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गोण्डा-ढेमवाघाट बना सरकारी घाट, 50 हजार ग्रामीणों को बड़ी राहत

 


-अब बरसात में सरकार चलाएगी मोटरबोट, बाकी समय बनेगा पीपा पुल; ₹230 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा

नवाबगंज-गोण्डा। सरयू नदी के तेज बहाव से ढेमवाघाट पुल का संपर्क मार्ग कट जाने के कारण वर्षों से आवागमन की परेशानी झेल रहे गोंडा और अयोध्या के 50 हजार से अधिक ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ढेमवाघाट का प्रांतीयकरण करते हुए इसे सरकारी घाट घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब बारिश के मौसम में तीन माह तक सरकार अपने खर्च पर नदी के दोनों किनारों पर दो-दो मोटरबोट संचालित कराएगी, जबकि शेष अवधि में हर वर्ष पीपा पुल का निर्माण कराया जाएगा।

      विभाग ने इस परियोजना को स्थायी स्वरूप देने के लिए 230 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब तक इस घाट पर हर साल अलग से अनुमति लेकर कार्य कराना पड़ता था, लेकिन सरकारी घाट घोषित होने के बाद व्यवस्थाएं नियमित और आसान हो जाएंगी।

2016 में बना पुल, 2022 की बाढ़ ने तोड़ा संपर्क

अयोध्या-लखनऊ हाईवे को नवाबगंज से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में ढेमवाघाट पर सरयू नदी पर पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्ष 2022 में सरयू के भीषण कटान और बाढ़ के चलते पुल तक पहुंचने वाला संपर्क मार्ग कई स्थानों से बह गया। इसके बाद नदी का रुख बदलने से सड़क का पुनर्निर्माण भी लगातार बाधित होता रहा।

आईआईटी विशेषज्ञों ने सुझाया स्थायी समाधान

कटान की समस्या के समाधान के लिए आईआईटी के विशेषज्ञों की राय ली गई। विशेषज्ञों ने नदी के दोनों किनारों पर दो-दो गाइड बंध बनाने की सलाह दी, ताकि भविष्य में कटान रोका जा सके और संपर्क मार्ग सुरक्षित रहे।

पीडब्ल्यूडी का दावा

लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता योगेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को देखते हुए ढेमवाघाट का प्रांतीयकरण किया गया है। अब बरसात में मोटरबोट और अन्य समय में पीपा पुल की व्यवस्था से लोगों का आवागमन सुगम होगा। वहीं स्थायी समाधान के लिए ₹230 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।

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