-सिटी मजिस्ट्रेट के लापरवाही से पीड़िता को नहीं मिल रहा है न्याय।
गोण्डा। जनपद के छेदी पुरवा निवासी रश्मि सिंह थाने से लेकर कमिश्नर के यहां तक लगभग दर्जनों शिकायतें कर चुकी हैं लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही मिला।
ताजा मामला गायत्री हॉस्पिटल के बगल रहने वाली रश्मि सिंह के चाचा मनीराम सिंह का जमीनी विवाद चल रहा है जमीनी विवाद को लेकर के मनीराम सिंह के दो बेटे पुलिस विभाग में तैनात हैं बेटों के दबंगई से तंग आकर भतीजी आत्महत्या करने को विवश है। मामला यहीं नहीं रश्मि सिंह की शादी लखीमपुर में हुई थी पति से विवाद होने के कारण पिता ने अपनी पुत्री को एक बटा तीन हिस्से अपने हिस्से से बैनामा कर दिया, गुजर बसर करने के लिए। इसी मकान के पास चाचा मनीराम सिंह मकान है पिता का आरोप है कि मेरे चाचा मेरे मकान के ऊपर रेलिंग लगी हुई है इस रेलिंग से चिपका कर अपनी दीवाल उठा लिए हैं। शिकायत करने के बावजूद भी कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो पाई और मेरे घर को गिरा देना चाहते हैं ऐसा हम नहीं कहते हैं भतीजी का आरोप है। देखने में भी यही लग रहा है कि कहीं ना कहीं चाचा अपने भतीजी का मकान गिरा देने के लिए कितनी जल्दबाजी कर रहे हैं देखने से पता चलता है। वही छत के दीवारों में दरार आ गई है जबकि मनी राम सिंह ने नगर पालिका के जमीन पर बिना नक्शा के मकान बनवा लिया है लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचने के बाद में भी कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते जबकि उल्टा सिटी मजिस्ट्रेट के द्वारा भतीजी को डांट फटकार कर मामला को खत्म कर देना चाहते हैं लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट जिलाधिकारी के आदेशों को धज्जियां उड़ाते हुए उनको यह नहीं परवाह है कि बिना नक्शा नजरी के नगर पालिका में मकान बन रहा है इस पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए जबकि ऐसे कई मामले हैं जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट की मिली भगत से कई मंजिली इमारत खड़ी हो गई है लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य रहा, जबकि पीड़िता रश्मि सिंह जिलाधिकारी के साथ-साथ कमिश्नर के यहां भी शिकायती प्रार्थना पत्र दिया है और गुहार लगाई है कि मेरे घर को बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से मेरे चाचा मनीराम सिंह मेरी रेलिंग से सटाकर दीवाल ना उठाएं लेकिन उधर पीड़िता अधिकारियों की चौखट लगती रही उधर दबंग मनीराम अपनी दीवाल खड़ी कर दिए यही नहीं पीड़िता महिला के ऊपर भी कार्रवाई कर दी ऐसा आरोप लगते हुए तेज तर्रार कमिश्नर से गुहार लगाई है। अब देखना है कि क्या इस बेसहारा महिला की मदद कमिश्नर साहिबा कर पाती है या उनके यहां शिकायती प्रार्थना पत्र कूड़ेदान में चला जाएगा यह बात भविष्य के गर्भ से छिपी हुई है।

