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गोण्डा- 3 करोड़ 60 लाख रुपए गबन में 69 अधिकारी व कर्मचारी नामजद

 


गोण्डा। इंडियन बैंक की मुख्य शाखा में वर्ष 1997 में 2020 के बीच हुए करीब ₹3,60,16,000ये के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। इस संबध में इंडियन बैंक के सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव इंडियन बैंक इम्पलाइज क्रेडिट कार्पोरेटिव सोसाइटी ने बैंक के 69 अधिकारियों और कर्मचारियों ग्राहकों के खिलाफ गोंडा के नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। 

इन 69 आरोपियों ने 23 वर्षों की इस अवधि के दौरान गोंडा इंडियन बैंक की मुख्य शाखा में तैनात रहे बैंक मैनेजर कैशियर सहित विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। सचिव ने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने अपने पद और कर्तव्यों का दुरुपयोग करते हुए मनमाने ढंग से तीन करोड़ 60 लाख 16 हजार रुपये का गबन किया था। इससे पहले, विभागीय कार्रवाई के दौरान इन सभी आरोपियों ने गबन की गई राशि को ब्याज सहित वापस जमा करने का लिखित अनुबंध दिया था। हालांकि उन्होंने इस अनुबंध का उल्लंघन करते हुए टालमटोल की और घोटाले की रकम जमा नहीं की। सचिव ने बताया कि घोटाले की यह रकम अब बढ़कर चार करोड़ 90 लाख 8373 रुपये हो गई है। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता और अपराध से संबंधित मामला है। नगर कोतवाली पुलिस ने सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर सभी 69 नामजद इंडियन बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक सोनू कुमार को सौंपी गई है। गोंडा नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने जानकारी दी कि मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है।साक्ष्य संकलन की कार्रवाई पूरी होने के बाद इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गोंडा नगर कोतवाली पुलिस और विवेचक सोनू कुमार द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी।यह धनराशि पहले तीन करोड़ 60 लाख रुपए थी लेकिन अभी चार करोड़ 90 लाख रुपए हो गई है ।सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव से इस पूरे घोटाले को लेकर के साक्ष्य मांगा गया है।

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लखनऊ-6 महीना बीतते ही टूट कर गिरने लगा पोल

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 लखनऊ।  उत्तर प्रदेश सरकार जहां यातायात को सुदृढ़ करने को  लेकर लगातार नए-नए तरीके अपना रहा है, उसी के क्रम में सड़कों पर उजाला हो इसके लिए सरकार द्वारा विशेष ध्यान दें काम कराया जाता है लेकिन सड़क के रखवाले ध्यान नहीं दिए।लखनऊ में ए एन एच आई द्वारा 6 महीना पहले हाई कोर्ट लखनऊ के सामने तीन पुलों पर मटियारी, कामता ,चिनहट, 4.30 करोड़ रुपए लागत से मार्ग प्रकाश कार्य कराया था। ईगल इंटरप्राइजेज ने तीनों पुलों पर उत्कर्ष कंपनी के पोल लगाए थे लेकिन नतीजा यह हुआ लगाने के 6 महीने बीतते ही पोल अपने आप टूटकर गिरने लगे, और तो और विभाग नजरअंदाज कर रहा है। ऐसे में यदि प्रदेश की राजधानी का ये हाल है तो जनपदों में कराए गए कामों का क्या हाल होगा यह एक सोचनीय विषय है।



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8 साल लिव-इन-रिलेशन के नाम पर किया शारीरिक शोषण, कई बार कराया दलित युवती का गर्भपात

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शादी के बंधन में बंधे बिना पति-पत्नी की तरह रहने वाले यानी लिव-इन रिलेशन में रहने का चलन तेजी से बढ़ा है। हाल ही में हुए श्रद्धा हत्याकांड के बाद भी लिव-इन रिलेशन को लेकर पूरे देश में काफी चर्चाएं भी हुई थी। इसी बीच उत्तर प्रदेश के कौशांबी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमे एक युवती ने पुलिस थाने पहुंच कर गुहार लगाई है कि 'साहब मेरी शादी करवा दो।' उसका कहना है कि पिछले 8 सालों से वह अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशन में रह रही है और कई बार गर्भवती भी हो चुकी है।

युवक ने कई बार कराया गर्भपात
दरअसल, कौशांबी के सैनी के एक गांव की रहने वाली युवती का पडोसी गांव के युवक से 8 सालो से प्रेम संबंध चल रहा था। पीड़ित युवती का आरोप है कि युवक ने उससे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाये। गर्भवती होने पर आरोपी युवक ने गर्भपात करा दिया। 10 नवम्बर की शाम जब वह उसके घर पहुंची तो आरोपी युवक व् उसके चाचा ने उसे मारपीट कर भगा दिया। युवक अब उससे शादी करने की बात से मुकर गया है। पीड़ित ने कई बार प्रेमी युवक से शादी करने की गुजारिश की लेकिन वह तैयार नहीं हुआ। पीड़ित ने मामले की शिकायत थाना पुलिस से कर दी है और आरोपी युवक से शादी कराये जाने की मांग की है। पीड़ित युवती के मुताबिक आरोपी युवक उससे शादी नहीं करना चाहता। वह कहता है कि चाहे नाक रगड़ डालो मै तुमसे शादी नहीं करुगा।

थाना प्रभारी सैनी भुवनेश चौबे ने बताया, एक दलित युवती ने पडोसी गांव के युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है। सोमवार को थाना पुलिस को शिकायती पत्र देकर आरोपी युवक से शादी करवाए जाने की मांग की है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामले में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच कर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।


