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दो साल पहले जिसे अमेरिका ने मारने का दावा किया था वह तालिबानी बना चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, सोशल मीडिया पर वायरल

 
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इसी हफ्ते मंगलवार को अफगानिस्तान के अंतरिम सरकार की घोषणा हुई है। इसमें कारी फसीहउद्दीन का नाम भी शामिल जिसे दो साल पहले जाने का दावा किया गया था। कारी फसीहउद्दीन को तालिबान सरकार में रक्षा मंत्रालय में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया गया है।

काबुल: काबुल पर पिछले महीने कब्जे के बाद तालिबान ने इसी हफ्ते मंगलवार को अफगानिस्तान के अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी। इसके साथ ही समावेशी सरकार बनाने के तालिबान के वादे की पोल भी खुल गई। खास बात ये भी है कि तालिबान की अंतरिम सरकार के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में हैं।

कारी फसीहउद्दीन बना चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ

तालिबान सरकार में कारी फसीहउद्दीन को रक्षा मंत्रालय में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया गया है। दिलचस्प ये है कि कारी को मारने का दावा दो साल पहले अमेरिका और अफगानिस्तान के रक्षा विभाग की ओर से किया गया था। जबकि वह जिंदा है।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की ओर से 6 सितंबर 2019 को उसे मारे जाने का दावा किया गया था। इस बारे में एक ट्वीट भी किया गया था। इसमें कहा गया था रात 2.55 बजे एयरस्ट्राइक में कारी फसीहउद्दीन को मार दिया गया है।

तालिबान के मंत्रिमंडल में इनामी आतंकी भी शामिल

अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद, उनके दो उपप्रधानमंत्रियों समेत तालिबान की अंतरिम सरकार के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में हैं।

वैश्विक आतंकवादी घोषित सिराजुद्दीन हक्कानी को कार्यवाहक गृहमंत्री बनाया गया है वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी के चाचा खलील हक्कानी को शरणार्थी मामलों का कार्यवाहक मंत्री नामित किया गया है। सिराजुद्दीन के सिर पर पर एक करोड अमेरिकी डॉलर का इनाम घोषित है।

कार्यवाहक रक्षामंत्री मल्ला याकूब, कार्यवाहक विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्ताकी, उपविदेश मंत्री शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनिकजई भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1988 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध है।

मंत्रिमंडल में कोई हजारा सदस्य नहीं है। सारे मंत्री लगभग पहले से ही स्थापित तालिबान नेता हैं जिन्होंने 2001 से अमेरिकी गठबंधन सेना के विरूद्ध लड़ाई लडी है। अंतरिम मंत्रिमंडल में किसी महिला को भी जगह नहीं मिली है।

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तालिबानी जुल्म की तस्वीर आई सामने, सच दिखाने पर पत्रकारों की बेरहमी से पिटाई

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 अफगानिस्तान में तालिबान का क्रूर चेहरा लगातार दिख रहा है. प्रदर्शनकारियों के लिए जहां फरमान जारी किए जा रहे हैं, वहीं पत्रकारों को सच दिखाने के लिए सजा दी जा रही है. तालिबान ने कई पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है. इतना ही नहीं कई को हिरासत में लेकर बुरी तरह पीटा भी जा रहा है. तालिबान द्वारा दो पत्रकारों की पिटाई की तस्वीर सामने आई है. जिसने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. अफगानिस्तान को कवर करने वाले द न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस तस्वीर को शेयर किया है. इस तस्वीर में तालिबान की क्रूरता की कहानी बयां हो रही है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कल काबुल में दो पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया बुरी तरह से पीटा गया है.

वहीं लॉस एंजलिस के पत्रकार मरकस याम ने ट्वीट कर दावा किया कि तालिबानी जुल्म के शिकार ये दोनों अफगानी पत्रकार इटिलाट्रोज के रिपोर्टर हैं, जिनका नाम है नेमत नकदी ताकी दरयाबी. इन्हें महिलाओं के प्रदर्शन को कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया था. इन्हें तालिबानी हुकूमत द्वारा बुरी तरह पीटा गया.

इन्होंने अपने ट्वीट में एक हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है- जर्नलिज्म इज नॉट अ क्राइम. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि पत्रकारों के पीठ पर कितने गहरे जख्म बने हैं. इन्हें देखकर रूह कांप जा रही है. तालिबान की हैवानियत की बानगी ये तस्वीर है.

बता दें कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मंगलवार को रैली को तितर-बितर करने के लिए तालिबान लड़ाकों ने गोलीबारी की प्रदर्शन को कवर कर रहे कई अफगान पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया था.

दरअसल, पाकिस्तान तालिबान की मदद कर रहा है. पंजशीर में पाकिस्तान ने तालिबान लड़ाकों की मदद की. जिसका विरोध किया जा रहा है. काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के सामने अफगानिस्तान के आंतरिक मामले में पाकिस्तान के हस्तक्षेप के खिलाफ प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारियों को कवर करनेवाले पत्रकारों को तालिबान गिरफ्तार कर यातनाएं दे रहा है.

इधर जिन पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है उनकी रिहाई की मांग हो रही है. एक पत्रकार ने मीडिया से बताया कि तालिबान ने उन्हें सजा दी. मुझे जमीन पर नाक रगड़ने प्रदर्शन को कवर करने के लिए माफी मांगने पर मजबूर किया.

बता दें कि तालिबान सरकार बनने के बाद प्रदर्शन करने वालों पर भी रोक लगा दी गई है. विरोध-प्रदर्शन करने से 24 घंटे पहले संबंधित मंत्रालय को इसकी जानकारी देने को कहा गया है.



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नॉर्दर्न एलायंस का दावा-पंजशीर का आधे से ज्यादा हिस्सा अभी भी कब्जे में, मसूद भी यहीं

 
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अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद भी उसे पंजशीर इलाके में चुनौती मिल रही है. तालिबान पंजशीर पर अपने कब्जे का दावा कर रहा तो लेकिन नॉर्दर्न एलायंस की ओर से भी दावा किया जा रहा है कि आधे से ज्यादा हिस्से में अभी भी उसी का कब्जा है. नॉर्दर्न एलायंस का यह भी दावा है कि अहमद मसूद अमरुल्ला सालेह इस वक्त अफगानिस्तान में ही हैं. पिछले कुछ दिनों से कहा जा रहा था कि अहमद मसूद इस वक्त ताजिकिस्तान में हैं लेकिन अब इस पर सफाई दी गई है.

तालिबान को बॉर्डर पार से मिल रहा समर्थन

एक टीवी इंटरव्यू में अली नज़ारी ने साफ दिया कि पंजशीर पर अभी तालिबान (Taliban) का कब्जा नहीं है, 60 फीसदी पंजशीर इस वक्त हमारे पास ही है. तालिबान ने शेर की गुफा में कदम रखा है, उसे इसकी कीमत चुकानी ही होगी. NRF के प्रवक्ता ने साफ किया कि तालिबान को बॉर्डर के पार (पाकिस्तान) से भी समर्थन मिल रहा है. अफगानिस्तान के मसले पर दुनिया के रुख को लेकर अली नज़ारी ने कहा कि दुनिआ ने जिस तरह अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट पर अपनी आंखें बंद की हैं, वह बहुत ही निराशाजनक है.

पिछले दिनों तालिबान ने दावा किया था कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है. उसने कुछ तस्वीरें भी जारी की थी. पंजशीर की जंग में पाकिस्तान के दखल तालिबान का साथ देने से अफगानिस्तान के लोगों में काफी गुस्सा है वो लगातार पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी गो-बैक पाकिस्तान आजादी-आजादी के नारे लगा रहे हैं. इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हो रही हैं. वैसे तो अफगानिस्तान के अलग-अलग शहरों में महिलाएं पिछले कई दिनों से अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन काबुल में पहली बार रात में प्रदर्शन हुए हैं.


