गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।
Showing posts with label नारी-विमर्श. Show all posts
Showing posts with label नारी-विमर्श. Show all posts

परंपरावादी सोच छोड़ें, खुलकर करें मासिक धर्म पर बात

dharm-par-baat

 -नहीं कोई शर्म की बात, माहवारी है ईश्वर की सौगात, इसमें रखें साफ-सफाई 
का ख्याल, जीवन सबका बनेगा खुशहाल

-विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस

गोण्डा। आधुनिकता के तमाम दावों के बावजूद आज भी हमारे समाज में लोग मासिक धर्म के बारे में खुलकर बोलने से परहेज करते हैं। इसका परिणाम यह है कि महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों से पार पाने के लिए हर वर्ष 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मासिक धर्म के प्रति समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करना, मासिक धर्म के बारे में सही जानकारी देना और लोगों को जागरुक करना है। जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ सुवर्णा कुमार बताती हैं कि विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस 28 मई को इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि मई साल का पांचवां महीना होता है। महिलाओं में 28 दिनों के बाद होने वाले पांच दिनों के मासिक चक्र का यह एक संकेत होता है।

क्या है माहवारी-

डॉ सुवर्णा के मुताबिक, माहवारी एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। किशोरियों के जीवन में माहवारी का आना भी एक शारीरिक परिवर्तन है, जोकि 10 से 12 वर्ष की उम्र में शुरु होती है। यह 3 से 7 दिन तक होती है। माहवारी के आने से पता चलता है कि किशोरी के प्रजनन अंगों का विकास शुरु हो गया है। 

माहवारी में ये ध्यान देना जरूरी

वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ शालू महेश के अनुसार, माहवारी में निकलने वाले खून से कपड़े खराब न हो व किसी प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण न हो, इसलिए उसे सोखने के लिए साफ-सूती कपड़े या घर में बने कपड़े के पैड अथवा बाजार में उपलब्ध सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करें। एक ही कपड़े को 4-6 घंटे से ज्यादा इस्तेमाल न करें। एक सैनेटरी पैड का इस्तेमाल केवल एक बार एवं 4-6 घंटे तक ही करें तथा उसका उचित निस्तारण करें। 

डॉक्टर से मिलें 

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ दीपमाला का कहना है कि माहवारी में थकान होना, शरीर का ढीला होना, चिड़चिड़ापन होना, सरदर्द होना, स्तनों में कसाव होना और कुछ महिलाओं में कब्ज का होना माहवारी के समय होने वाली सामान्य समस्या है, इसमें घराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि माहवारी रुक जाए या अनियमित हो जाए, माहवारी का चक्र 21 दिन से छोटा या 45 दिन से बड़ा हो जाए, माहवारी के दौरान खून के थक्के ज्यादा निकल रहे हों या किसी किशोरी को 16 वर्ष की आयु तक माहवारी न आये, तो महिला रोग विशेषज्ञ से मिलें।

झिझक को तोड़ने की जरूरत-

राष्टीªय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल एसीएमओ डॉ एपी सिंह का कहना है कि आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जा पाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है। आधे से ज्यादा लोगों को लगता है कि मासिक धर्म अपराध है। अभी भी हमारे समाज में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान परिवार से अलग-थलग कर दिया जाता है। मंदिर जाने या पूजा करने से रोक दिया जाता है। परिवार के किसी भी पुरुष सदस्य से इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है। आज इससे ऊपर उठने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर उपकेंद्रों पर किशोर मित्रता क्लब की बैठक कर माहवारी स्वच्छता पर जानकारी दी जाएगी। जिला समन्वयक रंजीत सिंह राठौर ने बताया कि जिले के 13 सीएचसी पर संचालित साथियां केन्द्रों पर पीयर एजूकेटर की बैठक कर माहवारी स्वच्छता एवं प्रबन्धन पर जानकारी देने के साथ सैनिटरी नैपकिन का वितरण किया जाएगा। गांवों में आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी द्वारा जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी, ताकि लोग इसके प्रति जागरूक हों और पुरानी परंपरावादी सोच को त्याग कर आधुनिक और स्वस्थ सोच की ओर आगे बढ़ें।


[ Read More ]»

लडकियां किस चीज़ की भूखी रहती है?

 
ladakiyan-kis-cheej

प्राकृतिक ने इस संसार में इंसान को  मुख्य रूप से  तीन प्रकार के वर्गों में वर्गीकृत किया है नर,नारी और नपुंसक। समय के साथ-साथ  हुए शारीरिक बदलाव के साथ इंसान में कई प्रकार की इक्छाएं जागृत होती है। जिनमे भूख प्रमुख होता है।  याद रखिए कि जो भूख अर्थात तीव्र इच्छा होती है वह चाहे औरत से सम्बंधित हो या पुरुष से या नपुंसक से , वह प्राकृतिक तौर पर स्वाभाविक होती है। फर्क सिर्फ इतना ही है कि किसी में इसका स्तर कम होता है और किसी में इसका स्तर ज्यादा और किसी में होता ही नहीं मतलब बहुत ही कम, नहीं के बराबर। विभिन्न प्रकार की इच्छाओं में भी कुछ एक ही भूख/तीव्र इच्छा के बराबर होती हैं, सभी नहीं। अब प्रश्न औरत पर है। इच्छाएं तो बहुत सारी होती हैं पर फिलहाल हम यहा कुछ महत्वपूर्ण ही चीजो पर ही चर्चा करते हैं जो निम्न  भूख के समान पाईं गईं है। 

जिनमे से  कुछ एक निम्न उदाहरण प्रस्तुत है -
  • पेट की भूख
  • प्रेम और प्यार  
  • बातचीत की आदत
  • सुंदर बने रहने की लालसा
  • ईश्वर के प्रति अनावश्यक आस्था
  • स्वादिष्ट भोजन की भूख 
  • शॉपिंग की भी भूखी 
  • इज्जत और सम्मान
  • शारीरिक  भूख
  • पैसे की भूख
मैं भूख हूं-
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
मुझे पैसे की भूख लुभाती है
मुझे पेट की भूख ललचाती है
मुझे जिस्म की भूख बहकाती है
मुझे जरूरत की भूख सताती है
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
मैं तो ख्वाहिशों में बढ़ती जाती हूं
मैं यकीन को बेहद बनाती हूं

मैं सभी हदों को तोड़ जाती हूं
भले ही बाद में
मैं भूख बहुत पछताती हूं
फिर भी
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
सब कुछ पाने के बाद भी
मैं कभी संपन्न नहीं हो पाती हूं
मेरी महत्वकांक्षाओं का आर्थिक चिट्ठा
कभी सच का गणित नहीं बताता
मैं शाश्वत में यकीन के बाद भी
भूख में शिकार बनाती हूं
मैं ही आदमी औरत की जात बनकर
जीवन के दुख दर्द बन आती हूं
मैं भूख तुझे इंसान से
जानवर बनाती हूं
मैं भूख तुझे तेरी नियति में
नीयत बताती हूं,
इसलिए
मैं युगों से योनियों तक
भूख का भ्रमण कराती हूं
क्योंकि...
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
हां मैं भूख हूं
मैं कभी शांत नहीं होती हूं।

पेट की भूख-

इस पृथ्वी पर जीव जब जन्म लेता है तो उसे सबसे पहले भूख महसूस होता है। किस तरह शिशु के रोने से फेफड़ों में हवा भर जाती है और शिशु श्वसन क्रिया आरंभ देता है। भूख लगने पर उसकी चूसने की चेष्टायें प्रारंभ हो जाती हैं। पहले तो दूध पीने की गति अनियमित एवं मंद होती है, परंतु जन्म के दो तीन सप्ताह बाद उसकी भूख नियमित हो जाती है। अत: उसे सयम – सारिणी के अनुसार दूध इत्यादि देना चाहिए। मलोत्सर्जन की क्रिया जन्म के कुछ घंटे बाद शुरू होती है, जब नवजात दूध पीकर चुप हो जाता है। समय के साथ जीवो में जैसे-जैसे  शारीरक विकास होता है वैसे-वैसे भूख के अनेक रूपों का प्रादुर्भाव होता है। 

प्रेम और प्यार  -

प्रेम और प्यार यह जन्मजात गुण होते है और सभी में एक सामान पाए जाते है। परन्तु प्रेम और प्यार में समय के साथ -साथ बदलाव होते रहते है जिनके मायने कई प्रकार के होते है। जन्म से लेकर शारीरिक बदलाव होने से पहले का प्रेम और प्यार वास्तविक होता है। लेकिन जैसे-जैसे शारीरिक बदलाव होता है तो वही प्रेम,प्यार और आकर्षण आभाषी हो जाता है। जिनमे से वे बहुत ही भाग्यशाली होते  है जिनमे प्रेम और प्यार का होना वास्तविक होता है। वैसे फिरहाल प्रेम और प्यार यह गुण औरत के अंदर प्रकृति ने कूट कूट कर भरा हुआ है। औरत जानी ही प्यार के लिए जाती है। प्यार के भी कई रूप हैं। यह सब रूप औरत के अंदर मिलेंगे। इनके प्यार का दायरा दाम्पत्य जीवन में बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दायरे में पूरा परिवार आ जाता है। और यहीं इसके विभिन्न रूप भी देखने को मिलते हैं। यदि प्यार में समर्पण की भावना न हो तो प्यार, प्यार नहीं रहता। इसी समर्पण की भावना से उसका परिवार चल निकलता है। परिवार में पति-पत्नी ही दो मुख्य स्तंभ होते हैं। इन्हीं के ऊपर पूरे परिवार का दारोमदार रहता है। परिवार में प्यार भी सबसे पति-पत्नी का ही चर्चित रहता है। स्वभाविक है जब कोई चीज़ दी जाती है तो उसकी वापसी की भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इच्छा रहती ही रहती है। यहां लेन-देन ( give & take ) वाला फार्मूला एकदम सटीक बैठता है। यदि दोनों पक्ष इस फार्मूले का अनुसरण नहीं करते हैं तो समस्या खड़ी हो सकती है। दाम्पत्य जीवन में,जो बाद में समस्याएं सामने आती है वह मुख्यता इसी से सम्बंधित होती हैं। इसलिए लेन-देन ( give & take ) के फार्मूले का हमेशा ध्यान रखना अति आवश्यक है। 

बातचीत की आदत-

जन्म के बात जैसे-जैसे समझ बढ़ती है वैसे-वैसे सभी जीवो में अपने-अपने भाषा में बातचीत आरंभ होता है। हाँ यह अलग बात है कि बातचीत की प्रक्रिया किसी में कम और किसी में अधिक होता है। अधिकांश औरतों और मर्दो को बातचीत करने का या गप्पे मारने का शौक बहुत ही अधिक होता है। इसके लिए समय व स्थान तलाशने की इन्हें कतइ जरूरत नहीं होती है। यह ख़ुद-ब-ख़ुद प्रकट हो जाते हैं। यदि कोई गप्पे मारने के लिए भी नहीं मिलेगा तब भी इनके दिमाग में गप्पे चली रहती है।  परन्तु औरतो की यही आदत की वजह से  रसोई में दूध जल जाता है। यह आदत इनके अंदर इतनी गहरी होती हैं कि सामने किस किस्म का आदमी बात कर रहा है, कोई परवाह नहीं। बदमाश और गुंडे इनकी इस कमजोरी का फायदा उठाने में एक्सपर्ट होते हैं। और धीरे धीरे इन पर हावी हो जाते हैं। और अगर यह लोग एक बार भी हावी हो गए तब तो भगवान ही मालिक है। और ऐसे में यदि बातचीत की प्रक्रिया सोच समझ कर नहीं करने पर कभी-कभी यही बातचीत की प्रक्रिया घातक हो जाता है। जो समग्र जीवन को कष्ट मय बना देता है। इस लिए बातचीत की प्रक्रिया को हमेशा सोच समझ कर एवं अपने आप पर काबू में रख कर करना चाहिए बातचीत के दौरान भावावेश में नहीं बहना चाहिए। 

