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जाने कैसे पता करें कि हमारे नाम पर कितने सिम कार्ड (मोबाइल नंबर) चल रहे हैं

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आपके नाम पर कौन-कौन इस्तेमाल कर रहा है सिम कार्ड (मोबाइल नंबर) मिनटों में जानें। क्या आपको भी यह आशंका रहती है कि आपके नाम से कोई और भी Sim Card (सिम कार्ड) इस्तेमाल कर रहा है ? यदि हां तो यह खबर आपके लिए है। 

हो सकता है कि आपके नाम का कोई और गलत इस्तेमाल कर रहा हो, और आपके नाम पर कोई दूसरा सिम कार्ड चला रहा हो, क्या आप जानना चाहेंगे ?

अगर हां तो आज हम आपको कुछ ऐसी ही तरकीब बताने वाले हैं, जिसकी मदद से अब आप भी बहुत आसानी से जान सकते हैं कि आपके नाम पर कितने (Sim card) सिम कार्ड चल रहे हैं, और अगर आप इनमें से कोई भी नम्बर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो, उन नंबरों को बंद भी करा सकते हैं, अब यह सुविधा दूरसंचार विभाग ने सुरु कर दी है, इसके लिए एक पोर्टल भी लॉन्च कर दिया गया है।

यह सब कैसे होगा आइए जानते हैं...

बीएसएनएल (दूरसंचार) विभाग ने tafcop.dgtelecom.gov.in नाम से एक पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल में हमारे देशभर में जितने भी मोबाइल नंबर चालू हैं, उन सभी मोबाइल नंबर का डाटाबेस अपलोडे है, और इस पोर्टल के जरिए स्पैम और फ्रॉड कॉल पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है, और अगर आपको लगता है कि आपके नाम से कोई अन्य भी मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर रहा है तो आप इस संबंध में इसी वेबसाइट के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। 

आइए जानते हैं इस वेबसाइट के इस्तेमाल का तरीका...

naam-par-kitane-sim-kaard-01सबसे पहले tafcop.dgtelecom.gov.in को अपने मोबाइल फोन या लैपटॉप या किसी कंप्यूटर के ब्राउजर में ओपन कीजिए, इसके बाद अपना 10 अंकों वाला मोबाइल नंबर डालें, उसके बाद अब आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा, उस ओटीपी को डालकर वैलिडेट करें।

जैसे ही आप ओटीपी वैलिडेशन करेंगे उसके बाद उन सभी नंबरों की पूरी सूची (लिस्ट) आपके सामने आ जाएगी जो आपके नाम पर चल रहे हैं। इनमें से आप अपनी सुविधानुसार किसी भी नंबर की रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं। जब आप अपनी रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, उसके बाद सरकार उन नंबर की जांच करेगी जो आपके नंबर पर चल रहे हैं या जिनकी आपने शिकायत की है। 
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दूरसंचार के द्वारा इसको फिलहाल कुछ सर्किल के लिए ही जारी किया गया है, लेकिन जल्द ही इसे देशभर के सभी सर्किल में जारी किया जाएगा। और किसी भी एक आईडी पर अधिकतम नौ नंबर तक ही चालू रह सकते हैं, लेकिन अगर इस पोर्टल में आपको कोई ऐसा नंबर दिख रहा है जो आपके नाम पर है, और आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो आप उस नंबर की शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद सरकार उस नंबर को ब्लॉक कर देगी।


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क्या है साइबर (Cyber) हमले और उनके प्रकार

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साइबर हमला एक अपराध है जो कम्प्युटर के माध्यम से किया जाता है। दूसरे शब्दों में, साइबर हमला एक प्रकार की चोरी है, जिसमें कम्प्युटर डाटा, निजी जानकारी, नेटवर्क समूहों की जानकारी आदि की चोरी शामिल है।

सामान्यत: साइबर आक्रमण का संचालन अनामक संस्थाओँ या व्यक्तिओं द्वारा महत्वपूर्ण डाटा की चोरी करने के लिये किया जाता है। साइबर हमले को साइबर आतंकवाद का हिस्सा भी कहा जा सकता है। जब दो पक्षों, देशों और संस्थाओं के बीच एक दूसरे पर साइबर आक्रमण होता है, तो उसे साइबर युद्ध कहा जाता है।

साइबर हमलों में निम्न परिणाम शामिल हो सकते हैं:

  • पहचान की चोरी, धोखाधड़ी।
  • मैलवेयर(Malware), स्पैमिंग(Spaming) , वायरस।
  • पासवर्ड की चोरी
  • प्रणाली घुसपैठ
  • निजी और सार्वजनिक वेब ब्राउज़र से जानकारी की चोरी
साइबर हमलों के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:-

मैलवेयर(malware)

यदि आपने कभी अपनी स्क्रीन पर एंटीवायरस अलर्ट देखा है, या यदि आपने गलती से कोई अनजान ईमेल अनुलग्नक क्लिक किया है, तो वो मैलवेयर हो सकता है। मैलवेयर कई हानिकारक सॉफ्टवेयर जैसे वायरस आदि के रूप में आपके कम्प्युटर में घुसता है। एक बार जब मैलवेयर आपके कम्प्युटर में आ जाता है, तो यह आपके कम्प्युटर पर पूरा नियंत्रण कर लेता है। जिसका मतलब है कि मैलवेयर मशीन को नियंत्रण मे लेने से लेकर उसमें होने वाले प्रत्येक कार्यों तक सारा डेटा हमलावरों/हैकर को भेज सकता है।

हैकर कई तरीकों से हमारे कम्प्युटर में मैलवेयर डाल सकते है, परंतु कई बार उपयोगकर्ता के एक क्लिक(click) से भी मैलवेयर कम्प्युटर में आ सकता है। जिसमें किसी फ़ाइल को डाउनलोड करने के लिए किसी लिंक पर क्लिक करना या किसी अटैचमेंट(attachment) (जैसे:-वर्ड डॉक्यूमेंट(Word Document), पीडीएफ(pdf) आदि) को खोलना शामिल हैं।

फिशिंग(phishing)

फिशिंग भी साइबर हमलों का एक रूप है। जिसका इस्तेमाल इंटरनेट से किसी व्यक्ति की बहुत ही निजी जानकारी जैसे कि लॉगिन पासवर्ड(login password) और अकाउंट इन्फॉर्मेशन(account information) आदि की चोरी करने के लिए किया जाता है।

जाहिर सी बात है कि कोई भी उपयोगकर्ता बिना किसी कारण के किसी ईमेल या लिंक को नहीं खोलते जिस बात को हैकर भी जानते हैं। इसलिए हैकर हमारे कम्प्युटर में मैलवेयर डालने या हैक करने के लिए फिशिंग अटैक का प्रयोग करते हैं। फिशिंग अटैक के द्वारा हैकर आपको एक ईमेल भेजते हैं जो इस तरह से बनाया जाता है जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं, (जैसे आपके मालिक का ईमेल या किसी ऐसी कंपनी का ईमेल जिसके साथ आप व्यापार कर रहे हों), उस ईमेल के साथ एक लिंक अटैच कर दिया जाता है, जिसमें वायरस छुपा होता है। जैसे ही आप उस लिंक को खोलते हैं आपके कम्प्युटर में मैलवेयर आ जाता और आपका डेटा हैक कर लिया जाता है।

एस.क्यू.एल इंजेक्शन अटैक(SQL injection attack)

SQL संरचित क्वेरी भाषा(Structured Query language) के लिए है, यह एक प्रोग्रामिंग भाषा(Programming Language) है, जिसका उपयोग डेटाबेस(Database) के साथ संवाद करने के लिए किया जाता है। कई सर्वर जो वेबसाइटों और सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण डेटा संग्रहीत(Data Collection) करते हैं, अपने डेटाबेस में डेटा का प्रबंधन करने के लिए SQL का उपयोग करते हैं। SQL इंजेक्शन हमला विशेष रूप से इस तरह के सर्वर को लक्षित(Target) करता है, जो सर्वर में द्वेषपूर्ण कोड का उपयोग करके जानकारी को सामान्य रूप से विभाजित करने के लिए प्राप्त होता है। यह विशेष रूप से सर्वर द्वारा वेबसाइट से निजी ग्राहक जानकारी, जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर, उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड (क्रेडेंशियल), या अन्य व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी संग्रहीत करता है, जो हमलावर के लिए आकर्षक लक्ष्य हैं।

SQL इंजेक्शन अटैक किसी भी ज्ञात SQL गोपनीयता का शोषण करने का काम करता है जो SQL सर्वर को द्वेषपूर्ण कोड को चलाने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, यदि एक SQL सर्वर एक इंजेक्शन हमले के लिए असुरक्षित है, किसी हमलावर के लिए किसी वेबसाइट के सर्च बॉक्स में जाना और कोड में टाइप करना संभव हो सकता है जो साइट के SQL सर्वर को उसके सभी संग्रहीत उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड को साइट पर डंप करने के लिए मजबूर करेगा।

क्रॉस साइट स्क्रिप्टिंग(cross site scripting)
क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग (XSS) एक प्रकार का इंजेक्शन सुरक्षा हमला है जिसमें संग्रहित डाटा पर हमला किया जाता है। यह हमला भी एस.क्यू.एल की तरह वेबसाइट से संबंधित है, परंतु यह वेबसाइट पर सीधा हमला नहीं करता, इसके बजाय यह उपयोगकर्ता के ब्राउज़र पर हमला करता है। जिसके द्वारा हैकर उपयोगकर्ता की निजी जानकारी (जैसे:- उसका पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर) आदि की चोरी कर सकता है और उपयोगकर्ता इसका अंदेशा भी नहीं लगा पाता।

