-गोवंश बरामदगी के बाद चौकी घेराव करने वाले सात नामजद, 25-30 अज्ञात पर केस, शिकायतकर्ताओं की तहरीर पर कार्रवाई न होने का आरोप।
गोण्डा। छपिया थाना क्षेत्र के हथियागढ़ पुलिस चौकी पर गोवंश को कथित रूप से क्रूरता के साथ ले जाए जाने के विरोध में प्रदर्शन करने वाले सात नामजद समेत करीब तीन दर्जन लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदर्शनकारियों और हिन्दू संगठनों का आरोप है कि जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी, उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जबकि विरोध दर्ज कराने वालों पर ही मुकदमा कायम कर दिया गया।
मामला बुधवार शाम का है, जब रेहार टपाकी स्थित बुटहा ग्राम पंचायत के पास ग्रामीणों ने दो व्यक्तियों को दो गोवंशों को कथित रूप से पीटते हुए ले जाते देखा। ग्रामीणों को संदेह हुआ कि गोवंशों को वध के लिए ले जाया जा रहा है। विरोध होने पर दोनों व्यक्ति गोवंश छोड़कर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना पर पुलिस पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने प्रारंभ में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और इसे सामान्य पशु चराने का मामला बताया।
इससे आक्रोशित ग्रामीणों तथा विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हथियागढ़ पुलिस चौकी का घेराव कर मसकनवां-गौराचौकी मार्ग पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देर रात तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान सीओ मनकापुर, तहसीलदार तथा तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों के आश्वासन के बाद गोरक्षा प्रमुख सुरेश सोनी ने दो व्यक्तियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। साथ ही गौवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर एक ज्ञापन भी प्रशासन को सौंपा गया।
हालांकि अगले दिन पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल गोरक्षा प्रमुख सुरेश सोनी, मंगल निषाद, अरविंद शर्मा, संचित कश्यप, सूरज तिवारी, अनूप शुक्ला और पिंटू मौर्य समेत सात लोगों को नामजद तथा 25 से 30 अज्ञात लोगों के विरुद्ध सड़क जाम और यातायात बाधित करने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
विवाद यहीं नहीं थमा, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी ओर से दी गई नामजद तहरीर पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने गांव के चौकीदार की तहरीर के आधार पर अलग व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसे लेकर हिन्दू संगठनों ने पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
गोरक्षा प्रमुख सुरेश सोनी का आरोप है कि शांतिपूर्ण वार्ता के बाद धरना समाप्त होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा दर्ज किया जाना न्याय की मांग करने वालों को निशाना बनाने जैसा है। उनका कहना है कि इससे गौवंश संरक्षण के लिए आवाज उठाने वालों में असंतोष व्याप्त है।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि हाल के महीनों में छपिया क्षेत्र में हुए कई आंदोलनों में पहले वार्ता के जरिए प्रदर्शन समाप्त कराए गए और बाद में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए गए। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि संवाद के बाद सहमति बन चुकी थी तो बाद में मुकदमे दर्ज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था और यातायात बाधित होने की स्थिति में विधिक कार्रवाई की गई है।
अब पूरे मामले में लोगों की नजर इस बात पर है कि गोवंश प्रकरण की मूल शिकायत और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे-दोनों की निष्पक्ष जांच किस प्रकार आगे बढ़ती है।

