसव के दर्द से भ्रमित नहीं हैं, क्योंकि आप प्रसव के इंतज़ार में तनाव का अनुभव कर सकती हैं।

शिशु का आकार : 39 सप्ताह
आपका शिशु अब एक छोटे से तरबूज़ के आकार से मिलता-जुलता होता है और उसकी त्वचा की एक नई परत विकसित होती है जो उसकी पुरानी त्वचा की तुलना में अधिक सख्त होती है।

शिशु का वज़न:
आपके बच्चे का वज़न लगभग 3.1 किलोग्राम (7 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
आपके शिशु की लंबाई आसानी से 20 इंच के करीब होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन में रक्त के साथ गाढ़ा श्लेष्मा जैसा स्त्राव हो सकता है।

शिशु का आकार : 40 सप्ताह
आप अपनी गर्भावस्था के अंतिम पड़ाव पर हैं। इस समय तक आपका शिशु तरबूज़ जितना बड़ा हो जाता है और आपकी गर्भावस्था जल्द ही आपके बच्चे की डिलीवरी में बदल जाएगी।

शिशु का वज़न:
एक अवधि पूर्ण होने के बाद शिशु का वज़न औसतन 3 .4 किलोग्राम (7.6 पाउण्ड) होता है।

शिशु की लंबाई:
इस अवस्था में सिर से लेकर एड़ी तक आपके बच्चे की लंबाई 20.2 इंच होती है।

आप कैसा महसूस करेंगी:
आपने सफलतापूर्वक एक अवधि पूरी की है,अब बस जन्म के लिए शारीरिक तैयार होने का इंतज़ार करें। जितना हो सके उतना आराम करें, क्यों‍कि आपके शरीर को प्रसव के लिए ऊर्जा और ताकत की आवश्यकता होती है।

एक निश्चित अवस्था के बाद, प्रत्येक शिशु अपने विकास की ओर अग्रसर होता है। इस चरण में वंशानुगत कारक, मातृ पोषण और स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यही कारण है कि जन्म के समय हर बच्चे का आकार, वज़न और सिर की परिधि अलग-अलग होती है। आवश्यक और पौष्टिक भोजन एक सफल गर्भावस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह आपके शरीर में होने वाले इन प्राकृतिक परिवर्तनों को सहजता से सहन करने में भी आपकी मदद करता है


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गर्भ में शिशु की हलचल को महसूस करना

 
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माता–पिता होने के नाते, सबसे रोमांचक क्षणों में से एक होता है जब आप पहली बार अपने बच्चे की हलचल महसूस करते हैं। मगर यह आपकी गर्भावस्था के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है जिसपर ध्यान दिया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा या कम हिलना, दोनों आपके शिशु के कष्ट में होने या अस्वस्थ होने के संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि आपका बच्चा कैसे, क्यों और कब हिलता है और क्या उनका हिलना अच्छा होता है या नहीं।

आप कब शिशु में हो रही गतिविधि महसूस करेंगी?
जब बच्चे के लात मारने या हिलने–डुलने का समय आता है, तो अधिकांश माता–पिता के लिए यह समय कठिन होता है और साथ ही, रोमांचकारी भी । यह डर कि बच्चा अभी तक हिला नहीं है या यह बहुत पहले होना शुरू हो गया है, बच्चा जब पहली बार हिलता है तो अज्ञात भय और चिंता का जो आपको सामना करना पड़ता है यह हम समझ सकते है। यह समझकर कि शिशु कब हिलता है या आपको कब चिंतित होना चाहिए, इस चिंता को दूर करने में यह लेख आपकी मदद कर सकता है। आपका शिशु आपकी गर्भावस्था के शुरू होने के 7 से 8 सप्ताह में ही हिलना शुरू कर देता है।यह ध्यान देने की बात है कि आप गर्भावस्था के 16 वें सप्ताह तक बच्चे द्वारा लात मारने या उसका हिलना–डुलना महसूस नहीं करेंगी और पहली बार उसके हिलने को आप गर्भावस्था के 22 वें सप्ताह में महसूस करना शुरू करेंगी।

7 से 15-सप्ताह की अवधि के दौरान, आपको चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए जाना चाहिए जिससे अपने बच्चे के हिलने पर नज़र रख सकते हैं। डॉक्टर आपके बच्चे के हिलनेकी जांच करने के लिए एक अल्ट्रासाउंड करेंगे, जो एक नियमित प्रक्रिया है। यदि आप 22 वें सप्ताह के बाद भी बच्चे द्वारा लात मारने को महसूस नहीं करती हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

आपका बच्चा क्यों हिलता है?
बच्चे की गतिविधि के संबंध में एक और महत्वपूर्ण पहलू है यह जानना कि बच्चा हिलता–डुलता क्यों है। गर्भ में आपके बच्चे द्वारा लात मारना, यह क्रिया अनावश्यक नहीं है । गर्भावस्था के दौरान आपके बच्चे का निरंतर हिलना शिशु के बढ़ने के साथ–साथ उसकी गतिविधि का संकेत होता है जो आपकी गर्भावस्था की अवधि के दौरान आपके बच्चे के विकास के बारे में इशारा करती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि समय के साथ बच्चा बढ़ता रहेगा और गर्भ को उस विकास के लिए तैयार होना पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि बच्चे का हिलना संकेत है कि वह गर्भाशय को खींच रहा है, खुद के ए जगह बनाने के लिए ।

