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blogger website ki language markup issue kaise fix kare

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मित्रो आज के इस आर्टिकल में हम आप लोगो को ब्लॉगर वेबसाइट की भाषा मार्कअप समस्या कैसे फिक्स करने के बारे में जानकारी देने जा रहे है।  यदि आपको ब्लॉगर ब्लॉग में भाषा मार्कअप समस्या फिक्स करना नहीं आता है तो आप इसके लिए यह पूरा आर्टिकल पढ़ते रहे। जिससे आपको ब्लॉगर ब्लॉग में भाषा मार्कअप समस्या को फिक्स करने में आसानी हो सके। 

HTML और XML में भाषा टैग क्या है :

मित्रो इस आर्टिकल में हम जानेगे  कि HTML मार्कअप में भाषा (मार्कअप समस्या) निर्दिष्ट समस्या को कैसे ठीक किया जाए। XML और HTML दस्तावेज़ों में टेक्स्ट या अन्य ऑब्जेक्ट की भाषा को संदर्भित करने के लिए भाषा टैग का उपयोग किया जाता है। xml: लैंग विशेषता का उपयोग XML में भाषा टैग को संदर्भित करने के लिए किया जाता है और लैंग विशेषता का उपयोग HTML भाषा टैग को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। अधिकांश भाषा टैग में दो या तीन अक्षरों वाला भाषा उप टैग होता है। अक्सर इसके बाद दो-अक्षर या तीन-अंकीय क्षेत्र उप-टैग होता है।

भाषा मार्कअप समस्या का पता कैसे लगाएं:

मित्रो यदि आप भाषा मार्कअप समस्या के बारे में जानना चाहते है तो आपको इसके लिए आपको SEO चेकर के साथ अपनी वेबसाइट का परीक्षण करने के लिए जाएं, और अपनी वेबसाइट का नाम दें और "वेबसाइट का विश्लेषण करें" बटन पर क्लिक करें। 

स्टेप संख्या -01
  • इसके लिए आप सबसे पहले Seobility Free SEO Checker पर विजिट करे। 
  • इसके बाद URL में अपने वेबसाइट का लिंक सबमिट करे। 
  • इसके बाद अब आप Analyze website पर क्लिक करे। 
bhaasha-maarkap-samasya-ka-pata-kaise-lagaen

स्टेप संख्या -02
इसके बाद आप करके नीचे जाये आपको समस्या दिखाई देगी जैसा कि नीचे दी गई छवियों में दिखाया गया है कि भाषा HTML मार्कअप में निर्दिष्ट नहीं है।
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भाषा मार्कअप समस्या को कैसे ठीक करें:

मित्रो यदि आप भाषा मार्कअप समस्या  को ठीक करना चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा। जिससे आपके ब्लॉगर में भाषा मार्कअप की समस्या ठीक हो सके। 

स्टेप संख्या -01
  • सबसे पहले आप ब्लागर डेशबोर्ड में लागिंन करे। 
  • अब आप Theme पर क्लिक करे। 
  • अब आप Customize पर क्लिक करे। 
  • अब आप EDIT HTML  पर क्लिक करे इसके बाद एक नया पप अप विंडो ओपन होगा ।
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स्टेप संख्या -02
सबसे पहले आप नीचे दिये गये Blogger उस स्थान में, नीचे दी गई रेखा को नीचे की छवि में दिखाए अनुसार जोड़ें।

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परिवर्तनों के बाद, विषय को सहेजें और ऊपर दिए गए लिंक Seobility Free SEO Checker  पर वापस जाएं और समस्या की जांच करे। 

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अब भाषा मार्कअप समस्या ठीक हो गई है, इस प्रकार हमने देखा है कि आपके ब्लॉगर वेब पेज के भाषा मार्कअप (भाषा टैग) मुद्दे को कैसे ढूंढें और ठीक करें। 

मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने ब्लॉगर वेबसाइट की भाषा मार्कअप समस्या कैसे फिक्स करे को अच्छे  तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप  ब्लॉगर वेबसाइट की भाषा मार्कअप समस्या कैसे फिक्स करे  के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 

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blog post me pdf ya other file kaise embed kare

 
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मित्रो आज हम आप लोगो को ब्लॉगर ब्लॉग पोस्ट में  पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल कैसे एम्बेड करे। मित्रो ब्लॉगर के पोस्ट में  के पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल करने का कोई ऑप्शन नहीं होता। यानी कि आप अपने ब्लॉगर के पोस्ट ,में सीधे तौर पर पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल को नहीं एम्बेड कर सकते है। क्योकि ब्लॉगर में इसका कोई फंग्शन ही नहीं होता है।  जबकि आप वर्डप्रेस ब्लॉग पर आसानी के साथ आसानी के  पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल  वर्डप्रेस ब्लॉग में एड  है। यदि आप ब्लॉगर पोस्ट में पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल एम्बेड करना नहीं जानते है तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं। आज हम आप लोगो को इस आर्टिकल के माध्यम से ब्लॉगर पोस्ट में पीडीएफ ,नोटपैड या अन्य फाइल एम्बेड  करने के बारे में जानकारी उपलब्ध  है। 

गूगल ड्राइवर में पीडीऍफ़ या अन्य फाइल कैसे अपलोड करे 

आप सभी जानते है  कि ब्लॉगर ब्लॉग में हम पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल अपलोड नहीं कर सकते, परन्तु  हम अपने पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल को कही और अपलोड  करके उसे अपने ब्लॉग पर इस्तेमाल करे तो ऐसा हो सकता है। इसका मतलब यह है कि आपको जो पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल अपने ब्लॉग पोस्ट में एड करना उसे सबसे पहले GOOGLE DRIVE में अपलोड करे और फिर उस पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल को अपने ब्लॉग में एम्बेड करे। यदि आप पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल गूगल ड्राइवर पर एम्बेड करना नहीं जानते है तो आप इस आर्टिकल में दिए गए स्टेप को फॉलो करे जिससे आपको ब्लॉगर पोस्ट में पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल एम्बेड करने में आसानी हो सके ।

