-संतों ने की महाआरती, 56 भोग में सजे सैकड़ों प्रकार के व्यंजन-मिष्ठान, हजारों भक्तों ने लिया प्रसाद
फोटो सहित- 56 भोग के सैंकड़ों व्यंजन के साथ स्वामीनारायण मंदिर का दृश्य।
गोण्डा। जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान घनश्याम महराज की जन्म स्थली श्री स्वामीनारायण छपिया धाम मंदिर में भगवान घनश्याम महराज का 175 वां पाटों उत्सव बड़े धूम-धाम से मनाया गया है जिसमें गुजरात रात सहित विश्व के कोने-कोने से भगवान घनश्याम महराज के भक्त एवं स्वामी नारायण सम्प्रदाय के अनुयायियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए पाटों उत्सव बड़े हर्षोल्लास से महा आरती कर भगवान घनश्याम महराज को 56 भोग समर्पित कर प्रसाद ग्रहण किया है। मन्दिर के महन्त की मानें तो आज ही के दिन भगवान घनश्याम महराज का प्राकट्य हुआ था।
बताते चलें कि जिले के स्वामी नारायण छपिया धाम मंदिर स्थित भगवान घनश्याम महराज की जन्म स्थली पर बृहस्पतिवार को हर वर्षों की भांति "वार्षिक वर्ष गांठ"के 175 वें पाटों उत्सव का आयोजन किया गया। जिससे मुख्य रूप से गुजरात प्रान्त से आये। भगवान घनश्याम महराज के अनुयायी स्वामी नारायण सम्प्रदाय के संत जनों भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। उक्त पाटों उत्सव में स्वामी नारायण सम्प्रदाय के विदेशो में रहने वाले अनुयायियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। पाटों उत्सव कार्य क्रम स्वामी नारायण सम्प्रदाय के होने वाले महत्वपूर्ण कार्य कर्मों में शामिल है।
पाटों उत्सव कार्य क्रम मन्दिर के मुख्य प्रांगण में स्थित भगवान घनश्याम महराज के मूर्ति के सामने 56 प्रकार के व्यंजन से भोग समर्पित कर महाआरती का आयोजन किया गया है।
जिससे केसरिया वस्त्रधारी संतों ने पंचमुखी आरती से भगवान का पूजन किया। श्रद्धालु हाथों में दीप थाल लिए आरती में लीन दिखे। पूरा मंदिर परिसर "स्वामीनारायण भगवान की जय" के जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं-बच्चों समेत बड़ी संख्या में भक्त मोबाइल से इस दिव्य क्षण को कैद करते दिखे।
भगवान को अर्पित करने के लिए लगाये गये 56 भोग में लड्डू, बर्फी, पेड़ा, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, काजू कतली, सोनपापड़ी समेत सैकड़ों प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा और व्यंजन सजाए गए थे। भोग का दृश्य देखते ही बन रहा था। मंदिर के स्वर्ण जड़ित गर्भगृह के सामने रंग-बिरंगे मिष्ठानों के ढेर लग गए।
छपिया धाम मंदिर के महन्त की मानें तो आज ही के दिन भगवान स्वामीनारायण का प्राकट्य स्थल है। 175 साल पहले आज ही के दिन मंदिर में भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसलिए हर साल पाटोत्सव मनाया जाता है। देश-विदेश से भक्त यहाँ दर्शन को आते हैं।
पाटोत्सव मंदिर की वार्षिक वर्षगांठ होती है। जिस दिन मंदिर में भगवान की मूर्ति स्थापित की जाती है, उस दिन को पाटोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
पाटोंउत्सव में महन्त देव प्रकाश स्वामी, गुरु जगत प्रकाश स्वामी,कोठारी स्वामी विष्णु,हरि दर्शन स्वामी एवं गुजरात से आए हुए स्वामी नारायण सम्प्रदाय के संत जन सहित क्षेत्रीय भक्ति गण धर्मेंद्र कुमार चतुर्वेदी, देवानंद पाण्डेय, राधे रमण पाण्डेय, प्रधान छपिया जंक्शन तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है।

