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महिलाओं में अधिक अवसाद के कारण

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डिप्रेशन या अवसाद किसी भी व्यक्ति के जीवन में होना संभव है बच्चे, बूढ़े, युवा, महिला या फिर पुरुष। न्यूरोट्रांसमीटर्स ऐसे रसायन होते हैं जो दिमाग में पाए जाते हैं और दिमाग के कई हिस्सों में फैले रहते हैं। डिप्रेशन के कारण तो कई होते हैं और उन्हें समझना भी जरुरी होता है और इनका इलाज करवाना भी जरुरी होता है। आज के समय में महिलाएँ और बच्चे सबसे ज्यादा अवसाद में देखे जाते हैं। इसके भी कई कारण हो सकते हैं। ये कारण समझना बहुत ही जरुरी होते हैं। यहाँ हम बात करने जा रहे हैं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिप्रेशन क्यों अधिक पाया जाता है।

डिप्रेशन के कारण बहुत से हो सकते हैं आज के समय में बढ़ते हुए तनाव के कारण व्यक्ति का मूड पल-पल में बदलने लगता है। और इसी बदलते हुए मूड की वजह से व्यक्ति के व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है। और कभी-कभी व्यक्ति इसकी वजह से चिड़चिड़ा होने लगता है। ये ही वजह हैं जो तनाव का कारण बनती है पुरुषों से ज्यादा महिलाएँ संवेदनशील होती हैं और उन्हें छोटी-छोटी बातें भी प्रभावित करती हैं। और इसी अत्यधिक सोचने की वजह से महिलाएँ अधिक डिप्रेशन का शिकार होती हैं। किसी भी आयु के व्यक्ति तनाव या अवसाद का शिकार हो सकते हैं।

कई बार हम देखते हैं कि व्यक्ति आत्महत्या करने की बार-बार कोशिश करता है तो ऐसा भी डिप्रेशन की वजह से ही होता है ऐसा वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के एक शोध में बताया गया है। और भारत में इसकी तादाद सबसे ज्यादा है। अब सरकार ने भी आत्महत्या की कोशिश करने वाले व्यक्तियों को सजा से बाहर कर दिया है और ऐसे व्यक्तियों को इलाज के लिए भेजा जाता है। सरकार ने भी ऐसे व्यक्तियों के लिए इलाज को प्राथमिकता दी है जिससे ये व्यक्ति तनाव या अवसाद से मुक्त हो जाये। और यह उपचार मुफ्त किया जाता है। लेकिन कुछ ऐसे कानून हैं जिनका उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा सुनाई जा सकती है। अब बात आती है कि महिलाएँ किन कारणों की वजह से डिप्रेशन का शिकार हो सकती है या होती हैं।

महिलाओं में डिप्रेशन के कारण:
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वैसे तो कुछ सामान्य कारण है जो महिलाओं में और पुरुषों में अवसाद पैदा करते हैं। फिर भी कुछ ऐसे कारण हैं जो पुरुषों की तुलना में अधिकतर महिलाओं में डिप्रेशन पैदा करते हैं।

अनुवांशिक डिप्रेशन:
कई बार डिप्रेशन अनुवांशिक होता है। तो अगर आपके परिवार में किसी को भी डिप्रेशन है तो आप भी डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। और यह सामान्य कारण है जो महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकता है।

मस्तिष्क के रसायन की कमी:
इसे हम अंग्रेजी में हार्मोन्स डिसबैलेंस भी कह सकते हैं। जब मस्तिष्क में पाए जाने वाले रसायन की कमी हो जाती है या फिर वो रसायन ठीक से मस्तिष्क में पूरी तरह वितरित नहीं हो पाते। तब व्यक्ति तनाव महसूस करने लगता है और बाद में यही तनाव डिप्रेशन का रूप ले लेता है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है।

घटना:
कोई ऐसी घटना जिसमें कोई करीबी व्यक्ति दूर चला गया हो जैसे किसी की मृत्यु हो जाना, कोई रिश्ता टूट जाना इत्यादि। महिलाएँ बहुत ही ज्यादा संवेदनशील होती हैं और इसी वजह से वे इस प्रकार की घटनाओं को सहन नहीं कर पाती और तनाव में आ जाती है और यह तनाव डिप्रेशन में परिवर्तित हो जाता है।

गर्भावस्था में:
जब महिलाएँ गर्भावस्था में होती हैं तब कई बार वे अत्यधिक सोचने लगती हैं और छोटी-छोटी बातों में चिंतित हो जाती हैं। कई बार वे तनाव का शिकार हो जाती है और वे धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होने लगती हैं। गर्भावस्था एक बहुत नाजुक स्थिति होती है जिसमें महिलाओं का ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है।

स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ:
कई बार ऐसा होता है कि महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियाँ होती हैं जैसे कि मासिक धर्म से सम्बन्धी समस्या या फिर प्रजनन सम्बन्धी समस्याएँ। इनके कारण महिलाएँ ज्यादा परेशान रहती है। ऐसे में महिलाओं के हार्मोन्स परिवर्तित होते हैं और इसी वजह से वे तनाव में आ जाती हैं। और कई बार डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं।