स्टेप संख्या -01
  • इसके लिए आप  सबसे पहले Google Drive में जाकर लॉगिन  करें।
  • इसके बाद अब आप  My Drive   पर क्लिक करे। 
  • इसके बाद अब आप Upload Files    पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -02
  • इसके बाद अब आप  अपने फाइल को सलेक्ट  करे। 
  • इसके बाद अब आप  Open  पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -03
  • इसके बाद अब आप Upload Files   पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -04
  • इसके बाद अब आप कार्नर पर बने तीन डॉट पर क्लिक करे। 
  • इसके बाद अब आप  Share   बटन पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -05
  • इसके बाद अब आप Get Link  में  Change to anyone with link पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -06
  • इसके बाद अब आप DONE पर क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -07
  • अब आप PDF file ओपन होने के बाद top right corner में जो 3 dot पर क्लिक करें।
  • इसके बाद अब आप  Open in new window पर क्लिक करें।
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स्टेप संख्या -08
  • अब आप  top right corner में जो 3 dot पर क्लिक करें।
  • इसके बाद अब आप  Embed item  पर क्लिक करें।
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स्टेप संख्या -09
  • आप जैसे ही  Embed item पर क्लिक करते ही आपको एक HTML CODE कोड मिलेगा जिसे आप कॉपी कर सुरक्षित नोट पेड में सेव कर ले क्योकि इसे आपको ब्लॉगर में एड करना  है । 
  • इसके बाद OK बटन पर क्लिक कर दे। 
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ब्लॉगर ब्लॉग पोस्ट में पीडीऍफ़ याअन्य फाइल कैसे एम्बेड करे

स्टेप संख्या -01
  • इसके लिए आप सबसे पहले ब्लॉगर ब्लॉग में लॉगिन करे। 
  • इसके बाद अब आपको अपने जिस पोस्ट में पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल को एड  करना है उस पोस्ट में जाए और HTML view पर क्लिक करें।
  • इसके बाद अब आपको अपने ब्लॉग पोस्ट में जहां पर भी पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल को एड करना है वहां पर कोड को पेस्ट करे और अपने ब्लॉग पोस्ट को Publish/Update क्लिक करें।
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स्टेप संख्या -02
पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल ब्लॉग पोस्ट में एड  करने के बाद अब आप नीचे दिए गए DEMO पीडीऍफ़ या अन्य  फाइल  की तरह आपका PDF फाइल ब्लॉग पोस्ट में नजर आएगा। जो की स्क्रॉल  होगा और कोई भी विजिटर  आपके PDF file को पढ़ सकते है, PDF file पूरी तरह responsive होगी।



मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने ब्लॉग पोस्ट में पीडीऍफ़ या अन्य फाइल कैसे एम्बेड  करना  अच्छी तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप ब्लॉग पोस्ट में पीडीऍफ़ या अन्य फाइल कैसे एम्बेड करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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blog ke liye Android App kaise banaye

blog-ke-liye-Android-App-kaise-banaye

मित्रो आपको तो पता ही है की Android Mobile आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। Play Store पर बहुत से लोग Android App बनाकर Upload करते है और इससे लाखो रुपये कमाते है। लेकिन क्या आपको पता है की आप भी अपना Android App बना सकते है। अगर आपको नहीं पता है तो आज मै आपको Free में खुद की Android App कैसे बनाये? इसके बारे में जानकारी देने वाले है। मित्रो इंटरनेट पर बहुत सी ऐसी वेबसाइट और टूल्स है जो आपको Android App बनाकर देती है। और आज के इस पोस्ट में मै आपको वेबसाइट  से Android App कैसे बनाते है ये बताएँगे । आज हर कोई अपने ब्लॉग या वेबसाइट Bussiness और Earning करने के लिए Android App बनाना चाहता है। मित्रो वैसे तो एंड्राइड एप्स बनाने के लिए आपको कुछ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (भाषा) की जरुरत होती है जैसे की जावा (java) अगर आपको android app बनाने के लिए जावा भाषा का ज्ञान है तो आप बहुत  ही आसानी से एंड्राइड एप्स बना सकते है । लेकिन अगर ऐसे में आपको कोई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नहीं आता है या फिर आपको इसके बारे में कुछ जानकारी नहीं है तो ऐसे में आप अपने वेबसाइट ,ब्लॉग के लिए एंड्राइड एप्स कैसे बना सकते है । मित्रो आज के इस पोस्ट में  मै आपको बताऊंगा की कैसे आप बिना प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के और बिना किसी टेकनिकल स्किल्स के , अपने वेबसाइट के लिए या फिर अपने ब्लॉग के लिए फ्री में android app बना सकते है

एंड्राइड एप कैसे बनाये ?

एंड्राइड एप बनाने के लिए सबसे पहले आपके पास एक कंप्यूटर या फ्री लैपटॉप होना चाहिए और आपके कंप्यूटर में इन्टरनेट कनेक्शन होना चाहिए क्यों की इस पोस्ट में हम आपको ऑनलाइन Android App बनाना सिखायेंगे जिसमे आपको कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जरुरत नहीं है ना ही कोई टेकनिकल स्किल्स की.। मित्रो यदि आप ब्लॉग के लिए एंड्राइड एप्प बनाना  चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा । जिससे आपको ब्लॉग के लिए एंड्राइड एप्प  बनाने  में आसानी हो सके ।