भारत में लिव-इन रिलेशनशिप भारत में लिव-इन को बेहद लूज रिलेशनशिप माना जाता है। शादीशुदा महिला को जितने कानूनी अधिकार मिलते हैं, उतने लिव-इन में रहने वाली महिला को नहीं मिल पाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसको कानूनी मान्यता दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लिव-इन रिलेश न अपराध है और न ही पाप। शादी करने या न करने और सेक्सुअल रिलेशनशिप बनाने का फैसला पूरी तरह से निजी है। लिहाजा 18 की उम्र पूरी कर चुकी लड़की और 21 की उम पूरी कर चुका लड़का लिव-इन में रह सकते हैं। शीर्ष कोर्ट ने लिव-इन को कानूनी कवच जरूर पहना दिया है, लेकिन लिव-इन पार्टनर को आज भी वो पूरे कानूनी अधिकार नहीं मिलते हैं, जो एक शादीशुदा महिला को अपने पति की संपत्ति में मिलते हैं। इसके चलते कई बार महिला लिव-इन पार्टनर को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

लिव-इन-रिलेशन के नाम पर 'योन शोषण' यौन शोषण (हिंसा) के अधिकांश मामले, अनियंत्रित काम-वासना को संतुष्ट करने के लिए, बेहद सावधानी से रचे होते हैं। कामुक फिल्मी छवियों का एहसास और उद्दाम 'फैंटेसी' का एक मात्र उद्देश्य, महिलाओं पर हावी होना है। दरअसल, वास्तविक बलात्कार या 'डेट रेप' करने से पहले, बलात्कारी के दिमाग में नशे की तरह, कई बार इसकी 'रिहर्सल' की गई होती है। मगर प्राय पीड़िता को ही सदा दोषी ठहराया और अपमानित किया जाता है। परिजनों द्वारा कथित 'खानदान की इज्ज़त' के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है।

शादी की आड़ में ‘यौन शोषण' शादी का झांसा देकर किसी लड़की के साथ शारीरिक रिश्ते बनाना और बाद में शादी से मना करना, बलात्कार के दायरे में आता है। वह भी तब, जब लड़के का लड़की से शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा न हो। हम इसे 'शादी की आड़ में 'यौन शोषण' भी कह सकते हैं। अधिकतर लड़के शादी का झांसा देकर, शारीरिक रिश्ते बनाते हैं और तब तक बनाते रहते हैं, जब तक लड़की गर्भवती नहीं हो जाती। कुछ समय बाद, गर्भपात कराना भी मुश्किल हो जाता है और अंतत: मामला परिवार और पड़ोसियों की नजर में आ ही जाता हैं। बाद के अधिकतर मामलों में, ऐसे दोषियों के खिलाफ मामले दर्ज होते हैं। रोज़ हो रहे हैं।

15 से 20 साल लग जाते हैं न्याय मिलने में विवाह करने संबंधी वायदे के साथ सेक्स करना और गर्भवती होने पर पुलिस रिपोर्ट वर्ग, धर्म, क्षेत्र, आयु या सामाजिक स्तर संबंधी ज्यादातर मामले एक जैसे होने पर आदमी लड़की पर सेक्स के लिए दबाव बनाता है, विवाह करने का भरोसा देकर गर्भवती करता है, परिवार और पुलिस का रिपोर्ट के संदर्भ में बरी होने, संदेह का लाभ पाने या उच्च अदालत में अपील और इस तरह अंतिम न्याय मिलने में पांच से बीस साल लगना। ये वे मामले हैं, जो समूचे मामलों की नजीर भर हैं।

सहमति और तथ्यों के उलझाव में उलझे हुए हैं फैसले इस खास संदर्भ में कानूनी राय और फैसले सीधे-सीधे बंटे हुए हैं। सहमति और तथ्यों के उलझाव में उलझे हुए हैं, क्योंकि कानून पूरी तरह पारदर्शी नहीं है और फैसले हर मामले के तथ्यों और हालातों के आधार पर होते हैं। इसके मुताबिक, विवाह के झूठे वायदे को लेकर पति-पत्नी जैसा शारीरिक रिश्ता बनाने संबंधी सहमति हासिल करना कानूनी नजरिये से सहमति ही नहीं है। ऐसे मामलों में सबसे कठिन काम यह साबित करना होता है कि आरोपी का शुरू से ही पीड़ित लड़की से विवाह करने का कोई इरादा नहीं था। वह कह सकता है कि मैं विवाह करना तो चाहता हूं लेकिन मेरा माता-पिता, धर्म, जाति, 'खाप' आदि इसके लिए अनुमति नहीं देते। औरत के खिलाफ अपराध संबंधी किंतु-परंतु को लेकर जब तक कानून में संशोधन नहीं होता, न्याय से जुड़े ऐसे कानूनी पेंच यूं ही कायम रहेंगे।





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अब यूपी की सड़कों पे नहीं चलेगी ई-रिक्शा, सरकार ने जारी किया आदेश, जानें क्या है पूरा मामला

 
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लखनऊ : देश भर में ज्यादा तर लोग लोकल सफर करने के लिए रिक्शा का इस्तेमाल करते है। ताकि उनका समय और पैसा बचे। रिक्शा आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

लेकिन अब जनता के लिए ये सुविधा जल्द ही बंद होने जा रही है। जिसकी जानकारी खुद प्रदेश के सीएम द्वारा दी गई है। रिक्शा की वजह से दिन बा दिन बढ़ रहे सड़क हादसे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

मुख्य मार्गों से रिक्शा हटाए जाएंगे
Now e-rickshaws will not run on the roads ; बता दें कि यह सुविधा पूरे यूपी में बंद की जा रही है। ई-रिक्शा की वजह से दिन बा दिन हो रहे हादसे को देखते हुए मुख्य मार्गों से रिक्शा हटाए जाएंगे। जिसको लेकर शासन की ओर से जिलाधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं। जिसमे कहा गया है ई-रिक्शा हादसों की वजह बन रहे हैं. इस वजह से ई रिक्शा अब मुख्य मार्गों से हटाए जाएंगे. इसके लिए प्रमुख सचिव परिवहन व आयुक्त ने दिशा-निर्देश दिए हैं।

