गोण्डा। ढेमवा घाट पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सरकारी मोटर बोट के बावजूद प्राइवेट नावों के संचालन का मामला सामने आया है। घाट पर लगे सूचना बोर्ड पर सरकारी बोट से यात्रियों को निःशुल्क सुविधा दिए जाने तथा प्राइवेट बोट के संचालन को निषिद्ध किए जाने की बात स्पष्ट रूप से लिखी गई है। इसके बावजूद घाट पर प्राइवेट नावों के संचालन और यात्रियों से किराया वसूले जाने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घाट पर सरकारी बोट उपलब्ध होने के बावजूद कई बार यात्रियों को प्राइवेट नावों का सहारा लेना पड़ता है। आरोप है कि दोपहर करीब एक बजे से दो बजे के बीच सरकारी बोटों का संचालन लंच के नाम पर रोक दिया जाता है। इस दौरान घाट पर आने-जाने वाले यात्रियों को मजबूरी में प्राइवेट नावों से यात्रा करनी पड़ती है।
घाट पर लगे बोर्ड के नियम संख्या 6 और 8 में यात्रियों की सुविधा के लिए सरकारी बोट को निःशुल्क बताए जाने और प्राइवेट बोट के संचालन को निषिद्ध किए जाने का उल्लेख है। ऐसे में नियमों के विपरीत प्राइवेट नावों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जाता है कि ढेमवा घाट पर बोट के सुचारू संचालन के लिए शासन स्तर से 18 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वहीं, स्थानीय सांसद करण भूषण सिंह द्वारा भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से घाट की व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा को लेकर बातचीत किए जाने की बात सामने आई है।
इसके बावजूद यदि सरकारी बोट किनारे खड़ी रहती हैं और यात्रियों को प्राइवेट नावों से भुगतान कर यात्रा करनी पड़ती है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कराए और बोर्ड पर निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे, ताकि सरकारी धन से उपलब्ध कराई गई सुविधा का लाभ आम जनता को मिल सके।
अब सवाल यह है कि जब सरकारी बोट निःशुल्क सेवा के लिए उपलब्ध हैं और प्राइवेट बोट के संचालन पर रोक का नियम स्पष्ट रूप से दर्ज है, तो नियमों के बावजूद प्राइवेट नावें कैसे संचालित हो रही हैं? प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

