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शादी के बाद धोखा देने के क्या होते हैं कारण

 
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धोखा देना इंसान की फितरत है फिर चाहे वह धोखा छोटा हो या फिर बड़ा. अकसर इंसान प्यार में धोखा खाता है और प्यार में ही धोखा देता है. लेकिन आजकल शादी के बाद धोखा देने का एक ट्रेंड सा बन गया है. शादी के बाद लोग धोखा कई कारणों से देते हैं. कई बार ये धोखा जानबूझकर दिया जाता है तो कई बाद बदले लेने के लिए. इतना ही नहीं कई बार शादी के बाद धोखा देने का कारण होता है असंतुष्टि. कई बार तलाक का मुख्‍य कारण धोखा ही होता है. लेकिन ये जानना भी जरूरी है कि शादी के बाद धोखा देना कहां तक सही है, शादी के बाद धोखे की स्थिति को कैसे संभालें. क्या करें जब आपका पार्टनर आपको धोखा दे रहा है.

शादी के बाद धोखा देने के कारण

असंतुष्टि- कई बार पुरूष को अपनी महिला साथी से संभोग के दौरान असंतुष्टि होती है जिसके कारण वह बाहर की और जाने पर विविश हो जाता है और जल्दी ही वह दूसरी महिलाओं के करीब आ जाता है, नतीजन वो चाहे-अनचाहे अपनी महिला साथी को धोखा देने लगता है.

खुलापन- समाज में आ रहे खुलेपन के कारण भी पुरूष अपनी महिला साथी को धोखा देने से नहीं चूकता. दरअसल, समाज में खुलापन आने के कारण लोग खुली मानसिकता के हो गए हैं जिससे उन्हें विवाहेत्तर संबंध बनाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती और महिलाएं भी बहुत बोल्ड हो गई हैं. इस कारण भी पुरूष अपनी महिला साथी का धोखा देते हैं.

संभावनाओं के कारण- आजकल विवाहेत्तर संबंध बनने की संभावनाएं अधिक हैं यानी विवाहेत्तर संबंध आसानी से बन जाते हैं. जिससे पुरूष अपनी पत्नी को धोखा देने लगते हैं, यह सोचकर कि उन्हें कुछ पता नहीं चलेगा.

आपसी वार्तालाप ना होना- पुरूष अकसर चाहते हैं कि वो अपनी पत्नी से खूब बातें करें और उनकी पत्नी भी अपनी बातें शेयर करें लेकिन जब आपसी वार्तालाप या संवाद की स्थिति खत्म हो जाती है तो रिश्तों में दरार आने और धोखा देने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.

प्रयोगवादी होना- लोग आजकल नए-नए एक्सपेरिमेंट करते हैं. जब कोई पुरूष रिश्तों से उबने लगता है तो वह एक्सपेरिमेंट करने से नहीं चूकता. लेकिन जब पत्नी इसमें सहयोग नहीं देती तो पुरूष धोखा देने लगते हैं.

महिलाओं का शादी के बाद धोखा देने के कारण

अफेयर होना- आमतौर पर महिलाएं शादी के बाद पुरूषों को इसीलिए धोखा देने लगती हैं, क्योंकि उनका शादी से पहले किसी से अफेयर होता है या फिर उनका पहला प्रेमी उन्हें परेशान और ब्लैकमेल करता है जिससे वे धोखा देने पर मजबूर हो जाती हैं.

विश्वास ना होना- इसीलिए कुछ महिलाएं धोखा देने लगती हैंक्योंकि उनका पति उन पर विश्वास नहीं करता या फिर बिना किसी वजह शक करता है.

बोरियत होना- कई बार महिलाएं घर में रहकर या फिर एक ही तरह के रूटीन से बोर हो जाती हैं और अकेले रहते-रहते वे बाहर की और आकर्षित होती हैं. नतीजन कई बार उनके इससे विवाहेत्तर संबंध भी बन जाते हैं.

साथी से विचार ना मिलना- कई बार पति से विचार ना मिलना या फिर हर समय घर के झगड़े के कारण भी महिलाएं बाहर की ओर आकर्षित होती हैं.

इसके अलावा भी बहुत से कारण हैं जिससे महिलाएं और पुरूष शादी के बाद भी अपने साथी को धोखा देने लगती हैं.


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शारीरिक संबंध बनाने के बाद न करें यह काम

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अपने पार्टनर के साथ एक हेल्दी बॉन्ड बनाना जरुरी है। ये रिश्ते को मजबूत बनाने के साथ पार्टनर के साथ जीवन के सफर को भी आसान बनाता है। रिलेशनशिप में पार्टनर के साथ इंटिमेट रिश्ता कायम करना भी एक अहम हिस्सा होता है।

मगर क्या आप जानते हैं कि बेड पर एक अच्छे ऑर्गेज़्म के बाद भी आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए ताकि आपका इंटिमेट रिश्ता स्वस्थ भी रहे। जी हां, शारीरिक संबंध बनाने के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है ताकि प्राइवेट पार्ट्स स्वस्थ और साफ़ रहे और किसी तरह का संक्रमण न हो।

साबुन न लगाएं -

कई महिलाएं सेशन के बाद नहाना पसंद करती हैं। मगर इस दौरान आप साबुन का इस्तेमाल अपने वजाइनल एरिया में भूल से भी न करें। ऐसा करने से आपके प्राइवेट पार्ट की नैचुरल नमी का स्तर गड़बड़ हो जाता है जो बाद में इंफेक्शन का कारण बनता है।

अंडरगारमेंट्स न पहनें-

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यदि आप सेक्स के बाद एक अच्छी नींद लेने की सोच रहे हैं तो आप लिंगरी पहनकर न सोएं। रात में बिना कपड़ों के सोने के कई फायदे भी बताये जा चुके हैं। दरअसल कई बार प्राइवेट पार्ट का गीलापन शरीर के कपड़े के साथ प्रतिक्रिया करता है जो इंफेक्शन की वजह बन जाता है।

न करें गीले वाइप्स का इस्तेमाल -

सेक्स के बाद आलस महसूस हो सकती है और बेड से उठने का मन नहीं करता है। ऐसी स्थिति में महिलाएं गीले वाइप्स से ही अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ़ कर लेती हैं। आपको इससे बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इन गीले वाइप्स में केमिकल होते हैं और आपके प्राइवेट पार्ट जैसी संवेदनशील जगह के लिए ये बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।

ज्यादा गर्म पानी से नहाना -

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शारीरिक संबंध बनाने के बाद नहाना एक अच्छा ऑप्शन है मगर बहुत तेज गर्म पानी के इस्तेमाल से बचें। इससे वजाइना कम हो सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

यूरिन रोकना -

सेक्स करने के बाद पेशाब रोकने की गलती न करें। संबंध बनाने के बाद खासतौर से पेशाब करने के लिए जाना चाहिए। ऐसा करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इससे बैक्टीरिया और कीटाणु यूरिन के जरिये बाहर निकल जाते हैं और यूटीआई का खतरा नहीं रहता है।


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बढ़ती उम्र के साथ ये समस्याएं कर सकती हैं परेशान, पुरुष रहें इनसे सावधान

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जब आप युवा होते हैं उस समय आपकी उम्र आपके पक्ष में होती है और आप सभी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से दूर रहते हैं। लेकिन जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपको अपने शरीर और अपने  महत्वपूर्ण अंगों पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। कुछ ऐसी जीवनशैली बीमारियां हैं जिनके संकेतों पर ध्यान नहीं देते हैं तो आप स्वास्थ्य समस्याओं से घिर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जिसकी जानकारी उम्र बढ़ने के साथ हर व्यक्ति को होनी चाहिए ताकि वो समय रहते इसके प्रभाव को नियंत्रित कर सके। 

उम्र बढ़ने के कारण हो सकती है ह्रदय की समस्या -

पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हृदय संबंधी बीमारियों से ज्यादा सावधान रहना चाहिए ज्यादातर उन लोगों को जिन्हें 40 वर्ष से कम उम्र में ही मधुमेह की समस्या हो गयी हो। अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग मधुमेह से पीड़ित हैं उन लोगों में मायोकार्डियल इन्फेक्शन से पीड़ित होने का खतरा अधिक रहता है। 47 से 50 की उम्र के बीच बिना मधुमेह वाले लोगों की तुलना में मधुमेह से ग्रस्त लोगों को स्ट्रोक या यहां तक कि समयपूर्व मृत्यु की समस्या हो सकती है। यह एक कारण है कि पुरुषों को सलाह दी जाती है कि वे अपने उतार-चढ़ाव वाले रक्त शर्करा के स्तर का ख्याल रखें और उम्र में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। (और पढ़ें – हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खाएं ये आहार)

उम्र बढ़ने से होती है इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या - 

यह सच है कि उम्र बढ़ने के साथ साथ पुरुषों का प्रजनन स्वास्थ्य कम होने लगता है, पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile dysfunction) से पीड़ित होने पर यह उन्हें और अधिक असहनीय बना देता है। जैसे कि बिस्तर पर प्रदर्शन के मुद्दों पर इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव हो सकता है। वास्तव में अगर कोई व्यक्ति मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल या उच्च रक्तचाप से पीड़ित है तो उसे 40 साल के उम्र के बाद इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या हो सकती है। तो पुरुष ध्यान दें - यदि आप अपने यौन जीवन की समस्या से पीड़ित नहीं रहना चाहते हैं तो देर होने से पहले अपने स्वास्थ्य की देखा भाल गंभीरता से करें। इसके लिए आप चुकंदर और अन्य सब्जियां खाएं ये आपकी कम कामेच्छा और इरेक्टाइल डिसफंक्शन से लड़ने में मदद कर सकते हैं। 

