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कर्टसी लंजेस व्यायाम के फायदे

 
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व्यायाम के दौरान हम विभिन्न मांसपेशियों को लक्षित करने वाले अभ्यास कर उन्हें बेहतर आकार और मजबूती देने की कोशिश करते हैं। ग्लूटस मैक्सिमस मानव शरीर की सबसे बड़ी मांसपेशी है, जिसे आकार देकर आप अपने शरीर की बनावट को बेहतर बना सकते हैं। कूल्हों की यह मांसपेशियां उचित न सिर्फ आपके कपड़ों की फिटिंग को बेहतर बनाती हैं, साथ ही इसके कई सारे अन्य लाभ भी हैं। शरीर के निचले हिस्सों के व्यायामों को इसी बात का ध्यान रखते हुए बनाया गया है। इन व्यायामों से अंगों को आकार, संतुलन, स्थिरता मिलने के साथ-साथ उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याएं दूर रहती हैं।

शरीर के निचले हिस्सों के संतुलन और आकार के लिए स्क्वाट और डेडलिफ्ट की तुलना में लंजेस व्यायामों को ज्यादा प्रभावी माना जाता है। कूल्हों और पैरों पर एक ही वक्त में दबाव डालकर इन्हें गतिविधियों में शामिल करने से पैर और ग्लूट्स की मांसपेशियों को शक्ति और संतुलित आकार मिलता है। यह व्यायाम कई प्रकार से जैसे चलकर, फावर्ड, रिवर्स, साइड-वे और कर्टसी लंजेस आदि के माध्यमों से किया जा सकता है। कर्टसी लंजेस व्यायाम के दौरान पैरों को घुमाकर व्यायाम करना होता है। इस व्यायाम को सही तरीके और लंबे समय तक करने से आप अपने पैरों को मजबूत बनाने के साथ कूल्हों की मांसपेशियों को आकार और शक्ति प्रदान कर सकते हैं।

अपने नितंबों से फैट को कम करने और मांसपेशियों को शक्ति देने के लिए कर्टसी लंजेस एक बेहतरीन बॉडीवेट व्यायाम है। इस व्यायाम में आपकी जांघों और ग्लूट्स की मांसपेशियों को लक्षित किया जाता है। आपके दैनिक वर्कआउट रूटीन में कर्टसी लंजेस को शामिल कर आप कई तरह से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कूल्हों और जांघों के अलावा इस व्यायाम के ​जरिए आप कोर की मांसपेशियों को भी मजबूती और स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। इस व्यायाम को आसानी से आप स्क्वाट्स और डेडलिफ्ट्स के साथ अपने लेग-डे के वर्कआउट में शामिल कर सकते हैं। इस व्यायाम के दौरान पैरों की स्थिति के कारण नितंबों को आकार देने में यह काफी फायदेमंद है। दैनिक व्यायाम के कई लाभ होते हैं, इसमें कर्टसी लंजेस को शामिल करना लाभ को बढ़ाता है।

कर्टसी लंजेस व्यायाम के लाभ - 
वैसे तो सामान्य रूप से किए जाने वाले लंजेस व्यायाम भी कई प्रकार से लाभदायक होते हैं। इसमें अगर आप कर्टसी लंजेस व्यायामों को शामिल करते हैं तो इसके अतिरिक्त लाभ आप प्राप्त कर सकते हैं। कर्टसी लंजेस व्यायाम के दौरान चूंकि पैरों को विभिन्न कोणों पर मोड़ना होता है, ऐसे में और प्रभावी हो जाता है। शरीरिक बनावट को सुधारने के साथ इस व्यायाम के निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं :
  • जांघों के पीछे की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद
  • पिंडली और पीठ की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद
  • ग्लूटस के लिए फायदेमंद
  • एड़ियों के लिए लाभदायक
  • चोट का जोखिम कम
  • घुटने के लिए फायदेमंद
  • पूरे शरीर को शक्ति देता है
  • स्वास्थ्य में सुधार करता है
  • शरीर में संतुलन और स्थिरता बनाता है
कर्टसी लंजेस व्यायाम करने का सही तरीका - 
वैसे तो आप इस व्यायाम को बिना किसी उपकरण के भी कर सकते हैं, लेकिन हाथों में डंबल या केटलबेल लेकर अगर इस व्यायाम को करते हैं तो इसका असर और बढ़ जाता है।

किन उपकरणों की आवश्यकता है
उपकरणों की आवश्यकता नहीं

किन मांसपेशियों पर होता है असर
  • ग्लूट्स (नितंब)
  • हैमस्ट्रिंग (जांघ का पिछला हिस्सा)
  • क्वाड्रिसेप्स (जांघ के सामने का हिस्सा)
  • पीठ का निचला हिस्सा
  • पिंडली
कौन कर सकता है
शुरुआती चरण के लोग कर सकते हैं

सेट और रैप
15-20 रैप के 3 सेट

कैसे करें?
  • सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अपने हाथों को कमर पर रखें।
  • अब अपने दाहिने पैर को तिरछा करते हुए बांई ओर जाएं।
  • अब अपने घुटनों को मोड़ें। ऐसे में आपकी जांघें जमीन के समानांतर हो जाएंगी।
  • अपने दाहिने पैर पर ताकत लगाते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौटें।
  • अब इसे दूसरे पैर से भी दोहराएं। यह एक रैप है।
कर्टसी लंजेस के दौरान होने वाली सामान्य गलतियां और सुझाव - 
सबसे पहले आपको इस बात का ध्यान रखना है कि बिना शरीर को वार्म-अप किए कभी भी कोई व्यायाम शुरू न करें। कर्टसी लंजेस से पहले जंपिंग जैक, हाई नी या पांच मिनट के लिए ट्रेडमिल पर दौड़ लगा सकते हैं। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां और जोड़ सक्रिय रूप में आ जाएंगे और किसी प्रकार के चोट का खतरा नहीं रहेगा।

पैरों का वर्कआउट ज्यादातर लोगों को अपेक्षाकृत अधिक कठिन लगता है। ऐसे में इस व्यायाम को सही ढंग से न करने से आपको चोट का खतरा रहता है। चूंकि, कर्टसी लंजेस व्यायाम कठिन होता है ऐसे में इससे अभ्यस्त होने में आपको वक्त लग सकता है। यह व्यायाम शरीर को स्थिर और बेहतर आकार देने में काफी फायदेमंद है। इस पूरे व्यायाम के दौरान शरीर के उपरी हिस्से को सीधा रखें और सीधा देखें, नीचे या पीछे न देखें। किसी के मार्गदर्शन में यह व्यायाम करना अच्छा रहता है अथवा आप शीशे के सामने यह व्यायाम करें, जिससे सारी गतिविधियों को आप सामने से देख सकें।

कर्टसी लंजेस व्यायाम के विकल्प और सावधानियां - 
वैसे तो सभी प्रकार के लंजेस व्यायामों के अपने-अपने लाभ हैं। यहां कुछ व्यायाम दिए जा रहे हैं जो आपके शरीर के निचले हिस्से को शक्ति प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं।

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बैक एक्सटेंशन एक्सरसाइज के फायदे और करने का तरीका

 
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जिम और फिटनेस सेंटरों में जिन मांसपेशियों को सबसे ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश रहती है, उन्हीं में से एक हैं कोर की मांसपेशियां। आम तौर पर लोगों का मानना होता है कि कोर मांसपेशियां शरीर के अग्र भाग के मध्य में स्थित होती हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से सही नहीं है। कोर का मतलब होता है शरीर का केंद्र, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मानव शरीर के केंद्र का मतलब सिर्फ वही नहीं जो हमें सामने से दिखाई देता है। शरीर की बनावट के हिसाब से कोर मांसपेशियां अग्र भाग के साथ साथ पीठ के हिस्से को भी संयोजित करती हैं।

