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गोण्डा-मगरमच्छ के हमले में गंभीर घायल मजदूर की 34 दिन बाद मौत, परिजनों में मचा कोहराम

 


-आर्थिक मदद न मिलने और इलाज में लापरवाही का आरोप, परिवार ने कर्ज लेकर कराया इलाज।

गोण्डा । मगरमच्छ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर भानु ने 34 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ी, लेकिन बुधवार सुबह दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि समय पर आर्थिक मदद न मिलने और इलाज में लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई। घटना उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के सनौली मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत के निश्चित पुरवा की है। 24 जून को 32 वर्षीय भानु तटबंध के किनारे मिट्टी का काम कर रहे थे। इसी दौरान घात लगाए मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनका पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

34 दिन चला इलाज, फिर भी नहीं बची जान

हमले के तुरंत बाद भानु को पहले गोंडा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 34 दिनों तक भानु वेंटिलेटर पर रहे। बुधवार सुबह करीब 7 बजे उन्होंने लखनऊ में अंतिम सांस ली। सुबह 10 बजे शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।

"मदद के अभाव में गई जान"- परिजन

पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमले के बाद प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई ठोस आर्थिक सहायता नहीं मिली। इलाज का खर्च करीब 4 लाख रुपये आया, जिसे जुटाने के लिए परिवार को रिश्तेदारों और गांव वालों से कर्ज लेना पड़ा। परिजनों का कहना है कि घायल पैर में संक्रमण लगातार बढ़ता गया और समय पर समुचित इलाज न मिलने से स्थिति बिगड़ती गई।

उमरी बेगमगंज थानाध्यक्ष पवन मिश्रा ने बताया कि 24 जून को मगरमच्छ के हमले में भानु घायल हुए थे। लखनऊ में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं जिला आपदा विभाग के अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि वन्य जीव हमले में मौत के मामले में नियमानुसार आर्थिक सहायता दी जाती है। पीड़ित परिवार की पात्रता का परीक्षण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

गांव में शोक

भानु परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी मौत से पत्नी और दो छोटे बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को तत्काल मुआवजा और बच्चों की शिक्षा-भरण पोषण की व्यवस्था करने की मांग की है।

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