अफगानिस्तान का पंजशीर प्रांत इस समय जंग के मैदान में तब्दील हो गया है, जहां तालिबान और एनआरएफ (राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा) आपस में खूनी जंग लड़ रहे हैं. एनआरएफ पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह (Amrullah Saleh) और अहमद मसूद (Ahmad Massoud) के नेतृत्व में तालिबान के खिलाफ लड़ रहा है और उसने दावा किया है कि 600 तालिबानी आतंकी मारे गए हैं और 1000 ने सरेंडर कर दिया है. तो वहीं दूसरी तरफ तालिबान ने दावा किया है कि उसने पंजशीर के शोतुल, परयान, खेंज और अबशर जिलों पर कब्जा कर लिया है.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, तालिबान पंजशीर में बढ़त हासिल करता जा रहा है. जबकि एनआरएफ का कहना है कि वह तालिबान को पीछे धकेल रहा है. इन सबके बीच विशेषज्ञों का कहना है कि एनआरएफ तालिबान से निपटने में संघर्ष का सामना कर रहा है. प्रांत में संकट बढ़ता देख अमरुल्लाह सालेह ने संयुक्त राष्ट्र (Amrullah Saleh Letter to UN) को एक पत्र लिखा है. इसके साथ ही उन्होंने सरेंडर करने से भी साफ इनकार कर दिया है. मानवीय संकट को लेकर लिखे गए पत्र में सालेह ने संयुक्त राष्ट्र से तालिबान के हमले को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया है.
गहराता जा रहा मानवीय संकट
उन्होंने इसमें कहा है तालिबान की आर्थिक नाकेबंदी और संचार ब्लैकआउट के कारण पंजशीर प्रांत और बागलान प्रांत के तीन जिलों में मानवीय संकट गहराता जा रहा है (Taliban Attacks on Panjshir). सालेह का कहना है, ‘हम संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करते हैं कि वे पंजशीर प्रांत में तालिबान के हमले को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें और एक राजनीतिक समाधान पर बातचीत करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हजारों विस्थापित और बंधक नागरिकों को बचाया जा सके.’
लाखों लोग पंजशीर में फंसे
पंजशीर अकेला ऐसा प्रांत है, जहां तालिबान कब्जा नहीं कर सका है. पंजशीर के शेर के नाम से मशहूर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद ने यहां अपनी सेना तैयार की है. जो तालिबान का डटकर मुकाबला कर रही है. पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि तालिबान और अन्य आतंकी समूह पंजशीर और उत्तरी अफगानिस्तान के अन्य क्षेत्रों के खिलाफ हमला कर रहे हैं (Humanitarian Crisis in Panjshir). सालेह ने कहा, ‘स्थानीय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और 10,000 आंतरिक रूप से विस्थापितों सहित लगभग 250,000 लोग, जो काबुल और अन्य बड़े शहरों के पतन के बाद पंजशीर पहुंचे थे, वो सभी यहां फंस गए हैं.’
लोगों को खाने की तत्काल जरूरत
अमरुल्लाह सालेह ने कहा है, ‘अगर इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो मानवाधिकार और मानवीय तबाही होगी, जिसमें भुखमरी और सामूहिक हत्याएं शामिल होंगी. यहां तक कि इन लोगों का नरसंहार भी हो रहा है. तालिबान के हमले (Taliban Attacks) से आंतरिक रूप से विस्थापित लोग मस्जिदों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.’ सालेह ने कहा है कि यहां लोगों को खाने की काफी ज्यादा जरूरत है. पत्र में सालेह ने लिखा है, ‘उन्हें तत्काल खाने, आश्रय, पानी और स्वच्छता, स्वास्थ्य देखभाल और गैर-खाद्य वस्तुओं की जरूरत है.’


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