जिम में कोर मांसपेशियों के लिए मुख्यत: क्रंचेज और लेग राइज जैसे व्यायाम किए जाते हैं। इन व्यायामों से आप सिक्स पैक एब्स और अपने पेट को बेहतर आकार तो जरूर दे सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इससे आपकी कोर मांसपेशियां भी मजबूत हो रही हैं।

पीठ का निचला हिस्सा भी शरीर के केंद्र में होता है। इस हिस्से में भी कोर मांसपेशियां होती हैं। ऐसे में कंपाउंड एक्सरसाइज सबसे प्रभावी व्यायाम हो सकता है, जिससे एक वक्त में ही शरीर की कई मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। डेडलिफ्ट और स्क्वॉट्स ऐसे ही कंपाउंड एक्सरसाइज हैं, जिनसे पीठ के निचले हिस्से की कोर मांसपेशियों के साथ अन्य मांसपेशियों का भी व्यायाम किया जा सकता है।

कोर सहित पीठ के इस हिस्से की अन्य मांसपेशियों के लिए बैक एक्सटेंशन या हाइपर एक्स्टेंशन भी एक बेहतर व्यायाम माना जाता है। कोर की संपूर्ण मांसपेशियों के व्यायाम के लिए एब क्रंच और बैक एक्सटेंशन एक्सरसाइज को एक बेहतर समायोजन माना जा सकता है। इस लेख में हम आपको बैक एक्सटेंशन व्यायाम और उससे होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि इस व्यायाम को किस तरह से सही ढंग से करके अधिक से अधिक फायदा प्राप्त किया जा सकता है।

बैक एक्सटेंशन एक्सरसाइज के लाभ - 
पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों के लिए बैक एक्सटेंशन काफी फायदेमंद व्यायाम है। इस व्यायाम के निम्न लाभ हैं।

पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है : रीढ़ की हड्डी के लिए सबसे महत्वपूर्ण इरेक्टर स्पाइन मांसपेशियों को मजबूती देने में यह व्यायाम काफी फायदेमंद है। इसके साथ ही ग्लूट्स, कोर और एब्स की मांसपेशियों के विकास और मजबूती में भी यह सहायक है।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द से राहत : जिन लोगों को हर्नियेटेड या स्लिप डिस्क के चलते पीठ के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत रहlr है, ऐसे लोगों को बैक एक्सटेंशन व्यायाम से काफी राहत मिलती है।

शारीरिक मुद्रा में सुधार आता है : विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि पीठ के दर्द का मुख्य कारण गलत ढंग से बैठना होता है।  बैक एक्सटेंशन व्यायाम से पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है जो शरीरिक मुद्रा को सुधारने और बेहतर रखने में भी मदद करता है।

कार्यात्मक शक्ति को बढ़ाता है : बैक एक्सटेंशन व्यायाम से शरीर में कार्यात्मक शक्ति को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इस व्यायाम के जरिए पीठ के निचले हिस्से पर बिना कोई दबाव बनाए आप दैनिक कार्यों को आसानी से कर सकते हैं। इस व्यायाम से अन्य अभ्यासों में वजन उठाने के लिए पर्याप्त शक्ति का भी निर्माण होता है।

बैक एक्सटेंशन एक्सरसाइज के लिए आवश्यक उपकरण - 
वैसे तो बैक एक्सटेंशन व्यायाम फर्श पर ही किया जाता है, लेकिन इसके रूपों में बदलाव कर विभिन्न मांसपेशियों को लक्षित करने के लिए आप कुछ उपकरणों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। बैक एक्सटेंशन के लिए जिम और फिटनेस सेंटरों में हाइपरेक्स्टेंशन मशीन मौजूद होती है, जिसे रोमन चेयर के नाम से भी जाना जाता है।

जिम में बेंच पर लेटकर भी इस व्यायाम को किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको किसी सहायक की आवश्यकता होती है जो पैरों को एक स्थान पर पकड़ कर रखे, जिससे वह व्यायाम के दौरान उठें नहीं। अधिकांश जिमों में मौजूद लार्ज स्विस बॉल की मदद से भी हाइपरएक्सटेंशन व्यायाम किया जा सकता है।

बैक एक्सटेंशन एक्सरसाइज के प्रकार -
हाइपरएक्सटेंशन व्यायाम में कई विविधताएं हैं। इसे फर्श पर या रोमन चेयर की मदद से भी किया जा सकता है।

रोमन चेयर की मदद से बैक एक्सटेंशन
रोमन चेयर विशेष रूप से हाइपरएक्सटेंशन व्यायामों के लिए ही डिजाइन की गई है। इसे आप वजन के साथ या बिना वजन के भी कर सकते हैं।

कैसे करें व्यायाम
  • सबसे पहले मशीन पर जांघों को एक्सटेंशन पैड और एड़ी को फुट रेस्ट में सही से सेट करें।
  • अब मशीन पर बिल्​कुल सीधे खड़े हो जाएं। मशीन पर खड़े होने के दौरान आप स्वाभाविक रूप से आगे की ओर झुक जाएंगे।
  • घुटनों को थोड़ा मोड़कर, हाथों को अपनी छाती के पास रखें। अब पीठ को सीधा रखते हुए ऊपरी शरीर को नीचे की ओर झुकाएं।
  • अब धीरे-धीरे शरीर को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान किसी तरह की तेजी या झटके जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। पूरे अभ्यास के दौरान पीठ को एकदम सीधा रखें। यह एक रैप है।
टिप्स : अगर आप जिम के शुरुआती चरणों में हैं, तो 10 रैप के 3 सेट लगा सकते हैं। मांसपेशियों में अधिक तनाव बनाने के लिए अभ्यास करते समय अपनी छाती के करीब डम्बल या केटलबेल भी पकड़ सकते हैं। यही व्यायाम आप बेंच पर भी कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी सहयोगी को आपके पैरों को पकड़कर स्थिर रखना होगा।

फर्श पर बैक एक्सटेंशन व्यायाम
फर्श के व्यायाम कई मामलों में बेहतर माने जाते हैं। पहले तो इन व्यायामों के लिए किसी उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए इन्हें कहीं भी आसानी से किया जा सकता है। दूसरी ओर इनको नियमित प्रयोग में लाकर शरीर को लचीला बनाने के साथ मांसपेशियों में वृद्धि, शरीरिक संतुलन में सुधार करने और वजन कम करने में भी मदद मिलती है। कोबरा पोज, भुजंगासन, धनुरासन और सुपरमैन जैसे योगाभ्यास फर्श पर किए जाने वाले बैक एक्सटेंशन व्यायाम के उदाहरण हैं।

कैसे करें व्यायाम
  • फर्श पर पीठ के बल लेट जाएं। हाथों और पैरों को पूरी तरह से फैलाकर रखें।
  • अब अपने दाहिने हाथ और बाएं पैर को उठाएं और कुछ सेकंड के लिए इन्हें पकड़कर रखें।
  • अब पूर्ववत स्थिति में आएं और फिर बाएं हाथ और दाहिने पैर के साथ यही गतिविधि दोहराएं। यह एक रैप है।
  • टिप्स : सुपरमैन व्यायाम के रूप से प्रचलित यह व्यायाम शरीरिक संतुलन बढ़ाने के साथ पीठ के निचले हिस्से के दोनों ओर की मांसपेशियों के व्यायाम के लिए काफी बेहतर है।

