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गोण्डा-गोण्डा की धरती का अमर रणबांकुरा: बाबू द्वारिका सिंह की 96वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा देशभक्ति का सैलाब

 




-अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बुलंद की थी बगावत की आवाज, आज भी खजुरी की माटी में जिंदा है शहीद का शौर्य।

गोण्डा । देश की आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले गोण्डा की धरती के अमर सेनानी बाबू द्वारिका सिंह की 96वीं पुण्यतिथि बुधवार को छपिया क्षेत्र के खजुरी स्थित अमर शहीद बाबू द्वारिका सिंह स्मृति उपवन में श्रद्धा, गौरव और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण के साथ उपस्थित लोगों ने उस वीर सपूत को नमन किया, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने के बजाय संघर्ष और बलिदान का रास्ता चुना।

       बाबू द्वारिका सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि गोण्डा के स्वतंत्रता आंदोलन की उस गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं, जिसमें खजुरी गांव और आसपास के रणबांकुरों ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में खजुरी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव और ‘सेनानी तीर्थ’ के रूप में उल्लेखित किया गया है। बाबू द्वारिका सिंह के साथ बब्बन सिंह, उमराव सिंह, मथुरा सिंह समेत अनेक सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

1922 में किसान सम्मेलन से जगाई आंदोलन की अलख

इतिहास के पन्नों में दर्ज विवरण के अनुसार मार्च 1922 में सिसई रानीपुर में बाबू द्वारिका सिंह, ठाकुर बब्बन सिंह, उमराव सिंह और मथुरा सिंह के सहयोग से विशाल कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित हुआ था। यह आयोजन उस दौर में ग्रामीण समाज को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजागरण में खजुरी के इन सेनानियों की भूमिका ने क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना को मजबूत किया।

      आज भी खजुरी में बाबू द्वारिका सिंह की स्मृति केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं है। उनके नाम पर विद्यालय संचालित है और वर्ष 2024 में उनके नाम से बने स्मारक स्मृति उपवन का लोकार्पण भी किया गया था। स्मारक का उद्देश्य आजादी के संघर्ष में उनके योगदान और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

पुण्यतिथि पर श्रद्धा से झुके सिर

कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीद बाबू द्वारिका सिंह स्मारक समिति के अध्यक्ष एवं प्रधानाचार्य संत बहादुर सिंह के नेतृत्व में हुई। अमर सेनानी द्वारिका सिंह इंटर कॉलेज खजुरी के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा छात्र-छात्राओं ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रगान के साथ वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो उठा।

         प्रधानाचार्य संत बहादुर सिंह ने विद्यार्थियों को बाबू द्वारिका सिंह के संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति की गाथा सुनाते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने विद्यार्थियों से शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।

      कार्यक्रम में श्रद्धांजलि एवं माल्यार्पण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। संदेश स्पष्ट था—जिस माटी ने आजादी के लिए अपने सपूत दिए, उस माटी और उसकी विरासत को संजोना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है।

     इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक रुद्र बहादुर सिंह ‘हेमू भैया’, अजय सिंह ‘अनमोल’, सत्येन्द्र प्रताप सिंह, चन्द्र मोहन सिंह, सालिक राम, शिवमूर्ति सिंह, रण विजय सिंह, दीपक सिंह, शिवेन्द्र सिंह, रूपा देवी, अतुल सिंह, राजिनी देवी, सीमा देवी, शैलेश सिंह समेत विद्यालय का समस्त स्टाफ, छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

 है।

       आजादी की लड़ाई में जिन रणबांकुरों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह नहीं की, उनकी स्मृतियों की अनदेखी इतिहास के साथ अन्याय होगी। बाबू द्वारिका सिंह की 96वीं पुण्यतिथि पर सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि उनकी शहादत और संघर्ष की कहानी नई पीढ़ी तक पहुंचे और उनकी स्मृतियों को सम्मान के साथ संरक्षित किया जाए।

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