डिनायल ऑफ सर्विस (denial of service)
मान लीजिये आप एक सड़क से गुजरते है जहां सामान्यत: बहुत कम वाहन गुजरते हैं, परन्तु किसी मेले या कार्यक्रम के दौरान वहाँ बहुत से वाहनों के कारण जाम लग जाता है जिससे वहाँ मौजूद सभी वाहन उसमें फस जाते हैं,इस जाम को ही ट्रैफिक कहा जाता है, यह अनिवार्य रूप से एक वेबसाइट पर होता है जो एक DoS (Denial Of Service) हमले के दौरान होता है। यदि आप किसी ऐसी वेबसाइट को अधिक ट्रैफ़िक से भर देते हैं, जिसे कम ट्रैफिक संभालने के लिए बनाया गया था, तो आप वेबसाइट के सर्वर को ओवरलोड कर देंगे और वेबसाइट पर उन आगंतुकों के लिए अपनी सामग्री परोसना बहुत ही असंभव होगा, जो इसे एक्सेस(Access) करने का प्रयास कर रहे हैं। इस हमले के दौरान हैकर बनावटी ट्रैफिक के द्वारा किसी चुनिंदा वेबसाइट के सर्वर को ओवरलोड कर देते है जिसके कारण उस वेबसाइट पर आने वाले आगंतुक एक्सेस(Access) नहीं कर पाते हैं।

 
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इंटरनेट जगत में भाषा की महत्‍ता क्या है

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आज इंटरनेट विश्‍वस्‍तर पर अपने पैर फैला चूका है, यदि हम कहें इंटरनेट आज के समय में एक मूलभूत आवश्‍यकता बन गया है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इंटरनेट को इस मुकाम तक पहुंचाने में विभिन्‍न कारकों ने अहम भूमिका निभाई है, जिनमें एक है "भाषा "। जिसे हम इंटरनेट का अभिन्‍न अंग भी कह सकते हैं। इंटरनेट पर विश्‍व की अधिकांश भाषाओं का प्रयोग किया जाता है, किंतु वास्‍तविक तथा उपयोगी जानकारी उन्‍हीं भाषाओं में उपलब्‍ध होती हैं, जो विश्‍व में शिक्षित वर्ग के मध्‍य ज्‍यादा प्रचलित हैं। इसी कारणवश अंग्रेजी भाषा इंटरनेट पर प्रयोग की जाने वाली भाषाओं के शीर्ष पर है, जो एक वैश्‍विक भाषा बनने की ओर भी अग्रसर है। वर्ष 2017 में इंटरनेट वर्ल्ड स्टैट्स (Internet World Stats) ने इंटरनेट में सर्वाधिक प्रयोग होने वाली भाषा पर एक रिपोर्ट प्रस्‍तुत की जिसमें 10 शीर्ष भाषाऐं निम्‍वत हैं:-

एक रोचक तथ्य यह भी है कि संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएँ (अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश) सभी उपरोक्त शीर्ष दस इंटरनेट भाषाओं की तालिका में शामिल हैं। यदि हम उपरोक्‍त सूची को देखें तो इसमें हिन्‍दी भाषा का नाम नहीं है, जबकि विश्‍व में बोली जाने वाली शीर्ष भाषाओं की दृष्टि में हिन्‍दी भाषा का चौथा स्‍थान है। विश्‍व में बोली जाने वाली शीर्ष 20 भाषाएँ कुछ इस प्रकार हैं

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विगत कुछ समय से इसके स्‍वरूप में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अब लोग सर्वप्रचलित भाषा की अपेक्षा स्‍थानीय भाषा में इंटरनेट का प्रयोग करना ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं। अप्रैल 2017 में प्रकाशित गूगल और केपीएमजी इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में 23.4 करोड़ भारतीय-भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जबकि केवल 17.5 करोड़ अंग्रेजी उपयोगकर्ता थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 और 2021 के बीच दस नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से नौ स्थानीय भाषाओं का उपयोग करेंगे, जिनकी संख्‍या लगभग 53.4 करोड़ तक पहुंचने की संभावना लगाई जा रही है।

तमिल, हिंदी, कनाड़ा, बंगाली और मराठी भाषी उपयोगकर्ता उच्‍चस्‍तर पर ऑनलाइन सेवाएं प्राप्‍त कर रहे हैं, इसके बाद तेलुगू, गुजराती और मलयालम हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, अगले चार वर्षों में, अकेले हिंदी बोलने वाले उपयोगकर्ता अंग्रेजी बोलने वाले उपयोगकर्ताओं से आगे निकल जाएंगे तथा हिन्‍दी भारत में इंटरनेट पर सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली भाषा होगी। भारतीय भाषा में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में मराठी, बंगाली, तमिल और तेलुगू का 30% हिस्सा होगा।

रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट से संबंधित विभिन्‍न क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं की मिश्रित वार्षिक विकास दर कुछ इस प्रकार रहने वाली है, संदेश और मनोरंजन के लिए 19%; सोशल मीडिया के लिए, यह 21% है; ऑनलाइन समाचार के लिए, यह 22% है; डिजिटल भुगतान में 30% की वृद्धि देखी जाएगी; ऑनलाइन सरकारी सेवाओं में 33% की वृद्धि देखी जाएगी; ई-टेलिंग के लिए, यह 32% है और डिजिटल वर्गीकृत में 32% की वृद्धि देखी जाएगी।

फेसबुक विश्‍व स्‍तर पर व्‍यापक रूप से प्रयोग किया जाने वाला एप है, जो भारत में भी अत्‍यंत लोकप्रिय है तथा यह भी भारत की 13 स्थानीय भाषाओं का समर्थन करता है। यदि गूगल की बात की जाए तो इसके एप और अन्‍य सेवाएं तथा कुछ विशेष एंड्रॉइड स्मार्टफ़ोनों (Android smartphones) में भारत की स्‍थानीय भाषाओं को भी स्‍थान दिया गया है। दो साल पहले, माइक्रोसॉफ्ट ने स्विफ्टकी (Swiftkey), आईओएस (iOS) और एंड्रॉइड कीबोर्ड ऐप (Android keyboard app) को अधिग्रहि‍त किया, जोकि 24 भारतीय भाषाओं में भावी सूचक अवतरण प्रदान करते हैं।

स्थानीय भाषा उपयोगकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि 60% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने "सीमित भाषा समर्थन और सीमित सामग्री" को ऑनलाइन सेवाएं अपनाने के लिए सबसे बड़ा अवरोध बताया। 80% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अंग्रेजी कीबोर्ड का उपयोग करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लगभग 55% उपयोगकर्ता नियमित रूप से इंटरनेट का उपयोग करने के लिए "उच्च लागत और सीमित इंटरनेट ऐक्सेस" को मुख्य अवरोध बताया है। परिस्थितियां कुछ भी हों किंतु डिजिटल भारत की भाषाएं इंटरनेट जगत में अपना स्‍थान बनाने की ओर तीव्रता से अग्रसर हैं।


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फोटो बैकग्राउंड ब्लर कैसे करे ?

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क्या आप फोटो बैकग्राउंड को ब्लर करना चाहते है ?  यदि नहीं तो यह आर्टिकल आपके  लिए उपयोगी हो सकता है। मित्रो यदि आप अपने  किसी भी फोटो को blur करना चाहते है तो आज के इस पोस्ट को follow करके बहुत ही आसानी के साथ आप किसी भी इमेज के बैकग्राउंड  को blur कर सकते हो।  फोटो बैकग्राउंड blur करने के लिए आपको Photoshop या फिर किसी भी सॉफ्टवेयर की जरुरत नहीं है, आप बिना किसी सॉफ्टवेयर के ऑनलाइन ही फोटो बैकग्राउंड  को blur कर सकेंगे । तो चलिए जानते है कि फोटो बैकग्राउंड  ब्लर -

फोटो बैकग्राउंड ब्लर कैसे करे ?

मित्रो यदि आप किसी भी इमेज के बैकग्राउंड को ब्लर करना चाहते है ,तो आप इसके लिए एक ऑनलाइन टूल का इस्तेमाल करना होगा जिसका नाम है Remove.bg । आप इस टूल का इस्तेमाल करके आप अपने किसी भी फोटो  के background change भी कर सकते है ।  लिए दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा। 

स्टेप संख्या -01
  • इसके लिए आप सबसे पहले आपको Remove-bg इस वेबसाइट पर विजिट करे। 
  • इसके बाद आप आप जिस  इमेज का बैग्राउंड ब्लर करना चाहते है उसे  Upload Image पर क्लिक करके अपने मोबाइल या कंप्यूटर से फोटो सेलेक्ट करके अपलोड करे।  
Upload

स्टेप -संख्या -02
फोटो सेलेक्ट करते ही खुद से फोटो बैकग्राउंड रिमूव हो जायेगा। अब फोटो बैकग्राउंड ब्लर  करने के लिए आपको ऊपर Edit पर क्लिक करना है। 
Background

स्टेप -संख्या -03
  • अब आपको फोटो में blur करने का ऑप्शन मिलेगा आपको जो भी effect पसंद है उसको सेलेक्ट करे,करे। 
  • इसमें आप अपने फोटो का कलर बैकग्राउंड बदल सकते है। 
  • इसमें आप अपने फोटो का सलेक्ट बैकग्राउंड बदल सकते है। 
photo-blur

फोटो ब्लर होने के बाद आपको नीचे  Download का ऑप्शन  मिलेगा उस पर क्लिक करके आप फोटो को डाउनलोड करे। 