स्टेप संख्या -01
इसके लिए आप सबसे पहले अपने कंप्यूटर के ब्राउज़र में एप्सगीजर डॉटकॉम वेबसाइट को ओपन करे ये वेबसाइट बहोत पोपुलर है और फ्री है और फिर Create Now पे क्लिक करे।
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स्टेप संख्या -02
अब आप Create App To Grow को सलेक्ट करके क्लिक करे। 
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स्टेप संख्या -03
इसके बाद अब आप स्क्रॉल करके थोड़ा नीचे जाये और  Individual में Website को सलेक्ट करके क्लिक करे।  
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स्टेप संख्या -04
  • इसके बाद अब आप Website URL में अपने वेबसाइट का URL सबमिट करे 
  • इसके बाद अब आप   SAVE  बटन पर क्लिक करके SAVE करे   ।
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स्टेप संख्या -05
  • इसके बाद अब आप Select Blog  में आपका ब्लॉग या वेबसाइट जिस पर बना है वह सलेक्ट करे ।
  • इसके बाद अब आप Purple पर  क्लिक करके सलेक्ट कर ले  ।
  • इसके बाद अब आप NEXT बटन पर क्लिक करे ।

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स्टेप संख्या -06
  • इसके बाद अब आप App Name  में आपका ब्लॉग या वेबसाइट का नाम सबमिट  करे ।
  • इसके बाद अब आप Next बटन पर क्लिक करे ।
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स्टेप संख्या -07
  • इसके बाद अब आप Icon  में Custom Icon सलेक्ट करे 
  • इसके बाद अब आप  Upload में अपने ब्लॉग या वेबसाइट का आइकॉन इमेज 512 x 512 सलेक्ट करके अपलोड इसके बाद अब आप Next बटन पर क्लिक करे ।

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स्टेप संख्या -08
इसके बाद अब Create पर क्लिक करे ।
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स्टेप संख्या -09
  • इसमें आप आप अपना ईमेल और पासवर्ड सबमिट करके SIGN UP करे  
  • या Continue With Google पर क्लिक कर अपने ईमेल से SIGN UP करे 









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स्टेप संख्या -10
इसमें आप आप DOWNLOAD APP  क्लिक  करे  
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स्टेप संख्या -11
इसमें आप आप SEND APP TO EMAIL पर  क्लिक  करे  
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स्टेप संख्या -12
इसके बाद अब आप अपने ईमेल को लॉगिन पासवर्ड सबमिट करके ओपन करे ,आपके ईमेल पर एक नोटिफिकेशन गया होगा।  आप उस नोटिफिकेशन पर क्लिक करे। इसके बाद एक नया पेज ओपन होगा और कुछ देर बाद आपका  Android App का फाइल डाउनलोड हो जायेगा  । 
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इतना करते ही आपके कम्प्यूटर  में आपके ब्लॉग का एप  डाउनलोड हो जायेगा। अब आपको अपने एप  को सभी के साथ शेयर करना होगा। वैसे तो प्लेस्टोर playstore में अपना अकाउंट account बना कर भी अपने ऍप को वितरित  कर सकते हो, लेकिन आपको  प्लेस्टोर  Playstore में अकाउंट account बनाने के 25 dollar लगेंगे। परन्तु यदि आप चाहे तो इसे  google drive के जरिये भी अपने app को सभी के साथ शेयर कर सकते है  । यदि आप गूगल ड्राइवर के माध्यम से  ब्लॉग पोस्ट में पीडीऍफ़ या अन्य फाइल  एम्बेड करना नहीं जानते है तो आप क्लिक कर जान सकते है। 

मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने ब्लॉग के लिए एंड्राइड एप्प बनाना करना  अच्छी तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप ब्लॉग के लिए एंड्राइड एप्प बनाने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 



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Blogger ko Google Search Console me kase Verify kare

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मित्रो जैसा कि हम सभी जानते है कि  यदि इंटरनेट  पर कुछ भी खोजना है तो, गूगल सर्च इंजन  पर जा कर टाइप कर  और उसका रिजल्ट तुरंत प्रदर्शित  है  । ठीक इसी प्रकार जब हम कोई ब्लॉग या वेबसाइट बनातें हैं, तो हमारी पूरी कोशिश होती है कि हमारी साइट भी गूगल सर्च कंसोल में  दिखे। इसके लिए हमें सबसे पहले गूगल  को, यह बताना पड़ता है कि हमारी भी कोई ब्लॉग  वेबसाइट है। और उस  वेबसाइट  के मालिक हम ही हैं कोई दूसरा नहीं। गूगल को जहाँ पर जा कर यह बतानां है उसे गूगल सर्च कंसोल  कहतें हैं।  मित्रो हमने आप लोगो को पिछले पोस्ट में यह जानकारी उपलब्ध कराया था कि ब्लॉगर ब्लॉग के यूआरएल व साइटमैप को गूगल सर्च कंसोल में कैसे सबमिट करे । और हम आज की पोस्ट में आपलोगो को ब्लॉगर ब्लॉग को गूगल सर्च कंसोल में वेरीफाई करने के बारे में जानकारी देने जा रहे है । हाँ यदि आपने अपने ब्लॉगर ब्लॉग को  सर्च कंसोल में अभी तक वेरीफाई नहीं किया है तो यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी  सकता है ।

गूगल सर्च कंसोल क्या है ?

गूगल सच कंसोल को हम गूगल वेब मास्टर टूल  के नाम से भी जाना जाता है। यह गूगल कम्पनी  के द्वारा उपलब्ध फ्री  सेवा है, जिसके माध्यम से हम अपनी वेबसाइट  या ब्लॉग  की उपस्थिति, गूगल  के Search Engine Result Pages (SERPs ) पर जाँच सकतें हैं। इसका प्रयोग हम अपने साइट  के पुराने आर्टिकल  को जाँचनें या नए आर्टिकल  को सबमिट  करनें के लिए कर सकतें हैं। साथ ही ब्लॉग  में यदि कोई Error है तो उसे को देख एवं सुधार सकतें हैं।

01-ब्लॉगर ब्लॉग को गूगल सर्च कंसोल में वेरीफाई कैसे करे

मित्रो यदि आप ब्लॉगर ब्लॉग को गूगल सर्च कंसोल में वेरीफाई करना चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा । जिससे आपको ब्लॉगर ब्लॉग को गूगल सर्च कंसोल में वेरीफाई करने में आसानी हो सके ।