आयु बढ़ने पर होता है प्रोस्टेट कैंसर -

यदि किसी को भी प्रोस्टेट कैंसर नहीं है तो सभी पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर के बारे में थोड़ा सावधान रहना चाहिए क्योंकि बुजुर्ग पुरुषों में यह बहुत आम समस्या है। प्रोस्टेट ग्रंथि की अन्य समस्याएं भी एंड्रोलॉजिस्ट के पास जाने का कारण बन सकती है। एक अध्ययन के मुताबिक 39 से कम उम्र के पुरुषों में 0.005% प्रोस्टेट कैंसर के विकास की संभावना बढ़ जाती है। वहीँ 40 से 59 साल के बीच के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के विकास की संभावना 2.2% बढ़ जाती है और 60 से 79 साल के बीच के पुरुषों में 13.7% प्रोस्टेट कैंसर के विकास की संभावना होती है। हालांकि उचित जाँच और उपचार इस से निपटने में बहुत अधिक प्रबंधनीय तरीके से मदद कर सकता है। याद रखें मूत्र में रक्त आना प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण हो सकता है।(और पढ़ें – पौरुष ग्रंथि कैंसर की सर्जरी (प्रोस्टेट कैंसर सर्जरी))

उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में झड़ते है बाल - 
पुरुषों में बालों के झड़ने की समस्या आम बात है और बहुत से पुरुषों तो पैटर्न गंजेपन की समस्या से बच भी नहीं सकते हैं। पुरुष और पैटर्न गंजापन के बीच एक मजबूत कड़ी है और इससे प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 


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पुरुषों के यौन (गुप्त) रोग के प्रकार, लक्षण, कारण, इलाज, उपाय और समाधान

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लगभग 10 में से 1 पुरुष यौन समस्याओं का अनुभव करते हैं। पुरुषों की यौन समस्याएं जीवन के किसी भी समय हो सकती हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ अधिक हो सकती हैं। अधिकांश यौन समस्याओं का इलाज किया जा सकता है - यदि आपको किसी भी प्रकार चिंताएं हैं तो एक अच्छे चिकित्सक से सलाह लें।

पुरुषों के यौन (गुप्त) रोग के प्रकार -

  • स्तंभन दोष - कभी-कभी जिसे नपुंसकता कहा जाता है - सेक्स के लिए लिंग के खड़े होने और खड़े रहने में समस्या होना। 
  • शीघ्र स्खलन (शीघ्रपतन), सेक्स के दौरान जल्दी इच्छा से पहले या सामान्य समय से पहले लिंग का स्खलन।
  • संकोची स्खलन या मंद स्खलन, जब आदमी का लिंग स्खलन धीमा हो। (और पढ़ें - सेक्स की जानकारी)
  • रेट्रग्रेड इजैक्यूलेशन, जहां वीर्य स्खलन लिंग के मुँह से बाहर आने के बजाय मूत्राशय में चला जाता है।
  • सेक्स में कम रुचि, सेक्स ड्राइव या कामेच्छा का न होना।

पुरुषों की यौन समस्याओं के कारण -

पुरुषों की सेक्स समस्याओं के निम्नलिखित कारण हो सकते है:-

शारीरक कारण

पुरुषों की सेक्स समस्याओं का निदान - 

  • डॉक्टर ऐसे व्यक्ति के लक्षणों के बारे में पूछताछ करता है, उस व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री की समीक्षा करता है और शारीरिक जांच कर सकता है।
  • एक GP या यौन स्वास्थ्य क्लिनिक निदान करने में सक्षम हो सकता है - या अतिरिक्त मूल्यांकन, परीक्षण या उपचार के लिए मामला विशेषज्ञों को रेफर किया जा सकता है।
  • विशेषज्ञ जो पुरुषों की सेक्स समस्याओं में मदद कर सकते हैं उनमें शामिल हैं:-
  • मूत्रविज्ञानी, जो मूत्र पथ और प्रजनन प्रणाली के विशेषज्ञ हैं।
  • एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, जो हार्मोन को प्रभावित करने वाली स्थिति में विशेषज्ञ हैं।
  • न्यूरोलॉजिस्ट, जो शरीर के तंत्रिका नेटवर्क में विशेषज्ञ हैं।
  • सेक्स चिकित्सक या सलाहकार और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ।
पुरुषों की सेक्स समस्याओं के लिए टेस्ट - 
पुरुषों की सेक्स समस्याओं के निदान के लिए जो टेस्ट्स किये जाते हैं उनमें निम्नलिखित टेस्ट्स शामिल हैं:-
  • कोई भी हार्मोन की समस्या जैसे कम टेस्टोस्टेरोन और कोई अज्ञात चिकित्सा समस्या जैसे कि मधुमेह, की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट।
  • किसी भी रुकावट या प्रतिबंध के लिए लिंग का रक्त प्रवाह जांचना। (और पढ़ें - ling ko mota karne ka tarika)
  • किसी भी तरह की सवेंदन सम्बन्धी हानि जैसे मधुमेह की जटिलता के लिए तंत्रिका जांच।
  • नाइट-टाइम लिंग कठोरता परीक्षण, यह देखने के लिए कि रात को होने वाले प्राकृतिक इरेक्शंस एक सामान्य आदमी की तुलना में अधिक मजबूत है, जो मनोवैज्ञानिक कारणों का संकेत दे सकता है।
पुरुषों की सेक्स समस्याओं के इलाज के तरीके - 
पुरुषों की सेक्स समस्याओं का उपचार इस पर निर्भर करेगा की उपचार के लिए कौनसे दृष्टिकोण का प्रयोग किया जाता हैं। इसमें निम्नलिखित दृष्टिकोण शामिल हो सकते हैं:-
  • चिन्हित चिकित्सा स्थितियों का इलाज करना।
  • इरेक्शन में सुधार करने के लिए दवाओं, इंजेक्शन, जेल या छर्रों का प्रयोग।
  • किसी भी असंतुलन को ठीक करने के लिए हार्मोन उपचार जैसे - टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी।
  • चिंता या अवसाद में मदद करने और मुद्दों पर चर्चा करने, जिसमें पुरुष की साथी शामिल हो सकती हैं, के लिए मनोवैज्ञानिक चिकित्सा, परामर्श या सेक्स थेरेपी।
  • इरेक्शंस में मदद करने के लिए वैक्यूम उपकरणों या पेनिल प्रत्यारोपण सहित यांत्रिक उपकरणों का उपयोग।
  • कई बार उपचार से समस्या ठीक हो जाती है। लेकिन उपचार की सफलता समस्या के कारण और उपचार के दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।

पुरुषों की सेक्स समस्याओं की रोकथाम - 
पुरुषों की सेक्स समस्याओं को हमेशा रोका नहीं जा सकता है, लेकिन सामान्य रूप से स्वास्थ्य की देखभाल के जरिये स्वस्थ सेक्स जीवन बनाए रखने में मदद करने के लिए निम्न कदम उठाए जा सकते हैं।

शराब सम्बंधित दिशानिर्देशों का कढ़ाई से पालन करना
धूम्रपान छोड़ना
तनाव से बचना
अधिक आराम
चिंताओं या समस्याओं के बारे में अपने साथी से बात करना

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महिलाओं की यौन समस्याओं (रोग) के प्रकार, लक्षण, कारण, इलाज, उपाय और समाधान

 
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महिलाओं में यौन समस्याएं आम हैं। अनुमान है कि युवा और मध्यम आयु वर्ग की लगभग एक-तिहाई महिलाओं और अधिक उम्र की आधी से ज्यादा महिलाओं को यौन समस्याएं प्रभावित करती हैं।

महिलाओं की यौन समस्याएं - 

महिलाओं की यौन समस्याओं के निम्नलिखित मुख्य प्रकार हैं।
यौन इच्छा या उत्तेजना का अभाव:- यौन इच्छा या सेक्स ड्राइव की कमी अक्सर कामेच्छा के अभाव के रूप में वर्णित की जाती है और कई महिलाएं विभिन्न प्रकार के लक्षणों का अनुभव कर सकती हैं। यौन उत्तेजना की कमी का परिणाम योनि में लुब्रिकेशन की कमी, संबंधों में चिंता या ख़राब स्वास्थ्य के रूप में सामने आ सकता है।

यौन इच्छा की कमी और यौन उत्तेजना की कमी अक्सर एक साथ होते हैं। एक का इलाज अक्सर दूसरे में सुधार करता है। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने चिकित्सक को उन सभी लक्षणों का ब्यौरा दे जिनको आप महसूस करते हैं, क्योंकि इलाज के लिए विभिन्न प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं।

चरम-सुख (ओर्गास्म) प्राप्त करने में समस्याएं:- इसमें कभी भी चरम-सुख (ओर्गास्म) न प्राप्त करना, ओर्गास्म में विलम्ब या ओर्गास्म की अनियमितता और ओर्गास्म संवेदनाओं की ताकत में कमी को शामिल किया जाता है। हालाँकि, कुछ महिलाओं को सेक्स का आनंद लेने के लिए ओर्गास्म प्राप्त करने की ज़रूरत नहीं होती है लेकिन कुछ महिलाओं और उनके यौन साथी के लिए यह समस्या हो सकती है।