फोटो  का बैकग्राउंड चेंज़  करने वाली वेबसाइट -

slazzer

fotor

lunapic




तो मित्रो यह थी कुछ best photo background change करने वाली वेबसाइट. आप गूगल पर "change photo background online" search करे। आपको बहुत सारी वेबसाइट मिलेगी. आपको जो भी पसंद आए उस की मदद से फोटो का बैकग्राउंड बदल सकते है। 


मित्रो मुझे अब उम्मीद  है कि आप लोगो ने फोटो बैकग्राउंड ब्लर कैसे करे  को  अच्छी तरह से समझ गये होगें। फिर भी यदि आप लोगो को इस आर्टिकल से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न होता है। तो आप लोग इसके लिए हमें ईमेल के माध्यम से या कमेन्ट करके या दूरभाष पर सम्पर्क करके अपने समस्या को साझा कर सकते है। जिससे आपके समस्या का निदान हो सके। यदि आप फोटो बैकग्राउंड ब्लर कैसे करे   के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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Algorithm kya hai aur kaise kary karta hai

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कलन-विधि (Eng. “Algorithm”) को Computer Science में एक महत्वपूर्ण टॉपिक के रूप में देखा जाता है। क्योंकि इसके उपयोग से Developers को बेहद कुशल और Error free programs विकसित करने में मदद मिलती है।

शब्द, Algorithm का मतलब उन ‘Series of Steps‘ से है, जो किसी विशेष गणना (Computation) या कार्य (task) को पुरा करने या निष्पादित (execute) करने के लिये जिम्मेदार होते है। आगे हम एल्गोरिथ्म की परिभाषा को और विस्तार से समझेंगे।

मूल रूप से गणितीय समस्याओं (Mathematical problems) को हल करने के लिये इसको विकसित किया गया था। लेकिन वर्तमान में यह शब्द Computer Science के साथ दृढ़ता से जुड़ा है। आगे पोस्ट में आप एल्गोरिथ्म क्या है? (What is Algorithm in Hindi) उदाहरण के साथ समझेंगे।

Algorithm की परिभाषा

Algorithm, निर्देशों (Instructions) का एक सेट है, जो किसी समस्या (Problem) को हल करने की पूरी प्रकिया (Procedure) को परिभाषित करता है। इसका प्रमुख लक्ष्य अपेक्षित परिणाम (expected output) प्राप्त करना है। इसमें कई निरन्तर Steps होते है, जिनके समाप्त होने के बाद ही आउटपुट आता है।

इसे एक कप चाय (Tea) बनाने के उदाहरण से समझा जा सकता है:
  • स्टेप 1. केतली में पानी भरे
  • स्टेप 2. पानी को उबाल लें
  • स्टेप 3. केतली में चायपत्ती डालें
  • स्टेप 4. कूटकर अदरक डालें.
  • स्टेप 5. डेढ़ चम्मच चीनी डाले
  • स्टेप 6. चाय को पकने दे
  • स्टेप 7. चाय को छाने और कप में डाल दे।
जिस प्रकार एक कप चाय बनाने के लिये हमें उप्पर बताये गए Steps को बारी-बारी से निष्पादित (execute) करना होता है। ठीक उसी प्रकार Programming में किसी प्रकिया (Process) या कार्य (Task) को करने के लिये Algorithm लिखी जाती है, ताकि मनचाहा परिणाम (desired output) प्राप्त हो सके।

इसका उपयोग कई विभिन्न क्षेत्रों में होता है, जिनमे कंप्यूटर साइंस और गणित मुख्य है। उदाहरण के लिए Search Algorithm, ये एक Step By Step प्रकिया है जिसका उपयोग Data Structure के भीतर स्टोर वेब-पेज को पुनःप्राप्त करने के लिये किया जाता है।

इसके अलावा Encryption Algorithm, एक गणितीय प्रकिया (Mathematical procedure) है, जिसके उपयोग से किसी डेटा या मैसेज को इनकोड किया जाता है जिससे उसे पढ़ना या समझना मुश्किल है। इस तरह की Algorithm का उपयोग करके डेटा को अनधिकृत उपयोगकर्ताओं की पहुँच से दूर रखा जाता है।

एल्गोरिथ्म के फाउंडर कौन है?

इसका एक लंबा इतिहास (History) है, परंतु वास्तविक शब्द “Algorithm” का परिचय पहली बार 9 वीं शताब्दी में हुआ। उस समय के फारसी गणितज्ञ, Abu Abdullah Muhammad ibn Musa Al-Khwarizmi को इसका फाउंडर माना जाता है। इन्हें बीजगणित के जनक (The Father of Algebra) के रूप में भी जाना जाता है। वास्तव में, Brahmagupta के काम पर ही Al-Khwarizmi को बनाया गया था। ब्रह्मगुप्त एक महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। इन दोनों महान व्यक्ति को तब प्रख्याति मिली जब Hindi-Arabic numerals का उपयोग करके उनके अंकगणितीय नियमों के Latin अनुवादों को संदर्भित करने के लिये ‘Algorism’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद 18 वीं शताब्दी के आसपास ‘Algorism’ शब्द आधुनिक “Algorithm” बन गया। अपने आधुनिक रूप में इसका उपयोग Calculation, Data Processing और Programming जैसे क्षेत्रों के अलावा दैनिक जीवन की समस्याओं को हल (Solve) करने के लिये भी बखूबी होता है। तो शब्द एल्गोरिथ्म, वो स्टेप बाइ स्टेप प्रोसेस है, जो किसी समस्या या कार्य को हल करने के लिये बनाई जाती है।

एल्गोरिथ्म के गुण – Properties of Algorithm

किसी भी प्रकिया को हम Algorithm नही कह सकते है। बल्कि एल्गोरिथ्म उपयोगी होनी चाहिए यानी उससे समस्या का समाधान निकलना चाहिये। ऐसा होने के लिये, एक एल्गोरिथ्म के कुछ गुण (Properties) होते है। अर्थात इसने नीचे बताये गए निन्म मानदंडों को पूरा करना चाहिए:
  • इनपुट (Input): एक Algorithm में अच्छी तरह से परिभाषित इनपुट (Well-defined Input) होने चाहिए। इनपुट वो डेटा या जानकारी है, जिसे हम आउटपुट प्रदान करने के लिये दर्ज करते है।
  • आउटपुट (Output): इसने आउटपुट का उत्पादन (Produced) करना चाहिए। अर्थात समस्या का सही समाधान (Solution) प्रदान करना चाहिये।
  • स्पष्टता (Unambiguous): लिखा गया प्रत्येक निर्देश (Instruction) या Step स्पष्ट (Clear) होना चाहिये। प्रत्येक Steps के इनपुट/आउटपुट भी स्पष्ट होने चाहिये।
  • सीमाबद्धता (Finiteness): इसका मतलब है, कि एल्गोरिथ्म में लिखे गए Steps एक सीमित संख्या (Finite number) के बाद समाप्त (terminate) होने चाहिये। समाप्त का मतलब है, आपको अपेक्षित आउटपुट मिलना चाहिये ना कि प्रोसेसिंग लूप में चलती रहे।
  • प्रभावशीलता (Effectiveness): Algorithm को व्यवहारिक (Practical) होना चाहिए, ताकि उपलब्ध संसाधनों के साथ निर्देशों को निष्पादित करना सम्भव हो। अर्थात इसमें कोई अनावश्यक निर्देश (Unnecessary Instructions) नही होना चाहिए जो उसे अप्रभावी (Ineffective) बना दे।
  • भाषा स्वतंत्र (Language Independent): निर्देश केवल सरल भाषा मे लिखे होने चाहिए। जिन्हें किसी भी Programming Language में लागू किया जा सके।

Algorithm के उदाहरण

Algorithm को लिखने के लिये विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है। आइये सबसे आसान उदाहरण से इसे समझते है।

Example 1– Calculating the average for 3 numbers.

Algorithm:


Example 2– Find the largest among three different numbers entered by user.

Algorithm:


क्या यह एक एल्गोरिथ्म होने के मानदंड (Criteria) को पूरा करता है:

  • एल्गोरिथ्म में इनपुट और आउटपुट को अच्छे से परिभाषित किया गया है।
  • प्रत्येक Step को स्प्ष्ट (clear) और सटीक अर्थ में दर्शाया गया है।
  • Steps की एक सीमित (finite) संख्या है। अर्थात Algorithm एक समय के बाद समाप्त (terminate) होती है।
  • Algorithm एक अपेक्षित आउटपुट का उत्पादन करती है। हमे अंत मे सही परिणाम (correct result) प्राप्त होता है।
एल्गोरिथ्म के प्रकार – Types of Algorithm
हालांकि इसके कई सारे प्रकार है, परन्तु जो सबसे बुनियादी प्रकार है उन्हें नीचे बताया गया है।

  • Simple Recursive Algorithms
  • Backtracking
  • Divide and Conquer
  • Dynamic Programming Algorithm
  • Greedy Algorithms
  • Branch and bound Method
  • Brute Force Algorithms
  • Randomized Algorithms
किसी समस्या को हल करने के लिये एक लॉजिकल Step-By-Step विधि लिखना Algorithm कहलाता है। बिल्कुल आसान भाषा मे, Algorithm किसी समस्या को हल करने के लिये एक योजना (Plan) की तरह है। आमतौर पर इस शब्द का उपयोग गणितीय और कम्प्यूटेशनल समस्याओं को हल करने के लिये किया जाता है।

इसमें गणना (Calculations), तर्क (Reasoning) और डेटा प्रोसेसिंग (Data Processing) शामिल है। एल्गोरिथ्म लिखने के कई तरीके है। एक बार जब हमारे पास किसी समस्या के लिये Algorithm होती है, तो फिर हम उसे निष्पादित कर सकते है। इसको सामान्य English language, Pseudocode और Flowcharts में प्रस्तुत किया जा सकता है।

