-छतईपुरवा से चौक घंटाघर तक युवाओं ने निकाला कैंडल मार्च, निष्पक्ष जांच की उठी मांग।
करनैलगंज-गोण्डा। बिहार के भोजपुर जिले के बेलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के विरोध में सोमवार शाम करनैलगंज क्षेत्र में जनाक्रोश खुलकर सामने आया। छतईपुरवा सकरौरा ग्रामीण के युवाओं के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर घटना की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई।
शाम करीब सात बजे ब्रह्मचारी बाबा स्थान, छतईपुरवा से शुरू हुआ कैंडल मार्च स्टेशन रोड, सर्वामाई थान होते हुए चौक घंटाघर तक पहुंचा। मार्च में शामिल युवाओं और स्थानीय लोगों के हाथों में मोमबत्तियां, बैनर और न्याय की मांग वाले पोस्टर थे। पूरे मार्ग में “भरत तिवारी अमर रहें”, “फर्जी एनकाउंटर बंद करो” और “न्याय दो” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।
कैंडल मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि 17 जून को भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई घटना को पुलिस मुठभेड़ बता रही है, जबकि परिजन और स्थानीय लोग इसे फर्जी एनकाउंटर मान रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी नागरिक को न्याय दिलाना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी दोहराया। कैंडल मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों ने भागीदारी कर भरत तिवारी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए मार्च के दौरान लोगों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस बल भी मार्च के साथ मौजूद रहा।
कैंडल मार्च में ज्वाला प्रसाद तिवारी, अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ तिवारी, अधिवक्ता अरविन्द शुक्ल, दिलीप ओझा, दिनेश मिश्र, पुष्पेंद्र तिवारी, नानबाबू तिवारी, सुनील ओझा, भोला मिश्र, शिवजी दूबे, महेश पाण्डेय, दशरथ लाल शुक्ल, सूरज अवस्थी, राघवेंद्र, भोला, कुलदीप पाण्डेय, महेश तिवारी, दीपक तिवारी, दिवाकर पाण्डेय सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे। सुरक्षा व्यवस्था में उपनिरीक्षक शशांक मौर्य, मुख्य आरक्षी दीपक मिश्र, वकील सिंह और सर्वेश सिंह मौजूद रहे।