निष्कर्ष
पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए डेडलिफ्ट्स, स्क्वाट्स और लंजेस बहुत फायदेमंद व्यायाम हैं, लेकिन ये व्यायाम सीधे तौर पर मांसपेशियों को लक्षित नहीं करते हैं। हाइपरेक्स्टेंशन व्यायाम भी बिल्कुल उसी तरह से काम करता है, ऐसे में इसे दैनिक व्यायाम में शामिल कर आप कई तरह से लाभ उठा सकते हैं।

पीठ के निचले हिस्से के दर्द की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए बैक एक्सटेंशन काफी फायदेमंद व्यायाम है। इससे पीठ के निचले हिस्से के साथ-साथ कंधों को मजबूत बनाने और शरीर की मुद्रा को सही करने में भी मदद मिलती है। इस प्रक्रिया से कोर मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है, जिससे शरीर के संतुलन को सुधारने के साथ उन्हें स्थिरता प्रदान की जा सकती है।


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बेंट-ओवर रो एक्सरसाइज

 
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'पुशिंग 'और 'पुलिंग' व्यायाम की दो ऐसी तकनीक हैं, जिनसे शरीर की विभिन्न मांसपेशियों को लक्षित करके उनका व्यायाम किया जाता है। पुशिंग के ज्यादातर व्यायामों का प्रभाव शरीर के सामने की मांसपेशियों जैसे छाती, कंधों के साथ-साथ ट्राइसेप्स पर होता है। वहीं दूसरी ओर पुलिंग से संबंधित सभी व्यायाम शरीर के पिछले हिस्सों को विकसित करते हैं। इसमें पीछे की सभी मांसपेशियों के साथ-साथ बाइसेप्स भी शामिल होते हैं। चूंकि, शरीर के पीछे की मांसपेशियां हमें दिखाई नहीं देती हैं ऐसे में ज्यादातर लोग इन व्यायामों को नजरअंदाज कर देते है। हालांकि, यहां ध्यान देना जरूरी है कि इस तरह के व्यायाम शरीर के समग्र विकास के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। एक अन्य दृष्टिकोण से देखें तो अगर आपके पीठ की मांसपेशियां विकसित और सुडौल हैं तो आपके कपड़ों की फिटिंग अच्छी आती है, जिसका प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर पड़ता है।

पीठ की मांसपेशियों को बेहतर आकार देने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने का एक ऐसा ही व्यायाम है- बेंट-ओवर रो व्यायाम। नियमित रूप और सही तकनीक के साथ इस व्यायाम को करने से पीठ को 'वी आकार' दिया जा सकता है, जिसकी चाहत हर एथलीट को होती है। पीठ की मांसपेशियां आपके हाथों को ठीक से कार्य करने में भी मदद करती हैं। रीढ़ के दोनों ओर की विंग मांसपेशियों का उपयोग करते हुए हाथों को फैलाने, किसी चीज को उठाने या खींचने में मदद मिलती है।

इस अभ्यास के दौरान शरीर को स्थिर रखते हुए पीठ और बाजुओं को प्रयोग में लाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि आप पुलिंग और पुशिंग दोनों ही व्यायामों को एक समान मात्रा में करें, जिससे शरीर के आगे और पीछे की मांसपेशियों में संतुलन बना रहे।

बेंट ओवर रो एक्सरसाइज के फायदे - 
बेंट-ओवर रो जैसे अभ्यास से पीठ और कंधों से संबंधित अधिकतर मांसपेशियों के समूहों का व्यायाम हो जाता है। ऊपर की ओर वजन उठाने वाले व्यायामों से आपकी बाहों और धड़ को मजबूती मिलती है, जिससे कार्यात्मक शक्ति में सुधार आता है। इस अभ्यास को करने के लिए बारबेल या डम्बल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बेंट-ओवर रो अभ्यास करने से निम्नलिखित फायदे होते हैं।
  • शरीर के ऊपरी हिस्से को शक्ति मिलती है।
  • पुल-अप और लैट पुलडाउन वर्कआउट करना आसान होता है।
  • शारीरिक स्थिरता और हाथों की ग्रिप अच्छी बनती है।
  • शारीरिक मुद्रा में सुधार होता है, इसके साथ पीठ दर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।
बेंट ओवर रो एक्सरसाइज करने का सही तरीका -
इस अभ्यास के लिए आपको ऐसी स्थिति बनानी होती है, जहां आपकी पीठ जमीन के लगभग समानान्तर स्थिति में हो। व्यायाम के दौरान लगने वाली चोट से बचने के लिए सबसे पहले वार्मअप और पीठ के लिए किए जाने वाले हल्के व्यायाम कर लें। चेस्ट एक्सपेंशन, पुल-अप, चिन-अप, पुश-अप और आर्म रोटेशन जैसे कुछ ऐसे व्यायाम हैं जो पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने और उनकी स्ट्रेचिंग में काफी फायदेमंद होते हैं।
किन मांसपेशियों पर होता है असर
  • पीठ
  • कंधे
किन उपकरणों की होती है आवश्यकता
एक बारबेल या एक जोड़ी डम्बल/केटलबेल्स

कौन कर सकता है यह व्यायाम
इंटरमीडिएट (प्रशिक्षु स्तर के लोग)

सेट और रैप
15 रैप के 3 सेट

एक हाथ से डंबल रो व्यायाम करने का तरीका
  • अपने बाएं पैर को बेंच पर रखते हुए बाएं हाथ से आगे की ओर बेंच को मजबूती से पकड़ें। पीठ को सीधा रखें।
  • आपके दाहिने पैर को जमीन पर स्थिर अवस्था में मजबूती से टिकाए रखें।
  • अपने दाहिने हाथ को आगे की ओर ले जाते हुए डंबल को पकड़ें। हाथ को सीधा रखें।
  • पीठ को बिल्कुल सीधा रखते हुए अपने दाहिने हाथ को कोहनी से मोड़कर पीछे की ओर लेकर आएं।
  • कोहनी को शरीर से सटाते हुए पीछे की ओर लेकर जाएं। कुछ सेकेंड के लिए रुकें।
  • डम्बल को धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में लाएं। यह एक रैप है।
अपनी वर्कआउट क्षमता को बढ़ाने के लिए बेंट-ओवर रो के उच्च तीव्रता वाले विविध व्यायामों का अभ्यास करें।

डबल आर्म डंबल रो : इस अभ्यास में दोनों हाथों में डम्बल को पकड़ें और 'एक हाथ से डंबल रो' वाले व्यायाम को दोहराएं। इस व्यायाम के लिए आपको बेंच के उपयोग की आवश्यकता नहीं है।

बारबेल रो : अपनी सुविधा के अनुसार बारबेल को ओवरहैंड या अंडरहैंड ग्रिप के साथ पकड़ें। अब बारबेल को ऊपर की ओर शरीर के मध्य भाग तक लेकर आएं।

मशीन रो : यह मशीन अमूमन हर जिम और फिटनेस सेंटर में मौजूद होती है। मशीन के साथ इस व्यायाम के दौरान अपने धड़ को सीट पर टिकाएं। दोनों हाथों में हैंडल को पकड़ें और फिर वजन को अपनी ओर खींचें और धीरे-धीरे इसे वापस छोड़ें।

टिप्स : वजन उठाने के लिए अपने हाथों पर दबाव न डालें। इसके बजाय, व्यायाम का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अपने लैट्स (फेफड़े के पिछले हिस्से) का उपयोग करें।

