पेट्रोमैक्स, प्रकाश का एक महत्वपूर्ण साधन है। पांच दशक पहले तक, जब बिजली की उपलब्धता कम थी तो घरों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रकाश करने के लिए पेट्रोमैक्स का इस्तेमाल महंगे प्रकाश साधन के रूप में किया जाता था। भारत के गांव, देहातों में शादी-विवाह के अवसरों पर आज भी इसका प्रचलन आम है।
पेट्रोमैक्स का आविष्कार मैक्स ग्रेट्ज (Max Greatz) नामक बर्जिन के एक डिजाइनर ने किया। उसने लालटेन से प्रेरणा लेकर मिट्टी के तेल से हवा के दबाब से उच्चताप प्रकाश देने वाले इस प्रकाश उपकरण का सन् 1916 ई० में आविष्कार किया। मैक्स ने एक ऐसे प्रकाश यंत्र को तैयार किया जो मिट्टी के तेल को पम्प से हवा भरकर, प्रेशर बनाकर लौ के रूप में मैंटल को ज्वलनशील करता हो। उसने इसके लिए रेशम के धागों का मैंटल बनाया।
चूंकि यह पेट्रोलियम के प्रकार मिट्टी के तेल से जलता था, इसलिए इसका आधा नाम ‘पेट्रो' इस्तेमाल किया। शेष आगे का नाम 'मैक्स' ने अपने नाम के रूप में जोड़ा। इस तरह इस प्रकाश देने वाले साधन का नाम पड़ा पेट्रोमैक्स ! पेट्रोमैक्स आविष्कार में आते ही देखते-ही-देखते यह अनेक देशों में तेल दबाव लालटेन के रूप में प्रसिद्ध और उपयोगी बन गया। इस दबाव लैम्प के सिद्धान्त पर आगे चलकर 'कुकर' का आविष्कार हुआ।
इसकी लोकप्रियता और उपयोगिता इतनी बढ़ी कि अलग-अलग देशों में पेट्रोमैक्स को रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क कराया गया। अमेरिका गणराज्य में 'ब्रिटिलाइट इंक' (Brileyt Inc), जर्मनी, यूरोपियन देशों में पेलम इण्टरनेशन लिमिटेड (Pelam International Ltd), चीन में टॉवर (Tower) इण्डोनेशिया में ली हिन (Lea Hin) और भारत में प्रभात (Prabhat) नाम से इसकी कम्पनियां रजिस्टर्ड हुईं। पेट्रोमैक्स यद्यपि शहरी रोशनी की चकाचौंध में कम चलन में है; पर देहातों और अर्धशहरी इलाकों में इसकी उपयोगिता आज भी बरकरार है।