स्टेप-01
  • सबसे पहले आप गूगल सर्च कंसोल में लागिंन करे। 
  • अब आप स्क्रॉल करके थोड़ा नीचे जाये और Settings पर क्लिक करे। 
  • इसके बाद अब आप Ownership verification पर क्लिक करे। 
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स्टेप-02
  • इसके बाद अब आप HTML tag पर क्लिक करे। 
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स्टेप-03
अब आप इसके बाद  HTML tag में   नीचे दिए गए मेटा टैग को कॉपी करें, और इसे अपनी ब्लॉग या वेबसाइट के होम पेज में पेस्ट करें। इसे पहले <body> सेक्शन से पहले <head> सेक्शन में जाना चाहिए।

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HTML tag टैग को ब्लॉगर ब्लॉग में कैसे सबमिट कर वेरीफाई करे
मित्रो यदि आप HTML tag टैग को ब्लॉगर ब्लॉग में कैसे सबमिट कर वेरीफाई करना चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा । जिससे आपको HTML tag टैग को ब्लॉगर ब्लॉग में कैसे सबमिट कर वेरीफाई करने में आसानी हो सके ।

स्टेप-01
  • सबसे पहले आप ब्लागर डेशबोर्ड में लागिंन करे। 
  • अब आप Theme पर क्लिक करे। 
  • अब आप Customize पर क्लिक करे। 
  • अब आप EDIT HTML  पर क्लिक करे इसके बाद एक नया पप अप विंडो ओपन होगा ।
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स्टेप-02
  • अब Search Box में (CTRL + F)  दबाकर आप <head> tag  को सर्च करें ।
  • अंत में मार्कअप की लाइन का अनुसरण करें और इसे <head> के ठीक ऊपर पेस्ट करें ।
  • इसके बाद अब आपको save template   पर क्लिक करके सुरक्षित सेव कर लेना है। 
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नोट -अब आप गूगल सर्च कंसोल में  जाकर HTML tag टैग Verify बॉटन पर क्लिक करके Verify कर दे  ।


गूगल सर्च  कंसोल में HTML tag  वेरीफाई कैसे करे ?

  • इसके लिए अब आप वापस  सर्च कंसोल में वापस जाये और Verify बॉटन पर क्लिक करके Verify कर दे  ।
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02-DNS Verification द्वारा Property Add करें। (Best Method)
ब्लॉगर वेबसाइट  को गूगल सर्च कंसोल में वेरीफाई कैसे करे,मित्रो जब ब्लॉगर में हम कस्टम डोमेन एड कर देते है तो हम DNS Verification द्वारा Property Add  करके वेरीफाई करते है । हलाकि मित्रो  Google Search Console के Add Property में पहला नाम DNS Verification Method का ही आता है। यह सबसे नया एवं अन्य पुराने Method से भिन्न है।

DNS Verification Methodसबसे अच्छा क्यों है ?
  • मित्रो इसे Verify करना अत्यंत सरल है।
  • इसमें Google Automatically खुद ही DNS Text Record आपके Domain level पर एड कर देता है। अतः आपको अपनी साइट  के Pages पर Manual Verification Code को एड  करनें की आवश्कता नहीं है।
  • प्रत्येक बार थीम  या Plugin बदलनें पर Verification Code को पुनः Insert करनें की आवशकता नहीं है।
  • Google खुद इस Method को प्राथमिकता देता है। इसीलिए इसे Add Property में सबसे पहले रखा गया है। बस एक बार Verify करें, और भूल जाएँ। यह हमेंशा के लिये आपके Domain के साथ एड  हो जायेगा। यदि आप अपना Domain किसी अन्य Registrar को Transfer करतें हैं तब, आपको पुनः Verify करना पड़ेगा।
दिशा-निर्देश संख्या-01
  • सबसे पहले आप दिये गये लिंक पर क्लिक करे- Google Search Console  में जाना  है।  इसे आप चाहे तो अपने गूगल एकाउण्ट के द्वारा भी लागिंन कर सकते है। 
  • अब आपको बाये तरफ Find property प्रापर्टी खोजे पर क्लिक करे ।
  • इसके बाद आप  add a property पर क्लिक करने के बाद एक पप अप  बाक्स ओपेन होगा।
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दिशा-निर्देश संख्या-02
  • अब आप इसमें Select property type में domain वाले ऑप्शन के नीचे अपने ब्लॉग या वेब साइट के URL एड्रेस को बिना https:// और www के enter कर दे। जैसे :- gondalivenews.com
  • इसके बाद अब आप Continue के ऑप्शन पर क्लिक करे। 
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स्टेप -03-
अब चूंकि आपके गूगल सर्च कंसोल में उसी गूगल अकाउंट से साइन इन किया था जिस गूगल अकाउंट के द्वारा आपके ब्लॉगर पर ब्लॉग बनाया था। इस कारण गूगल को पता लग चुका है कि इस ब्लॉग या वेब साइट  के मालिक आप ही है। इस वजह से  Google Search Console में यह domain property automatic verified हो गयी है। 
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स्टेप-04
  • अब आप स्क्रॉल करके थोड़ा नीचे जाये और Settings पर क्लिक करे। 
  • इसके बाद अब आप Ownership verification पर क्लिक करे। 
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स्टेप-05
  • इसके बाद अब आप Domain name provider पर क्लिक करे। 
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स्टेप-06
  • Any DNS Provider : जिससे Domain Name खरीदा था उसका नाम चुनें।
  • Instruction For : जैसे की मैंने अपना Domain Name Godaddy से खरीदा था। तो मैंने Godaddy.com Select किया। आपने जिससे भी ख़रीदा हो उसे Select कर लें।
  • Start Verification : शुरु करनें के लिए Start Verification पर क्लिक करें।
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स्टेप-07
  • Verification पूरा करनें के लिए Google Search Console द्वारा आपके Domain Name Provider की Website Open होगी। इसमें अपना Login ID एवं Password Enter करें।
  • आपके Domain Provider द्वारा निश्चित किया जायेगा की, आप Google Search Console के द्वारा अपना Domain Access चाहतें हैं।

