-कमेटी में दो दो अध्यक्ष महामंत्री।
करनैलगंज-गोण्डा। नगर की ऐतिहासिक रामलीला इस समय विवादों के घेरे में है मंगलवार को वार्षिक बैठक के दिन से ही जो विवाद उत्पन्न हुआ हुआ था वह कम होने का नाम नहीं ले रहा है बताते चलें कि मंगलवार को बैठक में चुनाव में जैसे ही अध्यक्ष पद के लिए अरमान पुरवार का नाम प्रस्तावित हुआ दूसरे पक्ष के लोग काफी शोर शराबा करने लगे और देखते ही देखते मीटिंग में काफी हंगामा हो गया। जिसके कारण कमेटी के संरक्षक अरुण कुमार बैठक से चले गए। अध्यक्ष मोहित पांडे और महामंत्री कामतानाथ वर्मा कार्रवाई रजिस्टर लेकर चले गए वहीं दूसरे संरक्षक हरि कुमार ने नए अध्यक्ष पद पर अरमान पुरवार महामंत्री के पद पर अप्पू मोदनवाल की घोषणा की और वहीं से मीटिंग समाप्त हो गई। दूसरे दिन दूसरे संरक्षक अरुण कुमार व महामंत्री कामतानाथ वर्मा ने बैठक को अवैध बताते हुए कहा कि मीटिंग की कार्रवाई स्थगित की जाती है। अगली बैठक में पदाधिकारी का चयन किया जाएगा। उसके पश्चात मोहित कुमार पांडे कामतानाथ वर्मा ने वार्ता करते हुए कहा संरक्षक विश्वनाथ शाह ने पूर्व पदाधिकारियों और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय अनियमितता व दुकानों के किराये की रकम में कथित हेराफेरी, रामलीला भवन और नगर के मंदिरों की भूमि-संपत्तियों के प्रबंधन में अनियमितता तथा अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे के आरोपों के बाद कमेटी से जुड़े लोगों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मोहित पाण्डेय का आरोप है कि रामलीला कमेटी की दुकानों से मिलने वाले किराये की रकम के हिसाब-किताब में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने कमेटी की भूमि पर कथित अवैध निर्माण और कब्जे का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार गेट के सामने दुकान और बूचड़खाना बनाए जाने के साथ तहसील रोड स्थित गेट के पास एक दुकान के नाम पर अतिरिक्त निर्माण कराया गया। अध्यक्ष ने नगर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि रामजी लाल मोदनवाल पर तमाम आरोप लगाए उन्होंने रामलीला की भूमि से जुड़े मामले में पूर्व महामंत्री समेत कुछ लोगों पर अंजुमन सज्जादिया कमेटी से कथित साठगांठ कर दुकानदारों से रकम की बंदरबांट का आरोप लगाया। नरसिंह द्वार के सामने एक दुकान से 1.50 लाख रुपये की कथित वसूली और शेष रकम मांगने पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। एक पदाधिकारी पर चंदा मांगने गए लोगों के साथ अभद्र व्यवहार और दुकान के किराये में अनियमितता का आरोप है। वहीं, पूर्व अध्यक्ष पर रामलीला भवन पर लगाए गए टावर के किराये की वर्षों से वसूली किए जाने सहित अन्य सवाल उठाए गए हैं। मोहित पाण्डेय का कहना है कि रामलीला धार्मिक और ऐतिहासिक संस्था है, इसलिए इसकी संपत्तियों और धन का संचालन पूरी पारदर्शिता से होना चाहिए। उनका दावा है कि रामलीला की भूमि के कागजात किसी एक खानदान के नाम नहीं होने के बावजूद वर्षों से उस पर अधिकार जताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रामलीला नगर और ग्रामीण क्षेत्र के सभी लोगों की आस्था से जुड़ी है और इसके आयोजन में लोगों ने भूमि समेत अन्य संसाधनों का सहयोग व दान दिया है। अध्यक्ष ने कमेटी के संरक्षकों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से फिलहाल कोई पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि भी नहीं हुई है। संबंधित लोगों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले में कमेटी के संरक्षकों का कहना है कि शीघ्र ही मीटिंग बुलाई जाएगी सारे बिंदुओं की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी मामला कुछ भी हो लेकिन जिस प्रकार रामलीला कमेटी में आरोपी का दौर चल रहा है और संरक्षक लोग मौन हैं जिससे आम जनमानस में चर्चा का विषय है।