तो उम्मीद है, इस पोस्ट एल्गोरिथ्म क्या है? (What is Algorithm in Hindi) को पढ़कर आपको इसके बारे में जानकारी हो गयी होगी। यदि आप अल्गोरिथम क्या है  के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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कैसे जाने सभी Html कोड्स व उनका उपयोग

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HTML को सीखने और उसकी मदद से बेहतरीन Web pages बनाने के लिये All HTML tags के इस्तेमाल के बारे में आपको जानकारी जरूर होनी चाहिए। इसी लिये हमारे Html tutorial के Lesson 4 में आपको Complete Html tags list के बारे में बताया गया है।

Html की मदद से Web pages बनाने में इन Html tags का कितना महत्व है। यह तो हम सभी जानते ही है। कुछ Basic Html tags के उपयोग से एक Simple web page तो बनाया जा सकता है, परन्तु एक बेहतरीन वेब पेज बनाने के लिये All Html tags व उनके उपयोग के बारे में जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण है।

पिछले lessons में हमने बताया था कि Html tags दो तरह के होते है:
  • Paired tags
  • Unpaired tags.
इस lesson में हम बारी – बारी से सभी tags व उनके इस्तेमाल के बारे में आपको बताएंगे। तो  All Html tags के इस लेसन को बड़े ध्यान से पड़े।  तो चलिये एक – एक करके all Html tags के नाम व उनके उपयोग के बारे में जान लेते है।

Complete List of All HTML Tags in Hindi


Basic HTML tags -:
All Html tags जो एक web page की बुनियाद रखते है । यानी उस वेब पेज के ऊपरी भाग (head area) से लेकर मध्य भाग (Content area) व निचले भाग (Footer area) को बनाने में Use किये जाते है। Basic Html tags कहलाते है। नीचे सभी basic tags को उनके example के साथ समझाया गया है।

  1. <! DOCTYPE> ― यह Doctype tag किसी भी Browser को यह बताता है, कि Run की गई Document file किस type (Html, XML, etc.) में है। इसका पूरा नाम Document Type Definition है।
  2. <Html> ― यह टैग Html element का Root element होता है। यह browser को बताता है, कि Run की गई file Html document में है।
  3. <head> ― यह tag बाकी head element’s का Container element होता है। head element में Document की important information enclosed रहती है। title, style, base, link, meta, script, NoScript जैसे element’s इसी टैग के भीतर लिखे जाते है।
  4. <Body> ― यह टैग Document की Body को परिभाषित करता है। किसी web page में show होने वाला Content area इसी head element की मदद से Creat किया जाता है। body element में Document का सारा Content जैसे – text, hyperlink, images, tables, lists, etc. को शामिल किया जाता है
  5. <title> ― यह टैग Document के title को define करता है। हर HTML document के लिये title tag required होता है। title tag को head element के भीतर लिखा जाता है।
  6. <meta> ― <meta> tag Html document के बारे में metadata provide करता है। metadata page पर show नही होगा, लेकिन machine parsable होगी। meta element आमतौर पर page description, keyword, author of the document, last modified, and other metadata specify करने के लिए use किये जाते है।

Text Tags -:

All Html tags जो Web page के Content Area को Design करते है, उन्हें Text Tags कहा जाता है। नीचे दिए गए text tags का उपयोग करके आप Html Document में text को अपने हिसाब से Control कर सकते है।
  1. <heading> ― यह टैग Html heading को define करता है। एक Html document में <h1> से लेकर <h6> तक heading tag use किये जाते है। <h1> document की most important heading को define करता है। वही <h2>,<h3>,<h4>,<h5>,<h6> least important heading को define करते है
  2. <p> ― यह टैग Document के paragraph define करता है। एक Html document में कई paragraph element use किये जा सकते है। document में इस element को लिखने पर प्रत्येक <p> element के पहले व उसके बाद में browser automatically कुछ स्थान जोड़ते है।
  3. <br> ― यह टैग Single line break element को define करता है। document में paragraph line को अलग करने के लिये line break element का use किया जाता है।
  4. <strong> — Strong tag एक phrase tag है। important text को Define करने के लिये इस element का use किया जाता है।
  5. <DIV> ― Division element document में एक Section को define करता है। Style container के रूप में भी इस element को use किया जाता है।
  6. <B> ― यह टैग Bold text को define करता है। इसके इस्तेमाल से Document में किसी Important text को Bold ( गहरा ) किया जा सकता है।
  7. <!– –> ― यह Comment tag है। Source code में Comment add करने के लिये Comment element use किया जाता है।
  8. <code> ― Code element एक phrase tag है। यह Computer code text को define करता है।
  9. <samp> ― Sample element एक phrase tag है। यह एक Computer program से sample output को define करता है।
  10. <q> ― q element एक Short quotation को define करता है। Browser normally quotation के चारो ओर quotation marks डालते है।
  11. <Blockquote> ― blockquote element किसी अन्य source से quoted एक section को specified करता है।
  12. <del> ― delete element किसी document में से हटाए गए पाठ (deleted text) को define करता है। इस टैग की help से document के किसी भी text को delete किया जा सकता है।
  13. <ins> ― inserted element किसी document में सम्मिलित पाठ (inserted text) को define करता है। इस टैग की मदद से पुराने text को delete करके नया text insert किया जाता है।
  14. <span> ― Span tag किसी Document में एक Section को define करता है। Span element के use से किसी text का Color Change किया जाता है।
  15. <font size=” ” color=” “> ― Font element किसी font का Size व Color specify करता है।
  16. <big><small> ― Big element Define करता है, big text को व Small element Define करता है, Small text को।
  17. <i> ― i element define करता है, italic text को। i tag का use technical term एक thought या किसी खास नाम इत्यादि को indicate करने के लिए किया जाता है।
  18. <pre> ― Pre element का use preformatted text को indicate करने के लिए किया जाता है। pre tag का use करने से text एक fixed-width font में displayed होता है।
  19. <address> ― Contact information define करने के लिए Address element का use किया जाता है। इस <address> element का use हम address detail show करने के लिए करते है।
  20. <sup> ― Superscript text define करने के लिए SUP element का use किया जाता है। Superscript text normal line के ऊपर half character में show होते है। इन्हें small font भी कहा जाता है। Superscript text का use footnotes लिखने के लिए किया जाता है।
  21. <sub> ― Subscript text define करने के लिए SUB Element का use किया जाता है। Subscript text एक Normal text को normal line के नीचे Half character में show करता है। Chemical formulas जैसे- H20 लिखने के लिए इस element का use किया जाता है।
  22. <cite> ― Citation को specifies करने के लिए लिए CITE Element का use किया जाता है। इसे एक work के title को define करने के लिए भी use किया जाता है।
  23. <var> ― Variable Define करने के लिए VAR Element का use किया जाता है।

Link Tags-:

  1. <a> ― Hyperlink Define करने के लिए a element का use होता है। इस element की help से one-page को another page से link किया जाता है। a element का सबसे important attribute href है। href attribute किसी दसरे page के link को a tag में add करता है।
  2. <base> ― BASE Element किसी Document में All relative Url के लिए Base Url/Target Specifies करता है। एक Html document में maximum base Url head element के अंदर होते है।

List Tags -:

List Tags की help से किसी Html document में list create की जाती है। नीचे दिए गए list tags का उपयोग करके आप unordered list, ordered list, definition list, etc. बना सकते है।

  1. <ul> ― एक Unordered list create करने के लिए <ul> Element का use किया जाता है। इस element के साथ each line define करने के लिए <li> tag का use जरूर करे।
  2. <ol> ― <ol> element का use Ordered list define करने के लिए किया जाता है। each list item define करने के लिए <li> element का use करे।
  3. <dl> ― <dl> element का उपयोग Description list define करने के लिए किया जाता है। <dl> tag को <dt> और <dd> के संयोजन के साथ use किया जाता है। <dt> terms/names define करता है। <dd> term/name describe करता है।

Image Tags -:

Html Document में Image insert करने के लिए Image tags का use किया जाता है। नीचे दिए गए tags का use करके आप Html document में image insert कर सकते है।
  1. <img> ― <img> tag एक Html page में image define करता है। image element के src और alt दो required attributes है। image का source address set करने के लिए src attribute का use होता है।
  2. <map> ― <map> tag का use client-side image-map define करने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से एक image को कई area में divide करके उनमे दूसरी image add कर दी जाती है। अब जैसे ही आप image के उस area पर click करते तो उसके साथ add हुई दूसरी image आपको show होने लगती है। <map> element का required name attribute <img> के उस map attribute से जुड़कर image और map के बीच संबंध बनाता है।
  3. <area> ― <map> element के कई <area> element है, जो image map में click करने योग्य clickable area को define करते है।
Table Tags -:
Html document में table creat करने के लिए Table Tags का use किया जाता है। table tags के कई attributes होते है, जिनकी help से एक Html table की width, border, frame, height, spacing between cells, etc. Set की जाती है। नीचे दिए गए table tags के use से आप एक HTML table creat कर सकते है।

  1. <table> ― <table> tag एक Html table define करता है। Html table में एक table element और एक या उससे अधिक <tr>, <th>, and <td> element होते है।
  2. <tr> ― <tr> element एक Html table में table row define करता है।
  3. <th> ― <th> element एक Html table में table header define करता है।
  4. <td> ― <td> element एक Html table में table cell define करता है।
Note- एक complex Html table में <caption>, <col>, <colgroup>, <thead>, <tfoot>, और <tbody> element भी include हो सकते है।