सुंदर बने रहने की लालसा-

प्रत्येक नर,नारी और नपुंसक सुन्दर बने रहने की लालसा में पूरी जिंदगी खपा देते है। परन्तु प्रत्येक स्त्री अपनी सुन्दरता बनाए रखने की जद्दोजहद में तो पूरी जिंदगी ही खपा देती है। इसके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। हां, यह जरूर है कि जवानी ढलने के बाद इसकी रफ्तार में कुछ कमी हो जाती है। सुन्दरता को बनाएं रखने के लिए औरतें जेवर, कपड़े, श्रृंगार प्रसाधन के सारे आइटम जिसमें ब्यूटी पार्लर जाने का शौक, आदि, का शौक बहुत गहरा है। इनकी शापिंग करने का तरीक़ा बहुत मशहूर है। शापिंग करने के सारे हुनर इनके पैदाइशी गुण बन चुके हैं। वैसे सुहाग की जरूरत तो नहीं है। फिर भी सुहाग एक आधी निशानी से चल पड़ता है। परन्तु यह सिर से लेकर पांव की उंगलियों तक ढंकी व रंगी हुई मिलेंगी। इसके ऊपर प्रसाधन का अलग से इस्तेमाल करना। वक्त की बरबादी और मर्दों की दिमागी संकीर्णता व दिवालियापन का एक बेहतरीन नमूना हैं।

लड़कियां कोमल हृदयांगी होती हैं। लड़कों की बजाय वे जल्दी रूठती है और फिर जल्दी ही मान भी जाती हैं। सो उन्हें भावनात्मक सुरक्षा व सहयोग की सबसे ज्यादा दरकार होती है। लड़कियां दूसरों पर विश्वास जल्दी कर लेती है। यह प्रवृत्ति उनके लिए बहुत ही घातक साबित होती है। बरगलाने वालों से लड़कियों को बहुत ही सचेत रहने की जरूरत है। लड़की के माता पिता की जिम्मेदारी यहां बहुत बढ़ जाती है। स्कूल कॉलेज में भी इन बातों पर विशेष जोर होना चाहिए। आज हालांकि वक्त बहुत बदल चुका है लेकिन फिर भी और बड़े स्तर पर लड़कियों को स्वावलंबी होने की आवश्यकता है। 

मां-बाप को इस विषय में अपनी लड़की को कई दक्षताओं में कुशल बनाने हेतु गंभीर प्रयास करने चाहिए। आर्थिक पक्ष की मजबूती मुसीबत में किसी के लिए भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। हर लड़की को आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु कठोर प्रशिक्षण प्राप्त करने की अनिवार्य आवश्यकता है। सरकारी स्तर पर इन प्रशिक्षणों को सख्ती के साथ लागू कर देना ज़रूरी है। एक मां बाप को भी इस बात का सामाजिक बोध होना चाहिए कि एक लड़की के लिए आत्मरक्षा की सख्त ट्रेनिंग उसके बेहतर भविष्य व मान मर्यादा के लिए बहुत ही फायदेमंद सिद्ध होगी। आभूषणों व श्रृंगार की अधिकता से भी अब लड़कियों को कुछ कुछ दूरी बना ही लेनी चाहिए। यह चीजें कितनी ही मूल्यवान हो, आखिरकार एक लड़की के लिए कुछ हद तक मानसिक जकड़न तो हैं ही। यह वस्तुएं लड़की के मां-बाप की आर्थिक कमर भी तोड़ देती है। श्रृंगार व मेकअप हो लेकिन सीमित हो।

ईश्वर के प्रति अनावश्यक आस्था-

इस मामले में पुरुषो की अपेक्षा स्त्री में इनकी उपस्थिति हर स्थान में पुरुषों से बहुत ज्यादा मिलेगी। इनके अंदर अनावश्यक आस्था की इतनी जबरदस्त तीव्र इच्छा होती है कि साधुओं, बाबाओं, कर्मकांडियों के चंगुल में आसानी से फंस जाती हैं। इतना अधिक लालच होता है कि अपने सारे ज़ेवर तक उतार कर और घर की नकदी भी उन्हें दुगना करने के चक्कर में दे डालती हैं। औरतों में व्याप्त अंधविश्वास, रूढ़िवादिता, ग़लत परम्पराओं के कारण यह कर्मकांडियों के तो चक्कर लगाती ही रहती हैं। ईश्वर के प्रति अंध भक्ति अमुमन इनके अंदर देखने को मिलेगी, जो हमारे समाज के लिए अभिशाप से कम नहीं है। और व्रत रख-रख कर अपने शरीर को तबाह कर देती हैं। बुढ़ापे में इनकी कमजोरी, दुःख, दर्द का यही मुख्य कारण है। इनकी सैक्स लाइफ 40 की उम्र से ही समाप्ति की ओर तेजी से चल पड़ती है। गृह क्लेश की वजह भी यही है।

स्वादिष्ट भोजन की भूख

याद रखिए कि जो स्वादिष्ट भोजन की भूख  अर्थात तीव्र इच्छा होती है वह चाहे औरत से सम्बंधित हो या पुरुष से, वह प्राकृतिक तौर पर स्वाभाविक होती है। फर्क सिर्फ इतना ही है कि किसी में इसका स्तर कम होता है किसी में ज्यादा और किसी में होता ही नहीं मतलब बहुत ही कम, नहीं के बराबर।  विभिन्न प्रकार की इच्छाओं में भी कुछ एक ही भूख/तीव्र इच्छा के बराबर होती हैं,  सभी नहीं। लड़कियां कम कैलोरी वाले सुस्वादु भोजन की भूखी होती है। खाने पीने के मामले उनका चुनाव औरों से अलग होता है। चटक मटक खाने की शौकीन ये लड़कियां अपनी काया की माया में पड़कर, तिखे चटपटे भोजन को ललचाई नजरों से देख कर संतोष कर लेती हैं। पर चाट छोले और गोलगप्पे देखकर इनका धैर्य जवाब दे जाता है। औरत हो या मर्द खुश रहना सबको पसंद होता है एक पुरुष हर छोटी छोटी बात पर गुस्सा कर सकता है लेकिन एक औरत गुस्से के अलावा प्यार से काम लेना पसंद करती है क्योकि वो खुद से ज्यादा दूसरों को खुश देखना चाहती है और अगर वो घर बेठी बोर भी हो रही होती है तो अपनी खुशी का जरिया ढूंढ ही लेती है क्योकि औरते हर छोटी छोटी खुशी को एंजॉय करना जानती है।  दुआ देने की बात हो या पाने की बेशुमार मिले तो सबकी ज़िंदगी बदल देती है ये दुआ इसलिए औरते हमेशा दुआ पाने से ज्यादा दुआ देने में विश्वास रखती है क्योकि जब वो अपनों को खुश देखती है तो उसकी खुद की खुशियों का ठिकाना नही रहता । चाहे वो खुश हो या दुखी लेकिन वो अपनों को दुआ ही देती है। 

शॉपिंग की भी भूखी -
सभी लड़कियो को इज्ज़त ओर सम्मान चाहिए होता है चाहे वो कोई भी और किसी भी टाइप  कि लड़की क्यो न हो 60% लड़कियो को सिर्फ प्यार से मतलब होता है और 40% लड़कियो को मनी से मतलब होता है और 99% लड़कियाँ शॉपिंग की भी भूखी होती है यह जग जाहिर है। परन्तु कुछ लड़कियां अपने परिवार और अपने आर्थिक हालात के हिसाब से खुद को ढाल लेती है। लेकिन कुछ लड़कियां जो शापिंक की बहुत ज्यादा भूखी होती है वे अपने शौक को पूरा करने के लिए गलत रास्तो का चयन कर लेती है।  जो समय के साथ जिंदगी को नर्क से भी बदतर बना लेती है।  इस लिए किसी भी चीज की अधिकता पुरुष औ या औरत घातक हो सकता है इस लिए परिस्थिति के अनुसार अपने शॉपिंग की शौक पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। 

इज्जत और सम्मान-

एक औरत को जितना चाहे प्यार कर लो उसे हमेशा प्यार की भूख रहेगी ही एक औरत को समाज में मान सम्मान और प्यार दोनों चाहिए होता है चाहे कोई भी औरत हो । लेकिन ये बात अलग है की औरतों को इतनी इज्जत नहीं मिलती क्योकि लोग ये सोचते है की अगर इज्जत दी तो सर चढ़ के बोलेगी लेकिन ये गलत है क्योकि आप इज्जत दोगे तो वो बस अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र होगी और वो खुद आपको ये कह सकती की आगे जो करना है कर सकते हो । यही चाहिए होता है एक औरत को । 

शारीरिक  भूख-
युवावस्था शारीरिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चे का शरीर प्रजनन क्षमता से युक्त वयस्क के शरीर में बदल जाता है। इसके  लिए सबसे पहले  पुरुष और महिला युवावस्था के बीच का अंतर क्या है होगा।  जिसके परिणाम स्वरूप एक दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ना स्वभाविक है। जब शारीरिक भूख की इक्छा जाग्रत होती है तो उसके आगे सभी भूख नगण्य हो जाती है।  जवानी को अंधा इस कारण से कहते हैं कि अक्सर वे झूठे और उथले शब्दों को भी सच मान बैठती हैं और चालाक शिकारी द्वारा फैंके गए जाल में फँस जाती हैं। इस लिए कोई भी कदम उठाने से पहले यौन शिक्षा (Sex education) की जानकारी होना महत्वपूर्ण है। इसी के साथ सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) एव स्वास्थ्य   के बारे भी  जानना महत्वपूर्ण है। 

physical

इसका प्रमुख कारण युवावस्था शारीरिक परिवर्तनों की प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चे का शरीर प्रजनन क्षमता से युक्त वयस्क के शरीर में बदल जाता है। युवावस्था मस्तिष्क द्वारा यौन अंगों (अंडाशय तथा वृषण) को हार्मोन संकेत भेजे जाने से शुरू होती है। जवाब में, यौन अंग विभिन्न तरह के हार्मोन उत्पन्न करते हैं जो मस्तिष्क, हड्डियां, मांसपेशियां, त्वचा, स्तन तथा प्रजनन अंगों के विकास की गति को तेज़ करते हैं। युवावस्था के पहले अर्ध-भाग में विकास तेज़ी से होता है और युवावस्था के समाप्त होने पर रुक जाता है। युवावस्था के पूर्व लड़के तथा लड़कियों के बीच शारीरिक भिन्नता केवल गुप्तांगों तक ही सीमित रहती है। युवावस्था के दौरान, कई शारीरिक संरचनाओं और प्रणालियों में आकार, आकृति, रचना और उनसे संबंधित कार्यों में प्रमुख अंतर के कारण विकास होता है। इनमें से सबसे स्पष्ट को सहायक लिंग विशेषताओं (secondary sex characteristics) के रूप में संदर्भित किया जाता है।