प्रारंभ में भ्रूण के हिलने से कैसा महसूस होता है ?
हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि भ्रूण के शुरुआती दौर में हिलने–डुलने से एक विशेष प्रकार की अनुभूति होती है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इस अनुभूति का वर्णन करते हुए कहती हैं कि मानो लावा फूट रहा हो । कुछ महिलाओं ने इस एहसास को पेट में तैर रही मछली के जैसा बताया है, तो कुछ का कहना है कि यह ऐसा लगता है जैसे तितली अपने पंख फड़फड़ा रही हो । भ्रूण के हिलने के शुरुआती क्षणों के दौरान, महिलाएं उसके हिलने को भूख का दर्द या गैस का होना समझती हैं। हालांकि, उसकी आवृत्ति बच्चे के हिलने के बारें में संकेत देगी, यह एहसास बदलता जाएगा जैसे जैसे बच्चा बढ़ने लगेगा। दूसरी त्रैमासिक अवधि के अंत तक आपके साथी बच्चे के बाहरी रूप से हिलने–डुलने को महसूस नहीं कर सकेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चा अभी इतना बड़ा नहीं हुआ है जो इतनी ताकत से लात चला पाए कि उसे बाहर से महसूस किया जा सके।

आप कितनी आवृत्ति से बच्चे का हिलना–डुलना महसूस करेंगी?
बच्चे के हिलने की सटीक गिनती स्थापित करना मुश्किल हो सकता है। अधिकांश डॉक्टर इस हिलने–डुलने को अलग–अलग महिलाओं में भिन्न मानते हैं, लेकिन औसत आवृत्ति यह संकेत देती है की आपका बच्चा सुरक्षित है।शुरुआत में , आप केवल अपने बच्चे को दिन में एक या दो बार लात मारते महसूस करेंगी । इसका कारण है कि बच्चे के हिलने–डुलने में ताकत की कमी है जो कि बाहरी रूप से पता नहीं चलता है। जैसे–जैसे समय बीतता जाएगा आपके बच्चे के हिलने–डुलने में वृद्धि होगी जो आप स्पष्ट रूप से महसूस करेंगी। यह अनुशंसा की जाती है कि गर्भावस्था के प्रारंभिक 7 से 15 सप्ताह के बाद अगर आप बच्चे के लात मारने या हिलने–डुलने की आवृत्ति को हर दो घंटे में 10 बार से कम महसूस करती हैं, तो आप डॉक्टर से जाकर मिलें। यह अनुमान लगाया जाता है कि आपकी गर्भावस्था के दौरान हर दिन बच्चा लगभग 30 से 45 बार प्रति घंटा हिलता है।

क्या आपका शिशु गर्भावस्था के अंत में कम लात चला रहा है?
यदि आपका शिशु आपकी गर्भावस्था के अंत में कम लात चलाता है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि कुछ गलत है। हलांकि आपको बच्चे का उतना हिलना महसूस नहीं होगा जितना की आपको गर्भावस्था के पहले चरणों में होगा,लेकिन फिर भी आपका बच्चा विकसित हो रहा है, और इसका मतलब है कि वे अंगड़ाई लेगा और अपने लिए जगह बनाना जारी रखेगा । जैसे–जैसे आप अपनी गर्भावस्था के अंत तक पहुँचती हैं, आपका शिशु भी पैदा होने की प्रक्रिया की तैयारी के लिए अधिक हिलने लगता है। यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने डॉक्टरों से बात करें यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा पर्याप्त रूप से नहीं हिल रहा है या स्वस्थ तरीके से नहीं हिल रहा है।

बच्चे के हिलने–डुलने को क्या प्रभावित करता है?
बहुत सी बातें हैं जिनपर गौर किया जाना चाहिए जब हम विचार करते हैं कि बच्चे के हिलने–डुलने को क्या प्रभावित करता है, जिनमें से कुछ सबसे आम विचार हैं:

जगह – आपके शिशु का हिलना उनके शरीर के विकास के दौरान गर्भ में जगह बनाने की आवश्यकता के कारण हो सकता है।

ऊर्जा – बढ़ते हुए बच्चे की ऊर्जा में वृद्धि के कारण भी हिलना–डुलना होता है, यह एक संकेत हो सकता है कि आपका बच्चा खेल रहा है।

गैस – आपका बच्चा अपने शरीर से गैस निकालने की आवश्यकता के कारण भी हिल सकता है।

अन्य पहलू जो आपके बच्चे के हिलने–डुलने में भूमिका निभाते हैं जैसे कि आराम के लिए और गर्भनाल में फसें बिना हिलना। यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने डॉक्टर से उन पहलुओं के बारे में और जानने के लिए बात करें जो आपके बच्चे के हिलने में भूमिका निभाते हैं, यह हिलने को क्यों प्रभावित करते हैं और इसके क्या कारण हो सकते हैं।

भ्रूण के हिलने-डुलने में कमी
यह गर्भावस्था के सबसे डरावने समय में से एक हो सकता है अगर भ्रूण का हिलना–डुलना कम हो जाए । यह संकेत हो सकता है कि कुछ ठीक नहीं हैं। उदाहरण के लिए, यह आपके बच्चे के ऑक्सीजन के स्तर में समस्याओं को इंगित कर सकता है या संकेत दे सकता है कि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। यह इसका भी संकेत हो सकता है कि आपके बच्चे की हृदय गति सामान्य नहीं है।

भ्रूण की गतिविधि में कमी बेहद खतरनाक है, और यह अनुशंसा की जाती है कि अगर आपका बच्चा गर्भावस्था के 15 सप्ताह के बाद नियमित रूप से हर दो घंटे में 10 बार से कम हिलता है तो डॉक्टर से सलाह लें। बताई गई दर से लगातार कम हिलने वाले शिशुओं में उच्च मृत्यु दर की आशंका रहती है, इससे बचने के लिए, कृपया जल्द से जल्द मदद लेना सुनिश्चित करें।