फीडर रूट तय करने के लिए तीन महीने का समय
Now e-rickshaws will not run on the roads ; हादसों को कम करने के लिए शहरों के मुख्य मार्गों से ई-रिक्शा हटाया जाना बेहद जरूरी है। तो वही लोगों को देखते हुए परिवहन आयुक्त ने मुख्य मार्गों से ई-रिक्शा हटाने के साथ ही फीडर रूट तय करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है। ताकि लोगों को काम काज में आने जाने में किसी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही परिवहन आयुक्त ने मुख्य मार्गों को जोड़ने वाली रोड को फीडर रूट नाम दिया है. इनमें हर रूट पर यात्रियों का लोड फैक्टर तय करते हुए वाहनों की संख्या तय करनी होती है

योगी सरकार का बड़ा फैसला
योगी सरकार के द्वारा जारी आदेश के अनुसार शहर की मुख्य सड़कों पर अब ई-रिक्शा नहीं चलेंगे. ई-रिक्शा की एंट्री शहरों की मुख्य सड़कों पर बैन रहेगी. योगी सरकार का यह आदेश लखनऊ समेत पूरे यूपी के लिए जारी किया गया है. ई-रिक्शा की एंट्री शहरों के मुख्य मार्गों पर नहीं होने से ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिल सकती है और शहरों में हो रहे सड़क हादसों में भी कमी आएगी 





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गोण्डा-मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सम्मानित किया, के एल इंटर कालेज के एन सी सी कैडेट कोर के छात्रों को

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गोण्डा। गोरखपुर एन सी सी ग्रुप की तरफ से गाजियाबाद में इंटर ग्रुप कंप्टीशन में प्रतिभाग करने वाले कैडेटों में कन्हैया लाल इंटर कालेज कर्नल गंज गोंडा की एन सी सी कंपनी के अंडर ऑफिसर तैय्यबा परवीन तथा अंडर ऑफिसर तुफैल अहमद को गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बेस्ट कैडेट अवार्ड से सम्मानित किया। गोरखपुर एन सी सी ग्रुप की तरफ से 102 यू पी बटालियन  महराजगंज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य मंत्री जी द्वारा सम्मानित होने पर 48वी बटालियन गोंडा के कमान अधिकारी कर्नल सुनील कपूर सहित बटालियन परिवार एवम विद्यालय के प्रधानाचार्य दुर्गा प्रसाद मौर्य तथा कंपनी कमांडर मेजर राजाराम सहित विद्यालय परिवार ने अत्यंत हर्ष व्यक्त किया है। मेजर राजाराम ने बताया कि इन दोनों कैडेटों ने अथक परिश्रम करके 6 कैंपों में को पार करते हुए गोरखपुर ग्रुप मेंंअपने कालेज का नाम रोशन किया है।


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गोण्डा-नशे में धुत उपश्रमायुक्त मैडम ने जमकर काटा हंगामा, वीडियो हुआ वायरल

 

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गोण्डा। भले ही योगी सरकार नौकरशाहों पर अनुशासन का शिकंजा कसने का दावा कर रही हो लेकिन कुछ अफसरों पर इसका थोड़ा भी प्रभाव दिखना तो दूर बल्कि उल्टे सार्वजनिक रूप से नशा का सेवन करना और नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाकर पुलिस पर रौब गाठना आम बात हो गयी है। इसकी बानगी इस वायरल वीडियो में इस महिला अधिकारी पर साफ साफ नजर आ रही है। जरवल रोड कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि उपश्रमायुक्त रचना केसरवानी गत 27 अप्रैल को लखनऊ से गोण्डा शराब के नशे में गाड़ी चलाकर जा रही थी कि रास्ते में बेकाबू कार डिवाइडर से टकरा गयी। आसपास के लोगों की सूचना पर जब डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची तो मैडम ने उनसे दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। इसके पश्चात् महिला जवानों ने बड़ी मशक्कत से मैडम को गाड़ी में बैठाया। और अस्पताल लें जाकर मेडिकल कराया। उन्होंने बताया कि नशे की हालत में मैडम को उनके पति को बुलाकर सौंप दिया गया और उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गयी है। आयुक्त एम पी अग्रवाल ने बताया कि मेरे संज्ञान में है शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। कार्यवाई शासन से होना है। 


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महोबा-पादरी गिरफ्तार, पैसों का लालच देकर धर्मांतरण कराने का आरोप

 
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उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक पादरी पर पिछले आठ सालों से गरीबों को रुपयों का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा है. पुलिस ने आरोपी पादरी आशीष जॉन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है. हिंदूवादी संगठनों की शिकायत के बाद पुलिस ने पादरी के खिलाफ यह कार्रवाई की है. पादरी आशीष जॉन महोबा जिले में पनवाड़ी थाना क्षेत्र के सिमरिया गांव में किराए का मकान लेकर रहता था. आरोप है कि वह पिछले आठ सालों से गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम कर रहा था.

इस मामले में पुलिस ने बताया, ''आशीष जॉन नाम का यह पादरी यूपी के बलिया जिले का रहने वाला है जो महोबा के पनवाड़ी थाने के सिमरिया गांव में रह कर गरीब ग्रामीणों को रुपयों का लालच दे कर उनका धर्म परिवर्तन कराने के काम में लगा हुआ था. यह पादरी केरल की ईसाई मिशनरियों से जुड़ा हुआ है और पैसों का लालच देकर हिंदुओं से ईसाई बनाने का काम बेखौफ कर रहा था. यह सिमरिया गांव के 3 किसानों को रुपये देकर हिन्दू से ईसाई बना चुका है.''

बजरंग दल के विभाग संयोजक सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि केरल से जुड़ा हुआ पादरी आशीष जॉन हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करा रहा है तो उन्होंने इसकी जानकारी इकट्ठा करने के बाद पुलिस में शिकायत की. इसके बाद पनवाड़ी थाने की पुलिस ने आशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

महोबा की एसपी सुधा सिंह ने बताया कि यह बहुत गंभीर मामला है. इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है और जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उस पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी. मामले के सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है.

दावा किया गया है कि गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आशीष जान ने खुद कुबूल किया कि वह ईसाई मिशनरी का प्रचारक है और उसके पास से ईसाई धर्म का काफी साहित्य और किताबें भी बरामद हुई हैं.