सेक्स के दौरान या बाद में दर्द:- कुछ महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव हो सकता है यह योनि में लुब्रिकेशन की कमी के कारण और प्रवेश से पहले अपर्याप्त फोरप्ले के कारण हो सकता है। यह एक समस्या बन सकती है और एक महिला यौन अंतरंग होने या सेक्स का मजा लेना मजबूरन बंद सकती है।

महिलाओं की यौन समस्याओं के कारण - 

samasyaon

महिलाओं की यौन समस्याओं का निदान - 

यौन समस्या का मूल्यांकन एक व्यापक चिकित्सा साक्षात्कार के साथ शुरू होता है। अपने डॉक्टर को किसी भी प्रकार की मेडिकल या मानसिक बीमारी, हाल ही में या पहले कभी हुई सर्जरी और कोई भी दवाई जैसे ओवर-द-काउंटर ड्रग्स, जड़ी-बूटियां या सप्प्लिमेंट्स ले रहे हैं, तो इसके बारे में बताएं।

एक पूर्ण शारीरिक परिक्षण भी किया जायेगा। आपकी समस्या के प्रकार को ध्यान में रखते हुए, आपका डॉक्टर पेल्विक परिक्षण को शामिल कर सकता है या परिक्षण के इस भाग के लिए आपको एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास भेज सकता है। कुछ अन्य प्रकार की समस्याओं के लिए, अन्य विशेषज्ञों के साथ परामर्श की आवश्यकता हो सकती है।

ज्यादातर मामलों में प्रयोगशाला परीक्षणों की ज़रूरत नहीं होती है, हालांकि आपके डॉक्टर कुछ स्थितियों को खारिज करने के लिए परीक्षण का अनुरोध किया जा सकता हैं। आपके हार्मोन के स्तरों की जांच के लिए ब्लड टेस्ट कर सकते हैं। एक्सरे और अन्य रेडियोलॉजी परीक्षण केवल असामान्य परिस्थितियों में आवश्यक होते हैं।

महिला यौन समस्याओं के इलाज के तरीके - 

समस्या के प्रकार के आधार पर यौन समस्याओं का उपचार अलग-अलग होता है। कभी-कभी किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि यौन समस्या किसी मेडिकल या शारीरिक समस्या के कारण होती है, तो आपका डॉक्टर या परामर्श विशेषज्ञ उचित उपचार योजना का सुझाव देगा। यह निश्चित रूप से समस्या की प्रकृति के आधार पर भिन्न होगा। इस योजना में दवा, जीवन शैली में बदलाव या शल्य चिकित्सा शामिल हो सकती है। आपका डॉक्टर काउन्सलिंग करवाने की सलाह भी दे सकता है भले ही समस्या शारीरिक हो।

ड्रग ट्रीटमेंट्स:-
हिलाओं की सेक्स समस्याओं के उपचार के लिए दवाएं भी मिलती हैं। अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार मार्केट में उपलब्ध दवाओं का उपयोग किया जा सकता हैं। मधुमेह या अवसाद जैसी समस्याओं का इलाज करने से भी यौन समस्याओं में राहत मिल सकती है।

सेक्स थेरेपी:- 

इस थेरेपी में एक व्यक्ति या दंपति अपने यौन या रिश्ते की समस्याओं का आकलन और उपचार करने के लिए एक अनुभवी चिकित्सक के साथ काम करते हैं। साथ में वे उन कारकों की पहचान करते हैं, जो समस्या को गति प्रदान कर रहें हैं। इन कारकों के प्रभाव को हल करने या कम करने के लिए एक विशिष्ट उपचार कार्यक्रम तैयार करते हैं। सेक्स थेरेपी का उपचार के अन्य रूपों के साथ संयोजन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

योनि लुब्रिकेंट्स और मॉइस्चराइजर्स:- 

योनि का सूखापन एक समस्या है, तो यह लुब्रिकेंट्स और मॉइस्चराइजर्स के प्रयोग से बेहतर हो सकती है। यौन संभोग के समय योनि लुब्रीकेंट का उपयोग किया जाता है। ये अलग-अलग प्रकार में उपलब्ध हैं जैसे- तेल आधारित, पानी आधारित, सिलिकॉन आधारित इत्यादी। अपने डॉक्टर के परामर्श के अनुसार या जो आपके लिए उचित हो ऐसे लुब्रीकेंट का उपयोग कर सकते हैं।

योनि मॉइस्चराइजर योनि में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं। इनको नियमित रूप से और सेक्स से कम से कम 2 घंटे पहले उपयोग किया जा सकता है। वे ओवर-द-काउंटर या प्रेस्क्रिप्शन पर उपलब्ध हैं। कृपया अधिक जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

एस्ट्रोजेन:-
एस्ट्रोजेन का स्तर रजोनिवृत्ति के बाद और मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि के आघात के बाद गिरता है (आमतौर पर सिर की चोट, अवजालतनिका (सुबरचनोइड) रक्तस्त्राव या सिर पर विकिरण के कारण)। एस्ट्रोजेन प्रतिस्थापन या तो व्यवस्थित रूप से पूरे शरीर में स्तर बढ़ाने के लिए या योनि में केवल इस क्षेत्र में स्तर बढ़ाने के लिए दिया जा सकता है।

टेस्टोस्टेरोन:- 
महिलाओं में, टेस्टोस्टेरोन अंडाशय और अधिवृक्क ग्रंथियों में स्वाभाविक रूप से पैदा होता है, और यह महिला यौन फंक्शन से जुड़ा हुआ है। यौन इच्छाओं में कमी टेस्टोस्टेरोन के स्तरों में गिरावट के साथ जुड़ी हो सकती है। जब एक महिला के अंडाशय को शल्यचिकित्सा (ऊ-फॉरेक्टमी) से हटा दिया जाता है, तो टेस्टोस्टेरोन का स्तर अचानक गिरता है। (और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

Tibolone (Livial®):- 
ये अक्सर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) के एक प्रकार के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यह मानव-निर्मित स्टेरॉइड है जिसमें महिला हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन के साथ-साथ टेस्टोस्टेरोन भी हैं। यह गर्म फ़्लशेस जैसे रजोनिवृत्ति के लक्षणों में सुधार कर सकता है और कामेच्छा ('सेक्स ड्राइव') की कमी में सुधार कर सकता है।

मनोचिकित्सा:- 
यदि समस्या ज्ञान की कमी के कारण है, तो आपके डॉक्टर या सेक्स चिकित्सक आपको यौन प्रतिक्रिया चक्र और यौन उत्तेजना के तत्वों के बारे में (और आपके साथी को) सिखा सकते हैं। इस नए ज्ञान के साथ, कई जोड़ों को अपने आप आगे बढ़ने में मदद मिलती हैं। मनोचिकित्सा एक महिला को उसके जीवन में यौन समस्याओं की पहचान करने में सहायता कर सकती है।

महिला यौन समस्याओं की घर पर स्वयं - देखभाल

सभी यौन समस्याओं के लिए उपचार की आवश्यकता नहीं है कुछ समस्याओं को आप और आपके साथी द्वारा अकेले खुलेपन और रचनात्मकता के साथ हल किया जा सकता है। कुछ समस्याएं समय के साथ खुद दूर चली जाती हैं - आपको बस धैर्य और समझने की आवश्यकता है।

कभी-कभी आपके साथी के साथ समस्या की चर्चा करना ही पर्याप्त होता है। जो महिलाएं अपने पार्टनर को अपनी यौन जरूरतों के बारे में बताना सीख जाती हैं, उन्हें एक संतोषजनक यौन जीवन जीने का बेहतर मौका मिलता है।

समाधान को मज़ेदार बनाने का प्रयास करें - अपने यौन दिनचर्या में थोड़ा रोमांस और उत्तेजना लाने के तरीके सोचें। कुछ तरीके जो यौन समस्याओं पर काबू पाने में महिलाओं की मदद कर सकते हैं:-

  • बच्चे और अन्य विकर्षण के बिना अपने साथी के साथ अकेले रहने के लिए अलग-अलग समय निर्धारित करें।
  •  उत्तेजना बढ़ाने के लिए कामुक वीडियो या पुस्तकों का उपयोग करें।
  •  अपनी कामोत्तेजना को बढ़ने के बारे में जानने के लिए हस्तमैथुन करें।
  • जो आपको यौन उत्तेजित करता है उसके बारे में कल्पना करें। यदि उचित हो, तो अपने साथी को इन कल्पनाओं के बारे में बताएं।
  •  कामुक मालिश और स्पर्श के अन्य रूपों का उपयोग करें।
  •  नई सेक्स स्थितियों या परिदृश्यों की कोशिश करें।
  •  सेक्स करने से पहले गर्म स्नान जैसी विश्राम की तकनीक का उपयोग करें।
  •  योनि के सूखापन के कारण उत्तेजना की समस्याओं को दूर करने के लिए योनि लुब्रीकेंट का प्रयोग करें।
  •  कई उत्कृष्ट पुस्तकें बुकस्टोर्स या ऑनलाइन स्रोतों पर यौन और आपसी बातचीत की समस्याओं से निपटने में मदद करने के लिए उपलब्ध हैं। आप इनकी भी मदद ले सकती हैं।

महिलाओं की यौन समस्याओं की रोकथाम - 
यौन समस्याओं से बचने या ठीक करने के लिए आप सबसे महत्वपूर्ण काम यह कर सकते हैं कि अपने साथी के साथ खुलकर और ईमानदारी से संवाद करें।

