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गोण्डा-पत्रकार उत्पीड़न मामला गरमाया, हाईकोर्ट जाने की तैयारी; पुलिस पर साजिश और जानमाल के खतरे का आरोप

 



गोण्डा । वजीरगंज थाना क्षेत्र के एक पत्रकार द्वारा पुलिस पर उत्पीड़न, फर्जी रिपोर्ट तैयार करने तथा झूठे मामलों में फंसाने की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित पत्रकार ने दावा किया है कि थाने में व्याप्त भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं से संबंधित समाचार प्रकाशित करने के कारण उन्हें और उनके पत्रकार पुत्र को निशाना बनाया जा रहा है। मामले में अब उच्च न्यायालय की शरण लेने की तैयारी भी की जा रही है।

     पत्रकार का आरोप है कि गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस मुख्यालय को भेजी गई शिकायतों पर निष्पक्ष जांच कराने के बजाय स्थानीय स्तर पर बिना उनका पक्ष सुने रिपोर्ट तैयार कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय से प्राप्त प्रकरण में भी कथित रूप से तथ्य छिपाकर रिपोर्ट भेजी गई, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल सका।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

पीड़ित पत्रकार के अनुसार, 11 अप्रैल को उनके पुत्र को कॉलेज से लौटते समय पुलिसकर्मियों द्वारा रोका गया, जिसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। पत्रकार का आरोप है कि विरोध करने पर उनके पुत्र के साथ दुर्व्यवहार किया गया और बाद में उन्हें, उनके पुत्र तथा पुत्री को भी थाने ले जाकर प्रताड़ित किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें गंभीर धाराओं में फंसाने और जीवन बर्बाद कर देने की धमकियां भी दी गईं।

पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद पुलिस द्वारा समझौते का हवाला देकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया, जबकि उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई। उनका आरोप है कि थाने में भ्रष्टाचार और कथित मनमानी कार्यशैली के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित करने के कारण पुलिस अधिकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

गृह मंत्रालय, डीजीपी और मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

 पीड़ित पत्रकार ने पुनः गृह मंत्रालय, डीजीपी उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर अपनी तथा अपने पुत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच और कार्रवाई की भी मांग उठाई है।

        पत्रकार ने आशंका जताई है कि उन्हें किसी भी समय झूठे मुकदमे में फंसाया जा सकता है अथवा उनके साथ कोई अप्रिय घटना घट सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों और विभागीय जिम्मेदारों की होगी।

हाईकोर्ट में उठेगा मामला

 सूत्रों के अनुसार, पीड़ित पत्रकार अब इस पूरे प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित याचिका में निष्पक्ष जांच, सुरक्षा प्रदान करने तथा कथित फर्जी रिपोर्ट और पुलिस उत्पीड़न के आरोपों की न्यायिक समीक्षा की मांग किए जाने की संभावना है।

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