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''तालिबान की अंतरिम सरकार के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में हैं।''

 
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अफगानिस्तान (Afghanistan) में काफी इंतजार के बाद अब तालिबान (Taliban) की सरकार बन गई है. 20 सालों बाद आधिकारिक रूप से अब तालिबान मध्य एशिया का दिल कहे जाने वाले अफगानिस्तान पर राज करेगा. हालांकि इससे भी खास बात है, तालिबान की सरकार चलाने के लिए चुने गए नुमाइंदे. जिसमें सबसे खतरनाक नाम शामिल है खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क (Haqqani Network) के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी (Sirajuddin Haqqani) का जिस पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है. अगर इंडियन करेंसी में इसे देखें तो यह 37 करोड़ रुपए के करीब होता है.

सिराजुद्दीन हक्कानी दुनिया भर के लिए तो खतरनाक है ही, लेकिन उसने भारत को भी कम जख्म नहीं दिए हैं. सिराजुद्दीन हक्कानी और उसके पिता ने 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमला कराया था. जिसमें 58 लोग मारे गए थे. अब सवाल उठता है कि जो तालिबान शुरू से कहता आया है कि वह भारत से अच्छे संबंध चाहता है. और अफगानिस्तान में एक स्थिर सरकार बनाना चाहता है, ताकि उसे वैश्विक रूप से मान्यता मिल सके. ऐसे में सिराजुद्दीन हक्कानी जैसे खूंखार आतंकवादी को अपने सरकार में गृह मंत्री जैसा पद देना क्या यह नहीं दर्शाता कि तालिबान की वह बात केवल हवा हवाई थी.

सिराजुद्दीन हक्कानी का नाम उन लोगों में शामिल है जिन्होंने अफगानिस्तान में फिदायीन या आत्मघाती हमलावरों की एक फौज खड़ी करी है. पाकिस्तान के वजीरिस्तान में रहने वाला सिराजुद्दीन हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क का सरगना साल 2001 के बाद बना. इसने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी गहरे जख्म दिए हैं. साल 2014 में पेशावर के एक स्कूल में हमला हुआ था, जिसमें 200 बच्चे मारे गए थे. उसका मास्टरमाइंड भी हक्कानी नेटवर्क ही था. अमेरिका ने हक्कानी नेटवर्क को 2012 से ही बैन कर रखा है

तालिबान की नई सरकार में भारत के लिए क्या संदेश
तालिबान की जो नई सरकार बनी है अगर उसे ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि यह सरकार भारत के बजाय पाकिस्तान के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ नजर आता है. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि अफगानिस्तान की नई सरकार में खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क और कंधार केंद्रित तालिबान समूह का कैबिनेट में वर्चस्व बताता है कि दोहा स्थित जिस तालिबान ग्रुप ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वार्ता शुरू की थी और नई दिल्ली से भी संपर्क किया था उसे कहीं ना कहीं किनारे कर दिया गया है. तालिबान की नई कैबिनेट में 33 में से 20 कंधार केंद्रित तालिबान समूह और हक्कानी नेटवर्क के लोग हैं. जिन का झुकाव कट्टरपंथी विचारधारा और पाकिस्तान की ओर ज्यादा है.

वहीं बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सिराजुद्दीन हक्कानी जो हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख है, उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का सबसे खास आदमी माना जाता है. 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर हमला हो या फिर 2009 से 2010 के बीच हक्कानी नेटवर्क द्वारा भारतीयों और भारत के हितों को निशाना बनाना हो. इन सब के पीछे आईएसआई के हाथ का ही दावा किया जाता है. और आईएसआई के लिए सारा काम सिराजुद्दीन हक्कानी करता आया है.

बिल्कुल नहीं बदला तालिबान
अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से ही जिस तरह से तालिबान पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीट रहा था कि वह अब 90 के दशक वाला तालिबान नहीं है और वह अफगानिस्तान में एक स्थिर सरकार चाहता है, उस पर पानी फिर गया है. जिसे वैश्विक रूप से मान्यता मिली और अन्य देशों से भी वह बेहतर संबंध चाहता है. लेकिन अपनी नई सरकार की घोषणा के बाद उसने यह बात साफ कर दी कि तालिबान आज भी बिल्कुल उसी विचारधारा और उसी सोच से आगे बढ़ रहा है, जैसे वह 90 के दशक में था.

तालिबान की नई सरकार में 33 मुल्ला हैं और 4 ऐसे लोग हैं जिन पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है. महिलाओं को हक देने और सरकार में शामिल करने की बात करने वाले तालिबान ने अपनी नई सरकार में किसी भी महिला को जगह नहीं दी है. ऊपर से सिराजुद्दीन हक्कानी जैसे खूंखार आतंकवादियों को अफगानिस्तान का गृह मंत्री बनाकर तालिबान ने साफ कर दिया है कि वह शायद ही किसी देश के साथ बेहतर संबंध बना सके या फिर उसकी सरकार को वैश्विक मान्यता मिल सके.

सिराजुद्दीन हक्कानी केवल भारत के लिए ही नहीं अमेरिका और ब्रिटेन के लिए भी चुनौती
हक्कानी नेटवर्क का सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी जिस पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है. वह भारत के लिए चुनौती तो है ही लेकिन साथ ही साथ अमेरिका और ब्रिटेन के लिए भी खतरे की घंटी है. अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हुआ और तालिबान ने जिस तरह से बयानबाजी शुरू कि वह पहले वाला तालिबान नहीं रहा और अफगानिस्तान में एक स्थिर सरकार चाहता है. दुनिया के अन्य देशों से वह बेहतर संबंध चाहता है और अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल वह किसी भी देश के खिलाफ नहीं करेगा, इन बयानों ने कहीं ना कहीं यूरोपीय देशों को कुछ हद तक मना लिया था कि नई तालिबानी सरकार को शायद वैश्विक रूप से मान्यता मिल जाए.

हालांकि अब सिराजुद्दीन हक्कानी जैसे खूंखार आतंकवादियों को अफगानिस्तान सरकार का गृह मंत्री नियुक्त कर तालिबान ने अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार ली है. ऊपर से जो अमेरिका तालिबान से बातचीत करने की बात कर रहा था समझ नहीं आता कि वह अब उस आतंकवादी से कैसे सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत करेगा, जिस पर उसने खुद 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है. इसी सिराजुद्दीन हक्कानी ने 2017 में काबुल में हमला करवाया था जिसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.


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UNSC की ब्लैकलिस्ट में शामिल 14 खूंखार दहशतगर्द तालिबान सरकार में मंत्री, टेंशन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय

 
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काबुल: अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार का ऐलान हो गया है। तालिबान की अंतरिम सरकार के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकी काली सूची में नामित हैं। इनमें प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद, उनके दोनों डेप्युटी और गृहमंत्री शामिल हैं। इनके इतिहास को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक आतंकवादी घोषित सिराजुद्दीन हक्कानी को कार्यवाहक गृहमंत्री बनाया गया है वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी के चाचा खलील हक्कानी को शरणार्थी मामलों का कार्यवाहक मंत्री नामित किया गया है। सिराजुद्दीन के सिर पर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम घोषित है। कार्यवाहक रक्षामंत्री मल्ला याकूब, कार्यवाहक विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्ताकी, उपविदेश मंत्री शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनिकजई भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1988 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध है। इसे तालिबान प्रतिबंध समिति के नाम से भी जाना जाता है।

बीबीसी ऊर्दू ने खबर दी, ''तालिबान की अंतरिम सरकार के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में हैं।'' अफगानिस्तान के 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में चार ऐसे नेता शामिल हैं जो तालिबान फाइव में शामिल थे। उन्हें गुआंतानामो जेल में रखा गया था। उनमें मुल्ला मोहम्मद फाजिल उप रक्षामंत्री), खैरूल्लाह खैरख्वा सूचना एवं संस्कृति मंत्री), मुल्ला नूरुल्लाह नूरी सीमा एवं जनजातीय विषयक मंत्री) तथा मुल्ला अब्दुल हक वासिक खुफिया निदेशक) शामिल हैं।