सम्पूर्ण स्वास्थ को बढ़ावा देने के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना आपके आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को बढ़ाएगा, जो यौन संबंधों में आपकी रुचि और आपकी प्रतिक्रियाएं को बढ़ाएगा। आप निम्नलिखित सुझाव अपना सकते हैं:-
  •     एक स्वस्थ आहार खाएं।
  •     तम्बाकू का प्रयोग न करें।
  •     प्रत्येक दिन कम से कम 30 मिनट के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहें अर्थात व्यायाम करें।
  •     प्रयाप्त आराम करें।
  •     तनाव नियंत्रण में रखें।
  •     यदि आप शराब पीते हैं, तो कम मात्रा में पिये।
  •     नियमित रूप से सिफारिश की गई स्वास्थ्य जांच जैसे पैप टेस्ट और मेमोग्राम करवाएं।

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मासिक धर्म (पीरियड्स) में सेक्स के सुरक्षा और फायदे

 
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आपके मासिक धर्म का मतलब यह नहीं है कि आपको यौन संबंध छोड़ना होगा। इसके विपरीत, कुछ महिलाओं के लिए तो मासिक धर्म अवधि के दौरान यौन सम्बन्ध महीने के अन्य समय की तुलना में अधिक सुखद हो सकते है।

मासिक धर्म अवधि के दौरान लुब्रिकेशन की आवश्यकता कम हो जाती है और कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि सेक्स मासिक धर्म अवधि से संबंधित प्रभावों को कम कर सकता है, जैसे ऐंठन। 2013 में प्रकाशित एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि यौन गतिविधि कुछ लोगों के माइग्रेन और क्लस्टर सिरदर्द दर्द को कम कर सकती है।

मासिक धर्म चक्र के दौरान एसटीआई (यौन संचारित संक्रमण) की रोकथाम और अच्छे गर्भनिरोधक का प्रयोग आपके यौन संबंधों को अधिक सुरक्षित और मज़ेदार बना सकता है। लेकिन सेक्स करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आप मासिक धर्म चक्र के दौरान एसटीआई, अन्य संक्रमण और गर्भावस्था के खतरे को समझते हैं।

मासिक धर्म चक्र के दौरान सुरक्षित सेक्स करने के बारे में आपको निम्नलिखित बातें जानने की आवश्यकता है।

माहवारी के दौरान सैक्स से संक्रमण का जोखिम - 

आपके मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित सेक्स करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आपको एसटीआई जैसे - एचआईवी संक्रमण हो सकता हैं। वायरस मासिक धर्म के रक्त में मौजूद हो सकता है इसलिए डॉक्टर इस जोखिम को कम करने के लिए कंडोम का उपयोग करने के लिए जोर देते हैं। आप पुरुष कंडोम या महिला कंडोम, किसी का भी उपयोग कर सकते हैं।

आप इस समय सामान्य रूप से कुछ अन्य संक्रमणों के प्रति भी अधिक प्रवण हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आपकी योनि का पीएच स्तर महीने भर 3.8 से 4.5 रहता है। लेकिन माहवारी के दौरान, यह स्तर ब्लड के उच्च पीएच स्तर के कारण बढ़ जाता है ऐसे में यीस्ट अधिक तेजी से बढ़ने में सक्षम हो जाता है।

योनि के यीस्ट संक्रमण के लक्षण आपके मासिक धर्म की अवधि से पहले सप्ताह में होने की संभावना है और इस समय के दौरान संभोग करने से प्रभाव बढ़ सकते हैं। लेकिन मासिक धर्म के दौरान यौन सम्बन्ध से यीस्ट संक्रमण होने के अधिक जोखिम के स्पष्ट प्रमाण नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ महिलाओं को संभोग के बाद मूत्र पथ के संक्रमण होने की संभावना अधिक हो सकती है। यह संभवतः संभोग के साथ आसानी से मूत्राशय की यात्रा करने में सक्षम बैक्टीरिया से संबंधित है, लेकिन यह मासिक धर्म चक्र के दौरान किसी भी समय हो सकता है।

पीरियड्स में सेक्स से गर्भधारण का क्यों होता है कम खतरा - 

जब आप पीरियड्स के दौरान यौन संबंध बनाते हैं, तो गर्भवती होने की संभावना बहुत कम होती है, क्योंकि आमतौर पर मासिक धर्म के दौरान आप अण्डोत्सर्ग से कई दिन दूर हो जाते हैं। लेकिन इसके अपवाद भी हैं। यदि आपका मासिक धर्म चक्र (21 से 24 दिन) कम है और आप अपनी माहवारी के अंत में यौन संबंध बनाते हैं, तो शुक्राणु आपकी योनि में पांच दिन तक व्यवहार्य बने रह सकते हैं, इसलिए गर्भावस्था संभव है। लेकिन अगर आप एक बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं तो गर्भवती होने का प्रयास करने के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है।

मासिक धर्म में सम्भोग में लुब्रिकेशन की क्यों होती है कम आवश्यकता - 

यदि आप मासिक धर्म के दौरान संभोग करते हैं, तो योनि में पर्याप्त गीलापन होने के कारण आपको किसी लुब्रिकेंट्स अर्थात योनि में गीलापन बढ़ाने के उपाय की आवश्यकता नहीं होती हैं।। यदि आपको लुब्रीकेंट की आवश्यकता लगती है, तो पानी आधारित लुब्रिकेंट्स बाजार में उपलब्ध हैं जो सेक्स करने और कंडोम दोनों के लिए सुरक्षित हैं।

सिलिकॉन और हाइब्रिड लुब्रिकेंट्स, जो पानी आधारित और सिलिकॉन आधारित हैं, वे भी सेक्स करने और कंडोम दोनों के लिए सुरक्षित हैं। तेल आधारित लुब्रिकेंट्स, विशेष रूप से खनिज तेल आधारित लुब्रिकेंट्स का उपयोग करने से आपका कंडोम फट सकता है और लेटेक्स कंडोम के साथ तेल आधारित लुब्रिकेंट्स उपयोग करने से मना किया जाता है।

मासिक धर्म में यौन सम्बन्ध बनाना है दर्द निवारक - 
यदि आप ऐंठन, उदासी की भावना या मासिक धर्म अवधि के दौरान अवसाद का अनुभव करती हैं, इस समय सेक्स करना फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि ओर्गास्म्स एंडोर्फिन, ऑक्सीटोसिन और डोपामाइन जैसे अच्छा महसूस करवाने वाले हार्मोन को स्त्रावित करता हैं - आप सैद्धांतिक रूप से कह सकते हैं कि वे मासिक धर्म के कुछ प्रभावों को भी कम कर देंगे। इसलिए कोशिश करने में कोई नुकसान नहीं है।


मासिक धर्म में सेक्स के दौरान होती है अधिक यौन उत्तेजना - 
आपके हार्मोन के स्तरों में होने वाले बदलावों के कारण महीने के इस समय के दौरान आप अधिक यौन उत्तेजित और संवेदनशील महसूस कर सकते हैं। विशेषज्ञ कहते है कि कई महिलाएं पेल्विक क्षेत्र में रक्त-संकुचन की बढ़ती भावना का अनुभव करती हैं, जो आपके सेक्स ड्राइव या इच्छा को भी बढ़ा सकती हैं। लेकिन कुछ महिलाओं को, यह अतिरिक्त संवेदनशीलता इस समय के दौरान सेक्स करने में असुविधाजनक बना सकती हैं। महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि आप और आपके साथी दोनों इस स्थिति के साथ सहज हैं।

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मासिक धर्म में गर्भधारण हो सकता है क्या

 
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यदि आप गर्भवती होने या नहीं होने का प्रयास कर रही हैं, तो अपनी मासिक धर्म अवधि का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आपको गर्भ धारण के लिए सबसे उपयुक्त दिनों को चुनने में मदद करेगा, तब आप आसानी से गर्भ धारण कर सकती हैं।

एक सामान्य प्रजनन मिथक यह है कि एक महिला अपने मासिक धर्म के दौरान गर्भवती नहीं हो सकती। मासिक धर्म की अवधि के दौरान सामान्य दिनों की अपेक्षा गर्भधारण की संभावना कम जरूर है किन्तु शून्य नहीं हैं।

आपको गर्भ धारण और मासिक धर्म के दौरान यौन संबंध बनाने के बारे में निम्नलिखित बातें जानने की जरूरत है।

गर्भधारण की प्रक्रिया

गर्भ धारण करने की क्षमता चमत्कारी है। इसके लिए एक महिला के अंडे के साथ पुरुष के शुक्राणुओं के मिलन की आवश्यकता होती है। एक महिला के अंडाशय द्वारा एक अंडे के रिलीज करने के बाद, अंडा 12 से 24 घंटे के बीच जीवित रहता है। पुरुष शुक्राणु लगभग तीन दिनों तक जीवित रह सकता है।

सामान्य महिला मासिक चक्र 28 दिन का है। पहला दिन तब होता है जब पीरियड्स शुरू होते है। आम तौर पर 14 वें दिन के आसपास महिला का अंडाशय अंडे को उत्सर्जित करता है (हालाँकि यह 12, 13 या 14 वें दिन के आसपास हो सकता है)। अंडोत्सर्ग (ओवुलेशन) तब होता है जब एक महिला का अंडाशय निषेचन के लिए अंडे का उत्सर्जन करता है। यदि गर्भाशय में शुक्राणु उपलब्ध है, तो गर्भ धारण हो सकता है।