यद्यपि सामान्य उम्र की एक विस्तृत सीमा है, तथापि लड़कियों में युवावस्था 10 वर्ष तथा लड़कों में 12 वर्ष की उम्र में शुरू होती है। आम तौर पर 15-17 वर्ष की उम्र तक लड़कियों की युवावस्था समाप्त हो जाती है जबकि लडकों का युवावस्था काल 16-18 वर्ष की उम्र में ख़त्म होता है।  इन आयु-सीमाओं के बाद ऊंचाई बढ़ना असामान्य होता है। युवावस्था के प्रथम लक्षण के दिखाई देने के लगभग 4 वर्ष बाद लड़कियां प्रजनन परिपक्वता प्राप्त कर लेती हैं। इसके विपरीत, लड़के धीमी गति से बढ़ते हैं, किन्तु युवावस्था के पहले लक्षण के दिखाई देने के लगभग 6 वर्ष तक बढ़ते रहते हैं। 

लड़कों के लिए, टेस्टोस्टेरोन नामक एण्ड्रोजन प्रमुख सेक्स हार्मोन है। जबकि लड़कों में टेस्टोस्टेरोन के कारण हुए परिवर्तनों को पुरुषत्व विकास (virilization) कहा गया है, नरों में टेस्टोस्टेरोन चयापचय (मेटाबोलिज्म) का एक प्रमुख उत्पाद एस्ट्राडियोल (estradiol) है, तथापि लड़कियों में इसका स्तर देरी से तथा और कहीं अधिक धीमी गति से बढ़ता है। पुरुष के "विकास में उछाल" भी बाद में शुरू होता है, धीरे धीरे तेज़ होता है और एपिफाइसिस (epiphyses) के फ्यूज़ होने के पहले समाप्त हो जाता है। हालांकि युवावस्था की शुरुआत में लड़के लड़कियों से औसतन 2 सेमी छोटे होते हैं, औसत के आधार पर वयस्क पुरुष महिलाओं से लगभग 13 सेमी (5.2 इंच) लंबे होते हैं। वयस्कों की ऊंचाई में लिंग का यह अंतर विकास की गति के अंत में तेज़ होने और धीमी गति से पूरा होने के कारण है, जो देरी से विकास तथा नरों में एस्ट्राडियोल के कम स्तर के परिणामस्वरूप होता है।

मादाओं के विकास को प्रभावित करने वाला हार्मोन एक एण्ड्रोजन है जिसे एस्ट्राडियोल कहा जाता है। जबकि एस्ट्राडियोल गर्भाशय और स्तन वृद्धि को बढ़ावा देता है, यह प्रजनन क्षमता में तेज़ी लाने तथा एपिफाइसील (epiphyseal) की परिपक्वता तथा समाप्ति करने वाला प्रमुख हार्मोन भी है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एस्ट्राडियोल का स्तर तेज़ी से बढ़ता है और उच्च स्तर तक पहुँच जाता है। 

पैसे की भूख
पैसो की भूख या जरुरत हर किसी को होता है किसी में कम और किसी में कुछ ज्यादा ही पाया जाता है। पुरुष और औरत अपने जरुरत एवं  महत्वाकांक्षा के लिए पैसो के पीछे भागता है। वैसे फिरहाल पैसो की जरुरत सभी को होती है। 

मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
मुझे पैसे की भूख लुभाती है
मुझे पेट की भूख ललचाती है
मुझे जिस्म की भूख बहकाती है
मुझे जरूरत की भूख सताती है
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं
मैं तो ख्वाहिशों में बढ़ती जाती हूं
मैं यकीन को बेहद बनाती हूं

मैं सभी हदों को तोड़ जाती हूं
भले ही बाद में
मैं भूख बहुत पछताती हूं
फिर भी
मैं भूख हूं इसलिए
कभी शांत नहीं होती हूं

पुछी तो आपने भूख थी लेकिन ये आदत कहूँ या स्वभाव कहूँ लेकिन इसे भूख भी कह सकते है।  इसके अलावा औरते कैसी होती है आपको बता देती हूँ। जवानी अंधी होती है लडकियां अक्सर झूठे और उथले शब्दो में चालाक शिकारी द्वारा फैंके गए जाल में फँस जाती है।  एक औरत तब तक कुछ नहीं बोलती जब तक बात उसके चरित्र पर न आ जाए लेकिन जब उंगली चरित्र पर उठ जाए तो चाहे वो खुद का पति ही क्यों ना हो वो उसका भी वध कर सकती है मतलब ये है की वो किसी को नही बकसती है।  अगर प्रेम देने की बात आती है तो वो पराये बच्चे को सगी माँ से बढ़कर प्रेम दे सकती है हालांकि कुछ औरते ऐसी  होती है जिनके लिए खुद की संतान ही सर्वप्रिय होती है।  औरतों को गुस्से में पुरुष से कम आंकना बेवकूफी ही होगी क्योंकी इसका तो इतिहास गवाह है की औरत गुस्से में कितनी खतरनाक हो सकती है\

[ Read More ]»

शादी के बाद अधिकतर लड़कियां क्यों मोटी हो जाती है?

 
girls-become-fat-after-marriage

अक्सर महिलाएं शादी के बाद अपने बढ़ते वजन को लेकर काफी टेंशन मे रहने लगती हैं। आपने भी अक्सर देखा और सुना होगा कि शादी के बाद लड़कियां मोटी हो जाती हैं। हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक शादी के बाद 82 प्रतिशत कपल्स का वेट बढ़ जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का ज्यादा जल्दी वजन बढ़ता है। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है उनके लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव।  अक्सर देखा जाता हैं की शादी के बाद लड़कियों मोटी हो जाती हैं। इसके पीछे का वास्तविक कारण क्या है। जिनकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता हैं।। आइए यहां जानते हैं इसके कारण -
  • गर्भ निरोधक गोलियों का उपयोग मोटापे को बढ़ावा देता हैं।
  • शादी के बाद सेक्सुयल लाइफ में एक्टिव होने से शरीर में इमोशनल और हार्मोनल बदलाव आते हैं जिनकी वजह से लड़कियों का वजन बढ़ जाता हैं।
  • शादी के बाद समय की कमी के कारण नवविवाहित लड़किया पर्याप्त नींद नहीं ले पाती हैं। जो लड़कियों के मोटा होने का प्रमुख कारण हैं।
  • नवविवाहित कपल बाहर खाना खाने जाते हैं। जो हाई कैलोरी का होता हैं जिसकी वजह से भी वजन बढ़ जाता हैं।
  • अपना घर छोड़कर नये घर जाती हैं जिसका स्ट्रेस रहता हैं। इस स्ट्रेस के कारण मोटापा बढ़ता हैं।
  • शादी से पहले लड़किया अपने लुक और फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देती हैं लेकिन शादी के बाद समय की कमी के कारण अपने आप पर ध्यान देना मुश्किल काम हो जाता हैं।
  • शादी से पहले लड़किया शरीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय रहती हैं। कॉलेज जाती हैं या सहेलियो के साथ बाहर जाती हैं। लेकिन शादी के बाद ज्यादातर समय घर मे ही बिताती हैं। जिसके कारण वजन और मोटापे मे वृद्धि हो जाती हैं।

तनाव के कारण

शादी के बाद आए बदलावों को हैंडल करना इतना आसान नहीं होता। एकदम से जिम्मेदारियों का बोझ कंधे पर आ पड़ता है। उन्हें ठीक तरह से निभाने के चक्कर में कई औरतें तनाव का शिकार हो जाती है, जिसके असर वजन पर भी पड़ता है। और उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता हैं।

हार्मोन में बदलाव 

शादीशुदा जीवन की शुरुआत के साथ लड़की में कई तरह के इमोशनल और हार्मोनल बदलाव भी आते है। सेक्सुयल लाइफ में एक्टिव होना भी वजन बढ़ाने में जिम्मेदार होता है। इसके अलावा आप अपने आप के सुरक्षित रखने के लिये गर्भनिरोधक गोलियों का भी इस्तेमाल करने लगती है जो आपके शरीर के मोटापे का कारण भी बनती है।

लापरवाही

शादी के पहले लड़कियां अपने लुक्स और वेट पर ज्यादा ध्यान देती थी और नियमित एक्सरसाइज भी करती थी। लेकिन शादी के बाद वे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाती है और खुद की केयर करना उनके लिए मुश्किल होता है।

नींद की कमी 

शादी के बाद लड़कियों के स्लीपिंग पैटर्न बदल जाता है। कई बार वे पर्याप्त नींद नहीं ले पाती है और लड़कियों में वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कराण यही है।

प्राथमिकता बदल जाना

शादी के बाद जहां लड़कियों को ससुराल के हिसाब से खाना-पीना पड़ता है वहीं रिश्तेदारों के यहां दावत का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। वहीं कई बार पार्टनर के साथ भी बाहर जाना पड़ता है। नतीजन शरीर में इसका असर दिखना शुरु हो जाता है जिससे वजन बढ़ना शुरु हो जाता है।

बाहर का खाना

नवविवाहित कपल्स अधिकतर डिनर के लिए बाहर जाते है और हाई कैलोरिज कंज्यूम करते हैं। इससे महिलाओं के पेट का एरिया बढ़ जाता है।

उम्र का असर पड़ना

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेटल होने के चक्कर में आजकल महिलाएं 28 से 30 के बीच शादी कर रही हैं जबकि मैरिज की सही उम्र 22 से 26 हैं। इसके बाद महिलाएं के शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं। स्टडीज कहती हैं कि 30 की उम्र के बाद मेटाबॉलिक सिस्टम कम हो जाता है, जो वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण होता है..

