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गेहूं की कटाई,रीपर बाइंडर मशीन से करें गेहूं की कटाई

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मौजूदा वक्त में कई मशीनों ने किसानों के काम को आसान कर दिया है. पहले जिस काम को करने में कई दिन या हफ्ते लग जाते थे, वो काम अब मशीनों से कुछ घंटों में आसानी से हो जाता है. उन्हीं मशीनों में से एक मशीन रीपर बाइंडर भी है. जो गेहूं की खड़ी फसल को काटकर बंडल बनाकर खेत में छोड़ देती है. कटाई के बाद इन बंडल को आसानी से उठाकर थ्रेशर से मड़ाई की जाती है. बता दें कि रीपर बाइंडर की सहायता से समतल खेत में जमीन से 5 सेमी ऊपर फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है जिससे भूसे का नुकसान भी नहीं होता है.

रीपर बाइंडर मशीन की विशेषता

रीपर बाइंडर के कटरबार की चौड़ाई 1.2 मीटर होती है तो वहीं इसके आगे बढऩे की गति 1.1 से 2.2 मीटर/सेकंड तक होती है. इसकी कार्य क्षमता 0. 4 हेक्टेयर/घंटा होती है तथा इसका 5. 6 किलोवाट का इंजन एक घंटे में करीब 1.2 लीटर डीजल खपत करता है. रीपर बाइंडर मशीन के ऊपर एक सीट लगी होती है तथा उस सीट के नीचे एक नुमेटिक पहिया लगा होता है जिसकी सहायता से मशीन को मोड़ा जाता है. रीपर बाइंडर से प्रति बंडल फसल का वजन करीब 4 से 6 किलोग्राम तक होता है.

रीपर बाइंडर मशीन से गेहूं की कटाई

रीपर बाइंडर से फसल को काटने में काफी कम समय लगता है. कटाई के समय मजदूरों की कमी होने के वजह से प्रति एकड़ 3000 रूपए खर्च आता है. अतः इस मशीन के इस्तेमाल से कम से कम प्रति एकड़ 1750 रूपए की बचत होती है और कटाई का काम भी शीघ्र हो जाता है.

रीपर बाइंडर मशीन किस कंपनी की खरीदें

  • BCS इंडिया प्रा. लिमिटेड
  • ग्रीनलैंड रीपर बाइंडर
  • वसुंधरा रीपर बाइंडर
  • ABS रीपर बाइंडर



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पावर टिलर करता है खेती के कई काम आसान


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आधुनिक समय में बैलों से खेती करने का चलन लगभग खत्म हो गया है. अब बाजार में किसानों को कई नए तरह के कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाते हैं. इन पर सरकार की तरफ से छूट भी दी जाती है. बता दें कि खेतीबाड़ी में जुताई को विशेष स्थान दिया गया है, क्योंकि फसल का अच्छा उत्पादन खेत की बेहतर जुताई पर निर्भर होता है. इसमें किसान कई कृषि यंत्रों की मदद ले सकता है. इसमें पावर टिलर भी शामिल है. यह खेत की जुताई में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. कई बार किसान आर्थिक तंगी के कारण महंगे कृषि यंत्र का उपयोग नहीं कर पाता है. ऐसे में सरकार ने लघु और सीमांत किसानों के लिए पावर टिलर (Power Tiller) कृषि यंत्र की सुविधा उपलब्ध कराई है. इस कृषि यंत्र से छोटे किसानों को बड़ा लाभ मिलता है. यह कृषि यंत्र न सिर्फ़ खेती की जुताई में काम आता है, बल्कि फसल में खरपतवार की निराई का खर्च भी बचाता है.

क्या है पावर टिलर -

यह खेतीबाड़ी की एक ऐसी मशीन है, जो खेत की जुताई से लेकर फसल की कटाई तक बहुत काम आती है. इस मशीन द्वारा फसल की निराई, सिंचाई, मड़ाई और ढुलाई करना बहुत आसान हो जाता है.

