-संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नही, कब्जा।
गोण्डा। परसपुर-धौरहरा बांध की बेशकीमती सरकारी भूमि पर कर्नलगंज बसस्टॉप से बाबागंज के बीच तीन किलोमीटर तक बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि दबंगों ने बांध को कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त कर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन पर जबरन कब्जा कर मकान और दुकानें खड़ी कर दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन अवैध निर्माणों में बने कमरों को खुलेआम 1 से 3 लाख रुपये पगड़ी लेकर और 4 से 6 हजार रुपये मासिक किराये पर देकर मोटी अवैध वसूली की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी भूमि पर बसे इन अवैध कब्जेदारों को संबंधित विभागों द्वारा वर्षों से गृहकर और जलकर के दायरे में लाकर वैधता का रूप दिया जा रहा है।
मामला यहीं नहीं रुकता, इन कब्जों को और मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराए गए हैं, जिससे फर्जी मतदान की आशंका भी गहराती जा रही है। साथ ही, राशन कार्ड, विद्युत कनेक्शन, और यहां तक कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी कुछ लोगों को दे दिया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी अवैध भूमि पर बने विद्यालय को मान्यता, निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम को लाइसेंस तक जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा काफी जमीन पर प्लाटिंग कर आवासीय कॉलोनी विकसित कर दी गई है, जहां खुलेआम खरीद-फरोख्त का खेल जारी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। वर्षों से जारी इस अवैध कब्जे और सुविधाओं की आपूर्ति ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी जमीन पर यह अवैध साम्राज्य कब तक फलता-फूलता रहेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर मिलीभगत का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

