कौन भूल सकता है सोमवार 16 जुलाई, 1945 के उस दिन को, जब प्रातःकाल 5:30 बजे विश्व के प्रथम परमाणु बम का परीक्षण किया गया था। इस परीक्षण के लिए अमेरिका के लाॅस अलामोस से 200 मील दूर अलेमो गोर्डो (Alamogordo) के उत्तर के रेगिस्तानी भाग को चुना गया था। परमाणु बम के परीक्षण के लिए एक पहाड़ी पर 32 टन भार की 100 फुट ऊंची धातु की मीनार पर बम रखा गया था। इस परीक्षण को देखने के लिए पहाड़ी से बहुत दूर एक हजार दर्शक उपस्थित थे। पहले से निश्चित किये गए समयानुसार इस बम का विस्फोटन (explosion) किया गया। एक भयानक आवाज के साथ सारे क्षेत्र में प्रकाश फैल गया। और इस तरह विश्व के पहले परमाणु बम व विध्वंसक नाभिकीय हथियार का जन्म हुआ।
लेकिन क्या आपने सोचा है? जो अस्त्र 19वीं सदी से पहले केवल कल्पना मात्र था 19वीं सदी के मध्य आते-आते उसका आविष्कार किसने कर दिया! Parmanu bomb ka avishkar kisne kiya? तो हम बता दे कि विश्व के इस पहले नाभिकीय हथियार का आविष्कार अमेरिकी मूल के वैज्ञानिक जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर (J. Robert Oppenheimer) ने किया था।
जब इस Atom Bomb का परीक्षण हो रहा था स्वयं रॉबर्ट ओपेनहाइमर परीक्षण स्थल से 9 मील दूर नियंत्रण कक्ष में बैठे हुए थे। इतनी दूर बैठे होने के बावजूद उन्हें तेज गर्मी का अनुभव हुआ। बम के विस्फोट से चालीस हजार फीट ऊंचाई का धुएं का विशाल बादल बन गया। 100 फीट ऊंची मीनार का नामो-निशान न रहा। नीचे की मिट्टी भी पिघल कर कांच में बदल गई। एक मील तक के क्षेत्र में सारे जीव-जंतु मर गए। यहां तक कि जमीन के नीचे छिपे सांप और दूसरे जन्तु भी मर गए। उस परमाण्विक विस्फोट का प्रभाव इतना तीव्र था कि 30 मील दूर स्थित पशुओं के बाल तक उड़ गए और उसकी चमक को 450 मील दूर तक देखा गया। ओपेनहाइमर की देखरेख में निर्मित इस बम की कामयाबी को देखकर सारा संसार भयभीत हो उठा।
दरअसल, 2 दिसम्बर, 1942 को भाभिकीय क्रियाओं एवं परमाणु भट्टी के खोजकर्ता एनरिको फर्मी ने शिकागो विश्वविद्यालय के स्टेडियम के नीचे बने वीरान स्क्वैश कोर्ट में पहली बार परमाणु विघटन की नियंत्रित श्रृंखला प्रक्रिया की सफलता का परीक्षण किया और इस परीक्षण के साथ ही अणु युग (Atomic Age) का श्रीगणेश हो गया था। अब सिर्फ परमाणु बम का परीक्षण करना बाकी था। 1945 में इसका अवसर सहज ही उपस्थित हो गया।
वर्ष 1939 में World War II की शुरूआत होने ही वाली थी। 1939 में अंतर्राष्ट्रीय स्थितियां भयंकर होती जा रही थी। हिटलर की तानाशाही अपनी बुलंदी पर थी। उसकी आक्रामक नीतियों और घोषणाओं से सारे यूरोप में आतंक छा गया था। अधिकांश विज्ञानी जर्मनी छोड़कर भागने लगे और उन्होंने अमेरिका में शरण ले ली। इन वैज्ञानिकों में प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी थे। एडोल्फ़ हिटलर की भयानक युद्ध नीति देखकर अमेरिका को जर्मनी पर परमाणु हथियार बनाने का शक होने लगा। अंततः कुल मिला कर ऐसा वातावरण अमेरिका में निर्मित होने लगा था कि अमेरिका बड़ी सहजता से परमाणु शक्ति का प्रदर्शन कर सकता था।
युद्ध प्रारम्भ होते ही जापान जर्मनी के साथ मिल गया तथा अमेरिका पर बमबारी करने लगा तथा उसके कई महत्वपूर्ण बंदरगाह तबाह कर दिये। संयोग से उसी समय आइंस्टीन ने एक पत्र लिखकर परमाणु बम बनाने कि संभावनाओं एवं परमाणु शक्ति का रहस्य तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट को बता दिया। अब अमेरिका को लगा कि जापानी सरकार के प्रतिनिधियों की आंखें खोल देने के लिए अणु शक्ति का प्रदर्शन आवश्यक हो गया है।
अतः जुलाई 1939 में दो वैज्ञानिकों जीलार्ड और बिजनर ने आइंस्टीन से विचार विमर्श किया और अंततः आइंस्टीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट को पत्र लिखा जो इस प्रकार था:
डियर मिस्टर प्रेसिडेंट! ई. फर्मी तथा एल. जीलार्ड के कुछ नए अनुसंधानों से मुझे अवगत कराया गया है। इन अनुसंधानों की पांडुलिपि का अध्ययन करने के पश्चात मुझे विश्वास हो गया है कि निकट भविष्य में ही वैज्ञानिक यूरेनियम को एक नए और महत्वपूर्ण शक्ति स्त्रोत के रूप में प्रयुक्त करने में सफल हो जायेंगे। इस तरह का केवल एक ही बम अगर किसी बंदरगाह पर फेंका गया तो वह उस बंदरगाह के साथ-साथ आस-पास के इलाके का भी सफाया कर देगा।”
राष्ट्रपति ने नाजियों के दमन को रोकने के लिए तुरन्त कदम उठाया। उनके आदेशानुसार ‘मैनहट्टन परियोजना’ (Manhattan Project) नामक अणु बम योजना प्रारम्भ हुई (वैसे दिखावे के तैर पर इस योजना को डी. एस. एम. – ‘डेवलपमेंट आफ सब्सिट्यूट मैटेरियल्स’ – नाम दिया गया था) तथा न्यू मैक्सिको स्थित लास अलामोस नामक स्थापित की गयी। इसके निदेशक थे – Robert Oppenheimer और Enrico Fermi थे उप-निदेशक। यहीं पर 16 जुलाई, 1945 को ओपेनहाइमर ने पहले बम का सफल परीक्षण कर विश्व को अचंभा कर दिया।
परमाणु बम की विध्वंस लीला
परमाणु बम के प्रथम सफल परीक्षण के बाद अमेरिका ने ठीक 22 दिन बाद 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा पर एक हवाई जहाज से लिटिल बॉय (Little Boy) नामक परमाणु बम गिरा दिया। देखते ही देखते 3 लाख 40 हजार की आबादी मौत के नगर में तब्दील हो गयी। मकान धू-धू करके जलने लगे, उनकी खिड़कियां, दरवाजे और छतें उड़ गयी। पशु-पक्षी और आदमी सभी इसकी भेंट चढ़ गए। धूल और धुएं का ऐसा काला बादल उठा कि मानो उसने समूचे आसमान को लील लिया हो। विस्फोट के झटकों का प्रभाव 17 किलोमीटर दूर तक के मकानों पर भी पड़ा। शहर के लगभग 90 प्रतिशत मकान क्षतिग्रस्त हो गए।
मात्र 3 दिन पश्चात, 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर भी ऐसा ही बम (फैट मैन) गिराया गया और ऐसी ही तबाही वहां भी देखी गयी। अमेरिकन स्ट्रेटजिक बांविग सर्वे के अनुसार दोनों शहरों की जन संचार सुविधाएं और बिजली व्यवस्था नष्ट हो गयी थी। आग बुझाने वाली सारी गाड़ियां बेकार हो गई थीं। इसके सारे कर्मचारी मौत के मुंह में समा गए थे।
बम कांड में लाखों बेगुनाह मौत की भेंट चढ़ा दिए गए और सौभाग्य से जो बचे भी, उनका इलाज करने वाला कोई नहीं। हिरोशिमा के अस्पतालों में काम करने वाले 90% डॉक्टर भी मौत के मुंह में चले गए। बचे हुए गंभीर रूप से घायल थे। वहां काम करने वाले 200 डॉक्टरों में से बमुश्किल 30 डॉक्टरों को महीने भर के इलाज के बाद बचाया जा सका। काम करने वाली 1730 नर्सों में से 1654 नर्सें भी मौत की गोद में सो गईं। 45 सिविल अस्पतालों में से अधिकांश के मात्र ढांचे ही बचे। केवल 3 अस्पताल ऐसे थे जो काम आ सकने लालय थे। इस समूची विनाश लीला में तकरीबन एक लाख अकाल ग्रस्त हुए और लगभग इतने ही घातक विकिरणों की चपेट में आए और वर्षों तक ढोते रहे अपनी अपाहिज लाश।
आज किन-किन देशों के पास परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हैं?
इस वर्ष तक (2018) घोषित रूप से दुनिया के 9 देशों के पास परमाणु बम हैं। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के आकलन के अनुसार अघोषित रूप से संसार के कम से कम 30 राष्ट्र परमाणु शक्ति सक्षम हैं।
S. No. | देश | हथियारों की संख्या | पहली परीक्षण तिथि |
---|---|---|---|
1. | अमेरिका | 6,600 | 16 जुलाई, 1945 |
2. | रूस | 6,800 | 29 अगस्त, 1949 |
3. | ब्रिटेन | 215 | 3 अक्टूबर, 1952 |
4. | फ्रांस | 300 | 13 फ़रवरी, 1960 |
5. | चीन | 270 | 16 अक्टूबर, 1964 |
6. | पाकिस्तान | 130 | 28 मई, 1998 |
7. | उत्तर कोरिया | 15 | 9 अक्टूबर, 2006 |
8. | इजराइल | 400 | 1960–1979 |
9. | भारत | 120 | 18 मई, 1974 |
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