अगर आपको लगे कि आपका बच्चा नहीं हिल रहा है, तो?
जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा पर्याप्त या बिलकुल नहीं हिल रहा, तो यह चिंता का कारण हो सकता है। कृपया जल्द से जल्द डॉक्टर से भेंट करें।

भ्रूण के हिलने–डुलने की समय रेखा
भ्रूण के हिलने–डुलने के लिए समय रेखा को समझना, आपको यह जानने में मदद कर सकता है कि आपका बच्चा सही तरह से हिल रहा है या नहीं। यहाँ एक सामान्य समय–सारणी दी गई है।

सप्ताह 7 : लगभग इस समय आपका बच्चा हिलना शुरू करता है, यह स्पष्ट रूप से मालूम नहीं पड़ेगा जब तक कि एक अल्ट्रासाउंड में नहीं देखा जाता है।

सप्ताह 15 : इस समय के आसपास, आपको बच्चे का हिलना–महसूस होना चाहिए। यह हिलना न ही लगातार और ना ही पूरी ताकत से होगी लेकिन आपको हल्की सी लात मारने का अनुभूति होगी।

सप्ताह 20 : लगभग इस समय आपके बच्चे में पर्याप्त ताकत आ गई है कि उसके लात मारने और हिलने–डुलने को आप अक्सर महसूस कर सकती हैं।

सप्ताह 24: लगभग इस समय आपका बच्चा उस हद तक विकसित हो जाता है जहाँ उसका हिलना स्पष्ट हो जाता है, इस दौरान आपको बच्चे के हिलने पर एक चिकोटी की तरह महसूस होगा।

सप्ताह 28: इस अवधि के दौरान आपका शिशु इतनी लात मारेगा और हिलेगा–डुलेगा, कि कुछ क्षणों के लिए आपकी सांस फूलने लगेगी।

सप्ताह 32: इस समय आपको बच्चे का हिलना–डुलना कम महसूस होगा, यह गर्भाशय में जगह की कमी के कारण होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा हिल नहीं रहा है; उसके लिए सिर्फ जगह कम और सीमित है।

गर्भावस्था के दौरान बच्चे के हिलने–डुलने पर नज़र रखना
गर्भावस्था के दौरान माता–पिता का भ्रूण की गतिविधि पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। जैसा कि पहले भी उल्लेख किया गया है कि यह महत्वपूर्ण है कि आपका बच्चा हर दो घंटे में 10 से 30 बार हिले। कभी–कभी आपका बच्चा हर दो घंटे में 10 बार से कम हिल सकता है, लेकिन अगर यह नियमित रूप से या हर हफ्ते में एक से अधिक बार होता है, तो यह अत्यधिक चिंता का संकेत हो सकता है। ऐसा होने पर, कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।

याद रखें, भ्रूण के हिलने की आवृत्ति का विशिष्ट मान नहीं है, लेकिन उसकी सुरक्षा को आश्वस्त करने के लिए यह बताई गई सीमा के अनुसार होना चाहिए।

आपको डॉक्टर को कब बुलाना चाहिए?
यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपनी गर्भावस्था के दौरान बच्चे के अनियमित, अनियंत्रित हिलना–डुलना महसूस करने पर डॉक्टर को बुलाएं, अगर बच्चे का कोई हिलना–डुलना महसूस नहीं होता है, तो कृपया निकटतम एमर्जेन्सी रूम जाएँ। यदि बच्चे की हिलने–डुलने की गति थोड़ी कम हो तो घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि तनाव से भी शिशु के हिलने पर असर पड़ सकता है ।

भ्रूण का हिलना–डुलना आपके बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में संकेत देता है। यह महत्वपूर्ण है कि आप शिशु के हिलने पर नज़र रखें और उन्हें रिकॉर्ड करें, डॉक्टर से अगली मुलाक़ात में इसके बारे में चर्चा करें और सुनिश्चित करें कि आप अपने डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह का पालन करें।

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सप्ताह दर सप्ताह भ्रूण की वृद्धि चार्ट,लंबाई और वजन

 
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गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही भ्रूण का विकास होने लगता है । गर्भावस्था के दौरान नियमित अंतराल पर अल्ट्रासाउंड स्कैन किया जाता है और इससे गर्भस्थ शिशु का अनुमानित वजन और लंबाई पता करने में मदद मिलती है। गर्भ में जैसे-जैसे भ्रूण बढ़ने लगता है वैसे-वैसे आपके पेट के आकार में भी वृद्धि होने लगती है।

सप्ताह के अनुसार भ्रूण का वजन
नीचे दी गई तालिका प्रत्येक सप्ताह के आधार पर भ्रूण के वजन में होने वाली औसत वृद्धि को दर्शाती है। ये संख्या केवल अनुमान के अनुसार है और सामान्य दिशा-निर्देश के तौर पर दी गई है। हो सकता है कि आपके बच्चे का वजन, तालिका में दर्शाए गए वजन से पूरी तरह न मिलता हो। हालांकि, यह चिंता का कारण नहीं है, हर बच्चा अलग होता है इसलिए उसमें होने वाले विकास भी भिन्न हो सकते हैं।
गर्भावस्था सप्ताहऔसत वजन ग्राम में
8 सप्ताह1 ग्राम
9 सप्ताह2 ग्राम
10 सप्ताह4 ग्राम
11 सप्ताह7 ग्राम
12 सप्ताह14 ग्राम
13 सप्ताह23 ग्राम
14 सप्ताह43 ग्राम
15 सप्ताह70 ग्राम
16 सप्ताह100 ग्राम
17 सप्ताह140 ग्राम
18 सप्ताह190 ग्राम
19 सप्ताह240 ग्राम
20 सप्ताह300 ग्राम
21 सप्ताह360 ग्राम
22 सप्ताह430 ग्राम
23 सप्ताह501 ग्राम
24 सप्ताह600 ग्राम
25 सप्ताह660 ग्राम
26 सप्ताह760 ग्राम
27 सप्ताह875 ग्राम
28 सप्ताह1 कि.ग्राम
29 सप्ताह1.2 कि.ग्राम
30 सप्ताह1.3 कि.ग्राम
31 सप्ताह1.5 कि.ग्राम
32 सप्ताह1.7 कि.ग्राम
33 सप्ताह1.9 कि.ग्राम
34 सप्ताह2.1 कि.ग्राम
35 सप्ताह2.4 कि.ग्राम
36 सप्ताह2.6 कि.ग्राम
37 सप्ताह2.9 कि.ग्राम
38 सप्ताह3.1 कि.ग्राम
39 सप्ताह3.3 कि.ग्राम
40 सप्ताह3.5 कि.ग्राम

