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डीजल इंजन का आविष्कार किसने और कब किया

 
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डीजल इंजन का आविष्कार जर्मनी के महान् वैज्ञानिक रूडोल्फ डीजल ने सन् 1897 ई. में किया था। इन्हीं के नाम पर इस इंजन का नाम डीजल रखा गया। वैसे भी पैट्रोल तेल की अपेक्षा डीजल की कीमत कम होती है, इसके अलावा डीजल इंजन इतना शक्तिशाली होता है कि उससे रेलगाड़ी, बसें, ट्रेक्टर, ट्रक आदि भारी वाहनों को चलाने के लिए प्रयोग किया जाता है। सड़कों पर दौड़ते मोटर वाहनों में यद्यपि पैट्रोल के भी इंजन होते हैं, किन्तु डीजल इंजनों की भी कमी नहीं है।

रूडोल्फ डीजल जब छात्र जीवन व्यतीत कर रहे थे, उस समय उन्होंने अपनी पाठ्य-पुस्तक में पढ़ा कि उष्मा इंजनों में मात्र दस प्रतिशत ऊर्जा ही कार्य में बदल पाती है। यह पढ़कर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। इस तथ्य को पढ़कर उन्होंने यह निश्चय किया था, कि वे एक ऐसा इंजन बनाएंगे जो आर्थिक दृष्टि से सस्ता होगा। उन्होंने अपनी कल्पना को साकार रूप देकर डीजल इंजन का आविष्कार किया। 

डीजल इंजन पैट्रोल इंजन से काफी अलग होता है क्योंकि पैट्रोल इंजन डीजल इंजन के मुकाबले हल्का होता है और उनका प्रयोग ज्यादा भारी वाहनों में नहीं होता।

डीजल इंजनों में जो ईंधन प्रयोग किया जाता है, उसे लोग डीजल के नाम से पुकारते हैं। यह विचित्र संयोग ही कहा जाएगा कि डीजल इंजन का जिन्होंने आविष्कार किया, उनका नाम भी डीजल था और उसमें प्रयोग होने वाले ईंधन को भी डीजल कहा जाता है।

सन् 1902 के बाद उन्होंने अपने इंजन के अधिकारों को बेच दिया। केवल अमेरिका से उन्हें उस इंजन के दस लाख डॉलर की प्राप्ति हुई। तत्पश्चात् उनके द्वारा अविष्कृत डीजल इंजन जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि में भी बनने लगे।

डीजल इंजन दो प्रकार के होते हैं। एक तो चार स्ट्रोक वाला डीजल इंजन और दूसरा दो स्ट्रोक वाले डीजल इंजन। दो स्ट्रोक वाले डीजल इंजन की अपेक्षा चार स्ट्रोक वाले डीजल इंजन ज्यादा शक्तिशाली होते हैं।

तब से अब तक उस डीजल इंजन में अनेक सुधार किए गए हैं। डीजल द्वारा विकसित इंजनों में सुधार करके उनकी दक्षता बढ़ाई गई है। 

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