गोण्डा। खून का काला कारोबार करने के आरोपी विजय कुमार को भी न्यायालय से राहत नहीं मिली। एडीजे/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) नित्या पांडेय की अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपी 12 जुलाई से मंडलीय कारागार में बंद है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी विजय कुमार अपने साथियों के साथ ब्लड बैग के लेबल से छेड़छाड़ करके महंगे दामों पर रक्त उपलब्ध कराते थे। इससे पहले 12 अगस्त को सह-आरोपी साहेब आलम की जमानत अर्जी भी खारिज हो चुकी है। गंभीर आरोपों और केस डायरी में दर्ज तथ्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत के लिए अपर्याप्त आधार मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामला बीते 12 जुलाई को कोतवाली नगर पुलिस ने अवैध रूप से रक्त की खरीद-फरोख्त करने वाले आठ आरोपियों गोंडा के मुख्तार, शिवम शुक्ला, विजय कुमार, साहबे आलम, ऋषिकेश अवस्थी, बृजेश शुक्ला के साथ बलरामपुर के आदर्श कालोनी निवासी अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके कब्जे से 253 कूटरचित ब्लड बैंक कार्ड, 10 डिस्पोजल सिरिंज और नौ मोबाइल फोन बरामद किए थे। पुलिस मुताबिक ग्राम परसा निवासी वली मोहम्मद की पत्नी चार जुलाई को अस्पताल में भर्ती थी। डॉक्टर ने खून की जरूरत बताई तो अस्पताल के बाहर आरोपी ऋषिकेश अवस्थी ने 12,500 रुपये में रक्त देने का सौदा किया। वली मोहम्मद ने 10,000 रुपये ऑनलाइन और 2,500 नगद दिए। लेकिन डॉक्टरों ने जांच में उस रक्त को संदिग्ध बताकर चढ़ाने से मना कर दिया। जब वली ने पैसे मांगे तो आरोपियों ने न रक्त दिया न पैसा वापस किया। इसी तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ था। यही नहीं मनकापुर कोतवाली क्षेत्र की महिला ने बताया कि नौ वर्षीय बेटी के इलाज के लिए गिरोह ने उसे एक्सपायरी रक्त उपलब्ध कराया था, जिससे बच्ची की मौत हो गई। इस संबंध में भी थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज है।