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फर्जी विज्ञापन छपवाने की जिम्मेदारी से यूपी का सूचना विभाग बच नहीं सकता ?

 
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यूपी का फर्जी विज्ञापन. सीएम की फ़ोटो के साथ क्या छपना चाहिए यह निर्णय सरकार का सूचना विभाग करता है। सीएम के सचिव को छपने के पहले ड्राफ्ट दिखाया भी जाता है। ऐसा नहीं है कि, सीएम की फ़ोटो के साथ एक विज्ञापन बिना सरकार को दिखाए छाप दिया जाय। अब अखबार माफी मांग रहा है, पर इससे CM की छवि पर असर पड़ा है।
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झूठ का विज्ञापन. उत्तर प्रदेश सरकार के एक विज्ञापन पर गौर फरमाइए। कोलकता का फ्लाईओवर और अमरीका की फैक्ट्री इस तस्वीर में है। झूठ विज्ञापन में भी?

मुख्यमंत्री की छवि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, सरकार के उंस विभाग द्वारा, जो ऐसे विज्ञापनों की योजना बनाता है और उसे अखबारों को देता है।
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इन्डियन एक्सप्रेस के मार्केटिंग विभाग ने फ्रंट पेज पर यूपी सरकार के विज्ञापन में कलकत्ते के फ्लाईओवर और अमेरिकी कम्पनी के दफ्तर की फोटो लगा दी है. मुझे नहीं पता कि यह तस्वीर क्लाइंट ने दी है या अखबार ये सेवा खुद दे रहा है…

विकास की आँखों -देखी असल खबर आपको बतलाता हूँ. घर यानी अम्मा-बाउजी जहाँ हैं वहाँ गली बमुश्किल सौ मीटर होगी…अखिलेश जी के समय दोनों तरफ की प्राचीन नालियों को खोद कर विकास शुरू हुआ तब तक अखिलेश जी का काम बोल गया, काम रुक गया….

महंत सरकार का कार्यकाल पूरा होने को आया, अभी तक विकास खुली नाली में ही अटका पड़ा है..अपना सीमेंट, सरिया बालू लगा कर कुछ लोग गेट के सामने और अगल बगल ढक चुके हैं ताकि रिटायर मार्गदर्शक लोग और देश के भविष्य नालियों में न चले जायें….

अब यह मत बताइये कि पालिका का है कि पीडबलडी, पेमेंट हुआ या नहीं…इससे वहाँ के निवासियों का क्या काम ?…विकास नालियों में अटक गया तो अटक गया. बाकी के लिए नवभारत टाइम्स आजकल देखिये, खाली नखलऊ की सड़कों के इतने गड्ढे रोज दिखा रहा की चाँद के भी कम पड़ जायें.



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बेखौफ बदमाशों ने सिपाही को मारी दी गोली, डायल 112 पर था तैनात

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खबर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से है। यहां बेखौफ बदमाशों ने डायल 112 पर तैनात पुलिसकर्मी को गोलियों से भून दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश मौका-ए-वारदात से फरार हो गए। साथी पुलिसकर्मी घायल सिपाही को जिला अस्पताल लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। तो वहीं, पुलिसकर्मी पर हुए जानलेवा हमले की घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त समाचार के मुताबिक, अरूण कुमार सिंह यूपी पुलिस में सिपाही है और बागपत में खेकड़ा थाना क्षेत्र में डायल 112 पर तैनात है। अरूण कुमार हापुड़ जिले के बाबूगढ़ थानातर्गत नली गांव का रहने वाला है, इस वक्त बागपत पुलिस लाइन में रहता है। अरूण कुमार सिंह बुधवार (08 सितंबर) रात को ड्यूटी खत्म करके बाइक से वापस पुलिस लाइन लौट रहा था। तभी खेकड़ा-काठा संपर्क मार्ग पर बंदपुर मोड़ के पास पीछे से आ रहे बदमाशों ने सिपाही अरूण कुमार के सीने में दो गोली मार दी।

गोली लगने से सिपाही अरूण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया और वहीं गिर गया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश मौका-ए-वारदात से फरार हो गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने साथी सिपाही को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। जिला अस्पताल के डा. भूपेंद्र सिंह ने हालत गंभीर देखते हुए प्राथमिक इलाज कर सिपाही को मेरठ के मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया। डॉक्टर के मुताबिक, सिपाही को सीने में दो गोली लगी हुई है।

वहीं, वारदात की जानकारी मिलते ही बागपत एसपी नीरज जादौन सहित एएसपी व कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। खुद मेरठ जोन के आईजी प्रवीण कुमार ने देर रात घटनास्थल का निरीक्षण किया। बता दें कि उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। एसपी नीरज जादौन के मुताबिक, सिपाही के होश में आने के बाद ही घटना और बदमाशों की संख्या के बारे में कुछ स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल आस-पास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है। कई टीमों को इस केस में लगा दिया गया है।



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कुश्ती के दौरान पहले ही दांव में पहलवान की हो गई मौत, लोग बजाते रहे तालियां

 
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यूपी के मुरादाबाद में दंगल प्रतियोगिता में कुश्ती के दौरान एक पहलवान की मौत हो गई। पहलवान उत्तराखंड से आया हुआ था। कुश्ती के दौरान पहले ही दांव में पहलवान की गर्दन टूट गई। देखते ही देखते पहलवान की जान चली गई। पहलवान की मौत का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

पहले ही दांव में किया चित, दोबारा नहीं उठा पहलवान
जानकारी के मुताबिक, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा कोतवाली इलाके के फरीदनगर में दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। प्रतियोगिता में उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के गंगापुर निवासी महेश ने भी हिस्सा लिया। महेश का मुकाबला स्थानीय पहलवान साजिद अंसारी से था। मुकाबला शुरू होते ही साजिद ने दांव लगाते हुए महेत को जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद महेश उठा ही नहीं। बताया गया कि महेश की गर्दन टूट जाने से उसकी सांसें उखड़ गईं। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