कैसे काम करता है पावर टिलर-

जिस प्रकार देसी हल में एक सीध पर बुवाई की जाती है, वैसे ही इस मशीन से बुवाई की जाती है. खास बात है कि पावर टिलर में अन्य कृषि यंत्र को जोड़कर कई कामों में मदद ली जा सकती है. बता दें कि पावर टिलर ट्रैक्टर की तुलना में बहुत हल्का और चेन रहित होता है. इस मशीन को चलाना भी बहुत सरल है, जिसको कई कंपनियां बनाकर तैयार करती हैं. इस मशीन को पेट्रोल और डीज़ल, दोनों से चला सकते हैं.

किसान के कई काम करता है आसान-

  • यह मशीन खेती की जुताई से लेकर फसल बुवाई तक में मददगार है.
  • पावर टिलर में में पानी का पंप जोड़कर किसान तालाब, पोख़र, नदी आदि से पानी निकाल सकता है.
  • इसमें थ्रेसर, रीपर, कल्टीवेटर, बीज ड्रिल मशीन आदि भी जोड़ी जा सकती हैं.
  • पावर टिलर काफी हल्की मशीन होती है, जिसको आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं.

पावर टिलर पर सरकारी सब्सिडी -
सरकार द्वारा पावर ट्रिलर पर दो तरह से छूट दे जाती है. बता दें कि 8 हॉर्सपावर के टिलर पर लगभग 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है. अगर अनुसूचित जाति और जनजाति का कोई किसान पावर टिलर खरीदता है, तो उनके लिए लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ दिया जाता है. ध्यान दें कि इस मशीन की कुल कीमत लगभग 1 लाख रुपए तक की है.

किन किसान को मिलती है सरकारी सब्सिडी
वैसे पावर टिलर को कोई भी किसान खरीद सकता है, लेकिन सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी का लाभ केवल लघु और सीमांत किसानों को दिया जाता है. ध्यान दें कि किसान को पावर टिलर खरीदते समय पूरा पैसा लगाना होगा, क्योंकि इसके बाद ही आप सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा पाएंगे.

पावर टिलर के लिए रजिस्ट्रेशन
अगर कोई किसान सब्सिडी पर पावर टिलर खरीदना चाहता है, तो उसे अपने जिले के कृषि विभाग की वेबासाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, साथ ही कृषि विभाग को एक प्रार्थना पत्र भी लिखना होगा. इसके बाद कृषि विभाग जल्द ही आपसे संपर्क करता है.

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स्टोन पिकर मशीन 2 घंटे में निकालेगी खेत के कंकड़-पत्थर

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हमारा देश कृषि क्षेत्र में काफी उन्नति कर रहा है. हर एक राज्य में विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती होती है. इस पर हमारा पूरा जीवन आधारित होता है, इसलिए इसका पूरा श्रेय किसानों की मेहनत के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के कृषि यंत्रों को भी जाता है. अगर कृषि यंत्र न हों, तो किसानों को खेती में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. बता दें कि देश के कई क्षेत्रों में किसान खेती करता है, जिसमें पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल है. यहां किसानों को खेत की जुताई करने में काफी परेशानी होती है. ऐसे में हम किसानों के लिए एक कृषि यंत्र स्टोन पिकर की जानकारी देने वाले हैं, जो किसानों के लिए वरदान सबित हो सकता है.

पहाड़ी क्षेत्र के किसानों के लिए कृषि यंत्र -

सबसे पहले किसानों की खेतीबाड़ी की बात करें, तो वह तापमान, जलवायु, बुवाई, सिंचाई, कटाई आदि पर निर्भर होती है. मगर फसल के लिए सबसे जरूरी प्रक्रिया खेत को तैयार करने की होती है. देश का एक बहुत बड़ा भाग पहाड़ी क्षेत्र भी है. जहां किसान कई फसलों की खेती करता है. यहां के खेतों में बड़े-छोटे बहुत ज्यादा पाए जाते हैं. इस वजह से किसानों को खेत की जुताई करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही पत्थर की वजह से बीज का अंकुरण भी प्रभावित होता है. इसका पूरा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है. ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए एक खास कृषि यंत्र तैयार किया गया है. इसके द्वारा किसान अपने खेतों की मिट्टी को अच्छी तरह साफ़ कर सकते हैं. इस कृषि यंत्र का नाम स्टोन पिकर है. 

