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कितना महत्वपूर्ण है सूर्य को जल अर्पित करना

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भारतीय संस्कृति और हिंदू  धर्म में सूर्य को भगवान का दर्जा दिया गया है। ग्रह विज्ञान के हिसाब से भी सूर्य को सभी ग्रहों से श्रेष्ठ माना गया है। सूर्य उर्जा का स्रोत है सारे ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं और इसकी रोशनी प्राप्त करते हैं। हिंदु सनातन धर्म नें भी इसके महत्व को समझा है और इसिलिए सबसे श्रेष्ठ मानते हुए सूर्य देव की पूजा की जाती है और इसको जल चढाया जाता है। सूर्य को जल चढाने के पीछे धार्मिक कारणो के साथ साथ कुछ वैज्ञानिक महत्व भी हैं ।

भगवान सूर्य के उदय होते ही संपूर्ण जगत का अंधकार नष्ट हो जाता है और चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश फैल जाता है। सृष्टि के महत्वपूर्ण आधार सूर्य देवता हैं। वैदिक काल से सूर्योपासना अनवरत चली आ रही है। नियमित सूर्य को अर्घ्य देने से हमारी नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। बल, तेज, पराक्रम, यश एवं उत्साह बढ़ता है। सूर्य की किरणों को आत्मसात करने से शरीर और मन स्फूर्तिवान होता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं सूर्य को जल/अर्घ्य देने की खास बातें...
  
सूर्य देवता को अर्घ्य देने की आसान विधि -
  • सर्वप्रथम प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व शुद्ध होकर स्नान करें। 
  • तत्पश्चात उदित होते सूर्य के समक्ष कुश का आसन लगाएं। 
  • आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें। 
  • उसी जल में मिश्री भी मिलाएं। कहा जाता है कि सूर्य को मीठा जल चढ़ाने से जन्मकुंडली के दूषित मंगल का उपचार होता है।
  • मंगल शुभ हो तब उसकी शुभता में वृद्दि होती है। 
  • जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्यागमन से पहले नारंगी किरणें प्रस्फूटित होती दिखाई दें, आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़ कर इस तरह जल चढ़ाएं  कि सूर्य जल चढ़ाती धार से दिखाई दें।
  • प्रात:काल का सूर्य कोमल होता है उसे सीधे देखने से आंखों की ज्योति बढ़ती है। 
  • सूर्य को जल धीमे-धीमे इस तरह चढ़ाएं कि जलधारा आसन पर आ गिरे ना कि जमीन पर। 
  • जमीन पर जलधारा गिरने से जल में समाहित सूर्य-ऊर्जा धरती में चली जाएगी और सूर्य अर्घ्य का संपूर्ण लाभ आप नहीं पा सकेंगे। 

अर्घ्य देते समय निम्न मंत्र का पाठ करें -

'ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। 
अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।' (11 बार) 

' ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। 
मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा: ।।' (3 बार) 
  • तत्पश्चात सीधे हाथ की अंजूरी में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कें। 
  • अपने स्थान पर ही तीन बार घुम कर परिक्रमा करें। 
  • आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें।

सूर्य अर्घ्य का धार्मिक दृष्टिकोण
धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य देव को आत्मा का कारक माना गया है। इसलिए प्रात:काल सूर्य देव के दर्शन से मन को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही ये शरीर में स्फूर्ति भी लाता है। इसके साथ साथ सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत है और प्रकाश को हिंदु धर्म में सकारात्मक भावों का प्रतीक माना गया है। दुख, तकलीफ और परेशानियों को रात या अंधेरे से जोड़ा गया है। जब सूर्य का उदय होता है तो अंधकार गायब होने लगता है, मतलब सूर्य के आने से सभी नकारात्मक उर्जाएं नष्ट हो जाती हैं यही कारण है की सूर्य को सर्वश्रेष्ठ ईश्वर का दर्जा दिया गया है।

इसके अलावा जिन लोगो की कुंडली मे सूर्य कमजोर होता है या जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती है या फिर जो निराशावादी होते है और जिन्हे घर परिवार में मान सम्मान की अभिलाषा होती है उनके लिए सूर्य को जल चढाना बड़ा ही महत्वपूर्ण माना गया है।

सूर्य की किरणो में सात रगों का समावेश होता है जो रंग हम कृत्रिम रोशनी में नही देख पाते या समझ पाते वो सूर्य की रोशनी में सपष्ट दिखाई देते हैं। सूर्य की रोशनी के कारण ही हम रंगों की सही पहचान करने में सक्षम होते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि सुबह के समय जब कोई व्यक्ति सूर्य को जल चढ़ाता है तो सूर्य से निकलने वाली किरणें उसको स्वास्थ्य लाभ देती हैं।  सुबह के समय सूरज की जो किरणें निकलती हैं वे शरीर में होने वाले रंगों के असंतुलन को सही करती हैं। सूरज की किरणों में सात रंगों का समावेश होता है। यह रंग 'रंगो के विज्ञान' पर काम करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सुबह के समय सूर्य को जल चढ़ाने समय इन किरणों के प्रभाव से ये रंग संतुलित हो जाते हैं और साथ ही साथ शरीर में प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है।

सूर्य को जल चढाते वक्त हम स्नानादि करते हैं, और इस मुद्रा में हमारा पूरा शरीर सूर्य की किरणों के सामने होता है जिससे हमारे शरीर को विटामिन डी मिलता है जो शरीर को उर्जा प्रदान करता है और साथ ही हमारी आंखो की रोशनी भी बढाता है।

सूर्य को जल चढाने के लिए सुबह सुर्योदय से पहले उठ कर स्नानादि करके तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए और इस विधि के दौरान जल की धारा में से उगते सुरज को देखना चाहिए इससे धातु और सूर्य कि किरणो का असर आपकी दृष्टी के साथ साथ आपके मन पर भी पडेगा और आपको सकारात्मक उर्जा का आभास होता।सूर्य को जल अर्पित करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की अर्ध्य किया हुआ जल बेकार ना जाए। वो जल किसी वनस्पति में गिरे तो आपको सौभाग्य की प्राप्ति होगी।इसके साथ साथ जल चढाते वक्त सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: का जाप करते रहना चाहिए।सूर्य को जल चढाने का सही वक्त सुर्योदय होता है।

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