वैज्ञानिक अन्धविश्वास बनाम धार्मिक अन्धविश्वास
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सूर्योदय के समय उसकी तरफ पीठ करके बैठने के फायदे
अभी बहुत समय नहीं बीता है, हमारे देश के वाराणसी जिले में एक प्रसिद्ध तपस्वी हुआ करते थे जिनका नाम था स्वामी विशुद्धानंद जी। ऐसा कहा जाता है कि अपने कई वर्षों के तप और परिश्रम के बल पर उन्होंने एक ऐसा सूर्य यंत्र बनाया लिया था कि जिसके सामने यदि किसी मरणासन्न व्यक्ति के शरीर को लेटा दिया जाता था तो कुछ ही समय में उस सूर्य यंत्र से निकलने वाली किरणें, उस व्यक्ति को नया जीवन दे देतीं थीं।
कहने का अर्थ यह है कि जिस किसी ने भी सूर्य की अदभुत शक्ति को पहचाना, उसने लंबे समय तक निरोगी रहकर इस धरती पर अपना जीवन व्यतीत किया। आपको हम यह बताएंगे कि यदि आप नित्य उगते हुये सूर्य की ओर पीठ करके केवल 5 मिनट बैठ जायें तो इसके आपको कौन-कौन से लाभ प्राप्त होंगे ?
आपको जानना चाहिए कि ज्योतिष शास्त्र सूर्य के प्रकाश को सकारात्मक ऊर्जा पाने का प्रमुख स्रोत मानता है। सकारात्मक ऊर्जा वह ऊर्जा है़ जो हमारे तन- मन में स्फूर्ति का संचार कर देती है़। जो हमें पूरे दिन ऊर्जावान बनाये रखती है़।इस लेख में हम इस बात की चर्चा करेंगे कि आप कब और किस प्रकार सूर्य का प्रकाश ग्रहण करें ताकि उसकी किरणों की सकारात्मक ऊर्जा का लाभ आपको प्राप्त हो सकें।
यह तो हम सभी जानते हैं कि जहां सूर्य का प्रकाश है वहीं जीवन है। सूर्य प्रकाश के अभाव में जीवन की कल्पना करना भी व्यर्थ है। आज हम मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रह रहें हैं। यह कहना च होगा कि हम फ्लैट लाइफ युग में जिंदगी जी रहे हैं। ऐसे में सूर्य के प्रकाश के महत्व की चर्चा करना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है।
क्या आपको ऐसा नहीं लगता है कि हमारी जिंदगी कमरों में सिमट कर रह गई है़? हम अपने घर के कमरे से निकलकर ऑफिस के कमरे में पहुंच जाते हैं और हमारे बच्चे भी घरों से निकलकर स्कूल की क्लास में पहुंच जाते हैं, जिसके कारण उन्हें सूर्य की रोशनी में समय बिताने का समय नहीं मिल पाता है।
सूर्योदय के समय सूर्य की तरफ पीठ करके बैठने से होते हैं ढेरों लाभ
कभी भी का नायाब तरीका। आप उगते हुए सूर्य के समय पश्चिम की तरफ मुंह करके बैठ जाएं। तो ऐसी दशा में सूर्य की सूर्य की रौशनी सामने से नही लेनी चाहिए। नहीं तो फायदे की जगह नुकसान हो सकता है़। यह तो हम सभी जानते ही हैं कि सूर्य की अदभुत रौशनी विटामिन डी का प्रमुख स्रोत है। आइये जानते हैं सूर्य की रौशनी का लाभ लेनेरौशनी हमारी पीठ पर पड़ेगी।
ऐसा केवल 5 मिनट करने मात्र से आपके पूरे शरीर में ऊर्जा का पर्याप्त भंडार भर जाता है, साथ ही ऐसा करने से हमारे शरीर से सारे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिसके कारण हम सारे दिन ऊर्जा से भरे हुए हुए रहते हैं। सूर्य की रोशनी में केवल 5 मिनट बैठने से हमारी शारीरिक व मानसिक दशा में भी सुधार होता है।
दरअसल सूर्य की ऊष्मा ऐसे मरीजों को ठीक करने में भी सहायक होती है जो टीबी या कैंसर आदि रोगों से ग्रस्त हैं। ऐसे रोगी जो डिप्रेशन के शिकार है उन्हें भी यह अचूक उपाय अवश्य करना चाहिए। क्योंकि सूर्य की रोशनी मन की निराशा को समाप्त कर देती है। उसकी जगह पर सकारात्मक सोच को उत्पन्न करने का काम करती है। इसके कारण हमारे जीवन से नकारात्मकता समाप्त हो जाती है।
जिस घर में सूर्य की रोशनी आती है वहाँ लोग अधिक प्रसन्न रहते हैं
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समयसूचक AM और PM का उदगम का वास्तविक इतिहास
भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है :
AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian)
PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian)
एंटी यानि पहले, लेकिन किसके?
पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके?
यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था।
अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है।
कैसे?
देखिये...
AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya
PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya
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सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है।
आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)।
पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव।
दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)।
बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM)।
पश्चिम के प्रभाव में रमे हुए और पश्चिमी शिक्षा पाए कुछ लोगों को भ्रम हुआ कि समस्त वैज्ञानिकता पश्चिम जगत की देन है।
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