स्टोन पिकर मशीन -

पहाड़ी क्षेत्र के किसानों के लिए यह कृषि यंत्र बहुत उपयोगी है. स्टोन पिकर खेत के कई काम आसान कर सकता है. खास बात है कि किसान स्टोन पिकर द्वारा खेतों में से छोटे-बड़े आकार के सभी पत्थरों को एक बार में निकाल सकते हैं. उससे भी अच्छी बात है कि यह मशीन कम लागत में खरीद सकते हैं. इससे समय की बचत होती है.

कैसे काम करता है स्टोन पिकर -

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इस मशीन को चलाने के लिए ट्रैक्टर की आवश्यकता पड़ती है. स्टोन पिकर को किसान किसी भी तरह के ट्रैक्टर में लगाकर चला सकते हैं. इस मशीन में 1 एकड़ जमीन से सिर्फ 2 घंटे में पत्थर निकालने की क्षमता है.

स्टोन पिकर की कीमत -
बाजार में इस मशीन की कीमत लगभग 4 लाख रुपए तय की गई है. बता दें कि इसको पंजाब राज्य में अधिकतर बनाया जाता है. अगर किसी किसान को यह मशीन खरीदनी है, तो वह पंजाब की निजी कंपनी से संपर्क कर सकता है. इसके अलावा एक बार अपने राज्य की निजी कंपनियों से भी जानकारी ले सकता है.

स्टोन पिकर से किसानों को लाभ -
पहले किसानों को हाथों से खेत की जुताई करनी पड़ती थी, लेकिन यह समस्या जड़ से खत्म हो गई है.
  • खेती की जुताई में कम समय और कम मेहनत लगती है.
  • खेत में से छोटे-बड़े सभी पत्थर निकाल सकता है.
  • फसल का उत्पादन बढ़ता है.
  • खेत की भूमि उपजाऊ बनती है.
  • फसल की गुणवत्ता बढ़ती है.
  • फसल में कीट और रोग लगने का खतरा कम हो जाता है.

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खेतीबाड़ी को सरल बनाते हैं ये मुख्य कृषि उपकरण, जानिए इनकी खासियत

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अगर किसान को फसल का कम उत्पादन मिलता है, तो उसका एक मुख्य कारण खेतों में सही कृषि उपकरणों का उपयोग न करना भी होता है. देश में कई कृषि उपकरण तैयार किए जाते हैं, लेकिन अधिकतर किसान उनका उपयोग नहीं कर पाते हैं. आज भी कुछ किसान ऐसे हैं, जो कि बिना ट्रैक्टर के भी खेती कर रहे हैं. ऐसे में खेत अच्छी तरह तैयार नहीं हो पाते हैं और फसल का उत्पादन घट जाता है.

आपको बता दें कि फसलों की अच्छी पैदावार के लिए किसान को छिड़काव, टिल्टिंग, खुदाई आदि के लिए कृषि उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है. वैसे आज के समय में कृषि क्षेत्र में कई नई तकनीकों का विकास हो रहा है, बस किसानों को समय पर उन तकनीक का उपयोग करना है, जिससे खेती सफल बन पाए. आज हम खेतीबाड़ी संबंधी कुछ खास कृषि उपकरणों की जानकारी देने वाले हैं, जिनका उपयोग हर किसान को करना चाहिए. खास बात है कि इनमें से कुछ कृषि उपकरणों पर सब्सिडी भी दी जाती है.

खेतीबाड़ी में उपयोग होने वाले कृषि उपकरण

  •     रोटावेटर
  •     डिस्क हैरो
  •     कल्टीवेटर
  •     रोटो बीज ड्रिल
  •     प्लांटर
  •     स्प्रेयर
  •     स्ट्रा-रीपर

रोटावेटर (Rotavator)
इसको रोटरी टिलर भी कहा जाता है. इसका मुख्य उपयोग मिट्टी को तोड़ने और खोदने में किया जाता है. इस मशीन को अधिकतर ट्रैक्टर के पीछे लगाकर इस्तेमाल किया जाता है.

रोटावेटर का उपयोग

  • सभी प्रकार की मिट्टियों की जुताई में उपयोग होता है.
  • इस मशीन से ईंधन की बचत होती है.
  • खेती की मिट्टी को तुरंत तैयार करता है, ताकि पिछली फसल की मिट्टी की नमी का उपयोग हो सके.
  • यह मशीन गीले क्षेत्रो में आसानी से काम करती है.
  • इस मशीन से लगभग 125 से 1500 मिमी की गहराई तक जुताई कर सकते हैं.
  • बीजों की बुवाई में जल्दी होती है.
  • फसलों के अवशेष हटाने में उपयोग होती है.
  • इस मशीन को किसी भी प्रकार से मोड़ा जा सकता है.