बेंट ओवर रो एक्सरसाइज के दौरान होने वाली गलतियां -
बेंट ओवर रो जैसे व्यायामों को करना और उनमें महारत हासिल करना आसान नहीं होता है। जाने अनजाने लोगों से इस अभ्यास के दौरान कई सारी गलतियां हो जाती हैं। बेंट ओवर रो व्यायाम के दौरान आम तौर पर होने वाली गलतियां निम्नलिखित हैं। इनका आपको ध्यान रखना चाहिए।
  • बात करें अगर एक हाथ से किए जाने वाले इस व्यायाम की, तो इस दौरान शरीर का एक हिस्सा झुका होता है, जबकि दूसरे हिस्से से व्यायाम हो रहा होता है। व्यायाम के दौरान कुछ लोग अपनी कोहनी को पीठ के काफी पीछे तक लिए जाते हैं। यहां ध्यान देने की जरूरत है कि आपको पीठ के पास तक ही अपनी कोहनी को लेकर जाना है, ज्यादा पीछे नहीं।
  • डंबल को पीछे की ओर लाते वक्त कुछ लोग अतिरिक्त गति का प्रयोग करते हुए हाथ से डंबल को लहराते हैं, इससे चोट भी लग सकती है। शरीर जितना स्थिर रहेगा, उतना ही मांसपेशियों पर व्यायाम का असर पड़ेगा।
  • इस व्यायाम के दौरान आपके पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए अपने पैरों को पूरे व्यायाम के दौरान स्थिर रखें। कुछ लोग अभ्यास करते समय पीठ दर्द की शिकायत कर सकते हैं। यही कारण है कि पीठ को अच्छे आकार और उसकी मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए उच्च तीव्रता वाले व्यायामों को करना आवश्यक होता है। इस तरह के व्यायामों को हमेशा किसी प्रशिक्षक की देखरेख में किया जाना चाहिए।
  • जिन लोगों को पहले से ही पीठ या कंधे में दर्द की शिकायत होती है उन्हें इस व्यायाम को न करने की सलाह दी जाती है। कोई भी व्यायाम करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

निष्कर्ष :
बेंट ओवर रो जैसे व्यायाम पीठ की मांसपेशियों को विकसित करने के साथ शरीर के आगे और पीछे की मांसपेशियों में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। केवल पुल-अप या लैट पुलडाउन से ही पीठ की सभी मांसपेशियों का विकास नहीं हो सकता है। विभिन्न मांसपेशियों के समूहों को लक्षित करने के लिए अलग-अलग कोणों के व्यायाम की आवश्यकता होती है।

व्यायाम के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। किसी प्रशिक्षक की निगरानी में ही व्यायाम करें। जिन लोगों को पहले से पीठ या कंधे में दर्द की शिकायत हो, ऐसे लोग इस व्यायाम को बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।

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जंप स्क्वाट्स व्यायाम के फायदे, करने का सही तरीका, प्रकार, गलतियां और सुझाव -

 
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हर बॉडी पार्ट की अलग-अलग एक्सरसाइज होती हैं और उनको करने के कई आसान तरीके भी होते हैं, जिनसे कोई भी सही ट्रिक लगाकर अपने उस बॉडी पार्ट को ट्रेन कर सकता है।

जैसे :
  • चेस्ट के लिए बेंच प्रेस
  • शोल्डर के लिए डंबल प्रेस 
  • एब्स के लिए क्रंचेज
एक्सरसाइज का नाम तुरंत जुबान पर आता है, वैसे ही पैरों की एक्सरसाइज के लिए सबसे पहले नाम आता है "स्क्वॉट एक्सरसाइज" (Squat Exercise) का।

कई  लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी लोअर बॉडी को ट्रेन करने से बचते हैं और वे सिर्फ अपनी
  • चेस्ट को मस्कुलर 
  • बैक को V शेप 
  • शोल्डर को हैवी
  • बाइसेप्स को बड़ा 
बनाने में लगे रहते हैं। लेकिन उन्हें ये जानने की जरूरत है कि यदि आपकी सिर्फ ऊपरी बॉडी ही ग्रो करेगी और लोअर बॉडी वैसी ही रहेगी तो आपकी शेप अनबैलेंस हो जाएगी। जो कि अच्छी नहीं लगेगी। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी लोअर बॉडी के लिए वर्कआउट्स भी करें। स्क्वॉट की मदद से आप अपनी क्वाड, हैमस्ट्रिंग और काफ मसल्स को ट्रेन कर सकते हैं।

स्क्वॉट ऐसी एक्सरसाइज है जिससे आप आसानी से अपनी लोअर बैक को टोन कर सकते हैं। इसे करना उतना कठिन भी नहीं है, लेकिन इसके कई वेरिएशन्स भी होते हैं। जो आप अलग-अलग तरह के फिटनेस लेवल पर अपना सकते हैं।

आइए जानते हैं, आखिर स्क्वॉट एक्सरसाइज है क्या, इसे कैसे करते हैं और इसे कितनी तरह से कर सकते हैं।

क्या है स्क्वॉट 
स्क्वॉट ऐसी एक्सरसाइज है जिसे आप कहीं भी कर सकते हैं और इसके लिए आपको किसी भी एक्युपमेंट की जरूरत नहीं होती। लेकिन हाई लेवल पर आप बार्बेल, प्लेट्स, डम्बेल, हेक्स बार आदि का भी यूज कर सकते हैं।

टिप (Tip) : यदि आप बिगिनर हैं, तो आप पहले सिंपल स्क्वॉट से शुरुआत करें, उसके बाद ही वेट का प्रयोग करें। यदि आप शुरुआत में ही वेट का प्रयोग करने लगेंगे तो हो सकता है ये आपके लिए नुकसानदेेह हो। क्योंकि इससे आपके पैर में सोरनेस (दर्द) हो सकता है।

कैसे करते हैं स्क्वॉट 
स्क्वॉट करने के लिए आपको अपनी लोअर बॉडी का यूज करना होता है और यदि चाहें तो बैलेंस करने के लिए अपने हाथों को सामने की ओर रख सकते हैं। 

आपको सबसे पहले सीधे खड़े होकर हाथ सामने की ओर करना है और फिर बैक को स्ट्रेट रखते हुए पीछे की ओर बैठें, जैसे की आप कुर्सी पर बैठते हैं। बस याद रखें आपको इसे करने के लिए अपने आपको लगभग 90-100 डिग्री पर पीछे की ओर (फोटो में दिखाए मुताबिक) बैठना है।

इसे करते समय ध्यान रखें कि 
लोड आपके क्वार्ड्स, ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग मसल्स पर आना चाहिए।
आपके घुटने पंजों के ज्यादा आगे नहीं जाने चाहिए।
नीचे जाकर आधा सेकेंड रुकें और फिर ऊपर की ओर आएं।
कोशिश करें कि रोजाना कम से कम 50 स्क्वॉट जरूर करें और धीरे-धीरे इनकी संख्या भी बढ़ाएं। इससे आपके किसी अन्य बॉडी पार्ट्स के साथ लोअर बॉडी पर भी काम होता रहेगा।

आप नीचे दिए हुए वीडियो को देखकर भी समझ सकते हैं कि स्क्वॉट कैसे करते हैं।

स्क्वॉट के प्रकार 
1. बॉडी वेट स्क्वॉट 
इस वेरिएशन को करने के लिए आपको किसी भी एक्यूपमेंट की जरूरत नहीं होती। इसमें आपको स्क्वॉट की बेसिक फॉर्म को फॉलो करना है। इसे करने के लिए आपको अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखते हुए हाथ आगे करते हुए पीछे की ओर नीचे लगभग 90-100 डिग्री तक बैठना है।