अंडोत्सर्ग एक महिला के चक्र के आधार पर भिन्न हो सकता है। कुछ महिलाओं की अवधि लगभग 35 दिनों के बीच होती है। अंडोत्सर्ग तब 21 दिन के आसपास होगा। 21 दिन के छोटे चक्र वाली महिलाओं में 7 वें दिन के आसपास अंडोत्सर्ग हो जाता हैं।

मासिक धर्म में गर्भधारण कैसे होता है - 

योनि से रक्स्राव होने को पीरियड्स की शुरआत समझने की गलती हो सकती है। यह संभव है कि जब आप अंडोत्सर्जन के दौरान गर्भ धारण के लिए सबसे उपजाऊ हो, तब आपको रक्तस्राव हो सकता हैं। इस समय असुरक्षित यौन संबंध बनाने से नाटकीय रूप से गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।

औसत महिला के लिए अंडोत्सर्जन चक्र करीब 28 और 30 दिनों के बीच होता है। इसका मतलब यह है कि यदि आप पीरियड के दौरान यौन संबंध बनाते हैं, तो आप कई दिनों के बाद तक संभवतः अंडोत्सर्जन नहीं करेंगी। लेकिन छोटे चक्र वाली महिलाओं के पीरियड होने और अंडो के उत्सर्जन होने के बीच इतना समय नहीं होता।

आदमी के शुक्राणु स्खलन के बाद 72 घंटे तक एक महिला की योनि के अंदर जीवित रह सकते हैं। यदि आप पीरियड के अंत में यौन संबंध बनाती हैं तो गर्भवती होने की आपकी संभावना बढ़ जाएगी।

मासिक धर्म में गर्भधारण होने की संभावना - 

एक महिला के गर्भवती होने की संभावना उसके अंडोत्सर्जन चक्र के दौरान घट-बढ़ सकती है। सामान्य महिला का मासिक चक्र औसतन 29 दिनों का हो सकता है, अन्य में यह 20 से 40 दिन या उससे अधिक समय तक का भी हो सकता है।

एक महिला को रक्तस्राव शुरू होने के एक या दो दिन बाद गर्भवती होने की संभावना लगभग शून्य है। लेकिन यह संभावना इन दो दिन के बाद लगातार बढ़ना शुरू हो जाती हैं, भले ही उसे अभी भी रक्तस्राव हो रहा हो। यह अवधि के शुरू होने के बाद लगभग 13 वें दिन गर्भावस्था की संभावना 9 प्रतिशत अनुमानित है। हालांकि ये संख्या कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक महिला कभी भी 100% आश्वस्त हो सकती है कि वह इस अवधि में गर्भवती नहीं होगी।

मासिक धर्म में जन्म नियंत्रण सावधानी - 
यदि आप गर्भवती होने की कोशिश कर रहे हैं, तो मासिक धर्म की अवधि के दौरान यौन संबंध बनाने से आपको गर्भ धारण करने में मदद नहीं मिलेगी, जब तक कि आपका मासिक धर्म चक्र 28 दिनों से कम की अवधि का न हो। लेकिन यह संभावना हमेशा रहेगी कि आप गर्भवती हो सकती हैं।

यदि आप गर्भवती होने की कोशिश नहीं कर रही हैं, तो हर समय सुरक्षित सेक्स करना महत्वपूर्ण है। इसमें कुछ प्रकार के गर्भनिरोधक का उपयोग करना शामिल है जैसे कंडोम पहनना या गर्भनिरोधक गोलियां लेना। जन्म नियंत्रण की गोलियां यौन संचरित रोगों जैसे कि हरपीज, गोनोरिया या क्लैमाइडिया के खिलाफ सुरक्षा नहीं प्रदान करेगी। अपने आप को अवांछित संक्रमण से बचाने के लिए, अपने साथी को कंडोम पहनाएं।

अंत में, यदि आप गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं और एक वर्ष या उससे अधिक असुरक्षित यौन संबंध रखने के बाद भी गर्भवती नहीं हुई है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। वो आपके अंडोत्सर्जन चक्र पर नज़र रखने के तरीके बताने के साथ ही प्रजनन विशेषज्ञ की सिफारिश कर सकते हैं। डॉक्टर आपका परीक्षण और उपचार कर सकते हैं जो आपकी गर्भाधान की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करेगा।

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मासिक धर्म क्या है और होने वाली समस्याएं

 
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माहवारी प्रजनन चक्र का प्राकृतिक अंग है जिसमें गर्भाशय से रक्त योनि के माध्यम से निकलता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 10 से 15 वर्ष की आयु की लड़कियों में शुरू होती है और उनमें यौवन की शुरुआत का एक संकेत है। हमारे इस लेख में मासिक धर्म से सम्बंधित आप के हर सवाल का मिलेगा जवाब। जानें कि आखिर मासिक धर्म चक्र कैसे काम करता है और क्या करें यदि आपको दर्दनाक या अनियमित मासिक धर्म की समस्या हैं।

मासिक धर्म क्या है? - 

महिलाएं पेट के अंदर अपने गर्भाशय के दोनों तरफ दो छोटे, अंगूर के आकार के अंडाशय के साथ पैदा होती हैं। अंडाशय सैकड़ों अंडे से भरा होता है। जब आप यौवन तक पहुंचते हैं तो आपका अंडाशय हार्मोन (विशेष रूप से एस्ट्रोजेन) बनाता हैं जिससे स्तन का विकास और मासिक धर्म का आरम्भ होता है। आपके मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा गोनैडोट्रोपिन नामक रासायनिक संदेशवाहक (FSH और LH) का स्राव किया जाता है, जो कि आपके अंडाशय को महीने में एक बार एक परिपक्व अंडा जारी करने का सन्देश देता है। अंडा फिर गर्भाशय की ओर जाता है।

अगर अंडे को शुक्राणु द्वारा निषेचित नहीं किया जाता है, तो दो हफ्ते बाद, मोटी, खूनी अस्तर (एंडोमेट्रियम) जो आपके गर्भाशय में पीरियड्स के बीच बनाता है, आपकी योनि के माध्यम से आपके शरीर से बाहर निकलता है यह प्रवाह, जो रक्त के रूप में आता है, यह आपकी मासिक धर्म है। पूरी प्रक्रिया को माहवारी कहा जाता है, यह तब शुरू होता है जब आपका शरीर इसके लिए तैयार हो जाता है। ज्यादातर मासिक धर्म 3 से 5 दिन तक चलते हैं।

जब मासिक धर्म (मासिक धर्म) नियमित रूप से आते हैं, इसे मासिक धर्म चक्र कहा जाता है। नियमित मासिक धर्म होने पर यह संकेत मिलता है कि आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंग सही काम कर रहे हैं। मासिक धर्म चक्र आपको स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण शारीरिक रसायनों, जिन्हें हार्मोन कहा जाता है, प्रदान करता है।

आपका मासिक धर्म चक्र आपके शरीर को प्रत्येक माह गर्भावस्था के लिए तैयार करता है एक चक्र पीरियड के पहले दिन से गिना जाता है। औसत मासिक चक्र 28 दिन लंबा होता है। हालाँकि यह चक्र वयस्कों में 21 से 35 दिनों के बीच और युवा किशोरों में 21 से 45 दिनों तक का भी हो सकता हैं। पुरे महीने के दौरान हार्मोन के स्तर में वृद्धि और गिरावट मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करती है।

पीरियड्स से जुड़े मिथक - 

केवल महिलाओं से जुड़ा मुद्दा होने के बावजूद, यह हमेशा कई समाजों में गोपनीयता और मिथकों से घिरा हुआ रहा है। माहवारी से सम्बंधित कई प्रकार के निषेध, महिलाओं और लड़कियों को सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के कई पहलुओं से बाहर कर देते हैं।

सांस्कृतिक रूप से भारत के कई हिस्सों में, माहवारी को अभी भी गंदा और अशुद्ध माना जाता है। महिलाओं को सामान्य जीवन की गतिविधियों में भाग लेने से भी रोका जाता है। इस धारणा के लिए कोई वैज्ञानिक कारण नहीं दिखता है कि मासिक धर्म महिलाओं को "अशुद्ध" बनाता है।

कई लड़कियों और महिलाओं को अपने दैनिक जीवन में केवल इस कारण प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता हैं क्योंकि वे मासिक धर्म में हैं। उन्हें मंदिर में प्रार्थना करने और पवित्र पुस्तकों को छूने से भी रोका जाता है। हालाँकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों से अब इस तरह के प्रतिबन्ध कम हो रहे हैं, किन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी हालत बदलें नहीं हैं।

यह भी माना जाता है कि मासिक धर्म में महिलाएं हानिकारक और अशुद्ध होती हैं, इसलिए जो भोजन वे तैयार करती हैं वो दूषित हो सकता हैं। हालांकि, जब तक सामान्य स्वच्छता उपायों को ध्यान में रखा जाता है, तब तक कोई भी वैज्ञानिक परिक्षण मौजूद नहीं हैं जो इस मिथक को साबित कर सकें।

यह भी माना जाता है कि एक महिला अपने मासिक धर्म का खून एक आदमी पर अपनी इच्छा लागू करने के लिए उपयोग कर सकती हैं। जिसे मासिक धर्म में वशीकरण कहा जाता हैं। दिलचस्प बात है, केवल भारत ही नहीं एशिया के अन्य देशों में भी, ऐसी मान्यताओं का अभी भी अभ्यास किया जाता है। हालांकि, इसके लिए कोई तर्कसंगत या वैज्ञानिक व्याख्या उपलब्ध नहीं है।