रोटावेटर की कीमत और सब्सिडी

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बाजार में इस मशीन के कई मॉडल उपलब्ध हैं. इसकी कीमत लगभग 50 हजार रुपए से शुरू होकर 2 लाख रुपए तक की है. आप यह मशीन सब्सिडी पर भी ले सकते हैं.

कल्टीवेटर (Cultivator)
इस मशीन का उपयोग खरपतवार को खेत से निकाल कर बुवाई करने के लिए किया जाता है. साफ तौर पर यह मशीन मिट्टी को ढीला करने में काम आती है. यह मशीन कई तरह से बनाई जाती है. जैसे स्प्रिंग टाइन कल्टीवेटर, कठोर टाइन  कल्टीवेटर, कठोर टाइन फावड़ा, बार पॉइंट कल्टीवेटर आदि.

कल्टीवेटर का उपयोग
  • इस मशीन से बीज तैयार किए जाते हैं.
  • मिट्टी को गर्म करने का काम करती है.
  • खरपतवारों पर नियंत्रण करती है.

कल्टीवेटर की कीमत और सब्सिडी
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इस मशीन की कीमत लगभग 25 हजार से शुरू होकर 50 हजार रुपए तक होती है. खास बात है कि इस पर 50 प्रतिशत की छूट मिल जाती हैं.

डिस्क हैरो (Disc Harrow)
इस मशीन द्वारा मिट्टी को तोड़ा और समतल बनाया जाता है. इसके साथ ही खरपतवार को नष्ट करने में उपयोग किया जाता हैं. बता दें कि इस मशीन को  ट्रैक्टर से खींचा जाता है. इसमें धातु के दांत लगे होते हैं. यह कई प्रकार से तैयार किया जाता है. जैसे, स्प्रिंग हैरो, रोलर हैरो, चैन हैरो, डिस्क हैरो आदि.

डिस्क हैरो का उपयोग -
  • मिट्टी को समतल करना
  • मिट्टी की गहरी जुताई करना

डिस्क हैरो की कीमत और सब्सिडी
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इस मशीन की लगभग 25 हजार से शुरू होकर 1 लाख रुपए तक की होती है. अगर इस पर सब्सिडी मिलती है,  तो इसकी 50 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है.

रोटो बीज ड्रिल (Roto Seed Drill)
इस मशीन के गियर काफी मजबूत और शक्तिशाली होते हैं. इसका उपयोग मुख्य रूप से कटाई के बाद बुवाई के लिए किया जाता है. इसके साथ ही मलबे को कुचलने और मिश्रण के काम भी आती है.

रोटो बीज ड्रिल  का उपयोग
  • ईंधन की बचत होती है.
  • मिट्टी में नमी को संरक्षित करती है.
  • बीज का प्रसार होता है.
  • उर्वरक का प्रसार होता है.

रोटो बीज ड्रिल की कीमत और सब्सिडी
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इसकी कीमत लगभग 50 हजार से शुरू होकर 1 लाख रुपए तक होती है. इस पर 50 प्रतिशत तक की अधिकतम सब्सिडी भी मिल सकती है.

प्लांटर (Planter)
इस कृषि उपकरण को आमतौर पर ट्रैक्टर के पीछे लगाया जाता है, जिससे खेत में पंक्तियों में बीज की बुवाई कर सकते हैं. यह एक ड्रॉबार के साथ ट्रैक्टर से जुड़ा हुआ है.

स्प्रेयर (Sprayer)
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यह एक दवा का छिड़काव करने वाला उपकरण है. इसकी मदद से फसलों पर कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव कर सकते हैं. इसको दवाई छिड़कने वाली मशीन भी कहा जाता है. यह कई मॉडल में बनाई जाती है. जैसे, निपटाकर स्प्रेयर, पोर्टेबल पावर स्प्रेयर, नैकपैक पावर स्प्रेयर,मिस्ट डस्ट स्प्रेयर आदि. इसकी कीमत लगभग 3500 रुपए से शुरू होकर 50 हजार तक होती है.

