धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण माना जाता है। तम्बाकू के धुएं में 7,000 से अधिक रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें से कई प्रकार के यौगिकों में कैंसर उत्पन्न करने का गुण होता है। तम्बाकू के धुएं में दो प्रकार के प्राथमिक कैंसरजन रसायन पाए जाते है जिनको नाइट्रोसामाइन्स और पॉलीसाइक्लिक सुगंधित हाइड्रोकार्बन के नाम से जाना जाता है। फेफड़ों के कैंसर के सभी मामलों में धूम्रपान ही मुख्य कारण नहीं होता है। प्रत्येक वर्ष, 170,000से अधिक अमेरिकावासियों में फेफड़ों के कैंसर का विकास देखा गया हैं,जिसमें से लगभग दस प्रतिशत लोगो में फेफड़ों के कैंसर का कारण धूम्रपान करना नहीं होता है।
फेफड़ों के कैंसर का कारण :
धूम्रपान : फेफड़ों के कैंसर का खतरा आप कितने समय से धूम्रपान कर रहें है तथा आपके द्वारा पी गयी सिगरेट की संख्या के साथ बढ़ता है। काफी समय तक धूम्रपान करने के बाद आप धूम्रपान छोड़ते हैं, तो ऐसी अवस्था में भी आप फेफड़ों के कैंसर के विकास की संभावनाओं को काफी कम कर सकते हैं।
पैसिव धूम्रपान द्वारा : धूम्रपान करने वालों के साथ रहने वाले लोगो में फेफड़ों के कैंसर होने का खतरा 24% तक हो सकता है।
रेडॉन: रेडॉन एक्सपोजर फेफड़ों के कैंसर का दूसरा प्रमुख कारण है। रेडॉन एक रंगहीन, गंध रहित रेडियोधर्मी गैस है जो स्वाभाविक रूप से मिट्टी में मौजूद होती है। यह मिट्टी के माध्यम से दरारों द्वारा इमारतों में प्रवेश करती है। धूम्रपान के साथ संयुक्त रेडॉन के एक्सपोजर से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
पारिवारिक इतिहास : आनुवंशिक संवेदनशीलता जैसे अन्य कारक, फेफड़े के कैंसर का कारण हो सकते हैं। फेफड़ों के कैंसर का पारिवारिक इतिहास जैसे माता-पिता, भाई- बहन आदि के फेफड़े के कैंसर से ग्रषित होने पर परिवार के और लोगो में इस बीमारी से ग्रषित होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।
खतरनाक रसायन: कुछ खतरनाक रसायनों के एक्सपोजर से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। एस्बेस्टोस, यूरेनियम, आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, निकल और कुछ पेट्रोलियम उत्पादों जैसी सामग्री के साथ काम करना विशेष रूप से खतरनाक होता है। अगर आपको लगता है कि आप अपने काम पर खतरनाक रसायनों में सांस ले सकते हैं, तो अपने नियोक्ता और अपने डॉक्टर से बात करें ताकि आप खुद को सुरक्षित रख सकें।
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