गोण्डा। पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 द्वारा चलाये जा रहे प्रदेश व्यापी अभियान 'Cy-Vazra के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल द्वारा जनपद गोण्डा में साइबर अपराध से सम्बन्धित घटनाओं के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु दिये गये निर्देशों के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अजीत कुमार रजक व क्षेत्राधिकारी सदर अभिषेक दवाच्यॉ के पर्यवेक्षण में थाना इटियाथोक पर पंजीकृत मु0अ0सं0 247/2026 धारा 318(4), 317(2) बीएनएस व 66डी आईटी एक्ट से सम्बन्धित 2 साइबर अपराधी अभियुक्तों 1. बाबूराम पुत्र लोटावन व 2. राहुल वर्मा पुत्र राम राखन को खिरौरा शाहबाजपुर से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कब्जे से रु0 1070/- नगद व 3 अदद मोबाइल फोन बरामद किया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक उप निरीक्षक कोमल प्रसाद यादव द्वारा थाना साइबर हेल्प डेस्क, इटियाथोक को एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के परीक्षण के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्त बाबूराम के नाम से संचालित बैंक खाते एवं संबंधित मोबाइल नंबर का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि के लेन-देन हेतु म्यूल बैंक खाते के रूप में किया जा रहा था। जांच में पाया गया कि उक्त बैंक खाते के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें दर्ज हैं। अभियुक्त ने अपने बैंक खाते का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों को अवैध धनराशि के हस्तांतरण एवं निकासी की सुविधा उपलब्ध कराई, जिससे साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला तथा विभिन्न राज्यों के पीड़ितों को आर्थिक क्षति पहुँची। उप निरीक्षक के लिखित तहरीर के आधार पर पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया था।
जिसके क्रम में आज बुधवार को थाना कोतवाली इटियाथोक पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान पाए गए दोषी 2 आरोपी अभियुक्तों 1. बाबूराम पुत्र लोटावन निवासी बेलवा बहुता थाना इटियाथोक जनपद गोंडा व 2. राहुल वर्मा पुत्र राम राखन निवासी बरडीहा थाना इटियाथोक जनपद गोंडा को खिरौरा शाहबाजपुर से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कब्जे से रु0 1070/- नगद व 3 अदद मोबाइल फोन बरामद किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त के विरूद्ध थाना इटियाथोक पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।
साथ ही बताया गया कि अभियुक्तों से पूछताछ में ज्ञात हुआ कि वे साइबर अपराधियों के कहने पर अपने बैंक खातों का उपयोग करते थे। उनके बैंक खातों में विभिन्न अज्ञात व्यक्तियों से धनराशि प्राप्त होती थी, जिसे वे बैंक अथवा एटीएम के माध्यम से नकद निकालकर संबंधित व्यक्तियों को सौंप देते थे। इस कार्य के बदले उन्हें प्रत्येक लेन-देन पर निर्धारित कमीशन प्राप्त होता था। वे कमीशन के लालच में अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन हेतु म्यूल बैंक खाते के रूप में कर रहे थे।