वैवाहिक रिश्तों में परेशानी:
कई बार रिश्तों में आ रही खटास तनाव का कारण बन जाती हैं। अगर वैवाहिक जीवन में और रिश्तों में कोई परेशानी आती हैं तो महिलाएँ परेशान हो जाती हैं और घबराने लगती हैं। निरंतर ऐसा होने पर तनाव बढ़ता जाता है और डिप्रेशन होने लगता है। यह परेशानी देखने में छोटी लगती है लेकिन यह बड़ी बीमारी का कारण होती है।

किसी प्रकार का शोषण:
आज कल के समय में इस प्रकार की घटनाएँ बहुत सामने आ रही हैं स्त्री हो या पुरुष शोषण किसी का भी हो सकता है। बचपन में हुए शोषण को कई बार महिलाएँ भूल नहीं पाती। और अगर उनके साथ ऐसा कुछ हुआ है तो वे अचानक चुप रहने लगती हैं। यह भी डिप्रेशन का एक कारण हो सकता है।

महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण:
डिप्रेशन के लक्षण कई प्रकार के होते हैं महिलाओं में अगर ये कुछ लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो हो सकता है महिलाएँ डिप्रेशन की शिकार हों। इसलिए इन बातों पर ध्यान दें और आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें नज़रअंदाज न करें।

  • हमेशा उदास या चिंता में डूबे रहना।
  • हमेशा स्वयं को बेकार महसूस करना।
  • निरंतर आत्महत्या का प्रयास करना।
  • नींद बहुत अधिक आना या बहुत कम आना।
  • अचानक व्यवहार में बदलाब आना या फिर हमेशा चिड़चिड़े होना।
  • किसी भी कार्य में मन न लगना।
  • बात-बात पर गुस्सा होना और अचानक रोने लगना।
  • हमेशा नकारत्मक सोचना और नकारात्मक बातें करना।
  • जीवन में खालीपन लगना और किसी बात को हमेशा सोचते रहना।
  • किसी एक जगह पर ध्यान केंद्रित न होना।
  • निरंतर सिरदर्द बने रहना।
  • वजन अचानक कम होना या ज्यादा हो जाना।
  • पाचन सम्बन्धी बीमारी होना।
  • अधिक थकान लगना और चिंता होना।

ये सभी लक्षण डिप्रेशन के होते हैं इसलिए अगर आप डिप्रेशन का शिकार हैं तो आपके अंदर ये लक्षण दिखाई देंगे। महिलाओं में ये लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं। महिलाओं में डिप्रेशन के कई प्रकार होते हैं।

डिप्रेशन के प्रकार-
माइल्ड डिप्रेशन:
माइल्ड डिप्रेशन ज्यादा खतरनाक स्थिति नहीं होती इसमें व्यक्ति अचानक रोने या भावुक होने लगता है। यह अधिकतर देखी जाने वाली स्थिति है और जब व्यक्ति शुरूआती तनाव में होता है तब माइल्ड डिप्रेशन देखने के लिए मिलता है।

मॉडरेट डिप्रेशन:
अगर डिप्रेशन दो हफ़्तों से ज्यादा बना हुआ है और तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा, तो इसे मॉडरेट डिप्रेशन कहा जा सकता है। मॉडरेट डिप्रेशन की स्थिति में भूख कम लगती है। वैसे कांउसलिंग करके इसका इलाज करना संभव है।

मेजर डिप्रेशन:
यह डिप्रेशन महिलाओं में अत्यधिक देखा जाता है। जब महिलाएँ भावात्मक रूप से टूट जाती हैं तब मेजर डिप्रेशन सामने आता है। इस डिप्रेशन से जो व्यक्ति गुजरता है उसकी भूख में कमी आने लगती है। महिलाएँ ऐसी स्थिति में आत्महत्या जैसे कदम उठाने लगती हैं। इसका इलाज जल्दी करना जरुरी होता है।

पोस्ट पार्टम डिप्रेशन:
यह एक विशेष रूप का अवसाद होता है। जब महिलाएँ बच्चे को जन्म देती हैं उसके कुछ दिनों बाद ही यह अवसाद शुरू हो जाता है। इसे “बेबी ब्लूज” के नाम से भी जाना जाता है। यह अवसाद गर्भवती महिलाओं में भी हो सकता है। इस समय अगर महिलाएँ थोड़ा बहुत प्राणायाम और मैडिटेशन करें तो इसे दूर करना आसान होता है।

माहवारी:
महिलाओं में मासिक माहवारी के दौरान महिलाओं में तनाव पैदा हो जाता है। इस दौरान महिलाओं का मूड पल-पल में बदलने लगता है। इसी वजह से महिलाएँ डिप्रेशन का शिकार भी हो जाती है।

डिप्रेशन के उपचार:
अगर कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो गया है और डिप्रेशन हद से ज्यादा बढ़ गया है तो इस स्थिति में डिप्रेशन का उपचार बहुत ही जरुरी है।