भारत के कुछ हिस्सों में, मासिक धर्म के दौरान कुछ कठोर आहार प्रतिबंधों का भी पालन किया जाता है जैसे दही, इमली और अचार जैसा खट्टा भोजन आमतौर पर लड़कियों के मासिक धर्म से नहीं खानें दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसे खाद्य पदार्थ मासिक धर्म प्रवाह को प्रभावित या रोक सकते हैं।

पीरियड्स में क्या करना चाहिए - 

सबसे पहले मासिक धर्म के बारें में अपनी सोच को बदलें। कई महिलाएं इसे एक सजा के रूप में देखती हैं। जबकि यह आपके जीवन का अभिन्न प्राकृतिक अंग है। अपने पीरियड के बारें में महिला होने के संकेत के रूप में आपको गर्व महसूस होना चाहिए क्योंकि यह आपके माँ बनने के विशेष गुण के साथ जुड़ा हुआ है। आपकी यह सकारात्म सोच पीरियड के बारें में चिंता को कम करने में मदद करेगी। 

अपने मासिक धर्म का ध्यान रखें। मासिक अवधि पर नज़र रखने से आपको न केवल इसके आने का सही समय पता रहेगा, बल्कि यह आपकी मदद भी कर सकता है। जब आप गर्भवती होने का प्लान बनाती है तो आपको गर्भावस्था का सबसे उपयुक्त समय पता रहेगा।

आप का मासिक धर्म जिस दिन शुरू होता हैं और जिस दिन समाप्त होता है, उसका एक कैलेंडर, जर्नल में या मोबाइल ऐप के द्वारा पूरा ब्यौरा रख सकते हैं। कई ऐप्स हैं, जैसे स्ट्राबेरी पाल (Strawberry Pal) या क्लू (Clue), जो आपकी मासिक अवधि को ट्रैक करने और आपके अगले चक्र के शुरू होने के बारे में रिमाइंडर सेट करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।

याद रखें कि मासिक धर्म शुरू होने के पहले वर्ष के दौरान, कई बार ये अनपेक्षित होते हैं और कभी भी आ जाते हैं। ऐसा होने पर कोई चिंता न करें क्योंकि यह पूरी तरह से सामान्य है। हालांकि, पहले वर्ष के बाद, आपकी मासिक अवधि अधिक नियमित पैटर्न में होगी और इसे ट्रैक करना आसान हो जायेगा।

मासिक धर्म अवधि महिलाओं के बीच भिन्न-भिन्न होती है। वे 21 से 35 दिनों तक की हो सकती हैं और आपकी अवधि दो से सात दिन तक रह सकती है। यह नियमित हो सकती है और प्रत्येक महीने एक ही समय में हो सकती है, या यह अनियमित हो सकती है। जब आप यौन रूप से सक्रिय हो तो मासिक धर्म की निगरानी रखना बहुत जरूरी है।

हर समय अपने साथ स्त्री स्वच्छता उत्पादों को रखें। अपने पर्स, बैकपैक और कार में एक अतिरिक्त टैम्पन, पैन्टी लाइनर या पैड रखें। इस तरह, यदि अचानक आपका मासिक धर्म आ जाता है तो भी आप सुरक्षित रह सकती हैं। यह विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण है अगर आपके मासिक धर्म अनियमित हो और आप सही ढंग से अंदाजा नहीं कर पा रहे हैं कि आपकी अगली अवधि कब शुरू होगी।

पीरियड्स में क्या नहीं करना चाहिए -

वैक्सिंग न करें। एस्ट्रोजन का स्तर आपके मासिक धर्म के दौरान गिर जाता है। इतनी कम एस्ट्रोजन संख्या होने से आपको शारीरिक दर्द बहुत अधिक हो जाता है, जिससे आपका शरीर बहुत संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में वैक्सिंग करवाना बेहद असुविधाजनक और दर्दनाक हो सकता है।

रोमांटिक और दुखभरी फ़िल्में न देखें। आपके मासिक धर्म में आपकी भावनाएं बहुत भिन्न होती हैं। हार्मोन का स्तर असंतुलित होता है और आपका शरीर अनुकूलन करने की कोशिश करता है लेकिन आपका मन यह नहीं जानता कि प्रतिक्रिया कैसे करें। ऐसे में भावनात्मक फिल्में आपके लिए एक आपदा की तरह हो सकती हैं। वे आपकी संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं। इसके बजाय नई हास्य फिल्मों को देखने के लिए इस समय का उपयोग करें।

यह सोच कर की रात में प्रवाह कम है असावधान न रहें। नहीं तो आपको परेशानी हो सकती है। जब आप रात में बिस्तर पर जाते हैं, तो अतिरिक्त सावधानी रखें ।

आपको इन दिनों के दौरान अपनी शारीरिक गतिविधि को बढ़ाना चाहिए। शारीरिक गतिविधि ऐंठन, चिंता और आपके रोलर कोस्टर जैसी भावनाओं के नियोजन में मदद करती है। 

भले ही पैड या टैम्पोन के बॉक्स के निर्देशों के अनुसार आप प्रत्येक उत्पाद का इस्तेमाल 8 घंटे तक कर सकते हैं, लेकिन इसे हर 3 से 4 घंटे में बदलना अच्छा होता है। यह आपकी असुविधा को सीमित करता है और बैक्टीरिया को विकास से रोकता है।

यह सच है कि द्रव प्रतिधारण के कारण मासिक धर्म में आप कुछ अतिरिक्त कैलोरी लेते हैं। यह भी सच है कि एक बार चक्र पूरा हो जाने पर आप अपने सामान्य वजन पर वापस आ जाते हैं। किन्तु यह सच नहीं है कि आप जो कैलोरी उन दिनों लेते हैं वो काउंट नहीं होती है। दुर्भाग्य से, कुछ भी अतिरिक्त कैलोरी हम लेते है तो हमें इसे बर्न करना पड़ता है या फिर ये कैलोरी आपका वजन बड़ा सकती है।

पीरियड्स में क्या खाएं क्या न खाए - 

लोह खनिज में समृद्ध खाद्य पदार्थ खाएं। हालांकि मासिक धर्म के दौरान कैल्शियम भी अच्छा है, लेकि डेयरी उत्पाद अच्छे नहीं हैं। इनमें एराक्इडोनिक एसिड होता है, जो पेट के निचले हिस्से में अधिक ऐंठन पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक सोडियम वाले भोजन का सेवन बिल्कुल न करें। अधिक सोडियम का सेवन द्रव प्रतिधारण, सूजन और अधिक ऐंठन का कारण हो सकता है। 

मासिक धर्म में दर्द के कारण और उपाय - 

मासिक धर्म के दौरान दर्द होना बहुत आम बात है, मासिक धर्म वाली 40 से 70 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता हैं। इस प्रकार के दर्द को डाइस्मेनोरिया कहा जाता है, यह पेट के निचले क्षेत्र में ऐंठन की तरह महसूस होता है और आमतौर पर मासिक धर्म के पहले या दौरान ऐसा होता है।

डाइस्मेनोरिया अधिकांश किशोर लड़कियों में एक गंभीर बीमारी नहीं है, भले ही ऐंठन गंभीर हो सकती है। अधिक उम्र की महिलाओं में दर्द, कभी-कभी किसी बीमारी या गर्भाशय फाइब्रॉएड या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थिति के कारण होता है। कुछ महिलाओं के लिए, हीटिंग पैड का इस्तेमाल करना या गर्म स्नान करना उनके ऐंठन को कम करने में मदद करता है। कुछ ओवर-द-काउंटर दर्द दवाएं इन लक्षणों में भी मदद कर सकती हैं। अगर ये दवाएं आपको दर्द से राहत नहीं देती हैं। तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

उपचार इस पर निर्भर करता है कि आपकी समस्या क्या है और यह कितनी गंभीर है। 

मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव के कारण और उपाय - 
गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव जो सामान्य मासिक धर्म से अलग है। इसमें मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव, सेक्स के बाद रक्तस्त्राव, मासिक धर्म चक्र में किसी भी समय भारी या सामान्य से अधिक रक्तस्राव, रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव शामिल हैं।

इस असामान्य रक्तस्राव के कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि - रक्त के थक्के बनने, थाइरोइड ग्रन्थि, गर्भाशय में अनावश्यक दबाव इत्यादि। आपका चिकित्सक आपके आयु वर्ग में सबसे अधिक आम होने वाली समस्याओं के आधार पर जांच कर शुरू कर सकता है। उनमें से कुछ गंभीर नहीं होती हैं और इलाज करना आसान है। कुछ अधिक गंभीर हो सकती है।

असामान्य रक्तस्राव का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। यदि आपको इस प्रकार असामान्य खून बह रहा है तो अपने डॉक्टर को सूचित करें।

मासिक धर्म में देरी के कारण और उपाय - 
रजोनिवृत्ति के करीब पहुँच चुकी महिलाओं और किशोर लड़कियों दोनों में, हार्मोनल परिवर्तन अनियमित चक्रों के साथ लंबी माहवारी का कारण हो सकते हैं। यदि कारण हार्मोनल परिवर्तन है, तो भी आप उपचार करवा सकती हैं। यह तनाव, अधिक व्यायाम, वजन घटाने या आहार के कारण हो सकता है। 

आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि ये अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे गर्भाशय फाइब्रॉएड, पॉलीप्स या कैंसर के कारण भी हो सकता हैं।

मासिक धर्म में सम्बन्ध बनाना - 
जब आप सेक्स करने वाले हो तो कुछ तोलिये बेड पर बिछा दे, ताकि मासिक धर्म के रक्तस्राव से आपका बेड ख़राब न हो। अपने बगल में कुछ टिस्यू भी रख लें, ये सेक्स के बाद आपके अंगो की सफाई के लिए उपयोगी होगें।

जब आप संभोग करते हैं तो मिशनरी स्थिति का ही प्रयोग करें। इससे खून के प्रवाह को कम करने में मदद मिलेगी। आप अपनी पीठ के बल लेट जाएं और अपने साथी को प्रवेश कराने के लिए कहें।

इसके अलावा, आपके मासिक धर्म के दौरान आपकी गर्भाशय ग्रीवा सामान्य से निचे और अधिक संवेदनशील हो सकती है। यदि आपको इस पर लिंग से चोट लगती है, तो अपने साथी को बताएं और पूरा ध्यान रख के साथ आगे बढ़ें।

शॉवर में सेक्स करें। इससे न केवल सफाई की टेंशन कम होगी, बल्कि इससे आपको अच्छा भी मासूस होगा। यदि आप के साथी  को भी कोई आपत्ति न हो, तो इस तरीके को आजमा कर देखें।

मासिक धर्म में गर्भधारण - 
यह एक आम धारणा है कि एक महिला गर्भवती नहीं हो सकती है, यदि वह मासिक धर्म के दौरान अपने साथी के साथ संभोग करती है। हालांकि, मासिक धर्म चक्र के दौरान महिलाओं के लिए गर्भवती होने की काफी संभावना है। आप गर्भधारण तब करते है, जब निषेचन (शुक्राणु अंडे से मिलता है) होता है।

मासिक धर्म में गर्भधारण के विषय में विस्तार से जानकारी के लिए हमारा यह लेख पढ़ें मासिक धर्म में गर्भधारण हो सकता है क्या और अपने सभी शंकाओ को दूर करें।

मासिक धर्म में व्रत - 
हिन्दू धर्म के मासिक धर्म और पूजा पाठ संबंधी नियमो के अनुसार आप व्रत रख सकते हैं, किन्तु पूजा के लिए आपको घर के किसी अन्य सदश्य की सहायता लेनी होती हैं। यह हमारा निजी विचार नहीं हैं। आप अपनी इच्छा अनुसार पूजा पाठ और व्रत करने के लिए स्वतंत्र है। आपकी भगवान में निष्ठा के आगे इन नियमो का कोई महत्व नही हैं।

मुस्लिम धर्म के नियमों के अनुसार मुस्लिम महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान नमाज पढनें, रोज़ा रखने का हक़ नहीं दिया गया हैं। ये भी हमारे निजी विचार नहीं हैं। आप अपनी निष्ठा अनुसार नियम मानने का हक़ सुरक्षित रखती हैं।

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सेक्स थेरेपी के फायदे

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सेक्स के दौरान आने वाली परेशानियों को लेकर अधिकतर लोग शर्मिंदगी महसूस करते हैं और इस कारण उसे छिपा लेते हैं। लेकिन इन परेशानियों के लिए कई इलाज उपलब्ध हैं, जिनमें से एक है सेक्स थेरेपी। यह थेरेपी मनोचिकित्सा की तरह ही होती है। जब यौन समस्याओं के पीछे कोई शारीरिक कारण नहीं होता है, तब इस थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। इसमें विशेषज्ञ आपका इलाज थेरेपी के द्वारा करते हैं। ध्यान रहें कि इसमें कुछ तरह के व्यायाम बताएं जाते हैं और थेरेपी विशेषज्ञ द्वारा किसी भी तरह से शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किए जाते हैं।

सेक्स थेरेपी से जुड़ी गलत सोच - 

हमारे समाज में सेक्स से सम्बंधित परेशानियों का समाधान ढूंढ़ने से जुडी कुछ गलत सोच प्रचलित है। इसके दो उदाहरण यह हैं - 


1. नीम-हकीम के पास जाना 
हमारे देश में ऐसे कई धोखेबाजों ने अपनी दुकानें चला रखीं हैं जो खुद को यौन समस्याओं का विशेषज्ञ बताते हैं। इन लोगों ने कई गलतफहमियां फैलाई हैं जैसे कि हस्तमैथुन (मास्टरबेशन) हानिकारक है और स्वप्नदोष (नाइटफॉल) एक बीमारी है। दूसरी तरफ कई लोग ऐसे हैं जो वाकई कोई परेशानी होने पर डॉक्टर की अपेक्षा नीम हकीम के पास जाना ज्यादा बेहतर समझते हैं। आप इन नीम-हकीम से दूर ही रहें और किसी सेक्स विशेषज्ञ से ही अपनी समस्या का उपचार करवाएं।

2. नहीं जानते की थेरेपिस्ट के पास कब जाएं 
कई बार लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि यौन संबंधों में आने वाली परेशानियों के लिए इलाज कब शुरू किया जाए। महिलाओं को सेक्स जीवन से जुड़ी परेशानी होने पर वह महिला रोग विशेषज्ञ के पास इलाज के लिए जाती हैं। जबकि कई मामलों में सेक्सुअल जीवन की समस्याएं भावनात्मक और हमारे मन से जुड़ी होती हैं, जो किसी महिला रोग विशेषज्ञ के द्वारा नहीं, बल्कि एक सेक्स थेरेपिस्ट की मदद से ठीक की जा सकती है।

सेक्स थेरेपी किस तरह काम करती है - 

जब आपको अपने सेक्स से जुड़े बर्ताव के बारे में सही जानकारी लेनी होती है, तो ऐसे में आपको सेक्स थेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। कई बार महिलाओं व पुरुषों में सेक्स के दौरान अपने या अपने पार्टनर के रोल को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं। जैसे कि पहल किसे करनी चाहिए, सही तरीका क्या है, फोरप्ले के लिए उचित समय कितना होना चाहिए, सेक्स के दौरान कितना समय बिताना ठीक होता है, कहां परफॉर्म करना चाहिए या सक्रिय पार्टनर किसे होना चाहिए आदि।

सेक्स थेरेपिस्ट इन्हीं सभी सवालों के जवाब देते हैं। साथ ही इससे जुड़ी हुई परेशानियों को सेक्स थेरेपी से ठीक किया जा सकता है।

सेक्स थेरेपी के फायदे -

सेक्स थेरेपी के फायदे इस प्रकार हैं -

अपराध बोध होने पर ले सेक्स थेरेपी

अकसर लोग यह समझते हैं कि सेक्स के बारे में सोचना अश्लीलता या कोई अपराध है। इस मानसिकता के कारण व्यक्ति अपनी सेक्स की इच्छाओं को दबाने लगते हैं। यदि कोई लड़का किसी लड़की को देखकर सेक्स की कल्पना करता है, तो उसको बाद में अपराध बोध होने लगता है। महिलाएं भी सेक्स के लिए पहल करने से डरती हैं और यदि वह इसके लिए इच्छा करें, तो भी वह खुद को अपराधी मानने लगती हैं। कई बार तो महिला के द्वारा सेक्स की इच्छा जाहिर करने से उसका पति गलत बातों को मन में बैठा लेता है। इतना ही नहीं सेक्स की इच्छा जाहिर करने पर महिलाओं की वफादारी पर भी शक किया जाता है। पति के इस तरह के विचार से सेक्स थेरेपिस्ट ही आपकी मदद कर सकता है। 
कई परेशानियों को करें दूर

अन्य तरीके से किए गए सेक्स की परेशानियों को दूर करने के लिए भी आप थेरेपिस्ट की मदद ले सकते हैं। महिला और पुरुष जब सामान्य तरह से सेक्स न करके किसी नई तरीके से करते हैं, जैसे एनल (गुदा) सेक्स, तो इसमें कई तरह की परेशानी भी हो सकती है। इस समस्या को दूर करने लिए आप सेक्स थेरेपी का सहारा ले सकते है।

सेक्स क्षमता में बदलाव
अगर कोई पुरुष सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के साथ सही तरह से सेक्स नहीं कर पाता है, तो उनको इस समस्या के सही कारणों की जांच करवानी चाहिए। जिसे एक सेक्स थेरेपिस्ट ही कर समझ पाता है। 

ऑर्गेज्म तक पहुंचने के लिए भी जरूरी
महिलाओं में ऑर्गेज्म ही पूर्ण संतुष्टि का चरण होता है। साथी के साथ सेक्स करते समय सक्रिय होने के बाद भी महिला ऑर्गेज्म को महसूस न कर पाएं, तो आपको थेरेपिस्ट के पास जाकर इस समस्या पर बात करनी चाहिए। 

शादी की परेशानियों को करें दूर

कई लोग ने शादी से पूर्व महिलाओं के साथ सेक्स संबंध बनाएं होते हैं। शादी के बाद भी इस तरह के संबंध कई रूप में हो सकते हैं। ऐसे लोगों को इन संबंधों के कारण शादी में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए थेरेपिस्ट की मदद लेनी चाहिए।

सेक्सुएलिटी के बारे में जानकारी के लिए
किसी भी अपराध बोध या असमंजस में पड़े रहने से अच्छा होगा हैं कि आप किसी सेक्स थेरेपिस्ट के पास जाएं। सेक्सुएलिटी में भी कई तरह के क्षेत्र होते हैं, जिनके विषय में आपको जरूर जानना चाहिए। 

