( वर्तिका श्रीवास्तव )
मोरिंगा या सहजन मानव जाति के इतिहास में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले पौधों में से एक है। मोरिंगा की खासियत यही है कि इसे पानी की कमी होने की स्थिति में भी उगाया जा सकता है। ये कई तरह के जरूरी पोषक तत्वों, खनिज पदार्थों और विटामिंस का बेहतरीन स्रोत है। यहां तक कि दुनियाभर में इसे सुपरफूड कहा जाता है। अध्ययनों में सामने आया है कि सहजन सेहत के लिए बहुत लाभकारी होती है और इस वजह से अब ज्यादा से ज्यादा लोग इसका उपयोग करने लगे हैं।
खाद्य पदार्थ के अलावा मोरिंगा का इस्तेमाल ईंधन, पशु चारा, उर्वरक और सौंदर्य प्रसाधन एवं इत्र में भी किया जाता है। मोरिंगा के पौधे का इस्तेमाल कई वर्षों से किया जा रहा है। 150 ई.पू. भी मनुष्य द्वारा मोरिंगा के पौधे का प्रयोग किया जाता था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर की सेना को हराने के लिए प्रसिद्ध मौर्य सेना प्रमुख सप्लीमेंट के रूप में मोरिंगा का सेवन किया करती थी। आयुर्वेद के अनुसार मोरिंगा में लगभग 300 बीमारियों का इलाज करने की क्षमता है। मोरिंगा की पत्तियों में ही बेहतरीन औषधीय गुण मौजूद होते हैं। सेहतवर्द्धक फायदों के कारण मोरिंगा को चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है।
और पढ़े - सहजन (मोरिंगा) के फायदे और नुकसान
सहजन की फली का अचार बहुत स्वादिष्ट बनता है। सहजन की फली जब एकदम नरम होती है, उनके अन्दर बीज नहीं बन पाते एकदम कच्ची नरम मुलायम सहजन की फली से ही अचार बनता है।
मोरिंगा या सहजन का अचार बनाने की आवश्यक सामग्री-
| क्रम संख्या | नाम आवश्यक सामग्री | सामग्री मात्रा |
|---|---|---|
| 01 | सहजन की फली | 300 ग्राम |
| 02 | नमक | 1 छोटी चम्मच |
| 03 | सरसों का तेल | 1/3 कप |
| 04 | हींग | 2-3 पिंच |
| 05 | हल्दी पाउडर | 1 छोटी चम्मच |
| 06 | सोंफ पाउडर | 1 छोटी चम्मच |
| 07 | लाल मिर्च पाउडर | 1/4 छोटी चम्मच |
| 08 | काली मिर्च पाउडर | 1/4 छोटी चम्मच |
| 09 | पीली सरसों दरदरी पिसी हुई | 2 टेबल स्पून |
| 10 | सिरका | 1 टेबल स्पून |
मोरिंगा या सहजन का अचार बनाने की विधि -
अचार बनाने के लिये, सबसे पहले सहजन की फलियों को धोकर सुखाकर, 3/4 -1 इंच की लम्बाई में काट कर, एक छोटी चम्मच नमक मिला कर किसी डिब्बे में बन्द करके 3 दिन के लिये रख दीजिये। रोजाना दिन में एक बार चम्मच से फलियों को चला कर ऊपर नीचे कर दीजिये।
3 दिन बाद नमक में रखी हुई सहजन की फली का अचार बनाइये।
तेल को पैन में डाल कर, अच्छा गरम कीजिये, गैस बन्द कीजिये और पैन को गैस से नीचे उतार कर रख लीजिये, तेल को थोड़ा ठंडा होने पर, हींग , हल्दी पाउडर, सोंफ पाउडर डालकर, मिक्स कर दीजिये, सहजन की फली डाल दीजिये, नमक लाल मिर्च पाउडर, सरसों पाउडर और काली मिर्च पाउडर डालकर, सारी चीजों को अच्छी तरह मिक्स होने तक मिला दीजिये। अचार में सिरका भी डालकर मिला दीजिये।
सहजन की फली का अचार तैयार है। तैयार अचार को अच्छी तरह ठंडा होने के बाद कांच या प्लास्टिक कन्टेनर में भर कर रख लीजिये। 3 दिन में अचार खट्टा और बहुत स्वादिष्ट हो जाता है, सहजन की फली के अन्दर सारे मसाले जज्ब हो जाते हैं।
अचार को रोजाना दिन में एक बार चम्मच से ऊपर नीचे करते रहिये।
सहजन की फली के अचार को चपाती या परांठे के साथ परोसिये और खाइये।
सहजन की फली के अचार को 1 -2 माह तक रख कर खाया जा सकता है। अचार को और अधिक चलाने के लिये अचार में इतना सरसों का तेल गरम करके, ठंडा करके डाल दें कि अचार तेल में डूबा रहें।
आवश्यक सुझाव:-
- अचार को जिस कन्टेनर में भर रहे हैं उसे उबलते पानी से धोइये और धूप में सुखा लीजिये।
- अचार खाने के लिये जब भी निकालें सूखी और साफ चम्मच का यूज कीजिये, अचार निकालते समय, हाथ भी सूखे होने चाहिये। अचार निकालने के बाद अचार को उसी चम्मच से ऊपर नीचे कर दीजिये, अचार की सेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।
यदि आप मोरिंगा या सहजन का अचार बनाने के लिए दिए गये तकनीकों को सीखते हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करें, या दूसरों की मदद करने के लिए इस लेख को साझा करें।


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