महिला खतना को अंग्रेजी में फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन कहते हैं. इसमें योनि के क्लिटोरिस के एक हिस्से को रेजर या ब्लेड से काट दिया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह खतना चार तरह का हो सकता है- क्लिटोरिस के पूरे हिस्से को काट देना, कुछ हिस्सा काटना, योनि की सिलाई या छेदना. इस दर्दनाक और अमानवीय प्रथा से कई बार यौन संक्रमण संबंधी बीमारियां हो सकती है. मानसिक पीड़ा का असर सारी उम्र रहता ही है।
लड़कियों का खतना किशोरावस्था से पहले यानी छह-सात साल की छोटी उम्र में ही करा दिया जाता है. इसके कई तरीके हैं. जैसे क्लिटरिस के बाहरी हिस्से में कट लगाना, या इसके बाहरी हिस्से की त्वचा निकाल देना. खतना से पहले एनीस्थीसिया भी नहीं दिया जाता. बच्चियां पूरे होशोहवास में रहती हैं और दर्द से चीखती हैं. पारंपरिक तौर पर इसके लिए ब्लेड या चाकू का इस्तेमाल करते हैं और खतना के बाद हल्दी, गर्म पानी और छोटे-मोटे मरहम लगाकर दर्द कम करने की कोशिश की जाती है.
बोहरा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली इंसिया दरीवाला के मुताबिक 'क्लिटरिस' को बोहरा समाज में 'हराम की बोटी ' कहा जाता है. बोहरा मुस्लिम मानते हैं कि इसकी मौजूदगी से लड़की की यौन इच्छा बढ़ती है.
इंसिया दरीवाला ने कहा, "माना जाता है कि क्लिटरिस हटा देने से लड़की की यौन इच्छा कम हो जाएगी और वो शादी से पहले यौन संबंध नहीं बनाएगी."
इस प्रथा का चलन भारत मे बोहरा समुदाय में है इसे धार्मिक मान्यता देकर महिलाओं का शोषण किया जाता है जबकि क़ुरान इसकी इजाजत नहीं देता।
खतना- को मानने वाले समुदायों के अनुसार महिलाओं का खतना करने से उनमें सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, इससे वो अपने पति के प्रति ज्यादा वफादार रहती हैं.
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने दाउदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना को भारतीय दंड संहिता और बाल यौन अपराध सुरक्षा कानून (पोक्सो एक्ट) के तहत अपराध बताया. 15 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ पंरपरा के नाम पर किए जाने वाले इस काम की कठोर निंदा की. साथ ही बताया गया कि इस परंपरा पर 42 देशों ने रोक लगा दी है, जिनमें 27 अफ्रीकी देश हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता बताई है. लेकिन बावजूद इसके छोटी बच्चियों के साथ कि जाने वाली इस प्रक्रिया के मामले कम नहीं हो रहे. आज भी कई जगहों पर महिलाओं का खतना किया जाता है और तर्क दिया जाता है कि ऐसा करने से महिलाओं में सेक्स की इच्छा खत्म हो जाती है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई तेज नहीं की गई तो साल 2030 तक छह करोड़ 80 लाख लड़कियों का खतना किया जा सकता है।
कुछ भी हो जाये लेकिन धार्मिक ढेकेदार इसके खिलाफ कभी फतवा नहीं देते ,न ही इस पर मुस्लिम समाज को सचेत करते हैं, बल्कि परंपरा के नाम पर इस कुप्रथा को बढ़ाने में लगे हैं, अब तक न जाने कितनी ही लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो गई, ये फतवा जारी कर भी दें तो उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला, कुछ कमी जरूर आ सकती है, मेरी समझ में नहीं आता इस्लाम के ठेकेदार बने बैठे ये मौलवी मौलाना आखिर इस्लाम को ले कहाँ जा रहे हैं?
स्रोत तथा फुटनोट-इस्लाम धर्म में महिलाओं का खतना क्या होता है? के लिए शबनम खानम (Shabnam Khanam) का जवाब
फुटनोट-3- महिला जननांग कर्तन - विकिपीडिया
फुटनोट-5 - खतना -जी न्यूज़
फुटनोट-6 - खतने के बाद लड़कियाँ शादी तक पवित्र रहेंगी
चित्र स्रोत- विकिपीडिया, गूगल इमेज, बीबीसी हिंदी