इस समूह के पांचवें सदस्य मोहम्मद नबी उमरी को हाल में पूर्वी खोस्त प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया गया। तालिबान फाइव नेताओं को 2014 में ओबामा प्रशासन ने रिहा किया था। फाजिल और नूरी पर 1998 में शिया हजारा, ताजिक और उज्बेक समुदायों के नरसंहार का आदेश देने का आरोप है। तालिबान ने एक ऐसी समावेशी सरकार का वादा किया था जो अफगानिस्तान की जटिल जातीय संरचना का परिचायक हो लेकिन मंत्रिमंडल में कोई हजारा सदस्य नहीं है। मंगलवार को घोषित किये गये सारे मंत्री पहले से ही स्थापित तालिबान नेता हैं जिन्होंने 2001 से अमेरिकी नीत गठबंधन सेना के विरूद्ध लड़ाई लडी।

अंतरिम मंत्रिमंडल में किसी महिला को भी जगह नहीं मिली है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला हसन को संयुकत राष्ट्र प्रतिबंध रिपोर्ट में तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का करीबी बताया गया है। वह फिलहाल निर्णय लेने वाले शक्तिशाली निकाय रहबरी शूरा के प्रमुख हैं। दोनों उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और मौलवी अब्दुल सलाक हनाफी भी संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में हैं और उन पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल रहने के आरोप हैं।

अंतरिम सरकार की घोषणा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस आईएसआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हमीद की पिछले सप्ताह की अघोषित काबुल यात्रा के बाद की गयी है। हक्कानी नेटवर्क के शीर्ष नेताओं, जिनके बारे में समझा जाता है कि उनके आईएसआई से संबंध है, को शामिल करना पाकिस्तान खासकर उसकी खुफिया एजेंसी का तालिबान पर प्रभाव का संकेत है।


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पंजशीर पर तालिबान के हमले के खिलाफ खुलकर सामने आया ईरान

 
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तेहरान: पंजशीर प्रांत पर तालिबान के हमलों के खिलाफ ईरान खुलकर सामने आ गया है। ईरान ने हमलों की कड़ी निंदा करते युद्धरत पक्षों से हुए विवादों को सुलझाने के लिए आपसी बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। ईरानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादा ने राजधानी तेहरान में क्षेत्र की स्थिति ङ्क्षचता का विषय है। किसी भी पक्ष को स्थिति को भाइयों की हत्या में परिणत नहीं होने देना चाहिए।

तालिबान राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता सोहेल शाहीन ने कहा कि हम अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में अमरीका की संभावित भूमिका का स्वागत करते हैं। एक रूसी चैनल के साथ एक साक्षात्कार में शाहीन ने कहा कि तालिबान वाशिंगटन से संबंधों के लिए तैयार है। अगर अमरीका अफगानिस्तान के पुनॢनर्माण में भूमिका निभाना चाहता है तो हम उसका स्वागत करेंगे। तालिबान का इसराईल के साथ कोई संबंध नहीं होगा।

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अफगानिस्तान में तालिबान पत्रकारों के खिलाफ कर रहा है क्रूर व्यवहार

 
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तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। मंगलवार को तालिबान ने उसके खिलाफ रैली कर रहे लोगों पर फायरिंग भी की। अफगानिस्तान में कई पत्रकारों का कहना है कि तालिबान उनके खिलाफ क्रूर व्यवहार भी कर रहा है। अफगानिस्तान में चल रहे प्रदर्शन को कवर कर रहे एक पत्रकार ने न्यूज एजेंसी 'AFP' से बातचीत में कहा कि उनका प्रेस आईडी कार्ड और कैमरा तालिबान ने छीन लिया। उन्होंने कहा कि, 'तालिबान ने मुझे पैर से मारा।' अफगान में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के पास लोगों ने प्रदर्शन किया है। यह लोग पाकिस्तान पर तालिबान को समर्थन देने का आरोप लगा रहे हैं। तालिबान ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर पकड़े गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

तालिबान ने एक अफगानी पत्रकार को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में पत्रकार ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर न्यूज एजेंसी 'AP' से बातचीत में कहा कि, 'उनलोगों ने मुझे जमीन पर नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया और फिर इस प्रदर्शन को कवर करने के लिए माफी भी मंगवाई।' उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में पत्रकारों के लिए काम करना बेहद मुश्किल हो चुका है।

अफगानिस्तान के 'TOLO' चैनल ने बताया कि उनके कैमरामैन वाहिद अहमदी को तालिबान ने गिरफ्तार कर लिया था। पिछले महीने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद ऐसी कई खबरें आई हैं जिसमें तालिबानियों द्वारा पत्रकारों को पीटने और उन्हें धमकी देने की बात कही गई है। जर्मनी के चैनल 'Deutsche Welle' ने कहा कि तालिबानी लड़ाकू घर-घर जाकर उनके पत्रकारों की तलाश कर रहे हैं। वो ना सिर्फ उनके पत्रकारों को गोली मार रहे हैं बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी मौत के घाट उतार रहे हैं। कई पत्रकार तालिबान की पिटाई से घायल भी हुए हैं।


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अफगानी आवाम ने तालिबान को दिखाया आईना- 'पाकिस्तानियों अफगानिस्तान छोड़ो, हमें चाहिए आजादी'

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कई पुरुष और महिलाएं काबुल की सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, क्योंकि उनका दावा है कि पंजशीर प्रांत में पाकिस्तान के विमानों ने हवाई हमले किए हैं। वे काबुल में पाकिस्तानी दूतावास के गेट पर जमा हो गए हैं और कहा है कि वे अफगानिस्तान में कठपुतली सरकार का समर्थन नहीं करते हैं और एक समावेशी सरकार की मांग की है।

खामा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पंजशीर प्रांत में प्रतिरोध मोर्चे के सह-नेता अहमद मसूद के एक वॉयस क्लिप में अफगानिस्तान के लोगों से तालिबान के खिलाफ फिर से विरोध करने का आह्वान करने के बाद लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारी 'पाकिस्तान को मौत' के नारे लगा रहे थे और पाकिस्तानी दूतावास को अफगानिस्तान छोड़ने के लिए कहा। काबुल में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए नारों में से थे, 'आजादी', 'अल्लाह अकबर', 'हम कैद नहीं चाहते'।

तालिबान लड़ाकों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की लेकिन वे अभी भी विरोध कर रहे थे। इस बीच बल्ख और दाइकुंडी प्रांतों में भी लोग सड़कों पर उतर आए और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की।पंजशीर प्रांत में हवाई हमले पर ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है और देश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बात की जांच करने को कहा है कि उन्होंने विदेशी जेट विमानों का हस्तक्षेप क्या कहा।





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अफगानिस्तान में गीत-संगीत पर पाबंदी, तालिबान ने नेशनल म्यूजिक इंस्टीट्यूट में वाद्य यंत्रों को किया नष्ट

 
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तालिबान ने काबुल स्थित नेशनल म्यूजिक इंस्टीट्यूट से वाद्य यंत्रों को नष्ट कर दिया है. तालिबान का यह कदम अफगानिस्तान गीत- संगीत पर पाबंदी लगाने की घोषणा है. तालिबान राज शरिया कानूनों से संचालित हो रहा है. जिसमें गीत-संगीत महिलाओं की आजादी पर प्रतिबंध है. काबुल के नेशनल मयूजिक इंस्टीट्यूट से बाद्य यंत्रों को नष्ट करने की घटना को अफगानिस्तान के बुद्धजीवी बेहद खफा हैं इस घटना को "The day the music died in Afghanistan" "जिस दिन अफगानिस्तान में संगीत की मृत्यु हुई" के रूप में याद कर रहे हैं. अफगानिस्तान के जाने-माने पत्रकार हाफिज अहमद मियाखेल ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जताई है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक (एएनआईएम) अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्थित है. इस संगीत स्कूल की स्थापना 2010 में अफ़ग़ान-ऑस्ट्रेलियाई नृवंशविज्ञानी डॉ. अहमद नासर सरमस्त ने की थी, यह अफ़ग़ान पश्चिमी संगीत दोनों की ट्रेनिंग देता है. यह एक सह-शिक्षा संस्थान है जहां लड़के लड़कियां साथ-साथ गीत-संगीत सीख सकते हैं. सरमस्त अफ़ग़ान शिक्षा मंत्रालय के बीच एक समझौते के अनुसार, स्कूल असाधारण रूप से प्रतिभाशाली छात्रों वंचित बच्चों दोनों के लिए स्थापित किया गया था.