पहलवान की मौत का वीडियो वायरल

पहलवान की मौत का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो के मुताबिक, पहलवान साजिद महेज को चित करने के बाद दो-तीन बार उसके सिर को हिलाकर उसे उठाने की कोशिश करता है, लेकिन महेश नहीं उठ पाता है। इस दौरान वहां मौजूद लोग तालियां बजाते हैं। तभी कुछ लोग आकर पहलवान महेश को उठाते हैं।

60 हजार रुपए में मामला रफा-दफा

जानकारी के मुताबिक, यह दंगल प्रतियोगिता बिना अनुमति के 2 सितंबर को नौमी के मेले में आयोजित की गई थी। बताया जा रहा है कि इस हादसे के बाद पंचायत बैठाई गई, जिसमें महेश की मौत का सौदा 60 हजार रुपए में कर दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस मामले में पुलिस किसी भी जानकारी से इनकार कर रही है। एसपी देहात विद्या सागर मिश्र का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


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50 साल से ऊपर के अनफिट पुलिस वाले होंगे सेवानिवृत्त

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इस साल मार्च में 50 साल पूरे करने वाले उत्तर प्रदेश के पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग की जाएगी जो अक्षम, गैर अनुशासित भ्रष्ट पाए जाएंगे उन्हें रिटायर कर दिया जाएगा।  इस संबंध में नए आदेश अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी), स्थापना, संजय सिंघल द्वारा जारी किए गए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आदेश में कहा गया है कि सभी पुलिस विभागाध्यक्षों जिला पुलिस प्रमुखों को कांस्टेबल से लेकर निरीक्षक तक के पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उन्होंने कहा कि आदेश में कहा गया है कि 31 मार्च, 2021 तक 50 वर्ष की आयु तक के सभी पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर की जाएगी। अक्षम, अनुशासनहीन भ्रष्ट पुलिस कर्मियों को बाहर निकालने के लिए राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों से इस नीति पर जोर दिया है।एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि 50 साल से ऊपर के कर्मचारियों की स्क्रीनिंग से संबंधित आदेश साल 1985 से लागू है यह अन्य विभागों केंद्र सरकार की इकाइयों में भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस स्क्रीनिंग को यह नहीं माना जाना चाहिए कि कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी जाएगी, लेकिन यह सेवा में उनकी उपयोगिता के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि 50 वर्ष से अधिक आयु के वे पुलिस कर्मी, जिनकी स्क्रीनिंग एक बार हो चुकी है, आगे की स्क्रीनिंग का हिस्सा नहीं होंगे। ज्ञात हो कि 2019 में राज्य भर में इंस्पेक्टर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक के 364 पुलिस कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। इनमें 11 निरीक्षक, 57 उप निरीक्षक, आठ उप निरीक्षक (मंत्रालयी), 80 प्रधान आरक्षक व 200 आरक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा, कुछ प्रांतीय पुलिस सेवा भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी 2019 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी, जिसमें से सबसे अधिक प्रचारित मामला आईपीएस अमिताभ ठाकुर का था।


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उत्तर प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट हुई हैक, FIR दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

 
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लखनऊ,: हैकरों द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट हैक करने का मामला सामने आया है। वेबसाइट हैक होने की जानकारी मिलते ही साइबर थाने में यूपी डेस्को ने एफआईआर दर्ज करा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकरों ने वेबसाइट को हैक करके आपत्तिजनक पोस्ट भी डाली है, जिसके बाद इस मामले की जानकारी हो सकी। हालांकि, विधानसभा की वेबसाइट से कोई भी डाटा चोरी नहीं हुआ है।

साइबर क्राइम थाना के प्रभारी के मुताबिक, लखनऊ ग्रामीण में सूचना प्रोद्यौगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008, 66 सी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। यूपी डेस्को के सहायक प्रबंधक रामशंकर सिंह के मुताबिक, पुलिस को तहरीर दी गई है। मुकदमा दर्ज हो गया है। वहीं, एडीजी साइबर क्राइम राम कुमार को इस मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने खुद गंभीरता से कार्रवाई शुरू करवा दी है। हर पल इस मामले की रिपोर्ट ले रहे हैं। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही हैकर को दबोच लेंगे।

वहीं, डीजीपी मुकुल गोयल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विधानसभा की वेबसाइट को हैक नहीं किया गया है। वेबसाइट एक प्राइवेट कंपनी द्वारा कॉन्ट्रैक्ट पर वर्ल्ड वाइड चलाई जाती है। इस दौरान वेबसाइट पर एक वनरेबल एडवर्टीजमेंट का पेज आ गया था, जोकि एक दवा का था। सिर्फ भारत में ही नहीं नेपाल और यूरोप के अन्य देशों में जहां-जहां यह वेबसाइट की कंपनी काम करती है उन सभी पर यह एडवर्टीजमेंट गया है। हालांकि, इस संदर्भ में एक एफआईआर दर्ज करा दी गई है और कंपनी से बात करके जांच की जा रही है।


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लखनऊ में 5 अक्‍टूबर तक बढ़ाई गई धारा 144, किसान आंदोलन को देखते हुए प्रशासन सतर्क

 
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 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पांच अक्टूबर तक धारा 144 लागू कर दी गई है। आने वाले दिनों में मनाए जाने वाले धार्मिक पर्व, कोरोना महामारी और किसान संगठनों की ओर से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ये फैसला लिया है। इस दौरान विधानभवन के एक किलोमीटर के दायरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ागाड़ी या बैलगाड़ी लाने पर रोक रहेगी।

लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) की ओर से बुधवार को आदेश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सितंबर से अक्टूबर माह में होने वाले त्यौहार और तेजी से चल रहे किसान आंदोलनों के बीच लखनऊ में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 अक्टूबर तक धारा 144 लागू रहेगी।