सप्ताह के अनुसार भ्रूण की लंबाई
वजन के साथ, डॉक्टर भ्रूण की लंबाई का भी रिकॉर्ड रखते हैं। यह तालिका मोटे तौर पर सप्ताह दर सप्ताह भ्रूण की लंबाई के बारे में मार्गदर्शन करती है। भ्रूण की लंबाई सिर से नीचे तक मापी जाती है, क्योंकि वह जिस स्थिति में होता है, यानि पैर धड़ के सामने मुड़े हुए, उस स्थिति में सिर से पैर तक उसकी लंबाई को मापना मुश्किल होता है। 20वें सप्ताह से, भ्रूण की लंबाई की गणना सिर से एड़ी तक की जाएगी।
गर्भावस्था सप्ताहऔसत लंबाई सेमी में
8 सप्ताह1.6 सेमी
9 सप्ताह2.3 सेमी
10 सप्ताह3.1 सेमी
11 सप्ताह4.1 सेमी
12 सप्ताह5.4 सेमी
13 सप्ताह7.4 सेमी
14 सप्ताह8.7 सेमी
15 सप्ताह10.1 सेमी
16 सप्ताह11.6 सेमी
17 सप्ताह13 सेमी
18 सप्ताह14.2 सेमी
19 सप्ताह15.3 सेमी
20 सप्ताह25.6 सेमी
21 सप्ताह26.7 सेमी
22 सप्ताह27.8 सेमी
23 सप्ताह28.9 सेमी
24 सप्ताह30 सेमी
25 सप्ताह34.6 सेमी
26 सप्ताह35.6 सेमी
27 सप्ताह36.6 सेमी
28 सप्ताह37.6 सेमी
29  सप्ताह38.6 सेमी
30 सप्ताह39.9 सेमी
31 सप्ताह41.1 सेमी
32 सप्ताह42.4 सेमी
33 सप्ताह43.7 सेमी
34 सप्ताह45 सेमी
35 सप्ताह46.2 सेमी
36 सप्ताह47.4 सेमी
37 सप्ताह48.6 सेमी
38 सप्ताह49.8 सेमी
39 सप्ताह50.7 सेमी
40 सप्ताह51.2 सेमी
अल्ट्रासोनिक भ्रूण माप मानक
गर्भकालीन आयु चार्ट का उपयोग बॉयोमीट्रिक माप परीक्षण और क्या भ्रूण की वृद्धि सामान्य रूप से हो रही है यह जानने के लिए किया जाता है। यदि होने वाली माँ गर्भाधान से पहले अंतिम मासिक धर्म की तारीख बता सकती है, तो यह प्रसूति की अनुमानित तारीख यानि ई.डी.सी. (एक्सपेक्टेड डेट ऑफ कन्फाइनमेंट) का बेहतर आकलन करने में मदद करती है। ई.डी.सी के अनुमान में 5 दिन ऊपर-नीचे हो सकते हैं ।

गर्भकालीन आयु का अनुमान लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन का उपयोग करने की विधि इस कल्पना के साथ की जाती है कि बच्चा सामान्य रूप से बढ़ रहा है और भ्रूण का वजन चार्ट के अनुसार है । अगर बताए गए अनुमान के अनुसार भ्रूण में वैसा विकास नहीं पाया जाता है, तो तालिका अनुमान कम विश्वसनीय हो जाता है। अल्ट्रासाउंड करने से भ्रूण की संख्या और उसकी संरचना को ठीक से मापा जा सकता है। अल्ट्रासाउंड द्वारा भ्रूण की जांच करने के लिए विभिन्न भ्रूण ग्राफ और कैल्कुलेटर का उपयोग कर किया जाता है।

अनुमानित भ्रूण वजन कैल्कुलेटर
भ्रूण वजन कैल्कुलेटर से आप भ्रूण वजन के प्रतिशतक और साथ ही प्रसव के समय भ्रूण के अनुमानित वजन की गणना कर सकते हैं। आपके द्वारा जो जानकारी देना जरूरी है वह है गर्भकालीन आयु, बाइपेरेटियल व्यास, ह्यूमेरस (प्रगंडिका – ऊपरी बांहों की हड्डी), सिर की परिधि, फीमर (जांघ की हड्डी) की लंबाई और पेट की परिधि। फिर कैल्कुलेटर प्रत्येक कारक के आधार पर इसके प्रतिशतक को कैलकुलेट करता है  और इसके साथ ही प्रसव के समय भ्रूण के वजन का भी अनुमान लगाता है।

यदि यह मान लें कि 30वें सप्ताह में भ्रूण का वजन 60 प्रतिशतक के हिसाब से है, तो इसका मतलब यह है कि 30वें सप्ताह में 60% भ्रूण इसी वजन के या इससे कम वजन के होते हैं । इसका मतलब हुआ कि 40% भ्रूण का वजन 30वें हफ्ते में 60वें प्रतिशतक से अधिक होता है।