लेकिन अब अफगानिस्तान के नये निजाम में संगीत महिलाओं के लिए कोई स्थान नहीं है. संगीत विद्यालयों वाद्य यंत्रों को नष्ट किया जा रहा है तो अपने अधिकारों की मांग कर रही महिलाओं को पीटा जा रहा है. तालिबान के एक नेता ने घोषणा करते हुए पूरे अफगानिस्तान में म्यूजिक पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है महिलाओं के लिए भी तालिबान ने नये नियमों की घोषणा कर दी है. तालिबान ने कहा कि अगर महिलाएं तीन दिनों से ज्यादा के लिए घर से बाहर निकलती हैं, तो उनके साथ कोई ना कोई परिवार का पुरूष सदस्य होना अनिवार्य है.

तालिबानी नेता बार-बार यह कहते रहे कि इस बार उनका शासन पिछली सरकार की तुलना में उदार होगा. लेकिन यह उदारता प्रेस कांफ्रेंस तक ही सीमित होकर रह गया. तालिबान के राज में न सिर्फ संगीत महिलाएं बल्कि मीडिया के लिए भी सम्मानजनक स्थान नहीं है.

तालिबान काबुल में महिला प्रदर्शनकारियों से सख्ती से पेश आ रही है. अफगानिस्तान में एक महिला एक्टिविस्ट ने तालिबान पर उनकी बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है. यह महिला एक्टिविस्ट काबुल में एक प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर किये गये इस प्रदर्शन में शामिल इस महिला कार्यकर्ता का एक वीडियो भी सामने आया है. इस वीडियो में उनके सिर पर गहरी चोट नजर आ रही है खून उनके चेहरे तक नजर आ रहा है.

अपने अधिकारों की मांग करते हुए काबुल में प्रदर्शन करती महिलाओं को पिटाई करते हुए कई चित्र वीडियो वायरल हुए हैं. जिसमें महिलाओं को बेरहमी से पीटा जा रहा है.


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अस्थिरता पैदा करने के विदेशी प्रयासों के खिलाफ अफगानों का समर्थन करेगा ईरान

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ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि उनका देश असुरक्षा अस्थिरता पैदा करने के लिए विदेशी प्रभुत्व वाली शक्तियों के संभावित प्रयासों से अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन करेगा।

उन्होंने रविवार को चैंबर में एक संबोधन में कहा, अफगान लोग जो चाहते हैं वही ईरान चाहता है हम अपने प्रिय पड़ोसी के भविष्य को लेकर आशान्वित संवेदनशील हैं।

ईरानी राष्ट्र के नाम पर, कलीबाफ ने सभी जातियों, भाषाओं धर्मों के लोगों के अधिकारों के संरक्षण अफगानिस्तान में सार्वभौमिक स्थायी सुरक्षा की स्थापना का आह्वान किया।

अफगान अधिकारियों की हालिया उड़ान को कलीबाफ ने अमेरिकी कठपुतली देश भर में तालिबान की सुचारू तैनाती के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा, यह 20 साल के अमेरिकी कब्जे के साथ अफगान लोगों के व्यापक असंतोष का परिणाम है।

अफगानिस्तान की घटनाओं पर कलीबाफ ने कहा, यह दर्शाता है कि वाशिंगटन में कुछ अफगान सरकारी अधिकारियों का अपने देश में समृद्धि सुरक्षा लाने का भरोसा एक रणनीतिक गलती थी।

ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी शासन के 20 वर्षों में, अफगानिस्तान ने आर्थिक बुनियादी ढांचे सार्वजनिक कल्याण के विकास में कोई ठोस प्रगति नहीं की है, सुरक्षा एक नागरिक समाज की सबसे बुनियादी जरूरत की गारंटी नहीं दी गई।

शनिवार की रात, राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने एक टेलीविजन भाषण में कहा कि अफगानिस्तान की समस्याओं का समाधान लोगों के वोट के आधार पर सरकार की स्थापना में निहित है।




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सरकार गठन के लिए काबुल में बड़ा समारोह करेगा तालिबान, इन 6 देशों को भेजा न्योता

 
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अफगानिस्तान के आखिरी प्रांत पंजशीर को कब्जे में लेने का दावा करते हुए तालिबान ने पूरे देश पर अपना कब्जा कर लिया है। अब जल्द ही तालिबान यहां की सत्ता संभालेगा। तालिबान सरकार गठन के लिए काबुल में बड़ा समारोह की तैयारी हे रही है। समारोह में शामिल होने के लिए तालिबान ने छह देशों को न्योता भी भेज दिया है जिसमें पाकिस्तान, तुर्की, कतर, रूस, चीन और ईरान शामिल है।

पाकिस्तान के हौसले बुलंद

बता दें कि हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा के बाद से ही पाकिस्तान के हौसले बुलंद है। इसी कड़ी में जब काबुल में तालिबानी के औपचारिक तौर पर सत्ता ग्रहण करने की तैयारी चल रही है तो पाकिस्तान के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचे हुए है। यह प्रतिनिधिमंडल इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रमुख जनरल फैज हामिद के नेतृत्व में पहुंचा हुआ है। जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि पंजशीर अब तालिबान लड़ाकों के नियंत्रण में है। तालिबान ने पंजशीर पर नियंत्रण का किया दावा काबुल, छह सितंबर (एपी) तालिबान ने अपने विरोधियों के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान के आखिरी प्रांत पंजशीर को कब्जे में लेने का दावा किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि पंजशीर अब तालिबान लड़ाकों के नियंत्रण में है। इलाके में मौजूद चश्मदीदों ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर बताया कि हजारों तालिबान लड़ाकों ने रातों-रात पंजशीर के आठ जिलों पर कब्जा कर लिया। तालिबान विरोधी लड़ाकों का नेतृत्व पूर्व उपराष्ट्रपति एवं तालिबान विरोधी अहमद शाह मसूद के बेटे ने किया था, जो अमेरिका में 9/11 के हमलों से कुछ दिन पहले मारे गए थे।

अमेरिका पर बढ़ता दबाव

बता दें कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यहां से निकलने का प्रयास कर रहे सैकड़ों लोगों को लेकर उड़ान भरना चाह रहे कम से कम चार विमान बीते कई दिन से वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अफगानिस्तान से निकलना चाह रहे लोगों की मदद करने के लिए अमेरिका पर बढ़ते दबाव के बीच, ये विमान वहां से उड़ान क्यों नहीं भर पा रहे हैं इस बारे में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन को निकालने को लेकर तालिबान अमेरिका से सौेदेबाजी करेगा।

उत्तरी शहर मजार ए शरीफ के हवाईअड्डे पर एक अफगान अधिकारी ने बताया कि विमानों में सवार लोग अफगानिस्तान के होंगे, जिनमें से ज्यादातर के पास पासपोर्ट और वीजा नहीं है इसलिए वे देश से निकल नहीं पा रहे हैं। अब इस स्थिति का हल निकलने के इंतजार में वे हवाईअड्डे से होटल चले गए हैं।

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पंजशीर पर कब्जे के बाद तालिबान ने तेज की सरकार बनाने की कवायद