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स्टेप-08
  • जैसे मैनें अपने Domain Provider GoDaddy का Login ID एवं Password Enter किया। तो Godaddy द्वारा Authorize करनें की Permission पूछी गयी।
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स्टेप-09
  • Authorize Botton पर क्लिक करते ही आपका Domain Name Google Search Console से Connect हो जायेगा। आप चाहें तो पुनः Search Console पर जाकर Property Check कर सकतें हैं।
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मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने ब्लॉगर को गूगल सर्च कंसोल में कैसे वेरीफाई करना  अच्छी तरह से समझ गये होगें। साथ ही आपने यह भी समझ लिया होगा की कैसे सर्च कंसोल में डोमेन एड करके वेबसाइट वेरीफाई करे । फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप ब्लॉगर को गूगल सर्च कंसोल में कैसे वेरीफाई करना करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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search console me Mobile Usability issues kaise fix kare

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गूगल ने वेबसाइटों को मोबाइल के अनुकूल बनाने पर अधिक जोर दिया है क्योंकि अधिकांश लोग इन दिनों इंटरनेट ब्राउज़ करने के लिए अपने फोन और टैबलेट का उपयोग करते हैं। यह अब रैंकिंग कारकों में से एक है जिसे गूगल  वेबसाइटों की रैंकिंग करते समय अपने एल्गोरिथ्म के हिस्से के रूप में मानता है। यदि विजिटर को आपकी वेबसाइट पर खराब मोबाइल अनुभव है, तो उनके वापस लौटने की संभावना कम है जिसका अर्थ है कि  आपके वेबसाइट पर कम ट्रैफ़िक मिल रहा है । Search Console द्वारा प्रदान की जाने वाली उपयोगी सुविधाओं में से एक यह जांचने की क्षमता है कि आपकी वेबसाइट में मोबाइल विजिटर  के साथ कोई समस्या है या नहीं। 

सर्च कंसोल में मोबाइल उपयोगिता इश्यूज क्यों और कैसे उत्पन्न  है ?

नीचे दी गई गड़बड़ियां, वेबपेज की मोबाइल उपयोगिता की रिपोर्ट में दिखाई दे सकती हैं और आप इन्हे ध्यान से पढ़ कर ठीक कर सकते है ।

पेज पर ऐसे प्लग-इन होना, जो कई ब्राउज़र पर नहीं चलते
पेज में Flash जैसे कुछ प्लग-इन शामिल हैं, जो ज़्यादातर मोबाइल ब्राउज़र पर काम नहीं करते हैं। ऐसे में  हमारा सुझाव है कि आप एचटीएमएल 5 जैसी नई और ज़्यादा कारगर वेब तकनीकों का इस्तेमाल करके अपना पेज फिर से डिज़ाइन करें।  

व्यूपोर्ट का सेट नहीं होना-

आपके पेज पर viewport की प्रॉपर्टी पहले से सेट नहीं है। इसके ज़रिेए ब्राउज़र को बताया जाता है कि पेज की लंबाई-चौड़ाई और उसमें मौजूद चीज़ों के आकार में क्या बदलाव किए जाएं, ताकि पेज को स्क्रीन के आकार के हिसाब से सबसे अच्छी तरह दिखाया जा सके। आपकी साइट पर आने वाले लोग बड़े डेस्कटॉप मॉनीटर से लेकर टैबलेट और छोटे स्मार्टफ़ोन तक—अलग-अलग आकार की स्क्रीनों वाले तरह-तरह के डिवाइस इस्तेमाल करते हैं इसलिए, आपके पेज के लिए meta viewport टैग का इस्तेमाल करके कोई व्यूपोर्ट तय किया जाना चाहिए। रिस्पॉन्सिव (बदलने वाले) वेब डिज़ाइन की सामान्य बातों के बारे में ज़्यादा जानने के लिए क्लिक कर पढ़े - ब्लॉगर ब्लागस्पाट लेआउट को रेस्पोंसिव टेम्पलेट कैसे बनाये ? इसी के साथ इसे भी पढ़ कर सेट करे - मोबाइल व्यू (टेम्पलेट) में ब्लॉगर विजेट कैसे दिखाए

व्यूपोर्ट, "डिवाइस की चौड़ाई" के हिसाब से सेट नहीं होना

आपके पेज पर viewport की प्रॉपर्टी में चौड़ाई पहले से सेट है, जिसका मतलब है कि आपकी साइट के पेजों का आकार स्क्रीन के मुताबिक नहीं बदल सकता। इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए, अपनी साइट के पेजों के लिए स्क्रीन के मुताबिक बदलने वाले डिज़ाइन अपनाएं। साथ ही, व्यूपोर्ट को इस तरह सेट करें कि पेज की चौड़ाई को डिवाइस की चौड़ाई के बराबर करके, उसी के हिसाब से, पेज पर मौजूद चीज़ों के आकार में बदलाव करके दिखाया जाए।
 
नोट-यदि आप व्यूपोर्ट को सेट करना नहीं जानते है तो आप इसके लिए  ब्लॉग में मोबाइल व्यूपोर्ट एरर कैसे फिक्स करें ?  को पढ़ कर आप  मोबाइल व्यूपोर्ट एरर को फिक्स कर सकते है । 

स्क्रीन की तुलना में सामग्री ज़्यादा चौड़ी होना-

यह रिपोर्ट उन पेजों के बारे में बताती है जहां पेज पर शब्दों और इमेज को देखने के लिए आगे-पीछे स्क्रोल करना ज़रूरी होता है. ऐसा तब होता है जब पेज CSS घोषणाओं में पूरे मानों का इस्तेमाल करते हैं, या एक खास चौड़ाई वाले ब्राउज़र (जैसे कि 980 पिक्सेल) में सबसे अच्छी तरह देखे जाने वाले इमेज का इस्तेमाल करते हैं।  इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए, यह पक्का कर लें कि पेज CSS में मौजूद चीज़ों के लिए मिलती-जुलती चौड़ाई और जगह के मानों का इस्तेमाल करते हैं, और यह भी देखें कि इमेज को मापा जा सकता है।  व्यूपोर्ट के मुताबिक सामग्री का आकार बदलने के बारे में ज़्यादा पढ़ें-  ब्लॉगर ब्लॉग की images रेस्पोंसिव कैसे बनाये ?