स्ट्रॉ-रीपर (Straw Reaper)
यह मशीन भूसा बनाने का काम करती है. इससे खेत में बचे हुए फसल अवशेष को साफ किया जाता है. इसका उपयोग ट्रैक्टर के साथ होता है. इसकी कीमत लगभग 2 लाख 50 हजार से शुरू होकर 3 लाख 50 हजार रुपए तक होती है. इस पर लगभग 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी मिल जाती है.

ये सभी कृषि उपकरण फसल के उत्पादन को बढ़ाने का काम करते हैं. अगर आपके पास पहले से ही ट्रैक्टर है, तो आप कुछ और कृषि उपकरण लेकर उसमें जोड़ सकते हैं.


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पैडी वीडर यंत्र से करें धान की निराई गुड़ाई और हटाएं खरपतवार

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भारत में धान की खेती (Paddy Cultivation) बहुत बड़े स्तर पर की जाती है. देश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह की किस्मों की बुवाई करके किसान धान उगाते हैं, जिसकी शुरूआत नर्सरी से की जाती है. इसके साथ ही किसान को धान की निराई-गुड़ाई और खरपतवार को हटाने में अधिक संख्या में मजदूरों की ज़रूरत पड़ती है.सभी जानते हैं कि मौजूदा समय में देश के क्या हालात हैं. ऐसे में धान की खेती कर रहे किसानों के लिए पैडी वीडर कृषि उपकरण (Paddy Weeder Agricultural Machine) बहुत काम आएगा. इस कृषि उपकपण द्वारा आसानी से खरपतवार को हटाया जा सकता है, साथ ही मजदूरों को देने वाली लागत को भी बचाया जा सकता है. बता दें कि धान की खेती में सबसे ज्यादा समय खरपतवार हटाने और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों में लगता है. ऐसे में किसान पैडी वीडर उपकरण को अपनाकर समय की बचत कर सकते हैं, साथ ही खेत की निराई-गुड़ाई का काम भी कर सकते हैं. इस कृषि यंत्र को चलाना बहुत आसान होता है.

क्या होता है पैडी वीडर

यह कृषि उपकरण वजन में काफी हल्का होता है. इस उपकरण को एक व्यक्ति आसानी से चला सकता है. इससे पानी भरे खेत में थोड़ा आगे-पीछे करके धान की 2 कतारों के बीच चलाया जाता है. इस तरह खरपतवार के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं और वह कीचड़ में मिल जाते हैं और धान के पौधों में मिट्टी चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी जाती है. इसके साथ ही धान की जड़ के आस-पास की ज़मीन कुरेदी रहती है, जिससे धान की पैदावार में तेजी से होती है.

यूपी के किसानों के लिए लाभकारी है पैडी वीडर

कृषि वैज्ञानिकों की मानें, तो यूपी के किसानों को धान की खेती में इस यंत्र का उपयोग करना चाहिए. बता दें कि यह यंत्र यूपी के कई जिलों जैसे लखनऊ, अंबेडकर नगर और उन्नाव आदि में आसानी से मिल जाता है. इसकी कीमत 1,500 रुपए के आस-पास होती है. अगर सरकारी तौर पर पैडी वीडर को खरीदा जाए, तो यह 1,800 से 2000 रुपए तक का मिलता है. खास बात है कि इस कृषि यंत्र पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाती है.  


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धान की रोपाई में बड़े काम आएगी सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन

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यह समय धान की रोपाई करने के लिए बहुत उपयुक्त है. देश के अधिकतर किसान धान की खेती के लिए कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं, ताकि उन्हें फसल का अच्छा उत्पादन मिल पाए. धान की खेती की बात करें, तो इसकी रोपाई परंपरागत तरीकों से की जाती है. यानी किसान या मजदूर अपने हाथों से धान की रोपाई करता है. इस प्रक्रिया में समय और लागत काफी ज्यादा लगती है. इसमें थकान भी ज्यादा होती है, क्योंकि धान की रोपाई कई घंटों तक झुक कर करनी पड़ती है. ऐसे में किसानों के लिए कृषि यंत्रों का उपयोग करना चाहिए. वैसे भी मौजूदा समय में मजदूरों की काफी कमी है, क्योंकि अधिकतर मजदूरों अपने गांव लौट चुके हैं. ऐसे में किसान धान की रोपाई करने के लिए सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन (Self propelled machine) का उपयोग कर सकते हैं. यह मशीन किसानों के लिए काफी मददगार साबित होगी.