 
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तालिबान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी पर कब्जा कर लिया है। यहां नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान से तालिबान का मुकाबला हो रहा था। तालिबान के जबीउल्लाह ने ट्वीट किया कि तालिबान अब युद्ध से पूरी तरह मुक्त हो गया है। प्रवक्ता के मुताबिक, पंजशीर के लोग भी हमारे भाई हैं। इसके साथ ही तालिबान ने सरकार बनाने की कवायद भी तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 

तालिबान के नेताओं ने सरकार गठन की तैयारी तेज कर दी है। पाकिस्तान, चीन, तुर्की समेत छह देशों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भेजा जा चुका है। भारत से संपर्क नहीं किया गया है। इस बीच, पाकिस्तान पर आरोप लगे है कि पंजशीर को हासिल करने में उसने तालिबान की मदद की है। इस मामले में अब ईरान की ओर से बड़ा बयान आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पंजशीर में जो हुआ वो गलत है। इसमें पाकिस्तान की भूमिका की जांच की जाना चाहिए। बता दें, ईरान पहले भी कह चुका है कि वह अफगानिस्तान में चुनाव कराने के पक्ष में हैं और जनता को सरकार चुनने का मौका दिया जाना चाहिए।

पाकिस्तान पर तालिबान से मिलीभगत का आरोप
आरोप है कि पाकिस्तान की वायुसेना ने पंजशीर घाटी में तालिबान की मदद की है। पाकिस्तान ने ड्रोम हमलों से यहां बम गिराए, जिसकी मदद से तालिबान सफल रहा। अभी यह साफ नहीं है कि मोहम्मद सालेह समेत पंजशीर के बड़े नेता कहां हैं। माना जा रहा है कि इन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

इससे पहले पूर्व समांगन सांसद जिया अरियनजाद के अनुसार पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए पंजशीर में स्मार्ट बम बरसाए हैं। इससे तालिबान के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद के प्रवक्ता फहीम दश्ती पंजशीर में तालिबान के साथ लड़ाई के दौरान मारे गए थे। फहीम के अलावा अहमद शाह मसूद के भतीजे और पूर्व प्रमुख मुजाहिदीन कमांडर जनरल साहिब अब्दुल वदूद झोर भी युद्ध में मारे गए थे।

नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान ने अपने फेसबुक पेज में इन दोनों की मौत की जानकारी देते हुए लिखा, "गहरे स्पर्श और खेद के साथ, हमने आज दो प्यारे भाइयों और सहयोगियों और सेनानियों को खो दिया। आमिर साहब अहमद मसूद के कार्यालय के प्रमुख फहीम दश्ती, और फासीवादी समूह के खिलाफ लड़ाई में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय नायक के भतीजे जनरल साहब अब्दुल वदूद ज़ोर। आपकी शहादत पर बधाई!"

पूरे अफगानिस्तान के लिए लड़ रहा है NRF
अफगान पत्रकार फ्रूड बेजान ने भी ट्वीट कर जानकारी दी कि पंजशीर में फहीम दश्ती मारा गया है। पिछले महीने फहीम दश्ती ने कहा था कि पंजशीर में प्रतिरोध बल तालिबान के खिलाफ न केवल प्रांत के लिए बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम सिर्फ एक प्रांत के लिए नहीं बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लिए लड़ रहे हैं। हम अफगानों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में चिंतित हैं। तालिबान को समानता और अधिकारों का आश्वासन देना होगा।" उन्होंने यह भी कहा था कि वे विभिन्न देशों के संपर्क में हैं और बाकी दुनिया से वो उम्मीद करते हैं कि वो तालिबान से बात करें और उन्हें NRF के साथ बातचीत के लिए राजी करें।

NRF ने तालिबान को पंजशीर से हटने का प्रस्ताव दिया
पंजशीर घाटी में प्रतिरोध बलों ने युद्धविराम का आह्वान किया है क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार उन्हें लड़ाई में भारी नुकसान हुआ है। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ने तालिबान को पंजशीर से हटने का प्रस्ताव दिया है, और बदले में वह सैन्य कार्रवाई से परहेज करेगा। पंजशीर में प्रतिरोध बलों के नेता अहमद मसूद ने रविवार को कहा कि अगर तालिबान क्षेत्र से अपनी सेना वापस लेता है तो वह शांति वार्ता के लिए तैयार हैं।

लड़ाई रोकने के लिए तैयार है NRF
अहमद मसूद ने एक बयान में कहा, "अगर तालिबान समूह पंजशीर और अंदराब में अपने सैन्य हमलों को समाप्त करता है, तो स्थिर शांति प्राप्त करने के लिए NRF युद्ध को तुरंत रोकने के लिए तैयार है।" एनआरएफए प्रमुख का बयान उन रिपोर्टों के मद्देनजर आया है कि तालिबान बलों ने आसपास के जिलों को सुरक्षित करने के बाद प्रांतीय राजधानी पंजशीर में अपनी लड़ाई लड़ी थी। तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा कि होल्डआउट प्रांत की राजधानी बाराज़त में लड़ाई जारी है।

पंजशीर में एक हफ्ते से जारी है लड़ाई
तालिबान और नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान के बीच पिछले एक हफ्ते से पंजशीर घाटी में लड़ाई जारी है। दोनों पक्षों का दावा है कि लड़ाई में उनका पलडा भारी है और दूसरे पक्ष को भारी नुकसान हुआ है। तालिबान ने कहा कि उन्होंने प्रमुख जिलों पर कब्जा कर लिया है, वहीं NRF ने कहा कि उन्होंने 1,000 से अधिक आतंकवादी लड़ाकों को मार डाला और उन्हें कई मोर्चों पर पीछे धकेल दिया है।


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तेजी से पंजशीर पर कब्जे की ओर बढ़ रहा तालिबान, अमरुल्लाह सालेह ने UN को लिखा पत्र

 
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अफगानिस्तान का पंजशीर प्रांत इस समय जंग के मैदान में तब्दील हो गया है, जहां तालिबान और एनआरएफ (राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा) आपस में खूनी जंग लड़ रहे हैं. एनआरएफ पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह (Amrullah Saleh) और अहमद मसूद (Ahmad Massoud) के नेतृत्व में तालिबान के खिलाफ लड़ रहा है और उसने दावा किया है कि 600 तालिबानी आतंकी मारे गए हैं और 1000 ने सरेंडर कर दिया है. तो वहीं दूसरी तरफ तालिबान ने दावा किया है कि उसने पंजशीर के शोतुल, परयान, खेंज और अबशर जिलों पर कब्जा कर लिया है.

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, तालिबान पंजशीर में बढ़त हासिल करता जा रहा है. जबकि एनआरएफ का कहना है कि वह तालिबान को पीछे धकेल रहा है. इन सबके बीच विशेषज्ञों का कहना है कि एनआरएफ तालिबान से निपटने में संघर्ष का सामना कर रहा है. प्रांत में संकट बढ़ता देख अमरुल्लाह सालेह ने संयुक्त राष्ट्र (Amrullah Saleh Letter to UN) को एक पत्र लिखा है. इसके साथ ही उन्होंने सरेंडर करने से भी साफ इनकार कर दिया है. मानवीय संकट को लेकर लिखे गए पत्र में सालेह ने संयुक्त राष्ट्र से तालिबान के हमले को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया है.

गहराता जा रहा मानवीय संकट

उन्होंने इसमें कहा है तालिबान की आर्थिक नाकेबंदी और संचार ब्लैकआउट के कारण पंजशीर प्रांत और बागलान प्रांत के तीन जिलों में मानवीय संकट गहराता जा रहा है (Taliban Attacks on Panjshir). सालेह का कहना है, ‘हम संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करते हैं कि वे पंजशीर प्रांत में तालिबान के हमले को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें और एक राजनीतिक समाधान पर बातचीत करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हजारों विस्थापित और बंधक नागरिकों को बचाया जा सके.’