स्ट्रेस
अपना घर छोड़कर शादी के बाद किसी और जगह एडजस्ट करना सबसे कठिन काम है। नए घर में एडजस्ट करने में कुछ तनाव तो होता है जो कि अप्रत्यक्ष रुप से वजन पर प्रभाव डालता है।

सामाजिक दबाव
शादी के पहले, हमारे करीबी कहते रहते हैं कि सुंदर दिखो। लेकिन शादी के बाद यह दबाव नहीं के बराबर रहता है। इसलिए महिलाएं अपनी फिटनेस को लेकर गैरजिम्मेदार हो जाती है।

प्रेगनेंसी
महिलाओं में वजन बढ़ने का यह एक महत्वपूर्ण कारण हो। अधिकांश कपल्स शादी के 1 या 2 साल बाद फैमिली प्लानिंग करते हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद अधिकांश महिलाएं अपना वजन कम करने की कोशश नहीं करती।

प्रेगनेंसी के बाद बेखयाल →
शादीशुदा लड़की जब गर्भ धारण करती है तो उसके शरीर का वजन बढ़ जाता है और शरीर मोटा हो जाता है परन्तु जब बच्चे के जन्म हो जाता है तो उसके बाद भी शरीर को पहले जैसा बनाने पर ध्यान नही दिया जाता और शरीर मोटा ही रह जाता है

अपनी गतिविधियों में परिवर्तन
शादी के बाद अक्सर पति पत्नि अपने प्यार भरे लम्हों को एक दूसरे के साथ रहकर ही बिताना चाहते है जो हर पल साथ साथ रहते है यहां तक की टी.वी. देखने पर भी एक दूसरे का साथ रहकर खाते रहना पसंद करते है जो मोटापे का कारण बनता है, यदि आप एक दूसरे के साथ रहना इतना ही पंसंद कर रहे है तो एक साथ मिलकर सैर के लिये निकल जाना आपके शरीर के लिये एक बेहतर उपाय होगा इससे दोनों एक साथ भी रहेगे और बाहर का वर्कआउट भी हो जायेगा।




[ Read More ]»

मोटी लड़की से शादी करने के जबरदस्त और बड़े फायदे

marrying-a-fat-girl


सिर्फ चेहरा देखकर किसी के बारे में अमुक धारणा बना लेना गलत है। अक्सर हमलोग व्यक्ति का चेहरा देखकर ही यह अनुमान लगा लेते है कि यह व्यक्ति कैसा है। इस व्यक्ति का स्वभाव कैसा है। अगर आप सिर्फ सूरत देखकर ही किसी शख्स के बारे में अपनी धारणा बनाते है तो कही न कही आपकी धारणा गलत हो सकती है। सूरत के अलावा शरीर का भी आकर्षण होता है। आप मोटे है या पतले इस बात पर भी आपकी खूबसूरती निर्भर करती है। अक्सर मोटे लोगों का मजाक उड़ाया जाता है। उनको चिढ़ाया जाता है। लेकिन कई मामले में मोटी लड़की पतली लड़की से बेहतर होती है। आपको यकीन नहीं हो रहा होगा तो चलिए जानते है कि किस मामले में मोटी लड़की पतली लड़की से बेहतर होती है।

पति के सेहत का ख्याल रखना

मोटी लड़कियां अपने पति के सेहत का बहुत ध्यान रखने वाली होती है। पति कब खाया, कब नहीं खाया, इस पर विशेष ध्यान देती है। वह अपने पति के खाने पीने का पूरा ध्यान रखती है। अगर इनके पति का तबियत खराब हो जाए तो ये तन मन से सेवा करती है।

समझदारी

अक्सर पतली लड़कियां सबकी पसंद होती है लेकिन मैं आपको बता दू मोटी लड़कियां समझदारी में पतली लड़कियों से आगे होती है। इनमे सूझ-बूझ और चीजों को परखने की क्षमता अच्छी होती है। ये जल्दी उल्टा काम नहीं करती है।

मुश्किल को संभालना

मोटी लड़कियां मुश्किलों से ज्यादा नहीं डरती है। ये मुश्किलों से लड़ना चाहती है। मोटी लड़कियां मुश्किल में अपने आप को हताश होने नहीं देती है। ये अपनी सोच के अनुसार मुश्किलों से निपटने की पूरी कोशिश करती है।

कोमल स्वभाव

कहते है मोटी लड़कियों का दिल साफ होता है और भावुक स्वभाव की होती है। एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ था कि मोटी लड़कियों का स्वभाव कोमल होता है। स्वभाव कोमल होने से ये बहुत भी होती है। इमोशनल होने से ये छोटी बात पर भी रोने लगती है। मोटी लड़कियों के दिल में छल-कपट की भावना नहीं हो सकती है। यहाँ तक कि ये दूसरे का दुःख दर्द भी समझती है।

आकर्षण

कहते है कि आकर्षण सिर्फ पतली लड़कियों में होती है अगर ऐसा है तो मोटी लड़कियों के पास बॉयफ्रेंड नहीं होता। मैं आपको बताना चाहता हु कि कुछ लोगों को मोटी लड़कियों में जो आकर्षण होता है वो आकर्षण पतली लड़कियों में नहीं होता है। मोटी लड़कियों के स्तन बड़े बड़े होते है और बड़े स्तन को देखकर लड़के आकर्षित नहीं हो ये तो हो नहीं सकता। इसलिए सिर्फ स्तन के कारण ही बहुत लड़के को मोटी लड़कियां पसंद आती है।

पति का साथ देती है

परिस्थिति चाहे कैसी भी हो ये हर हाल में अपने पति का सहयोग करती है। घर की हालत अच्छी हो या बुरी ये हर समय में पति का साथ देती है। चाहे कोई भी घरेलु समस्या हो ये अपने सूझ-बुझ से उस समस्या का हल निकालने का हर संभव प्रयास करती है।

पति का खुश रहना

मोटी लड़कियों के पति खुश रहते है। एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो लड़के मोटी लड़की से शादी करते है वे पतली लड़कियों के पति से 10 गुना ज्यादा खुश रहते है।

कम खर्च
मोटी लड़कियां शॉपिंग पर बहुत खर्च नहीं करती है ये कपड़ो के मामले में सेलेक्टिव होती हैं। इन्हे ये नहीं है कि ये नहीं पसंद आया वो लुंगी, वो नहीं पसंद आया ये लुंगी। पतली लड़कियां कैटरीना कैफ की तरह दिखने के चक्कर में शॉपिंग पर बहुत खर्च करती है लेकिन मोटी लड़कियों में ये नहीं होता है कि मै कैटरीना कैफ और प्रियंका चोपड़ा की तरह दिखू।

खाने का डबल मजा
अगर आप खाने पीने के शौकीन है तो आपको मोटी लड़कियों से शादी करना चाहिए। मोटी लड़कियों को खाने पीने का बहुत शौक होता है। जब आप मोटी लड़की से शादी करते है तो वो खुद भी अच्छा खाती है और आपको भी अच्छा खिलाती है।

पति को टाइम देती है
पतली और फिगर कॉन्शियस लड़कियों का अधिकतर समय शीशे के सामने ही बीतता है। वो सजने संवरने में ही इतनी व्यस्त रहती है कि पति को उतना टाइम नहीं दे पाती है। लेकिन मोटी लड़कियों को सजने संवरने का उतना शौक नहीं होता है इसलिए वो अपने पति को ज्यादा टाइम देती है। अब आप समझ गए होंगे मोटी लड़की से शादी करने से क्या फायदे होते है।

[ Read More ]»

सोते समय लड़कियों के दिमाग में चलती हैं यह बातें

 
girls-while-sleeping

सोते समय हर इंसान कुछ न कुछ सोचता है। सोते समय सोचने की आदत इंसान में प्राकृतिक होती है। अब अगर लड़कियों की बात करे कि लड़कियां सोते समय क्या सोचती है। लड़कियां सोते वक्त जो सोचती है वो बहुत मजेदार है। इस लेख में हम आपको यह बताने जा रहे है कि सोने से पहले लड़कियां क्या सोचती है।

मेरे सपनों का राजकुमार कैसा होगा

हर लड़की सोने से पहले ये जरूर सोचती हैं कि मेरे सपनों का राजा कैसा होगा। दुनिया की हर कुंवारी लड़की के मन में यह ख्याल जरूर आता है कि मेरा पति कैसा होगा, वो मुझे कितना प्यार करेगा, वो मेरी इज्जत करेगा या नहीं। ऐसी तमाम बातें है जो लड़कियां सोने से पहले एक बार जरूर सोचती है।

क्या वह मेरे से सच्चा प्यार करता है

जो लड़की किसी से प्यार करती है वो सोने से पहले यह जरूर सोचती है कि मैं जिससे प्यार करती हो वो मुझसे प्यार करता है या नहीं, क्या वह मेरा इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है, क्या वो मुझे धोखा तो नहीं देगा। ये सब बात हर वो लड़की सोचती है जिसके पास बॉयफ्रेंड है।

सेक्स की डरावनी बातें

सोने से पहले लड़कियों के दिमाग में एक बार सेक्स की बात जरूर आती है। अपनी सहेलियों के साथ दिन में जो सेक्स की चर्चा होती है वो रात में हर लड़की के दिमाग में घूमती है। कुछ लड़कियां ये सोचकर डरती है कि क्या पहली बार सेक्स करने में बहुत दर्द होता है।

प्यार के बारे में अपने पापा को कैसे बताऊँ

लड़कियां रात में अपने प्यार के बारे में सोचती है। प्यार के बारे में मैं अपने पापा को कैसे बताऊँ ?, प्यार के बारे में उनको बताने से कही वो नाराज न हो जाएं ?, मेरे प्यार के बारे में जानकर वो क्या सोचेंगे। यह बात हर वो लड़की सोचती है जो किसी से प्यार करती है।

मेरी शादीशुदा जिंदगी कैसी रहेगी

लड़कियां सब कुछ सोचना भूल सकती है लेकिन ये सोचना नहीं भूल सकती है कि मेरी शादीशुदा जिंदगी कैसी रहेगी ?, क्या मुझे पति के साथ रहने को मिलेगा या पति से दूर रहना पड़ेगा?, मेरा पति कितना पैसा कमायेगा ?, मेरी शादीशुदा जिंदगी में तनाव तो नहीं रहेगा ? ऐसे बहुत से सवाल है जो सोने से पहले लड़कियों के मन में उठते है।

सुबह का नाश्ता

सुबह क्या बनाना है क्या खाना है यह बात लड़कियां रात में ही सोच लेती है। खाने की मेनू रात को ही बन जाती है कि सुबह उठकर क्या बनाना है। खाना बनाने का सामान घर में है या नहीं है, जो नहीं है उसके बदले क्या बनाना चाहिए।

ससुराल कैसा मिलेगा

ससुराल गेंदा फूल। किसी लड़की को ससुराल अच्छी मिल जाए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। लड़कियां सोने से पहले जरूर सोचती है कि मेरी ससुराल मेरी लिए कैसी होगी। सास ससुर अच्छे मिलेंगे या नहीं ?, जेठानी या देवरानी कैसी होगी ?, ननद कैसी होगी ? ससुराल में मुझे इज्जत मिलेगी या नहीं ? ऐसे-ऐसे न जाने कितने सवाल है जो हर कुंवारी लड़की सोचती है।

वो लड़की इतनी खूबसूरत क्यों है
सुंदर लड़के को देखकर लड़के को जलन नहीं होती है लेकिन सुंदर लड़की को देखकर लड़की को जलन न हो ये हो ही नही सकता। हर लड़की को अपने सुंदर सहेलियों से जलन होती है। वो सोचती है वो इतनी खूबसूरत कैसें है ?, मैं खूबसूरत क्यों नहीं हूं ?, वो किस कंपनी का क्रीम इस्तेमाल करती है ?, वो अपने चेहरे पर क्या लगाती है ? इस तरह की बात हर लड़की अपनी सुंदर सहेलियों को देखकर रात में सोचती है।

मेरी फिगर कैसे मस्त हो
फिगर के बारे में लड़कियां रात में सोचती है। लड़कियां अपने फिगर का ध्यान तो रखती ही है साथ ही ये भी सोचती है कि मेरी फिगर कैसे मस्त हो, मै सेक्सी कैसे दिखूं, वो लड़का मुझे ऐसे क्यों देखता है, क्या लड़को को मैं पसंद आती हु या नहीं। मेरी सहेली को देखकर सरे लड़के आकर्षित होते है, मुझे देखकर क्यों नहीं होते है। मै ऐसा क्या करू जिससे सारे लड़के मेरी ओर आकर्षित हो। मै आपको बता देना चाहता हु कि लड़की बॉयफ्रेंड बनाये या नहीं बनाये लेकिन ये जरूर चाहती है कि सारे लड़के हमपर फिदा हो। जैसे लड़के चाहते है कि लड़कियां मुझे पसंद करे वैसे लड़कियां भी चाहती है कि लड़के मुझे पसंद करें।

