गोण्डा। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) ने गोंडा जिले में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। खासकर गौरा और मेहनौन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की बढ़ती सक्रियता ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इन दोनों सीटों पर गठबंधन के भीतर टिकट को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं।
प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं अपना दल (एस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशीष पटेल को गोंडा का प्रभारी मंत्री बनाए जाने के बाद जिले में पार्टी संगठन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। कार्यकर्ताओं की बैठकें, जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखी जा रही है।
अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में राज्य मंत्री हैं, जबकि पार्टी के उत्तर प्रदेश में 12 विधायक और एक विधान परिषद सदस्य हैं। ऐसे में संगठन प्रदेशभर में अपना जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका असर अब गोंडा में भी दिखाई देने लगा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुर्मी बहुल मानी जाने वाली गौरा और मेहनौन विधानसभा सीटों पर संगठन विशेष रणनीति के तहत काम कर रहा है। दोनों सीटों पर फिलहाल भाजपा के विधायक हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अपना दल (एस) के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा हुआ है।
गौरा विधानसभा में पार्टी के जिला अध्यक्ष रामदीन वर्मा के होने से संगठन की गतिविधियां और तेज हुई हैं। हाल ही में सांसद के दौरे के दौरान अपना दल (एस) कार्यकर्ताओं की सक्रिय मौजूदगी ने भी राजनीतिक संकेत दिए हैं।
अभिमन्यु पटेल बने संगठन की सक्रिय आवाज
इन सबके बीच प्रदेश संगठन मंत्री एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य अभिमन्यु पटेल का नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहा है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय भूमिका की चर्चा लगातार हो रही है। पार्टी की बैठकों, संगठन विस्तार कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अभिमन्यु पटेल ने पिछले कुछ समय में संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया है। उनकी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और संगठनात्मक क्षमता के कारण वे जिले में अपना दल (एस) के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं। कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
टिकट को लेकर बढ़ सकती है चुनौती
हालांकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और टिकट को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व एवं गठबंधन स्तर पर होगा, लेकिन जिले में बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। यदि यही स्थिति बनी रही तो गौरा और मेहनौन विधानसभा में भाजपा के मौजूदा विधायकों के लिए टिकट की राह पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि गोंडा में अपना दल (एस) अब केवल सहयोगी दल की भूमिका तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि संगठन को मजबूत कर भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को भी मजबूती से तलाश रहा है। विशेष रूप से गौरा विधानसभा में अभिमन्यु पटेल सहित पार्टी के स्थानीय नेताओं की सक्रियता ने संगठन को नई ऊर्जा देने का काम किया है।