लाखों लोग पंजशीर में फंसे

पंजशीर अकेला ऐसा प्रांत है, जहां तालिबान कब्जा नहीं कर सका है. पंजशीर के शेर के नाम से मशहूर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद ने यहां अपनी सेना तैयार की है. जो तालिबान का डटकर मुकाबला कर रही है. पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि तालिबान और अन्य आतंकी समूह पंजशीर और उत्तरी अफगानिस्तान के अन्य क्षेत्रों के खिलाफ हमला कर रहे हैं (Humanitarian Crisis in Panjshir). सालेह ने कहा, ‘स्थानीय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और 10,000 आंतरिक रूप से विस्थापितों सहित लगभग 250,000 लोग, जो काबुल और अन्य बड़े शहरों के पतन के बाद पंजशीर पहुंचे थे, वो सभी यहां फंस गए हैं.’

लोगों को खाने की तत्काल जरूरत

अमरुल्लाह सालेह ने कहा है, ‘अगर इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो मानवाधिकार और मानवीय तबाही होगी, जिसमें भुखमरी और सामूहिक हत्याएं शामिल होंगी. यहां तक ​​कि इन लोगों का नरसंहार भी हो रहा है. तालिबान के हमले (Taliban Attacks) से आंतरिक रूप से विस्थापित लोग मस्जिदों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.’ सालेह ने कहा है कि यहां लोगों को खाने की काफी ज्यादा जरूरत है. पत्र में सालेह ने लिखा है, ‘उन्हें तत्काल खाने, आश्रय, पानी और स्वच्छता, स्वास्थ्य देखभाल और गैर-खाद्य वस्तुओं की जरूरत है.’

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पाकिस्तान में अफगान सीमा के पास आत्मघाती विस्फोट में 3 जवानों की मौत व 20 घायल

 
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पेशावर: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के एक आतंकवादी के आत्मघाती हमले में अर्धसैनिक बल के कम से कम तीन जवानों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी गई। क्वेटा पुलिस के उप महानिरीक्षक अजहर अकरम ने कहा कि विस्फोट क्वेटा-मस्तुंग राजमार्ग पर फ्रंटियर कोर की चौकी के निकट हुआ। उन्होंने संवाददाता को बताया कि हमले में घायल हुए और मारे गए अधिकतर लोग फ्रंटिया कोर से थे, जो प्रांत में आतंकवाद से निपटने के अभियानों में अग्रणी है।

उन्होंने कहा कि हमले में घायल हुए लोगों में 18 सुरक्षा बल के अधिकारी और दो राहगीर हैं। उनके मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं बलूचिस्तान के आतंकवाद निरोधक विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि धमाका ''आत्मघाती हमला'' था और सोना खान चौकी के निकट किया गया था। आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान (TTP) में हमले की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा बलों ने बताया कि हमले में जिस वाहन को निशाना बनाया गया वह हजारा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सब्जी विक्रेताओं की सुरक्षा के लिए तैनात था।

प्रधानमंत्री इमरान खान ने हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया,'' क्वेटा के मस्तुंग मार्ग पर फ्रंटियर कोर की चौकी पर टीटीपी के आत्मघाती हमले की निंदा करता हूं। शहीदों के परिजन के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं और मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। विदेश समर्थित आतंकवादियों से हमें बचाने के लिए सुरक्षा बलों और उनके बलिदानों को सलाम करता हूं।''

बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लांगोव ने भी हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा,'' सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अनगिनत बलिदान दिए हैं। पूरा देश शहीदों का ऋणी है। हम अपनी पूरी ताकत के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे। ऐसे हमले हमारे बलों के हौंसले नहीं डिगा सकते।''


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सत्ता के लिए आपस में भिड़े तालिबानी, हक्कानी ने चलाई गोली, बरादर हुए घायल

 
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अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के लौटने के बाद यहां सरकार बनाने के लिए तालिबान में माथापच्ची जारी है। इस बीच खबर है कि यहां सत्ता को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क आपस में ही भिड़े पड़े हैं। कहा जा रहा है कि तालिबान के सह-संस्थापक अब्दुल गनी बरादर और हक्कानी गुट के बीच झड़प हुई है और इसमें गोली भी चली है। अफगानिस्तान की वेबसाइट पंजशीर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार, इस झड़प में अब्दुल गनी बरादर घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि हक्कानी गुट ने ही गोली चलाई है।

पंजशीर ऑब्जर्वर ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि काबुल में बीती रात तालिबान के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर गोलीबारी हुई। पंजशीर के मुद्दे को कैसे हल किया जाए, इसे लेकर अनस हक्कानी और मुल्ला बरादर के लड़ाकों के बीच असहमति थी और इसी को लेकर झड़प हो गई। हक्कानी की ओर से चलाई गई जिसमें गोली में मुल्ला बरादर कथित तौर पर घायल हो गए हैं और उनका पाकिस्तान में उपचार चल रहा है। हालांकि, सूत्रों ने गोलीबारी की पुष्टि नहीं की है।

इधर नॉर्दन अलायंस ने भी ट्वीट कर इस घटना का जिक्र किया है। नॉर्दन अलांयस का कहना है कि बरादर ने तालिबानियों को पंजशीर में नहीं लड़ने और काबुल आने को कहा है। इस झड़प में मुल्ला बरादर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं और उन्हें उपचार के लिए पाकिस्तान ले जाया गया है।

इधर, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच अफगान की पूर्व महिला सांसद मरियम सोलेमानखिल ने शनिवार को दावा किया था कि हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के बीच सत्ता की लड़ाई शुरू हो गई है। हक्कानी नेटवर्क के नेता अनस हक्कानी और खलील हक्कानी का तालिबान के नेता मुल्ला बरादर और मुल्ला याकूब के साथ झड़प भी हुई है। सोलेमानखिल ने ट्वीट कर बताया कि पाकिस्तान नहीं चाहता है कि मुल्ला बरादर देश की अगुवाई करे। जबकि, हक्कानी नेटवर्क सरकार में बड़ी हिस्सेदारी और रक्षा मंत्री का पद मांग रहा है, लेकिन तालिबान इतना कुछ देने को तैयार नहीं है।

खबर यह भी है कि अफगान की सत्ता को लेकर हक्कानी और तालिबान के बीच जारी संघर्ष के मद्देनजर ही पाकिस्तान ने आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को काबुल भेजा है। माना जा रहा है कि आईएसआी प्रमुख को दोनों गुटों के बीच जारी झगड़े को सुलझाने और अफगान में सरकार बनाने का रास्ता सुझाने के लिए पाकिस्तान ने भेजा है।


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नॉर्दन अलायंस ने खोली पोल, पंजशीर में तालिबान के लिए लड़ रही है पाक आर्मी

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काबुल: पंजशीर पर कब्जा करने के लिए तालिबान संघर्ष करने में लगा हुआ है, लेकिन उसके लड़ाकों को घाटी पर कब्ज़ा करने में अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। हालांकि उसका कुछ महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्ज़ा ज़रूर हो गया है। लेकिन नॉर्दन अलायंस ने खुलासा करते हुए कहा है कि इस लड़ाई में तालिबान का साथ पाकिस्तान की सेना दे रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान आर्मी की 11th कोर इस वक़्त पंजशीर में लड़ रही है। खासकर पाक आर्मी के पश्तून अफसर और जवान उतारे गए हैं। पाकिस्तान आर्मी फील्ड आर्टिलरी गन का प्रयोग कर रही है और इसके फायर के बाद पीछे से तालिबानी लड़ाके आगे बढ़ रहे हैं ।

ताजिक और अफगान आर्मी के कुछ लड़ाके के नॉर्दन अलायंस के साथ शामिल होने के बाद पाकिस्तान आर्मी ने पैराट्रूपर्स को उतारने का मन बनाया है। पाक आर्मी की ख्वाहिश थी कि काबुल में नई सरकार की घोषणा से पहले पंजशीर पर कब्ज़ा हो जाये। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा।

सामने आए सबूत
पेंटागन ने कहा था कि उसके पास उन रिपोर्टों को सत्यापित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि पाकिस्तानी अफगानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ रही है। अब सबूत सामने आए हैं कि पाकिस्तानी सेना के जवान भी तालिबानियों के साथ पंजशीर घाटी पर कब्जा करने के लिए लड़ रहे हैं।

पंजशीर में प्रतिरोध बलों द्वारा जवाबी हमले में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों में से एक के पास से एक पहचान पत्र बरामद हुआ है। आईडी कथित तौर पर मोहम्मद वसीम नाम के एक पाकिस्तानी नागरिक की है।

नॉर्दन अलायंस ने ट्वीट करते हुए कहा, ''पाकिस्तानी विशेष बल तालिबान की मदद कर रहे हैं। रात को पंजशीर पर अल कायदा, आईएसआईएस, जिहाद अल नुसरा जैसे आतंकवादी संगठनों के गठबंधन और तालिबान और पाकिस्तान के नेतृत्व में हमला किया गया था। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद बनाम अहमदम सूद फोर्स?