क्या है सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन -

इस मशीन में 3 एचपी का डीजल इंजन लगा होता है, जो कि धान की रोपाई कतारों में करता है. इन कतारों की दूरी 10 से 12 सेंटीमीटर की रखी जाती है. खास बात है इस मशीन के हैंडल को दाएं-बाएं आसानी से घुमाया जा सकता है. इसके साथ ही पौध रोपने के लिए यंत्र की गहराई को बढ़ाया और घटाया जा सकता है. बता दें कि इस मशीन द्वारा 1 दिन में 1 हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई कर सकते हैं.

सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन से धान की रोपाई -

आधुनिक समय में किसानों के बीच यह कृषि यंत्र काफी पसंद किया जा रहा है. इस मशीन द्वारा धान की रोपाई 8 कतारों में की जाती है. यह धान की पौध को उठाकर रोपाई करता है. इससे धान की रोपाई में लगने वाले समय की बचत होती है, साथ ही मजदूरों को देने वाली लागत भी बचती है. यह कृषि यंत्र एक निश्चित दूरी पर पौधों की रोपाई करता है खास बात है कि इस तरह फसल की पैदावार भी अच्छी मिलती है.

सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन की कीमत -

आपको बता दें कि सेल्फ प्रोपेल्ड मशीन की कीमत लगभग 1 लाख 25 हजार रुपए के आस-पास होती है. इसके लिए आप अपने क्षेत्र की निजी कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं, जो कि कृषि यंत्र का उपलब्ध कराती हैं. इसके अलावा बाजार में धान रोपाई के लिए कई तरह के कृषि यंत्र मौजूद हैं. इसमें हाथ, पैट्रोल और डीजल से चलने वाले प्लांटर शामिल हैं. ये मशीनें धान की रोपाई 4, 6 और 8 कतारों में करते हैं.

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गेहूं और धान की सीधी बुवाई के लिए डायरेक्ट सीडिंग तकनीक के तहत आई नयी मशीन का प्रयोग

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गेहूं और धान की सीधी बुवाई के लिए वैज्ञानिकों द्वारा एक नयी मशीन विकसित की गयी है। अभी फिलहाल इसका परीक्षण के तौर पर उपयोग कुछ किसानों के खेत पर demonstration के जरिए किया गया। जिस दौरान यह देखा गया कि इस पद्धति के द्वारा बीजाई करने पर अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

इस राइस और गेहूं सीडर के द्वारा पौधे की पौधे से दूरी 15 सेंमी. और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंमी. पर बुवाई की जा सकती है। मौजूदा समय में एग्रीकल्चल इंजीनियरिंग कॉलेज, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी, पूसा द्वारा विकसित किया गया है। हालांकि अब इसे मां दुर्गा एग्रो इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मधुबनी द्वारा भी तैयार किया जा रहा है।

डेढ़ एकड़ तक बुवाई इस मशीन के द्वारा एक दिन में किया जा सकती है। जबकि इस मशीन की सहायता से बुवाई करने के लिए केवल दो श्रमिकों की आवश्यकता होती है यानी अब श्रमिकों की कमी में इस मशीन की सहायता से बुवाई करने में सहायता मिलेगी। इससे साफ है कि खेती में लागत भी बचेगी।

इस दौरान कुछ किसानों के खेत पर इसका प्रयोग भी कर देखा गया। कुछ किस्मों की इस विधि द्वारा बुवाई पर पता चला कि धान की उपज प्रति हैक्टेयर पच्चीस प्रतिशत तक रोपाई विधि की तुलना में अधिक मिली। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसानों के अनुभव के अनुसार इस मशीन से बुवाई करने पर गेहूं की पैदावार सामान्य बुवाई की तुलना में काफी अधिक है।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि मशीन के उपयोग से किसानों को प्रति एकड़ चार से पांच हजार रुपए की बचत होती है। इसके साथ ही उपयोग के लिए यह काफी आसान है जिससे किसानों के लिए हर तरह से यह लाभकारी है।  

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