मेरी सैलरी कैसे और कब बढ़ेगी
जॉब करने वाली हर लड़की रात को यह सोचती है कि मेरी सैलरी कब बढ़ेगी, सैलरी बढ़ने के लिए मुझमे क्या क्वालिटी होनी चाहिए, मेरी प्रमोशन कैसे होगी, ऑफिस में वो शख्स कौन है जो मेरी सैलरी बढ़वा सकता है, इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए। ऐसी बात हर जॉब करने वाली लड़की रात में सोचती है।

डेट पर जाना है कही वो मुझे टच तो नहीं करेगा
जब लड़की को डेट पर जाना होता है तो डेट पर जाने से पहले प्लानिंग करती है। उसके मन में कई दिन पहले से ही ये सवाल उठने लगते है कि क्या वो मुझे छूने की कोशिश तो नहीं करेगा, उसे ज्यादा निकट आने से कैसे रोकूंगी, अगर वो मुझे स्पर्श करेगा तो उसके मन में क्या चल रहा होगा, अगर मैं उसे किस करने दिया तो क्या होगा। ऐसे-ऐसे सवाल उस समय लड़कियों के मन में उठते है जब उन्हें डेट पर जाना होता है।

अब आप समझ गए होंगे कि लड़कियां सोने से पहले क्या सोचती है। लड़कियों की सोच अपने होने वाले पति पर ही आकर रूकती है। लड़कियां दूसरी बात सोचे या नहीं सोचे लेकिन अपने सपनों के राजकुमार के बारे में जरूर सोचती है।

[ Read More ]»

औरतों की खूबियां जानकर आप हैरान रह जायेंगे

 
qualities-of-women

हर मामले में ये कहना कि औरतें पुरुषों से कम है या उनकी बराबरी नहीं कर सकती एकदम गलत है। बहुत मामले में पुरुष औरतों से पीछे है। औरतों में कुछ ऐसी खूबियां होती है जो किसी भी मर्द में नहीं होता है। इस लेख में आप यह जानेंगे की औरतों में क्या ऐसी खूबियां या विशेषता है जो मर्द में नहीं है। चलिए जानते है औरतों की 10 खूबियां !

नया इंसान पैदा करना

औरतो के शरीर में नए इंसान का निर्माण होता है। एक इंसान का शरीर बनने की प्रक्रिया औरत के शरीर में ही होती है। यह शक्ति पुरुष में नहीं होती है, हाँ इंसान को पैदा करने में पुरुष का सहयोग मात्र होता है।

एक बार में बहुत काम करना

औरते एक बार में बहुत काम कर सकती है। अगर एक औरत को एक समय में पांच काम करने को कहा जाय तो वो पांच काम भी कर सकती है जैसे – खाना बनाते समय बच्चे को भी संभाल लेती है। खाना बनाते वक्त बर्तन भी धो लेती है यहाँ तक कि किसी का फोन आ जाए तो बात भी कर लेती है। औरतें मल्टीटास्किंग होती है लेकिन पुरुष एक बार में बहुत काम नहीं कर सकते है।

बात करने में माहिर

एक औरत को अगर किसी अजनबी से बात करनी हो तो वो अच्छे से बात कर लेती है। किसी से बात करने में औरते बात को अच्छे तरीके से अभिव्यक्त करती है। बातों से अपने दिल का हाल कह देती है और दूसरे के दिल का हाल भी समझ लेती है।

चीजों को परखना

किसी चीज को एक औरत जितने अच्छे से परख सकती है उतने अच्छे से पुरुष नहीं परख सकते। जैसे – पति को अक्सर यह सुनने को मिलता है कि सड़ी-गली सब्जी खरीद लाये, आपको यही कपडे पसंद आये थे और न जाने क्या क्या। कहने का मतलब यह है कि औरत किसी चीज को अच्छे से जांच परख करती है। अच्छी सब्जी खरीदने में पुरुष औरत से पीछे होते है।

इंसान के शक्ल से स्वभाव जानना

औरतों में इंसान को समझने की शक्ति कुदरत से ही मिली है। औरतें किसी का चेहरा देखकर समझ जाती है कि ये इंसान कैसा है, इसका चरित्र कैसा है। आपने देखा होगा जब आप दोस्त को अपने घर लेकर आते है तो औरतें आपके दोस्त को देखकर ही बता देती है कि आपका दोस्त अच्छा है या बुरा।

आंसुओं की शक्ति

औरतों के आंसू बड़े काम के होते है। औरतें आंसू के बल पर न जाने पति से कितने काम करवा लेती है। पुरुष सबकुछ देख सकते है लेकिन औरत के आंसू नहीं देख सकते। अगर औरते की कोई जिद पूरी नहीं होती है तो वो आंसू बहाने लगती है जिसका परिणाम यह होता है पुरुष को उनकी जिद माननी ही पड़ती है।ये आंसू के बल पर किसी को दंड भी दिला सकती है।

लंबी उम्र
औरतों की उम्र पुरुषों की अपेक्षा लंबी होती है। औरते मर्द से ज्यादा दिन तक जीती है। मेडिकल साइंस के अनुसार औरतों की नस मजबूत होती है। औरते अपने मन में कोई दुःख या गुस्सा दबाकर नहीं रखती है। इसी वजह से एक औरत की उम्र पुरुष से लंबी होती है।

सलाह देने में माहिर
बच्चे को अच्छा बनाने के लिए माँ जितनी सलाह देती है, बाप उतना सलाह नहीं देता है। औरतें बच्चे को सलाह देती ही है, अपने पति को भी सलाह देती रहती है। पता नहीं औरतों के दिमाग में इतने सलाह कहा से आते है।

मानसिक शक्ति
औरतों में मानसिक शक्ति बहुत होती है। वो आपके बिना कहे आपके दिल का हाल जान लेगी। अगर आप पत्नी से फोन पर सामान्य बात कर रहे है तो वो आपके बातों से ही जान लेती है कि आप खुश है या दुखी है। यहाँ तक की अगर आप पत्नी से कोई बात छिपाना चाहते है तो वो समझ जाती है कि मेरा पति मुझसे कुछ छिपा रहा है।

मोल भाव करना
अगर आपको की खरीदारी करने में मोल भाव की जरुरत है तो अपने मेम साहिबा को लेकर खरीदारी करने के लिए जाना चाहिए। आपकी पत्नी या गर्लफ्रेंड से अच्छा मोल भाव कोई भी नहीं कर सकता है। लड़कियां मोल भाव करने में माहिर होती है, वही अगर लड़के की बात करें तो इनको मोल भाव करना पसंद नहीं होता। लड़के में लड़कियों से ज्यादा ईगो होने के कारन वे मोल भाव नहीं कर पाते है। अब आप समझ गए होंगे कि औरतों में क्या खूबियां होती है।


[ Read More ]»

नहाते समय लगभग हर लड़की सोचती है यह बातें

 
nahate-samay-lagabhag-har-ladakee

कुछ लोगों को बाथरूम में बहुत सुकून मिलता है। कुछ लोगों को सबसे अधिक शांति बाथरूम में ही मिलती है। बाथरूम को लेकर हर व्यक्ति की सोच अलग अलग होती है। कुछ लोग बाथरूम से जल्दी निकलते है तो कुछ लोग देर से निकलते है खासतौर पर लड़कियां बाथरूम में ज्यादा समय बिता देती है। बाथरूम में हर कोई कुछ न कुछ सोचता है। ऐसे में आपके मन में ये ख्याल आया होगा कि बाथरूम में लड़कियां क्या सोचती है। इस पोस्ट में आप यह जानेंगे की नहाते समय हर लड़की क्या सोचती है।

बाल धो लूँ या नहीं

लड़कियों जब बाल धोती है तो उनको सुखाने में बहुत समय लगता हूँ इस वजह से लड़कियां रोज दिन बाल नहीं धोती है। नहाने से पहले हर लड़की सोचती है कि आज बाल धोऊं या नहीं। आज नहीं कल धो लेंगे।

क्या मैं मोटी हु

हर लड़की अपने आप को स्मार्ट और आकर्षक दिखाना चाहती है। नहाते वक्त लड़कियां अपने कपडे उतारती है उस समय अपने शरीर को देखकर यह सोचती है कि क्या मैं मोटी तो नहीं हु ? क्या मेरे शरीर में चर्बी तो नहीं बढ़ गयी। लड़के मोटी लड़कियों को कम पसंद करते है इसीलिए नहाते समय लड़कियां अपने शरीर को देखती है कि मैं मोटी हु या पतली हु।

कही आज पीरियड्स की डेट तो नहीं है

नहाने से पहले लड़कियां ये बात जरूर सोचती है। पिछले महीने मुझे इस तारीख को पीरियड्स शुरू हुई थी। कही आज तो वो तारीख नहीं है ? पीरियड्स आने में कितने दिन बाकी है।

नहाने से पहले यह काम कर लूं

लड़कियों को काम की बड़ी फिक्र लगी रहती है इसीलिए नहाने से पहले वो सोचती है कि कोई काम बाकी तो नहीं है। खाना, झाड़ू, पोछा सब कर ली। कोई काम छूट तो नहीं गया ? नहाने के बाद ये काम मैं नहीं कर सकती। इस तरह की बात हर लड़की नहाने से पहले सोचती है।

आज शैम्पू लगाऊं या नहीं

शैम्पू लगाने का मतलब है बाल धोना और बाल धोने का मतलब है कि बाल को सुखाने में समय लगेगा। इसीलिए स्नान करते समय लड़कियां सोचती है कि आज शैम्पू लगाऊं या नहीं।

आज मुझे कौन ड्रेस सुट करेगी

ड्रेस के मामले में लड़कियों के नखरे पूछिये ही मत। लड़कियां अपनी ड्रेस चुनने में सबसे ज्यादा कंफ्यूज होती है। उन्हें कौन ड्रेस सूट करेगा कौन नहीं करेगा इस बात को लेकर लड़कियां बहुत कंफ्यूज होती है। आज कौन ड्रेस पहनना है उस ड्रेस के बारे में लड़कियां नहाने से पहले ही सोचने लगती है। कल वो ड्रेस पहनी थी आज ये ड्रेस पहनूंगी।

क्या मैं सिंगर बन सकती हूं
जैसे लड़के गुनगुनाते है उसी तरह लड़कियां भी गुनगुनाती है। ये तो सब जानते है कि लड़कियों की आवाज लड़कों से अच्छी होती है। कुछ लड़कियों को अपनी आवाज इतनी अच्छी लगती है कि वो नहाने से पहले सोचने लगती है कि क्या मैं सिंगर बन सकती हूं।

मैं कैसी लग रही हु
लड़की को एक सवाल का जबाव आज तक नहीं मिला है कि वो कैसी लग रही है। लड़कियां अक्सर अपने बॉयफ्रेंड से पूछती है कि मैं कैसी लग रही हु। अगर बॉयफ्रेंड अच्छी कह दे फिर भी लड़की को विश्वास नहीं होता है। नहाने के समय जब लड़कियां बिना कपड़ो के होती है तो वो यही सोचती हूं कि मैं कैसी लग रही हु।

आज कौन सा दिन है
जब भी लड़की नहाती है तो उनके मन में यह ख्याल जरूर आता है कि आज कौन सा दिन है। कही आज गुरुवार तो नहीं है क्योंकि गुरुवार के दिन साबुन शैम्पू नहीं लगाया जाता।

पानी ठंडा है या गर्म है
वैसे लड़कियां लड़को से ज्यादा नहाती है फिर भी लड़कियों को ठन्डे पानी से नहाने में डर लगता है। नहाने से पहले वो जरूर सोचेगी कि पानी ठंडा है या गर्म है।

दोस्तों लड़कियां नहाने से पहले इसी तरह की बाते सोचती है। हो सकता है कि सब लड़की इस तरह की बात नहीं सोचती है लेकिन इसमें बतायी गयी अधिकतर बात हर लड़कियां नहाने के समय सोचती हूं।

[ Read More ]»

जाने -जिस घर की महिला करती है ये काम, वो हमेशा रहता है कंगाल-परेशान

Image SEO Friendly

कहते हैं घर की बेटी और बहू लक्ष्मी का रूप होती हैं. ये बात बिलकुल सत्य हैं. घर में बेटी का होना मतलब साक्षात लक्ष्मी जा प्रवेश माना जाता हैं. ये बेटियां बेटों से भी ज्यादा सुख और सम्रद्धि घर वालो को देती हैं. जहाँ एक तरफ घर की बेटी शादी के बाद विदा होकर चली जाती हैं तो वहीँ दूसरी और किसी दुसरे की बेटी हमारे घर बहू बनकर प्रवेश करती हैं. इस तरह हमारे घर में लक्ष्मी का वास हमेशा बना रहता हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार घर की बेटी, बहू, माँ या कोई अन्य महिला कुछ ऐसी बुरी आदतों में लीन हो जाती हैं कि लक्ष्मी माँ उनसे रुष्ट हो जाती हैं और वो उस घर में प्रवेश करने से हिचकिचाती हैं.