इसके साथ ही नॉर्दन अलायंस ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उसने कहा, ''पंजशीर में आपका स्‍वागत है। पिछले 24 घंटे में 1 हजार से तालिबानी लड़ाकों को ढेर किया गया है।'' इस वीडियो में उसने तालिब और पाकिस्तान लड़ाकों की लाशों को भी दिखाया है।



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काबुल की सड़कों पर बुर्कानशीं महिलाओं की हुंकार, हम 20 साल पहले वाली औरतें नहीं

 अफगानिस्तान में तालिबान ने सत्ता संभाल ली है. तालिबान की सत्ता में वापसी के साथ ही शरियत कानून के मुताबिक महिला अधिकार तय किए गए हैं. तालिबान के शासन के विरोध में काबुल में महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए मार्च निकाला है. महिलाओं का कहना है उन्हें समानता का अधिकार चाहिए.
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महिलाएं अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी भी कर रही हैं. अफगानी महिलाएं अपने विरोध प्रदर्शन में कह रही हैं, 'हम 20 साल पहले वाली औरतें नहीं हैं. हमें समानता, न्याय और लोकतंत्र चाहिए.'

महिलाएं काबुल के फेवरे एब एक्वायर के पास से ही मार्च निकाल रही हैं. अफगानी महिलाएं तालिबान शासन में अपना भविष्य सुरक्षित नहीं मान रही हैं, ऐसे में उनकी मांग है कि उन्हें पहले की तरह ही काम करने का अधिकार दिया जाए. तालिबान महिला अधिकारों के पक्ष में नहीं हैं. उन्हें शरिया कानून के हिसाब से ही काम करना होगा.

सड़कों पर उतरीं सैकड़ों महिलाएं

महिला अधिकारों को लेकर किए जा रहे इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों महिलाएं शामिल हैं. महिलाओं की मांग है कि उन्हें वैसे ही अधिकार दिए जाएं, जैसे तालिबान के सत्ता संभालने से पहले मिले हुए थे. 31 अगस्त को अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से ही तालिबान पूरी तरह से सत्ता पर काबिज हो गया है. वहीं नए सरकार गठन की तैयारियां भी तेज हो गई हैं.

'बुर्का पहनने को तैयार लेकिन बच्चियों को मिले पढ़ने की इजाजत'

गुरुवार को भी अफगानी महिलाओं ने काबुल में विरोध प्रदर्शन किया था. महिलाओं का कहना था कि वे बुर्का पहनने को भी तैयार हैं अगर उनकी बेटियों को तालिबान शासन में स्कूल जाने के लिए छूट दी जाए. तालिबान के राज में महिलाओं का स्कूल जाना अभी मुश्किल लग रहा है. हालांकि सार्वजनिक मंचों पर तालिबान के अधिकारिक बयान में कहा जा रहा है कि स्कूलों में महिलाएं पढ़ सकेंगी.

रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा मांग रही हैं महिलाएं

दरअसल लगभग 50 महिला प्रदर्शनकारियों के समूह ने अफगानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात की सड़कों पर तख्तियां लहराते हुए विरोध प्रदर्शन किया था. उन्होंने कहा था कि शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा प्राप्त करना हमारा अधिकार है. तालिबान के सत्ता में पहले कार्यकाल के दौरान महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा, रोजगार और समानता से वंचित रखा गया था. जब 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में एंट्री लेकर तालिबान को सत्ता से बेदखल किया, तब जाकर महिलाओं को एक बार फिर से अधिकार मिलने शुरू हुए.

पंजशीर में अब तक तालिबान को नहीं मिली है जीत
वहीं अगस्त महीने से ही अमेरिकी सैनिक बड़ी संख्या में लौटने लगे, जिसके बाद एक के बाद एक प्रातों पर तालिबान कब्जा करता गया. तालिबान में कुल 34 प्रांत हैं, जिनमें से 33 पर तालिबान ने सत्ता कायम कर ली है. वहीं पंजशीर में अब भी अमरुल्ला सालेह के नेतृत्तव वाली फौज से तालिबान को कड़ी टक्कर मिल रही है. पंजशीर के लड़ाके तालिबानी लड़ाकों पर भारी पड़ रहे हैं.



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तालिबानियों ने काबुल में जश्न में चलाई गोलियां, बच्चों समेत 17 लोगों की मौत, 41 लोग जख्मी

 
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तालिबान (Taliban) बलों के पंजशीर घाटी (Panjshir Heavy) पर नियंत्रण करने की खबर सामने आने के बाद से ही काबुल में भारी जश्न का माहौल देखा गया. यहां खुशी में तालिबानियों ने गोलियां भी चलाईं.

तालिबान (Taliban) के लड़ाकों ने पंजशीर घाटी (Panjshir Valley) पर नियंत्रण कर लिया है. रिपोर्ट सामने आने के बाद काबुल में भारी जश्न की गोलियों की आवाज सुनी गई. बताया जा रहा है कि जश्न में चली गोलियों के कारण 17 लोग मारे गए हैं, जबकि 41 लोग घायल हुए हैं. टोलो न्यूज ने इसकी जानकारी दी है. दरअसल, पंजशीर घाटी में तालिबान और अफगानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा के बीच कई दिनों से संघर्ष जारी था. अफगानिस्तान की पत्रकार जियार खान याद ने काबुल में जश्न मनाने वाली एक वीडियो भी ट्वीट की है.

टोलो न्यूज ने अस्पताल के हवाले कहा कि शुक्रवार रात काबुल में हुई गोलीबारी में 17 लोगों की मौत हुई है, जबकि 41 लोग घायल हुए हैं. टोलो न्यूज ने ट्वीट किया, काबुल में आपातकालीन अस्पताल ने कहा कि कल रात शहर भर में हुई हवाई फायरिंग से मारे गए 17 लोगों के शवों और 41 घायलों को उसकी सुविधा में भेजा गया है. मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं, मगर उनकी संख्या को उजागर नहीं किया गया है.

स्थानीय अफगान समाचार एजेंसी असवाका के अनुसार, शुक्रवार की रात तालिबान के जश्न में हुई हवाई गोलीबारी के कारण काबुल में बच्चों सहित कई लोग मारे गए और घायल हो गए. काबुल में शुक्रवार को भारी जश्न के दौरान गोलियों की आवाज सुनी गई, जब तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने पंजशीर घाटी पर नियंत्रण कर लिया है और अफगानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (एनआरएफए) को हराया है. सोशल मीडिया पर शेयर की गई फोटो और वीडियो में लोग अपने घायल परिजनों को अस्पताल ले जाते नजर आए.

तालिबान के एक कमांडर ने दावा किया कि अफगानिस्तान का राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (NRFA) हार गया है. तालिबान के एक कमांडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से कहा कि अल्लाह की कृपा से, पूरे अफगानिस्तान पर हमारा नियंत्रण है. संकटमोचक हार गए हैं और पंजशीर अब हमारे अधीन है. हालांकि, तालिबान ने पंजशीर की स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक संचार नहीं किया है. समाचार एजेंसी एएफपी ने एक स्थानीय निवासी के हवाले से कहा कि प्रतिरोध मोर्चे की हार की खबरें झूठी थीं.

