गोण्डा । देवीपाटन परिक्षेत्र के डीआईजी अशोक कुमार शुक्ल जनसुनवाई के दौरान एक्शन मोड में नजर आए। जमीन विवाद से जुड़े मामलों में पुलिस की लापरवाही और फरियादियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही और पीड़ितों को थाने से लौटाने जैसी प्रवृत्ति अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ी तो सीधे थानेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान वजीरगंज थाना क्षेत्र का एक मामला सामने आया, जिसमें पिछड़ा वर्ग के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसे जमीन दिलाने के नाम पर अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम बैनामा कराया गया। आवश्यक अनुमति मिलने के बाद भी आरोपितों ने जमीन देने से इनकार कर दिया। पीड़ित का आरोप था कि उसने थाना और क्षेत्राधिकारी कार्यालय में कई बार शिकायत की, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई और उसे थाने से भगा दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी ने तत्काल वजीरगंज थाना प्रभारी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। शिकायत में एक होमगार्ड जवान का भी नाम सामने आया है। डीआईजी ने सख्त लहजे में कहा कि यदि मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो संबंधित थाना प्रभारी सहित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध स्वयं कार्रवाई कराएंगे।
उन्होंने कहा, "यदि पुलिस किसी की मदद नहीं कर सकती तो कम से कम उसे मानसिक पीड़ा भी न दे। फरियादियों से सम्मानजनक व्यवहार हर पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी है। यदि थाने पर आने वाले व्यक्ति को एक गिलास पानी तक नहीं पिला सकते तो कम से कम उसे परिसर से भगाने की गलती न करें।"
डीआईजी ने कहा कि हाल के दिनों में थानेदारों के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कई स्थानों पर पुलिस व्यवस्था अपेक्षित ढंग से काम नहीं कर रही है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को चेतावनी दी कि जनसुनवाई में लापरवाही, फरियादियों से दुर्व्यवहार और शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली पाए जाने पर सीधे निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डीआईजी के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि अब जनशिकायतों के निस्तारण और थानों में फरियादियों के साथ व्यवहार को लेकर जवाबदेही और बढ़ेगी।

