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गोण्डा-नौ घंटे तक रेलवे टावर पर डटी रही महिला, पुलिस-प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

 


-दूसरी बार टावर पर चढ़ने की घटना, स्थानीय स्तर पर समय रहते नहीं हो सका रेस्क्यू

- बलरामपुर से एसडीआरएफ टीम बुलानी पड़ी, शाम चार बजे सुरक्षित उतारी गई महिला व तीन बच्चे।

गोण्डा । रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार को एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ रेलवे टावर पर चढ़ गई और करीब नौ घंटे तक पुलिस व रेलवे प्रशासन उसे नीचे उतारने में सफल नहीं हो सके। अंततः बलरामपुर से बुलाई गई एसडीआरएफ टीम ने शाम करीब चार बजे रेस्क्यू अभियान चलाकर पहले बच्चों और फिर महिला को सुरक्षित नीचे उतारा। इस पूरी घटना ने जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और त्वरित रेस्क्यू क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए।

     जानकारी के अनुसार, तरबगंज थाना क्षेत्र के तिवारी बाजार निवासी गीता मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गई थीं। मुलाकात नहीं होने के बाद वह सीधे गोंडा रेलवे स्टेशन पहुंचीं और सुबह लगभग छह बजे अपने तीन बच्चों के साथ रेलवे टावर पर चढ़ गईं। सूचना मिलने पर आरपीएफ ने जिला पुलिस को अवगत कराया।

        नगर कोतवाल विदेश्वरी मणि त्रिपाठी, महिला पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद महिला को नीचे नहीं उतारा जा सका। बाद में क्षेत्राधिकारी (सिटी) आनंद राय, तरबगंज के क्षेत्राधिकारी उमेश्वर प्रताप सिंह तथा स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने महिला को समझाने के साथ उसके परिचित राम इकबाल से भी बातचीत कराई, लेकिन इसका तत्काल कोई असर नहीं हुआ।

      करीब दो घंटे बाद बलरामपुर से एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया। टीम ने लंबा रेस्क्यू अभियान चलाकर पहले तीनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा और उसके बाद महिला को भी सकुशल नीचे लाकर पुलिस के सुपुर्द किया। घटना के दौरान रेलवे स्टेशन परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही।

      उल्लेखनीय है कि इसी महिला ने एक जून को भी रघुकुल क्षेत्र में टावर पर चढ़कर हंगामा किया था, तब भी बाहरी रेस्क्यू टीम की मदद से उसे नीचे उतारा गया था। दोबारा हुई इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पूर्व की घटना से सबक लेकर निगरानी, काउंसिलिंग और सुरक्षा संबंधी प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

       इस संबंध में क्षेत्राधिकारी (सिटी) आनंद राय ने घटना के पीछे एक अधिवक्ता और दो पत्रकारों की भूमिका होने का आरोप लगाया है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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