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गेहूं और धान की सीधी बुवाई के लिए डायरेक्ट सीडिंग तकनीक के तहत आई नयी मशीन का प्रयोग

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गेहूं और धान की सीधी बुवाई के लिए वैज्ञानिकों द्वारा एक नयी मशीन विकसित की गयी है। अभी फिलहाल इसका परीक्षण के तौर पर उपयोग कुछ किसानों के खेत पर demonstration के जरिए किया गया। जिस दौरान यह देखा गया कि इस पद्धति के द्वारा बीजाई करने पर अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।

इस राइस और गेहूं सीडर के द्वारा पौधे की पौधे से दूरी 15 सेंमी. और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंमी. पर बुवाई की जा सकती है। मौजूदा समय में एग्रीकल्चल इंजीनियरिंग कॉलेज, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनीवर्सिटी, पूसा द्वारा विकसित किया गया है। हालांकि अब इसे मां दुर्गा एग्रो इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मधुबनी द्वारा भी तैयार किया जा रहा है।

डेढ़ एकड़ तक बुवाई इस मशीन के द्वारा एक दिन में किया जा सकती है। जबकि इस मशीन की सहायता से बुवाई करने के लिए केवल दो श्रमिकों की आवश्यकता होती है यानी अब श्रमिकों की कमी में इस मशीन की सहायता से बुवाई करने में सहायता मिलेगी। इससे साफ है कि खेती में लागत भी बचेगी।

इस दौरान कुछ किसानों के खेत पर इसका प्रयोग भी कर देखा गया। कुछ किस्मों की इस विधि द्वारा बुवाई पर पता चला कि धान की उपज प्रति हैक्टेयर पच्चीस प्रतिशत तक रोपाई विधि की तुलना में अधिक मिली। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसानों के अनुभव के अनुसार इस मशीन से बुवाई करने पर गेहूं की पैदावार सामान्य बुवाई की तुलना में काफी अधिक है।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि मशीन के उपयोग से किसानों को प्रति एकड़ चार से पांच हजार रुपए की बचत होती है। इसके साथ ही उपयोग के लिए यह काफी आसान है जिससे किसानों के लिए हर तरह से यह लाभकारी है।  

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