इसी बात का ख्याल रखते हुए आज हम आपको महिलाओं की वो बुरी आदतें बताने जा रहे हैं जिसके चलते उनके घर की लक्ष्मी चली जाती हैं. यदि आपके अन्दर भी ये आदतें हैं तो आपको इन्हें तुरंत बदलना चाहिए.

1. घर की साफ़ सफाई ना रखना:
ये बात तो सभी जानते हैं कि लक्ष्मी माँ को वो घर सबसे अधिक प्रिय होता हैं जहाँ हमेशा साफ़ सफाई रहती हैं. लेकिन आजकल की नई जनरेशन अपने घर की साफ़ सफाई से जायदा खुद के सजने सवरने पर ज्यादा ध्यान देती हैं. ये लोग खुद को तो साफ़ सुथरा रखते हैं लेकिन अपने घर की सफाई की तरफ ध्यान नहीं देते हैं. महिलाओं की इन आदतों के चलते घर में गंदगी एकत्रित होने लगती हैं और लक्ष्मी जी रूठ के चली जाती हैं.

2. नियमित पूजा पाठ ना करना:
हर घर की खुशहाली के लिए सुबह शाम दीपक और अगरबत्ती लगना चाहिए. ऐसा करने से घर में सकारात्मक माहोल ऊर्जा आती हैं. लक्ष्मी माँ को सकारात्मक माहोल में रहना पसंद हैं. वहीँ जिस घर की औरते पूजा पाठ की ओर ध्यान नहीं देती हैं वहां नकारात्मक ऊर्जा आने लगती हैं और लक्ष्मी माँ ऐसे घर में रहना पसंद नहीं करती हैं.

3. आलस और लड़ाई झगड़े का माहोल: 
जो औरते घर में शाम के वक़्त भी सोई रहती हैं, कामो को निपटाने में आलसी करती हैं, घर के सदस्यों से बात बात पर लड़ाई झगड़ा करती हैं वहां का माहोल सबसे अधिक नेगेटिव हो जाता हैं. ऐसे घरो से लक्ष्मी माँ दूर ही रहना पसंद करती हैं.

4. दया और दान दक्षिणा का भाव ना होना: 
कुछ महिलाएं बड़ी ही कंजूस होती हैं. वे कभी किसी को कोई दान नहीं करती हैं. मंदिर जाने पर भी इनकी जेब से भगवान के नाम का एक रुपया भी नहीं निकलता हैं. यदि घर के बाहर गाय या कुत्ता आ जाए तो ये उसे भी मार के भगा देती हैं. इस तरह के व्यवहार वाली महिलाओं से लक्ष्मी माँ सख्त नफरत करती हैं. ऐसा नहीं हैं कि आप अधिक दान करे बल्कि अपनी श्रृद्धा भक्ति से किया गया छोटा सा दान भी काफी हैं. बस इस बात का ध्यान रखे कि आपका मन साफ़ हो और आप सभी के लिए दयालु प्रवत्ति अपनाए.

[ Read More ]»

जाने -कितने प्रकार की होती है लड़कियां-स्त्रियां, और कैसा होता है उनका स्वभाव

Image SEO Friendly

स्त्रियां कितने प्रकार की होती है उनके लक्षण क्या होते है उनका स्वाभाव कैसा होता है इन बारे में काफी कुछ लिखा गया है। हिंदू धर्म में स्त्री को देवी का रूप माना गया है, ये माना जाता है कि जिस घर में स्त्री की इज्जत होती है और उसे सुखी रखा जाता है उस घर में माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। वहीं जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता और उसे पीड़ा पहुंचाई जाती है ऐसे घर से माता लक्ष्मी दूरियां बना लेती हैं। जिस घर से माता लक्ष्मी दूर हो जाती हैं उस घर के सदस्यों को आर्थिक परेशानियों का तो सामना करना ही पड़ता है इसके साथ ही उसे अन्य प्रकार की पीड़ाएं भी सहनी पड़ती हैं।किसी भी मनुष्य के शरीर की बनावट उसकी चाल-ढाल, आवाज और चरित्र से उसका भाग्य भी बताया जा सकता है। यहीं नहीं इस शास्त्र में स्त्री-पुरुष के विभिन्न प्रकार भी बताए गए हैं, किन्तु फिर भी इन ग्रंथों में स्त्रियों के लक्षणों का उल्लेख अधिक विस्तृत मिलता है। हो सकता है इसी कारण, स्त्रियों के विषय में ये कहा जाता है कि उन्हें समझना बहुत कठिन होता है। और हमारे ऋषियों ने इस विषय में उल्लेख अधिक विस्तृत रूप से किया है। आज हम आपको ज्योतिष में बताए गए स्त्रियों के विभिन्न प्रकार और सधवा (सुहागन), विधवा स्त्रियों के लक्षणों के विषय में बताते हैं।

शंखिनी स्वभाव की स्त्रियां-
Image SEO Friendly
  • शंखिनी स्वभाव की स्त्रियां अन्य स्त्रियों से थोड़ी लंबी होती हैं। इनमें से कुछ मोटी और कुछ दुर्बल होती हैं। इनकी नाक मोटी, आंखें अस्थिर और आवाज गंभीर होती है। ये हमेशा अप्रसन्न ही दिखाई देती हैं और बिना कारण ही क्रोध किया करती हैं।
  • ये पति से रूठी रहती हैं, पति की बात मानना इन्हें गुलामी की तरह लगता है। इनका मन सदैव भोग-विलास में डूबा रहता है। इनमें दया भाव भी नहीं होता। इसलिए ये परिवार में रहते हुए भी उनसे अलग ही रहती हैं। ऐसी स्त्रियां संसार में अधिक होती हैं।
  • ऐसी लड़कियां चुगली करने वाली यानी इधर की बात उधर करने वाली होती हैं। ये अधिक बोलती हैं। इसलिए लोग इनके सामने कम ही बोलते हैं। इनकी आयु लंबी होती हैं। इनके सामने ही दोनों कुल (पिता व पति) नष्ट हो जाते हैं। अंत समय में बहुत दु:ख भोगती हैं। ये उस समय मरने की बारंबार इच्छा करती हैं, लेकिन इनकी मृत्यु नहीं होती।

2. चित्रिणी(Chitrini)
Image SEO Friendly
  • चित्रिणी स्त्रियां पतिव्रता, स्वजनों पर स्नेह करने वाली होती हैं। ये हर कार्य बड़ी ही शीघ्रता से करती हैं। इनमें भोग की इच्छा कम होती है। श्रृंगार आदि में इनका मन अधिक लगता है। इनसे अधिक मेहनत वाला काम नहीं होता, परंतु ये बुद्धिमान और विदुषी होती हैं।
  • गाना-बजाना और चित्रकला इन्हें विशेष प्रिय होता है। ये तीर्थ, व्रत और साधु-संतों की सेवा करने वाली होती हैं। ये दिखने में बहुत ही सुंदर होती हैं।
  • इनका मस्तक गोलाकार, अंग कोमल और आंखें चंचल होती हैं। इनका स्वर कोयल के समान होता है। बाल काले होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। यदि इनका जन्म गरीब परिवार में भी हो तो ये अपने भविष्य में पटरानी के समान सुख भोगती हैं।
  • अधिक संतान होने पर भी इनकी लगभग तीन संतान ही जीवित रहती हैं, उनमें से एक को राजयोग होता है। इस जाति की लड़कियों की आयु लगभग 48 वर्ष होती है।

3. हस्तिनी (Hastini)
Image SEO Friendly
  • इस जाति की लड़कियों का स्वभाव बदलता रहता है। इनमें भोग-विलास की इच्छा अधिक होती है। ये हंसमुख स्वभाव की होती हैं और भोजन अधिक करती हैं। इनका शरीर थोड़ा मोटा होता है। ये प्राय: आलसी होती हैं।
  • इनके गाल, नाक, कान और व मस्तक का रंग गोरा होता है। इन्हें क्रोध अधिक आता है। कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत क्रूर हो जाता है। इनके पैरों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। इनकी संतानों में लड़के अधिक होते हैं। ये बिना रोग के ही रोगी बनी रहती हैं। इनका पति सुंदर और गुणवान होता है।
  • इनके गाल, नाक, कान और व मस्तक का रंग गोरा होता है। इन्हें क्रोध अधिक आता है। कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत क्रूर हो जाता है। इनके पैरों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। इनकी संतानों में लड़के अधिक होते हैं। ये बिना रोग के ही रोगी बनी रहती हैं। इनका पति सुंदर और गुणवान होता है।
  • अपने झगड़ालू स्वभाव के कारण ये परिवार को क्लेश पहुंचाती हैं। इनके पति इनसे दु:खी होते हैं। धार्मिक कार्यों के प्रति इनकी आस्था नहीं होती। इन्हें स्वादिष्ट भोजन पसंद होता है। इनकी परम आयु 73 वर्ष होती है। विवाह के 4, 8, 12 अथवा 16 वे वर्ष में इनके पति का भाग्योदय होता है। इनके कई गर्भ खंडित हो जाते हैं। इन्हें अपने जीवन में अनेक कष्ट झेलने पड़ते हैं, लेकिन इसका कारण भी ये स्वयं ही होती हैं। इनके दुष्ट स्वभाव के कारण ही परिवार में भी इनकी पूछ-परख नहीं होता है।