गर्भावस्था के अंत में भ्रूण के वजन का अनुमान लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन करना एक आम बात है। लेकिन इसकी सटीकता पर पूरी तरह से विश्वास नहीं किया जा सकता है और होने वाली माँ व डॉक्टर के प्रसव के तरीके से वजन में बदलाव हो सकता है । इसलिए पूरी तरह से इस पर निर्भर नहीं हुआ जा सकता है और यह तब तक अनुशंसित नहीं किया जाता है जब तक कि कोई स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न न हो।

अल्ट्रासाउंड डेटा के अनुसार वारसॉफ, शेपर्ड, हैडलॉक, कैंपबेल आदि फॉर्मूलों का उपयोग करके, यह कैल्कुलेटर भ्रूण के वजन के साथ भ्रूण के पैदा होने के समय का भी अनुमान लगाता है।

इसकी गणना इन चार बुनियादी मापदंडों के आधार पर की जाती है: सिर की परिधि (एच.सी.), बाइपेरेटियल व्यास (बी.पी.डी.), पेट की परिधि (ए.सी.) और फीमर यानि जांघों के हड्डी की लंबाई (एफ.एल.)।

भ्रूण का वजन औसत वजन से 16% अधिक या कम हो सकता है। वास्तविक वजन 16% से अधिक या कम हो सकता है।

लगभग 68% बच्चे 1 मानक विचलन/स्टैण्डर्ड डेविएशन (एस.डी.) की सीमा के भीतर होंगे और 2 एस.डी. में वास्तविक वजन का लगभग 95% सम्मिलित होना चाहिए। हालांकि, लगभग 5% बच्चे या तो 2.5% से अधिक या कम होंगे। इस प्रकार यह भ्रूण के वजन की जांच करने का एक गलत कैल्कुलेटर माना जाता है।

भ्रूण वृद्धि प्रतिशतक कैल्कुलेटर
विकास प्रतिशतक कैल्कुलेटर यह अंदाजा लगाता है कि औसत की तुलना में बच्चा कितना बड़ा या छोटा है। यदि बच्चा विकास के लिए 40 प्रतिशतक में है, तो इसका मतलब यह है कि बच्चा 40% शिशुओं से बड़ा है जो उसी आयु के हैं और 60% शिशुओं से छोटा है जो उसी आयु के हैं। 50 औसत मूल्य माना गया है और 50 से नीचे के मूल्य का मतलब है कि बच्चे की वृद्धि औसत मूल्य से नीचे है। 50 से ऊपर के मूल्य का मतलब है कि बच्चे की वृद्धि औसत वृद्धि दर से ज्यादा है।

एक भ्रूण जिसका माप 10वें और 90वें प्रतिशत के बीच होता है, उसे सामान्य माना जाता है।

गर्भ में भ्रूण के विकास पर नजर रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न शब्दों को बेहतर तरीके से समझाने के लिए नीचे दिया गया है:

1. क्राऊन-रंप लेंथ
भ्रूण के सिर से कूल्हे के निचले हिस्से तक की लंबाई एक पैरामीटर है जो भ्रूण की आयु और भ्रूण की औसत लंबाई का अनुमान लगाता है। इसकी सटीक गणना के लिए 3 या 5 दिन ऊपर नीचे हो सकते हैं । अंगों और योक सैक को इसमें शामिल नहीं किए जाता है। क्राउन-रंप की लंबाई का उपयोग गर्भकालीन आयु जानने के लिए भी किया जा सकता है, जिसके आधार पर डॉक्टर आपकी प्रसूति की नियत तारीख का अनुमान लगाते हैं।

2. बाइपेरेटियल व्यास और सिर की परिधि
बी.पी.डी या बाइपेरेटियल व्यास सिर के सबसे चौड़े भाग का माप होता है । यह माप हड्डी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक लिया जाता है, क्योंकि यह सबसे सुस्पष्ट होता है। इस माप में गलती की गुंजाइश कम होती है, क्योंकि सिर का अंडाकार आकार होने के कारण इसे ठीक से मापा जा सकता है। इस तरीके का बार-बार उपयोग करना आसान हो जाता है। सिर का आकार मस्तिष्क की वृद्धि से निर्धारित होता है और मस्तिष्क की प्रगति के अन्य पहलुओं को ध्यान में नहीं लिया जाता।

3. फीमर (जांघ की हड्डी) और ह्यूमेरस (ऊपरी बांह की हड्डी) की लंबाई
फीमर लंबाई विधि भी विश्वसनीय है और इसे दोहराया जा सकता है। स्केलेटल डिस्प्लेसिया में इसे प्रभावित करने की प्रवृत्ति होती है लेकिन यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है। ये माप सिर के माप की पुष्टि करता है और आप इसका सबसे अच्छा माप 14 सप्ताह के बाद प्राप्त कर सकते हैं । गर्भकालीन आयु का अनुमान लगाने के लिए कम से कम 2 या कभी-कभी 4-5 बार माप लेने की भी आवश्यकता होती है।

4. भ्रूण का अनुमानित वजन
विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और चार्ट उपलब्ध हैं, जो डॉक्टर को पेट की परिधि, बाइपेरेटियल व्यास, फीमर की लंबाई और अन्य माप लेने के साथ-साथ भ्रूण के वजन की जांच करने में मदद करते हैं।

5. पेट की परिधि
यह गर्भावस्था के दूसरे चरण में लिया जानेवाला माप है और इसका उपयोग भ्रूण के विकास का आंकलन करने के लिए किया जाता है। यह एक अनुमानित विधि है और इसका उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि क्या भ्रूण का विकास अनुपात सामान्य है। यह लिवर (यकृत) और पेट के स्तर के से गर्भनाल क्षेत्र में बाएं निवाहिका शिरा के साथ मापा जाता है।