आधा सेकेंड रुकने के बाद आपको फिर ऊपर की ओर आना है। इस दौरान अपनी बैक को स्ट्रेट बनाए रखें और सामने या ऊपर की ओर देखें।

वीडियो में देखें बॉडी वेट स्क्वॉट करने का सही तरीका : 



2. बार्बेल स्क्वॉट 
ये सबसे कॉमन स्क्वॉट है जिसे अधिकतर लोग करते हैं। जिम में इसके लिए मशीन भी उपलब्ध होती हैं। 

इसे करने के लिए आपको अपने कंधे के पीछे बार्बेल में अपनी क्षमतानुसार वेट लगाकर स्क्वॉट लगाना होता है। इसमें आपकी पोजिशन नॉर्मल स्क्वॉट होनी चाहिए। बस इसमें आपके हाथ सामने की जगह बार्बेल को पकड़ने में काम आते हैं।

इसे करने से पहले आपको पहले प्रैक्टिस कर लेनी चाहिए उसके बाद ही इसे ट्राय करें।

वीडियो में देखें बार्बेल स्क्वॉट करने का सही तरीका : 



3. फ्रंट स्क्वॉट 
फ्रंट स्क्वॉट ने काफी जल्दी पॉपुलेरिटी हासिल कर ली है। इसे सारे एथलीट्स करते हैं क्योंकि इसमें क्राॅसफिट के सारे प्रोटोकॉल पूरे होते हैं। ओलंपिक लिफ्ट्स में ये एक मेन फॉर्म है। इसमें आपको वेट आगे की ओर अधिक लगता है इसलिए इसे बैक स्क्वॉट की अपेक्षा कठिन माना जाता है।

इसे करने के लिए आपको अपने कंधों पर आगे की ओर से बार्बेल रखना होता है और इसमें आपके क्वाड्रिसेप्स और बैक पर लोड आता है। 

वीडियो में देखें फ्रंट स्क्वॉट करने का सही तरीका : 



4. सूमो स्क्वॉट 
इसे करने के लिए आपको अपने पैरों को कंधे से अधिक चौड़ा करना होता है, जिससे नीचे बैठते समय लोड आपकी इनर थाइज पर आए।

सूमो स्क्वॉट को डंबल या फिर बार्बेल दोनों से कर सकते हैं। इसे करने के लिए आपको डंबल को चिन के नीचे या फिर नीचे की ओर पकड़ना होता है और फिर जितना हो सके नीचे तक आना है। ध्यान रहे कि इसमें इनर थाइज आपका मेन मसल्स रहेगा। 

वीडियो में देखें सूमो स्क्वॉट करने का सही तरीका : 



5. जंप स्क्वॉट
ये एक बॉडी वेट स्क्वॉट है, जिसे करने के लिए आपको अपने पैर कंधे की चौड़ाई से थोड़ी दूर रखने हैं। इसे करने के लिए स्क्वॉट की चेयर पोजिशन में आकर आपको ऊपर की ओर जंप करना है और वापस उसी स्थिति में आना है।

लेकिन ध्यान रखें कि आपको जंप अपने पंजों पर करना है न कि एड़ी पर। नीचे आते समय आप अपनी बॉडी को लूज रखेंगे तो बेहतर रिजल्ट मिल सकते हैं।

वीडियो में देखें जंप स्क्वॉट करने का सही तरीका : 





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स्वस्थ रहने के लिए हफ्ते में कितने घंटे का व्यायाम है जरूरी

 
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हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए व्यायाम ​बहुत आवश्यक है, यह जानते हुए भी ज्यादातर लोग वर्कआउट के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। व्यायाम न सिर्फ हमारे शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होता है, इसका कोई और विकल्प नहीं हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपने नए दिशानिर्देशों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शारीरिक गतिविधियों की न्यूनतम सीमा निर्धारित की है। इन व्यायामों के माध्यम से हृदय रोग और टाइप-2 मधुमेह जैसी क्रोनिक बीमारियों के साथ शारीरिक निष्क्रियता या अपर्याप्त गतिविधि के कारण होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है।

25 नवंबर 2020 को डब्ल्यूएचओ ने फिजिकल एक्टिविटी एंड सेडन्टेरी बिहेवियर को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें संस्था ने निम्नलिखित गतिविधियों और उनकी सीमा की सलाह दी है।

बच्चे और किशोर :  दिन में 60 मिनट

वयस्क (गर्भवती महिलाएं और क्रोनिक बीमारियों वाले लोग भी शमिल) :  एक्टिव रहें

सभी वयस्कों के लिए :  सप्ताह में 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता के व्यायाम या 75 से 150 मिनट के तीव्र स्तर के व्यायाम।

शारीरिक गतिविधि बनाम व्यायाम -
आमतौर पर लोग शारीरिक गतिविधि और व्यायाम में फर्क नहीं कर पाते हैं, जबकि दोनों ही अलग अलग संर्दभ को वर्णित करते हैं। आइए दोनों में अंतर को समझते हैं।

ऐसा कोई भी कार्य जिसमें मांसपेशियों का प्रयोग होने के साथ कैलोरी बर्न होती हैं, वह शारीरिक गतिविधि के रूप में जानी जाती हैं। यहां मांसपेशियों के प्रयोग से तात्पर्य उन मांसपेशियों से है, जिनपर हमारा नियंत्रण होता है। इस परिभाषा के अनुसार, जिन चीजों को शारीरिक गतिविधि के रूप माना जा सकता है वह हैं - घर के काम, भारी वस्तुओं को उठाना, खेलना, नाचना, सफाई करना, बागवानी, सीढ़ियों से चढ़ना और उतरना, साइकिल चलाना आदि।

इसके विपरीत, व्यायाम की परिभाषा सीमित है। इसमें आमतौर पर उन्हीं गतिविधियों को शामिल किया जाता है, जिन्हें विशेष रूप से शरीर के विशिष्ट अंगों को मजबूती देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार व्यायाम, शारीरिक गतिविधि की एक सबकैटेगरी है।

शारीरिक गतिविधियों के लाभ - 
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में हर चार में से एक वयस्क पर्याप्त रूप से शारीरिक गतिविधियां नहीं करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपर्याप्त शारीरिक गतिविधियों के कारण हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह और यहां तक कि कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डब्ल्यूएचओ का यह भी मानना है कि यदि लोग शारीरिक रूप से सक्रिय हो जाएं तो दुनियाभर में हर साल लगभग 50 लाख लोगों की मृत्यु को रोका जा सकता है।

ऐसा नहीं है कि इन फायदों के बारे में हम जानते नहीं हैं। हम सभी को अच्छी तरह से मालूम है कि गतिहीन जीवन और लंबे समय तक बैठे रहने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कुछ लोग घर और दफ्तर के कार्यों के साथ साप्ताहिक व्यायाम के लिए समय निकालते हैं।

हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने अपने नए दिशानिर्देश में गतिविधियों के स्तर और उनके विकल्पों के बारे में स्पष्ट किया है। दिशानिर्देश में निम्न बातों को लेकर भी सलाह दी गई है।
  • महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद भी शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना चाहिए।
  • दिव्यांगजनों को भी उन तरीकों से शारीरिक सक्रियता बनाई रखनी चाहिए जो उनके लिए उपयुक्त हों।
चूंकि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए उपयुक्त मात्रा में शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की आवश्यकता होती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को शारीरिक संतुलन, समन्वय और मांसपेशियों की शक्ति में सुधार करने वाली गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने से बुजुर्गों के गिरने के जोखिम को कम करने के साथ उनके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।

