-'बिना जांच किए लगा दी रिपोर्ट, फर्जी गवाह और मनगढ़ंत तथ्यों का आरोप'; दोनों अधिकारियों ने दिए जांच के निर्देश।
गोण्डा । आईजीआरएस शिकायत की जांच में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। छपिया थाना पुलिस पर बिना निष्पक्ष जांच किए मनगढ़ंत तथ्यों और फर्जी गवाहों के आधार पर रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने बुधवार को जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और डीआईजी देवीपाटन मंडल अशोक कुमार शुक्ला से जनता दरबार में शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों अधिकारियों ने शिकायत की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या
20018326006871 से जुड़ा है। पीड़ित बद्री प्रसाद, निवासी ग्राम पंचायत रानीजोत, मसकनवां बाजार, थाना छपिया, ने आरोप लगाया कि एचडीएफसी बैंक मसकनवां बाजार में क्रेडिट कार्ड सक्रिय कराने के दौरान बैंक कर्मचारी ने उनके मोबाइल फोन से प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर तीन बार में कुल 97,405 रुपये विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिए।
पीड़ित के अनुसार, मोबाइल पर रकम कटने का संदेश मिलने के बाद उन्होंने तत्काल बैंक प्रबंधक से संपर्क किया। बैंक प्रबंधक ने शुरुआत में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए धनराशि वापस होने का आश्वासन दिया, लेकिन लंबे समय तक पैसा वापस नहीं मिला। इसके बाद 20 मार्च 2026 को उन्होंने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामला जांच के लिए पुलिस को भेजा गया।
'जांच अधिकारी ने कभी संपर्क ही नहीं किया'
पीड़ित का आरोप है कि आईजीआरएस जांच के दौरान न तो किसी पुलिस अधिकारी ने उनसे संपर्क किया और न ही उनका बयान दर्ज किया। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि 6 अप्रैल 2026 को उनके मोबाइल नंबर पर बात हुई तथा उनके पुत्र फूलचन्द्र वर्मा से बातचीत की गई। पीड़ित का कहना है कि उनका कोई पुत्र इस नाम का नहीं है, जिससे रिपोर्ट की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
'फर्जी गवाह बनाने का भी आरोप'
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच रिपोर्ट में जगदम्बा और मिथलेश, पुत्रगण मनीराम यादव, निवासी ग्राम खुटिहन कोटखास, को गवाह दर्शाया गया, जबकि दोनों व्यक्तियों से न तो किसी पुलिस अधिकारी ने पूछताछ की और न ही उनका बयान दर्ज किया। पीड़ित का दावा है कि दोनों कथित गवाहों ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया है कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और पुलिस ने उनसे कभी संपर्क नहीं किया।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने जिलाधिकारी और डीआईजी को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी ने निष्पक्ष जांच किए बिना मनगढ़ंत तथ्यों और कथित फर्जी गवाहों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जनता दरबार में शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और डीआईजी देवीपाटन मंडल अशोक कुमार शुक्ला ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