Frame Tags -:
एक से ज्यादा Html document को एक ही Webpage पर display करने के लिए html में इन Frame tags का use किया जाता है। Web development languages जैसे – PHP, CSS आने के बाद html5 में इन Frame tags का use नही किया जाता है। पर एक बुनियादी चीज़ को समझने के लिए आपको इन्हें एक बार जरूर प्रयोग करना चाहिए।
  1. <frameset> ― <frameset> tag एक frameset define करता है। <frameset> element एक या अधिक <frame> element को रखती है। each <frame> element एक अलग Document रख सकता है। <frameset> element specify करता है कि कितने Columns or rows frameset में होगी, और उनमें से प्रत्येक percentage/pixels कितने space पर कब्जा करेंगे।
  2. <frame src=” “> ― <frame src=” “> tag एक frame को define करता है। frame element को frameset element के अंदर frame set करने के लिए place किया जाता है।
  3. <iframe> ― iframe document के अंदर एक inline frame बनाता है।
  4. <noframes> ― noframes tag, non-frame-based rendering के लिए एक container को define करता है।
Form Tags -:
Users से information Collect करने के लिए Webpages में Form का use किया जाता है। इस Form को create करने के लिए हम इन Form tags का उपयोग करते है।

  1. <form> ― form tag का उपयोग users द्वारा input किये गए data को send करने के लिए किया जाता है। <form> element में input के लिए कई fields हो सकते है। जैसे – action page, input, textarea, button, select, option, optgroup, fieldset, label, etc.
  2. <input> ― <input> tag एक input field define करता है। जब आप इस element के प्रकार विशेषता के लिए एक text specify करते है, तो एक text box बनाया जाता है।
  3. <textarea> ― <textarea> tag एक multi-line text area define करता है।
  4. <button> ― <button> tag की help से form में submit button, reset button or push button create किये जाते है।
  5. <select> ― <select> tag का उपयोग form में drop-down list create करने के लिए किया जाता है।
  6. <option> ― <option> tag select list में एक option define करता है।
  7. <optgroup> ― <optgroup> tag को drop-down list में related options को समूहित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि आपके पास options की एक long list है, तो users के लिए related options के group को संभालना आसान है।
  8. <fieldset> ― <fieldset> tag का use एक form में related element को समूहित करने के लिए किया जाता है। <fieldset> related element के आस-पास एक box draws करता है।
  9. <label> ― <label> tag एक <input> element के लिए label define करता है।
Embed Tags -:
Embed tag एक बाहरी application or interactive contact (a plug-in) के लिए एक Container define करता है।
  1. <object> ― <object> tag एक embedded object को define करता है। इस element का use document में विभिन्न प्रकार की वस्तुओ को embed करने के लिए किया जाता है।
  2. <param> ― <param> tag का उपयोग object की initial values specify करने के लिए किया जाता है। यह element object or applet element के साथ उपयोग किया जाता है।
इस पोस्ट में आपने जाना- Learn HTML in Hindi के इस lesson 4 में हमने जाना List of All HTML tags और उनके example. आगे आने वाले लेसन में हम और भी बारीकी से HTML language के उपयोगों के बारे में जानेंगे। अगर किसी tag के उप्पर आपको एक special post चाहिए तो नीचे comment कर जरूर बताएं हम उस पर अलग से एक complete post लिखेंगे।



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Google Hindi Input Tools Kaise Install Kare ?

 
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मित्रो हमने आप लोगो को पिछले आर्टिकल में Google Chrome  की सेटिंग डिफॉल्ट पर कैसे Reset करे ? करने के बारे में जानकारी उपलब्ध कराया था। और आज हम आप लोगो को गूगल हिंदी इनपुट टूल्स कैसे इनस्टॉल करने के बारे में जानकारी देने जा रहे है। मित्रो आज के समयइन्टरनेट पर हिन्दी कन्टेन्ट को हिन्दी भाषी लोग अधिक पढते है। जिसके वजह से आज हिन्दी ब्लाग की जैसे बाढ सी आ गयी है। परन्तु यह हम सभी जानते है कि कम्प्यूटर में हिन्दी लिखना या टाइप करना बहुत ही कठिन कार्य है। परन्तु इस कार्य को गूगल इनपुट टूल्स एक ऐसा टूल्स है जिसके मदद से कोई भी आसानी के साथ हिन्दी टाइपिंग कर सकता है। क्योकि यह कीवर्ड पर आपके द्वारा टाइप किये गये English characters को हिन्दी में कन्वर्ट कर देता है। इस लिए इसे हिन्दी ब्लागिंग का बहुत ही महत्वपूर्ण टूल्स कहा जाता है। लेकिन इसे आपको अपने कम्प्यूटर या लैपटाप में इन्स्टाल करना होगा। 

गूगल हिंदी इनपुट टूल्स कैसे इनस्टॉल करे ?

यदि आप अपने कम्प्यूटर या लैपटॉप में इसे इंस्टॉल करना चाहते हैं तो शायद आप उतने लकी नहीं , क्योंकि गूगल ने अभी हाल में ही अपना इनपुट टूल हटा दिया है जिसका ऑफलाइन इस्तेमाल करने के लिए कंप्यूटर विंडो  पर इनस्टॉल किया जाता था। अब आपके मन में जरुर निराशा आ गयी होगी और सोच रहे होंगे कि आखिर अब हम हिंदी भाषा में कैसे लिखेंगे तो इतना भी निराश होने की जरुरत नहीं है क्योंकि कहीं न कहीं गूगल आपको हिंदी में लिखने के लिए एक नयी सर्विस भी प्रोवाइड करने लगा है। गूगल ने कुछ ही दिनों पहले अपने इनपुट टूल्स का ऑफ़ लाइन सेटअप रिमूव  करने के ठीक बाद chrome browser के लिए एक extension प्रोवाइड किया है जिसे आप अपने गूगल क्रोम ब्राउज़र पर इनस्टॉल करके अपनी भाषा में ठीक उसी प्रकार लिख सकते हैं जिस तरह से आप Google Input Tools को windows में इनस्टॉल करके लिखते थे।

अब आपके मन में एक सवाल ये भी बुलबुले की तरह उचक रहा होगा कि हो सकता है किसी फ्रेंड्स के पास इसका ऑफलाइन सेटअप मिल जाये ! लेकिन में बता दूँ आप बिलकुल गलत सोच रहे हैं Google Input Tools का ऑफलाइन सेटअप अब आपको कहीं भी नहीं मिलेगा क्योंकि वो सिर्फ ऑफलाइन इंस्टालर  था जिसे इनस्टॉल करने के बाद उसका सेटअप  सीधे गूगल के डेटाबेस से डाउनलोड होता था जिसे अब database से remove कर दिया गया है। इसलिए में आपको अस्पष्ट शब्दों में बता रहा हूँ कि अब से न ही मुझे और न ही आपको किसीको भी PC में इनस्टॉल करने के लिए Input Tools का ऑफलाइन सेटअप  अब नहीं मिलेगा। परन्तु आप Google Input Tools का chrome browser extension फ्री में डाउनलोड और इनस्टॉल करके अपनी मनपसंद भाषा में कहीं भी कुछ भी लिख सकते हैं।

गूगल इनपुट टूल्स एक्सटेंशन  गूगल क्रोम ब्राउसर पर कैसे इनस्टॉल करते हैं ?


स्टेप-01
  • सबसे पहले आपको इनपुट टूल्स इनस्टॉल करने के लिए chrome स्टोर पर विजिट करे ।
  • Add to Chrome बटन पर क्लिक कर दीजिये।
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स्टेप-02
  • अब आपके browser पर एक पॉपअप मेसेज open हो जायेगा जिसमें Add Extension पर क्लिक कर दीजिये।
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स्टेप-03
अब आपके google chrome browser पर यह ( extension ) इनस्टॉल हो जायेगा और ब्राउज़र के राईट कोने में ऊपर की साइड इनपुट टूल्स का आइकॉन बना हुआ दिखने लगेगा जिसमे आपको उन languages settings करना है जिनमें आप टाइपिंग करना चाहते हैं जैसे हिंदी, गुजराती, English इत्यादि।
  • गूगल इनपुट टूल्स के आइकॉन पर क्लिक कीजिये।
  • Extension options पर क्लिक कर दीजिये।
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स्टेप-04
अब आपके सामने एक न्यू पेज ओपन  हो जायेगा जिसमें आपको उन भाषायों को सलेक्ट करके सेट करना है जिनका टाइपिंग के लिए प्रयोग करते हैं जैसे में example के रूप में हिंदी और English में लिखता हूँ तो में सिर्फ यही दो भाषाएँ सेट करके रखूँगा।
  • English को select करें।
  • इसके बाद दो डब्बों के बीच में दिख रहे तीर के निसान पर क्लिक कर दें।
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ठीक इसी तरह आपको हिंदी भी सलेक्ट करना है जिससे आपके इनपुट टूल्स में दो languages सेट हो जाएँगी जैसे हिंदी और English.

बस अब आपको जब भी हिंदी में लिखना हो तो extension पर क्लिक करके हिंदी select कर लें और जब आपको अंग्रेजी में कुछ लिखना हो तो English choose कर लें।

अब आप हिंदी में लिखना शुरू कर सकते हैं। Keyboard पर English words type कीजिये और screen पर आपको हिंदी में लिखता हुआ दिखाई देगा। इस तरह से आप Google Hindi Input Tools की मदद से अपनी language में content लिख सकते हैं।

मित्रो अब हमे उम्मीद है कि आप लोगो ने इस आर्टिकल को पढ कर सफलता पूर्वक गूगल हिंदी इनपुट टूल्स कैसे इनस्टॉल करना अच्छी तरह से समझ गये होगें। अब नई शैली को देखने के लिए एक  बार जाँच अवश्य करें। हां यदि आप लोगो को किसी प्रकार कोई समस्या महसूस होने पर आप हमें कमेन्ट कर पूछ सकते है। यदि आप गूगल हिंदी इनपुट टूल्स कैसे इनस्टॉल करने  लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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हार्ड डिस्क फेल हो रहा, एरर कैसे चेक करें ?