राजधानी की शांति व्यवस्था भंग होने के डर से लिया गया फैसला

संयुक्त पुलिस आयुक्त के आदेश के मुताबिक, 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी, 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती, 19 सितंबर को अनन्त चतुर्दशी, 28 सितंबर को चेहल्लुम, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती, 14 अक्टूबर को दशहरा और 19 अक्टूबर को बारावफात/ईद-ए-मिलाद आदि त्यौहार आयोजित होंगे। इसके साथ ही राजधानी में विभिन्न प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाएं होनी हैं। आदेश में कहा गया कि वर्तमान में भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न संगठनों एवं विभिन्न प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन आदि से शांति व्यवस्था भंग होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। राजधानी की शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है। इन सभी विषयों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ में आगामी 5 अक्टूबर तक धारा 144 लागू की गई है। जारी हुए आदेश के मुताबिक, धारा 144 का उल्लंघन करने पर धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शहर में धारा 144 का पालन करते हुए अगले एक माह तक किसी भी प्रकार का जुलूस नहीं निकलेगा और न ही एक स्थान पर 5 या पांच से अधिक व्यक्ति इकट्ठा होंगे। कंटेनमेंट जोन को छोड़कर सरकार की ओर से छूट दिए गए सभी स्थानों पर निश्चित समय सीमा तक निर्धारित संख्या यानि 50 प्रतिशत लोग ही मौजूद रहेंगे। साथ ही किसी भी धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थल, जुलूस या आयोजनों में रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। अपरिहार्य स्थिति में उपायुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त या पुलिस आयुक्त से इसकी अनुमति लेनी होगी।



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BJP MLA शशांक त्रिवेदी ने SDM को जूतों से मारने की बात कही, वीडियो वायरल

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सीतापुर की महोली सीट से बीजेपी के विधायक शशांक त्रिवेदी का एक वीडियो सामने आया है।इस वीडियो में विधायक शशांक त्रिवेदी जनता के बीच खड़े होकर फोन पर किसी को जमकर अपशब्‍द कह रहे हैं। बातचीत के दौरान विधायक गरीबों का घर गिराने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को अपशब्द कहते हुए सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों का घर गिराने वालों को जूतों से पीटेंगे। वीडियो पांच दिन पुराना बताया जा रहा है। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, तहसील प्रशासन ने एक दिव्यांग के द्वारा ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे को लेकर कार्रवाई की थी। हालांकि, दिव्यांग का कहना था कि वह 25 सालों से उसी जमीन पर काबिज है और उसके द्वारा उस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है। तहसील प्रशासन बावजूद इसके उसका घर गिरा दिया था, जिसके बाद दिव्यांग का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गया था। जब इस बात की जानकारी महोली से बीजेपी विधायक शशांक त्रिवेद्वी को हुई तो वह अपने लाव लश्कर के साथ गांव पहुंचे और पीड़ित दिव्यांग को सहारा देते हुए उसके मकान का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया।

'जूतों से मारेंगे, उनको सही कर देंगे'

अब विधायक का एक वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो में बीजेपी विधायक शशांक त्रिवेदी जनता के बीच खड़े होकर फोन पर किसी से बातचीत के दौरान एसडीएम के लिए अपशब्‍दों का प्रयोग करते दिख रहे हैं। वह कहते हैं, FIR लिखिए, एसडीएम की इतनी दिमाग खराब हो गया है कि @#$ की गरीबों का घर गिराएंगे। जूतों से मारेंगे आज उनको सही कर देंगे उनको। विधायक ने एसडीएम पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों को पैसे वालों के घर नहीं दिखते। गरीबों का घर गिराएंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह वीडियो पांच दिन पुराना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि विधायक ने यह बात क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोगों द्वारा प्रशासन पर घर गिराने का आरोप लगाए जाने पर कही थी।


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मायावती के लिए 2022 में रहेगी करो या मरो की स्थिति, बसपा के वोट बैंक में सेंध लगा रही विपक्षी पार्टियां

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा और भाजपा को काउंटर करते हुए अपने वोट बैंक में सेंध लगने से बचाने की है।
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पिछले दो चुनावों से ऐसा देखने में आ रहा है कि मायावती की सीटों में लगातार कमी आ रही है। लोकसभा चुनाव में 2014 में जहां बसपा का खाता नहीं खुला था वहीं 2019 के चुनाव में भी बसपा को केवल दस सीटें ही मिली थीं। इससे भी रोचक यह था कि विधानसभा चुनाव 2017 में मायावती को सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अनुसूचित जातियों के बीच बसपा के वोट शेयर में गिरावट की मुख्य वजह भाजपा का हिंदू वोटों का मजबूत होना है।

2014 के लोकसभा चुनाव में नहीं खुला था बसपा का खाता

बसपा ने 1989 में पहली बार संसदीय चुनाव में 245 निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे। इनमें से तीन जीतने में सफल रहे। यह भी पहली बार था जब 33 वर्षीय मायावती ने बिजनौर से लोकसभा में प्रवेश किया। पार्टी ने, 2009 में 500 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 6.2% वोट हासिल किया, जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। हालांकि 2014 में बसपा को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। इसका एक प्रमुख कारण अनुसूचित जातियों के बीच बसपा के वोटों के हिस्से में तेज गिरावट और भाजपा का हिंदू वोटों का मजबूत होना है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा दलित वोटों का था।

20़14 के बाद से ही कई राज्यों में तेजी से घटा वोट शेयर

2014 में सीएसडीएस द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बसपा ने अपने जाटव (एससी, पारंपरिक बसपा मतदाता) वोटों का औसतन लगभग 20% खो दिया। पार्टी के लिए जाटव वोट मप्र में 26% से गिरकर 13%, राजस्थान में 11% से 6%, हरियाणा में 62% से 21%, दिल्ली में 40% से 16% और यूपी में 85% से गिरकर 69% हो गए। वहीं दूसरी ओर लोकसभा के अलावा, पार्टी ने विधानसभा में भी सीटों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। 2007 में प्रचंड जीत के बाद से वोट शेयर में लगातार गिरावट देखी गई है। पार्टी ने 2007 में 30.4% वोट हासिल किए थे। 2007, जो 2012 में घटकर 25.9% (80 सीटें) और 2017 में 22.4% रह गई

