-बिकरू कांरू के बाद स्थलीय निरीक्षण व स्वाइल सैंपलिंग करना भूल गई पुलिस, केस के ट्रायल की तैयारी में हुआ खुलासा
- आरोपियों को मिल सकता था फायदा, 4 सीनियर ऑफिसर्स की बनाई एसआईटी, एक हफ्ते में तैयार कर देनी होगी रिपोर्ट
देश को हिला देने वाला बिकरू कांड पुलिस के गले की फांस बन गया है। कदम-कदम पर पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। यहां तक कि पूर्व डीआईजी सहित 8 पुलिस अफसर न्यायिक जांच में दोषी भी पाए गए हैं। अब इस मामले में पुलिस की एक और बड़ी चूक सामने आई है। अगर समय रहते इसकी जानकारी न होती तो आरोपियों को इसका फायदा मिल सकता था। केस के ट्रायल की तैयारी के लिए पूरे मामले के दस्तावेज और इविडेंस तलाशे गए तो पता चला कि पुलिस ने न तो बिकरू गांव का स्थलीय निरीक्षण किया और न वहां की मिट्टी इविडेंस के रूप में रखी। जिससे पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। फौरन चार सीनियर आईपीएस-आईएएस की एसआईटी बनाकर स्थलीय निरीक्षण के कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। टीम 15 दिन के अंदर अपनी रिपोटर्1 सौंपेगी।
गायब तो नहीं कर दिए दस्तावेज स्थलीय निरीक्षण न करने की गलती बिकरू कांड के बाद हुए आरोपियों के एनकाउंटर के दौरान भी की गई। हालांकि जब विकास दुबे का एनकाउंटर किया गया था उस दौरान जरूर घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण तत्कालीन एसएसपी ने किया था। जिसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी। ये रिपोर्ट एसआईटी और न्यायिक आयोग की जांच में लगाई गई है। 2 जुलाई 2020 को हुए सनसनीखेज बिकरू कांड को 14 महीने बीत चुके हैं। तमाम जांचें भी हो गई लेकिन स्थलीय निरीक्षण न कराए जाने की जानकारी किसी अधिकारी को नहीं हो पाई। जांच करने वालों ने भी इसकी जरूरत नहीं समझी। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद जब इसकी जानकारी हुई तो इस कांड की पैरवी के लिए तैयार किए गए वकीलों से बात की गई। इन पांच वकीलों ने जब दस्तावेज खंगाले तो हड़कंप मच गया। सवाल ये भी है कि स्थलीय निरीक्षण किया गया या नहीं? किया गया तो फाइलों से ये इसके दस्तावेज गायब कर दिए गए? ये किसने किया और किसको फायदा पहुंचाने के लिए? इसे अधिकारी जांच का विषय बताते हैं।
जानकारी सामने आते ही किसी पर इसकी गाज गिरे, उससे पहले ही चार सीनियर अधिकारियों (जिनमें दो आईपीएस और दो आईएएस) की एक एसआईटी गठित की गई है। जिनसे सात दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। एडीजी भानु भास्कर ने इस मामले में रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रायल पर आने की बात कही है। साथ ही ये भी बताया है कि वारदात के दौरान जो अधिकारी जिले में तैनात रहे थे। उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे्। उनसे जानकारी ली जाएगी कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
दो जुलाई 2020 को चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश डालने गई पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया गया था। विकास के घर की ओर पैदल बढ़े पुलिसकर्मियों पर चारो तरफ से ताबड़तोड़ फाय¨रग की गई थी। जिसमें तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। घटना के अगले ही दिन पुलिस ने विकास के मामा प्रेम प्रकाश और चचेरे भाई अतुल दुबे को पड़ोस के गांव में मार गिराया था। इसके बाद विकास के चचेरे भाई अमर दुबे को आठ जुलाई को हमीरपुर के मौदहा तथा इसी दिन बउआ दुबे को इटावा में मुठभेड़ में मारा गया था। नौ जुलाई को प्रभात मिश्र को सचेंडी हाईवे के पास एनकाउंटर में ढेर कर दिया। नौ जुलाई को विकास को उज्जैन में पकड़ने के बाद कानपुर लाते वक्त गाड़ी पलट गई। जिसके बाद विकास ने भागने की कोशिश की और पुलिस की गोली का शिकार हो गया।
न्यायिक आयोग की जांच में ये पाए गए दोषी-
- -पूर्व डीआईजी अनंत देव
- - तत्कालीन सीओ एलआईयू सूक्ष्म प्रकाश
- - पूर्व एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह
- - पूर्व सीओ कैंट आरके चतुर्वेदी
- - तत्कालीन एसएसपी दिनेश कुमार पी
- - तत्कालीन एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार
- - तत्कालीन नोडल पासपोर्ट अधिकारी अमित कुमार
- - पूर्व सीओ बिल्हौर नंदलाल सिंह
- - शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा
बिकरू समेत इस कांड में शामिल जिन स्थानों का स्थलीय निरीक्षण नहीं हो पाया है। वहां का निरीक्षण कराकर जल्द ही रिपोर्ट शामिल की जाएगी।
क्या होता है स्थलीय निरीक्षण
कानून के जानकारों का मानना है कि हर बड़ी वारदात में स्थलीय निरीक्षण कराया जाता है। जिसमें मौके से वहां की स्वाइल और ब्लड क्लॉट्स को केमिकल लगाकर रखा जाता है। अगर पीडि़त पक्ष इस मामले में प्रशासन की जांच का विरोध करता है तो उसे सजा दिलाने के लिए ये निरीक्षण काम आता है। बिकरू कांड में ब्लड क्लॉट्स तो फोरेंसिक टीम ने कलेक्ट किए थे लेनिक स्वाइल पार्टिकल नहीं लिए थे। ऐसे में गठित हुई एसआईटी के सामने जनता के गवाह तलाशने की परेशानी आ सकती है। स्थलीय निरीक्षण के लिए गठित की टीम अब एनकाउंटर वाले सभी स्थानों पर जाएगी और रिपोर्ट तैयार करेगी।


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