6. गर्भकालीन सैक
ये प्रारंभिक गर्भावस्था में मापा जाता है और तीन आयामों में मापा जाता है। ‘मीन सैक डायमीटर’ या ‘औसत सैक व्यास’ वह औसत है जिसका उपयोग गर्भकालीन आयु का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। इस विधि को गर्भावस्था के 5वें और 8वें सप्ताह के बीच लागू किया जा सकता है और इसकी सटीकता के लिए 3 दिन ऊपर-नीचे रखकर मापा जाना चाहिए।

गर्भकालीन सैक भ्रूण को घेर लेती है और इसे शुरुआत के अल्ट्रासाउंड स्कैन में देखा जा सकता है। सैक भ्रूण को और साथ ही एम्नियोटिक द्रव को घेर लेती है। यह डॉक्टर को गर्भावस्था के हफ्तों की संख्या (5 दिनों के अंतर के साथ, ज्यादा या कम) मापने में मदद करता है।

7. योक सैक
यह एक झिल्लीदार थैली होती है और भ्रूण से जुड़ी होती है। इस थैली को गर्भ और गर्भकालीन थैली के बीच देखा जा सकता है। यह परिसंचरण तंत्र और नाल विकसित होने से पहले भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।

8. फीटल पोल
यह कोशिकाओं का एक द्रव्यमान है और भ्रूण के दिखने से पहले ही इसे देखा जा सकता है। इसके विकास की दर एक दिन में लगभग 1 मिमी होती है और गर्भकालीन आयु के छठवें सप्ताह से शुरू होती है। गर्भकालीन सप्ताह का अनुमान लगाने के लिए और प्रारंभिक गर्भावस्था की स्थिति का पता लगाने में इसका उपयोग किया जाता है।

गर्भावधि आयु की गणना ज्यादातर मामलों में बी.पी.डी, फीमर लंबाई, सिर की परिधि और पेट की परिधि का उपयोग करके की जाती है। यह देखना इतना जरूरी नहीं है कि वे कैसे जुड़े हैं। आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनों में एक कंप्यूटर बायोमेट्रिक विश्लेषण कार्यक्रम होता है जो प्रसूति की अनुमानित नियत तारीख की गणना करता है।

डॉक्टर गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद गर्भकालीन आयु का कई मानकों पर आधारित मूल्यांकन कर सकते हैं। यह मूल बाइपेरेटियल व्यास और फीमर की लंबाई के आधार पर होते हैं। ऐसे और भी कई मापदंड हैं जैसे ऑक्सिपिटोफ्रंटल व्यास, सिर की परिधि या प्रगंडिका लंबाई आदि ।

गर्भकालीन आयु की गणना करने के लिए प्रारंभिक माप आमतौर पर एक निश्चित मूल्यांकन के रूप में किया जाता है। 20 सप्ताह के बाद सटीकता कम हो जाती है। यदि किसी भी समय अल्ट्रासाउंड भ्रूण के माप मानक मापदंड से मेल नहीं खाते हैं, तो डॉक्टर आगे भी इसका मूल्यांकन कर सकते हैं। औसतन सभी मूल्यों के आधार पर एक अनुमानित गर्भकालीन आयु प्राप्त की जाती है।

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गर्भावस्था के दूसरा सप्ताह

 
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नई माँ के लिए गर्भावस्था एक रोमांचक, थोड़ी सी घबराहट और प्यार से भरा हुआ अनुभव होता है और साथ ही यह एक साहसिक कार्य भी है जो पूरी तरह अनपेक्षित होता है। इस दौरान आप अपने आस-पास और अपने शरीर के बारे में अत्यधिक जानकारी प्राप्त करेंगी । गर्भावस्था के दौरान हम यहाँ आपके इस खूबसूरत सफर में, हर हफ्ते होने वाली आशंकाओं और तकलीफों को कम करने में आपकी मदद करते हैं।

गर्भावस्था के दूसरे हफ्ते में बच्चे का विकास
आपके इस नए जीवन की शुरुआत में आपका स्वागत है। जी हाँ, आप अपने जीवन में एक रोमांचक सफर की शुरुआत करने जा रहीं हैं और यह सफर आपके थोड़े से आँसू, थोड़ी सी खुशियाँ और खूब सारे उत्साह से भरपूर रहेगा। यही वो समय है जिसमें हर पल मासूमियत लिए प्यार भरी यादें बनेंगी और बीते हुए पल के साथ आने वाला हर नया पल आपको उत्साहित करेगा।

गर्भाधान के दूसरे सप्ताह में आपका शरीर एक डिम्ब को मुक्त करता है और यह डिम्ब शुक्राणु द्वारा निषेचित होता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अभी तक गर्भवती नहीं हैं। भ्रमित न हों, इसके बारे में पूरी और सही जानकारी लें।

आपकी प्रसूति की तारीख की गणना आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन से की जाती है और अगर आप कोशिश कर रही हैं तो, दूसरे सप्ताह में, आप उस चरण में हैं जब आपके गर्भवती होने की संभावना सबसे अधिक है । दूसरे सप्ताह में डिम्ब गर्भाशय से निकलने और निषेचित होने के लिए तैयार होता है। निषेचित डिम्ब को स्वीकार करने के लिए आपका गर्भाशय बड़ा होने लगता है।