व्यायामों की तीव्रता ​का निर्धारण - 
डब्ल्यूएचओ ने सभी वयस्कों के लिए एक सप्ताह में 150-300 मिनट की मध्यम स्तरीय शारीरिक गतिविधि या सप्ताह में 75-150 मिनट की तीव्र स्तरीय गतिविधि की सलाह दी है। उदाहरण के तौर पर वॉकिंग जैसी सरल गतिविधियों को देखते हैं। दैनिक रूप से वॉकिंग करने मात्र से आप कई प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह मध्यम और तीव्र दोनों प्रकार का हो सकता है। यदि आप मध्यम स्तर से वॉक करते हैं तो यह मानसिक स्तर से सुकून देता है वहीं चलने की गति को बढ़ा देने से हृदय की गति बढ़ जाती है।

इसी तरह से योग में भी कई मध्यम और तीव्र स्तर की गतिविधियां हैं। उदाहरण के लिए मयूरासन (मयूर मुद्रा) के लिए शरीर में बहुत अधिक ताकत और स्थिरता की आवश्यकता होती है। वहीं कुछ ऐसे भी व्यायाम हैं, जिन्हें आप बहुत आसानी से करके अपनी मध्यम स्तरीय गतिविधियों की सीमा को प्राप्त कर सकते हैं।

घर पर सामान्य रूप से किए जाने वाले कार्य भी मध्यम और तीव्र स्तरीय गतिविधियों वाले हो सकते हैं। उदाहरण के लिए पौधों को पानी देना जहां मध्यम स्तरीय गतिविधि है वहीं फर्श पर पोछा लगाने को तीव्र स्तरीय गतिविधि माना जाता है। अक्सर हम यह नहीं समझ पाते हैं कि जो कार्य कर रहे हैं वह मध्यम स्तरीय है या फिर तीव्र स्तरीय। इसे अमेरिका स्थिति रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने स्पष्ट किया है। आइए समझते हैं।

मध्यम तीव्रता वाली गतिविधियां : जिन गतिविधियों के दौरान आप बात तो कर सकते हैं लेकिन गाना नहीं गा सकते हैं, ऐसी गतिविधियों को मध्यम तीव्रता वाली गतिविधियां माना जाता है। उदाहरणों में ब्रिस्क वॉकिंग (5-6 किमी प्रति घंटा), वाटर एरोबिक्स और 16 किमी प्रति
घंटा या उससे कम पर साइकिलिंग करना आदि।

तीव्रता वाली गतिविधियां : जिन गतिविधियों के दौरान कुछ शब्द बोलने के बाद सांस लेने या ब्रेक लेने की आवश्यकता होती है, उसे तीव्रता वाली गतिविधियों की श्रेणी में रखा जाता है। उदाहरण के लिए जॉगिंग, रनिंग, एरोबिक डांसिंग, स्किपिंग रोप आदि।

इन उदाहरणों के माध्यम से आप अपनी क्षमता को समझते हुए देखें कि आप अपनी साप्ताहिक गतिविधि/ व्यायाम के समय को कैसे बढ़ा सकते हैं।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक गतिविधि : निष्कर्ष
आप बेहतर फिटनेस कैसे हासिल कर सकते हैं, इस पर बहुत शोध किए जा चुके हैं। उदाहरण के लिए सितंबर 2020 में सर्कुलेशन जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि कम तीव्रता वाले व्यायाम से भी मेटाबॉलिज्म संबंधी लॉन्ग लास्टिंग लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। व्यायाम, इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़े मेटाबोलाइट्स के स्तर को कम करने के साथ लिपोलाइसिस (ट्राइग्लिसराइड्स का ब्रेक डाउन) से जुड़े मेटाबोलाइट्स के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

नियमित रूप से व्यायाम करने से बढ़ती उम्र की रफ्तार को कम करने और मोटापा, हृदय रोग व टाइप-2 मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है। डब्ल्यूएचओ ने अपने नए दिशानिर्देश में उन लोगों पर भी ध्यान केंद्रित किया है जो किसी भी कारण से नियमित रूप से व्यायाम नहीं कर पा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस एडहैनम घेब्रेयसस ने नए दिशानिर्देशों के लॉन्च के दौरान एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "शारीरिक रूप से स्वस्थ और सक्रिय रहना सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह आपके जीवन को लंबा करने में भी मददगार है। हमारा हर कदम मायने रखता है, हमें हर दिन सुरक्षित और रचनात्मक रूप से आगे बढ़ना चाहिए और शरीर को स्वस्थ रखने के प्रयास करते रहना चाहिए।''


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सुडौल नितंब पाने के उपाय

 
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हर लड़की एक बेहतर फिगर चाहती है और सुडौल नितंब इसमें खास भूमिका निभाते हैं, लेकिन कई महिलाएं अपने नितंब के आकार को लेकर परेशान रहती हैं। वो सुडौल नितंब पाने के लिए कई तरह के उपाय भी करती हैं, जिनमें से कुछ कारगर साबित होते हैं, तो कुछ नहीं होते। इसमें कोई दो राय नहीं कि नियमित व्यायाम, सही खानपान और सही जीवनशैली से आप सुडौल नितंब पा सकती हैं।

इसके लिए आपको नितंब की मांसपेशियों और हिप फैट पर सही तरीके से काम करना होगा। आपको बता दें कि नितंब मांसपेशियां तीन तरह की होती हैं – ग्लूटस मैक्सिमस, ग्लूटस मीडियस और ग्लूटस मिनीमस। आप इन मांसपेशियों पर जितना काम करेंगी, सुडौल नितंब पाने में आपको उतनी ही मदद मिलेगी। सुडौल नितंब पाने के लिए व्यायाम आपकी काफी मदद कर सकते हैं। नीचे हम इन्हीं व्यायाम के बारे में बता रहे हैं :

सुडौल नितंब पाने के उपाय – 
1. व्यायाम
तीनों मांसपेशियों के लिए किए गए व्यायाम से नितंब को सही आकार देने में मदद मिलेगी।

ग्लूट ब्रिज
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यह नितंब की मांसपेशियों के वार्म-अप के लिए बेहतरीन व्यायाम है। हालांकि, शुरुआत में इसे करना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरे ही दिन में आप इस व्यायाम को आराम से कर सकेंगी।

कैसे करें?
  • इस व्यायाम को करने के लिए पीठ के बल लेटें और घुटनों को मोड़ लें।
  • अब एड़ियों को भी कूल्हों के पास ले आएं।
  • हाथों को सीधा रखें और हथेलियां जमीन को छू रही हों।
  • अब कूल्हों और कमर को अपने कंधों से घुटनों तक ऊपर एक सीध में उठाएं।
  • इस दौरान अपने पैर और हथेलियों को जमीन पर टिका कर रखें।
  • इस स्थिति में दस सेकंड तक रुकें और फिर आराम से सामान्य अवस्था में लौट आएं।
  • इस प्रक्रिया को दस बार दोहराएं।
सिंगल लेग ब्रिज 