एंटी डिप्रेशन की दवाएं:
जब डिप्रेशन बहुत ही ज्यादा बड़ जाता है तो उस स्थिति में एक ही इलाज होता है एंटी डिप्रेशन की दवाएं। लेकिन अगर कोई भी व्यक्ति हद से ज्यादा एंटी डिप्रेशन की दवाएं लेता है तो यह भी कई बिमारियों का कारण बन सकती हैं। इसलिए कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है। दवाएं भी उतनी ही लें जिनसे कोई अन्य बीमारी जन्म न ले।

एक्सपर्ट से काउन्सलिंग:
अगर कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन में है तो उसे किसी एक्सपर्ट कॉउंसलर की आवश्यकता जरूर होती है जो डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति की बात को सुन सके उसे समझ सके और उसे दोस्त बनकर समझा सके। इसलिए एक्सपर्ट कॉउंसलिंग की यहाँ बहुत आवश्यकता होती है।

अपनी भावनाओं को मन में नहीं रखें:
कभी-कभी किन्हीं कारणों की वजह से व्यक्ति अपने मन की बात जाहिर नहीं कर पाता या कर पाती और अधिकतर महिलाओं के साथ ऐसा होता है। और इसी वजह से महिलाएँ तनाव का शिकार होने लगती हैं। इसलिए वे जो भी बात है उसे मन में न रखें। जो भी है वह बात कहें और मन में किसी भी बात को न रखें।

व्यायाम करें:
व्यायाम से शरीर को और दिमाग को बहुत ही फायदा होता है। इससे मानसिक रूप से शांति मिलती है और शरीर भी स्वस्थ्य रहता है। इसलिए व्यायाम करना बहुत ही फायदेमंद होता है। व्यायाम में योग, प्राणायाम और मैडिटेशन को नियमित करना चाहिए। इससे एकग्रता बढ़ती है। डिप्रेशन एवं तनाव से बचने का यह बहुत ही अच्छा उपचार है।

नींद पूरी लें:
व्यक्ति की नींद पूरी होना बहुत ही जरुरी हैं इसलिए नींद से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। क्योंकि 8 घंटे की नींद किसी भी व्यक्ति के लिए जरुरी होती है। इसलिए नींद का सम्बन्ध डिप्रेशन से भी होता है। तो अगर आप डिप्रेशन का उपचार करना चाहते हैं तो पूरी नींद लें इससे आप डिप्रेशन से दूर रह पाएंगे।

सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनें:
सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनना बहुत जरुरी होता है। अगर व्यक्ति किसी के साथ मिलता जुलता नहीं है और दोस्तों के साथ भी समय नहीं बिताता, तो वह तनाव में रहने लगता है। यह स्थिति घर में रहने वाली महिलाओं के साथ बहुत अधिक होती है इसलिए वे अधिकतर डिप्रेशन का शिकार होती हैं। डिप्रेशन को दूर करने के लिए दोस्तों के साथ समय बिताएं और कई प्रकार से सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनें।

संतुलित आहार लें:
शरीर को संतुलित आहार की बहुत ही आवश्यकता होती है इसलिए हमेशा संतुलित आहार लें इससे भी डिप्रेशन को दूर रखना संभव है। यह भी एक सरल और घरेलु उपचार है जिससे तनाव को और डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है। डिप्रेशन का उपचार कई बार व्यक्ति के हाथ में होता है लेकिन व्यक्ति ध्यान नहीं देता जैसे योग, मैडिटेशन इत्यादि।

कई बार हम डिप्रेशन को नकार देते हैं लेकिन ये गलत है। अगर हम डिप्रेशन का शिकार हैं और उसके लक्षण हमें स्वयं में नज़र आ रहे हैं तो उसे नकारें नहीं बल्कि उसका उपचार करें। डिप्रेशन को जानना, समझना और इसका उपचार करना बहुत ही जरुरी होता है। तभी डिप्रेशन को दूर किया जाना संभव है। लेकिन अगर महिलाओं की बात की जाये तो वे डिप्रेशन के लक्षण को नकार देती हैं और बाद में उन्हें इसके नकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह डिप्रेशन में है। लेकिन उसके आस पास के सभी लोगों को यह समझ आ जाता है कि वह व्यक्ति डिप्रेशन में है।  इसलिए अगर आपके आस पास भी आपको किसी व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी सहायता करें। डिप्रेशन वाले व्यक्ति को ख़ुशी की बहुत जरुरत होती है। इसलिए जितना हो सके तो तनाव व डिप्रेशन वाले व्यक्ति को हमेशा खुश रखना चाहिए। ख़ुशी एक ऐसा अहसास होता है जिससे व्यक्ति अपने दुःख भूल जाता है। जीवन में हमेशा छोटी-बड़ी घटनाएँ होती रहती हैं कुछ घटनाएँ हम भूल जाते हैं। और कुछ घटनाएँ हम भूलने का प्रयास करते हैं लेकिन भूल नहीं पाते। महिलाएँ इस मामले में बहुत ही संवेदनशील होते हैं। और महिलाएँ कई बार इन घटनाओं के कारण तनाव में आ जाती हैं और डिप्रेशन का शिकार होने लगती हैं।

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