 
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मित्रो क्या आपका कम्प्यूटर अचानक चलते-चलते बंद हो जा रहा है ? जिसके वजह से आपको अपना कम्प्यूटर फार्मेट करवाना पड रहा ? यदि आप इस तरह की समस्या से परेशान है, तो एक बार आप अपना हार्ड डिस्क अवश्य चेक कर ले। आपका हार्डडिस्क सही है या नही ? दरअसल हममें से हर एक आदमी अपनी कीमती फाइलें, जैसे पर्सनल डयॉक्युमेंटस्, फोटो, वीडियो, या ऑडियो फाइलों को आम तौर पर हार्ड ड्राइव पर स्टोर करते हैं। चूंकि आज अधिकांश लोग आज लैपटॉप और डेस्कटॉप का उपयोग करते हैं, जिनके हार्ड ड्राइव कि औसत लाइफ लगभग 3-5 साल कि होती हैं। हालांकि, यह हार्ड डिस्क टाइप और मैन्युफैक्चरर पर आधारित हैं और यदि तापमान में फेरबदल, नमी और स्पीड स्थिर नहीं हैं, तो इसकी लाइफ में तेजी से गिरावट आ सकती है। इसलिए यह हमेशा एक अच्छा विचार है कि आपके हार्ड डिस्क हेल्थ को एरर्स और बैड सेक्टर्स के लिए नियमित रूप से चेक करना चाहिए। हार्ड डिस्क को नियमित रूप से मॉनिटर करना बहुत ही महत्वपूर्ण है, अगर आप बिना किसी कारण के अचानक हार्ड डिस्क फेलियर से बचना चाहते हैं। आपकी हार्ड डिस्क, चाहे मैकेनिकल या सॉलिडे-स्टेट ( SSD) है, आपके कंप्यूटर पर सभी फाइलों को स्टोर करती है और इसके बिना आपका पीसी स्टार्ट नहीं होगा। हार्ड डिस्क कभी-कभी विफल होती हैं, इस मामले में आपको एक नई हार्ड डिस्क खरीदनी पड़ती हैं। लेकिन इससे भी महंगा सौदा तब होता हैं, जब आपका सारा महत्वपूर्ण डेटा लॉस्ट हो जाता हैं, जब आपके पास इसका कोई बैकअप नहीं होता। मॉडर्न हार्ड डिस्क्स में Self-Monitoring, Analysis और Reporting Technology, या SMART जैसे कुछ होता हैं। इसका मतलब है कि ड्राइव स्वतः ही संभव एरर के लिए चेक करता है और इन्हें ऑपरेटिंग सिस्टम को रिपोर्ट करता है। अपने SMART डेटा के स्‍टेटस को कभी-कभी चेक कर, आप यह जान सकते हैं कि आपके ड्राइव के फेलियर होने का खतरा बढ़ रहा है या नहीं। और, यदि ऐसा हो रहा है, तो आप तुरंत अपने डेटा का बैकअप ले सकते हैं। यद्यपि बहुत सारे मुफ्त प्रोग्राम हैं जो कि आपके ड्राइव के SMART स्टेटस का रिपोर्ट आपको देंगे।अपनी हार्ड डिस्क हेल्थ की स्थिति को चेक करने के लिए आप  hdtune साइट पर विजिट कर चेक  है । 

हार्ड डिस्क एरर कैसे होते हैं?

आपके पीसी या लैपटॉप में सीडी/डीवीडी ड्राइव के अलावा, हार्ड डिस्क एकमात्र कंपोनेंट है जिसमें मुविंग पार्ट हैं, जो 7200 रेवोलुशन्स प्रति मिनट की स्‍पीड स्‍पीन होते हैं, चाहे आप अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रहे हों या नहीं। अकेले इस वजह से, wear & tear होता है और फाइल एरर या फिजिकल डिस्क पर बैड सेक्‍टर भी हो सकता है। इसके अलावा पीसी (विशेषकर लैपटॉप) में पॉवर सर्ज के कारण से भी यह हो सकता है।

हार्ड डिस्क चेक करने के लिए ( hdtune ) कैसे इंस्टॉल करें ?

मित्रो यदि अपका कम्पूटर चलते-चलते अचानक बार-बार बंद हो जा रहा। और आपको कम्प्यूटर बार-बार फार्मेट करवाना पड रहा है। तो ऐसे में सम्भव है कि आपके कम्प्यूटर का हार्डडिस्क फेल हो रहा है। यदि आप अपने हार्डडिस्क को चेक करना चाहते है कि आपका हार्ड डिस्क फेल हो रहा है या नही तो आप दिये गये निम्न स्टेप को फालो करे आप आसानी के साथ अपने कम्प्यूटर का हार्डडिस्क का हेल्थ चेक कर सकते है। 

स्टेप-01
  • सबसे पहले आप हार्ड डिस्क को चेक करने के लिए hdtune website  पर विजिट करे। 
  • अब आप स्क्रॉल करके नीचे और  hdtune के Filename में hdtubepro_575_trial.exe पर क्लिक कर डाउनलोड करे। 

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स्टेप-02
  • अब आप डबल क्लिक कर इंस्टॉल करें । 
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स्टेप-03
  • अब आप डबल क्लिक कर इंस्टॉल करें । 
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स्टेप-04
  • अब आप ( NEXT )  पर  करें । 
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स्टेप-05
  • अब आप ( I accept the agreement  ) पर चेक मार्क करे। 
  • अब ( NEXT ) बटन पर क्लिक करे। 
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स्टेप-06
  • अब आप C:\Program Files\HD Tune के लिए  ( NEXT )  पर  करें ।
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स्टेप-07
  • अब आप HD Tune के लिए  ( NEXT )  पर  करें ।
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स्टेप-08
  • अब आप Create a desktop icon  पर चेक मार्क करे। 
  • अब NEXT बटन पर क्लिक करे। 
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स्टेप-09
  • अब Install बटन पर क्लिक करते ही HD Tune आपका आसानी के साथ Install  हो जायेगा । 
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स्टेप-10
  • अब Finish  बटन पर क्लिक करे। 

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hdtune से हार्ड डिस्क कैसे चेक करे ?

HD Tune ड्राईव्‍ह के प्रदर्शन को मापता है, त्रुटियों की बारीकी से जाँच करता है, स्वास्थ्य की स्थिति (स्मार्ट) की जांच करता है, सुरक्षित रुप से सभी डेटा मिटा सकता है और बहुत कुछ।  HD Tune के नि: शुल्क संस्करण आपको आपके ड्राइव्‍ह के drive’s performance, retrieves SMART और error scan करने के लिए पर्याप्‍त सुविधाएं प्रदान   करता है । 

स्टेप-01
  • अब आप  Error Scan पर क्लिक करे। 
  • अब Start बटन पर आप  ही  क्लिक करते है , तो  HD Tune  आपके हार्डडिस्क के एरर को चेक करने लगता है। और लगभग  एक घंटे के बाद आपके हार्डडिस्क के एरर को प्रदर्शित करता है । 
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यदि आप हार्ड डिस्क फेल हो रहा, एरर कैसे चेक करें ? करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 

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फ्री टूल्स जो आपके हार्ड ड्राइव्ह के फेल होने की कर सकते है भविष्यवाणी!

 
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आपके कंप्‍युटर को ऐसा कौन सा डिवाइस है जो नाकाम हो जायें तो आप सब कुछ खो देते है? यह है हार्ड डिस्‍क। हार्ड के विफलता के कई कारण है – a power failure, overheating, mechanical or internal failure इ. डाटा को पुनः प्राप्त करना बहुत अधिक खर्चीला  होता है और इसकी कोई गारंटी नही होती। लेकिन अगर कोई हार्ड ड्रिईव्‍ह खराब होने कि भविष्‍यवाणी करें, तो शायद आप आपका कीमती  डेटा देरी होनें से पहले किसी दूसरी जगह  सेव  करके रखह  सकते है। सभी हार्ड डिस्‍क अचानक दुर्घटनाग्रस्‍त नही होता और आप को डेटा का बैकअप लेने कें लिए समय मिल सकता है। 

विंडोज 7 और 8 में आप मैन्युअली हार्ड डिस्‍क के स्‍वास्‍थ्‍य की जांच WMIC सें कर सकते है ?