यह भी एक वॉर्म-अप व्यायाम है, जिससे कूल्हों की मांसपेशियों को टोन करने में मदद मिलती है। अगर आपका काम दिन भर बैठे रहने का है, तो यह व्यायाम आपके लिए बेस्ट है।
कैसे करें?
  • योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और एक घुटने को मोड़ लें। इस दौरान अपने तलवों को जमीन के साथ सटाकर रखें।
  • अब दूसरे पैर को जमीन पर सीधा रखें और सांस छोड़ते हुए पैर व शरीर को ऊपर उठाएं।
  • इस दौरान पूरे शरीर का वजन दूसरे पैर पर रहेगा। इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस लेते रहें।
  • इस पॉजिशन में तीन सेकंड तक बने रहें और फिर धीरे-धीरे पुरानी अवस्था में लौट आएं।
नीलिंग किकबैक
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नीलिंग किकबैक व्यायाम कूल्हे की सबसे बड़ी मांसपेशी ग्लूटस मैक्सीमस पर काम करती है।

कैसे करें?
  • घुटनों के बल जमीन पर आ जाएं और हथेलियों को भी जमीन पर रख दें।
  • अपने शरीर के वजन को घुटनों और हथेली पर रखें।
  • अब दाएं पैर को छाती की ओर लाएं और जितना तेज हो सके किक की तरह पीछे ले जाएं।
  • यही प्रक्रिया अपने बाएं पैरे से भी दोहराएं।
  • आप इसे 10 बार कर सकते हैं।
लंज
नितंबों को सुडौल बनाने के लिए यह बेस्ट व्यायाम माना गया है। अगर आप इस व्यायाम को हाथ में कोई वजन लेकर करते हैं, तो ज्यादा फायदा होगा।

क्या करें?
  • दोनों पैरों के बीच तीन सेंटीमीटर की दूरी बनाते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब दाएं पैर को आगे ले जाते हुए घुटने से मोड़ें।
  • फिर दाएं पैर को वापस पीछे लाएं और बाएं पैर को आगे ले जाते हुए ऐसा ही करें।
  • इस व्यायाम के आप एक साथ 10 सेट कर सकती हैं।
  • साइड लंज
  • इस व्यायाम से आपके नितंब और जांघों की मांसपेशियों को टोन होने में मदद मिलती है।
साइड लंज
इस व्यायाम से आपके नितंब और जांघों की मांसपेशियों को टोन होने में मदद मिलती है।
कैसे करें?
  • सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी बना लें।
  • अब अपने बाएं पैर को सीधा रखते हुए दाएं तरफ जाते हुए पैर पर बैठें। फिर दाएं पैर को सीधा रखते हुए बाएं पैर की तरफ बैठें।
  • बैठते हुए आपका भार तलवे पर पड़ना चाहिए और कमर को सीधा रखने का प्रयास करें।
  • आप इस व्यायाम के 10 सेट करें।
सिजर किक
यह व्यायाम कूल्हों की मांसपेशियों के साथ-साथ पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों को भी टोन करने में मदद करता है।

कैसे करें?
  • योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। हाथों को सीधे रखते हुए शरीर से सटाकर रखें और हथेलियों की दिशा जमीन की ओर रहे।
  • अब अपने दाएं पैर को 45 डिग्री तक ऊपर उठाएं और बाएं पैर को जमीन से 3-4 इंच तक ऊपर उठाएं।
  • अब एक पैर को नीचे लाएं और दूसरे को ऊपर ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 15 बार दोहराएं।
लेग लिफ्ट

यह भी सुडौल नितंब और पेट की मांसपेशियों को टोन करने के लिए बेहतरीन व्यायाम है।

कैसे करें?
  • योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को सीधा हवा में रखें।
  • अपने हाथों को जमीन पर सटाकर रखें और पैरों को ऊपर की ओर उठाएं।
  • इस अवस्था में पांच सेकंड तक रहें।
  • इस प्रक्रिया को 10 से 15 बार दोहराएं।
बारबेल स्क्वाट
कैसे करें?
  • अपने कंधे पर बारबेल रखें।
  • स्कैटिंग की अवस्था में आएं और अपनी जांघों को जमीन के समानांतर रखें।
  • इस दौरान अपने कूल्हों को नीचे, कंधों को पीछे की ओर और सीने को बाहर की ओर रखने की कोशिश करें।
  • इस तरह ऊपर-नीचे होते हुए 15 से 20 मिनट के लिए धीरे-धीरे इस व्यायाम को करें।
प्ले स्क्वाट
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कैसे करें?
  • सीधे खड़े होकर अपने हाथों को आगे लाकर संतुलन बनाने की कोशिश करें।
  • अब नीचे झुकते हुए कूल्हों को एड़ी तक लेकर जाएं।
  • फिर इसी अवस्था में ऊपर आएं।
  • इस अवस्था को आप 10-15 बार दोहरा सकते हैं।
डेडलिफ्ट
कैसे करें?
  • पैरों के बीच कुछ दूरी बनाते हुए आगे की ओर झुकें और रॉड को पकड़ें।
  • अब रॉड को उठाते हुए सीधा खड़े हो जाएं।
  • फिर वापस आगे की ओर झुकते हुए रॉड को नीचे रखने का प्रयास करें और फिर सीधा खड़े हो जाएं।
  • यह एक्सरसाइज कूल्हों की मांसपेशियों को टोन करने में मदद करती है।
स्टेप एरोबिक्स
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सुडौल नितम्ब पाने के उपाय में यह बेहद आसान व्यायाम है। इसमें आपको बस पैर ऊपर-नीचे करते हुए अपने पसंदीदा गाने पर डांस करना करना है। इस दौरान, आप अपनी गति को कम या ज्यादा कर सकते हैं। कूल्हों की मांसपेशियां टोन करने के लिए आप 15-20 मिनट तक यह व्यायाम करें।

रनिंग
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रनिंग करना आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। ध्यान रखें कि इसे ज्यादा न करें। आप बीच-बीच में थोड़ी देर विश्राम करते हुए रनिंग कर सकते हैं।

साइकलिंग
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साइकलिंग में पैडल मारने से आपकी जांघों, पिंडली और कूल्हों की मांसपेशियां टोन होंगी। साइकलिंग एक बेहतर आउटडोर व्यायाम है, जिसे आप अपने दोस्तों, पार्टनर या अकेले भी एंजॉय कर सकते हैं।

सीढ़ियां चढ़ना
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यह व्यायाम आपकी जांघों, कूल्हों, एब्स और दिल की मांसपेशियों के लिए बेहतरीन है। अगर आप किसी तरह की चिकित्सीय समस्या से पीड़ित हैं, तो इसे न करें।

योग
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योग भी कूल्हों की मांसपेशियों को टोन रखने का बेहतरीन उपाय है। इसके लिए आप एक योग प्रशिक्षक की निगरानी में रहकर सप्ताह में तीन से चार दिन योग करें।

2. अच्छा खानपान
सुडौल नितंब पाने के लिए व्यायाम के साथ अच्छा खानपान भी जरूरी है। अपने खानपान में जरूरी बदलाव करके आप सुडौल नितंब की चाहत पूरी कर सकती हैं। आपको अपनी डाइट में अधिक प्रोटीन शामिल करना होगा, जिससे नितंब की मांसपेशियों पर फैट आ सके। सही खानपान का चयन करने से आपके हार्मोन ठीक से काम करेंगे। यही नहीं, सही डाइट लेने से व्यायाम का भी आप पर अच्छा असर दिखेगा। सही खानपान के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप सही समय पर खाना खाएं।

प्रोटीन
आप कई तरह से अपनी डाइट में प्रोटीन शामिल कर सकती हैं। दूध, अंडे, कम फैट वाला योगर्ट, मछली, फलियां, मीट, सोया प्रोटीन व छाछ प्रोटीन के बेहतर स्रोत हैं।