लेख के वर्ण इतने छोटे होना कि उन्हें पढ़ा न जा सके-
यह रिपोर्ट ऐसे पेजों की पहचान करती है, जहां पेज पर इस्तेमाल किए गए फ़ॉन्ट का आकार पढ़े जाने के हिसाब से बहुत छोटा है और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों को इसे पढ़ने के लिए “पिंच करके ज़ूम” करना होगा। अपने वेब पेजों के लिए एक व्यूपोर्ट बताने के बाद, अपने फ़ॉन्ट आकारों को व्यूपोर्ट के अंदर सही तरीके से मापने के लिए सेट करें सही आकार के फ़ॉन्ट इस्तेमाल करने के सबसे अच्छे तरीकों के बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारा लेख पढ़ने लायक आकारों में फ़ॉन्ट इस्तेमाल करें देखें

क्लिक की जाने वाली चीज़ों का एक दूसरे के बहुत पास होना-
यह रिपोर्ट उन साइटों के यूआरएल दिखाती है, जहां छूकर इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ें, जैसे कि बटन और नेविगेशन के लिंक, एक दूसरे के काफ़ी करीब हैं इसकी वजह से मोबाइल इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति आस-पास की चीज़ों को टैप किए बिना, उंगली से अपनी पसंद की चीज़ को आसानी से टैप नहीं कर सकता है। इन गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए, यह पक्का करें कि बटनों के आकार और उनके बीच की खाली जगह को सही ढंग से इस्तेमाल किया गया है और नेविगेशन लिंक आपके मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों की सुविधा के मुताबिक हैं

सर्च कंसोल में Mobile Usability issues कैसे फिक्स करे ?

मित्रो यदि आप गूगल सर्च कंसोल में Mobile Usability  इश्यूज  फिक्स करना चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा । परन्तु इसके पहले आपको ऊपर बताये गए Mobile Usability  पहले फिक्स करना होगा । जिससे आपको गूगल सर्च कंसोल में मोबाइल Mobile Usability issues  इश्यूज  फिक्स  करने में आसानी हो सके । 

स्टेप-01
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स्टेप-02
  • इसके बाद अब आप  VALIDATE FIX  पर क्लिक करे । 
  • इसके बाद अब Processing state update शुरू हो जायेगा और कुछ ही समय में Validation started स्टार्ट हो जायेगा  । 
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नोट -इसी प्रकार आप गूगल सर्च कंसोल में यदि कोई और भी Mobile Usability issues हो तो आप इसी प्रकार बताये गए स्टेप के अनुसार एक -एक करके उन सभी को फिक्स कर दे ।  परन्तु इसके लिए आप सर्च कंसोल को रिफ्रेश करने के उपरांत ही अन्य समस्या को जो भी  आपके गूगल सर्च कंसोल में हो उसे  फिक्स कर दे  ।

मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने सर्च कंसोल में मोबाइल Usability इश्यूज फिक्स  करना  अच्छी तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप सर्च कंसोल में मोबाइल Usability इश्यूज फिक्स करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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search console me Mobile Core Web Vitals issues kaise fix kare

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Google ने हाल ही में कोर वेब विटल्स को नए मेट्रिक्स के रूप में शामिल करके सर्च कंसोल में आने वाले बदलावों की घोषणा की, जो Google की गति और वेबसाइट के प्रदर्शन को मापने के तरीके को विस्तृत करता है। घोषणा के साथ, Google ने 6-महीने की समय-सीमा के बारे में जानकारी प्रदान की, जिसमें इन मेट्रिक्स को खोज रैंकिंग के एक भाग के रूप में उपयोग किए जाने से पहले उनकी निगरानी की जाएगी। जब भी Google इस तरह के बदलाव करता है, प्रकाशकों को आश्चर्य होता है, "मैं मुख्य वेब विटल्स को कैसे अनुकूलित कर सकता हूं?"

यह नए मेट्रिक्स Google Search Console में मिल सकते हैं। पहले जो "स्पीड रिपोर्ट" था वह अब कोर वेब विटल्स टैब है। डेटा को Chrome UX रिपोर्ट (जिसे CrUX भी कहा जाता है) से लिया गया है। नीचे, हम आपको कोर वेब वाइटल मेट्रिक्स को अनुकूलित करने का तरीका दिखाने जा रहे हैं।

कोर वेब वाइटल मेट्रिक्स क्या हैं?

