- 33 साल से एक ही पद पर तैनात थे गुरुचरण पाण्डेय, बीजेपी नेत्री ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग।
गोण्डा । नगर पालिका के नजूल अमीन गुरुचरण पाण्डेय की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। सोमवार को एंटी करप्शन देवीपाटन मंडल की टीम ने उन्हें 1 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। गिरफ्तारी के बाद मंगलवार से उनके खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निलंबन की रिपोर्ट तलब, डीएम ने दिए सख्त निर्देश
एंटी करप्शन की रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार सुबह 10 बजे नगर पालिका के प्रभारी अधिशासी अधिकारी विशाल कुमार ने अध्यक्ष से गुरुचरण पाण्डेय के निलंबन को लेकर रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें निलंबित किया जाएगा। साथ ही पूरे मामले में विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने भी इस प्रकरण का संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रभारी ईओ विशाल कुमार से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। डीएम ने गिरफ्तार नजूल अमीन के खिलाफ निलंबन सहित अन्य कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत कार्य करने को कहा है।
नगर पालिका में हड़कंप, कई कर्मचारी गायब
गुरुचरण पाण्डेय की गिरफ्तारी के बाद गोंडा नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार कई कर्मचारी डर के कारण अपना मोबाइल फोन बंद कर गायब हो गए हैं।
बीजेपी नेत्री ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा महिला मोर्चा अवध क्षेत्र की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रत्ना वर्मा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुचरण पाण्डेय 33 सालों से एक ही विभाग में तैनात थे, ऐसे में यह रिश्वतखोरी का खेल अकेले उनके दम पर नहीं चल रहा होगा। रत्ना वर्मा ने आशंका जताई कि इस गिरोह में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष और अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
रत्ना वर्मा ने आरोप लगाया कि "6 लाख में मामला सेटल हुआ था और 1 लाख टोकन मनी लेते समय पकड़े गए हैं। कहीं ना कहीं नगर पालिका अध्यक्ष और विभाग के लोग भी इनसे पैसा ले रहे थे।" फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है।