फैट
ग्लूटल मसल्स फैट की परत से कवर रहती हैं। सुडौल नितंब पाने के लिए जरूरी है कि आप अनसैचुरेटेड फैट (अच्छा फैट) खाएं। फिश ऑयल, राइस ब्रॉन आयल, एवोकाडो, नट्स, कैनोला ऑयल, सूरजमुखी का तेल, ओलिव ऑयल, पीनट बटर व ऑयली फिश अनसैचुरेटेड फैट के प्रमुख स्रोत हैं।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स
विटामिन और खनिज को ही माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कहा जाता है। यह आपके शरीर के लिए जरूरी है। फल, सब्जियां, नट्स और दालें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का बेहतर स्रोत हैं। चूंकि, आप अपने नितंबों को शेप में लाने के काफी मेहनत कर रही हैं, तो ऐसे में आप भरपूर मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन करें, ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे।

कार्बोहाइड्रेट
पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट लेना बंद करना भी ठीक नहीं है। इसकी कुछ मात्रा को अपने भोजन में जरूर शामिल करें, लेकिन कितना लेना है, यह आपके वर्कआउट पर निर्भर करता है । शकरकंद, भूरे चावल, कॉर्न, सेब, आलू, अंगूर और गेहूं की ब्रेड कार्बोहाइड्रेट के बेहतरीन स्रोत हैं।

3. जीवनशैली में बदलाव
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जल्दी उठें, जल्दी सोएं
आप जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डालें। इसके लिए आप मधुर संगीत सुनें, जिससे आपको अच्छी नींद आए। वहीं, सुबह जल्दी उठने की आदत डालें, ताकि आपके पास व्यायाम करने के लिए पर्याप्त समय रहे और समय पर नाश्ता कर सकें।

कम से कम सात घंटे की नींद लें
व्यायाम करने से वास्तव में आपकी मांसपेशियों में खिंचाव आता है। ऐसे में अच्छी नींद लेने से आपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है। आप कोशिश करें कि कम से कम सात घंटे की नींद जरूर लें। इसके आपके मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिये रहेंगी और आप एक्टिव रहेंगी।

कपड़ों पर ध्यान दें
ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे नितंब उभरे हुए नजर आएं। आप हाई वेस्ट जींस, शॉर्ट्स, फॉर्मल पेंट, लो-राइज पेंट/जींस जो टखनों की तरफ से पतली हो, बैलून स्कर्ट या ड्रेस, डेनिम शॉर्ट स्कर्ट, कोर्सेट, सिल्क के गाउन व पेपलम टॉप आदि पहन सकती हैं।

भरपूर मात्रा में पानी पिएं
भरपूर मात्रा में पानी पीने से कई समस्याएं कम की जा सकती हैं। व्यायाम के साथ-साथ भरपूर मात्रा में पानी पीने से आपके शरीर के सारे टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। शरीर में टॉक्सिन रहने के कारण आप जल्दी थक जाते हैं और व्यायाम करने में आपको कठिनाई हो सकती है। इसलिए, दिन में तीन से चार लीटर पानी जरूर पिएं।

नितंब जल्दी बड़े करने के टिप्स
व्यायाम और सही खानपान की मदद से नितंब बड़े करने में समय लग सकता है। इसलिए, नीचे हम नितंब जल्दी बड़े करने के कुछ टिप्स दे रहे हैं :

अपनी चाल पर ध्यान दें
आप अपनी चलने के तरीके को सुधारें। आपकी चाल आपके लुक को काफी प्रभावित करती है। ऐसे में आप कैटवॉक पर ध्यान दें। इसके लिए आपको बस अपने कंधों को पीछे की ओर करना है और अपनी पीठ के निचले हिस्से को थोड़ा-सा मोड़ना है। यह पॉजिशन आपके नितंब को सुडौल दिखाने में मदद करेगी।

बट एन्हांसिंग पैड का इस्तेमाल करें
बट एन्हांसिंग पैड का इस्तेमाल करने से भी आप अपने नितंबों को बड़ा दिखा सकती हैं। यह आपको बाजार में आसानी से मिल जाएंगे। यह खासतौर पर जींस और पेंट में आपके हिप्स को सुडौल दिखाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

कमर को पतला दिखाएं
आपकी कमर पतली होने से आपके बट और सुडौल लगेंगे। इसके लिए आप टमी टकर पहन सकती हैं। अगर आप टमी टकर नहीं पहन सकतीं, तो आप शर्ट के ऊपर बेल्ट भी पहन सकती हैं। आप इस बेल्ट को अपनी कमर के सबसे पतले भाग पर पहनें। इसके लिए आप डार्क कलर की चौड़ी बेल्ट या मध्यम चौड़ी बेल्ट का इस्तेमाल करें।

इसके अलावा, आप कमरबंद का इस्तेमाल करके भी नितंब को सुडौल दिखा सकती हैं। हालांकि, आप आड़ी पट्टियों वाले कमरबंद का इस्तेमाल न करें।

इसके अलावा, नितंब सुडौल करने के लिए सर्जरी का सहारा भी लिया जाता है , लेकिन व्यायाम और सही खानपान से आप बिना किसी नुकसान और बिना ज्यादा पैसा लगाए बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

हम उम्मीद करते ऊपर दिए गए टिप्स आपको सुडौल नितंब पाने में मदद करेंगे। आइए, अब इससे संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवालों पर नजर डाल लेते हैं।

सुडौल नितंब पाने में मुझे कितना समय लेगा?
यह आपके वजन, वर्कआउट, खाने की आदत और आपकी जीवनशैली पर निर्भर करता है। अगर आप इन बातों का खास ख्याल रखेंगे, तो तीसरे सप्ताह के अंत तक ही आपको असर दिखाई देने लग जाएगा।

मेरे नितंब बड़े क्यों नहीं हो रहे?
थोड़ा धैर्य रखें। बड़े नितंब पाने के लिए आपको अपने वजन, मेडिकल हिस्ट्री, वर्कआउट रूटीन और खाने-पीने की आदतों पर ध्यान देना होगा। आप प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को जानने के लिए कैलोरी काउंटिंग एप का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके अलावा, आप अपनी डायटीशियन से डाइट चार्ट भी बनवा सकती हैं। नितंबों का आकार कुछ हद तक आपके जीन्स पर भी निर्भर करता है।

मैं राउंड बट कैसे पा सकती हूं?
राउंड बट पाने के लिए आप ऊपर बताए गए व्यायाम, सही डाइट और सही जीवनशैली को अपनाएं। इसके अलावा, आप बेहतर परिणाम के लिए प्रशिक्षक और डायटीशियन से परामर्श लेती रहें।

क्या मैं बिना वर्कआउट के सुडौल नितंब पा सकती हूं?
बिना वर्कआउट के सुडौल नितंब पाना कठिन है। आपको बेहतर परिणाम के लिए वर्कआउट करना चाहिए। अगर आप अकेले वर्कआउट नहीं कर पाती हैं, तो अपनी दोस्त या किसी परिवार के सदस्य के साथ मिलकर वर्कआउट कर सकती हैं। इसके अलावा, सही खानपान, सही जीवनशैली का पालन करना भी जरूरी है।

ये थे आसानी से सुडौल नितंब पाने के उपाय, जिन्हें अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। अगर आप भी सुडौल नितंब की चाहत रखती हैं, तो ऊपर बताए गए तरीकों को जरूर आजमाएं। इसके बाद, अपने अनुभव नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें।



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