वेब पर उपयोगकर्ता अनुभव को मापने में साइट के मालिकों की मदद करने के लिए, कोर वेब विटल्स गति, प्रतिक्रिया और दृश्य स्थिरता से संबंधित मीट्रिक का एक सेट है। उन्हें Google में Chrome टीम द्वारा पेश किया गया था। कोर वेब वाइटल बनाने वाले तीन कारक लोड हो रहे हैं, इंटरएक्टिविटी और विज़ुअल स्टेबिलिटी हैं। लेकिन कौन से मेट्रिक्स में ये कारक शामिल हैं?
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लोड हो रहा है: सबसे बड़ा कंटेंटफुल पेंट (LCP)
अन्तरक्रियाशीलता: पहला इनपुट विलंब (FID)
दृश्य स्थिरता: संचयी लेआउट शिफ्ट (CLS)

इनमें से कुछ प्रदर्शन मीट्रिक प्रकाशकों के लिए सामान्य हैं, जैसे प्रथम इनपुट विलंब (FID)। हम इस मीट्रिक को अपने लेख में 2020 के औसत पृष्ठ गति आँकड़ों पर शामिल करते हैं।

हालाँकि, लार्जेस्ट कंटेंटफुल पेंट (LCP) और संचयी लेआउट शिफ्ट (CLS) जैसे मेट्रिक्स अनिवार्य रूप से Google द्वारा गढ़े और बनाए गए थे। यह जानना कि इन मेट्रिक्स का वास्तव में क्या मतलब है, अनुकूलन और समझना महत्वपूर्ण है कि ये मेट्रिक्स कब मायने रखते हैं और कब नहीं।

महत्वपूर्ण: वेबसाइट के प्रदर्शन को मापने के लिए कोर वेब विटल्स एक नई विधि है, और यह "तेज़ या धीमी" की तुलना में कहीं अधिक बारीक है, और इसमें Google द्वारा बड़े पैमाने पर गढ़े गए माप शामिल हैं जो वास्तव में उपयोगकर्ताओं के वास्तविक अनुभव को प्रतिबिंबित नहीं कर सकते हैं।

मोबाइल के वेब विटाल्स  रिपोर्ट में एक जगह से दूसरी जगह जाना-
  • खास जानकारी देने वाले पेज के चार्ट पर धीमा लोड होने वाला, सुधार की ज़रूरत है या अच्छी रफ़्तार के टैब को टॉगल करके, देखें कि आपकी साइट के यूआरएल, उपयोगकर्ता के पुराने डेटा के मुताबिक कैसा काम करते हैं।
  • मोबाइल या डेस्कटॉप पर खास जानकारी वाला पेज देखने के लिए, रिपोर्ट खोलें पर क्लिक करें. इस रिपोर्ट में आपको मोबाइल या डेस्कटॉप पर पेज की परफ़ॉर्मेंस के बारे में आंकड़े दिखेंगे।
  • चुनी गई समस्याओं से जिन यूआरएल के ग्रुप पर असर हुआ है उनके बारे में जानकारी देखने के लिए टेबल में किसी पंक्ति पर क्लिक करें. इसमें उदाहरण के तौर पर दिए गए यूआरएल का सेट भी शामिल है।
  • किसी यूआरएल या मिलते-जुलते यूआरएल के बारे में ज़्यादा जानकारी देखने के लिए, समस्या की जानकारी देने वाले पेज में उदाहरण टेबल में किसी यूआरएल पर क्लिक करें।

मोबाइल के वेब विटाल्स रिपोर्ट के डेटा स्रोत

वेबसाइट की रफ़्तार के बारे में ज़रूरी जानकारी वाली रिपोर्ट का डेटा CrUX रिपोर्ट से मिलता है. CrUX रिपोर्ट, यूआरएल के परफ़ॉर्मेंस समय के बारे में बिना किसी पहचान वाला आंकड़े इकट्ठा करती है जो आपके यूआरएल पर आने वाले असली उपयोगकर्ताओं से लिए जाते हैं। इसे फ़ील्ड डेटा भी कहा जाता है. CrUX डेटाबेस, यूआरएल की जानकारी इकट्ठा करता है, चाहे यूआरएल Search Console प्रॉपर्टी का हिस्सा हो या न हो।

मोबाइल के वेब विटाल्स धीमा लोड होने वाला पेज क्या है
किसी खास तरह के डिवाइस के लिए, यूआरएल पर धीमा लोड होने वाला पेज, सुधार की ज़रूरत है, और अच्छा लेबल लगाए जाते हैं ।

यूआरएल की स्थिति

किसी भी तरह के डिवाइस के लिए, यूआरएल की स्थिति उसे असाइन की गई सबसे धीमी स्थिति होती है. इसलिए ।

  • अगर मोबाइल पर किसी यूआरएल का एफ़आईडी धीमा लोड होने वाला पेज है, लेकिन एलसीडी में सुधार की ज़रूरत है, तो उस यूआरएल को धीमा लोड होने वाला पेज के तौर पर लेबल किया जाता है ।
  • अगर मोबाइल पर किसी यूआरएल के एलसीपी में सुधार की ज़रूरत है, लेकिन एफ़आईडी अच्छा है, तो उस यूआरएल को सुधार की ज़रूत है के तौर पर लेबल किया जाता है ।
  • अगर मोबाइल पर यूआरएल का एफ़आईडी और सीएलएस अच्छा है, लेकिन एलसीपी के लिए कोई डेटा नहीं है, तो उसे अच्छा के तौर पर लेबल किया जाता है ।
  • अगर मोबाइल पर यूआरएल का एफ़आईडी, एलसीपी, और सीएलएस अच्छा है और डेस्कटॉप पर एफ़आईडी, एलसीपी, और सीएलएस में सुधार की ज़रूरत है, तो मोबाइल पर यूआरएल को अच्छा और डेस्कटॉप पर उसे सुधार की ज़रूरत है के तौर पर लेबल किया जाता है ।
अगर किसी खास आंकड़े के लिए यूआरएल का डेटा तय सीमा से कम होता है, तो उस यूआरएल के लिए वह आंकड़ा रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जाता । डेटा वाले यूआरएल को सिर्फ़ एक आंकड़े में उस आंकड़े की स्थिति असाइन की जाती है । किसी भी मेट्रिक के लिए, ऐसे यूआरएल काे इस रिपोर्ट में शामिल नहीं किया जाता जिनका डेटा तय सीमा में उपलब्ध नहीं होता ।