मन को स्थिर करने के लिए 
वैसे तो सेक्स के बारे में विचार आना खराब नहीं है, लेकिन अगर इन विचारों के कारण आपका मन किसी भी काम में नहीं लग पा रहा है, तो ऐसे में अपने मन को स्थिर करने के लिए आपको सेक्स थेरेपिस्ट से सलाह ले सकते हैं।



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महिलाओं को हो सकती है ये सेक्स समस्या, हर वक्त रहती है कामोत्तेजना

 
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बाजार में निकलते ही दीवारों, खंबों और अखबारों के कोनों पर सेक्स समस्याओं के समाधानों के हर संभव इलाज की दवा और डॉक्टरों का जिक्र रहता है। पुरुषों को केंद्रित कर इस तरह की समस्याओं को खूब उछाला जाता है। लोग इन समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने से झेंपते हैं। वहीं अगर ये समस्या महिला को हो जाए तो यह सुलझने की जगह और उलझ जाती है।

पर्सिस्टेंट जेनेटाइल कामोत्तेजना डिसऑर्डर जिसे पर्सिस्टेंट कामोत्तेजना सिंड्रोम भी कहते हैं। इस तरह के डिसऑर्डर का सामना कर रही महिलाएं बिना किसी सेक्स गतिविधि और उत्तेजना के बाद भी हर वक्त कामोत्तेजित महसूस करती हैं। कई बार ये स्थिति इतनी भयानक हो जाती है कि बिना सेक्स की चाहत के भी वो उत्तेजित रहती हैं।

इस बीमारी के लक्षण 

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अनियंत्रित यौनांग और भग-शिश्न कामुकत्तेजना जो लंबे समय तक कई घंटे, दिनों और महीनों तक जारी रहती है।
  • इस कामोत्तेजना का सेक्स गतिविधि के साथ कोई संबंध नहीं होता।
  • इस तरह की कामोत्तेजना अनचाही होती है।
  • एक-दो बार चरमसुख की प्राप्ति के बाद भी ये कामोत्तेजना कम नहीं होती।
  • एमजीएच मैसाचुसेट्स के जनरल अस्पताल की जांच और बीमारी के कारण
डॉक्टरों के अनुसार इस तरह का एहसास नसों में किसी तरह की जलन की वजह से होता है। नसों की ये जलन यौनांगों तक पहुंच जाती है। इस तरह की स्थिति रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से पर चोट लगने से भी पैदा हो सकती है।

लगातार कामोत्तेजना पर की गई शोध

कुछ लोगों को ये स्थिति मजेदार लग सकती है, लेकिन ये एक परेशानी का विषय है। इस तरह का सिंड्रोम महिलाओं में ज्यादा देखा गया है। हर घड़ी कामोत्तेजित रहना एक तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानी है। इसे समय रहते ठीक किया जा सकता है।

इस बीमारी के चलते इंसान की जिंदगी बर्बाद हो सकती है। मानसिक स्वास्थ और सेहत पर असर पड़ता है। ये स्थिति आपके पार्टनर से आपके संबंधों को खत्म करवा सकती है। किशोरों में ये समस्या झिझक, शर्म, डर और असमंजस की स्थिति पैदा कर देती है।

तंत्रिका तंत्र का इलाज करवाना हो सकता है फायदेमंद

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एमजीएच अस्पताल के वरिष्ठ लेखक ब्रूस प्राइस का कहना है कि इस तरह की मेडिकल बीमारियों के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। ये एक तंत्र से जुड़ी बीमारी है, न कि मानसिक रोग। बहुत सी महिलाएं इस समस्या को बिना कुछ कहे झेलती रहती हैं। बिल्कुल खामोश।

महिलाओं को कई बार इस बीमारी के लक्षण पहचानने में परेशानी पेश आती है। शर्म के मारे डॉक्टर को बताना मुश्किल हो जाता है। जरनल पेन रिपोर्ट्स में छपी स्टडी के अनुसार 10 महिलाएं ऐसी थीं, जिन्हें 11 से 70 साल की उम्र के बीच इस बीमारी के लक्षण दिखे थे। इनमें से चार मरीजों की रीढ़ की जड़ में सिस्ट और दो महिलाओं की संवेदी तंत्रिकाएं प्रभावित हो गई थी।

बचपन में ही इस बीमारी का हो जाना और उपचार न मिलना

एक महिला इस बीमारी के लक्षणों के साथ पैदा हुई थी। उन्हें बचपन से ही रीढ़ की हड्डी में दोष था। एक महिला को लुंबोसैक्रल हर्नियेटेड डिस्क था और दूसरी ने जैसे ही एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां लेना बंद किया उसे अल्पायु में ही परसिस्टेंट कामोत्तेजना का सिंड्रोम हो गया। इस तरह की बीमारी में किसी भी तरह के मानसिक और गइनोकोलॉजिस्ट सलाह काम नहीं करती। एनेस्थीसिया और एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां तक काम करना बंद कर देती हैं।

इस बीमारी का उपचार

इस बीमारी में सिस्ट हटाकर और तंत्रिका को ठीक कर 80 प्रतिशत मरीजों को आराम पहुंचाया गया। इस स्टडी के पहले लेखक एन लुई ओकलैंडर कहते हैं कि फिजिशियन को इस बीमारी के बारे में जानकारी होनी चाहिए। जब मरीज किसी भी तरह का पैल्विक दर्द और युरोलॉजिक लक्षण महसूस करें तो उनमें पीजीएडी होने की आशंका बढ़ जाती है।


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पीरियड्स सेक्स के साथ जुड़ी गलत धारणाएं और निदान

 
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हमारे समाज में लोग सेक्स पर खुली चर्चा करने से आज भी घबराते हैं। इस कारण यौन संबंधों को लेकर हमारे कई सवाल दूर नहीं हो पाते। ऐसा ही एक सवाल यह है, कि क्या पीरियड्स के समय भी संभोग या सेक्स करना सही है। कई लोग इस सवाल के दबाव के चलते इच्छा होते हुए भी सेक्स पार्टनर के साथ यौन संबंध नहीं बनाते। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पीरियड्स के समय सेक्स करना चाहिए या नहीं। 


पीरियड्स के दौरान सेक्स कितना सही?

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यह सभी सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्स से मिलने वाला चरमसुख (ऑर्गैजम) स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। उनकी मानें तो मासिकधर्म या पीरियड्स के दौरान सेक्स करने में कोई समस्या नहीं है। वे यह भी कहते हैं कि पीरियड्स सेक्स के कुछ फायदे भी हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से महिला को उस समय महसूस होने वाली ऐंठन और सिरदर्द से राहत मिलती है। ऐसा चरमसुख पर पहुंचने पर शरीर से एंडोर्फिन नामक हार्मोन रिलीज होने के चलते होता है। यह महिला को दर्द से राहत देता है। इतना ही नहीं, पीरियड्स सेक्स के दौरान गर्भाशय पर पड़ने वाले दबाव से ब्लड फ्लो (रक्त प्रवाह) तेज हो सकता है, जिससे पीरिड्स की अवधि कम हो सकती है।

पीरियड्स के दौरान सेक्स कितना असुरक्षित?

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पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से आप कोई विशेष जोखिम नहीं लेते। सावधानियां न बरतने से जो खतरे सामान्य सेक्स में होते हैं, वही पीरियड्स में भी होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो पीरियड्स सेक्स में किसी प्रकार के एसटीडी और संक्रमण से बचने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए। जानकारों के मुताबिक पीरियड्स में असुरक्षित सेक्स करने से संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

वहीं, यह भी याद रखें कि इस अवधि में सेक्स करने से भी आप गर्भवती हो सकती हैं। यह धारणा गलत है कि पीरियड्स के समय महिलाएं गर्भवती नहीं होतीं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सेक्स पार्टनर के साथ आपने कितनी देर तक संभोग किया या किस प्रकार से यौन संबंध बनाए। दरअसल एक महिला के शरीर में शुक्राणु पांच दिनों तक जीवित रह सकता है और पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून इसमें बाधा नहीं बनता। इस दौरान गर्भधारण की आशंका कम हो सकती है, मगर शून्य नहीं। 


पीरियड्स में सुरक्षित सेक्स कैसे करें?

पीरिड्स के दौरान आप कई तरह से सुरक्षित और बेहतर सेक्स कर सकते हैं। जैसे-

पुरानी चादर या तौलिए का इस्तेमाल करें- यौन संबंध के बाद कोई भी व्यक्ति खराब हुए बिस्तर को ठीक करने की मूड में नहीं होता। इसलिए संभोग से पहले एक तौलिया बिछाएं। इससे आप खुशनूमा एहसास का अनुभव करेंगे।

अपनी पॉजिशन को ध्यान से चुनें- अगर आप और आपका साथी पहली बार पीरियड्स के दौरान सेक्स कर रहे हैं तो किसी भी ऐसी पॉजिशन का चयन ना करें जो आपके लिए असहज हो।

शावर सेक्स- वैसे तो फिल्मी दुनिया में शावर सेक्स काफी आकर्षित लगता है, मगर वास्तविक जीवन में यह थोड़ा कठिन है। हालांकि पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सही विकल्प हो सकता है, क्योंकि इस दौरान ब्लीडिंग से होने वाली परेशानी से दो चार नहीं होना पड़ता। 

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