4. पुंश्चली (Punshchali) :
Image SEO Friendly
  • पुंश्चली स्वभाव की लड़कियों के मस्तक का चमकीला बिंदु भी मलीन दिखाई देता है। इस स्वभाव वाली महिलाएं अपने परिवार के लिए दु:ख का कारण बनती हैं।
  • इनमें लज्जा नहीं होती और ये अपने हाव-भाव से कटाक्ष करने वाली होती हैं। इनके हाथ में नव रेखाएं होती हैं जो सिद्ध (पुण्य, पद्म), स्वस्तिक आदि उत्तम रेखाओं से रहित होती हैं। इनका मन अपने पति की अपेक्षा पर पुरुषों में अधिक लगता है। इसलिए कोई इनका मान-सम्मान नहीं करता। सभी इनकी अपेक्षा करते हैं।
  • पुंश्चली स्त्रियों में युवावस्था के लक्षण 12 वर्ष की आयु में ही दिखाई देने लगते हैं। इनकी आंखें बड़ी और हाथ-पैर छोटे होते हैं। स्वर तीखा होता है।
  • यदि ये किसी से सामान्य रूप से बात भी करती हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे ये विवाद कर रही हैं। इनकी भाग्य रेखा व पुण्य रेखा छिन्न-भिन्न रहती है। इनके हाथ में दो शंख रेखाएं व नाक पर तिल होता है।

5. पद्मिनी (Padmini)
Image SEO Friendly
  • समुद्र शास्त्र के अनुसार पद्मिनी स्त्रियां सुशील, धर्म में विश्वास रखने वाली, माता-पिता की सेवा करने वाली व अति सुंदर होती हैं। इनके शरीर से कमल के समान सुगंध आती है। यह लंबे कद व कोमल बालों वाली होती हैं। इसकी बोली मधुर होती है। पहली नजर में ही ये सभी को आकर्षित कर लेती हैं। इनकी आंखें सामान्य से थोड़ी बड़ी होती हैं। ये अपने पति के प्रति समर्पित रहती हैं।
  • इनके नाक, कान और हाथ की उंगलियां छोटी होती हैं। इसकी गर्दन शंख के समान रहती है व इनके मुख पर सदा प्रसन्नता दिखाई देती है।पद्मिनी स्त्रियां प्रत्येक बड़े पुरुष को पिता के समान, अपनी उम्र के पुरुषों को भाई तथा छोटों को पुत्र के समान समझती हैं।
  • यह देवता, गंधर्व, मनुष्य सबका मन मोह लेने में सक्षम होती हैं। यह सौभाग्यवती, अल्प संतान वाली, पतिव्रताओं में श्रेष्ठ, योग्य संतान उत्तपन्न करने वाली तथा आश्रितों का पालन करने वाली होती हैं।
  • इन्हें लाल वस्त्र अधिक प्रिय होते हैं। इस जाति की लड़कियां बहुत कम होती हैं। जिनसे इनका विवाह होता है, वह पुरुष भी भाग्यशाली होता है।

6.आतुरा  (  Atura)
Image SEO Friendly
इस तरह की स्त्रियां हमेशा हड़बड़ी में ही रहती हैं। प्रत्येक कार्य को शीध्र से शीघ्र पूरा करने का इनमें जुनून होता है। इसी करण से कई बार इनके काम बिगड़ भी जाते हैं। ये होती तो साधारण रूप-रंग वाली हैं लेकिन पति से बहुत प्रेम करती हैं। यदि इनके मन की कोई बात पूरी न हो तो पति से लड़ाई भी कर लेती हैं। इन्हें नए-नए मित्र बनाने का स्वाभाव होता है। इनके अधिकतम मित्र स्त्री ही होते हैं। ये धन संचय करने में कमजोर होती है। अपने मित्रों पर अधिक खर्च कर बैठती हैं।

7.डाकिनी स्त्रियों (Dakinie)
Image SEO Friendly
इस प्रकार की स्त्रियां मीठी-मीठी बातें करके अपना काम निकालना खूब अच्छी तरह जानती हैं। लोगों को धोखा देना इनकी प्रकृति में होता है। ये ऊपर से प्रत्येक व्यक्ति से बहुत निकटता और अपनापन दिखाती हैं लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें धन ऐंठने की योजना बनाती रहती हैं। यहां तक कि पति को भी धोखा देने में संकोच नहीं करती। इनमें धन की विशेष लालसा होती है और धन पाने के लिए ये अपराध तक कर बैठती हैं। देखने में सुंदर, वाणी में मधुरता इनका सबसे बड़ा गुण होता है।

8.प्रेमिणी स्त्रियों(Pramini)
Image SEO Friendly
प्रेमिणी श्रेणी की स्त्रियां अत्यंत सुंदर, गौर वर्ण, चंचल नेत्र, गुलाबी पतले होंठ, सुराही जैसी गर्दन और लंबे केश की मालकिन होती हैं। इनकी सुंदरता के दीवाने सैकड़ों होते हैं। जो कोई भी एक बार इन्हें देख ले वह भूल नहीं पाता। जितना आकर्षक इनका रूप होता है, उतना सौम्य इनका स्वभाव भी होता है। इनका आचरण शुद्ध होता है। परोपकार और प्रेम की भावना इनमें प्रबल होती है। ये अपने परिवार और पति-बच्चों के लिए समर्पित होती हैं। इन्हें भोग-विलास के समस्त साधन प्राप्त होते हैं। स्वर्ण तो इन्हें विशेष प्रिय होता है।

9.कृपिणी स्त्रियों(kripini) 
Image SEO Friendly
ऐसी स्त्रियां कमजोर शरीर वाली, सांवली त्वचा वाली, कंजूस और निर्लज्ज होती हैं। अपनी गलत हरकतों के कारण से परिवार, समाज में बदनाम होती है। इन्हें अपनी संतान और पति से कोई मोह नहीं रहता। इस कारण इनका घर-परिवार कई बार टूट भी जाता है। प्रत्येक पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करने की चेष्टा करती हैं और धन पाने के लिए किसी भी पुरुष के साथ हो लेती हैं। इनके दिमाग में अपराध का कीड़ा भी पनपता रहता है। भोग-विलास पाने के लिए ये अपराध की राह पकड़ लेती हैं।

10.स्वर्गिणी स्त्रियों(svarginee)
Image SEO Friendly
ऐसी स्त्री धर्मपरायण होती है। धार्मिक कार्यों में सम्मिलित होना इन्हें प्रिय होता है। इनका परिवार व्यवस्थित रूप से चलता रहता है। न किसी वस्तु की अधिक लालसा होती है और न कुछ अधिक पाने का प्रयास करती हैं। जितना होता है उसी में खुश रहती हैं। इनका अपनी संतान से विशेष लगाव होता है। धन संचय करने का गुण इनमें होता है। इस प्रकार की स्त्रियां समाज के किसी बड़े पद पर भी देखी जाती हैं। रूप-रंग सामान्य किंतु आकर्षक होता है। ये स्त्रियां परोपकार करने में सबसे आगे रहती हैं।

11.बहुवंशिनी स्त्रियों 
Image SEO Friendly
इन स्त्रियों का रंग गेहुआं होता है और पूरी तरह से गृहस्थ धर्म को निभाने वाली होती हैं। ये कभी झूठ नहीं बोलती और मन की साफ होती हैं। पति और परिवार इनके लिए सबसे ऊपर होते हैं। ये समाज में सम्मानित होती हैं तथा उच्च पदों पर आसीन होती है। हां, इनका स्वभाव थोड़ा गर्म होता है, लेकिन जल्दी ही मान भी जाती हैं। दूसरों की बुराई करने वाले और दूसरों पर दोषारोपण करने वालों से ये दूर रहना पसंद करती हैं। ये अनेक प्रकार की संपत्तियों की मालकिन होती है। प्रेम का गुण इनमें विशेष होता है। 

12-सधवा स्त्रियों (sadhwa)
Image SEO Friendly
सधवा स्त्रियों के दोनों हाथ कमल के समान सुंदर होते हैं। उंगलियां सीधी होती हैं। हाथ की रेखाएं सूक्ष्म, लेकिन साफ होती हैं। हथेली चिकनी और गोलाकार होती हैं। इनके हाथ में पद्म, कानन, जयंती तथा स्वस्तिक रेखा स्पष्ट दिखाई देती हैं। भाग्य रेखा भी बिना कटी होती है। हथेली का मध्यभाग थोड़ा ऊंचा होता है। संपूर्ण शरीर का रंग एक समान दिखाई देता है। भौंहें मिली नहीं होती। दांत एक-दूसरे से चिपके होते हैं।

विधवा स्त्रियों (vidhwa)
Image SEO Friendly
समुद्र शास्त्र के अनुसार विधवा लक्षण वाली स्त्रियों के बाएं हाथ में तीन या छ: रेखाएं होती हैं। भाग्य रेखा छिन्न-भिन्न या दंड रेखा से युक्त होती है। ऐसी महिलाओं के बाल रूखे से रंग के, कान मोटे और मुंह लंबा होता है। इनका कंठ मोटा व बाहर की ओर निकला होता है। इनकी आवाज कर्कश होती है, इनके नाखून चपटे होते हैं

01-नारी का त्याग
‘त्याग’ की परिभाषा को यदि बारीकी से किसी ने समझा है तो वह है एक औरत। वह चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहती हो, किसी भी धर्म एवं मज़हब को मानती हो, लेकिन त्याग का धर्म उसे बचपन से ही सिखा दिया जाता है। शायद उसके खून के एक-एक कण में त्याग नामावली बस चुकी है, तभी तो जन्म से लेकर मरण तक हर पल अपनी खुशियों एवं तमन्नाओं का त्याग करना सीखा है नारी ने।

02-रीति-रिवाज का जिम्मा
केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में ज़रा नज़र घुमा कर देखें आपको ऐसे कई रीति-रिवाज जरूर मिल जाएंगे, जिसमें त्याग का बीड़ा एक स्त्री को उठाना पड़ता है। कई बार तो इस त्याग का प्रभाव इतना गहरा होता है कि बेचारी उस महिला को यह पूछने का भी मौका नहीं मिलता कि ‘ऐसा उसके साथ क्यों हो रहा है’?

