गोण्डा लाइव न्यूज एक प्रोफेशनल वेब मीडिया है। जो समाज में घटित किसी भी घटना-दुघर्टना "✿" समसामायिक घटना"✿" राजनैतिक घटनाक्रम "✿" भ्रष्ट्राचार "✿" सामाजिक समस्या "✿" खोजी खबरे "✿" संपादकीय "✿" ब्लाग "✿" सामाजिक "✿" हास्य "✿" व्यंग "✿" लेख "✿" खेल "✿" मनोरंजन "✿" स्वास्थ्य "✿" शिक्षा एंव किसान जागरूकता सम्बन्धित लेख आदि से सम्बन्धित खबरे ही निःशुल्क प्रकाशित करती है। एवं राजनैतिक , समाजसेवी , निजी खबरे आदि जैसी खबरो का एक निश्चित शुल्क भुगतान के उपरान्त ही खबरो का प्रकाशन किया जाता है। पोर्टल हिंदी क्षेत्र के साथ-साथ विदेशों में हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है और भारत में उत्तर प्रदेश गोण्डा जनपद में स्थित है। पोर्टल का फोकस राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है और आम लोगों की आवाज बनना है जो अपने अधिकारों से वंचित हैं। यदि आप अपना नाम पत्रकारिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में विश्व स्तर पर ख्याति स्थापित करना चाहते है। अपने अन्दर की छुपी हुई प्रतिभा को उजागर कर एक नई पहचान देना चाहते है। तो ऐसे में आप आज से ही नही बल्कि अभी से ही बनिये गोण्डा लाइव न्यूज के एक सशक्त सहयोगी। अपने आस-पास घटित होने वाले किसी भी प्रकार की घटनाक्रम पर रखे पैनी नजर। और उसे झट लिख भेजिए गोण्डा लाइव न्यूज के Email-gondalivenews@gmail.com पर या दूरभाष-8303799009 -पर सम्पर्क करें।

रक्षा बंधन-यदि नही है आपकी बहन तो आप इनसे भी बंधवा सकते हैं राखी

Image SEO Friendly

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन का त्योहार रक्षा बंधन मनाया जाता है। इस बार यह शुभ तिथि 3 अगस्त दिन सोमवार को है। इस त्योहार को राखी, श्रावणी, सावनी और सलूनों को नाम से जाना जाता है। इस बार रक्षा बंधन कुछ अलग हो सकता है क्योंकि कहीं लॉकडाउन की स्थिति है तो कहीं संक्रमण की वजह से लोग आवाजाही से बच रहे हैं। हम आपको बताते हैं कि अगर आपके पास बहन नहीं आ पा रही है या फिर आपकी कोई बहन नहीं है तो आप किनसे राखी बंधवा सकते हैं।

इनसे बंधवाई जा सकती है राखी
अपनी बहन ना होने पर या फिर आपके घर में नहीं आने पर चचेरी, ममेरी, फूफेरी एवं मुंह बोली बहन से भी राखी बंधवाई जा सकती है। लेकिन अगर यह भी उपस्थित ना हों तो सावन की पूर्णिमा को शुभ आशीर्वाचन के लिए पुरोहित, पत्नी, गुरु, पिता से भी राखी बंधवाई जा सकती है।

पहले ये बांधते थे रक्षासूत्र
प्राचीन समय से आज तक समाज में पुरोहित हर किसी के कलावा अर्थात रक्षासूत्र बांधते आ रहे हैं। प्राचीन काल में सावन पूर्णिमा के दिन पुरोहित राजा और समाज के वरिष्ठ घरो में रक्षासूत्र बांधा करते थे। इसके पीछे यह उद्देश्य होता था कि ये समाज के सभी वर्गों की रक्षा करेंगे। आज भी घर पर किसी के भी पूजा-पाठ होता है तो पंडित घर में मौजूद सभी सदस्यों के कलावा बांधते हैं। लेकिन आज के दौर में यह राखी का त्योहार बन गया है। 

जानिए पौराणिक कथा 
Image SEO Friendly
भविष्य पुराण को माने तो देवराज इंद्र को उनकी पत्नी शचि ने रक्षासूत्र बांधा था. वैसे इस बारे में एक कथा भी है जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं. इस कथा के अनुसार, वृत्रासुर नाम का एक राक्षस अपने साहस के दम पर स्वर्ग पर अधिकार करना चाहता था. वह किसी से पराजित नहीं हो सकता था इसलिए देवराज इंद्र कई बार उससे हार गए थे. तब देवराज को महर्षि दधीचि के शरीर की हड्डियों से बना वज्र मिला और कसम खाई कि इस बार वीरगति प्राप्त करेंगे या फिर विजयी होंगे. इस सुनकर देवराज की पत्नि शची व्याकुल हो गईं और उन्होंने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र बनाया और वह इंद्र की कलाई पर बांध दिया. जिस दिन वह रक्षासूत्र बांधा था, उस दिन सावन पूर्णिमा थी. इसके बाद वह युद्ध में गए और विजयी हुए. इसके बाद देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को यह रक्षासूत्र बांधा था.

”go"