-- 1997 से 2020 तक चला फर्जीवाड़ा, SI सोनू कुमार ने शुरू की जांच, 23 साल के रिकॉर्ड तलब
गोण्डा। जिले की इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड की शाखा में हुए 4 करोड़ 90 लाख रुपये के बड़े घोटाले में नामजद 69 आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक उपनिरीक्षक सोनू कुमार ने जांच तेज कर दी है और सोसाइटी से 23 साल का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
क्या है पूरा मामला
सोसाइटी के सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बीते 12 जून को कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि वर्ष 1997 से 2020 के बीच तैनात रहे बैंक प्रबंधकों, कैशियर सहित विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर वित्तीय अनियमितता की और सोसाइटी की धनराशि का गबन कर लिया।
जांच अधिकारी ने मांगे 23 साल के साक्ष्य
मामले के विवेचक उपनिरीक्षक सोनू कुमार ने सोसाइटी के सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर वर्ष 1997 से 2020 तक के सभी कागजी, इलेक्ट्रॉनिक और मैनुअल साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घोटाले को किस तरीके से अंजाम दिया गया और इसमें कौन-कौन शामिल था।
सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विवेचक के निर्देश पर कागजात इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया गया है। SI सोनू कुमार ने जल्द से जल्द सभी वित्तीय रिकॉर्ड और साक्ष्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
समझौते के बाद भी नहीं जमा की रकम
जांच में सामने आया है कि गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद आरोपियों से समझौता भी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 4 करोड़ 90 लाख रुपये की घोटाले की राशि सोसाइटी में जमा नहीं की। इसी के बाद सचिव ने सभी 69 अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया।
विवेचक बोले- होगी कड़ी कार्रवाई
विवेचक उपनिरीक्षक सोनू कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। वादी से साक्ष्य मांगे गए हैं और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है ताकि घोटाले की सही राशि का पता चल सके। जांच पूरी होते ही सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में इस बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर कर्मचारियों और खाताधारकों में हड़कंप मचा हुआ है। सभी की निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं।