03-रिवाज़ों में बंधी महिलाएं
संस्कृतियों एवं रिवाज़ों में बंधी यह महिलाएं बस त्याग करना सीखती हैं। पति की मृत्यु के बाद खुद का त्याग कर देना भी एक ऐसा तथ्य है जो महिलाओं के लिए अभिशाप बनकर रह गया है।

04-सती प्रथा जैसा उदाहरण
वर्षों पहले हिन्दू इतिहास ने ‘सती प्रथा’ जैसी घटनाओं को अपने किताब के पन्नों में जगह दी है। यह एक ऐसी क्रूर प्रथा थी जिसकी कल्पना भी कोई स्त्री नहीं करना चाहती। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव से जुड़ी है यह प्रथा, महाभारत के राजा पाण्डु की पत्नी माद्री ने भी उनके साथ सती होने का निश्चय किया था।

05-लेकिन खत्म हुई यह प्रथा
शायद यही कुछ ऐसी घटनाएं थी जिसने सती प्रथा को भारतीय सिद्धातों में पनाह दी, लेकिन एक समय ऐसा आया जब धीरे-धीरे यह प्रथा विलुप्त हो गई। हालांकि आज की विधवा महिला को भी कुछ ऐसे नियम-कायदों का पालन करना पड़ता है जो उसके लिए पांव में बंधी बेड़ियों के बराबर हैं।

06-विधवा की ज़िंदगी
केवल पति की मृत्यु का शोक ही उसके लिए काफी नहीं होता, उसके बाद उसका अकेलापन अन्य कट्टर रिवाज़ों से बंधकर उसे पल-पल मारता है। और इसी घुटन में वह स्त्री सोचती है कि काश इससे अच्छा तो वह अपने पति के साथ ही सती हो जाती।

07-मान्यताओं का बोझ
एक विधवा के लिए हिन्दू मान्यताओं में खास नियम बनाए गए हैं। उसे दुनिया भर के रंगों को त्याग कर सफेद साड़ी पहननी होती है, वह किसी भी प्रकार के आभूषण एवं श्रृंगार नहीं कर सकती। इतना ही नहीं, जो लोग कट्टर तरीके से इन नियमों का पालन करते हैं, वे विधवाएं तो शाम को सूरज ढलने के बाद अनाज का एक निवाला भी निगलती नहीं हैं।

08-इच्छानुसार कोई कार्य नहीं कर सकतीं
इसका तो यही अर्थ हुआ कि वह अपनी इच्छानुसार कोई कार्य नहीं कर सकतीं। उन्हें आखिरी श्वास तक भगवान को याद करके अपना बचा हुआ जीवन व्यतीत करने को मजबूर किया जाता है।

09-पति की मृत्यु के बाद
आप सोच रहे होंगे कि आज के आधुनिक युग में यह सब कहां होता है। आजकल तो पति की मृत्यु के कुछ समय के पश्चात महिलाएं दूसरा विवाह करके अपना आगे का जीवन सुखपूर्वक चलाने की कोशिश करती हैं। परन्तु सच मानिये आज भी देश के कई हिस्सों में एक विधवा को बोझ मानकर घर के एक कोने में फेंक दिया जाता है।

10-व्यर्थ के समान जीवन
उसका जीवन पति के मरने के बाद व्यर्थ है ऐसा उसे बार-बार महसूस कराया जाता है। पर क्यों? एक विधवा से उसके अधिकार, उसके रंग एवं श्रृंगार को छीन लेने का क्या अर्थ है? क्या हमारे शास्त्र हमें इस बात की सलाह देते हैं?

11-वेदों में नहीं है वर्णन
नहीं... आप जानकर यह हैरानी होगी कि वेदों में एक विधवा को सभी अधिकार देने एवं दूसरा विवाह करने का अधिकार भी दिया गया है। वेदों में एक कथन शामिल है – “उदीर्ष्व नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुप शेष एहि । हस्तग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सम्बभूथ।“

12-दूसरे विवाह की सलाह देते हैं वेद
इसका अर्थ है कि पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा उसकी याद में अपना सारा जीवन व्यतीत कर दे ऐसा कोई धर्म नहीं कहता। उस स्त्री को पूरा अधिकार है कि वह आगे बढ़कर किसी अन्य पुरुष से विवाह करके अपना जीवन सफल बनाए।

13-लेकिन बनी हैं सामाजिक धारणाएं
लेकिन हमारा समाज इस बात को नहीं मानता। सामाजिक नियमों के अनुसार पति की मृत्यु के बाद उसकी विधवा रंगीन वस्त्र नहीं पहन सकती, कोई श्रृंगार नहीं कर सकती, किसी प्रकार के आभूषण धारण नहीं कर सकती बल्कि वह स्त्री उन सभी नियमों के साथ बंध जाती है जो उसे विधवा धर्म सिखाते हैं।

14-साधारण जीवन
पति के जीवित होते हुए जिस प्रकार से वह खुद को सुंदर बनाकर रखती थी, उसके जाने के बाद उसे उससे भी ज्यादा खुद को बदसूरत बनाने के लिए कहा जाता है। कुछ संस्कारों में तो एक विधवा का मुंडन भी किया जाता है।

15-अनेक कारण
ऐसा करने के पीछे कई सारे सामाजिक एवं वैज्ञानिक कारण दिए जाते हैं। कहते हैं कि एक इंसान जितना साधारण होगा, कम आकर्षक होगा उतना ही लोग उस पर कम ध्यान देंगे। और एक विधवा को सबकी नज़रों से, खासतौर से पराए मर्दों की नज़रों से बचकर रहने की सलाह दी जाती है।

16-रक्षा करने वाला कोई नहीं
क्योंकि पति की मृत्यु के बाद इस समाज में उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं है। कम से कम तब तक नहीं जब तक वह पुन: विवाह नहीं कर लेती। इसलिए उसे सफेद साड़ी एवं बिना किसी श्रृंगार के रहने की सलाह दी जाती है।

17-श्रृंगार नहीं कर सकती
एक नारी का श्रृंगार उसे चंचल बनाता है। यह उसकी सुंदरता ही तो है जिसकी बदौलत एक पुरुष उसकी ओर आकर्षित होता है। लेकिन एक विधवा को सबकी निगाहों से छिपकर रहना होता है। यह शायद हमारे समाज की मानसिकता ही है कि यदि कोई स्त्री रंग-बिरंगे कपड़े पहने खड़ी होगी तो उसे ज्यादा लोग देखते हैं।

18-बदसूरत बनने को मजबूर
लेकिन कोई असुंदर एवं बेहद कम आकर्षक महिला पास से गुजरे तो लोग उसे देखना भी नहीं चाहते। लेकिन पश्चिमी देशों में ऐसा कभी नहीं होता। वहां की मानसिकता एवं भारतीयों की मानसिकता में काफी अंतर है।

19-रंगों से मुख मोड़ना
यह सच है कि हमारे द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों के रंग हमारे चरित्र पर एक गहरा असर करते हैं। लाल रंग हमें भड़काऊ बनाता है तो नीला सकारात्मक दृष्टि प्रदान करता है। हरा रंग मानसिक संतुलन देता है तो सफेद शांति का प्रतीक माना जाता है।

20-सफेद रंग पहनने की सलाह
शायद यही कारण है कि एक विधवा को सफेद रंग पहनने की सलाह दी जाती है ताकि वह दुख के इस समय में खुद को शांत रखने की कोशिश कर सके। साथ ही इस शांत व्यवहार से वह विधवा प्रभु में अपना ध्यान भी आसानी से लगा सकती है।

21-खान-पान में बदलाव
कपड़ों के अलावा एक विधवा के खान-पान के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया जाता है। शास्त्रों की मानें तो एक विधवा स्त्री को बिना लहसुन-प्याज वाला भोजन करना चाहिए और साथ ही उन्हें मसूर की दाल, मूली एवं गाजर से भी परहेज रखना चाहिए।

22-सात्विक भोजन
सिर्फ इतना ही नहीं उनके लिए भोजन में मांस-मछली परोसना घोर अपमान व पाप के समान है। उनका खाना पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। और शाम को सूरज ढलने के बाद वह पानी के अलावा कुछ ग्रहण नहीं कर सकती।

23-परन्तु कब आएगा बदलाव
यह कड़े नियम आज देश के सभी तो नहीं लेकिन कुछ हिस्सों में विधवा के लिए एक अभिशाप के समान कायम हैं। जिससे वह उबरना चाहती है और अपने जीने का एक मकसद ढूंढ़ना चाहती है। परन्तु शास्त्रों एवं धर्म के नाम पर यह समाज एक विधवा को आज़ादी की उड़ान शायद ही कभी भरने दे।

[ Read More ]»

जाने कैसे इन गलतियों की वजह से ही बच्चे गर्भावस्था में ही बन जाते हैं किन्नर

Image SEO Friendly

हमारे समाज में तीन तरह के लोग होते हैं स्त्री, पुरूष और तीसरा है किन्नर। किन्नर एक ऐसे लोग होते हैं जो अमातौर पर समाज से जुड़े जरूर होते हैं लेकिन उनका अस्तित्व समाज से बिलकुल अलग होता है। इनका लिंग न पुरूष में होता है और न ही स्त्री में। यह आधे मर्द और आधे स्त्री होते हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या होता होगा कि गर्भवस्था से ही यह ऐसे पैदा होते हैं। शायद आपके मन में भी इन्हे देखकर ऐसा सवाल उठता हो? अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हो तो आज हम आपको इससे ही जुड़ी जानकारी बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप यह पता कर सकते हैं कि आखिर किन्नर का जन्म किस कारण से होता है या फिर गर्भवस्था से ही ऐसा क्या होता है जो किन्नर के रूप में बच्च जन्म लेता है।

बच्चे गर्भवस्था में ही बन जाते हैं किन्नर के लिए इमेज परिणाम
यह तो आप भी जानते होंगे कि किन्नर का जन्म आम घरों मे ही होता हैं जब ऐसे बच्चों का जन्म होता है तो खुद बच्चे के माता-पिता इनको किन्नर के हवाले कर देते हैं या फिर किन्नर खुद उन्हे ले जाते हैं। लेकिन सवाल तो यह है कि आखिर कैसे गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर आते ही किन्नर बन जाता है? वैज्ञानिक कारण कि अगर बात करें तो जब बच्चा गर्भ में ही होता है तो गर्भवस्था के तीन महीने बाद मतलब लगभग चौथे  माह कि शुरूआत में ही बच्चे का लिंग बनना शुरू होता है। जी हां गर्भावस्था के पहले तीन महीने के दौरान बच्चे का लिंग निर्धारित होता है और ऐसे में इस दौरान ही किसी तरह के चोट, विषाक्त खान-पान या फिर हॉर्मोनल प्रॉब्लम की वजह से बच्चे में स्त्री या पुरूष के बजाय दोनों ही लिंगों के ऑर्गन्स और गुण आ जाते हैं.. इसलिये गर्भावस्था के शुरुआत के 3 महीने बहुत ही ध्यान देने वाले होते हैं। मानव जाति में क्रोमोसोम की संख्या 46 होती है जिसमें 44 आटोजोम होते हैं जबकि शेष दो सेक्स क्रोमोजोम होते हैं ! यही दो सेक्स क्रोमोसोम लिंग निर्धारित करते हैं। पुरूष में XY और स्त्री में XX क्रोमोसोम होते हैं ! 

बच्चे गर्भवस्था में ही बन जाते हैं किन्नर के लिए इमेज परिणाम
अगर गर्भावस्था के शुरूआती 3 महीने में गर्भवती महिला को बुखार आए और उसने गलती से कोई हेवी डोज़ मेडिसिन ले ली हो।
  • 01-गर्भवती महिला ने कोई ऐसी दवा या चीज का सेवन किया हो जिससे शिशु को नुकसान हो सकता हो…
  • 02 -या फिर गर्भावस्था में महिला ने विषाक्त खाद्य पदार्थ जैसे कोई केमिकली ट्रीटेड या पेस्टिसाइड्स वाले फ्रूट-वेजिटेबल्स खाएं लिए हों।
  • 03 -या फिर प्रेग्नेंसी के 3 महीने के दौरान किसी एक्सीडेंट या चोट से शिशु के ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा हो
  • 04-इनके अलावा 10-15% मामलों में जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण भी शिशु के लिंग निर्धारण पर असर पड़ जाता है।
  • 05-अगर कोई महिला गर्भपात करने के लिए डॉक्टर की सलाह पे कोई हैवी मेडिसिन लेती है तो आगे जाकर भविष्य में उसका होने वाला बच्चा किन्नर पैदा हो सकता है।

तो ये थीं किन्नर पैदा होने के पीछे छिपी कहानी जिसे हमारा समाज नज़रअंदाज़ करता आया है ,उन्हें याद रहता है तो सिर्फ ये की सामने वाला एक किन्नर है। भारतीय समाज में किन्नरों की हालत में लगातार सुधार हो रहे है जो की सराहनीय है।

[ Read More ]»
”go"