Command prompt में wmic टाईप करके Enter करें। 

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  • बाद में “diskdrive get status” टाईप करकें Enter करें। 
  • अगर आपकों Ok का संदेश आया तो सब कुछ ठीक है, अन्‍यथा हार्ड डिस्‍क को SMART इन्फर्मेशन  पुन: प्राप्त करने में कुछ परेशानी हैं। 
  • विंडोज में आप error checking tool का उपयोग करके त्रुटि की जांच कर सकते हैं। जिस ड्राइव्‍ह कि जांच करनी है उसपर राईट क्लिक करे – Properties – Tools – Check now को क्लिक करे। 
  • लेकिन अब कई सारे प्रोग्रॅम उपलब्‍ध है जो ध्‍यान से आप के हार्ड ड्राइव्‍ह के स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिती पर नजर सखते है और समस्‍या आने पर तुरंत चेतावनी देते है। यहाँ 4 सबसे अच्‍छे और नि: शुल्क प्रोग्रॅम के बारे में आप जानेंगे। 

(01) CrystalDiskInfo:


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CrystalDiskInfo एक Hard Disk Drive(HDD) या Solid State Drive utility सॉफ्टवेयर है जो SMART- का समर्थन करता है। 

S.M.A.R.T. मतलब –

Supports a part of external USB disks

Monitoring health status and temperature

Alert Mail

Graph of S.M.A.R.T. information

Control AAM/APM settings

यह नि: शुल्क प्रणाली उपयोगिता अपने ड्राइव का स्वास्थ्य और स्थिति पर नज़र रखता है और एक कॉम्पैक्ट, पढ़ने में आसान इंटरफेस में जानकारी प्रदर्शित करता है। तापमान या हार्ड ड्राइव्‍ह की स्वास्थ्य असफल साबित हुई है तो यह आपको आगाह कर सकते हैं।  साथ ही हार्ड डिस्क शुरु किये कितने घंटे बित गये इसके बारें में आपको बताता है।   डाउनलोड करे : CrystalDiskInfo

(02) HD Tune:

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HD Tune ड्राईव्‍ह  के प्रदर्शन को मापता है, त्रुटियों की बारीकी से जाँच करता है, स्वास्थ्य की स्थिति (स्मार्ट) की जांच करता है, सुरक्षित रुप से सभी डेटा मिटा सकता है ।  और बहुत कुछ  HD Tune के नि: शुल्क संस्करण आपको आपके ड्राइव्‍ह के drive’s performance, retrieves SMART और error scan करने के लिए पर्याप्‍त सुविधा प्रदान करता है । Read Also:  हार्ड डिस्क फेल हो रहा, एरर कैसे चेक करें ?

  डाउनलोड करे  : HD Tune

( 03) HDDScan:

HDD स्कैन आपके हार्ड डिस्क के लिए एक परीक्षण उपकरण है । यह ड्राइव्‍ह कें सतह को स्कैन करता है और अत्यंत उपयोगी जानकारी एकत्र करके आपको देता है  । HDDScan हार्ड ड्राइव्‍ह प्रदर्शन का नियमित रूप से “स्वास्थ्य परीक्षण” के लिए उपयोगी हो सकता है । यह ड्राइव्‍ह के स्वास्थ्य के नुकसान की भविष्यवाणी कर सकते हैं । इसका आकार बहुत  कम है और bad blocks, bad sectors, और S.M.A.R.T. attributes के परीक्षण के उपयोगी है । इसके अतिरिक्त, यह हार्ड डिस्क तापमान पर नजर रखता है और हर एक परीक्षण का ग्राफ प्रदर्शित करता है । यह RAID arrays, Flash USB और  SSD drives को सपोर्ट करता है। 


( 04) DiskCheckup:
DiskCheckup निजी इस्तेमाल के लिए मुफ्त  है। यह उपयोगकर्ता को विशेष हार्ड डिस्क ड्राइव के SMART attributes पर नजर रखने के लिए अनुमति देता है।  DiskCheckup आपको SMART attributes के वर्तमान मूल्यों के साथ इस attribute के लिए Threshold value को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा DiskCheckup ड्राइव्‍ह के विफलताओं का पता लगाने built-in Disk Self Test (DST) संचालित करता है। यह आंतरिक के साथ ही बाहरी हार्ड ड्राइव को स्कैन करता है। आप इसे पॉपअप प्रदर्शित करने के लिए कन्फिगर कर सकते हैं या यह आपको ईमेल के माध्‍यम से जानकारी भेज सकता है। 

DiskCheckup एक ऐसा प्रोग्रॅम है, जो आपके हार्ड डिस्क के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए उपयोगी हो सकता है।यह अनुभवहीन उपयोगकर्ताओं के लिए आसान भी है। 

डाउनलोड करे  :  DiskCheckup

यह हमेशा सुनिश्चित करते रहे कि आपके पीसी कि हार्ड ड्राइव्‍ह का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहे क्‍योकी यह महत्‍वपूर्ण है।ऊपर दिये गये प्रोग्रॅम हार्ड ड्राइव्‍ह कि समस्‍या जानने और उसके स्वास्थ्य की स्थिति की पहचान करने के लिए उपयोगी हो सकते है ताकि दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले आप महत्‍वपूर्ण डेटा का बैकअप ले सके। यदि आप फ्री टूल्स जो आपके हार्ड ड्राइव्ह के फेल होने की कर सकते है भविष्यवाणी! करने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें। 


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C Language क्या है ?

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C एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो General Purpose के लिए उपयोग में लाई जाती है। आसान भाषा में यह एक कंप्यूटर की भाषा है जो कंप्यूटर को यह निर्देश देती है कि उसे किस तरह का काम करना है।आप तो जानते ही होंगे कि कंप्यूटर सिर्फ बाइनरी लैंग्वेज समझता है जिसे मशीनी भाषा कहा जाता है। हर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का एक compiler होता है जो कंप्यूटर स्क्रीन पर लिखे गए कोड को बाइनरी में बदल देता है और कंप्यूटर उसी कोड के अनुसार काम करता है।

किसी भी सॉफ्टवेयर या एप्लीकेशन को बनाने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का ही यूज़ किया जाता है. C Language एक बहुत पुरानी लैंग्वेज है जिसे 1972 के आसपास बनाया गया था. C बहुत ही Simple और Easy Language है। अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं की तुलना में. इसी लैंग्वेज के ऊपर कई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बनाएं गए है जैसे C++ , Java , JavaScript , PHP आदि।

इसलिए अगर हम C Language को सीख ले तो बाकी लैंग्वेज को सीखना काफी आसान हो जाता है। आज भी कई स्कूल में कंप्यूटर साइंस की फ़ील्ड में सबसे पहले C भाषा को ही पढ़ाया जाता है क्योंकि इसे आप आसानी से सीख और समझ सकते है. इसके Syntax और Grammar काफी आसान है. आपको शायद नहीं होगा कि माइक्रोसॉफ्ट की विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम C Language में ही बनी है।और अभी भी माइक्रोसॉफ्ट के कई प्लेटफॉर्म पर इसका इस्तेमाल होता है।

सी लैंग्वेज सिखने से पहले ये जानना जरुरी है की आखिर ये सी लैंग्वेज है क्या इसका क्या यूज़ है ये कब कब काम आता है और इसका कहा इस्तेमाल किया जाता है और C Programming Language सिखने के क्या क्या फायदे है (Advantages of c language in hindi) अडवानटेजस ऑफ़ सी लैंग्वेज।

सी लैंग्वेज एक कंप्यूटर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है आसान भाषा में कहे तो ये कंप्यूटर की भाषा है या फिर कहलो कोडिंग (Coding) है जिसका इस्तेमाल करके कंप्यूटर समझ पता है की हम उसे क्या कमांड यानि निर्देश दे रहे है इसके इस्तेमाल से आप फर्मवेयर (Firmware) या फिर एप्लीकेशन (Application) या फिर सॉफ्टवेर (Software) बना सकते है अगर इसे किताबी भाषा में कहे तो ये एक हाई लेवल (High Level) स्ट्रक्चर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Structured Programming Language) है।

C Language का इतिहास (history of c)

C Language की शुरुआत 1960 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में हो गई थी और उस समय इसे B Language के नाम से जाना जाता था। इसके बाद 1972 में Bell Labs के एक कंप्यूटर वैज्ञानिक ने इसमें सुधार करके इसे C Language का नाम दिया. उनका नाम डेनिस रिची था और इन्हीं को C Language का Inventor भी माना जाता है. उस समय ये Unix और Dos के लिए उपलब्ध था। और इन दोनों के लिए Compiler भी अलग अलग थे।

Feature Of C Language 

  • C भाषा की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है जिसके कारण यह एक पॉपुलर लैंग्वेज बनी और इतनी पुरानी होने के बाद भी इसका यूज़ हो रहा है। तो देखते हैं कि वो मुख्य विशषताएं कौन सी है –

  • C को  एक Middle Level Language माना जाता है क्योंकि इसमें उच्चस्तरीय और निम्नस्तरीय दोनों भाषाओं के गुण पाए जाते है।
  • इस लैंग्वेज का ज्यादा use System Programming के लिए होता है।
  • C एक Structured Programming Language होता है मतलब इसके प्रोग्राम को कई भागों में तोड़ा जा सकता है जिससे कि प्रोग्राम को समझने में काफी सहायता मिलती है।
  • C में बने हुए प्रोग्राम काफी Fast होते हैं और अन्य लैंग्वेज के मुकाबले इनका Execution बहुत तेज होता है।
  • इस लैंग्वेज का अपना खुद का Grammer है इसलिए इसमें Specific Syntax होते है जो इसे सरल और आसान बनाता है।
  • कुल मिलाकर C Language बहुत ही Easy और Powerful Language है जो कई तरह के प्रोग्रामिंग के लिए उपयोग में लाई जाती है।

C Language का उपयोग कहां कहां पर होता है ( Use of C Language )

C एक बहुत Powerful Language है क्योंकि इसका उपयोग बहुत ही High Level की चीज़ो में होता है।

In System Programming – C का सबसे ज्यादा इस्तेमाल System Programming यानि System Application बनाने में किया जाता है. जैसे Operating System , Compiler ,BIOS Etc. कई बड़े Operating System जैसे Windows , Linux और Unix को C Language में ही बनाया गया है।

In Database Software – विभिन्न प्रकार के Database के Software को C की ही मदद से बनाया जाता है. Database की मदद से किसी भी Application के Data को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से रखा जाता है. C भाषा से ही कई Popular Database Management Software जैसेMySQL और Oracle को बनाया गया है।