बसपा के वोट प्रतिशत में आ रही गिरावट

1990 के दशक की शुरुआत में, बसपा के संस्थापक कांशीराम, कुर्मी (राज्य के कुछ हिस्सों में, विशेष रूप से बुंदेलखंड और मिर्जापुर) और मुस्लिम पिछड़ों को नुनिया चौहान, राजभर, आदि जैसे समुदायों को एक साथ लाकर एक सामाजिक गठबंधन बनाया था। बाद में इसी सामाजिक ताने बाने को आगे ले जाने के लिए मायावती ने कांशी राम की जगह ली थी। हालांकि समय के साथ मायावती ने उच्च जातियों और मुसलमानों के एक वर्ग तक पहुंचकर इस गठबंधन का और विस्तार किया, इस प्रकार 2007 में स्पष्ट बहुमत के साथ चमकने का मौका भी मिला। लेकिन, 2017 में मायावती इस फॉर्मूले को दोहराने में नाकाम रहीं।

सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक विज्ञान के प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी इस बदलाव के प्राथमिक कारण के रूप में राज्यों में दलित की प्रकृति को अलग- अलग मान रहे हैं।


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विंध्याचल में बड़ा हादसा, गंगा में नाव पलटने से तीन बच्चों समेत छह डूबे, रांची से दर्शन करने आया था परिवार

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 मिर्जापुर में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया। दर्शनार्थियों से भरी नाव पलटने से छह लोग डूब गए। डूबने वालों में तीन बच्चे और तीन महिलाएं हैं। नाव पर 12 लोग सवार थे। छह लोगों को आसपास के नाविकों ने बचा लिया। डूबे लोगों को तलाश में गोतोखोरों को लगाया गया है। हादसे का शिकार हुए लोग झारखंड की राजधानी रांची से विंध्यधाम में दर्शन पूजन के लिए आए थे। आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं।  

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे का संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव एवं राहत कार्य संचालित करने के निर्देश दिये। सीएम योगी ने कहा कि आपदा प्रबन्धन की टीम की मदद लेते हुए तेजी से बचाव व राहत कार्य किये जाएं। उन्होंने अधिकारियों को दुर्घटना के प्रभावितों की हर सम्भव मदद और उनकी समुचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

रांची के रहने वाले राजेश तिवारी अपने परिवार के साथ विंध्याचल दर्शन पूजन करने पहुंचे थे। इसी दौरान बुधवार को अखाड़ा घाट पर नाव से ऊपर पार गए थे। नाव पर परिवार के 12 लोग राजेश (35), विकास (28), दीपक (27), वाहन चालक (अज्ञात), अल्का (9), रितिका (7), गुड़िया (28) खुशबू (30), अनीषा (26), सत्यम (5) और एक अन्य बच्चा उम्र (2½) व एक बच्ची (3माह) सवार थे। 

दोपहर करीब एक बजे उस पार से वापस आते समय नाव बीच गंगा में डगमगाने लगी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता नाव पलट गई। चीख पुकार मचने पर आसपास के नाविक अपनी नावों के साथ वहां पहुंचे। 

राजेश, विकास, दीपक, उनके वाहन चालक, अल्का, रितिका को बचा लिया गया। गुड़िया, खुशबू, अनीषा, सत्यम, एक अन्य बच्चा उम्र (2½) व एक बच्ची (3माह) डूब गए। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। क्षेत्राधिकारी नगर, थाना विन्ध्याचल पुलिस बल सहित मौके पर पहुंच गए। स्थानीय नाविकों और गोताखोरो की मदद से डूबे हुए लोगों की तलाश कराई जा रही है।


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मुर्दे को लगा दी कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज, मामला सामने आया तो मचा हड़कंप

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बलरामपुर जिले के सीएचसी उतरौला के पकड़ी बाजार वैक्सीनेशन सेंटर पर मृत महिला को वैक्सीन की दूसरी डोज देने का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में यह पाया गया है ऑनलाइन फीडिंग में गलती हुई है। संबंधित से जबाब तलब किया गया है।

विदित हो कि बढ़या पकड़ी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर पर गत 14 अप्रैल को एक ही मोबाइल नंबर पर रजिस्ट्रेशन पर राजपति, संवारी देवी, राज कुमारी व उधव का टीकाकरण किया गया था। पांच जून को राजपती की स्वाभविक मौत हो गई। 28 अगस्त को इसी सेंटर पर वैक्सीन की दूसरी डोज संवारी देवी ने लगवाई।

ऑनलाइन फीडिंग में संवारी देवी के बजाए वैक्सीनेटर ने राजपती देवी का नाम फीड कर दिया। राज कुमारी तथा उधव ने अपनी दूसरी डोज श्रीदत्तगंज के वैक्सीनेशन सेंटर महदेईया पर लगवाई।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. चन्द्र प्रकाश सिंह ने बताया कि उसी मोबाइल नंबर पर दूसरी डोज संवारी देवी को लगी थी। ऑनलाइन फीडिंग में गलती से संवारी की जगह राजपति का नाम दर्ज हो गया। संबंधित को नोटिस देकर भूल सुधार करने का निर्देश दिया गया है।


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ग्राम पंचायत सहायक भर्ती में फाइनल हो गए नाम, कल से पता चलेगा किसकाे मिली नौकरी

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 प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 58, 189 पंचायत सहायकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है। बुधवार आठ सितम्बर से 10 सितम्बर के बीच इन चयनित पंचायत सहायकों के नाम घोषित होना शुरू होंगे। हर पंचायत भवन पर चयनित पंचायत सहायक का चयन पत्र चस्पा किया जाएगा। 

