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भुजिया या उसना चावल के फायदे और नुकसान

 
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आपने भुजिया चावल के बारे में सुना होगा। जिसे धान (छिलके सहित चावल) को भिगोने उसे दोबारा फिर आंशिक रूप से उबालने के बाद, उसे सुखाकर जो चावल निकाला जाता है, उसे भुजिया या उसना  चावल  कहते है।
इसके बाद उस को सुखा कर उस की कुटाई के जाती है।  इस प्रक्रिया की वजह से भूसी की परत चावल पर चिपक जाती है. धान के छिलके में एवं भूसी में उपस्थित विटामिन बी चावल के कण में अवशोषित कर लिया जाता है। चावल के कण में उपस्थित स्टार्च(कार्बोहायड्रेट) आंशिक रूप से पक भी जाता है जिसके कारण चावल के कण थोडे पारदर्शी हो जाते हैं।  उसन देने के बाद कुटाई करने से चावल के कण टूटते भी नहीं हैं।  ब्राउन राइस की तरह इसमें भी रेशे की मात्र अधिक होती है, पकने के बाद दाने आपस में चिपकते नहीं हैं और खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। उसन देने की वजह से इस चावल की खुशबू बदल जाती है और यदि शुरू से इस को खाने की आदत न हो तो बहुत से लोगों को यह पसंद नहीं आता।  यह प्रक्रिया पूरे भारत में सदियों से अपनाई जाती रही है और आज भी अपनाई जाती है। अधिकांश भुजिया चावल का उपयोग पूर्वी भारत में अधिक किया जाता है। 

भुजिया चावल का उपयोग  -

  • भुजिया चावल का उपयोग पकाकर खाने में किया जाता  है। पकने के बाद दाने आपस में चिपकते नहीं हैं और खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। उसन देने की वजह से इस चावल की खुशबू बदल जाती है और यदि शुरू से इस को खाने की आदत न हो तो बहुत से लोगों को यह पसंद नहीं आता। भुजिया चावल मधुमेह रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं,क्योकि इससे शुगर नहीं बढ़ता है। 
  • भुजिया चावल का उपयोग तरह- पकवान जैसे इसे भुनने के बाद हलुवा का उपयोग जो बहुत ही टेस्टी।   भुजिया चावल का उपयोग खिचड़ी बनाकर खाने में।  भुजिया चावल उपयोग दक्षिण भारतीय इडली एवं डोसा बनाने के भी उपयोग में करते। है 
  • छिलका सहित चावल को आग पर हल्का उबालने के बाद इसे कूटकर चुरा बनाया जाता है। जिसका उपयोग खाने  में किया जाता है। चुरा का उपयोग पोहा बनाने में भी किया जाता है जो बहुत ही  है। 
  • आग पर कड़ाही रख कर उसमे बालू डालकर गरम करने के बाद उसमे भुजिया चावल डालकर इसे भुनने कर  इससे लइया तैयार किया जाता है जिसे लोगबहुत पसंद के साथ खाते है। 

भुजिया चावल चुनने का सुझाव -

  • भुजिया चावल पहले से पैक या थोक में भी मिलाते हैं।
  • पहले से पैक किये हुए चावल खरीदने से पहले, समापन के दिनांक की जांच ज़रुर करें, क्योंकि चावल के प्राकृतिक तेल की वजह से वह लंबे समय तक रखने से के कार्य में उपयोग होता है। से खराब हो सकते हैं।
  • थोक में किसी भी अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय, इस बता का ध्यान रखें कि जिस बर्तन में चावल रखें हो, वह साफ और ढ़का हुआ हो और दुकान की बिकरी भी ज़्यादा हो जिससे ताज़े चावल मिलने की संभावना हो।
  • चाहे थोक में खरीदें या पैकेट में, इस बात का ध्यान रखें कि चावल नमी और कंकड़ से मुक्त हो।

भुजिया या उसना चावल के फायदे और नुकसान -

  • भुजिया चावल सफेद चावल से बेहतर होता है, क्योंकी इसे बनाने की प्रक्रीया से स्टार्च को पहले से ही स्थिर किया जाता है।
  • मात्रा अनुसार उसनाने से (उदाहरण के तौर पर 1 कप), में कैलरी की मात्रा कम होती है, क्योंकि उसना चावल हल्का फूला हुआ होता है और अपने आकार के अनुसार इसका वजन कम होता है।
  • बच्चों में दस्त टीक करने के लिए, यह चावल बेहतरीन होता है।
  • इसमें रेशांक की मात्रा कम होने के कारण यह पचाने में आसान होता है।
  • भुजिया चावल मधुमेह  लिए वरदान से काम नहीं यह खाने के बाद इसको पचने में समय लगता है जिस वजह से रक्त में ग्लूकोस तेजी से नहीं बढ़ता। 
संग्रह करने के तरीके-
  • क्योंकि चावल में अभी भी वसा की मात्रा होती है, इसके खराब होने की ज़्यादा आशंका होती है। इस लिए, कोशिश के केवल महीने भर के लिए या ज़रुरत अनुसार उसना चावल खरीदें और उनके ताज़ा होने तक प्रयोग कर लें। लेकिन फिर भी यह इतनी जल्दी भी खराब नहीं होता है। 



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