मोबाइल के वेब विटाल्स स्थिति की परिभाषाएं-

स्थिति के आंकड़ों का इन आधार पर आकलन किया जाता है:
 अच्छासुधार की ज़रूरत हैधीमे लोड होने वाला पेज
एलसीपी2.5 सेकंड से कम या इसके बराबर4 सेकंड से कम या इसके बराबर4 सेकंड से ज़्यादा
एफ़आईडी100 मि.से. से कम या इसके बराबर300 मि.से. से कम या इसके बराबर300 मि.से. से ज़्यादा
सीएलएस0.1 से कम या इसके बराबर0.25 से कम या इसके बराबर0.25 से ज़्यादा

एलसीपी (सबसे बड़ा कॉन्टेंटफ़ुल पेंट): वह समय है जो उपयोगकर्ता के यूआरएल का अनुरोध करने पर ब्राउज़र को व्यूपोर्ट में, सबसे बड़े दिखने वाले एलिमेंट को रेंडर करने में लगता है । सबसे बड़ा दिखने वाला एलीमेंट आम तौर पर, एक इमेज या वीडियो या फिर एक बड़ा ब्लॉक-लेवल टेक्स्ट एलिमेंट होता है । यह ज़रूरी है, क्योंकि इससे पढ़ने वाले को पता चलता है कि यूआरएल वाकई लोड हो रहा है ।
  • रिपोर्ट में दिखाया गया एग्रीगेट एलसीपी वह समय है जो इस ग्रुप के यूआरएल पर 75% विज़िट को एलसीपी तक पहुंचने में लगता है ।
एफ़आईडी (फ़र्स्ट इनपुट डिले): यह उपयोगकर्ता के पहली बार आपके पेज से इंटरैक्ट करने (जब वे किसी लिंक को क्लिक करते हैं, बटन पर टैप करते हैं, और कुछ दूसरी कार्रवाइयां करते हैं) से लेकर ब्राउज़र से उस इंटरैक्शन का जवाब देने तक लगने वाला कुल समय होता है। यह माप उपयोगकर्ता के पहली बार क्लिक किए गए किसी भी इंटरैक्टिव एलिमेंट से ली जाती है।यह उन पेजों के लिए ज़रूरी है जिन पर उपयोगकर्ता को कुछ कार्रवाई करनी होती है, क्योंकि उसी समय यह पेज इंटरैक्टिव हो जाता है।
  • रिपोर्ट में दिखाए जाने वाले एग्रीगेट एफ़आईडी का मतलब है कि ग्रुप के यूआरएल के 75% विज़िट के लिए मान यह है या इससे बेहतर है।
सीएलएस (कुल लेआउट शिफ़्ट): सीएलएस, किसी पेज के पूरे जीवनकाल में होने वाले हर अनचाहे लेआउट शिफ़्ट के, अलग-अलग शिफ़्ट स्कोर का कुल योग मापता है। स्कोर में शून्य से लेकर एक पॉज़िटिव नंबर होता है। यहां, शून्य का मतलब है कि कोई शिफ़्टिंग नहीं हुई और बड़ी संख्या का मतलब है, पेज पर ज़्यादा लेआउट शिफ़्ट होना। यह ज़रूरी है, क्योंकि जब उपयोगकर्ता, पेज पर इंटरैक्ट करने की कोशिश कर रहा हो, तब पेज के एलिमेंट का शिफ़्ट होना खराब उपयोगकर्ता अनुभव माना आएगा। अगर आप वैल्यू ज़्यादा होने की वजह पता नहीं लगा पा रहे हैं, तो पेज के साथ इंटरैक्ट करें और देखें कि यह स्कोर पर कैसे असर डालता है।
  • रिपोर्ट में दिखाया गया एग्रीगेट सीएलएस (एग्रीगेट किया गया सीएलएस), ग्रुप में किसी यूआरएल पर 75% विज़िट (वेबसाइट पर आने/जाने) के लिए सबसे कम सामान्य सीएलएस होता है।
जिन यूआरएल पर असर हुआ है उन पर PageSpeed Insights टेस्ट चलाने से आपको इन समस्याओं को ठीक करने के सुझाव मिल सकते हैं।

सर्च कंसोल में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज कैसे फिक्स करे ?

मित्रो यदि आप गूगल सर्च कंसोल में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज  फिक्स करना चाहते है तो आपको इसके लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा । जिससे आपको गूगल सर्च कंसोल में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज  फिक्स  करने में आसानी हो सके ।

स्टेप-01
  • सबसे पहले आप गूगल सर्च कंसोल में लागिंन करे। 
  • अब आप Core Web Vitals पर क्लिक करे। 
  • अब आप Mobile के  OPEN REPORT  पर क्लिक करे। 
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स्टेप-02
  • इसके बाद अब आप स्क्रॉल करके नीचे  Details में जाये  एयर एक-एक करके Mobile Core Web Vitals issues पर क्लिक करे । 
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स्टेप-03
  • इसके बाद अब आप  VALIDATE FIX  पर क्लिक करे । 
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स्टेप-04
  • इसके बाद अब Processing state update शुरू हो जायेगा और कुछ ही समय में Validation started स्टार्ट हो जायेगा  । 
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नोट -
इसी प्रकार आप गूगल सर्च कंसोल में यदि कोई और भी साइट में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज हो तो आप इसी प्रकार बताये गए स्टेप के अनुसार एक -एक करके उन सभी को फिक्स कर दे ।  परन्तु इसके लिए आप सर्च कंसोल को रिफ्रेश करने के उपरांत ही अन्य समस्या को जो भी  आपके गूगल सर्च कंसोल में हो उसे  फिक्स कर दे  ।

विशेष जानकारी - विस्तार से समझने के लिए आप गूगल गाइड लाइन को क्लिक कर विजिट करे और इसे आप समझ सकते है ।यही नहीं  आप Google Search Central के ब्लॉग पर, इस पहल के बारे में ज़्यादा जानकारी पा सकते हैं.

मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने सर्च कंसोल में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज फिक्स  करना  अच्छी तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप सर्च कंसोल में मोबाइल के वेब विटाल्स इश्यूज फिक्स करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 



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