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जाने,क्यों मनाते हैं विश्व जनसंख्या दिवस, कब हुई इसकी शुरुआत

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हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है जो वैश्विक जनसंख्या मुद्दों के बारे में जागरूकता की मांग करता है। विश्व जनसंख्या दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है। आज हम आपको विश्व जनसंख्या दिवस के बारे में बताएंगे कि, विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है? विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य। विश्व जनसंख्या दिवस दुनिया भर में जनसंख्या के मुद्दों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह पहली बार वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र के गवर्निंग काउंसिल द्वारा शुरू किया गया था। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि, विश्व जनसंख्या दिवस क्या है या कब है, विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाते हैं, विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य क्या है? 

विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है?
इस दिन का मुख्य उद्देश्य समुदाय के लोगों की प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है क्योंकि यह दुनिया भर में बीमार महिलाओं और यहां तक ​​कि गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से है।  यह दिन परिवार नियोजन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए सामूहिक जनसंख्या की सहायता करता हैं।

जैसे:- प्रजनन स्वास्थ्य, किशोर गर्भावस्था, बालिका शिक्षा, बाल विवाह, यौन संचरित संक्रमण, शिशु स्वास्थ्य और स्वास्थ्य का अधिकार आदि।

विश्व जनसंख्या दिवस समारोह
बढ़ती जनसंख्या के मुद्दों पर सहयोग करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों, सेमिनारों और कार्यक्रमों का आयोजन करके वैश्विक जनसंख्या दिवस विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इसमें सेमिनार, समूह चर्चा, भाषण, नारे और विभिन्न प्लेटफार्मों पर जानकारी के वितरण जैसी कई गतिविधियां शामिल हैं।

जनसंख्या भारत के लिए अहम चुनौती -
आंकड़ों की मानें तो केवल भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं, ये वो आंकड़ा है जो कि अस्पतालों में दर्ज है लेकिन भारत में अभी भी बहुत सारे बच्चे अस्पताल में पैदा नहीं होते हैं इसलिए उनका आंकड़ा कहीं पर मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत ने अपनी तेजी से बढ़ रही जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो 2030 तक वह विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा।

अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए शिक्षित करना....मकसद है... 
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  • युवाओं को उचित उपायों का उपयोग करके अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए शिक्षित करना। 
  • सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति लोगों को प्रेरित करना। 
  • कम उम्र और अधिक उम्र में होने वाली शादी के प्रभाव के बारे में समझाना।

जन्म के खतरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना -
  • प्रारंभिक जन्म के खतरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना। 
  • लोगों को गर्भधारण संबंधी बीमारियों के बारे में शिक्षित करना। कन्या भ्रूण हत्या से रोकना। 
  • हर जगह प्रजनन स्वास्थ्य सेवायें आसानी से पहुंच सकें।
भारत में आज सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या-
भारत में आज सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या है तथा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से भारत में जनसंख्या बढ़ी है। भारत में जनसंख्या के विस्फोटन को रोकने के लिए अगर अब अभी कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बना तो यह आने वाले दस सालों में देश की आबादी 200 करोड़ के पार होगी। इसलिए जरूरी है कि इस पर सख्त कानून बनाया जाए। आज हम सभी इस देश में समानता की बात करते हैं पर कुछ लोग अपने फायदे के लिए समानता की बात करते हैं। जब भी हम दो, हमारे दो के कानून लागू होने की बात करते हैं तो कुछ लोग इसका विरोध करते हैं। अब समय आ गया है उन लोगों को जवाब देने का।

देश की सबसे बड़ी और सबसे जुड़ी एक ज्वलंत समस्या जनसँख्या विस्फोट पर प्रभावी नियंत्रण और इसके स्थायी व दीर्घकालिक समाधान के लिए ‘राष्ट्र निर्माण संगठन” के द्वारा लंबे समय से सरकार से एक कठोर और प्रभावशाली जनसँख्या नियंत्रण कानून’ बनाने की मांग करता रहा है। इसके लिए पिछले साल  राष्ट्र निर्माण संस्था के नेतृत्व में कश्मीर से कन्याकुमारी से दिल्ली के बीच 20 हजार किलोमीटर की 70 दिवसीय अखिल भारतीय भारत बचाओ यात्रा भी निकाली गई थी तथा आम जनता को भी बढ़ती हुई आबादी से उत्पन होने वाली समस्याओं को लेकर जागरूक किया था।

भारत बचाओ यात्रा के बाद देशभर से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून की मांग के लिए आवाज तेज हुई है तथा ये मांग अब राष्ट्रव्यापी मांग बन चुकी है लेकिन अभी तक जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया है। मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में प्रवेश कर चुकी है, इसलिए अब जरूरी है कि देश में बढ़ती हुई जनसंख्या पर लगाम लगाया जाए तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए। इस बीच आज विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई के अवसर पर राष्ट्र निर्माण संस्था द्वारा देश हित में जनसँख्या नियंत्रण अध्यादेश लाने लाने का महाभियान शुरू किया है जो गत सप्ताह भर से जारी है...

विश्व जनसंख्या दिवस से संबंधित तथ्य
वर्ष 1000 में, विश्व की जनसंख्या केवल 400 मिलियन थी। 1750 में, 750 साल बाद, जनसंख्या 800 मिलियन थी और यह पहली बार 1804 में 1 बिलियन के निशान तक पहुंच गई। 1927 तक हमारे पास 2 बिलियन लोग थे और 1960 तक 3 बिलियन लेकिन केवल 40 साल में आबादी डबल हो गई और 2000 तक आबादी 6 बिलियन तक पहुंच गई। क्या वास्तव में हमारे पास दुनिया में इतने सारे लोग हैं? अगर दुनिया की पूरी आबादी एक जगह इकठ्ठा हो जाए तो कंधे से कंधा मिलाकर, पूरी दुनिया की आबादी 500 वर्ग मील (1,300 वर्ग किलोमीटर) में समा पाएगी। विकसित देशों और गरीब देशों के लोगों के बीच औसत जीवन प्रत्याशा का अंतर क्रमशः 55 वर्षों की तुलना में लगभग 20 वर्ष या 77 वर्ष है। दुनिया भर में लगभग 8 बिलियन लोग 10 से 24 साल की उम्र के बीच हैं जो युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है। जी हां, 30 साल से कम उम्र के कुल विश्व की आबादी का लगभग 52% हिस्सा हैं। यह अनुमान लगाया जाता है कि प्रत्येक सेकंड में 4.3 जन्म और 1.8 मौतें होती हैं, जो प्रति सेकंड 2.5 लोगों की शुद्ध जनसंख्या लाभ को बढ़ाती हैं। सबसे बड़ी आबादी वाले देश 1.38 बिलियन के साथ चीन हैं, भारत 1.32 बिलियन के साथ दूसरे स्थान पर है, और संयुक्त राज्य अमेरिका 324 मिलियन के साथ है। अधिक तेजी से जनसंख्या वृद्धि के कारण, कुछ वर्षों में भारत की आबादी चीन से ज्यादा होने की उम्मीद है। विश्व जनसँख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करना हैं। अगर आपको पता चल गया होगा कि, विश्व जनसंख्या दिवस क्या है? 

साल 2019 में जहां विश्‍व जनसंख्या दिवस की थीम फैमिली प्लानिंग : इम्पावरिंग पीपल, डिवेलपिंग नेशन्स रखी गई थी। वहीं इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस 2020 की थीम का विषय विशेष रूप से कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के समय में दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित रखी गई है।


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