डिंबक्षरण (ओव्यूलेशन) का सटीक दिन बता पाना थोड़ा मुश्किल होता है और इसके होने की संभावना, 9वें से 21वें दिन मे कभी भी हो सकती है। डिम्ब निकलने के 24 घंटे बाद, उसे एक शुक्राणु (जो फैलोपियन ट्यूब तक पहुँचने मे सफल रहता है) द्वारा निषेचित किया जाता है। वीर्यपात के दौरान निकले हुए लाखों में से कुछ ही शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब तक पहुँचने में सफल रहते हैं। निषेचन के लगभग 10-30 घंटे बाद, शुक्राणु के नाभिक और युग्मनज फ्यूज़ से बने अंडाणु, से यह तय होता हैकि आप एक लड़के जन्म देने जा रही हैं या एक लड़की को (यदि शुक्राणु में X गुणसूत्र है तो शिशु एक लड़की है और यदि Y गुणसूत्र है तो वह एक लड़का है)।

अगले 3 से 4 दिनों में, युग्मकोष 16 कोशिकाओं में विभाजित हो जाता है और जब यह गर्भाशय तक पहुँचता है, तो इसे मोरुला कहा जाता है। मोरुला, चिपकी हुई कोशिकाओं की एक छोटी सी गेंद के रूप में होती है और गर्भाशय के अस्तर में जाकर भ्रूण व अपरा में विभाजन की प्रक्रिया शुरू करती है।

मासिक धर्म बंद होने के 2 सप्ताह होने के बाद अब एक रोमांचक सफर शूरू होता है। यदि आप गर्भवती होने का प्रयास नहीं कर रही हैं, तो आप गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों को पहचानने से चूक सकती हैं और यह मानने की भूल कर सकती हैं कि वह पी. एम. एस. या मासिक धर्म में देरी के लक्षण हैं।

बच्चे का आकार क्या है?
कई महिलाओं को एहसास नहीं होता है कि दूसरे सप्ताह में, अंडा अभी तक निषेचित नहीं हुआ है लेकिन इस अंतराल में ही सबसे अच्छा ओव्यूलेशन होता है। हम इसे सबसे बेहतरीन कह रहे हैं क्योंकि आपके मासिक धर्म के 15वें दिन में ओव्यूलेशन होना चाहिए, लेकिन केवल तब, जब आप उन भाग्यशाली लोगों में से एक हैं जिनका 28-दिवसीय मासिक धर्म होता है यदि ऐसा नहीं है, तो आप शायद ऑव्युलेशन पर कुछ दिन पीछे हैं। कई महिलाओं को इस बारे में गलत जानकारी है कि2 सप्ताह की गर्भवती होने का क्या मतलब है, शिशु का आकार, स्वास्थ्य और विकास अभी भी 2 से 3 सप्ताह बाद होगा ।

सामान्य शारीरिक परिवर्तन
गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में बदलाव के विभिन्न तरीके होते हैं, जैसे स्तनों का बड़ा होना एक सार्वभौमिक परिवर्तन होता है, जबकि गर्भावस्था के दौरान हर एक महिला में शारीरिक बदलाव अलग-अलग होते हैं, जैसे बालों की बनावट में बदलाव और इत्यादि।

दूसरे सप्ताह की शुरुआत तब होती है, जब आपका शरीर फॉलिकल सिम्यूलेटिंग हॉर्मोन का उत्पादन करता है। यह हॉर्मोन प्रमुख कूप के परिपक्व होने और टूटने में मदद करता है। एक टूटे हुए कूप को कॉर्पस ल्यूटियम कहा जाता है और यह प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजेन का उत्पादन करता है। इन्हें गर्भावस्था के हॉर्मोन भी कहा जाता है जो न केवल गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, बल्कि उन लक्षणों का कारण भी हैं जिन्हें आप पहले से ही अनुभव करना शुरू कर चुकी हैं।

दो सप्ताह की गर्भावस्था के बाद, कोई वास्तविक निषेचन नहीं होता है, इस समय आप समान लक्षणों का अनुभव करेंगी जैसा मासिक धर्म के दौरान करती हैं और अन्य लक्षणों में कुछ यह भी शामिल हो सकते हैं, जैसे स्तन मे दर्द, कूल्हों में हल्का दर्द और यहाँ तक कि यौन क्रिया करने की इच्छा बढ़ेगी ।

गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह के लक्षण
आपके मासिक धर्म के दूसरे सप्ताह के आस पास ओव्यूलेशन होता है। यदि आप गर्भवती होना चाहती हैं और गर्भधारण करने के सही तरीके और समय को जानने की इच्छा है तो आप सही जगह पर आई हैं।
  • सफ़ेद सर्वायकल म्युकस: आपके सर्विक्स के म्युकस अस्तर में कुछ बदलाव होते हैं जो शुक्राणु के अंदर जाने मे सहायता करता है, इस समय आपकी योनि से सफ़ेद पानी निकलने का यही कारण होता है।
  • गंध का बढ़ना: गर्भावस्था के अन्य लक्षणों की तरह, यह एस्ट्रोजन की वजह से होता है और आमतौर पर इसी वजह से मॉर्निंग सिकनेस होती है।
  • हल्की स्पॉटिंग: जब डिम्ब फूटने के आस-पास कूप होता है, तो आपको कुछ हल्की स्पॉटिंग दिखाई दे सकती है। हालांकि, यदि रक्तस्राव भारी है, तो यह अधिक गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यदि आप इनमें से किसी भी लक्षण से चिंतित हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।
  • बी.बी.टी: गर्भावस्था के पहले दो हफ्तों को कूपिक चरण भी कहा जाता है। यदि आप अपने बेसल बॉडी तापमान (बी.बी.टी.) पर नज़र रख रही हैं, तो आप देखेंगी कि यह इस स्तर पर कम है,और जैसे ही आप पीतपिंड प्रावस्था चरण में प्रवेश करती हैं तब यह बढ़ना शुरू हो जाता है।
आपका शरीर ओव्यूलेशन कब करता है, इस बारे में जानने के लिए यह लक्षण आपकी सहायता करते हैं यदि आपका मासिक धर्म 28-दिन की अवधि पर नहीं आता है तब आप जानकारी पाने के लिए किसी पत्रिका का उपयोग कर सकती हैं। गर्भधारण करने का सही समय जानने के लिए बाज़ार में ओव्यूलेशन किट और फर्टिलिटी मॉनिटर भी उपलब्ध हैं। एक बार जब आप गर्भधारण करती हैं, तो आपको गर्भावस्था के संकेतों के लिए एक नज़र रखना अनिवार्य है और ऐसे समय में तुरंत डॉक्टर से बात करें।
गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह में पेट
निषेचित अंडाणु अभी तक आपकी गर्भाशय की दीवार से जुड़ा नहीं है, इस स्थिति में आपको अपने पेट में कोई बदलाव नहीं दिखेगा। कुछ महिलाएं ओव्यूलेशन के दौरान श्रोणि दर्द की शिकायत करती हैं जो आपको इस दौरान सबसे ज़्यादा महसूस होगा।

गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह में अल्ट्रासाउंड
गर्भावस्था के परीक्षण केवल 4 सप्ताह के शुरू होने पर ही विश्वसनीय हो सकते हैं, यही कारण है कि दूसरे सप्ताह के दौरान अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाता है। यदि आप इस समय अपने प्रजनन अंगों को देखते हैं, तो आपको शुक्राणु द्वारा निषेचित होने के लिए एक छोटा डिम्ब, फैलोपियन ट्यूब के नीचे जाता दिखाई देगा। हालांकि, डिम्ब नमक के दाने से भी छोटा होता है और आपको शायद कुछ भी दिखाई न दे ।, तकनीशियन सिर्फ यह बताने में सक्षम होगा कि गर्भाशय की दीवार मोटी हो रही है या नहीं ।

क्या खाना चाहिए?
स्वस्थ आहार खाने से हमेशा आपका शरीर स्वस्थ रहता है और सभी अंग अच्छे से काम करते है, ऐसे में गर्भावस्था के दौरान समस्या नहीं होती है। अगर दूसरे सप्ताह में आहार के संबंध में बात की जाए तो नियमित रूप से संतुलित आहार के अलावा, आपको कोई विशेष आहार लेने की आवश्यकता नहीं है।

प्रारंभिक गर्भावस्था के समय स्वस्थ आहार लेना यह सुनिश्चित करता है कि आपका शिशु अच्छी तरह से विकसित हो और आपका शरीर प्रसूति की सभी ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम रहें । यदि आप गर्भधारण करने के लिए उत्सुक हैं, तो प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे हरे पत्तेदार साग, अंजीर, सामन मछली और विभिन्न प्रकार की बेर को शामिल करने का प्रयास करें। कैफीन का सेवन कम करने करें क्योंकि माना जाता है कि यह गर्भाधान की संभावना को कम करता है। खाद्य पदार्थ जिसमें फॉलिक एसिड पाया जाता है ऐसे खाद्य पदार्थों का का सेवन करना अच्छा होता है, जैसे पालक और चिकित्सक से फॉलिक एसिड के पूरक के बारे में भी सलाह लें। इससे यह सुनिश्चित होता है कि जन्म के समय होने वाली परेशानी जैसे न्यूट्रल ट्यूब डिफेक्ट्स (जन्म के समय रीढ़ की हड्डी मे खराबी) की संभावना कम होगी ।

सुझाव और देखभाल
इस रोमांचक अवधि के दौरान खुद का ख़्याल रखना कठिन और भ्रमित करने वाला हो सकता है क्योंकि इंटरनेट पर बहुत सारी शोध सामग्री मौजूद हैं । किसी भी युक्ति को अपनाने देसे पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात ज़रूर करें। यहाँ कुछ बातें दी गई हैं जिन्हें आपको दूसरे सप्ताह के दौरान ध्यान में रखनी चाहिए।

क्या करें
  • अपने मासिक धर्म चक्र पर ध्यान रखें।
  • ओव्यूलेशन किट का उपयोग करें।
  • हर दूसरे दिन सम्बन्ध स्थापित करें।
  • पूर्व गर्भाधान आनुवांशिक परीक्षण कराएं जो यह निर्धारित करने में मदद करता है कि क्या आपके शिशु आनुवंशिक विकार, जैसे हंटिंगटन रोग, सिकल सेल एनीमिया और कुछ अन्य होने की संभावनाएं तो नहीं हैं ।
क्या न करें
  • उत्तेजित हो कर गर्भावस्था का परीक्षण न करें क्योंकि इस तरह शुरुआत में ही आप गलत धारणा बना सकती हैं। सबसे अच्छा होगा कि आप एक और सप्ताह का इंतज़ार करें और फिर परीक्षण करें।
  • चिकित्सक द्वारा बताई हुई प्रसवपूर्व विटामिन की दवाओं के अलावा कोई भी दवा न लें।
  • डॉक्टर के अलावा किसी और से सलाह न लें।
आपके लिए आवश्यक खरीददारी
इस समय पर, केवल एक चीज जिसे आपको खरीदने की आवश्यकता हो सकती है वह एक प्रेग्नेन्सी किट, जिसे आप अगले सप्ताह निश्चित करने के लिए उपयोग कर पाएंगी।

गर्भावस्था, एक अशांतलेकिन आनंदमयी और रोमांचक अवधि होती है। एक अच्छा स्त्री रोग विशेषज्ञ विश्वासपात्र होता है, जो आपके सभी डर खत्म करने में आपकी सहायता करता है। जब भी आपको आवश्यकता महसूस हो डॉक्टर से परामर्श लें, उनका सम्पर्क अपने मोबाइल स्पीड डायल पर रखें और किसी भी संदेह को स्पष्ट करने के लिए उनसे बात करें। हम आपको आगे की साहसिक-जीवन यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हैं !

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