परिवार में बार बार सब का यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आ रहा था। जब नूट्रिशनिस्ट से बात की ताकि पता चल सके भोजन में किस किस्म के बदलाव किए जाएं, तब उसने दाल बनाने के सही तरीके के बारे में बताया। दाल कभी भी यूरिक एसिड नहीं बढ़ाती अगर सही तरीके से बनाई जाए। अगर दाल के गुणों का सही फायदा उठाना है तो एक छोटी सी चीज का ध्यान रखना चाहिए।
दाल को कम से कम एक घंटा जरूर भिगोना चाहिए। इससे दाल का स्वाद अधिक बढ़ कर आता है और पकाने का समय भी कम हो जाता है।
दाल, पानी, हल्दी और नमक को कुकर में डाल कर सीधे बंद कर नहीं पकाना चाहिए। यही वह गलती है जो यूरिक एसिड को बढ़ाती है।
पहले दाल, पानी, हल्दी, लहसुन, अदरक और नमक को कुकर में डाल कर बिना ढककन के उबाल आने देना चाहिए। जब दाल में उबाल आता है तो साथ में झाग भी आती है। उस झाग को किसी बड़े चम्मच की मदद से निकाल देना चाहिए और फिर कुकर को बंद कर दाल पकानी चाहिए। यही झाग ही यूरिक एसिड को बढ़ाती है।
पहले समय में जब कूकर नहीं थे और दाल को चूल्हे पर सगली (गोल आकार का बर्तन ) में बनाया जाता था तब झाग निकाल दी जाती थी और हो सकता है अब भी कुछ घरों में इस बात का ध्यान रखा जाता हो।
दाल के छोंक में हींग और करी पत्ता का इस्तेमाल करना चाहिए। करी पत्ते का नियमित सेवन यूरिक एसिड को न केवल कम करता है बल्कि यूरिक एसिड को होने भी नहीं देता है।
आप कमेंट बॉक्स में लिख कर जरूर बताएं कि आप के यहाँ इस झाग को निकाला जाता है या नहीं।