अमरुल्ला सालेह का अफगानिस्तान को संदेश

अफगान उपाध्यक्ष अमरुल्ला सालेह ने भी उन सभी मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया था, जिनमें दावा किया गया था कि वह देश छोड़कर भाग गए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को चारों ओर फैलाया जा रहा है कि वह अपना देश छोड़कर भाग गए हैं. यह बिल्कुल निराधार है. उन्होंने एक आडियो शेयर की जिसमें वह कह रहे हैं 'यह मेरी आवाज है, मैं आपको पंजशीर घाटी से, अपने बेस से बुला रहा हूं. मैं अपने कमांडरों और हमारे राजनीतिक नेताओं के साथ हूं. बेशक, यह एक कठिन स्थिति है, हम तालिबान और पाकिस्तानियों और अल कायदा और अन्य आतंकवादी समूहों के आक्रमण के अधीन हैं.'

संघर्ष में मारे गए थे 350 तालिबान लड़ाके

अहमद मसूद और उनके समर्थकों के नेतृत्व में NRFA, तालिबान के खिलाफ पंजशीर की रखवाली कर रहा है. पंजशीर चरमपंथियों के अधीन नहीं आने वाला अंतिम अफगान प्रांत बना हुआ है. समझौते के लिए कई दिनों तक चली बातचीत के बाद तालिबान ने पंजशीर पर लंबे समय तक हमला किया था. इस पूरे हफ्ते तालिबान और प्रतिरोध मोर्चे के बीच मुठभेड़ की खबरें आती रही हैं. कथित तौर पर, इस सप्ताह की शुरुआत में खावक की लड़ाई के दौरान एनआरएफए द्वारा 350 तालिबान लड़ाके मारे गए थे, जबकि 40 को पकड़ लिया गया था.


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पूर्व अफगान अधिकारियों के अकाउंट खंगालने की कोशिश में था तालिबान, Google ने दिया जोर का झटका

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काबुल, सितंबर 04: विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन गुगल ने आतंकी संगठन तालिबान को बड़ा झटका दिया है। गुगल ने अफगानिस्तान सरकार के ईमेल अकाउंट्स को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान अफगानिस्तान सरकार के गुगल अकाउंट का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही थी, जिसे गुगल ने रोक दिया है।

गुगल ने कुछ अफगान सरकारी ईमेल खातों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। गुगल के मुताबिक, तालिबान के आतंकी अफगान सरकार के पूर्व अधिकारियों के ईमेल अकाउंट को खोलने की कोशिश कर रही थी, ताकि सीक्रेट जानकारियां जुटाई जा सके। लेकिन, इससे पहले की तालिबान के आतंकी पूर्व अधिकारियों के अकाउंट को खोल पाते, गुगल ने अस्थाई तौर पर सभी अकाउंट्स को बंद कर दिया है। गुगल ने शुक्रवार को कहा कि वह "संबंधित गुगल अकाउंट्स को फिलहाल अस्थाई तौर पर बंद कर रहा है और कई खातों को बंद किया जा रहा है,"। हालांकि, गुगल की तरफ से अभी तक ये साफ नहीं किया गया है कि खातों को क्या स्थाई तौर पर भी बंद किया जाएगा?

अकाउंट बंद करने पर गुगल का बयान

गुगल के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि, "विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर हम अफगानिस्तान की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं। हम संबंधित खातों को सुरक्षित करने के लिए अस्थायी कार्रवाई कर रहे हैं, क्योंकि उन अकाउंट्स पर लगातार कई जानकारियां आ रही हैं।" मामले से परिचित व्यक्ति ने आउटलेट को बताया कि संबंधित खातों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, क्योंकि जानकारी का इस्तेमाल पूर्व सरकारी अधिकारियों को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है, जिससे उन्हें नुकसान होने की आशंका है। रॉयटर्स के अनुसार, स्थानीय सरकारों और राष्ट्रपति प्रोटोकॉल के कार्यालय के साथ, करीब दो दर्जन अधिकारी, जिनमें से कुछ वित्त, उद्योग, उच्च शिक्षा और खान मंत्रालयों में हैं, वो कम्यूनिकेशन के लिए गुगल मेल का इस्तेमाल कर रहे थे और उनके खातों के जरिए तालिबान उन्हें ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था।

जानकारियां जुटा रहा था तालिबान\

अफगानिस्तान सरकार के एक पूर्व अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि उन्हें तालिबान की तरफ से जुलाई के अंत में कहा गया था कि वो सभी जानकारियों को बचाकर रखे, ताकि तालिबान उन जानकारियों को इकट्ठा कर सके।'' अफगान सरकार के पूर्व अधिकारी ने कहा कि 'अगर मैंने तालिबान का कहा माना होता तो काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान उन सभी दस्तावेजों को हासिल कर सकता था, जिसे गुप्त रखा गया है और जहां तक तालिबान को नहीं पहुंचना चाहिए।' अफगान सरकार के पूर्व अधिकारियों को डर है कि काबुल पर कब्जे के बाद अलग अलग तरह से तालिबान के आतंकवादी उनतक पहुंचने की कोशिश में हैं, और उन्हें तालिबान से खतरा है।

सरकार बनाने की तैयारी

आपको बता दें कि अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के दो हफ्ते बाद शुक्रवार को तालिबान देश में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों ने कहा कि तालिबान कभी भी सरकार बनाने का ऐलान कर सकता है। 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और रिपोर्ट है कि आज तालिबान की नई सरकार का ऐलान कर दिया जाएगा। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि तालिबान आज सरकार तो बना लेगा, लेकिन वो सरकार चलाएगा कैसे? सवाल ये भी उठ रहे हैं कि सरकार चलाने में नाकाबिल साबित होने पर क्या तालिबान बंदूक दिखाकर ही लोगों को खामोश करेगा?

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चीन हमारा सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है -तालिबान

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अफगान तालिबान ने चीन को अपना 'सबसे महत्वपूर्ण साझेदार' बताते हुए कहा है कि उसे अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और तांबे के उसके समृद्ध भंडार का दोहन करने के लिए चीन से उम्मीद है। युद्ध से परेशान अफगानिस्तान व्यापक स्तर पर भूख और आर्थिक बदहाली की आशंका का सामना कर रहा है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि समूह चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल का समर्थन करता है जो बंदरगाहों, रेलवे, सड़कों और औद्योगिक पार्कों के विशाल नेटवर्क के जरिए चीन को अफ्रीका, एशिया और यूरोप से जोड़ेगी।

जियो न्यूज ने मुजाहिद के हवाले से कहा, "चीन हमारा सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है और हमारे लिए एक मौलिक और विशेष अवसर पेश करता है क्योंकि यह हमारे देश में निवेश और पुनर्निर्माण के लिए तैयार है।" मुजाहिद ने बृहस्पतिवार को एक इतालवी अखबार को दिए साक्षात्कार में यह टिप्पणी की। मुजाहिद ने कहा, "देश में तांबे की समृद्ध खदानें हैं, जो चीनियों की मदद से वापस संचालित हो सकती हैं। इसके अलावा, चीन दुनिया भर के बाजारों के लिए हमारा रास्ता है।"

चीन तालिबान के प्रति कुछ सकारात्मक बयान देता रहा है और उसने उम्मीद जतायी है कि विद्रोही उदार और विवेकपूर्ण घरेलू और विदेशी नीतियों का पालन करेंगे, सभी प्रकार के आतंकवाद का मुकाबला करेंगे, अन्य देशों के साथ सद्भाव से रहेंगे तथा अपने लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आकांक्षाओं पर खरे उतरेंगे। मुजाहिद ने कहा कि तालिबान क्षेत्र में रूस को भी एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है और वह रूस के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा।



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