पंचायतीराज निदेशालय की वेबसाइट पर इन चयनित पंचायत सहायकों का नाम, पता, सम्बंधित ग्राम पंचायत, ई-मेल आईडी, मोबाईल फोन नम्बर आदि का ब्यौरा डाला जा रहा है। चयन के बाद इन पंचायत सहायकों को दो महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला स्तर पर आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण में इन पंचायत सहायकों को ग्राम पंचायत के क्रियाकलाप, उनके अधिकार व जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पंचायत सहायकों की इस भर्ती में त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था का आरक्षण लागू किया गया है। इसलिए इस भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिला है। इसके अलावा अनारक्षित पदों पर भी मैरिट के आधार पर अव्व्ल आने पर भी महिलाओं का चयन हुआ है। इस नाते गांव की सरकार का दफ्तर यानि ग्राम सचिवालय संचालित करने में महिलाओं का वर्चस्व रहेगा। भर्ती में यह भी प्रावधान किया गया था कि जिस वर्ग या जाति के लिए ग्राम पंचायत आरक्षित है उसी वर्ग या जाति का पंचायत सहायक चयनित किया जाएगा। कहीं-कहीं ऐसा भी संयोग रहेगा कि जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख, ग्राम प्रधान और पंचायत सहायक सभी महिलाएं ही होंगी।

पंचायत सहायकों की यह भर्ती बगैर किसी चयन आयोग में अधियाचन भेजे सिर्फ हाई स्कूल व इण्टर के प्राप्तांक को दो से भाग देकर सर्वाधिक औसत वाले के फार्मूले से चयन किया गया। भर्ती पर किसी तरह का कोई विवाद नहीं उठा। अब विभाग में इसी फार्मूले के आधार पर ग्राम पंचायत अधिकारी के ढाई हजार रिक्त पदों पर चयन के लिए मंथन किया जा रहा है। राज्य में पंचायतराज अधिकारी के कुल 8, 135 पद हैं जिनमें से करीब ढाई हजार रिक्त हैं।


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इटावा-नाम बदलकर शादी की फिर धर्म परिवर्तन के लिए बनाने लगा लड़की पर दबाव, पुलिस ने भेजा जेल

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 इटावा की फ्रेंड्स कालोनी थाने के मसनई चौबिया निवासी अमीन ने तेलंगाना की पूजा पांडेय को अपना नाम राजा पंडित बताकर शादी कर ली। इटावा आने के बाद पूजा को सच्चाई पता चली तो परिवार ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। बात मारपीट तक पहुंची तो पूजा ने मुकदमा दर्ज करवा दिया। पुलिस ने अमीन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य परिजनों की तलाश कर रही है।

पूजा के अनुसार, अमीन नाम बदलकर तेलंगाना में काम करता था। वहीं उससे मुलाकात हुई और दोस्ती हो गई। बातचीत में अमीन ने अपने को हिंदू बताया जिस पर करीब डेढ़ साल पहले उससे शादी कर ली और उसके साथ इटावा आ गई। इटावा आने के बाद पता चला वह मुस्लिम है, इसका विरोध किया तो पूरे परिवार ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उससे दहेज की मांग की गई और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। पूजा के अनुसार, धर्म परिवर्तन और दहेज के लिए मना करने पर उससे मारपीट की गई जो वह बर्दाश्त नहीं कर पाई।

पूजा की शिकायत पर पुलिस ने अमीन, उसके पिता जमालुद्दीन खां, मां खेरुनिशा, देवर सलमान व जेठ अंसार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। थाना प्रभारी गगन गौड़ ने बताया कि नाम, धर्म व जाति छुपाकर शादी करने, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।


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योगी सरकार ने यूपी में नाईट कर्फ्यू में दी ढील, अब रात 11 बजे तक खुल सकेंगे मार्केट

 
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कोरोना महामारी से बचाव के लिए एग्रेसिव ट्रेसिंग, टेस्टिंग और बेहतर ट्रीटमेंट के साथ-साथ तेज टीकाकरण की नीति रंग ला रही है। ताजा स्थिति के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 28 जिले कोरोना मुक्त हो गए हैं, वहीं कोविड टीकाकरण के लिए योग्य प्रदेश की 45 फीसदी आबादी ने टीके की पहली खुराक ले ली है। बेहतर होते हालात के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशव्यापी रात्रिकालीन कर्फ्यू में एक घंटे की छूट देने का निर्णय लिया है। रात्रिकालीन कर्फ्यू अब रात 11 बजे से सुबह 06 बजे तक प्रभावी होगा। 

मंगलवार को टीम-09 के साथ कोविड के हालात की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 33 लाख 42 हजार 360 लोगों को टीकाकवर देने के साथ बने नए कीर्तिमान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को धन्यवाद दिया। साथ ही, टीकाकरण को और तेज करने के लिए जागरुकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए। अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि प्रदेश में 08 करोड़ से ज्यादा कोविड टीके लगाए जा चुके हैं। अलीगढ़, अमरोहा, बागपत, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बस्ती, बहराइच, भदोही, बिजनौर, चित्रकूट, देवरिया, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, हाथरस, कौशाम्बी, ललितपुर, महोबा, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, शामली, सीतापुर, सोनभद्र जिलों में कोविड का एक भी एक्टिव केस नहीं है। उन्होंने बताया कि बीते 24 घंटे में हुई 01 लाख 82 हजार 624 सैम्पल की टेस्टिंग में 59 जिलों में संक्रमण का एक भी नया केस नहीं पाया गया, जबकि 16 जनपदों में 22 मरीज मिले। इसी अवधि में 20 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। प्रदेश में अब तक 16 लाख 86 हजार 389 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में एक्टिव कोविड केस की संख्या 227 रह गई है।

सावधानी-सतर्कता जरूरी, लापरवाही पड़ेगी भारी:

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बेहतर होते हालात के बीच कई राज्यों में कोविड के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। हमें सावधान रहना होगा। अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। ऐसे में घर से बाहर निकलने पर मास्क की अनिवार्यता हो या फिर भीड़-भाड़ वाली जगहों से परहेज, लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन के लिए फिर से जागरूक किया जाना जरूरी है। सीएम के ताजा आदेश के बाद रात 11 बजे तक बाजार बंद हो जाएंगे और सड़कों पर अनावश्यक घूमते लोगों के साथ सख्ती की जा सकती है। चेतावनी के दृष्टिगत रात 10 बजे से ही पुलिस टीम हूटर बजाकर अथवा लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को 11 बजे से पहले तक घर जाने की अपील करेगी।


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