In Graphical Application – कई तरह के GUI ( Graphical User Interface ) वाले Application और Game C भाषा से ही बनते है. प्रसिद्ध Graphic Designer Adobe के सॉफ्टवेयर Photoshop को भी बनाने में सी का इस्तेमाल किया गया था।

In Networking Device – C भाषा का use Network Driver और Networking Device बनाने में किया जाता है. किसी भी Network वाले device में एक सॉफ्टवेयर होता है ताकि उस device से चलने वाले Network को मैनेज किया जा सके. इसके अलावा कंप्यूटर सर्वर को भी मैनेज करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

C Programming में इस्तेमाल होने वाले कुछ Steps

इस लेख C Language in hindi में हम समझेंगे कि एक C Program को बनाने के लिए कितने Steps से होकर गुजरना पड़ता है –
  • Program Writing : यह पहला Stage होता है किसी भी C Program की Life Cycle का. इसमें C के Code Editor में C Language की Grammar और Syntax के Rule के हिसाब से Program को लिखा जाता है. इस लिखे गए Program को Source Program या Source Code कहा जाता है।
  • Program Compiling : Program Writing के Complete होने के बाद Program को Compile किया जाता है. मतलब Compiler उस Source Program को computer acceptable means machine language में ट्रांसलेट कर देता है ताकि कंप्यूटर उसे एक्जीक्यूट कर सके।
  • Program Execution : C Programming की यह Last Stage है जिसमें Program को Run होने लायक बनाया जाता है. मतलब Source Program में दिए गए Instructions को एक्जीक्यूट किया जाता है और Finally उस Program का Output आ जाता है।

सी लैंग्वेज ( C Programming Language ) कैसे सीखे

कंप्यूटर की पढाई में आज कल विद्यार्थियों काफी तेजी से रूचि यानि की इंटरेस्ट बढ़ रहा है कोई कंप्यूटर में सॉफ्टवेर इंजिनियर (Software Engineer) बनना चाहता है तो कोई कंप्यूटर हार्डवेयर इंजिनियर (Computer Hardware Engineer) तो कोई हैकर बनना चाहता है आपको इस कंप्यूटर की फिल्ड में कई सारे कोर्स मिल जायेगे जिसमे से एक कोर्स बहोत पोपुलर है। जो   की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Computer Programming Language) है जिसे हम आम भाषा में कोडिंग करना भी कहते है लेकिन अब सवाल उठता है की आखिर कैसे सीखे कोडिंग (Coding) है प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कैसे सीखे ? अब प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कई सारे होते है जैसे की सी लैंग्वेज (C Language) , जावा लैंग्वेज (Java Language) , सी प्लस प्लस (C++) इत्यादि तो यहाँ पर आपको एक लैंग्वेज सबसे पहले आना जरुरी है सी लैंग्वेज (C Language) एक सबसे इजी और आसान लैंग्वेज है अगर आपको सी लैंग्वेज सिख लेते हो तो इसके बाद आप बाकी लैंग्वेज आसानी सिख सकते है।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Computer Programming Languages) में C लैंग्वेज बहोत ही पोपुलर है और इसका प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल अभी भी कई सॉफ्टवेर बनाने में किया जाता है ये एक बेसिक्स और बहोत ही इजी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज माना जाता है अगर आपने सी लैंग्वेज सिख लिया तो बाकी कंप्यूटर लैंग्वेज भी आसानी से सिख सकते है जावा लैंग्वेज (Java Language) , सी प्लस प्लस (C++) इत्यादि तो चलिए सीखते है C प्रोगाम्मिंग लैंग्वेज (C Programming Language) हिंदी में यानि की कोडिंग कैसे करे (How to code information in hindi) और कैसे एक छोटा सा सी लैंग्वेज में प्रोग्राम बनाये।

सी लैंग्वेज को पूरा सीखना कोई एक दिन का काम नहीं है इसके लिए आपको महीनो लग सकते है साथ में या पर अपने कोडिंग को सुधारने के लिए आपको रोजाना प्रैक्टिस करना भी जरुरी है कोडिंग में तो यहाँ पर में आपको कुछ बेसिक्स बताने वाला है सी लैंग्वेज में जैसे की सिंटेक्स (Syntax) क्या होता है , डेटा टाइप्स (Data Types) क्या होते है और किस सॉफ्टवेर में सी लैंग्वेज सिखा जाता है साथ में एक छोटा सा प्रोग्राम बनाना भी बताऊंगा जिसे आपको सी लैंग्वेज का बेसिक्स (Basics) आजायेग यानि अगर आप बिगिनर (Beginner) हो तो आपके लिए ये जानना जरुरी है।

सी लैंग्वेज सिखने के लिए यानि कोडिंग की प्रैक्टिस करने के लिए आपको एक सॉफ्टवेर की जरुरत होगी वैसे आपको इन्टरनेट में कई सरे सॉफ्टवेर मिल जायेंगे लेकिन सी लैंग्वेज के लिए Turbo C/C++ काफी पोपुलर सॉफ्टवेर है जहा पे आप सी लैंग्वेज के कोडिंग की प्रैक्टिस कर सकते है।

 स्टेप 1 :  सॉफ्टवेर डाउनलोड करे  
अगर आपको कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में सी लैंग्वेज (C Language) सीखना तो इसके लिए आपको प्रैक्टिस करने की काफी जरुरत होगी की प्रैक्टिस से ही आप अपने कोडिंग स्किल को और बेहतर बना सकते है और इसके लिए आपको एक सॉफ्टवेर की जरुरत होगी जहा पर आपको सी लैंग्वेज (C Language) के प्रोग्राम बनाने होंगे जहा पर आप प्रैक्टिस कर सकते है इस सॉफ्टवेर का नाम है टर्बो सी (Turbo C/C++) ये सॉफ्टवेर फ्री है इसे आपको यहाँ डाउनलोड पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते है।⇒ TURBO C/C++ Downlode here..

स्टेप 2 :  C Language के बेसिक्स चीजों को समझे
जैसे ही आप इस सॉफ्टवेर को डाउनलोड कर लेते है इसके बाद अब आपको सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language)के कुछ बेसिक्स समझने होंगे जैसे की सिंटेक्स क्या है इसका क्या क्या काम है हैडर फाइल्स (Header Files) क्या होते है इसके लिए आप एक छोटा सा  सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language) का हेल्लो वर्ल्ड (Hello World) प्रोग्राम देख सकते है और उसमे आपको समझ आजायेगा की हैडर फाइल्स क्या है । main() क्या होता है इत्यादि ये सब चीज़ बेसिक्स समझे पहले।

स्टेप 3 :  अब Data Types और variable का कांसेप्ट समझे
जैसे ही आप सी लैंग्वेज का बेसिक्स पता चल जाता की सिंटेक्स (Syntax) क्या होता है ? हैडर फाइल्स (Header Files) क्या होता है इसके बाद आपको समझना होगा की आखिर ये डेटा टाइप्स (Data Types) क्या होते है वेरिएबल नेम (Variables name) क्या होते है क्यों कंप्यूटर के मेमोरी (Memory) में आप किसी भी डाटा को ऐसे ही स्टोर नहीं कर सकते उसका नाम और डाटा टाइप डिक्लेअर करना जरुरी है। ये चीज़े बेसिक्स में आती है जो आपको पता होना चाहिए तभी आप एक प्रोग्राम बना सकते है सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language) में।

स्टेप 4 :  अब function और keywords का यूज़ समझे
ये सभी चीज़े समझने के बाद अब आपको समझना होगा की ये फंक्शन क्या है ? सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language) , कीवर्ड्स (Keywords) क्या होते है जैसे की printf या scanf क्या है इसका क्या यूज़ है %d , %f , %s क्या है कब लगाया जाता है ये सब चीज़े समझना बहुत जरुर है वरना बहोत कांफुसिंग हो जाता बाद में प्रोग्राम बनाने में तो इन सभी चीजों का कांसेप्ट पहले क्लियर हो तो ज्यादा बेहतर रहता है ताकि प्रोग्राम में दिक्कत न हो।

स्टेप 5 :  अब एक छोटा सा प्रोग्राम बनाये
C -Language -क्या -है


ये सभी चीज़े सिखने के बाद अब आप आसानी से छोटा मोटा प्रोग्राम सी लैंग्वेज में बना सकते है चाहे वो हेल्लो वर्ल्ड का प्रोग्राम हो या दो नंबर को जोड़ने वाला प्रोग्राम हो आप इन्टरनेट में सर्च कर सकते है C Language simple Program आपको कई सारे प्रोग्राम मिल जायेंगे जिन्हें आप खुद से प्रैक्टिस करके समझ सकते है।

स्टेप 6 :  अब एक C language की बुक ख़रीदे
जैसे ही आप सब कुछ बेसिक्स समझ जाते है एक छोटा मोटा प्रोग्राम बना लेते है इसके बाद अब आपको एक बुक (Book) यानि किताब लेना बहोत जरुरी है सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language) आप सी भी बुक ले सकते जिससे आपको टॉपिक वाइज समझने में आसानी होगी क्यों की अगर आप ऐसे इन्टरनेट में सर्च करेंगे तो आपको थोडा मुस्किल हो जायेगा की कोनसा टॉपिक पहले समझे तो कोसिस करे एक बुक लेले हेल्प क लिए बाकी आप इन्टरनेट का इस्तेमाल भी कर सकते है।

तो इस तरह से आप आसानी से सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (C Programming Language) सिख सकते घर पर ही अगर आप सीखना चाहते है लेकिन लिए आपको अच्छे से और मन लगाके सीखना होगा आप एक अच्छे कोडर या प्रोग्रामर (Programmer) बन सकते है।

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